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View Full Version : ब्रह्माण्ड



Badtameez
15-12-2011, 02:00 PM
मित्रों हम इस सूत्र में ब्रह्माण्ड से सम्बन्धित निम्नलिखित तथ्यों पर विचार करेंगे ।
.
1- अंतरिक्ष
2- तारे
3- पल्सर, ब्लैक होल, क्वासकर
4- मंदाकिनियां
5- सूर्य
6- सौर मंडल तथा उनके ग्रह ( पृथ्वी की विस्तार से चर्चा करेंगे )
7- छुद्र ग्रह
8- उल्का और उल्का पिंड
9- धूमकेतु

Chandrshekhar
15-12-2011, 02:03 PM
अच्छा विषय है मित्र , कुछ ज्ञान मिलेगा

kajal pandey
15-12-2011, 02:15 PM
सूत्र को गति दीजिये ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

Badtameez
15-12-2011, 02:24 PM
अच्छा विषय है मित्र , कुछ ज्ञान मिलेगा

धन्यवाद मित्र! यहाँ आने के लिए

Badtameez
15-12-2011, 02:27 PM
सूत्र को गति दीजिये ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

नमस्ते दीया जी।
अवश्य गति दूँगा, किन्तु रात्रि के पहर क्योंकि कुछ कारणों से इतना सारा अभी लिख नहीं पाऊँगा।

Raman46
15-12-2011, 03:23 PM
मित्रों हम इस सूत्र में ब्रह्माण्ड से सम्बन्धित निम्नलिखित तथ्यों पर विचार करेंगे ।
.
1- अंतरिक्ष
2- तारे
3- पल्सर, ब्लैक होल, क्वासकर
4- मंदाकिनियां
5- सूर्य
6- सौर मंडल तथा उनके ग्रह ( पृथ्वी की विशेष चर्चा करेंगे )
7- छुद्र ग्रह8- उल्का और उल्का पिंड
9- धूमकेतु



बहुत ही अच्छी विषय का चुनाव किया है कवि सौरभ जी / आगे बढिए हम आप के साथ हैं

Badtameez
15-12-2011, 03:41 PM
बहुत ही अच्छी विषय का चुनाव किया है कवि सौरभ जी / आगे बढिए हम आप के साथ हैं

बहुत ही अपार धन्यवाद जो आप आयें तथा अपने विचार प्रस्तुत कियें।
अब रात में मिलेंगें।

amol05
15-12-2011, 04:09 PM
मित्रों हम इस सूत्र में ब्रह्माण्ड से सम्बन्धित निम्नलिखित तथ्यों पर विचार करेंगे ।
.
1- अंतरिक्ष
2- तारे
3- पल्सर, ब्लैक होल, क्वासकर
4- मंदाकिनियां
5- सूर्य
6- सौर मंडल तथा उनके ग्रह ( पृथ्वी की विशेष चर्चा करेंगे )
7- छुद्र ग्रह8- उल्का और उल्का पिंड
9- धूमकेतु


इस सूत्र को देख कर महसूस हुआ की हमारे फोरम के तारे तो आप ही है

बहुत अच विषय लिया है कृपया गतिमान बनाये रखे ब्रह्माण्ड की तरह .................

Akash78
15-12-2011, 06:38 PM
ब्रम्हांड एक व्यापक एवं विस्तृत विषय है ! आशा है जानकारी भी रोचक होगी !

swami ji
15-12-2011, 06:56 PM
बहोत खूब दोस्त नए सूत्र की शुभ कामनाये हमारे बहोत कम का हे ये सूत्र रेपो स्वीकार करे ,,

Badtameez
15-12-2011, 07:48 PM
सभी मित्रों का बहुत बहुत धन्यवाद !इस सूत्र पर आने के लिए और अपने बहुमूल्य विचार रखने के लिए।

Badtameez
15-12-2011, 09:17 PM
मित्रों हम इस सूत्र में ब्रह्माण्ड से सम्बन्धित निम्नलिखित तथ्यों पर विचार करेंगे ।
.
1- अंतरिक्ष
2- तारे
3- पल्सर, ब्लैक होल, क्वासकर
4- मंदाकिनियां
5- सूर्य
6- सौर मंडल तथा उनके ग्रह ( पृथ्वी की विस्तार से चर्चा करेंगे )
7- छुद्र ग्रह
8- उल्का और उल्का पिंड
9- धूमकेतु


*** ... 1- अंतरिक्ष ( space ) ...***

.
अंतरिक्ष एक वायुरहित क्षेत्र है, जिसकी सीमाएँ सभी दिशाओं में अनन्त तक फैली हुई हैं। हम अंतरिक्ष में चाहे जिस भी दिशा
में निकल जायें, अनन्तकाल तक चलने के बाद भी अन्तिम सीमा तक नहीं पहुँच सकते हैं। अंतरिक्ष अंतहीन ऐसा क्षेत्र है जिसमें सौरमण्डल, असंख्य तारे,तारकीय धूल और मंदाकिनियां सभी विद्यमान हैं। सम्पूर्ण अंतरिक्ष में न तो हवा है और न ही बादल हैं। दिन हो या रात अंतरिक्ष में घनघोर अंधकार रहता है, बिल्कुल काला। अंतरिक्ष में प्राणी जगत के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। अंतरिक्ष में कोई प्राणी नहीं रहता है।
अंतरिक्ष कहाँ से शुरू होता है यह आज भी रहस्य बना हुआ है क्योंकि इस तथ्य की कोई जानकारी नहीं है। अंतरिक्ष तो हमें चारो ओर से घेरे हुए है। समझने के लिए हम इतना ही कह सकते हैं कि अंतरिक्ष वहां से शुरू होता है जहां पृथ्वी का वायुमण्डल समाप्त होता है।
आज के वैज्ञानिक तथा विद्वान शक्तिशाली रेडियो दूरबीनों, राकेटों, कृत्रिम उपग्रहों, अंतरिक्ष यानें और प्रोबों की सहायता से अंतरिक्ष के गूढ़ रहस्यों को जाननें में लगे हुए हैं। नये आविष्कारों से अंतरिक्ष सम्बन्धी कुछ नये तथ्य सामने आ भी रहें हैं।

Raman46
15-12-2011, 10:13 PM
सभी मित्रों का बहुत बहुत धन्यवाद !इस सूत्र पर आने के लिए और अपने बहुमूल्य विचार रखने के लिए।


अब आगे बढो भाई आगे ..............

Badtameez
16-12-2011, 01:50 PM
*** ... 1- अंतरिक्ष ( space ) ...***

.
अंतरिक्ष एक वायुरहित क्षेत्र है, जिसकी सीमाएँ सभी दिशाओं में अनन्त तक फैली हुई हैं। हम अंतरिक्ष में चाहे जिस भी दिशा
में निकल जायें, अनन्तकाल तक चलने के बाद भी अन्तिम सीमा तक नहीं पहुँच सकते हैं। अंतरिक्ष अंतहीन ऐसा क्षेत्र है जिसमें सौरमण्डल, असंख्य तारे,तारकीय धूल और मंदाकिनियां सभी विद्यमान हैं। सम्पूर्ण अंतरिक्ष में न तो हवा है और न ही बादल हैं। दिन हो या रात अंतरिक्ष में घनघोर अंधकार रहता है, बिल्कुल काला। अंतरिक्ष में प्राणी जगत के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। अंतरिक्ष में कोई प्राणी नहीं रहता है।
अंतरिक्ष कहाँ से शुरू होता है यह आज भी रहस्य बना हुआ है क्योंकि इस तथ्य की कोई जानकारी नहीं है। अंतरिक्ष तो हमें चारो ओर से घेरे हुए है। समझने के लिए हम इतना ही कह सकते हैं कि अंतरिक्ष वहां से शुरू होता है जहां पृथ्वी का वायुमण्डल समाप्त होता है।
आज के वैज्ञानिक तथा विद्वान शक्तिशाली रेडियो दूरबीनों, राकेटों, कृत्रिम उपग्रहों, अंतरिक्ष यानें और प्रोबों की सहायता से अंतरिक्ष के गूढ़ रहस्यों को जाननें में लगे हुए हैं। नये आविष्कारों से अंतरिक्ष सम्बन्धी कुछ नये तथ्य सामने आ भी रहें हैं।

*****----2. तारे ( stars ) ----*****
.
शाम होते ही धीरे-धीरे अंधकार छाने लगता है। जब हम आकाश में दृष्टि डालते हैं तो देखते हैं कि कई चमकीले बिन्दुओं की तरह तारे नजर आने लगते है। ये छोटे-छोटे इसलिए दिखते है क्योंकि ये हमसे बहुत ही अधिक दूरी पर स्थित होते हैं। सूर्य भी एक प्रकार का तारा ही है, किन्तु यह दूसरे तारों की तरह छोटा नहीं दिखता, क्योंकि यह अन्य तारों की अपेक्षा हमारे बहुत निकट है। यदि हम तारों के कुछ नजदीक पहुँच जाएं तो वे भी हमें सूर्य की भांति दिखाई देंगे।
तारे चमकती हुई गैस के विशाल पिण्ड हैं। इनमें से कुछ तो सूर्य से भी बङे हैं और चमकीले हैं, तथा दूसरे कुछ छोटे तथा धुंधले हैं। 'रीगल, नील-सफेद दानव' तारे का व्यास सूर्य से 80 गुना अधिक है।
तारे सफेद दिखाई देते हैं, किन्तु सभी तारे सफेद नहीं होते हैं, कुछ नारंगी, लाल या नीले रंग के भी होते हैं। अत्यधिक गर्म तारों का रंग नीला होता है और ठण्डे तारों का लाल। सूर्य पीला-सफेद तारा है यानी इसका तापमान औसत दर्जे का है। लेकिन ठंडे तारों का तापमान भी 1000 डिग्री सेल्सियस से कम नहीं होता, इसलिए कोई भी अंतरिक्ष यात्री कभी भी किसी तारे के आस-पास भी नहीं पहुँच सकता है।
किसी अंतरिक्ष यान को चन्द्रमा तक जाने के लिए तीन दिन का समय लगता है। सूर्य तक जाने में कई महीनें चाहिए। अंतरिक्ष यान को सबसे नजदीकी तारे के निकट पहुँचने में हजारों वर्ष लग सकते हैं।
इतनी दूरी को कि.मी. में मापना एक कठिन समस्या है। इसलिए वैज्ञानिक तारों की दूरी मापने के लिए प्रकाश वर्ष और पारसेक इकाइयों का प्रयोग करते हैं। प्रकाश वर्ष वह दूरी है जिसे प्रकाश तीन लाख किमी. प्रति सेकेण्ड की रफ्तार से चलकर एक वर्ष में तय करता है यानी 9.4607x1000000000000 किमी.। एक पारसेक (pc) 3.6 प्रकाशवर्ष के बराबर होता है यानी 30.857x1000000000000 किमी.।
चन्द्रमा से आने वाले प्रकाश को हम तक पहुँचने में लगभग 1.3 सेकंड का समय लगता है। सूर्य से चलने वाला प्रकाश हम तक 8 मिनट 18 सेकंड में पहुँचता है। लेकिन सूर्य के बाद सबसे नजदीकी तारे ' प्रोक्सिमा सेन्टोरी ' से आने वाले प्रकाश को हम तक पहुँचने में 4.2 प्रकाश वर्ष लगते हैं। हमारी मंदाकिनी में सबसे दूर के तारे की दूरी लगभग 63000 प्रकाश वर्ष ( 19.325 pc ) है।।

yogiraj_1984
16-12-2011, 03:34 PM
अच्छा सूत्र है मित्र रेपो ++++++++

Badtameez
16-12-2011, 03:38 PM
अच्छा सूत्र है मित्र रेपो ++++++++

बहुत बहुत धन्यवाद और हार्दिक स्वागत आपका।

Sameerchand
17-12-2011, 06:41 AM
काफी ज्ञानवर्धक विषय लेकर आये हैं मित्र सौरभ जी, इससे फोरम के सदस्यों को काफी लाभ पहुचेगा. और इस विषय पर आपने वर्गीकृत करके और अच्छा काम किया हैं.

मित्र हमारी सारी शुभकामनाये आपके साथ हैं. धन्यवाद........

Badtameez
17-12-2011, 06:56 AM
काफी ज्ञानवर्धक विषय लेकर आये हैं मित्र सौरभ जी, इससे फोरम के सदस्यों को काफी लाभ पहुचेगा. और इस विषय पर आपने वर्गीकृत करके और अच्छा काम किया हैं.

मित्र हमारी सारी शुभकामनाये आपके साथ हैं. धन्यवाद........

बहुत बहुत धन्यवाद और स्वागत समीर जी।

Raja44
18-12-2011, 04:08 AM
बहुत ही अच्छी विषय का चुनाव किया है कवि सौरभ जी / आगे बढिए हम आप के साथ हैं

सौरभ जी कवि भी हैँ जान कर अपार खुशी हुयी

Badtameez
18-12-2011, 05:03 AM
सौरभ जी कवि भी हैँ जान कर अपार खुशी हुयी

नमस्कार राज जी।स्वागत है आपका।

Badtameez
21-12-2011, 09:05 PM
........3-पल्सर, ब्लैक होल तथा क्वासर......
.
----------पल्सर (Pulsars) -----------
पल्सर, घूर्णन करते हुए ऐसे तारे है जिनसे नियमबद्ध रूप से विकिरण स्पन्द आते रहते है । पल्सर शब्द पल्सेटिंग रेडियों स्टार के लिए प्रयुक्त होता है ।
जब किसी बङे तारे में विस्फोट होता है तब उसका बाहरी भाग छिटककर नेबुला (nebula) का रूप धारण कर लेता है और क्रोड घटकर छोटा सघन तारा बन जाता है जिसे 'न्यूट्रान तारा कहते हैं' । इसमें न्यूट्रान बहुत पास-पास होते हैं तथा इनका घनत्व भी बहुत अधिक होता है । ये बहुत ही छोटे तथा धुंधले होते हैं । एक न्यूट्रान तारे का औसत व्यास 10 किमी. तक का होता है । ये न्यूट्रान तारे ही पल्सर कहलाते हैं ।
रेडियो दूरबीन पर पल्सर से आता किरणपुंज 'टिक' जैसी आवाज उत्पन्न करता है । तेजी से घूमते हुए ये तारे लाइट हाउसों की तरह हैं । साधारण पल्सरों के फ्लैश के बीच का अंतराल एक या आधा सेकंड होता है । अति तीव्रता से स्पन्दन करने वाला पल्सर NP-0532 है, जो 'क्रेब नेबुला' में स्थित है । यह एक सेकंड में तीस बार स्पन्दन करता है । सबसे पुराना और मंद गति से घूर्णन करने वाला पल्सर NP 0527 है जिसके स्पन्दों के बीच का अन्तराल 3.7 सेकंड है । सभी पल्सर 0.03 सेकंड से 4 सेकंड की अवधि में एक स्पन्द पैदा करते हैं ।
सामान्यत: पल्सरों को प्रकाशीय दूरबीन से नहीं देखा जा सकता है । पहला NP0532 क्रेब नेबुला में है और दूसरा PSR 0833-45 गम नेबुला में है । अब तक वैज्ञानिक 100 से अधिक पल्सरों का पता लगा चुके हैं ।

Krish13
21-12-2011, 09:14 PM
सुरेश जी ज्ञानवर्धक सूत्र बनाने के लिये धन्यवाद
बहुत अच्छा सूत्र है, आपकी मेहनत सराहनीय है
मेरी तरफ से अनेकोअनेक शुभकामनाएँ॥

Badtameez
21-12-2011, 09:17 PM
सुरेश जी ज्ञानवर्धक सूत्र बनाने के लिये धन्यवाद
बहुत अच्छा सूत्र है, आपकी मेहनत सराहनीय है
मेरी तरफ से अनेकोअनेक शुभकामनाएँ॥

आपका बहुत बहुत स्वागत करता हूँ कृष जी।

King_khan
24-12-2011, 10:50 AM
सुरेश जी
आपका सूत्र बहुत ही शानदार है
आप बिना चित्रों के ही यथा संभव जानकारी प्रदान करते रहें |




291188

Badtameez
24-12-2011, 10:54 AM
291188
सुरेश जी
आपका सूत्र बहुत ही शानदार है
आप बिना चित्रों के ही यथा संभव जानकारी प्रदान करते रहें |

क्या ये प्रविष्टि के नीचे नहीं हो सकता खान जी भाई।

happykhus
24-12-2011, 10:56 AM
ब्रह्माण्ड एक ऐसा रहस्य है जिसमे बारे मे कोई नहीं जान पाया
इसपर जितनी चर्चा की जाये कम है

Badtameez
24-12-2011, 10:58 AM
ब्रह्माण्ड एक ऐसा रहस्य है जिसमे बारे मे कोई नहीं जान पाया
इसपर जितनी चर्चा की जाये कम है

बहुत सही कहा हैपी जी। और जानकारी पूरी तरह सत्य हो इसकी भी कोई सुनिश्चितता नहीं है।

happykhus
24-12-2011, 11:08 AM
बहुत सही कहा हैपी जी। और जानकारी पूरी तरह सत्य हो इसकी भी कोई सुनिश्चितता नहीं है।

फिर भी आपका पर्यास सराहनीय है

Badtameez
24-12-2011, 11:12 AM
फिर भी आपका पर्यास सराहनीय है

आपका बहुत-बहुत धन्यवाद हैप्पी जी भाई,जो आप सूत्र पर आकर अपने अनमोल विचार रखें।

King_khan
24-12-2011, 11:13 AM
सुरेश भाई जी
ये कुछ चित्र आपके सूत्र विषय के अनुशार प्रस्तुत कर रहा हूँ |


केप्लर 22 की परिक्रमा करता केप्लर 22b(कल्पना आधारित चित्र)
291212
केप्लर 22 तथा केप्लर 22b प्रणाली की आंतरिक सौर मंडल से तुलना
291213
श्याम वीवर के समीप गैसीय बादल की कल्पना। सभी तारे एक अदृश्य श्याम वीवर की परिक्रमा कर रहे हैं।
291216

happykhus
24-12-2011, 11:14 AM
आपका बहुत-बहुत धन्यवाद हैप्पी जी भाई,जो आप सूत्र पर आकर अपने अनमोल विचार रखें।

आप भी मेरे सूत्र पर आये ओर आपने बहुमूल्य विचार दे

http://antarvasna.com/forum/showthread.php?t=10202

King_khan
24-12-2011, 11:15 AM
क्या ये प्रविष्टि के नीचे नहीं हो सकता खान जी भाई।
अब देखकर बताइए क्या ये सही है ?

Badtameez
24-12-2011, 11:17 AM
सुरेश भाई जी
ये कुछ चित्र आपके सूत्र विषय के अनुशार प्रस्तुत कर रहा हूँ |


केप्लर 22 की परिक्रमा करता केप्लर 22b(कल्पना आधारित चित्र)
291212
केप्लर 22 तथा केप्लर 22b प्रणाली की आंतरिक सौर मंडल से तुलना
291213
श्याम वीवर के समीप गैसीय बादल की कल्पना। सभी तारे एक अदृश्य श्याम वीवर की परिक्रमा कर रहे हैं।
291216

बहुत ही सुन्दर सराहनीय।किन्तु यही बात थोङा खटक रही कि ये मेरी प्रविष्टि के नीचे नहीं है।

King_khan
24-12-2011, 11:18 AM
http://www.youtube.com/watch?feature=player_embedded&v=74mhQyuyELQ

King_khan
24-12-2011, 11:20 AM
बहुत ही सुन्दर सराहनीय।किन्तु यही बात थोङा खटक रही कि ये मेरी प्रविष्टि के नीचे नहीं है।
सुरेश भाई जी
इन चित्रों को आपकी प्रविष्टि के निचे लागने का कार्य कोई नियामक ही कर सकता है |

Badtameez
24-12-2011, 11:33 AM
सुरेश भाई जी
इन चित्रों को आपकी प्रविष्टि के निचे लागने का कार्य कोई नियामक ही कर सकता है |

रूकिये खान जी भाई, किसी नियामक जी से सम्पर्क करता हूँ।

Raman46
24-12-2011, 11:33 AM
http://www.youtube.com/watch?feature=player_embedded&v=74mhQyuyELQ

अति सुन्दर / खान साहब को सलाम

Badtameez
24-12-2011, 11:35 AM
अति सुन्दर / खान साहब को सलाम
प्रणाम रमन जी भाई।

King_khan
24-12-2011, 11:46 AM
अति सुन्दर / खान साहब को सलाम
हार्दिक धन्यवाद रमण भाई जी |

King_khan
24-12-2011, 12:04 PM
http://www.youtube.com/watch?v=ev9oPUNaqXE&NR=1&feature=endscreen

Sameerchand
24-12-2011, 02:53 PM
........3-पल्सर, ब्लैक होल तथा क्वासर......
.
----------पल्सर (Pulsars) -----------
पल्सर, घूर्णन करते हुए ऐसे तारे है जिनसे नियमबद्ध रूप से विकिरण स्पन्द आते रहते है । पल्सर शब्द पल्सेटिंग रेडियों स्टार के लिए प्रयुक्त होता है ।
जब किसी बङे तारे में विस्फोट होता है तब उसका बाहरी भाग छिटककर नेबुला (nebula) का रूप धारण कर लेता है और क्रोड घटकर छोटा सघन तारा बन जाता है जिसे 'न्यूट्रान तारा कहते हैं' । इसमें न्यूट्रान बहुत पास-पास होते हैं तथा इनका घनत्व भी बहुत अधिक होता है । ये बहुत ही छोटे तथा धुंधले होते हैं । एक न्यूट्रान तारे का औसत व्यास 10 किमी. तक का होता है । ये न्यूट्रान तारे ही पल्सर कहलाते हैं ।
रेडियो दूरबीन पर पल्सर से आता किरणपुंज 'टिक' जैसी आवाज उत्पन्न करता है । तेजी से घूमते हुए ये तारे लाइट हाउसों की तरह हैं । साधारण पल्सरों के फ्लैश के बीच का अंतराल एक या आधा सेकंड होता है । अति तीव्रता से स्पन्दन करने वाला पल्सर NP-0532 है, जो 'क्रेब नेबुला' में स्थित है । यह एक सेकंड में तीस बार स्पन्दन करता है । सबसे पुराना और मंद गति से घूर्णन करने वाला पल्सर NP 0527 है जिसके स्पन्दों के बीच का अन्तराल 3.7 सेकंड है । सभी पल्सर 0.03 सेकंड से 4 सेकंड की अवधि में एक स्पन्द पैदा करते हैं ।
सामान्यत: पल्सरों को प्रकाशीय दूरबीन से नहीं देखा जा सकता है । पहला NP0532 क्रेब नेबुला में है और दूसरा PSR 0833-45 गम नेबुला में है । अब तक वैज्ञानिक 100 से अधिक पल्सरों का पता लगा चुके हैं ।

सुरेश जी, आपका इस सूत्र की माध्यम से काफी अच्छी जानकारियाँ प्रश्तुत कर रहे हैं जो की शायद हर सदस्य के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं.

आशा करता हूँ की आगे भी ऐसी जानकारियाँ प्रस्तुत करेंगे.....धन्यवाद मित्र इतने अच्छे सूत्र बनाने के लिए.....

किंग खान साहब के द्वारा प्रस्तुत जानकारियाँ भी बहुत महत्वपूर्ण हैं...धन्यवाद खान भाई साहब को भी......

Badtameez
24-12-2011, 07:38 PM
सुरेश जी, आपका इस सूत्र की माध्यम से काफी अच्छी जानकारियाँ प्रश्तुत कर रहे हैं जो की शायद हर सदस्य के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं.

आशा करता हूँ की आगे भी ऐसी जानकारियाँ प्रस्तुत करेंगे.....धन्यवाद मित्र इतने अच्छे सूत्र बनाने के लिए.....

किंग खान साहब के द्वारा प्रस्तुत जानकारियाँ भी बहुत महत्वपूर्ण हैं...धन्यवाद खान भाई साहब को भी......

सूत्र पर आने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद!

Badtameez
24-12-2011, 08:06 PM
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Badtameez
07-01-2012, 05:38 AM
*** ... 1- अंतरिक्ष ( space ) ...***

.
अंतरिक्ष एक वायुरहित क्षेत्र है, जिसकी सीमाएँ सभी दिशाओं में अनन्त तक फैली हुई हैं। हम अंतरिक्ष में चाहे जिस भी दिशा
में निकल जायें, अनन्तकाल तक चलने के बाद भी अन्तिम सीमा तक नहीं पहुँच सकते हैं। अंतरिक्ष अंतहीन ऐसा क्षेत्र है जिसमें सौरमण्डल, असंख्य तारे,तारकीय धूल और मंदाकिनियां सभी विद्यमान हैं। सम्पूर्ण अंतरिक्ष में न तो हवा है और न ही बादल हैं। दिन हो या रात अंतरिक्ष में घनघोर अंधकार रहता है, बिल्कुल काला। अंतरिक्ष में प्राणी जगत के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। अंतरिक्ष में कोई प्राणी नहीं रहता है।
अंतरिक्ष कहाँ से शुरू होता है यह आज भी रहस्य बना हुआ है क्योंकि इस तथ्य की कोई जानकारी नहीं है। अंतरिक्ष तो हमें चारो ओर से घेरे हुए है। समझने के लिए हम इतना ही कह सकते हैं कि अंतरिक्ष वहां से शुरू होता है जहां पृथ्वी का वायुमण्डल समाप्त होता है।
आज के वैज्ञानिक तथा विद्वान शक्तिशाली रेडियो दूरबीनों, राकेटों, कृत्रिम उपग्रहों, अंतरिक्ष यानें और प्रोबों की सहायता से अंतरिक्ष के गूढ़ रहस्यों को जाननें में लगे हुए हैं। नये आविष्कारों से अंतरिक्ष सम्बन्धी कुछ नये तथ्य सामने आ भी रहें हैं।अंतरिक्ष का चित्र प्रस्तुत-

Badtameez
23-01-2012, 10:27 PM
........3-पल्सर, ब्लैक होल तथा क्वासर......
.
----------पल्सर (Pulsars) -----------
पल्सर, घूर्णन करते हुए ऐसे तारे है जिनसे नियमबद्ध रूप से विकिरण स्पन्द आते रहते है । पल्सर शब्द पल्सेटिंग रेडियों स्टार के लिए प्रयुक्त होता है ।
जब किसी बङे तारे में विस्फोट होता है तब उसका बाहरी भाग छिटककर नेबुला (nebula) का रूप धारण कर लेता है और क्रोड घटकर छोटा सघन तारा बन जाता है जिसे 'न्यूट्रान तारा कहते हैं' । इसमें न्यूट्रान बहुत पास-पास होते हैं तथा इनका घनत्व भी बहुत अधिक होता है । ये बहुत ही छोटे तथा धुंधले होते हैं । एक न्यूट्रान तारे का औसत व्यास 10 किमी. तक का होता है । ये न्यूट्रान तारे ही पल्सर कहलाते हैं ।
रेडियो दूरबीन पर पल्सर से आता किरणपुंज 'टिक' जैसी आवाज उत्पन्न करता है । तेजी से घूमते हुए ये तारे लाइट हाउसों की तरह हैं । साधारण पल्सरों के फ्लैश के बीच का अंतराल एक या आधा सेकंड होता है । अति तीव्रता से स्पन्दन करने वाला पल्सर NP-0532 है, जो 'क्रेब नेबुला' में स्थित है । यह एक सेकंड में तीस बार स्पन्दन करता है । सबसे पुराना और मंद गति से घूर्णन करने वाला पल्सर NP 0527 है जिसके स्पन्दों के बीच का अन्तराल 3.7 सेकंड है । सभी पल्सर 0.03 सेकंड से 4 सेकंड की अवधि में एक स्पन्द पैदा करते हैं ।
सामान्यत: पल्सरों को प्रकाशीय दूरबीन से नहीं देखा जा सकता है । पहला NP0532 क्रेब नेबुला में है और दूसरा PSR 0833-45 गम नेबुला में है । अब तक वैज्ञानिक 100 से अधिक पल्सरों का पता लगा चुके हैं ।

...............ब्लैक होल (Black Hole)............
.
बहुत सारे तारे सूर्य से बहुत बङे होते हैं। सूर्य से लगभग तीन गुने विशाल तारे जब समाप्त हो जाते हैं तब अंतरिक्ष में कुछ काले क्षेम बन जाते हैं जिसे ब्लैंक होल कहते हैं।
ब्लैक होल का गुरूत्वाकर्षण बल अत्यन्त प्रचण्ड होता है। इन गुरूत्वाकर्षण बल के क्षेत्र के सम्पर्क में जो कोई भी वस्तु आता है वो ब्लैक होल में चला जाता है और एक बार ब्लैक होल में जाने के बाद कभी भी बाहर नहीं आ सकता है। यहाँ तक कि प्रकाश भी इस गुरूत्वाकर्षण के कारण बाहर नहीं आ पाता है।
सन् 1972 ई. में पहली बार ब्लैक होल की पहचान की गई थी। यह सिग्नस एक्स-1 के दुहरे तारे में था। यह दुहरा तारा एक्स-किरणों का स्त्रोत है। यह उसका एक छोटा साथी है जो बिल्कुल काला है। यह न्यूट्रान तारा नहीं है इसलिए इसको ब्लैक होल कहते हैं। सामान्यत: ब्लैक होल से एक्स- किरणों और अवरक्त विकिरण (infrared radiation) निकलते हैं। इन्हीं विकिरणों के आधार पर अंतरिक्ष में ब्लैक होलों का पता लगाया जाता है ब्लैक होलों का द्रव्यमान 10 करोङ सूर्य के बराबर तक हो सकता है।

dineshsaini1982
29-01-2012, 04:11 PM
मित्र आपने एक लाजवाब सूत्र का निर्माण किया है

रेपो कबूल करे...........धन्यवाद

Badtameez
29-01-2012, 04:45 PM
मित्र आपने एक लाजवाब सूत्र का निर्माण किया है

रेपो कबूल करे...........धन्यवाद

लेकिन मित्र यहाँ मित्रों का सहयोग नहीं मिल पाता है इसीलिए प्रविष्टी करने में मन नहीं लगता है।

Raman46
29-01-2012, 05:29 PM
बहुत अच्छी जानकारी भरा सूत्र है मित्र गीतकार सौरभ जी

Badtameez
29-01-2012, 05:33 PM
बहुत अच्छी जानकारी भरा सूत्र है मित्र गीतकार सौरभ जी

यहाँ आने के लिए धन्यवाद मित्र!

Badtameez
12-02-2012, 08:30 AM
................. क्वासर (Quasars) ................

क्वासर शब्द 'क्वासी-स्टैलर रेडियो सोर्सेज' का संक्षिप्त रूप है। क्वासर एक तारे की तरह दिखाई देते हैं। प्रकाशीय दूरबीन से ये साधारण धुंधले तारों जैसे दिखाई देते हैं, किन्तु रेडियो दूरबीन परीक्षण से पता चला है कि ये रेडियो तरंगों के स्त्रोत हैं। मार्टेन श्मिट ने सन् 1962 में 3C-273 क्वासर का पता लगाया। इसमें अवरक्त विस्थापन Z का मान 0.158 था। यह तरंग गति का एक प्रभाव है, जो गतिशील वस्तुओं के साथ देखने को मिलता है। इसमें पास आने वाले प्रकाश के स्त्रोत के स्पेक्ट्रम का विस्थापन बैंगनी रंग की तरफ और दूर जाने वाले प्रकाश स्त्रोत के स्पेक्ट्रम का विस्थापन लाल रंग की ओर होता है। अवरक्त विस्थापन, प्रकाश स्त्रोत के दूर जाने को दर्शाता है।
क्वासर से हमें प्रकाश के साथ-साथ रेडियो तरंगे और एक्स किरणें भी मिलती हैं। एक क्वासर का आकार हमारी मंदाकिनी का एक लाखवां हिस्सा होता है, किन्तु इसकी चमक 100-200 गुना अधिक होती है। अभी तक 1500 क्वासरो की खोज की जा चुकी है।

nishanath
12-02-2012, 12:56 PM
२०१२ दिसंबर माह में सूर्य से कुछ तुकडे अलग हो कर पृथ्वी पर आने वाले है क्या क्या हो सकता है मुझे तो ज्यादा कुछ मालुम नहीं है यदि जानकारी दे सके तो आभारी रहूँगा

jai 123
15-02-2012, 04:55 PM
बहुत ही रोचक सुत्र ब्रम्हाण्ड के विषय मे कहा जाता है कि अतरिश मे अनेक आंकाशगगांए है जिनमे हमारी पृथ्वी कि तरह अनेक ग्रह स्थित है संभव है वहा प्राणी भी निवास करते हो ये एक कोतुहल का विषय या खोज का एक व्यापक छेत्र है

N I S H A
03-03-2012, 01:54 PM
लाजवाब सूत्र !
कृपया सूत्र को गति दे !
सूत्र धारक को बधाई और ++++++++!

Badtameez
03-03-2012, 01:59 PM
लाजवाब सूत्र !
कृपया सूत्र को गति दे !
सूत्र धारक को बधाई और !

स्वागत है।
चूंकि सूत्र में काफी पेस्ट का सहारा नहीं लेता हूँ हाथों से टाइपिंग करता हूँ, इसमें समय लगता है। छुट्टियों के दिन में सूत्र को गति दूँगा।

N I S H A
03-03-2012, 02:03 PM
नियमो के चलते आपका रेपो आप तक नहीं पहुच पाया है जिसका मुझे दुःख है !
आपका रेपो मुझ पर उधार है मित्र !

Badtameez
03-03-2012, 02:06 PM
नियमो के चलते आपका रेपो आप तक नहीं पहुच पाया है जिसका मुझे दुःख है !
आपका रेपो मुझ पर उधार है मित्र !

सूत्र पर आपका आना अधिक महत्वपूर्ण है।

franky
23-03-2012, 05:03 PM
...............ब्लैक होल (Black Hole)............
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बहुत सारे तारे सूर्य से बहुत बङे होते हैं। सूर्य से लगभग तीन गुने विशाल तारे जब समाप्त हो जाते हैं तब अंतरिक्ष में कुछ काले क्षेम बन जाते हैं जिसे ब्लैंक होल कहते हैं।
ब्लैक होल का गुरूत्वाकर्षण बल अत्यन्त प्रचण्ड होता है। इन गुरूत्वाकर्षण बल के क्षेत्र के सम्पर्क में जो कोई भी वस्तु आता है वो ब्लैक होल में चला जाता है और एक बार ब्लैक होल में जाने के बाद कभी भी बाहर नहीं आ सकता है। यहाँ तक कि प्रकाश भी इस गुरूत्वाकर्षण के कारण बाहर नहीं आ पाता है।
सन् 1972 ई. में पहली बार ब्लैक होल की पहचान की गई थी। यह सिग्नस एक्स-1 के दुहरे तारे में था। यह दुहरा तारा एक्स-किरणों का स्त्रोत है। यह उसका एक छोटा साथी है जो बिल्कुल काला है। यह न्यूट्रान तारा नहीं है इसलिए इसको ब्लैक होल कहते हैं। सामान्यत: ब्लैक होल से एक्स- किरणों और अवरक्त विकिरण (infrared radiation) निकलते हैं। इन्हीं विकिरणों के आधार पर अंतरिक्ष में ब्लैक होलों का पता लगाया जाता है ब्लैक होलों का द्रव्यमान 10 करोङ सूर्य के बराबर तक हो सकता है।
बहुत अच्छी जानकारी दे रहे हो मित्र ...रेपो कबूल करे ...
पर blackhol एसा केसे कर पाते है..
इस पर थोडा और प्रकाश डाले.....:salut: