View Full Version : प्रेमगुरू -- गाण्ड मारे सैंया हमारो
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29-12-2011, 10:48 AM
मुझे मालूम है कि अन्तर्वासना के पाठक-पाठिकाएँ अपने प्रिय कथा-लेखक प्रेमगुरू जी की कहानियाँ कितने दिलोजान से पढ़ते हैं लेकिन सभी पाठक इस बात को नहीं जानते होंगे कि सर्वप्रिय लेखक प्रेमगुरू अब कथा-लेखन को अलविदा कह चुके हैं।
दोस्तों,आज अन्तर्वासना पर प्रेमगुरू की एक नयी कहानी "गांड मारे सिया हमारो" प्रकाशित हुई है..
ये कहानी पांच भागों में विभाजित करके प्रकाशित की जाएगी....
प्रशाशक जी के अनुसार..."आपके प्रिय प्रेमगुरू जी की इन तीन रचनाओं की प्रस्तुति में आप में से ही एक पाठिका सुश्री सीमा जी का सहयोग अविस्मरणीय है। सीमा जी(स्लिमसीमा) (http://antarvasna.com/forum/member.php?u=90237) आपके अन्तर्वासना मंच (http://www.antarvasna.com/forum) पर नियामक पद को भी सुशोभित कर रही हैं।"मैं जानना चाहता हूँ की आपको ये कहानी कैसी लगी....:question:
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29-12-2011, 10:49 AM
http://www.antarvasna.com/story.php?id=2052_koi-mil-gaya_gaand-mare-sainya-hamaro-1
गांड मारे सैयां हमारो -- 1
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29-12-2011, 10:52 AM
मैं अपनी बात करूं तो मुझे यह कहानी प्रेमगुरू की अन्य कहानियों के मुकाबले अभी तक लुभावनी नहीं लगी है.ये अन्य कहानियों की तरह ही एक साधारण मार्ग पर चल रही है.लेकिन चूँकि ये कहानी पांच भागों में प्रकाशित होंगी ,इसलिए मुझे आशा है की आगे इसमें कुछ लुभावनी चीजें जरूर प्रकाशित होगी.... :)
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29-12-2011, 03:18 PM
@komal sharma
कोमल जी..हर सूत्र में अपने एकमात्र सूत्र की प्रशंसा और प्रचार करने के बजाय कुछ और लिख दीजियेगा तो शायद ज्यादा सदस्य आपके सूत्र को देखना पसंद करेंगे....
Rockst@r
29-12-2011, 03:20 PM
कहानी की शुरुआत तो अच्छी हे अब आगे क्या-क्या गुल खिलाती हे देखते हैं |
Saroz
10-01-2012, 11:26 AM
कहानी अच्छी है.... मगर प्रेमगुरु की जुदाई की टेंसन से कहानी पढ़ने में मज़ा उतना नहीं प्राप्त कर पाया....
दिमाग और दिल को समझा कर फिर से इस कहानी को पढूंगा.....:book:
slimsima
10-01-2012, 11:59 AM
कहानी अच्छी है.... मगर प्रेमगुरु की जुदाई की टेंसन से कहानी पढ़ने में मज़ा उतना नहीं प्राप्त कर पाया....
दिमाग और दिल को समझा कर फिर से इस कहानी को पढूंगा.....:book:
central
+ +रेपो आपकी भावनाओं के लिए
sushilnkt
10-01-2012, 12:06 PM
central
+ +रेपो आपकी भावनाओं के लिए
रोती क्यों हे ....
जब मन में कुछ देर या कुछ दिन के लिए मन भ्रमित हो जाता हे /..
मनुष्य कुछ ऐसे फेसले करता हे जिनका असर बहुत दूर तक होता हे
वेसा ही गुरु ने किया ... लेकिन समय के साथ घाव भरते हे .. और पुरानी यादे
ताजा होती हे .. वो फिर आयेगे .. लेकिन समय के भवा में उनको अपनी यादो में रहने दो
Raja44
10-01-2012, 12:13 PM
प्रेमगुरु खिलाडी है आगे की कहानी मे जरुर रंग आयेगा
slimsima
10-01-2012, 12:14 PM
आप सही हे पर आप यकीं नहीं करेंगे मैंने उनको कम से कम ७०-८० मेल किये उन्होंने एक का भी जवाब देना उचित नहीं समझा
एक लेखक होने के नाते अपने प्रशंसकों की बातो का जवाब देना उनका कर्तव्य हे
sushilnkt
10-01-2012, 12:16 PM
आप सही हे पर आप यकीं नहीं करेंगे मैंने उनको कम से कम ७०-८० मेल किये उन्होंने एक का भी जवाब देना उचित नहीं समझा
एक लेखक होने के नाते अपने प्रशंसकों की बातो का जवाब देना उनका कर्तव्य हे
मेने भी किया हे कई बार लेकिन वो अभी बहुत दुखी हे
जीवन में कुछ ऐसा घटित हो जाता हे की मनुष्य अपने आप को नश्वर समजता हे ...
जिस दिन उनकी यादो से वो चली जायेगी .. और नया लेख लिखा जाएगा
उस दिन वो सब के सामने होगे ये मेरा वादा हे
rekhatiwari
25-01-2012, 09:50 PM
चूत का रस निकल जाता है
Raman46
25-01-2012, 10:47 PM
आप सही हे पर आप यकीं नहीं करेंगे मैंने उनको कम से कम ७०-८० मेल किये उन्होंने एक का भी जवाब देना उचित नहीं समझा
एक लेखक होने के नाते अपने प्रशंसकों की बातो का जवाब देना उनका कर्तव्य हे
मित्र सीमा जी !
अभी कहानी की शुरुयात है / कहानी की अंत तो होने दीजिये तब तक हमें धीरज पूर्वक ही काम लेना होगा / जल्द वाजी में लिया गया निर्णय नुकशान दायक भी सावित हो सकती है / हमें उन कहानियों की अंत तक प्रतीक्षा तो करनी ही पड़ेगी मित्र ? धन्यवाद
Saroz
26-01-2012, 09:37 AM
कहानी तो बेशक उनके पूर्व लिखित कहानियों की तरह मजेदार है सीमा जी... मगर कहानी पढते हुए बार-बार ये ख्याल दिल और दिमाग को कचोटती है कि ये प्रेमगुरु कि आखिरी कहानी है और सायद ही फिर से इस कथानक कि रचनाओ के दर्शन भी होंगे..... यदि प्रेमगुरु से आपकी बात हो पाए तो प्लीज़ उन्हें मना लीजिए...
मै ऐसे लेखक का जीवन पर्यंत ऋणी रहूँगा.....
मेरे तरफ से उन्हें और आपके प्रयास को नमन....
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