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View Full Version : "जाको राखे साइयाँ, मार सके ना कोई "



Raman46
17-01-2012, 10:21 PM
दोस्तों !
जाको राखे साइयाँ, मार सके ना कोई " कहाबत हर किसी ने सुना होगा / इसी विषय पर यह सूत्र आप सब को समर्पित है / जीवन में कोई न कोई यैसी वैसी घटनाये घट जाती है, जिसका हम कभी कल्पना में भी अंदाजा नही लगा पाते है / दिवा- सप्न की तरह होती है ये घटनाएँ जिसका आभाष हमारी कल्प्न्यों से भी ऊपर होती है / कोई अज्ञात शक्ति हमें उन दर्दनाक घटनायों से भी बाल -बाल बचा लेता है /
कुछ यैसी ही सच्ची घटनाएँ जो आप के जीवन में अथबा आप की जानकारी में घटित हुई हो, जो हर तरह से अचम्भे में डाल सकती है , का जिक्र कर सकते है / दोस्तों यहाँ सच्ची घटनायों का ही जिक्र करें / ये जरुरी नही है कि वो घटनाएँ आप के साथ घटी है या आप के किसी सगे संबधी के साथ / किसी भी सच्ची घटनायों को बताया जा सकता है ,जो ये आभाष दिलाये कि इसके पिच्छे कोई न कोई अज्ञात शक्ति ही रही होगी /
आशा करूँगा आप सभी साथियों से , अगर आप को कोई यैसी घटनाये याद हों , जो किसी न किसी रूप में अज्ञात शक्ति कि देन हो सकती है , अवश्य उल्लेख करें / धन्यवाद ......रमण

badboy123455
17-01-2012, 11:12 PM
कुछ बात है की हस्ती, मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन, दौर\-ए\-जहाँ हमारा,

Raman46
17-01-2012, 11:15 PM
कुछ बात है की हस्ती, मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन, दौर\-ए\-जहाँ हमारा,

शुक्रिया आप का राकेश भाई / स्वागत है दोस्त

Raman46
17-01-2012, 11:39 PM
एक सच्ची घंटा :-

मेरा एक बार एक कार एक्सीडेंट में दाहिना पैर बुरी तरह कुचल गया / किसी तरह कुछ अज्ञात लोगों ने मुझे एम्स में भर्ति करा दिया / डॉक्टरों कि टीम ने पैर काटने कि निर्णय ले चुके थे कि येन वक्त पर मुझे होश आ गया और मैं उनकी बातें सुन रहा था / ना जाने क्यों मुझे लगा कि कोई शक्ति चीख -चीख कर कह रही है रोको इन डॉक्टर को / मैंने बड़ी हिम्मत के साथ कहा डॉक्टर मेडिकल साइंस में यैसा कोई तरीका नही जो दूसरी विकल्प को लागु करें / मेरी बात को सुनकर सभी डॉक्टर अचम्भे में आ गये और अपना निर्णय बदलने पर मजबूर हुए / आप्रेसन सफल रहा / मेरे घर पर सुचना दी गयी मेरे विजिटिंग कार्ड कि सहायता से / दुसरे ही दिन मेरे परिवार बालों ने वहां से छुट्टी करा लिया और एक प्राइवेट नर्सिंग होम में दाखिला करा दिए / कुछ दिनों कि इलाज के बाद यह कह कर छुट्टी दे दी गयी कि इन्हें तीन महीने बाद एक ओप्रेसन पुनः करना होगा /
दोस्तों ,ठीक एक महीने बाद मेरे एक दोस्त ने एक नई बस ख़रीदा और उसे वैष्णो देवी में प्रथम पूजा कराने हेतु जाना चाहते थे / हमारे पुरे परिवार को निमंत्रण दिया गया / मैं अपने आप को रोक नही पाया और सदस्यों के मना करने के बाबजूद भी जाने को तैयार हो गया / हम सपरिवार वैष्णो देवी पहुँच गये / फैसला ये हुआ कि मुझे घोड़े कि सवारी लेनी चाहिए / परन्तु मेरे जिद्द के आगे ये निश्चय किया गया कि जब मैं थक जाऊं तो घोड़े कि सवारी ली जाये / किसी तरह अपने मनोबल कि जोर पर मैं बिना सवारी के वैष्णो देवी कि दर्शन कर लिया और वापसी भी आ गया / हमलोग कटरा के एक होटल में रात को रुके थे / ठीक दो बजे के बाद मेरी नींद खुल गयी और मैं बाथरूम कि ओर जाना चाहा / एक अजीव सी झोंका मेरे पास से गुजरा, जो रोमांचित करने बाला था / मेरा पैर जो हर वक्त भारी लगता था ,बिलकुल हल्का और नेचुरल लगने लगा / मैंने उसी वक्त लौट कर अपने परिवार के सदस्यों से कहा / सबने मिल कर एक बार जय माता कि आवाज लगाई/
घर लौट कर ठीक एक सप्ताह के बाद डॉक्टर से मिलने गया क्यों कि मेरा मन कुछ और ही कह रहा था / डॉक्टर ने सारेनिरिक्षण के बाद ये कहा कि ये कैसा चमत्कार है यार आप कि पैर तो बिलकुल ठीक ठाक है / मुझे ये सुन कर वो अज्ञात झोंके कि याद हरा हो गयी जो उस रात कटरा कि होटल में गुजरा था / दोस्तों आज मैं बिलकुल ठीक ठाक हूँ किसी भी तरह कि तकलीफ पैर में नही है बिलकुल वैसा ही जैसा पहले था / है न ये सच ; "जाको राखे साइयाँ, मार सके ना कोई " जय माँ वैष्णो देवी कि /

Triple-S HARYANVI
18-01-2012, 12:22 PM
एक सच्ची घंटा :-

मेरा एक बार एक कार एक्सीडेंट में दाहिना पैर बुरी तरह कुचल गया / किसी तरह कुछ अज्ञात लोगों ने मुझे एम्स में भर्ति करा दिया / डॉक्टरों कि टीम ने पैर काटने कि निर्णय ले चुके थे कि येन वक्त पर मुझे होश आ गया और मैं उनकी बातें सुन रहा था / ना जाने क्यों मुझे लगा कि कोई शक्ति चीख -चीख कर कह रही है रोको इन डॉक्टर को / मैंने बड़ी हिम्मत के साथ कहा डॉक्टर मेडिकल साइंस में यैसा कोई तरीका नही जो दूसरी विकल्प को लागु करें / मेरी बात को सुनकर सभी डॉक्टर अचम्भे में आ गये और अपना निर्णय बदलने पर मजबूर हुए / आप्रेसन सफल रहा / मेरे घर पर सुचना दी गयी मेरे विजिटिंग कार्ड कि सहायता से / दुसरे ही दिन मेरे परिवार बालों ने वहां से छुट्टी करा लिया और एक प्राइवेट नर्सिंग होम में दाखिला करा दिए / कुछ दिनों कि इलाज के बाद यह कह कर छुट्टी दे दी गयी कि इन्हें तीन महीने बाद एक ओप्रेसन पुनः करना होगा /
दोस्तों ,ठीक एक महीने बाद मेरे एक दोस्त ने एक नई बस ख़रीदा और उसे वैष्णो देवी में प्रथम पूजा कराने हेतु जाना चाहते थे / हमारे पुरे परिवार को निमंत्रण दिया गया / मैं अपने आप को रोक नही पाया और सदस्यों के मना करने के बाबजूद भी जाने को तैयार हो गया / हम सपरिवार वैष्णो देवी पहुँच गये / फैसला ये हुआ कि मुझे घोड़े कि सवारी लेनी चाहिए / परन्तु मेरे जिद्द के आगे ये निश्चय किया गया कि जब मैं थक जाऊं तो घोड़े कि सवारी ली जाये / किसी तरह अपने मनोबल कि जोर पर मैं बिना सवारी के वैष्णो देवी कि दर्शन कर लिया और वापसी भी आ गया / हमलोग कटरा के एक होटल में रात को रुके थे / ठीक दो बजे के बाद मेरी नींद खुल गयी और मैं बाथरूम कि ओर जाना चाहा / एक अजीव सी झोंका मेरे पास से गुजरा, जो रोमांचित करने बाला था / मेरा पैर जो हर वक्त भारी लगता था ,बिलकुल हल्का और नेचुरल लगने लगा / मैंने उसी वक्त लौट कर अपने परिवार के सदस्यों से कहा / सबने मिल कर एक बार जय माता कि आवाज लगाई/
घर लौट कर ठीक एक सप्ताह के बाद डॉक्टर से मिलने गया क्यों कि मेरा मन कुछ और ही कह रहा था / डॉक्टर ने सारेनिरिक्षण के बाद ये कहा कि ये कैसा चमत्कार है यार आप कि पैर तो बिलकुल ठीक ठाक है / मुझे ये सुन कर वो अज्ञात झोंके कि याद हरा हो गयी जो उस रात कटरा कि होटल में गुजरा था / दोस्तों आज मैं बिलकुल ठीक ठाक हूँ किसी भी तरह कि तकलीफ पैर में नही है बिलकुल वैसा ही जैसा पहले था / है न ये सच ; "जाको राखे साइयाँ, मार सके ना कोई " जय माँ वैष्णो देवी कि /


जय माता दी

इसे कहते है बड़े भाई भक्ति में शक्ति ...........

Raman46
18-01-2012, 12:27 PM
जय माता दी

इसे कहते है बड़े भाई भक्ति में शक्ति ...........
शुक्रिया दोस्त / स्वागत है आप का तथा निवेदन है अगर कोई यैसी सच्ची घटनाये जो आप को याद हो , अवश्य उल्लेख करें / जय माता दी / जय वैष्णवी /

komal sharma
18-01-2012, 12:47 PM
फानूस बनके जिसकी हिफाज़त हवा करे
वो शम्मा क्या बुझे जिसे रोशन खुदा करे

325528

deshpremi
18-01-2012, 12:48 PM
रमण भाई नए सूत्र के लिए बधाई

ऐसे कितने ही मोके जिंदगी में आये है कि वर्णन करना मुश्किल है एक घटना बताता हूं जो कि मेरे पुत्र के साथ घटी हम लोग घूमने के लिए उदयपुर - माउंटआबू गए थे और उदयपुर के होटल में ठहरे थे हम लोग सभी सविमिंग पूल में नहा रहे थे मेरा लड़का हमसे पहले नहाकर होटल की रिसेप्शन पर खेलने लगा वहाँ रिसेप्शन पर एक शीशे का दरवाजा लगा था खेलते खेलते मेरे बेटे ने जाने कैसे शीशे में टक्कर मारी और वह शीशा जो की लगभग 15mm की मोटाई का था टूट गया परन्तु ना जाने कोनसी अदृश्य शक्ति थी की मेरा बेटा शीशे से आगे ना निकल कर पीछे जा गिरा और सिर्फ उसके माथे पर जरा सी खरोंच आई जब हमने उस शीशे का हाल देखा तो भगवान का शुक्रिया अदा किया की उन्होंने मेरे बेटे की कैसे रक्षा कि अगर वह शीशा किसी भी अंग पर गिर जाता तो ना जाने क्या हो जाता

हें परम प्रभु तेरी माया अपरम्पार

komal sharma
18-01-2012, 12:48 PM
फानूस बनके जिसकी हिफाज़त हवा करे
वो शम्मा क्या बुझे जिसे रोशन खुदा करे
325529

adityaa
18-01-2012, 12:54 PM
एक सच्ची घंटा :-

मेरा एक बार एक कार एक्सीडेंट में दाहिना पैर बुरी तरह कुचल गया / किसी तरह कुछ अज्ञात लोगों ने मुझे एम्स में भर्ति करा दिया / डॉक्टरों कि टीम ने पैर काटने कि निर्णय ले चुके थे कि येन वक्त पर मुझे होश आ गया और मैं उनकी बातें सुन रहा था / ना जाने क्यों मुझे लगा कि कोई शक्ति चीख -चीख कर कह रही है रोको इन डॉक्टर को / मैंने बड़ी हिम्मत के साथ कहा डॉक्टर मेडिकल साइंस में यैसा कोई तरीका नही जो दूसरी विकल्प को लागु करें / मेरी बात को सुनकर सभी डॉक्टर अचम्भे में आ गये और अपना निर्णय बदलने पर मजबूर हुए / आप्रेसन सफल रहा / मेरे घर पर सुचना दी गयी मेरे विजिटिंग कार्ड कि सहायता से / दुसरे ही दिन मेरे परिवार बालों ने वहां से छुट्टी करा लिया और एक प्राइवेट नर्सिंग होम में दाखिला करा दिए / कुछ दिनों कि इलाज के बाद यह कह कर छुट्टी दे दी गयी कि इन्हें तीन महीने बाद एक ओप्रेसन पुनः करना होगा /
दोस्तों ,ठीक एक महीने बाद मेरे एक दोस्त ने एक नई बस ख़रीदा और उसे वैष्णो देवी में प्रथम पूजा कराने हेतु जाना चाहते थे / हमारे पुरे परिवार को निमंत्रण दिया गया / मैं अपने आप को रोक नही पाया और सदस्यों के मना करने के बाबजूद भी जाने को तैयार हो गया / हम सपरिवार वैष्णो देवी पहुँच गये / फैसला ये हुआ कि मुझे घोड़े कि सवारी लेनी चाहिए / परन्तु मेरे जिद्द के आगे ये निश्चय किया गया कि जब मैं थक जाऊं तो घोड़े कि सवारी ली जाये / किसी तरह अपने मनोबल कि जोर पर मैं बिना सवारी के वैष्णो देवी कि दर्शन कर लिया और वापसी भी आ गया / हमलोग कटरा के एक होटल में रात को रुके थे / ठीक दो बजे के बाद मेरी नींद खुल गयी और मैं बाथरूम कि ओर जाना चाहा / एक अजीव सी झोंका मेरे पास से गुजरा, जो रोमांचित करने बाला था / मेरा पैर जो हर वक्त भारी लगता था ,बिलकुल हल्का और नेचुरल लगने लगा / मैंने उसी वक्त लौट कर अपने परिवार के सदस्यों से कहा / सबने मिल कर एक बार जय माता कि आवाज लगाई/
घर लौट कर ठीक एक सप्ताह के बाद डॉक्टर से मिलने गया क्यों कि मेरा मन कुछ और ही कह रहा था / डॉक्टर ने सारेनिरिक्षण के बाद ये कहा कि ये कैसा चमत्कार है यार आप कि पैर तो बिलकुल ठीक ठाक है / मुझे ये सुन कर वो अज्ञात झोंके कि याद हरा हो गयी जो उस रात कटरा कि होटल में गुजरा था / दोस्तों आज मैं बिलकुल ठीक ठाक हूँ किसी भी तरह कि तकलीफ पैर में नही है बिलकुल वैसा ही जैसा पहले था / है न ये सच ; "जाको राखे साइयाँ, मार सके ना कोई " जय माँ वैष्णो देवी कि /


बड़े भाई आप बड़े भक्त हो माता रानी के
माता रानी की जय

Raman46
18-01-2012, 12:54 PM
फानूस बनके जिसकी हिफाज़त हवा करे
वो शम्मा क्या बुझे जिसे रोशन खुदा करे

325528


फानूस बनके जिसकी हिफाज़त हवा करे
वो शम्मा क्या बुझे जिसे रोशन खुदा करे
325529

शुक्रिया मित्र कोमल जी आप का बहुत बहुत धन्यवाद / सही कहा मित्र :फानूस बनके जिसकी हिफाज़त हवा करे
वो शम्मा क्या बुझे जिसे रोशन खुदा करे

Raman46
18-01-2012, 12:55 PM
रमण भाई नए सूत्र के लिए बधाई

ऐसे कितने ही मोके जिंदगी में आये है कि वर्णन करना मुश्किल है एक घटना बताता हूं जो कि मेरे पुत्र के साथ घटी हम लोग घूमने के लिए उदयपुर - माउंटआबू गए थे और उदयपुर के होटल में ठहरे थे हम लोग सभी सविमिंग पूल में नहा रहे थे मेरा लड़का हमसे पहले नहाकर होटल की रिसेप्शन पर खेलने लगा वहाँ रिसेप्शन पर एक शीशे का दरवाजा लगा था खेलते खेलते मेरे बेटे ने जाने कैसे शीशे में टक्कर मारी और वह शीशा जो की लगभग 15mm की मोटाई का था टूट गया परन्तु ना जाने कोनसी अदृश्य शक्ति थी की मेरा बेटा शीशे से आगे ना निकल कर पीछे जा गिरा और सिर्फ उसके माथे पर जरा सी खरोंच आई जब हमने उस शीशे का हाल देखा तो भगवान का शुक्रिया अदा किया की उन्होंने मेरे बेटे की कैसे रक्षा कि अगर वह शीशा किसी भी अंग पर गिर जाता तो ना जाने क्या हो जाता

हें परम प्रभु तेरी माया अपरम्पार

शुक्रिया दोस्त /
फानूस बनके जिसकी हिफाज़त हवा करे
वो शम्मा क्या बुझे जिसे रोशन खुदा करे/
जय माता वैष्णवी

sushilnkt
18-01-2012, 01:00 PM
सब प्रभु की लीला हे
मारने वाला हे भगवान् बचाने वाला हे भगवान्

Raman46
18-01-2012, 01:02 PM
सब प्रभु की लीला हे
मारने वाला हे भगवान् बचाने वाला हे भगवान्

शुक्रिया लाला जी भाई / धन्यवाद

unglibaaz
18-01-2012, 01:02 PM
बोल बम का नारा है बाबा सबका सहारा है, ईश्वर सबकी मदद करते है

Raman46
18-01-2012, 01:07 PM
बोल बम का नारा है बाबा सबका सहारा है, ईश्वर सबकी मदद करते है

जय बाबा उन्ग्लिबाज़ /स्वागत है आप का / आप को तो यैसी वैसी कई घटनाएँ याद होगी / कुछ तो उल्लेख कीजिये / धन्यवाद

unglibaaz
18-01-2012, 01:10 PM
जय बाबा उन्ग्लिबाज़ /स्वागत है आप का / आप को तो यैसी वैसी कई घटनाएँ याद होगी / कुछ तो उल्लेख कीजिये / धन्यवाद

जी रमन जी कुछ वक़्त दे मुझे , मस्त सूत्र बनाया है, अपने ही अंदाज मैं लिखुंगा ।

Raman46
18-01-2012, 01:12 PM
जी रमन जी कुछ वक़्त दे मुझे , मस्त सूत्र बनाया है, अपने ही अंदाज मैं लिखुंगा ।

शुक्रिया मित्र ! इंतजार करूँगा /
जय वैष्णवी

amol05
18-01-2012, 01:22 PM
रमण जी यह हकीकत है की एषा होता है अभी कुछ याद नहीं है पर अभी अपने दिमाग गह्दे गोदे दोडता हूँ कुछ याद आते ही लिखता हूँ

सूत्र बदियिया बधाई हो आपको मित्र

madhum
18-01-2012, 01:22 PM
सब ऊपर वाला करता हे ..
उसकी लाठी में आवाज नहीं होती
लेकिन जब मारता हे तो पता भी नहीं चलता हे

Raman46
18-01-2012, 01:29 PM
रमण जी यह हकीकत है की एषा होता है अभी कुछ याद नहीं है पर अभी अपने दिमाग गह्दे गोदे दोडता हूँ कुछ याद आते ही लिखता हूँ

सूत्र बदियिया बधाई हो आपको मित्र
शुक्रिया अमोल जी भाई स्वागत है आप का / हमें इंतजार भी रहेगा / धन्यवाद
जय वैष्णवी

Raman46
18-01-2012, 01:32 PM
सब ऊपर वाला करता हे ..
उसकी लाठी में आवाज नहीं होती
लेकिन जब मारता हे तो पता भी नहीं चलता हे
शुक्रिया मधुम जी भाई स्वागत है आप का / कहाबत है मरने बाला से बचने बाला की हाथ लम्बा और शक्तिशाली होता है / जय वैष्णवी

groopji
18-01-2012, 01:39 PM
मित्र आपके जैसा अनुभव मुझे निजी स्तर पर तो याद नहीं आ रहा है किन्तु एक घटना का स्मरण जरुर हो जाता है

लगभग आठ साल पहले जयपुर में गोपालपुरा बाईपास पर मै अपने दोस्तों के साथ शाम की चौपाल लगा कर बैठा था

की तभी एक मोटर साइकिल सवार जो की रोड पर आराम से जा रहा था

अचानक एक ट्रक उसके बगल से गुजरा और उस मोटर साइकल सवार का संतुलन बिगड गया

हम सब की नजरों के सामने ट्रक का पिछला पहिया उसके पैर और मोटर साइकिल को कुचलता हुआ चला गया और मोटर साइकिल चकनाचूर हो गई

हम लोग सहायता के लिए उसकी ओर बढे किन्तु वो अपने आपको झडकाता हुआ उठा और मोटर साइकिल की ओर देखता हुआ बोला

साले ट्रक वाले ने पूरी मोटर साइकिल की माँ ***** दी

आज भी उसे याद कर के हंसी भी आती है और मन भी सिहर उठता है


साथ ही मित्र .................. आपको सुंदर सूत्र के लिए ++

Raman46
18-01-2012, 01:42 PM
मित्र आपके जैसा अनुभव मुझे निजी स्तर पर तो याद नहीं आ रहा है किन्तु एक घटना का स्मरण जरुर हो जाता है

लगभग आठ साल पहले जयपुर में गोपालपुरा बाईपास पर मै अपने दोस्तों के साथ शाम की चौपाल लगा कर बैठा था

की तभी एक मोटर साइकिल सवार जो की रोड पर आराम से जा रहा था

अचानक एक ट्रक उसके बगल से गुजरा और उस मोटर साइकल सवार का संतुलन बिगड गया

हम सब की नजरों के सामने ट्रक का पिछला पहिया उसके पैर और मोटर साइकिल को कुचलता हुआ चला गया और मोटर साइकिल चकनाचूर हो गई

हम लोग सहायता के लिए उसकी ओर बढे किन्तु वो अपने आपको झडकाता हुआ उठा और मोटर साइकिल की ओर देखता हुआ बोला

साले ट्रक वाले ने पूरी मोटर साइकिल की माँ ***** दी

आज भी उसे याद कर के हंसी भी आती है और मन भी सिहर उठता है


साथ ही मित्र .................. आपको सुंदर सूत्र के लिए ++

शुक्रिया मित्र ग्रुप जी / स्वागत है आप का धन्यवाद

Raman46
18-01-2012, 01:53 PM
दोस्तों !
जाको राखे साइयाँ, मार सके ना कोई " कहाबत हर किसी ने सुना होगा / इसी विषय पर यह सूत्र आप सब को समर्पित है / जीवन में कोई न कोई यैसी वैसी घटनाये घट जाती है, जिसका हम कभी कल्पना में भी अंदाजा नही लगा पाते है / दिवा- सप्न की तरह होती है ये घटनाएँ जिसका आभाष हमारी कल्प्न्यों से भी ऊपर होती है / कोई अज्ञात शक्ति हमें उन दर्दनाक घटनायों से भी बाल -बाल बचा लेता है /
कुछ यैसी ही सच्ची घटनाएँ जो आप के जीवन में अथबा आप की जानकारी में घटित हुई हो, जो हर तरह से अचम्भे में डाल सकती है , का जिक्र कर सकते है / दोस्तों यहाँ सच्ची घटनायों का ही जिक्र करें / ये जरुरी नही है कि वो घटनाएँ आप के साथ घटी है या आप के किसी सगे संबधी के साथ / किसी भी सच्ची घटनायों को बताया जा सकता है ,जो ये आभाष दिलाये कि इसके पिच्छे कोई न कोई अज्ञात शक्ति ही रही होगी /
आशा करूँगा आप सभी साथियों से , अगर आप को कोई यैसी घटनाये याद हों , जो किसी न किसी रूप में अज्ञात शक्ति कि देन हो सकती है , अवश्य उल्लेख करें / धन्यवाद ......रमण

फोरम के सभी साथियों का सूत्र पर स्वागत है / जय वैष्णवी

draculla
18-01-2012, 02:02 PM
फोरम के सभी साथियों का सूत्र पर स्वागत है / जय वैष्णवी

बहुत ही अद्भुत घटना थी!!!
जय माँ वैष्णोदेवी की!!!!!!
मुझे मेरे साथ घटी कोई भी ऐसी अद्भुत घटना याद नहीं है...
लेकिन एक बार मैं पुरे परिवार के साथ बिहार जा रहे थे.
नोर्थइस्ट ट्रेन खगड़िया स्टेशन पर कुछ ही देर के लिए रुकती है.
ट्रेन में बहुत भीड़ थी.
मेरे डैडी ने कुछ किसी तरह रोंग साइड में उतार दिया और वे भी उतर गए..
लेकिन मेरी मम्मी ट्रेन में ही थी और ट्रेन चल पड़ी!
मेरे डैडी ने उन्हें उतार ने की कोशिश की और मम्मी डैडी पर गिर पड़ी!
किस्मत अच्छी थी की दोनों में से कोई पटरी के अंदर नहीं गए और कोई भी चोट नहीं आयी!

इससे तो यह अवश्य लगता है की
जाको रखे साइयां मार सके न कोई
बाल ना बांका करी सके चाहे सारा जग बैरी होय.

adityaa
18-01-2012, 02:13 PM
यह बात तब की है जब मैं igtr में पढाई कर रहां था
मुझे रात में बहुत बुरा सपना आया और मुझे ऐसा लग रहा था की आदित्य आज काम करने को मत जा आज कुछ बुरा होने वाला है
फिर भाई मैं काम करने को गया पर दोपहर खाना खाने के बाद मुझे फिरसे ऐसा महसूस होने लगा तो मैं रूम पर चला गया
पर हमारे सर ने मुझे वहाँ से भी बुला लिया की urgent डाई अस्सेम्ब्ली करके चला जा तो मैं गया
मैंने थोड़ी देर काम किया तो एक पार्ट को थोडा grind करना था तो मैं हैण्ड grinder ले आया और थोड़ी देर काम किया
तो अचानक से वह मेरे दाए हाथ पर आया औए मैं भी गिर गया और वह ग्रिंदर मेरे कलाई के थोडा निचे घुस गया था
पर अचनाकसे उसकी बेअरिंग जाम होकर वह रुक गया
मैंने खुद उसको बाहर खिंच कर निकाला तो एक बड़ी जोर से खून की धार उडी और बाद में जोरोंसे खून बाहर निकलने लगा
सब लोग जमा हो गए उन्होंने मुझे पट्टी बाँधी और डॉक्टर के पास लेके गए
पर रविवार होने के कारण जल्दी डॉक्टर भी नहीं मिला हम लोगोंको अचनाक्से याद आया की पास में एक डॉक्टर रहता है तो उसके पास गए
डोक्टारने क्या हुआ है देखने के लिए पट्टी खोली तो मुझे अचानक से चक्कर आकर मैं बेहोश हुआ
और मैंने एक बहुत तगड़े व्यक्ति को देखा उसके हाथमें त्रिशूल था पर मैं चेहरा देख नहीं पाया
मैंने उनसे बहुत बाते कियी उन्होंने अन्तमें बताया की बेटा तेरे लिए काल आया था पर वक़्त नहीं आया था
मैं यह सुनकर उठ गया और मैंने पूछा की मैं कितनी देर बेहोश था तो वह बोले मुशील से १-२ मिनट
बाद में डॉक्टर बोला अगर और थोड़ी देर grinder चलता तो मेरी पूरी कलाई कट जाती और बाकी की नसें कटाने से मौत की भी संभावना थी


इसके बादमें भी बहुत बार ऐसी कई घटनाए घटी पर प्रभु की कृपा है

amararya
18-01-2012, 02:16 PM
एक सच्ची घंटा :- मेरा एक बार एक कार एक्सीडेंट में दाहिना पैर बुरी तरह कुचल गया / किसी तरह कुछ अज्ञात लोगों ने मुझे एम्स में भर्ति करा दिया / डॉक्टरों कि टीम ने पैर काटने कि निर्णय ले चुके थे कि येन वक्त पर मुझे होश आ गया और मैं उनकी बातें सुन रहा था / ना जाने क्यों मुझे लगा कि कोई शक्ति चीख -चीख कर कह रही है रोको इन डॉक्टर को / मैंने बड़ी हिम्मत के साथ कहा डॉक्टर मेडिकल साइंस में यैसा कोई तरीका नही जो दूसरी विकल्प को लागु करें / मेरी बात को सुनकर सभी डॉक्टर अचम्भे में आ गये और अपना निर्णय बदलने पर मजबूर हुए / आप्रेसन सफल रहा / मेरे घर पर सुचना दी गयी मेरे विजिटिंग कार्ड कि सहायता से / दुसरे ही दिन मेरे परिवार बालों ने वहां से छुट्टी करा लिया और एक प्राइवेट नर्सिंग होम में दाखिला करा दिए / कुछ दिनों कि इलाज के बाद यह कह कर छुट्टी दे दी गयी कि इन्हें तीन महीने बाद एक ओप्रेसन पुनः करना होगा / दोस्तों ,ठीक एक महीने बाद मेरे एक दोस्त ने एक नई बस ख़रीदा और उसे वैष्णो देवी में प्रथम पूजा कराने हेतु जाना चाहते थे / हमारे पुरे परिवार को निमंत्रण दिया गया / मैं अपने आप को रोक नही पाया और सदस्यों के मना करने के बाबजूद भी जाने को तैयार हो गया / हम सपरिवार वैष्णो देवी पहुँच गये / फैसला ये हुआ कि मुझे घोड़े कि सवारी लेनी चाहिए / परन्तु मेरे जिद्द के आगे ये निश्चय किया गया कि जब मैं थक जाऊं तो घोड़े कि सवारी ली जाये / किसी तरह अपने मनोबल कि जोर पर मैं बिना सवारी के वैष्णो देवी कि दर्शन कर लिया और वापसी भी आ गया / हमलोग कटरा के एक होटल में रात को रुके थे / ठीक दो बजे के बाद मेरी नींद खुल गयी और मैं बाथरूम कि ओर जाना चाहा / एक अजीव सी झोंका मेरे पास से गुजरा, जो रोमांचित करने बाला था / मेरा पैर जो हर वक्त भारी लगता था ,बिलकुल हल्का और नेचुरल लगने लगा / मैंने उसी वक्त लौट कर अपने परिवार के सदस्यों से कहा / सबने मिल कर एक बार जय माता कि आवाज लगाई/ घर लौट कर ठीक एक सप्ताह के बाद डॉक्टर से मिलने गया क्यों कि मेरा मन कुछ और ही कह रहा था / डॉक्टर ने सारेनिरिक्षण के बाद ये कहा कि ये कैसा चमत्कार है यार आप कि पैर तो बिलकुल ठीक ठाक है / मुझे ये सुन कर वो अज्ञात झोंके कि याद हरा हो गयी जो उस रात कटरा कि होटल में गुजरा था / दोस्तों आज मैं बिलकुल ठीक ठाक हूँ किसी भी तरह कि तकलीफ पैर में नही है बिलकुल वैसा ही जैसा पहले था / है न ये सच ; "जाको राखे साइयाँ, मार सके ना कोई " जय माँ वैष्णो देवी कि / प्रेम से बोलो जय माता की

shashi009
18-01-2012, 02:28 PM
यह बात एक दम सत्य है की यदि हम इश्वर को सच्चे मन से याद करे तो दुःख के समय वह अवश्य कृपा करता है, भगवान कभी इस कलियुग में स्वयं नहीं आते किन्तु केसी के माध्यम से अवश्य मनुष्य के दुःख दूर करता है.....इस का गवाह है मेरे बचपन की एक घर में घटी घटना.

TTANUJJAIN
18-01-2012, 02:41 PM
yaar kabhi kabhi aisa bhi hota hai..........

shashi009
18-01-2012, 03:22 PM
यह घटना करीब ३० साल पुरानी है, उस समय मेरी उम्र करीब ६-७ साल की होगी.

उस समय घर में खुशी का माहोल था क्योकि मेरी चाचीजी शादी के ४-५ साल बाद माँ बनने वाली थी, बहुत मनौतियो के बाद यह खुशी का अवसर आया था, चाची की तबियत कुछ ठीक नहीं चल रही थी, गांव में कोई अस्पताल वगेरह तो था नहीं, सिर्फ २-३ डाक्टर दवाखाना खोल कर बेठे थे, उनको दिखाया तो उन लोगो ने कहा, शहर जा कर चेक उप करवाओ तो ज्यादा अच्छा रहेगा.

शहर हमारे गांव से करीब २० किलोमीटर दूर था. सोच विचार कर बड़े लोग चची को शहर ले गए, डॉ ने चेक उप कर कर कहा, घबराने की कोई बात नहीं है, बच्चा सही स्थिति में नहीं है और उसका सर सामान्य से बड़ा है. आपको प्रसूति किसी अच्छे डॉ से करानी होगी. डॉ ने जो दवाईया लिख कर दी वो लेकर सब गांव आ गए.

धीरे धीरे प्रसूति का समय नजदीक आने लगा, घर वालो सोच रखा था की डॉ ने जो समय बताया है उसके ३-४ दिन पहले शहर में मेरी मोसी रहती है उनके पास चले जायेगे जिससे समय पर भाग दौड़ नहीं हो, लेकिन भाग्य में लिखे को कोन बदल सकता है.........

shashi009
18-01-2012, 03:46 PM
..........एक दिन रात को १ बजे अचानक चाची को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई, गांव के डॉ और दाई को जगाकर फ़ौरन बुलाया गया परन्तु उन्होंने असमर्थता जताते हुए तुरंत शहर ले जाने की सलाह दी, गांव में एक जीप वाला था उसके पास पिताजी लाने के लिए भागे परन्तु वह भी किसी काम से जीप लेकर किसी दूसरे गांव गया हुआ था. आधी रात का समय कही से कोई मदद मिलाने की उम्मीद नहीं थी, सभी अपना सर पकड़ कर बेठे थे, उधर चाची की हालत पल प्रति पल बिगडती जा रही थी. हमारे घर हनुमानजी महाराज को ईस्ट देव के रूप में पूजा जाता है, दादाजी ने सबको हनुमान चालीसा पढ़ने के लिए कहा और खुद "संकट कटे मिटे सब पीरा जो सुमिरे हनुमत बल बीरा" का जाप निरंतर करने लगे.

सबका मन चिंता में डूबा हुआ था की अचानक घर के बाहर किसी गाडी के रुकने की आवाज आई, सब बाहर भागे तो है की शहर के अस्पताल की अम्बुलांस कड़ी है, सबको घोर आश्चर्य हुआ, ड्राईवर ने पुचने पर बत्ताया की अगले गांव के किसी मरीज को लेकर शाम को हॉस्पिटल से निकला था, लेकिन आते समय रात को उसकी गाडी खराब हो गई, उसके लाख कोशिस करने पर भी गाडी स्टार्ट नहीं हुई, तब वह मन मार गाडी में सुबह होने का इंतज़ार करने लगा, थोड़ी देर में मेरी झपकी लग गई, सोते हुए मुझे अचानक लगा की कोई मुझे कह रहा है की जल्दी उठ, गाडी चालू कर, अगले गांव जल्दी पहुच. मेरी नींद खुल गई, मन बेचेंन था, मेने डरते डरते गाडी चालु करने की कोशिस की और गाडी स्टार्ट हो गई, में वहा से जल्दी से जीप दौडाई, मेरे मन में यह सवाल उठ रहा अगले गांव में किसके पास जाउंगा, क्यया पुछुगा, सब हंसी उडायेगे. पर जब इस गांव में आया तो आपके घर में इतनी रात को रौशनी देखि तो यही पर आकार गाडी रोक दी, अब आप लोग बताए की क्या बात है.

दादाजी ने उसी पूरी बात जल्दी से बताई और उसको नाश्ता करवाया और चाची को लेकर वहा से जल्दी से निकले. गाडी में दादाजी, पिताजी और चाचाजी अविरल हनुमान चालीसा और मंत्र का पाठ कर रहे थे. हॉस्पिटल पहुंचे तो डॉ ने कहा की यदि थोड़ी देर हो जाती बच्चे और चाची दोनों की जान को ख़तरा था, परन्तु समय रहते हनुमानजी की क्रपा से इलाज होने से दोनों की जान बच गई.

उस समय के हिसाब से में उस समय बच्चा था परन्तु वह समय आज भी मेरे दिमाग में वैसे का वैसे ही है. ये बात याद आते ही शारीर का रोम रोम खडा हो जाता है. बोलो हनुमानजी महाराज की जय.

Raman46
18-01-2012, 03:46 PM
बहुत ही अद्भुत घटना थी!!!
जय माँ वैष्णोदेवी की!!!!!!
मुझे मेरे साथ घटी कोई भी ऐसी अद्भुत घटना याद नहीं है...
लेकिन एक बार मैं पुरे परिवार के साथ बिहार जा रहे थे.
नोर्थइस्ट ट्रेन खगड़िया स्टेशन पर कुछ ही देर के लिए रुकती है.
ट्रेन में बहुत भीड़ थी.
मेरे डैडी ने कुछ किसी तरह रोंग साइड में उतार दिया और वे भी उतर गए..
लेकिन मेरी मम्मी ट्रेन में ही थी और ट्रेन चल पड़ी!
मेरे डैडी ने उन्हें उतार ने की कोशिश की और मम्मी डैडी पर गिर पड़ी!
किस्मत अच्छी थी की दोनों में से कोई पटरी के अंदर नहीं गए और कोई भी चोट नहीं आयी!

इससे तो यह अवश्य लगता है की
जाको रखे साइयां मार सके न कोई
बाल ना बांका करी सके चाहे सारा जग बैरी होय.

शुक्रिया मित्र द्रकुला जी / स्वागत है आप का / धन्यवाद / जय वैष्णवी

Raman46
18-01-2012, 03:47 PM
यह बात तब की है जब मैं igtr में पढाई कर रहां था
मुझे रात में बहुत बुरा सपना आया और मुझे ऐसा लग रहा था की आदित्य आज काम करने को मत जा आज कुछ बुरा होने वाला है
फिर भाई मैं काम करने को गया पर दोपहर खाना खाने के बाद मुझे फिरसे ऐसा महसूस होने लगा तो मैं रूम पर चला गया
पर हमारे सर ने मुझे वहाँ से भी बुला लिया की urgent डाई अस्सेम्ब्ली करके चला जा तो मैं गया
मैंने थोड़ी देर काम किया तो एक पार्ट को थोडा grind करना था तो मैं हैण्ड grinder ले आया और थोड़ी देर काम किया
तो अचानक से वह मेरे दाए हाथ पर आया औए मैं भी गिर गया और वह ग्रिंदर मेरे कलाई के थोडा निचे घुस गया था
पर अचनाकसे उसकी बेअरिंग जाम होकर वह रुक गया
मैंने खुद उसको बाहर खिंच कर निकाला तो एक बड़ी जोर से खून की धार उडी और बाद में जोरोंसे खून बाहर निकलने लगा
सब लोग जमा हो गए उन्होंने मुझे पट्टी बाँधी और डॉक्टर के पास लेके गए
पर रविवार होने के कारण जल्दी डॉक्टर भी नहीं मिला हम लोगोंको अचनाक्से याद आया की पास में एक डॉक्टर रहता है तो उसके पास गए
डोक्टारने क्या हुआ है देखने के लिए पट्टी खोली तो मुझे अचानक से चक्कर आकर मैं बेहोश हुआ
और मैंने एक बहुत तगड़े व्यक्ति को देखा उसके हाथमें त्रिशूल था पर मैं चेहरा देख नहीं पाया
मैंने उनसे बहुत बाते कियी उन्होंने अन्तमें बताया की बेटा तेरे लिए काल आया था पर वक़्त नहीं आया था
मैं यह सुनकर उठ गया और मैंने पूछा की मैं कितनी देर बेहोश था तो वह बोले मुशील से १-२ मिनट
बाद में डॉक्टर बोला अगर और थोड़ी देर grinder चलता तो मेरी पूरी कलाई कट जाती और बाकी की नसें कटाने से मौत की भी संभावना थी


इसके बादमें भी बहुत बार ऐसी कई घटनाए घटी पर प्रभु की कृपा है

"जाको राखे साइयां, मार सके न कोय, बाल न बांका कर सके जो जग बैरी होय "
जय वैष्णवी

Raman46
18-01-2012, 03:52 PM
..........एक दिन रात को १ बजे अचानक चाची को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई, गांव के डॉ और दाई को जगाकर फ़ौरन बुलाया गया परन्तु उन्होंने असमर्थता जताते हुए तुरंत शहर ले जाने की सलाह दी, गांव में एक जीप वाला था उसके पास पिताजी लाने के लिए भागे परन्तु वह भी किसी काम से जीप लेकर किसी दूसरे गांव गया हुआ था. आधी रात का समय कही से कोई मदद मिलाने की उम्मीद नहीं थी, सभी अपना सर पकड़ कर बेठे थे, उधर चाची की हालत पल प्रति पल बिगडती जा रही थी. हमारे घर हनुमानजी महाराज को ईस्ट देव के रूप में पूजा जाता है, दादाजी ने सबको हनुमान चालीसा पढ़ने के लिए कहा और खुद "संकट कटे मिटे सब पीरा जो सुमिते हनुमत बल बीरा" का जाप निरंतर करने लगे.

सबका मन चिंता में डूबा हुआ था की अचानक घर के बाहर किसी गाडी के रुकने की आवाज आई, सब बाहर भागे तो है की शहर के अस्पताल की अम्बुलांस कड़ी है, सबको घोर आश्चर्य हुआ, ड्राईवर ने पुचने पर बत्ताया की अगले गांव के किसी मरीज को लेकर शाम को हॉस्पिटल से निकला था, लेकिन आते समय रात को उसकी गाडी खराब हो गई, उसके लाख कोशिस करने पर भी गाडी स्टार्ट नहीं हुई, तब वह मन मार गाडी में सुबह होने का इंतज़ार करने लगा, थोड़ी देर में मेरी झपकी लग गई, सोते हुए मुझे अचानक लगा की कोई मुझे कह रहा है की जल्दी उठ, गाडी चालू कर, अगले गांव जल्दी पहुच. मेरी नींद खुल गई, मन बेचेंन था, मेने डरते डरते गाडी चालु करने की कोशिस की और गाडी स्टार्ट हो गई, में वहा से जल्दी से जीप दौडाई, मेरे मन में यह सवाल उठ रहा अगले गांव में किसके पास जाउंगा, क्यया पुछुगा, सब हंसी उडायेगे. पर जब इस गांव में आया तो आपके घर में इतनी रात को रौशनी देखि तो यही पर आकार गाडी रोक दी, अब आप लोग बताए की क्या बात है.

दादाजी ने उसी पूरी बात जल्दी से बताई और उसको नाश्ता करवाया और चाची को लेकर वहा से जल्दी से निकले. गाडी में दादाजी, पिताजी और चाचाजी अविरल हनुमान चालीसा और मंत्र का पाठ कर रहे थे. हॉस्पिटल पहुंचे तो डॉ ने कहा की यदि थोड़ी देर हो जाती बच्चे और चाची दोनों की जान को ख़तरा था, परन्तु समय रहते हनुमानजी की क्रपा से इलाज होने से दोनों की जान बच गई.

उस समय के हिसाब से में उस समय बच्चा था परन्तु वह समय आज भी मेरे दिमाग में वैसे का वैसे ही है. ये बात याद आते ही शारीर का रोम रोम खडा हो जाता है. बोलो हनुमानजी महाराज की जय.

"संकट कटे मिटे सब पीरा जो सुमिरे हनुमत बल बीरा"

"फ़ानूस बन कर जिसकी हिफ़ाज़त हवा करे, वो शमा क्या बुझे, रौशन जिसे ख़ुदा करे"
जय वैष्णवी

Kamal Ji
18-01-2012, 04:10 PM
रमन जी आप अपनी संदेश पेटिका को यथासम्भव खली करें.

Raman46
18-01-2012, 04:15 PM
रमन जी आप अपनी संदेश पेटिका को यथासम्भव खली करें.

शुक्रिया अनु जी /स्वागत है / संदेश पेटिका खाली पड़ी है / जय वैष्णवी

ben ten
18-01-2012, 07:54 PM
रमन भाई जी आपने एक ऐसे सूत्र का निर्माण किया है जो इस कलियुगी समय में यह सोचने को विवश कर देता है कि क्या वास्तव में ऐसी कोई शक्ति है जो हमारे जीवन में ऐसे समय परिवर्तन लाती है जब हमें कोई परिवर्तन की कोई उम्मीद नहीं होती है।
जल्द ही कुछ पोस्ट करूँगा।

Raman46
18-01-2012, 08:47 PM
रमन भाई जी आपने एक ऐसे सूत्र का निर्माण किया है जो इस कलियुगी समय में यह सोचने को विवश कर देता है कि क्या वास्तव में ऐसी कोई शक्ति है जो हमारे जीवन में ऐसे समय परिवर्तन लाती है जब हमें कोई परिवर्तन की कोई उम्मीद नहीं होती है।
जल्द ही कुछ पोस्ट करूँगा।
शुक्रिया मित्र आप का /
"फ़ानूस बन कर जिसकी हिफ़ाज़त हवा करे, वो शमा क्या बुझे, रौशन जिसे ख़ुदा करे"
मित्र ! दैविक शक्तियां आज भी है / आपने सुना होगा जब भी कोई डॉक्टर किसी मरीज का ओप्रेसन करने जाता है तो सबसे पहले वो परम पिता परमेश्वर को ही याद करते है / अक्सर उनसे ये सुनने को मिलता है कि, मैं अपना कर्तव्य निभा रहा हूँ जीवन -मरण तो ऊपर बाले के हाथ ही है / आज वैज्ञानिक युग का जमाना है / मेडिकल साइंस अपने चरम सीमा पर है ,फिर भी इनके अनुयाई अर्थार्त डॉक्टर , उन चमत्कारी शक्तियों को ही तब्जो देते नजर आते है / कोई न कोई शक्ति तो है जो उनिभर्शल है जिसे नकारा नही जा सकता /
शुक्रिया मित्र आप का / सूत्र पर स्वागत है / जय वैष्णवी

amararya
18-01-2012, 08:51 PM
raman bhaae namaskar aapke prayaas ki jitni bhi taarif ki jaaye kam hai is prakaar ki sutr ka nirmaan karne k liye sutrdhaar RAMANbhaae ko mai tahe dil se sukrgujaar hu aur ummid hai antarvasna pariwaar hi nahi sabhi sadasya aapki bhawnaawo k samjhenge#subhratri

Raman46
18-01-2012, 08:56 PM
raman bhaae namaskar aapke prayaas ki jitni bhi taarif ki jaaye kam hai is prakaar ki sutr ka nirmaan karne k liye sutrdhaar RAMANbhaae ko mai tahe dil se sukrgujaar hu aur ummid hai antarvasna pariwaar hi nahi sabhi sadasya aapki bhawnaawo k samjhenge#subhratri

शुक्रिया मित्र अमर जी / धन्यवाद /
"जाको राखे साइयां, मार सके न कोय, बाल न बांका कर सके जो जग बैरी होय "
जय वैष्णवी

srtjoon
18-01-2012, 09:33 PM
तुलसी भरोसे राम के, निर्भय हो के सोए
अनहोनी होनी नहीं, होनी हो सो होए॥

Raman46
18-01-2012, 10:58 PM
तुलसी भरोसे राम के, निर्भय हो के सोए
अनहोनी होनी नहीं, होनी हो सो होए॥

शुक्रिया मित्र स्र्त्जून जी स्वागत है सूत्र पर आप का

Raman46
19-01-2012, 12:58 PM
"जाको राखे साइयां, मार सके न कोय, बाल न बांका कर सके जो जग बैरी होय "
जय वैष्णवी

Raman46
19-01-2012, 01:50 PM
रमन जी आप अपनी संदेश पेटिका को यथासम्भव खली करें.

"फ़ानूस बन कर जिसकी हिफ़ाज़त हवा करे, वो शमा क्या बुझे, रौशन जिसे ख़ुदा करे"
जय वैष्णवी

Jayeshh
19-01-2012, 07:27 PM
रमणजी..... बहुत ही अच्छा सूत्र शुरू किया है......

Raman46
19-01-2012, 07:29 PM
रमणजी..... बहुत ही अच्छा सूत्र शुरू किया है......

शुक्रिया जयेश भाई स्वागत है आप का मित्र / कुछ आप भी बताएं अपना अनुभव /
जय वैष्णवी

guruji
19-01-2012, 07:53 PM
मैंने देखा है कि एक सड़क जिस पर 120 की गति से कारें और 80 की गति से ट्रक चलते हैं, एक स्कूटर सवार युगल को पीछे से तेज गति आती एक बड़ी कार ने टक्कर मारी, दोनों सवार पीठ के बल जैसे सड़क पर लेट गए गिर कर और उसी पल एक ट्रक उनसे 4-5 फ़ुट की दूरी पर चीं चीं करता रूका। दोनों को मामूली अन्दरूनी चोटें लगी। स्कूटर की हालत यह थी कि एक तरफ़ से देखने से लगता था कि शो रूम में खड़ा है और दूसरी तरफ़ से बिल्कुल चूर चूर !

guruji
19-01-2012, 07:58 PM
पुरानी घटना : मैं अपने दो मित्रों के साथ बस में सफ़र कर रहा था। तीनों खड़े थे। एक दोस्त बिल्कुल दरवाजे पर बन्द दरवाजे को पकड़े खड़ा था। अचानक झटके के साथ बस का दरवाजा खुला और मेरा मित्र गिरने को था कि मेरा हाथ उसकी ओर बढ़ा और उसके हाथ में मेरी कलाई आ गई। मैं अन्दर बस में लगे डण्डे को पकड़े हुए था दूसरे हाथ से तो दोनों बच गए।

Raman46
19-01-2012, 08:49 PM
मैंने देखा है कि एक सड़क जिस पर 120 की गति से कारें और 80 की गति से ट्रक चलते हैं, एक स्कूटर सवार युगल को पीछे से तेज गति आती एक बड़ी कार ने टक्कर मारी, दोनों सवार पीठ के बल जैसे सड़क पर लेट गए गिर कर और उसी पल एक ट्रक उनसे 4-5 फ़ुट की दूरी पर चीं चीं करता रूका। दोनों को मामूली अन्दरूनी चोटें लगी। स्कूटर की हालत यह थी कि एक तरफ़ से देखने से लगता था कि शो रूम में खड़ा है और दूसरी तरफ़ से बिल्कुल चूर चूर !


पुरानी घटना : मैं अपने दो मित्रों के साथ बस में सफ़र कर रहा था। तीनों कहड़े थेए। एक दोस्त बिल्कुल दरवाजे पर बन्द दरवाजे को पकड़े खड़ा था। अचानक झटके के साथ बस का दरवाजा खुला और मेरा मित्र गिरने को था कि मेरा हाथ उसकी ओर बढ़ा और उसके हाथ में मेरी कलाई आ गई। मैं अन्दर बस में लगे डण्डे को पकड़े हुए था दूसरे हाथ से तो दोनों बच गए।

शुक्रिया गुरु जी ! सादर प्रणाम /
इसकी तरह अपने शिष्य के हौशले बढ़ाते रहे /
तभी तो कहा गया .......जाको राखें साईंयां मार सके ना कोई , बाल ना बांका कर सके जो जग बैरी होय //
नियम्मानुशार गुरु दक्क्षिना तो बनता है गुरुवर / देखता हूँ कोशिश करके आप की कृपया हुई तो ग्रहण अवश्य करेंगे / वैसे भी कोई भी गुरु ऋण से कभी भी मुक्ति नही पा सकता/
गुरु गोविन्द दोउ खड़े काको लागुं पाँऊ, बलिहारी गुरु आप की गोविन्द दिओ बताय /

ben ten
19-01-2012, 10:16 PM
अभी हाल ही की घटना है, 2 दिसंबर 2011 की सुबह लगभग 9 बजे की बात है। मेरे चाचा जी को अचानक सीने में दर्द होना शुरू हो गया। दर्द तेज होने लगा तो पापा उन्हें लेकर अस्पताल की ओर भागे। आप को तो पता ही होगा उन दिनों राजस्थान में सरकारी डॉक्टर हड़ताल पर चल रहे थे और आए दिन 5-7 मरीजों की मृत्यु के समाचार अखबार में प्रकाशित होते थे, हमारे लिए यह एक बड़ी समस्या थी। खैर मामला भगवान के ऊपर छोड़ पापा उन्हें लेकर अस्पताल गए। अब तक चाचा जी की स्थिति काफी खराब हो चली थी।
लगभग आधे घंटे बाद पापा अस्पताल पहुँचे तो सबसे पहले देखते हैं कि सभी डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद हैं। संयोग या कहें भगवान की कृपा से उसी दिन डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल वापस ली थी।
अब अस्पताल तो पहुँच चुके थे लेकिन सरकारी काम-काज था न जल्दी कैसे पूरा हो! अब वहाँ के डॉक्टरों ने टांग अड़ानी शुरू कर दी, ये जाँच करवाएँ, यहाँ से नहीं फलाँ लेब से कराएँ, बाहर की लेब से करवाओ तो कहे कि अस्पताल से करवाएँ बाहर की सही नहीं है। इस तरह से खूब अड़चनेँ आ रही थी। आखिर में जाँच हुई तो पता चला कि उनके हृदय की कोई धमनि अथवा शिरा ब्लॉक हो गई है। डॉक्टरों ने तो बस ऑपरेशन का राग अलापना शुरू कर दिया, जबकि पहले एक इंजेक्शन के द्वारा प्रयास किया जाता है।
घर के सभी लोग काफी परेशान थे। तभी न जाने कहाँ से एक औरत आई और सीधा ही डॉक्टर के पास गई और उससे पूछा कि क्या आपने पहले इंजेक्शन देकर ट्राई किया है? डॉक्टर ने मना कर दिया और उल्टा उस औरत से ही पूछ बैठा यह मरीज तुम्हारे क्या लगता है? औरत ने उत्तर दिया कि यह मेरा भाई है और उस डॉक्टर को काफी खरी-खोटी सुनाई। तब कहीं जाकर डॉक्टर पहले इंजेक्शन देने को तैयार हुआ।
इंजेक्शन दिया गया और शाम तक चाचाजी को दर्द से छुटकारा मिल पाया।
वाकई वह औरत उस दिन देवी के स्वरूप में आई और सहायता करके चली गई।

Raman46
20-01-2012, 11:55 AM
अभी हाल ही की घटना है, 2 दिसंबर 2012 की सुबह लगभग 9 बजे की बात है। मेरे चाचा जी को अचानक सीने में दर्द होना शुरू हो गया। दर्द तेज होने लगा तो पापा उन्हें लेकर अस्पताल की ओर भागे। आप को तो पता ही होगा उन दिनों राजस्थान में सरकारी डॉक्टर हड़ताल पर चल रहे थे और आए दिन 5-7 मरीजों की मृत्यु के समाचार अखबार में प्रकाशित होते थे, हमारे लिए यह एक बड़ी समस्या थी। खैर मामला भगवान के ऊपर छोड़ पापा उन्हें लेकर अस्पताल गए। अब तक चाचा जी की स्थिति काफी खराब हो चली थी।
लगभग आधे घंटे बाद पापा अस्पताल पहुँचे तो सबसे पहले देखते हैं कि सभी डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद हैं। संयोग या कहें भगवान की कृपा से उसी दिन डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल वापस ली थी।
अब अस्पताल तो पहुँच चुके थे लेकिन सरकारी काम-काज था न जल्दी कैसे पूरा हो! अब वहाँ के डॉक्टरों ने टांग अड़ानी शुरू कर दी, ये जाँच करवाएँ, यहाँ से नहीं फलाँ लेब से कराएँ, बाहर की लेब से करवाओ तो कहे कि अस्पताल से करवाएँ बाहर की सही नहीं है। इस तरह से खूब अड़चनेँ आ रही थी। आखिर में जाँच हुई तो पता चला कि उनके हृदय की कोई धमनि अथवा शिरा ब्लॉक हो गई है। डॉक्टरों ने तो बस ऑपरेशन का राग अलापना शुरू कर दिया, जबकि पहले एक इंजेक्शन के द्वारा प्रयास किया जाता है।
घर के सभी लोग काफी परेशान थे। तभी न जाने कहाँ से एक औरत आई और सीधा ही डॉक्टर के पास गई और उससे पूछा कि क्या आपने पहले इंजेक्शन देकर ट्राई किया है? डॉक्टर ने मना कर दिया और उल्टा उस औरत से ही पूछ बैठा यह मरीज तुम्हारे क्या लगता है? औरत ने उत्तर दिया कि यह मेरा भाई है और उस डॉक्टर को काफी खरी-खोटी सुनाई। तब कहीं जाकर डॉक्टर पहले इंजेक्शन देने को तैयार हुआ।
इंजेक्शन दिया गया और शाम तक चाचाजी को दर्द से छुटकारा मिल पाया।
वाकई वह औरत उस दिन देवी के स्वरूप में आई और सहायता करके चली गई।

कोई न कोई अज्ञात शक्ति है जो हर वक्त हमारी रक्षा करती है / तभी तो कहते है :
"जाको राखे साइयां, मार सके न कोय, बाल न बांका कर सके जो जग बैरी होय "
जय वैष्णवी

Triple-S HARYANVI
20-01-2012, 06:22 PM
मस्त है रमण जी


क्या धांसू सूत्र बनाया है

Raman46
20-01-2012, 06:38 PM
मस्त है रमण जी


क्या धांसू सूत्र बनाया है
शुक्रिया सीसवाल जी भाई / स्वागत है सूत्र पर

"जाको राखे साइयां, मार सके न कोय, बाल न बांका कर सके जो जग बैरी होय "
जय वैष्णवी

Raman46
20-01-2012, 06:56 PM
"फ़ानूस बन कर जिसकी हिफ़ाज़त हवा करे, वो शमा क्या बुझे, रौशन जिसे ख़ुदा करे"
जय वैष्णवी

Triple-S HARYANVI
22-01-2012, 10:31 AM
"फ़ानूस बन कर जिसकी हिफ़ाज़त हवा करे, वो शमा क्या बुझे, रौशन जिसे ख़ुदा करे"
जय वैष्णवी


तो कब चल रहे है माता के दरबार ...............?????

Raman46
22-01-2012, 10:41 AM
तो कब चल रहे है माता के दरबार ...............?????

स्वागत है आप का सीसवाल जी / कहा जाता है जब तक माता की इक्षा नही होती तब तक कोई भक्त वहां पहुच नही पाता है / और जब उनकी इक्षा हो जाती है तो कोई रोक भी नही सकता है उस भक्त को / देखते है सीसवाल जी कब उनकी कृपा दृष्टि होती है इंतजार तो है / जय वैष्णवी

Badtameez
22-01-2012, 10:53 AM
जय श्री राम !
खुदा जिस पर कृपा करता है।
संकट उसे छूने से भी डरता है।।

Raman46
22-01-2012, 11:11 AM
जय श्री राम !
खुदा जिस पर कृपा करता है।
संकट उसे छूने से भी डरता है।।
सत्य वचन है / मारने बाला से बचाने बाला के हाथ बहुत ही लम्बे होतें है /

Badtameez
22-01-2012, 11:13 AM
सत्य वचन है / मारने बाला से बचाने बाला के हाथ बहुत ही लम्बे होतें है /

जी हां बिल्कुल ।।।।।।।।।।।।।।

Raman46
22-01-2012, 11:43 AM
जी हां बिल्कुल ।।।।।।।।।।।।।।

स्वागत है गीतकार सौरभ जी /
कोई गीत प्रस्तुत कीजिये ना मित्र स्वरचित / मजा आएगा दोस्त

Raman46
22-01-2012, 04:49 PM
मुर्दाघर में पोस्टमार्टम से पहले उठ बैठा मुर्दा
http://hindi.pardaphash.com/uploads/images/300/47893.jpg मुजफ्फरनगर। कहते हैं जाको राखे साइयाँ मार सके न कोई| एक खबर है आगरा के एक गाँव की जहाँ एक चिकित्सकों द्वारा मृत घोषित बालक दोपहर बाद मुर्दाघर में जिंदा हो उठा। इसे ईश्वरीय चमत्कार कहा जाए या फिर कुछ और..।

मिली जानकारी के मुताबिक, आगरा के गांव नौरंगपुर निवासी 14 वर्षीय राधे पुत्र ओमप्रकाश काम की तलाश में मुजफ्फरनगर आया था, जिसे चार दिन पहले चरथावल क्षेत्र के गांव न्यामू निवासी आदेश ने घर व खेत पर काम के लिए रख लिया था। बताते हैं कि शनिवार शाम को राधे खेत पर काम कर रहा था तो उसकी तबीयत अचानक खराब हो गई। आनन फानन में उसके परिजनों ने उसे आगरा जिला चिकित्सालय में शनिवार को यह कहते हुए भर्ती कराया कि खेत पर उसे दौरा पड़ गया था। डाक्टरों ने उपचार शुरू कर दिया। रात (http://it.ph.affinity.com/ctrack0.php?&cmpubid=sfw84&cmskps=&cmsite=hindi.pardaphash.com&cmchannelid=&cmurl=http%3A%2F%2Fhindi.pardaphash.com%2Fnews%2F--688833%2F688833.html&cmref=http%3A%2F%2Fwww.google.co.in%2Furl%3Fsa%3Dt %26rct%3Dj%26q%3D%2522%25E0%25A4%259C%25E0%25A4%25 BE%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258B%2B%25E0%25A4%25B0 %25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2596%25E0%25A5%2587%2B%2 5E0%25A4%25B8%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2587%25E0%2 5A4%25AF%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%2581%252C%2B%26s ource%3Dweb%26cd%3D9%26ved%3D0CF8QFjAI%26url%3Dhtt p%253A%252F%252Fhindi.pardaphash.com%252Fnews%252F--688833%252F688833.html%26ei%3DwO8bT6WMLcSHrAeI2d2G DQ%26usg%3DAFQjCNHagSdrDF8YX-91Ks1Wxgoyh7pfYQ&cmoe=google&cmoq=%22%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A5%8B%20%E0 %A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%96%E0%A5%87%20%E0%A4%B8%E0%A 4%BE%E0%A4%87%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%81%2C%20&cmua=Mozilla%2F5.0%20%28Windows%20NT%205.1%3B%20rv %3A5.0%29%20Gecko%2F20111017%20Firefox%2F5.0%20Epi c%2F5.0&cmss=1152x864&cmvp=1144x734&cmvd=1152864-3301136&cmvc=1b1881871e537b7d78325981b799fd66&cmtitle=%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4 %A6%E0%A4%BE%E0%A4%98%E0%A4%B0%20%E0%A4%AE%E0%A5%8 7%E0%A4%82%20%E0%A4%AA%E0%A5%8B%E0%A4%B8%E0%A5%8D% E0%A4%9F%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4 %9F%E0%A4%AE%20%E0%A4%B8%E0%A5%87%20%E0%A4%AA%E0%A 4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%87%20%E0%A4%89%E0%A4%A0%20%E0% A4%AC%E0%A5%88%E0%A4%A0%E0%A4%BE%20%E0%A4%AE%E0%A5 %81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%BE%20%3A%3A%2 0%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0% A4%AB%E0%A4%BE%E0%A4%B6&rnd=1327230977246&q=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%A4&at=XS&cmip=0&cmis=4&cmid=27&cmdt=p) में हालत गंभीर देख उसे उपचार के लिए मेरठ मेडिकल रेफर कर दिया गया, लेकिन हालत बिगड़ता देख परिजनों ने उसे मेरठ न ले जाकर वहीं रखा।

गत रविवार रविवार को सुबह इमरजेंसी मेडिकल आफिसर ने जाँच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। यहां से राधे का शव जिला अस्पताल स्थित मुर्दाघर में रखवा दिया गया। दोपहर बाद अस्पताल कर्मचारी राधे को पोस्टमार्टम हाउस ले जाने के लिए मुर्दाघर पहुंचे तो वह वहां बैठा मिला।

इसे देखकर परिजनों की खुशी की लहर दौड़ पड़ी| वह इसे ईश्वरीय चमत्कार मान रहे हैं। देर शाम राधे को उपचार के लिए मेरठ स्थित सुभारती अस्पताल रेफर कर दिया।

Raman46
22-01-2012, 04:53 PM
जाको राखे साइयाँ...
http://wscdn.bbc.co.uk/worldservice/assets/images/2011/07/31/110731021017_plane_crash_226x170_bbc_nocredit.jpg ैरीबियन एयरलाइंस के न्यूयार्क से आनेवाले विमान में 163 लोग सवार थे.


गुयाना की राजधानी जार्ज टाऊन हवाई अड्डे पर एक कैरीबियन एयरलाइंस का यात्री जहाज़ उस वक्त दुर्घटनाग्रस्त होकर दो हिस्सों में टूट गया जब वो उतर रहा था.
हांलाकि इस हादसे में कई यात्रियों को मामूली चोटें आई, एक व्यक्ति का पैर टूट गया, पर इसमें किसी की मौत नहीं हुई.
कैरीबियन एयरलाइंस का बोइंग 737-800 विमान न्यूयार्क से आ रहा था और इसमें 157 यात्री समेत 163 लोग सवार थे.
विमान के दो टुकड़े बारिश के मौसम में बोइंग हवाई अड्डे की विमान पट्टी को पार कर गया और बाड़ से जा टकराया और दो हिस्सों में टूट गया.

जब विमान उतरा तो बड़ी ज़ोर की आवाज़ आई. हर कोई चीखने लगा. मैं भगवान से प्रार्थना कर रही थी. मेरे पति ने विमान का आपात दरवाज़ा खोल दिया, सारे लोग विमान से निकल कर इधर उधर भागने लगे.




विमान में सफ़र कर रही एक प्रत्यक्षदर्शी महिला ने बताया, “जब विमान उतरा तो बड़ी ज़ोर की आवाज़ आई. हर कोई चीखने लगा. मैं भगवान से प्रार्थना कर रही थी. मेरे पति ने विमान का आपात दरवाज़ा खोल दिया, सारे लोग विमान से निकल कर इधर उधर भागने लगे.”
गुयाना के राष्ट्रपति भारत जगदेव ने समाचार एजेंसी एपी से कहा कि क़िस्मत से विमान रूक गया और पास की 61 मीटर गहरी खाई में नहीं गिरा.
अगर ऐसा होता तो बहुत लोग मारे जाते . वो बहुत बहुत शुक्र गुज़ार हैं कि ज़्यादा लोग घायल नहीं हुए.
कैरीबियन एयरलाइंस के चेयरमैन जार्ज निकोलस ने कहा कि जो कुछ हुआ वो किसी चमत्कार से कम नही है.

Raman46
22-01-2012, 04:57 PM
जाको राखे साइयाँ...
































'जाको राखे साइयाँ, मार सके न कोय' वाली कहावत चीन में उस समय चरितार्थ हो गई जब एक शराबी पिता ने अपनी दस महीने की दुधमुँही बच्ची को आठ मंजिला इमारत से नीचे फेंक दिया, लेकिन वह बच गई।

समाचार पत्र 'शंघाई डेली' ने शुक्रवार को बताया कि अपनी सास से किसी बात पर बहस होने के दौरान शराबी व्यक्ति ने बच्ची को खिड़की से बाहर फेंक दिया, लेकिन बच्ची एक पेड़ की शाखा पर टकराने के बाद फूलों के एक गुच्छे पर जा गिरी। हालाँकि गिरने से बच्ची की एक टाँग टूट गई। वह अस्पताल में भर्ती है और खतरे से बाहर है।

बच्ची के पिता को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। हालाँकि शंघाई टीवी को दिए साक्षात्कार में उसने कहा कि बच्ची दुर्घटनावश गिरी है।

Raman46
22-01-2012, 05:16 PM
वॉशिंग मशीन में धुली बिल्ली


http://hindi.oneindia.in/img/10/05/100528014439_kitten226_thump.jpg

कहते हैं बिल्ली की नौ जानें होती हैं और वह बहुत सख़्त जान होती है. एक कहावत यह भी है कि जाको राखे साइयाँ, मार सके न कोय...ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में बिल्ली के बच्चे किम्बा ने यह साबित कर दिया जब वह वॉशिंग मशीन के अंदर गंदे कपड़ों के ढेर में छिप गया और किसी ने ग़लती से मशीन चला दी.

बिल्लियों के बारे में आपकी जानकारी कितनी?

किम्बा के मालिक लिंडसे रोजर्स ने कहा कि जब वह धुले कपड़े निकालने गए और भीगी हुई किम्बा को देखा तो उनकी हैरानी की इंतिहा नहीं रही.उन्होंने कहा, "मुझे अपनी आँखों पर यक़ीन नहीं आया. वह इतनी तरबतर थी जैसे पानी में डूबा चूहा".

रोजर्स ने कहा, "वॉशिंग मशीन आख़िरी कुछ क्षणों में बहुत तेज़ी से स्पिन करती है और मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि वह उसे झेल पाई".ठंड से कांपती किम्बा को जानवरों के डॉक्टर के पास ले जाया गया जहाँ हाइपोथर्मिया और सदमे के लिए उसका इलाज हुआ.

उसकी आँखों की भी जाँच हुई जो लाल हो रही थीं-शायद वॉशिंग पाउडर की वजह से.किम्बा अब सही-सलामत है लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि वह बहुत ख़ुशक़िस्मत है.लिंडसे रोजर्स का कहना है, "लगता है उसने अपनी सभी नौ ज़िंदगियाँ जी ली हैं".

Raman46
22-01-2012, 05:24 PM
बच्ची को कुत्तों और बिल्लियों ने पाला'
http://hindi.oneindia.in/img/09/05/20090528103120dog_203_thump.jpg


रुस में अधिकारियों को पाँच साल की एक ऐसी बच्ची का पता चला है जो कुत्तों और बिल्लियों की शरण में पली है, जो भौंकती है लेकिन बोल नहीं सकती. पाँच वर्षीय ये लड़की साइबेरिया के शहर चिता के एक गंदे फ़्लैट से मिली है. पुलिस के अनुसार लड़की को फ़्लैट से कभी बाहर निकलने नहीं दिया गया और उसने अपने साथ रहने वाले जानवरों के आचरण को अपना लिया.

अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने बच्ची को अपनी शरण में ले लिया है. उनका कहना है, " ये लड़की कुत्तों की तरह भौंकती है और जब देखभाल करने वाला कमरा से निकल जाता है तो वो कुत्तों की तरह दरवाज़े पर छलांगें मारती है."

माँ से पूछताछ
ये लड़की पाँच साल तक फ़्लैट से बाहर नहीं गई और कुत्तों और बिल्लियों के साथ पली है, बच्ची बहुत ही गंदी हालत में पाई गई थी और उसने बहुत ही गंदा कपड़ा पहन रखा था और उसका व्यवहार जानवरों जैसा था पुलिस का बयान

बच्ची के साथ उस फ़्लैट में दो बुज़ुर्ग समेत कई लोग रहते थे. अधिकारियों का कहना है कि इस लड़की की माँ से पुलिस पूछताछ कर रही है.
उसके पिता की तलाश जारी है.

पुलिस के अनुसार ये बच्ची बहुत ही गंदी हालत में पाई गई थी. उसने बहुत ही गंदा कपड़ा पहन रखा था और उसका व्यवहार जानवरों जैसा था.

पुलिस ने एक बयान में कहा है, "ये लड़की पाँच साल तक फ़्लैट से बाहर नहीं गई और कुत्तों और बिल्लियों के साथ पली-बढ़ी है." पुलिस के अनुसार बच्ची जानवरों जैसी आवाज़े निकालती है लेकिन बोल नहीं पाती है. हालांकि वो रुसी भाषा समझ लेती है.
रुस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने कुछ महीने पहले कहा था कि बच्चों की सुरक्षा और उनको प्रताड़ना से बचाने के लिए कई कद़म उठाने की आवश्यकता है. उनका

Raman46
22-01-2012, 05:28 PM
17 घंटे तक लहरों से जंग








'जाको राखे साइयाँ, मार सके न कोए' कहावत धार जिले के बाकानेर में चरितार्थ हो गई। 17 घंटे तक ट्रक सहित मान नदी की लहरों में अटके चालक और उसे निकालने गए एक व्यक्ति को मनावर और बाकानेर के तैराक दलों ने बचा लिया। यह खाली ट्रक पीथमपुर से अजंदा की ओर जा रहा था।


बाकानेर से करीब 1 किमी दूर उफन रही मान नदी की रपट से शुक्रवार रात करीब साढ़े 9 बजे ट्रक निकल रहा था। तभी ट्रक तेज बहाव में बह गया और करीब 100 फुट दूर जाकर आड़ा हो गया। इसमें चालक कमलेश निवासी तलवाड़ा व क्लीनर प्रकाश पिता गोविंद निवासी अजंदा फँस गए। ये दोनों जीजा व साले हैं। दोनों ट्रक के ऊपरी हिस्से में खड़े होकर मदद की गुहार करते रहे।


रात दो बजे क्लीनर को निकाला

ग्रामीण और क्षेत्रवासी रस्से डालकर इन्हें निकालने की कोशिश करते रहे। रात करीब 2 बजे क्लीनर प्रकाश को निकालने में सफलता मिली, किंतु चालक नहीं निकल पाया। रात को एक बार फिर नदी के जलस्तर में वृद्धि हो गई। परिणामस्वरूप चालक कमलेश को नहीं निकाला जा सका। शनिवार को चालक को बचाने के लिए मनावर के एक व्यक्ति ने पहल की। उसने अपने शरीर पर ट्यूब डाल रखा था, जो अचानक फिसल गया। इस कारण वह भी बाढ़ के पानी में फँस गया। रस्सा होने से जैसे-तैसे वह ट्रक तक पहुँच पाया। ऐसे में फिर से ट्रक पर दो लोगों की जानें संघर्ष करती रहीं। कमलेश को निकालने में इसलिए देरी हो रही थी, क्योंकि पानी के बहाव से निपटने के लिए विशेष साधन नहीं थे। दोपहर 2.10 बजे मनावर और बाकानेर के तैराक दलों ने आखिरकार दोनों को निकालने में सफलता पा ली।


बैरियर पार किया

बाकानेर चौकी प्रभारी एसके दुबे ने बताया कि बाढ़ का पानी देखते हुए पुलिस ने रस्सी से बैरियर तैयार कर दिया था। इसके बावजूद ट्रक चालक व क्लीनर ने जोखिम उठाया, इस कारण यह स्थिति बनी।


16 घंटे बाद बचाव दल

धार में आपदा प्रबंधन को लेकर हर साल बैठक होती है। नियंत्रण कक्ष आदि खोलने की औपचारिकता की जाती है जबकि नर्मदा पट्टी के क्षेत्र में बाढ़ से बचाव के लिए विशेष इंतजाम होना चाहिए। करीब 16 घंटे बाद यह बचाव दल मौके पर पहुँचा।

Raman46
22-01-2012, 05:39 PM
जाको राखे साईया मार सके न कोय ! ( शीर्षक आप का -श्री विजय माथुर जी )


http://1.bp.blogspot.com/-gbUH4rkcpxw/TjvMQ3Hlv6I/AAAAAAAAAbg/e8gGj8TjdWg/s320/06072011253.jpg (http://1.bp.blogspot.com/-gbUH4rkcpxw/TjvMQ3Hlv6I/AAAAAAAAAbg/e8gGj8TjdWg/s1600/06072011253.jpg)

ये है मोहित अग्रवाल की जुड़वा बेटियाँ !
आज कुछ न लिख कर , अपनी एक पसंदीदा पोस्ट , जो तारीख १०-११-२०१० को पोस्ट किया था , को फिर से एक बार आप के सामने हाजिर कर रहा हूँ ! उस समय मै इस ब्लॉग जगत में बिलकुल नया था ! साथ ही हिंदी पोस्ट करने की पद्धति से भी अनभिग्य ! पाठक भी कम थे ! अतः ज्यादा लोगो तक नहीं पहुँच सका ! मेरी हिंदी भी शुद्ध नहीं थी ! दक्षिण भारतीय लफ्जो में लिखी गयी थी ! आज मेरी हिंदी कुछ - कुछ सुधर सी गयी लगती है ! इसका भी एक मात्र कारण - यह ब्लॉग जगत ही है ! आज उस पोस्ट को कुछ सुधार कर पेस्ट कर रहा हूँ ! उस समय मैंने इसे -"आप-बीती----०३. नवम्बर माह." के शीर्षक से पोस्ट किया था !

http://3.bp.blogspot.com/_b0y-n_x-cKU/TNpZSE394UI/AAAAAAAAAIc/TfT5uUqaebs/s400/30102010135.jpg (http://3.bp.blogspot.com/_b0y-n_x-cKU/TNpZSE394UI/AAAAAAAAAIc/TfT5uUqaebs/s1600/30102010135.jpg)
दुनिया में जो कुछ भी हमारे नजरो के सामने है ,उसमे कुछ न कुछ है.यही कुछ एक छुपी हुई सच्चाई है अथवा सब मिथ्या ! यानी मानो तो देव , नहीं तो पत्थर ! मैंने बहुत से व्यक्तियों को तरह -तरह के तर्क देते और आलोचना करते देखा है ,यह आलोचना मौखिक और लिखित दोनों रूप में मिल जायेगी ! बहुत से लोग इस दुनिया के मूल भूत इकाई पर ,भरोसा ही नहीं करते! हमारी उपस्थिति ही किसी अनजान सच्चाई की ओर इंगित करती है !.और हम सब किसी के हाथ के गुलाम है .जो हमे पूरी तरह से बन्दर की भाक्ति नचाता है.!




मै दुनिया के हर सृष्टी में किसी के सजीव रूप को प्रत्यक्ष देखता हूँ !. उसके इशारे बिना ,एक पत्ता भी नहीं हील सकता ! . "जाको राखे साईया ,मार सके न कोय." यह वाक्य जब कही गयी होगी उस समय कुछ तो जरुर हुआ होगा या जिसने यह पहला उच्चारण किया होगा , उसने कुछ न कुछ अनुभव जरुर किया होगा ! , इसी कड़ी को सार गत आगे बढाते हुए ,इस माह के आप-बीती के कड़ी में एक सच्ची घटना प्रस्तुत कर रहा हूँ.!

Raman46
22-01-2012, 05:40 PM
बात उन दिनों की है ,जब मै सवारी गाड़ी के लोको चालक के रूप में पदोन्नति लेकर पाकाला डेपो में पदस्थ था.पाकाला आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में पड़ता है.यहाँ से तिरुपति महज ४२ किलोमीटर है! यह घटना तारीख १५.०२.१९९९ की है! दिन सोमवार था.और मै २४८ सवारी ट्रेन को लेकर ,धर्मावरम ( यहाँ से सत्य साईं बाबा के आश्रम यानी प्रशांति निलयम ,जो अनंतपुर जिले में पड़ता है, को जाया जा सकता है ) से , अपने मुख्यालय पाकाला की तरफ आ रहा था.! दोपहर की वेला और ट्रेन बिना किसी समस्या के ...समय से चल रही थी ! होनी को कौन टाल सकता है! एक ह्रदय बिदारक घटना घटी ! जिसे मै जीवन में भूल नहीं पाता हूँ ! यह घटना मुझे हमेशा याद आती रहती है.! इसी लिए २०११ वर्ष में भी एक बार फिर आप के लिए प्रस्तुत कर रहा हूँ !




हुआ यह की जब मेरी ट्रेन मदन पल्ली स्टेशन के होम सिगनल के करीब पहुँचने वाली थी,तभी एक नौजवान औरत करीब २२-२३ बरस की होगी ,अपने गोद में करीब एक बरस की बच्ची को लिए हुए थी ,अचानक पटरी के बीच में आकर खड़ी हो गई.! .मेरी गाड़ी की गति करीब ५०-६० के बीच थी ! मैंने जैसे ही उसे देखा आपातकालीन ब्रेक लगा दी ! गाड़ी तो रुकी पर उस महिला को समेट ले गई.! मै अनायास इस एक पाप का भागी बन गया ! नया - नया और जीवन में पहली आत्महत्या देखी थी ! हक्का - बक्का सा हो गया ! समझ में नहीं आया की अब क्या करू !.खैर ट्रेन रुक गई.मैंने अपने ट्रेन गार्ड को अचानक ट्रेन के रुकने की सूचना दे दी और कहा की पीछे जाकर उस महिला के मृत शरीर की मुआयना करें , देंखे की क्या हम कुछ कर सकते है जैसे की फर्स्ट ऐड वगैरह यदि वह जीवीत हो ! मैंने अपने सहायक लोको पायलट श्री टी.एम्.रेड्डी को जाकर देखने को कहा !.मेरे ट्रेन गार्ड श्री रामचंद्र जी थे !.कुछ समय के बाद मेरा सहायक चालक मुझे जो खबर ,वाल्की -तालकी के माध्यम से दी , वह चौकाने वाली थी!


सूचना----
१) उस महिला की - सीर में चोट की वजह से मौत हो चुकी थी.और पटरी के किनारे उसकी मृत प्राय शारीर पड़ी हुई थी ! .सीर से खून के फब्बारे लगातार रिस रहे थे !
२)दूर कंकड़-पत्थर के ऊपर उसकी छोटी बच्ची निश्चेत पड़ी हुई थी !




अब समस्या थी उनके मृत अस्थि को उठा कर ट्रेन में लोड करने की ! . मैंने ट्रेन गार्ड और अपने सहायक को कहा की दोनों के अस्थियो को ---उठा कर गार्ड ब्रेकभैन में लोड कर लिया जाए ! उन्होंने ऐसा ही किया.! महिला के अस्थि को कुछ यात्रियों की मदद से ब्रेक में लोड कर दिया गया ! जब मेरा सहायक उस छोटी सी बच्ची को, जो पत्थर पर मृतप्राय पड़ी थी ,को उठाना चाहा , तो वह बच्ची तुरंत रो पड़ी और डरी-डरी सी कांपने लगी.थी ! यह देख हमें आश्चर्य का ठीकाना न रहा क्यों की जिस बच्ची को हमने गेंद की तरह उप्पर उछलते देखा था , वह बिलकुल ज़िंदा थी ! यह विचित्र दृश्य देख ,सभी ट्रेन यात्री ,हक्का-बक्का सा हो गए ! जिस चोट से उसकी माँ की मृत्यु हो गयी थी,उसी गंभीर चोट के बावजूद वह जिन्दा थी ! वाह ..क्या कुदरत की कमाल है.,इस दृश्य को जिन्हों ने देखा,वे जहा भी होंगे लोगो में चर्चा जरुर करते होंगे ! भाई वाह इस उप्पर वाले के खेल निराले !.हमने ट्रेन को चालू किया और मदन पल्ली रेलवे स्टेशन पर आ गये !उस बच्ची को थोड़ी सी चोट लगी थी ,इस लिए रेलवे डॉक्टर को तुरंत बुलाया गया ! मदनपल्ली में रेलवे स्वास्थ्य केंद्र है ! बाक़ी जरुरी प्रक्रिया करने के बाद ,मृत महिला और उसके जीवीत बेटी को ड्यूटी पर तैनात स्टेशन मेनेजर को सौप दिया गया ,ताकि आस-पास के गाँव में ,सूचना फैलने के बाद,उचित परिवार को उनकी बॉडी सौपी जा सके ! फिर हमने अपनी आगे की सफ़र जारी रखी !




मै शाम को ५ बजे पाकाला पहुंचा और सारी घटना - अपनी पत्नी को बताई ! मेरी पत्नी ने जो कहा वह वाकई नमन के योग्य है ! मेरी पत्नी ने कहा की - " उस बच्ची को घर लाना था हम पाल-पोस लेते थे ! " मै अपने पत्नी की इच्छा को सुन कर कुछ समय के लिए दंग रह गया और मन ही मन अपने पत्नी और उस दुनिया को बनाने वाले को नमन किया ! मेरे आँखों में आंसू आ गए ! क्यों की हमें कोई प्यारी सी लड़की नहीं है ! मै सिर्फ इतना ही कह सका की ठीक है - अगले ट्रिप पर जाने के समय उस स्टेशन पर पता करूँगा ,अगर कोई न ले गया होगा तो उस बच्ची को अपने घर ले आऊंगा !




सोंचता हूँ आज मेरे पास वह सब कुछ है जो इस आधुनिक ज़माने में लोग इच्छा रखते है ! दो सुनहले सुपुत्र भी है एक राम जी तो दूजा बालाजी ,पर बेटी नहीं है ! शायद इसकी इच्छा भगवान ने पूरी नहीं करनी चाही ! फिर भी सोंचते है , चलो दो बेटियाँ बहु बन कर तो आ ही जायेंगी !




दूसरी बार ,जब मै मदनपल्ली गया तो उस बच्ची के बारे में पता किया ! वह महिला पास के गाँव की रहने वाली थी ! उसके माता-पिता ,आकर उसके शव और बच्ची को ले गए थे! सोंचता हूँ,आज वह बच्ची करीब १३ बर्ष की हो ही गयी है ! उससे मिलने और उसे देखने की इच्छा आज भी है ,लेकिन उसका पता मालूम नहीं !.कई बार मदन पल्ली के स्टेशन मेनेजर से संपर्क बनाया पर उस समय ड्यूटी पर रहने वाले मास्टर के सिवा इस घटना की जानकारी किसी और को नहीं है !




लोग इस तरह आत्महत्या क्यों करते है ? .क्या इस कार्य से वे संतुष्ट हो जाते है ? क्या घरेलु झगड़े का इस तरह निदान ठीक है ? मनुष्य को श्रद्धा और सब्र से काम लेना चाहिए ! सोंचता हूँ इस घटना के पीछे भी कोई घरेलु कारण ही होंगे !.हमें जीवन को इतना कमजोर नहीं समझना चाहिए ! जरुरत है अच्छे कर्मो में लिप्त होने की ! आखिर क्यों ? उस छोटी बच्ची का बाल न बांका हुआ और उसकी माँ को मृतु लोक मिला ! कुछ तो है !

MALLIKA
22-01-2012, 06:48 PM
लाजवाब सूत्र सिन्हा जी !
आपकी ये ट्रेन वाली बात पढ़ कर वाकई लगता है की !
" होई वही जो राम रची राखा !"
मित्र सिन्हा जी जल्द ही मैं अपनी आप बीती इस सूत्र में लिखूंगी !

Triple-S HARYANVI
22-01-2012, 07:46 PM
रमण जी आपके नए और अनोखे सूत्र और उसमे आपके द्वारा डाली गई अद्भुत जानकारी के लिए आपको बधाई के साथ चीज़ी ++++++++++++++++++++++++++++++

shaktiman96
22-01-2012, 08:41 PM
माफ़ करना भाई साहब मैं भी कुच्छ आप बीती कहूँगा आज थोडा जल्द बाजी में हूँ / बुत ही प्रेरणा दायक सूत्र है रमण भाई

Raman46
23-01-2012, 02:36 PM
रमण जी आपके नए और अनोखे सूत्र और उसमे आपके द्वारा डाली गई अद्भुत जानकारी के लिए आपको बधाई के साथ चीज़ी ++++++++++++++++++++++++++++++


माफ़ करना भाई साहब मैं भी कुच्छ आप बीती कहूँगा आज थोडा जल्द बाजी में हूँ / बुत ही प्रेरणा दायक सूत्र है रमण भाई

स्वागत है मित्र आप सब का / धन्यवाद /
जय वैष्णवी

Raman46
23-01-2012, 08:05 PM
लाजवाब सूत्र सिन्हा जी !
आपकी ये ट्रेन वाली बात पढ़ कर वाकई लगता है की !
" होई वही जो राम रची राखा !"
मित्र सिन्हा जी जल्द ही मैं अपनी आप बीती इस सूत्र में लिखूंगी !



शुक्रिया मित्र मल्लिका जी स्वागत है / मुझे इंतजार भी रहेगी दोस्त

Triple-S HARYANVI
23-01-2012, 08:13 PM
माफ करना रमण जी मेरे पास इस सूत्र के लिए कोई सामग्री नहीं है .............:( :(

Raman46
23-01-2012, 08:17 PM
माफ करना रमण जी मेरे पास इस सूत्र के लिए कोई सामग्री नहीं है .............:( :(

मेरे प्यारे आप सत्संगी है यैसा कैसे हो सकता है दोस्त की आप को इसके लिए कोई सामग्री नही हो / सत्संग में इस प्रकार की घटनाओ का जिक्र हमेशा किया जाता है / जाको राखें साईंयां मार सके ना कोई , बाल ना बांका कर सके जो जग बैरी होई

Triple-S HARYANVI
23-01-2012, 08:33 PM
मेरे प्यारे आप सत्संगी है यैसा कैसे हो सकता है दोस्त की आप को इसके लिए कोई सामग्री नही हो / सत्संग में इस प्रकार की घटनाओ का जिक्र हमेशा किया जाता है / जाको राखें साईंयां मार सके ना कोई , बाल ना बांका कर सके जो जग बैरी होई



सो तो है .............

Raman46
23-01-2012, 09:10 PM
सो तो है .............

फिर देर किस बात की भाई सीसवाल जी / हो जाइये शुरू कुछ बताने को /मुझे इंतजार है भाई आपके मुंह से कुछ प्रवचन सुनने को मिल जाये / धन्यवाद

Badtameez
23-01-2012, 09:14 PM
सबका कल्याण करना ईश्वर!

mantu007
23-01-2012, 09:24 PM
जय हो प्रभु ..सब तेरी ही माया ..........

Raman46
23-01-2012, 10:01 PM
जय हो प्रभु ..सब तेरी ही माया ..........

आप की महामाया कब देखने को मिलेगी मन्टू जी भाई / जय वैष्णवी

Raman46
23-01-2012, 10:02 PM
सबका कल्याण करना ईश्वर!

कुछ तो सुना दीजिये सौरभ जी उनकी गुण गाथा / जय वैष्णवी

laxmi25n
23-01-2012, 11:11 PM
जिसका रछक बजरंगी उसको दर है केसा !

Badtameez
23-01-2012, 11:48 PM
कुछ तो सुना दीजिये सौरभ जी उनकी गुण गाथा / जय वैष्णवी

क्या कहूँ उनकी गुण गाथा
बुद्धि कम है छोटा है माथा
उनकी महिमा वो ही जाने
तुच्छ ये 'सौरभ' क्या पहचाने
न जाने वो किस स्वरूप में
नर या कि नारी के रूप में
हर प्राणी के कष्ट मिटाने
आते वो संकट से बचाने
.
.
जय हो, जय हो!

Raman46
24-01-2012, 10:49 AM
क्या कहूँ उनकी गुण गाथा
बुद्धि कम है छोटा है माथा
उनकी महिमा वो ही जाने
तुच्छ ये 'सौरभ' क्या पहचाने
न जाने वो किस स्वरूप में
नर या कि नारी के रूप में
हर प्राणी के कष्ट मिटाने
आते वो संकट से बचाने
.
.
जय हो, जय हो!

वाह बहुत खूब अच्छी रचना है गीतकार सौरभ जी / जय वैष्णवी

Raman46
24-01-2012, 10:51 AM
जिसका रक्षक बजरंगी उसको डर है केसा !
शुक्रिया लक्ष्मी जी स्वागत है आप का /
जय वैष्णवी

Badtameez
24-01-2012, 12:46 PM
वाह बहुत खूब अच्छी रचना है गीतकार सौरभ जी / जय वैष्णवी

कोटि-कोटि धन्यवाद!!!!

Raman46
24-01-2012, 12:57 PM
कोटि-कोटि धन्यवाद!!!!

स्वागत है मित्र आप का / जय वैष्णवी

Raman46
24-01-2012, 06:07 PM
"जाकोराखेसाइयां, मारसकेनकोय, बालनबांका करसकेजोजगबैरीहोय "
जय वैष्णवी

shaktiman96
24-01-2012, 06:32 PM
क्या कहूँ उनकी गुण गाथा
बुद्धि कम है छोटा है माथा
उनकी महिमा वो ही जाने
तुच्छ ये 'सौरभ' क्या पहचाने
न जाने वो किस स्वरूप में
नर या कि नारी के रूप में
हर प्राणी के कष्ट मिटाने
आते वो संकट से बचाने
.
.
जय हो, जय हो!

सुन्दर रचना है दोस्त

shaktiman96
24-01-2012, 06:45 PM
तक़रीबन दो साल पहले की घटना है मैं साईट पर अपने दोस्तों से के साथ प्रोजक्ट के वारे में सलाह मशविरा कर रहा था की अचानक क्रेन की वायर रोप टूट गयी और इलिमेंट्स निचे आ गिरा / जिस जगह पर मैं खड़ा था मात्र ६ इंच की दुरी पर वो इलिमेंस गिरा / मैं घवरा कर कुछ दूर जा हटा / माजरा देखते ही मैं दंग रह गया / साईट के लोग घवरा गये उन्हें लगा की हम तीनो साथी निचे आ गये इलिमेंट्स के / हम सब को सही सलामत देख कर उन्हें राहत मिली / हम लोग बाल बाल बच चुके थे / तभी तो कहा गया है जाको राखें साइयां मार सके ना कोई ..........

shakti36
24-01-2012, 08:54 PM
तक़रीबन दो साल पहले की घटना है मैं साईट पर अपने दोस्तों से के साथ प्रोजक्ट के वारे में सलाह मशविरा कर रहा था की अचानक क्रेन की वायर रोप टूट गयी और इलिमेंट्स निचे आ गिरा / जिस जगह पर मैं खड़ा था मात्र ६ इंच की दुरी पर वो इलिमेंस गिरा / मैं घवरा कर कुछ दूर जा हटा / माजरा देखते ही मैं दंग रह गया / साईट के लोग घवरा गये उन्हें लगा की हम तीनो साथी निचे आ गये इलिमेंट्स के / हम सब को सही सलामत देख कर उन्हें राहत मिली / हम लोग बाल बाल बच चुके थे / तभी तो कहा गया है जाको राखें साइयां मार सके ना कोई ..........

आप तो बड़े लक्की निकले दोस्त / क्या मैं भी कोई अपनी आप बीती सुना सकता हूँ दोस्त

shaktiman96
24-01-2012, 10:34 PM
आप तो बड़े लक्की निकले दोस्त / क्या मैं भी कोई अपनी आप बीती सुना सकता हूँ दोस्त

शुक्रिया दोस्त स्वागत है / अवश्य सुनाइए मित्र

Raman46
25-01-2012, 07:58 AM
तक़रीबन दो साल पहले की घटना है मैं साईट पर अपने दोस्तों से के साथ प्रोजक्ट के वारे में सलाह मशविरा कर रहा था की अचानक क्रेन की वायर रोप टूट गयी और इलिमेंट्स निचे आ गिरा / जिस जगह पर मैं खड़ा था मात्र ६ इंच की दुरी पर वो इलिमेंस गिरा / मैं घवरा कर कुछ दूर जा हटा / माजरा देखते ही मैं दंग रह गया / साईट के लोग घवरा गये उन्हें लगा की हम तीनो साथी निचे आ गये इलिमेंट्स के / हम सब को सही सलामत देख कर उन्हें राहत मिली / हम लोग बाल बाल बच चुके थे / तभी तो कहा गया है जाको राखें साइयां मार सके ना कोई ..........


आप तो बड़े लक्की निकले दोस्त / क्या मैं भी कोई अपनी आप बीती सुना सकता हूँ दोस्त
शुक्रिया दोस्त स्वागत है / तभी तो कहा गया है :
"जाको राखे साइयां, मार सके न कोय, बाल न बांका कर सके जो जग बैरी होय "
"फ़ानूस बन कर जिसकी हिफ़ाज़त हवा करे, वो शमा क्या बुझे, रौशन जिसे ख़ुदा करे"
जय वैष्णवी

Raman46
27-01-2012, 05:08 PM
"फ़ानूस बन कर जिसकी हिफ़ाज़त हवा करे, वो शमा क्या बुझे, रौशन जिसे ख़ुदा करे"
जय वैष्णवी

Triple-S HARYANVI
27-01-2012, 05:15 PM
"फ़ानूस बन कर जिसकी हिफ़ाज़त हवा करे, वो शमा क्या बुझे, रौशन जिसे ख़ुदा करे"
जय वैष्णवी



जय माता दी.......


मेरा न. कल आएगा .....

Raman46
27-01-2012, 05:21 PM
जय माता दी.......


मेरा न. कल आएगा .....

शुक्रिया सीसवाल जी / स्वागत है मित्र / जय वैष्णवी

Raman46
05-02-2012, 09:41 AM
"फ़ानूस बन कर जिसकी हिफ़ाज़त हवा करे, वो शमा क्या बुझे, रौशन जिसे ख़ुदा करे"
दोस्तों ! आप सभी से अनुरोध है अपना -अपना अनुभव अवश्य लिखें / धन्यवाद

जय वैष्णवी

दोस्तों ! आप सभी से अनुरोध है अपना -अपना अनुभव अवश्य लिखें / धन्यवाद

Raman46
11-02-2012, 06:29 PM
"जाको राखे साइयां, मार सके न कोय, बाल न बांका कर सके जो जग बैरी होय "
"फ़ानूस बन कर जिसकी हिफ़ाज़त हवा करे, वो शमा क्या बुझे, रौशन जिसे ख़ुदा करे"
जय वैष्णवी
क्या कहना चाहेंगे आप / क्या ऊपर बाले की मर्जी के आगे किसी दुश्मन की चाल कामयाव हो सकती है ?