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View Full Version : सम्भोग : भोग से योग तक



gumnamm
26-01-2011, 02:39 PM
सेक्स (सम्भोग),
मानव जीवन का एक अहम हिस्सा
भावनाओं, रूचि-अरुचि, उत्कंठाओं का प्रबल स्त्रोत
इस के सभी पहलुओं पर विचार करते हुए, इसके विस्तृत रूप को वर्णित करते हुए हम इसके प्रभाव को हमारे जीवन में जानने की कोशिश करेंगे.
वैदिक साहित्य सेक्स के लिए क्या कहता है, चिकित्सा विज्ञान इस बारे में क्या कहता है....
इन सभी की चर्चा यहाँ होगी, आशा करता हूँ कि आपको सेक्स का नया रूप दिखाने में सक्षम हो पाऊंगा....

सभी सदस्यों से आशा करता हूँ, इस सूत्र में कहीं भी अपनी लेखनी को स्तरहीन नहीं होने देंगे और यदि आपको भी कोई अलौकिक अनुभव हुआ हो तो आप अपने अनुभव को यहाँ बताइये

gumnamm
26-01-2011, 02:42 PM
प्रकृति ने संतति को बढ़ने के लिए इसका उद्भव किया.
इसे आनंद दायक बनाया ताकि संतान उत्पत्ति के समय के कष्ट को सहा जा सके.
इसको बहुत विस्तृत किया ताकि इसका आनंद कायम रह सके.
जो सक्षम नहीं हो पाते हैं वे कष्टमय जीवन व्यतीत करते हैं, जो सक्षम हैं वे प्रसन्नता महसूस करते हैं.

gumnamm
26-01-2011, 02:48 PM
---- चिकित्सा विज्ञान -----
जीवन के संघर्ष में चिंताओं एवं परेशानियों से मुक्ति का प्राकृतिक उपाय

सेक्स के चरम पर शरीर से फेरोमोन नामक हारमोन का स्राव होता है जो शरीर को शिथिल कर देता है. शरीर तनाव मुक्त हो जाता है.
फेरोमोन कितना स्रावित होगा यह निर्भर करता है मनुष्य की मानसिक भावनाओं पर, अधिक तनाव में कम एवं उन्मुक्त अवस्था में अधिक फेरोमोन स्रावित होता है. इसीलिए सेक्स से पहले फोरप्ले का महत्व है.

kalpana singh
26-01-2011, 02:54 PM
nice theard niyamak ji.kafi pahle ye sutra banana tha aapko.

Ranveer
26-01-2011, 02:55 PM
सेक्स की क्रिया का मानसिक प्रभाव क्या और कितना है जरा बताएं.....

gumnamm
26-01-2011, 02:59 PM
सेक्स प्यार को कई गुना बढाने में सक्षम है
सेक्स करते समय दो शरीर एक दूसरे में समां जाने का प्रयत्न करते हुए इसके चरम तक पहुचते हैं. प्यार का इस से अधिक अद्भुत अनुभव क्या हो सकता है...

सेक्स विराग की अनुभूति है
सेक्स के बाद साथी से वैराग्य की अनुभूति होती है, मुह फेर कर सो जाना इसका एक ज्वलंत उदाहरण है.
यदि प्यार को शाश्वत रखना चाहते हैं तो इस अनुभूति पर विजय प्राप्त करनी होगी, सेक्स के पश्चात् भी अपने साथी से प्रियकर वार्तालाप, उसकी तरफ करवट लिए रहना, सहलाना आदि क्रियाएं प्यार में बढ़ोतरी करती हैं.

सेक्स ही एकमात्र अनुभूति है जिसमे प्यार एवं वैराग्य समाहित हैं.

neelje
26-01-2011, 02:59 PM
bhai je ye to dimagi baate hai ye mari samaj se bahar ke baate hai magar sahi hai

gumnamm
26-01-2011, 03:03 PM
सेक्स की क्रिया का मानसिक प्रभाव क्या और कितना है जरा बताएं.....
जैसे जैसे सूत्र आगे बढ़ता जायेगा, सभी विवरण सामने आते जायेंगे, इसलिए सूत्र पर आपकी निरंतर निगाह की आवश्यकता है,
यह एक ऐसा सूत्र बनाने की कोशिश करूँगा जिसकी हरेक प्रविष्टि में कुछ न कुछ सीखने को मिले. इसलिए किसी भी प्रविष्टि को छोड़ने का मतलब कुछ खोना भी हो सकता है. ध्यान से पढ़ते रहिये.....

akamboj2000
26-01-2011, 03:11 PM
जैसे जैसे सूत्र आगे बढ़ता जायेगा, सभी विवरण सामने आते जायेंगे, इसलिए सूत्र पर आपकी निरंतर निगाह की आवश्यकता है,
यह एक ऐसा सूत्र बनाने की कोशिश करूँगा जिसकी हरेक प्रविष्टि में कुछ न कुछ सीखने को मिले. इसलिए किसी भी प्रविष्टि को छोड़ने का मतलब कुछ खोना भी हो सकता है. ध्यान से पढ़ते रहिये.....


मैं आशा करता हूँ कि इस सूत्र में बहुत कुछ सीखने को मिलेगा भ्राता बहुत ही प्रशंसनीय सूत्र है

gumnamm
26-01-2011, 03:13 PM
फेरोमोन द्वारा दी गई शिथिलता को कमजोरी नहीं समझना चाहिए.
शिथिलता का मतलब है रिलेक्स, इस से थकान दूर होती है, तनाव दूर होता है.
इसी प्रक्रिया में हाई ब्लड प्रेशर नोर्मल होने लगता है, अनेक शारीरिक अवयव आरामदायक स्थिति में आने पर अपनी क्रियाएं सही रूप से करने लगते हैं इसलिए यह अनेक रोगों से मुक्ति का स्त्रोत है.

dev b
26-01-2011, 04:34 PM
आचार्य रजनीश ने भी सेक्स की महता को बड़े प्रभावपूर्ण तरीके से समझाया है ,( सेक्स से समाधि की ओर) रचना की गयी है आचार्य रजनीश द्वारा , दादा भाई कृपया इस पर भी प्रकाश डाले ......आप का देव भारद्वाज

gumnamm
26-01-2011, 04:49 PM
आचार्य रजनीश ने भी सेक्स की महता को बड़े प्रभावपूर्ण तरीके से समझाया है ,( सेक्स से समाधि की ओर) रचना की गयी है आचार्य रजनीश द्वारा , दादा भाई कृपया इस पर भी प्रकाश डाले ......आप का देव भारद्वाज
प्रिय अनुज
मैं सिर्फ एक अदना सा व्यक्ति
मेरी भावनाओं और समझ के अनुसार सूत्र में प्रविष्टि कर रहा हूँ
हाँ, पढ़ कर आपको कितना अच्छा लगा वो तो आप ही बता पाएंगे.

gumnamm
26-01-2011, 05:07 PM
जिस प्रकार से समाधिस्थ योगी अपने इष्ट को मानस में रखकर तपस्या करता है और तप के प्रभाव से फल को पाता है
उसी प्रकार से सम्भोग में व्यक्ति अपने साथी के साथ चरम को प्राप्त करता है अर्थात न सिर्फ खुद अपितु अपने साथी को भी फल की प्राप्ति करवाता है. इस प्रकार से दोहरे फलदायक सुख की प्राप्ति होती है.
जोड़े को एक दूसरे में विश्वास को प्रगाढ़ करता है सेक्स, अक्सर देखने में आता है कि एक से अनजान लड़का-लड़की विवाह बंधन में बंधने के समय लड़की के मन में अपने पति को सर्वस्व अर्पित करने के भाव से समर्पण करती है.

जिस प्रकार से तपस्या में अनेक इष्ट को नहीं साधा जा सकता उसी प्रकार से सेक्स में साथी को बदल बदल कर अच्छे फल की प्राप्ति नहीं की जा सकती है सिर्फ सेक्स ही भोगा जा सकता है, हवस ही पूरी की जा सकती है ना कि सम्भोग के योग को शरीर में समाहित किया जा सकता है.

dev b
26-01-2011, 05:14 PM
दादा भाई आप ने भुत ही ज्ञान वर्धक सूत्र बनाया है , अश है की आप हमारा ज्ञान वर्धन निरंतर करते रहेंगे ...आप का देव भारद्वाज ....
जिस प्रकार से समाधिस्थ योगी अपने इष्ट को मानस में रखकर तपस्या करता है और तप के प्रभाव से फल को पाता है
उसी प्रकार से सम्भोग में व्यक्ति अपने साथी के साथ चरम को प्राप्त करता है अर्थात न सिर्फ खुद अपितु अपने साथी को भी फल की प्राप्ति करवाता है. इस प्रकार से दोहरे फलदायक सुख की प्राप्ति होती है.
जोड़े को एक दूसरे में विश्वास को प्रगाढ़ करता है सेक्स, अक्सर देखने में आता है कि एक से अनजान लड़का-लड़की विवाह बंधन में बंधने के समय लड़की के मन में अपने पति को सर्वस्व अर्पित करने के भाव से समर्पण करती है.

जिस प्रकार से तपस्या में अनेक इष्ट को नहीं साधा जा सकता उसी प्रकार से सेक्स में साथी को बदल बदल कर अच्छे फल की प्राप्ति नहीं की जा सकती है सिर्फ सेक्स ही भोगा जा सकता है, हवस ही पूरी की जा सकती है ना कि सम्भोग के योग को शरीर में समाहित किया जा सकता है.

gumnamm
26-01-2011, 05:16 PM
आज चिकित्सा विज्ञान में नित नए लेख छप रहे हैं जो विभिन्न प्रयोगों पर आधारित हैं
उनमे से यदि सेक्स पर लेख देखे जाएँ तो चिकित्सा विज्ञान सेक्स के योग-करक गुणों को मानता है
रोज सेक्स करने से शरीर को किसी प्रकार का नुक्सान नहीं होता अपितु कई व्याधियों से मुक्ति मिलती है.

एक व्यक्ति का शरीर धीरे धीरे सूखने लगा, बहुत से डॉक्टर को दिखाया ना सिर्फ हमारे शहर अपितु दिल्ली तक भी अनेक doctors से विमर्श किया गया लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात. एक दिन शाम को मित्रों की महफ़िल में बैठे अचानक यह चर्चा चली और एक मित्र ने उन्हें कहा कि उनके एक मित्र डॉक्टर हैं चलो उनको दिखा के आते हैं तो अविश्वास से रोगी मित्र ने कहा कि इतने बड़े बड़े doctors को तो मै दिखा चुका क्या इनसे कोई लाभ मिल पायेगा. मित्र ने जवाब दिया कि यार कौन सी फीस लग रही है, और जाने फायदा हो ही जाये.
डॉक्टर ने पूरी हिस्ट्री देख सुन कर एक सवाल किया कि सेक्स कितने दिन में करते हो तो रोगी का जवाब था, कि वो रूचि नहीं लेता. डॉक्टर ने कहा कि ठीक होना है तो सेक्स करो यही एक दवा है.
और आश्चर्य कि रोगी कुछ ही महीनो में स्वस्थ हो गया.

gumnamm
26-01-2011, 05:22 PM
साथी बदल बदल कर सेक्स करने से विध्वंस की स्थिति भी पैदा हो सकती है.
किसी एक साथी के किसी रोग से ग्रसित होने पर खुद के भी रोगी बन जाने का खतरा हमेशा ही बना रहता है.
सेक्स से सम्बंधित बीमारियाँ ना सिर्फ मानसिक संताप देना वाली अपितु जीवन के लिए घातक भी है.
सिफलिस और गिनोरिया जैसी बीमारियाँ पुराणी और घातक होते हुए भी एड्स के सामने बौनी साबित होती हैं.

साथी के निरंतर बदलाव के कारण मानस में प्यार घटता जाता है और सिर्फ हवस ही शेष रह जाती है.
इसलिए प्रयत्न करना चाहिए कि जीवन में एक दो से अधिक साथी नहीं आने पायें.
प्यार पनपाइए ना कि रोग....
विश्वास पैदा कीजिये ना कि अंधकार

dev b
26-01-2011, 05:27 PM
बहुत अच्छी जानकारी दी है दादा भाई .
आज चिकित्सा विज्ञान में नित नए लेख छप रहे हैं जो विभिन्न प्रयोगों पर आधारित हैं
उनमे से यदि सेक्स पर लेख देखे जाएँ तो चिकित्सा विज्ञान सेक्स के योग-करक गुणों को मानता है
रोज सेक्स करने से शरीर को किसी प्रकार का नुक्सान नहीं होता अपितु कई व्याधियों से मुक्ति मिलती है.

एक व्यक्ति का शरीर धीरे धीरे सूखने लगा, बहुत से डॉक्टर को दिखाया ना सिर्फ हमारे शहर अपितु दिल्ली तक भी अनेक doctors से विमर्श किया गया लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात. एक दिन शाम को मित्रों की महफ़िल में बैठे अचानक यह चर्चा चली और एक मित्र ने उन्हें कहा कि उनके एक मित्र डॉक्टर हैं चलो उनको दिखा के आते हैं तो अविश्वास से रोगी मित्र ने कहा कि इतने बड़े बड़े doctors को तो मै दिखा चुका क्या इनसे कोई लाभ मिल पायेगा. मित्र ने जवाब दिया कि यार कौन सी फीस लग रही है, और जाने फायदा हो ही जाये.
डॉक्टर ने पूरी हिस्ट्री देख सुन कर एक सवाल किया कि सेक्स कितने दिन में करते हो तो रोगी का जवाब था, कि वो रूचि नहीं लेता. डॉक्टर ने कहा कि ठीक होना है तो सेक्स करो यही एक दवा है.
और आश्चर्य कि रोगी कुछ ही महीनो में स्वस्थ हो गया.

draculla
26-01-2011, 05:56 PM
बहुत ही ज्ञानवर्धक सूत्र है.+रेप मेरी तरफ से..........

gumnamm
26-01-2011, 06:49 PM
जिस प्रकार से समाधी में बहुत ही मनोयोग एवं धैर्य से तपस्या की जाती है उसी प्रकार से सम्भोग को भी मनोयोग, धैर्य एवं समय देकर करना चाहिए.
समाधी एवं सम्भोग दोनो में ही वातावरण का शुद्ध होना जरूरी है
समाधी एवं सम्भोग दोनो का ही बिना किसी व्यवधान के पूरा होना जरूरी है
यदि तपस्या भंग हो जाये तो जिस प्रकार से श्राप लगता है उसी प्रकार से सम्भोग में भंग पड़ना भी क्लेश को पैदा करता है.

gumnamm
27-01-2011, 03:15 PM
----- सेक्स की अति के संदर्भ में ------
कुछ केसेज में देखने में आता है कि मन पर सेक्स की हवस हावी हो जाती है
रोगी को अपनी महिला साथी को सेक्स में शारीरिक कष्ट से तडपते देखने में मजा आता है
रोगी सेक्स के समय अपनी साथी को मरता पीटता है, काट खात है, चाकू या हंटर चलता है और हत्या तक कर डालता है
इस प्रकार के रोगी को सैडिस्ट कहते हैं.

gumnamm
27-01-2011, 03:18 PM
---- निम्फोमैनियक ----

किन्ही कारणों से महिला को सेक्स के बिना आराम नहीं आता, उसे रोज सेक्स चाहिए होता है, वो सेक्स के बिना बेचैन हो जाती है.
वो सेकंड ट्रैक में (बेखयाली में) सेक्स के लिए साथी ढूंढती है, सेक्स करती है, वापस आकर अपने कमरे में सो जाती है, कई बार उसे यह तक याद नहीं रहता कि उसने ऐसी कोई हरकत भी की थी.......

dev b
27-01-2011, 03:37 PM
दादा भाई कई बार सेक्स में शारीरिक कष्ट स्त्री द्वारा पुरुष को देने की बात सुनने में आती है कृपया उस पर प्रकाश डाले ......आप का देव भारद्वाज
----- सेक्स की अति के संदर्भ में ------
कुछ केसेज में देखने में आता है कि मन पर सेक्स की हवस हावी हो जाती है
रोगी को अपनी महिला साथी को सेक्स में शारीरिक कष्ट से तडपते देखने में मजा आता है
रोगी सेक्स के समय अपनी साथी को मरता पीटता है, काट खात है, चाकू या हंटर चलता है और हत्या तक कर डालता है
इस प्रकार के रोगी को सैडिस्ट कहते हैं.

Pooja1990 QUEEN
27-01-2011, 04:00 PM
amazing ,fantastik theard in this foram. aapka ek sutra kai hajar kogo ki life me prakash layega. .dfe

gumnamm
27-01-2011, 06:17 PM
दादा भाई कई बार सेक्स में शारीरिक कष्ट स्त्री द्वारा पुरुष को देने की बात सुनने में आती है कृपया उस पर प्रकाश डाले ......आप का देव भारद्वाज

सैडिस्म या मसोचिस्म = दूसरों को कष्ट में देखकर खुश होना. खास तौर से सेक्सुअल कार्य/संदर्भ में.
ये अलग अलग तीव्रता के होते हैं. महिलाओं में पाए जाने वाला सैडिस्म अक्सर कमजोर होता है इसलिए अक्सर घाव भी करती हैं तो नोच-खरोच कर, वो पुरुषों के सुने हुए या भुगते हुए अत्याचारों का बदला लेने के कारण इस प्रकार का बर्ताव करती हैं.

gumnamm
27-01-2011, 07:26 PM
प्रकृति ने सभी मनुष्यों को अलग अलग पसंद दी,
उन सभी पसंद की चीजों में सेक्स भी है. किसी को सेक्स अत्यधिक पसंद है तो किसी को बिलकुल ही पसंद नहीं है.
कोई सैडिस्ट है तो कोई इतना प्यार करने वाला कि धूप की गर्मी भी ना लगने दे अपने दिलवर को.
चाहे पुरुष हो या स्त्री, ये स्वाभाव सभी में कम या ज्यादा हो सकते हैं.

coolcool
27-01-2011, 08:51 PM
प्रकृति ने सभी मनुष्यों को अलग अलग पसंद दी,
उन सभी पसंद की चीजों में सेक्स भी है. किसी को सेक्स अत्यधिक पसंद है तो किसी को बिलकुल ही पसंद नहीं है.
कोई सैडिस्ट है तो कोई इतना प्यार करने वाला कि धूप की गर्मी भी ना लगने दे अपने दिलवर को.
चाहे पुरुष हो या स्त्री, ये स्वाभाव सभी में कम या ज्यादा हो सकते हैं.
santyen जी. सम्भोग को योग से सम्बंधित करता हुआ ऐसा अद्भुत वर्णन आज तक नहीं पढ़ा. आप इस शानदार सूत्र की रचना के लिए बधाई के पात्र हैं. मेरी तरफ से reputation कबूल करें. पुनश्च कृपया मेसोचिस्म के बारे में थोड़ी विस्तृत जानकारी
देने की कृपा करें.

gumnamm
28-01-2011, 11:52 AM
santyen जी. सम्भोग को योग से सम्बंधित करता हुआ ऐसा अद्भुत वर्णन आज तक नहीं पढ़ा. आप इस शानदार सूत्र की रचना के लिए बधाई के पात्र हैं. मेरी तरफ से reputation कबूल करें. पुनश्च कृपया मेसोचिस्म के बारे में थोड़ी विस्तृत जाकारी देकी कृपा करें.
अनुज
क्या आप प्रविष्टि क्रमांक २४ से भी अधिक जानकारी चाहते हैं ??

gumnamm
28-01-2011, 11:54 AM
परेशानी तब उत्पन्न होती है जब दो असमान सेक्स प्रवृत्ति वालों की शादी हो जाती है.
या तो पुरुष और या स्त्री में सेक्स इच्छा की तीव्रता कम होती है या बिलकुल नहीं होती.
इस स्थिति में साथी को कष्टकारक मानसिक यातना होती है.
करे तो क्या करे.
मेरे ख्याल से हम हमारे आसपास भी इस तरह के व्यवहार वाले जोड़ों से रूबरू हुए ही होंगे.
अब इसे चाहे तो प्रकृति का प्रकोप कहें या हमारे पिछले जन्म का पाप....

gumnamm
28-01-2011, 12:08 PM
तपस्या अब शुरू होती है
अपने साथी को धैर्य के साथ सामान्य अवस्था में लाने के लिए.

कहा जाता है कि तपस्या करने के लिए वैरागी होने की आवश्यकता नहीं है, कोई गृहस्थ भी तप कर सकता है
और कितना सही कहा है
जो तप एक गृहस्थ अपना घर चलाने के लिए करता है वो क्या कोई "सामान्य तपस्वी" कर सकता है ????
कदापि नहीं ....

Msy
28-01-2011, 12:24 PM
तपस्या अब शुरू होती है
अपने साथी को धैर्य के साथ सामान्य अवस्था में लाने के लिए.

कहा जाता है कि तपस्या करने के लिए वैरागी होने की आवश्यकता नहीं है, कोई गृहस्थ भी तप कर सकता है
और कितना सही कहा है
जो तप एक गृहस्थ अपना घर चलाने के लिए करता है वो क्या कोई "सामान्य तपस्वी" कर सकता है ????
कदापि नहीं ....

बडे भाई आपने बहुत ही सराहनिय सुत्र बनाया है

Sexy punjabi
28-01-2011, 12:24 PM
बहुत ही शानदार सूत्र है। ईस सूत्र के लिए आप वाकई मेँ बधाई के पात्र हैँ। शुभ कामनाऐँ स्वीकार करेँ।

coolcool
28-01-2011, 12:31 PM
अनुज
क्या आप प्रविष्टि क्रमांक २४ से भी अधिक जानकारी चाहते हैं ??
मित्र santyen जी. सेदिस्म और मेसोचिस्म दो विभिन्न मानसिक अवस्थाएं है. एक सेडिस्ट दूसरों को कष्ट देकर प्रसन्नता का अनुभव करता है जबकि एक मेसोचिस्ट स्वयं कष्ट सहकर(विशेषकर सम्भोग के सन्दर्भ में ) आनंद का अनुभव प्राप्त करता है. सेडिस्ट और सेडिस्म के बारे में कुछ जानकारी अवश्य है परन्तु मेसोचिस्म के सन्दर्भ में उतना विस्तृत ज्ञान नहीं है. अगर आप उसको थोडा वर्णित कर सके तो आभार होगा.
आपका अनुज : coolcool

gumnamm
28-01-2011, 12:45 PM
सैडिस्ट :
विभिन्न मानसिक अवस्था में से एक है सैडिस्ट अर्थात दूसरों को कष्ट में देखकर आनन्दित होने वाला.
सैडिस्ट की भी कई अवस्थाएं होती हैं. कोई कोई तो मारने-पीटने और काट खाने तक सीमित होते हैं और कुछ कष्ट देकर हत्या करने तक से बाज नहीं आते.
जिस प्रकार से कोई व्यक्ति शराब पीकर भी सामान्य रहता है और कोई कोई उलट जाता है उसी प्रकार से सैडिस्ट होते हैं.
सामान्यतया सैडिस्ट एवं मसोचिस्म सेक्स से सम्बंधित माने जाते हैं.

मसोचिस्ट:
इसी प्रकार से सैडिस्ट की उलट अवस्था में व्यक्ति चाहता है कोई उस पर अत्याचार करे अर्थात चरम तक पहुचने से पहले उसे कोई कष्ट दे. उस कष्ट में ये लोग आनन्दित होते हैं चाहे वह स्त्री हो या पुरुष. वो चाहते हैं कि कोई उन्हें मारे-पीटे, कुत्ते की तरह रगड़े-दुत्कारे, यहाँ तक कि खून निकाल दे.
यह दोनों ही अवस्था असामान्य मानसिक अवस्थाएं हैं.

gumnamm
28-01-2011, 12:50 PM
मित्र santyen जी. **************************
आपका अनुज : coolcool
अनुज
बड़े भाई को उसी प्रकार से संबोधन दें ....:cool:

gumnamm
28-01-2011, 01:08 PM
प्रकृति ने बहुत सोच समझ कर ही नर एवं मादा में सेक्स की विभिन्न शक्तिया दी.
नर को उत्तेजना अधिक दी लेकिन सेक्स के एक राउंड में एक ही बार चरम की अनुभूति प्रदान की. उसे दूसरे चरम के लिए पहले राउंड के बाद कुछ समय इन्तजार करना पड़ता है सेक्स हेतु दोबारा से तैयार होने के लिए.
नर को कठोरता दी, उच्च श्रंखल बनाया

तो मादा को संयत सेक्स उत्तेजना दी लेकिन सेक्स के एक राउंड में अनेकों बार चरम तक पहुचने की अद्भुत शक्ति प्रदान की.
मादा मन से दयालु और ममतामयी होती है और स्वभाव की नरम एवं शरीर कोमल.

coolcool
28-01-2011, 01:28 PM
Re: सम्भोग : भोग से योग तक

सैडिस्ट :
विभिन्न मानसिक अवस्था में से एक है सैडिस्ट अर्थात दूसरों को कष्ट में देखकर आनन्दित होने वाला.
सैडिस्ट की भी कई अवस्थाएं होती हैं. कोई कोई तो मारने-पीटने और काट खाने तक सीमित होते हैं और कुछ कष्ट देकर हत्या करने तक से बाज नहीं आते.
जिस प्रकार से कोई व्यक्ति शराब पीकर भी सामान्य रहता है और कोई कोई उलट जाता है उसी प्रकार से सैडिस्ट होते हैं.
सामान्यतया सैडिस्ट एवं मसोचिस्म सेक्स से सम्बंधित माने जाते हैं.

मसोचिस्ट:
इसी प्रकार से सैडिस्ट की उलट अवस्था में व्यक्ति चाहता है कोई उस पर अत्याचार करे अर्थात चरम तक पहुचने से पहले उसे कोई कष्ट दे. उस कष्ट में ये लोग आनन्दित होते हैं चाहे वह स्त्री हो या पुरुष. वो चाहते हैं कि कोई उन्हें मारे-पीटे, कुत्ते की तरह रगड़े-दुत्कारे, यहाँ तक कि खून निकाल दे.
यह दोनों ही अवस्था असामान्य मानसिक अवस्थाएं हैं.
वरिष्ठ नियामक महोदय.उपरोक्त जानकारी के लिए धन्यवाद् . संबोधन के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ. भविष्य में ध्यान रखूंगा.


अनुज
बड़े भाई को उसी प्रकार से संबोधन दें ....:cool:

subodhgudu
28-01-2011, 01:35 PM
भाहूत ही आची जानकारी का सूत्र बनाया है आप ने
इसे जारी रखिये !!!!!!:salut:
प्रकृति ने बहुत सोच समझ कर ही नर एवं मादा में सेक्स की विभिन्न शक्तिया दी.
नर को उत्तेजना अधिक दी लेकिन सेक्स के एक राउंड में एक ही बार चरम की अनुभूति प्रदान की. उसे दूसरे चरम के लिए पहले राउंड के बाद कुछ समय इन्तजार करना पड़ता है सेक्स हेतु दोबारा से तैयार होने के लिए.
नर को कठोरता दी, उच्च श्रंखल बनाया

तो मादा को संयत सेक्स उत्तेजना दी लेकिन सेक्स के एक राउंड में अनेकों बार चरम तक पहुचने की अद्भुत शक्ति प्रदान की.
मादा मन से दयालु और ममतामयी होती है और स्वभाव की नरम एवं शरीर कोमल.

dev b
29-01-2011, 09:57 PM
दादा भाई , नमस्कार , कैसे है आप ? दादा भाई मै अपनी गर्ल फ्रेंड के साथ सेक्स करता हू, तो वो १ बार चरमोत्कर्ष को प्राप्त करने के बाद वो परेशान हो जाती है और लिंग को बाहर निकालने के लिए बोलती है , ये कह कर की ---मेरी योनी छिल रही है , उस को दोबारा चरमोत्कर्ष प्राप्त क्यों नहीं होता ? कृपया जान कारी दे ?....आप का देव भारद्वाज
प्रकृति ने बहुत सोच समझ कर ही नर एवं मादा में सेक्स की विभिन्न शक्तिया दी.
नर को उत्तेजना अधिक दी लेकिन सेक्स के एक राउंड में एक ही बार चरम की अनुभूति प्रदान की. उसे दूसरे चरम के लिए पहले राउंड के बाद कुछ समय इन्तजार करना पड़ता है सेक्स हेतु दोबारा से तैयार होने के लिए.
नर को कठोरता दी, उच्च श्रंखल बनाया

तो मादा को संयत सेक्स उत्तेजना दी लेकिन सेक्स के एक राउंड में अनेकों बार चरम तक पहुचने की अद्भुत शक्ति प्रदान की.
मादा मन से दयालु और ममतामयी होती है और स्वभाव की नरम एवं शरीर कोमल.

jalwa
29-01-2011, 11:01 PM
बेहद ज्ञानवर्धक और जानकारियों से भरपूर सूत्र है. कृपया आगे जारी रखें. धन्यवाद.

gumnamm
31-01-2011, 12:43 PM
दादा भाई , नमस्कार , कैसे है आप ? दादा भाई मै अपनी गर्ल फ्रेंड के साथ सेक्स करता हू, तो वो १ बार चरमोत्कर्ष को प्राप्त करने के बाद वो परेशान हो जाती है और लिंग को बाहर निकालने के लिए बोलती है , ये कह कर की ---मेरी योनी छिल रही है , उस को दोबारा चरमोत्कर्ष प्राप्त क्यों नहीं होता ? कृपया जान कारी दे ?....आप का देव भारद्वाज
यह एक सामान्य प्रक्रिया है
एक बार चरम के बाद अक्सर स्त्री या पुरुष बोरियत महसूस करता है
हमें लगातार सेक्स के लिए तैयार होना या करना होता है.
एक चरम के बाद पुरुष को रुक कर फिर से स्त्री को फोरप्ले से रूचि जागृत करनी होती है

gumnamm
31-01-2011, 12:44 PM
पुरुष का पौरुष यहाँ मात खा जाता है
जहां एक स्त्री एक के बाद एक चरम तक चली जाती है वहां पुरुष एक चरम के बाद कुछ देर के लिए ढीला पड़ जाता है.
इसी प्रकार से पुरुष "शीघ्र पतन या शीघ्र स्खलन" की समस्या से ग्रसित हो सकते हैं लेकिन स्त्रियों में यह कोई समस्या नहीं है.
हाँ अलग अलग स्त्रियों का स्खलन समय अलग अलग हो सकता है लेकिन इनका जल्दी स्खलन होना पुरुषों के लिए सौभाग्य है.
क्योंकि स्त्री को तो अगले चरम के लिए फिर से तैयार किया जा सकता है लेकिन शीघ्र स्खलित पुरुष शरम और संकोच के अतिरिक्त क्या कर सकता है ??

gumnamm
01-02-2011, 10:05 AM
शीघ्र पतन वास्तव में कोई शारीरिक गडबडी नहीं है
यह कोई बीमारी नहीं अपितु समस्या है
वास्तव में सेक्स दिमाग में होता है और दिमाग को संयत करके शीघ्र पतन को ठीक किया जा सकता है.
अति उत्तेजना अनुभव करना ही शीघ्र पतन का कारण है
ध्यान योग से हम इस समस्या से निजात पा सकते हैं

gumnamm
02-02-2011, 12:30 PM
अब मैं कोशिश करता हूँ यह बताने की कि सम्भोग और योग का क्या सम्बन्ध है

अब हम देखें विभिन्न तपस्या द्वारा जो सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं वो क्या क्या हैं...
१. काल शून्यता: कठिन तप द्वारा साधक काल अर्थात समय की सीमा पर विजय प्राप्त कर लेता है.
उसके लिए समय जैसे रुक जाता है.
२. अहम शून्यता : साधक अपने गुरूर अर्थात घमंड पर विजय प्राप्त कर लेता है.
३. परमानन्द प्राप्ति : प्रभु की अनन्य भक्ति से साधक हमेशा ही प्रभु-दर्शन से आनंदित होता रहता है. जिन्होंने प्यार किया है उनको पता होगा,
मन में हमेशा दिलवर का ख्याल रहता है, मन खोया खोया उनकी याद से प्रसन्न होता रहता है.
४. विचार शून्यता: साधक अपने मन के सभी विचार दिमाग से निकाल कर बाहर कर देता है, इस से वह अपने मन को निर्मल कर लेता है.
निर्निमेष और निर्विकार....
५. बिना रोक-टोक आवागमन : दीवारों, पानी और आसमान आदि में विचरण कर लेता है.
इसी प्रकार से वह कुछ और भी सिद्धियाँ प्राप्त कर सकता है.
साधक नियम, संयम, समय और धैर्य आदि से तपस्या करता है, इष्ट को प्रसन्न करता है और सिद्धि प्राप्त करता है लेकिन एक बार की तपस्या से एक ही सिद्धि प्राप्त होती है

gumnamm
02-02-2011, 12:34 PM
अब गहनता से विचार करें
उपरोक्त वर्णित सिद्धियों में से चार निम्न अवस्थाएं हमें सम्भोग के चरम पर प्राप्त होती हैं.
१. विचार शून्यता - चरम पर हमारे दिमाग से सभी विचार शून्य हो जाते हैं
२. अहम शून्यता - उस समय अहंकार नहीं रहता..
३. काल शून्यता - समय का कोई महत्व नहीं रह जाता..
४. परम आनंद अवस्था - यदि सम्भोग को मनोयोग एवं सक्षमता से किया गया है तो हम सभी जानते हैं कि अनिवर्चनीय आनन्द की प्राप्ति होती है

gumnamm
02-02-2011, 12:37 PM
अब यह भी सोचें कि क्या अनैतिक एवं भोग लिप्सा से किये गये सेक्स में यह सब प्राप्त होता है

नहीं......
सिर्फ आनंद प्राप्त होता है वो भी अधूरा, इस डर से कि कहीं कोई देख नहीं ले, कोई ऐसी बात नहीं हो जाये कि मान सम्मान नष्ट हो जाये, बदनामी हो जाये......
इस डर से अन्य सभी योग नष्ट हो जाते हैं...

हम किस सम्भोग से क्या पाते हैं और क्या पाना चाहते हैं
निर्णय हम ही करेंगे...

अभी और भी है ......................

gumnamm
03-02-2011, 08:02 PM
यदि आपको भी कोई अलौकिक अनुभव हुआ हो तो आप अपने अनुभव को यहाँ बताइये.
सभी सदस्यों से आशा करता हूँ, इस सूत्र में कहीं भी अपनी लेखनी को स्तरहीन नहीं होने देंगे

slimsima
04-02-2011, 09:46 PM
सेक्स (सम्भोग),
मानव जीवन का एक अहम हिस्सा
भावनाओं, रूचि-अरुचि, उत्कंठाओं का प्रबल स्त्रोत
इस के सभी पहलुओं पर विचार करते हुए, इसके विस्तृत रूप को वर्णित करते हुए हम इसके प्रभाव को हमारे जीवन में जानने की कोशिश करेंगे.
वैदिक साहित्य सेक्स के लिए क्या कहता है, चिकित्सा विज्ञान इस बारे में क्या कहता है....
इन सभी की चर्चा यहाँ होगी, आशा करता हूँ कि आपको सेक्स का नया रूप दिखाने में सक्षम हो पाऊंगा....

सभी सदस्यों से आशा करता हूँ, इस सूत्र में कहीं भी अपनी लेखनी को स्तरहीन नहीं होने देंगे और यदि आपको भी कोई अलौकिक अनुभव हुआ हो तो आप अपने अनुभव को यहाँ बताइये

आपने सेक्स में आलोकिक अनुभव की बात कही है
मई अपना अनुभव ज़रूर बताना चाहूंगी एक रात में और मेरे साजन देर रात फोन पर बातें करते रहे करीब २ बजे हम सो गए तब सपने में खुद को साजन की बांहों में पाया उन्होंने मुझे आपनी बांहों में ले लिया फिर रति क्रिया के बाद वो जाने लगे मैंने उन्हें रोकने की बहुत कोशिश की पर वे चले गए मेरी आँखों से आंसू निकाल रहे थे तभी अचानक मेरी नींद खुल गई मेरी आँखों मे से सच मई आंसू निकल रहे थे मैंने आपनी आँखों को छू कर देखा वो आंसुओं से गीली थी मुझे बहुत आश्चर्य हुआ तब मई ऊठ कर बाथरूम में गई मुझे आपने अंदर से वीर्ये का रिसाव् वैसा ही महसूस हुआ जैसा साधारण सम्भोग के बाद कभी कभी स्त्री की योनी में से होता है मैंने बेद चेक किया उस पर भी वीर्य था ये आजीब आनुभव में भूल ही नहीं पाती

avf00002
05-02-2011, 02:34 AM
dear slim sima ji yah antarvasna ko padhny ka prabhaw hai jaisa aap sochty ho wahi kriya aapny need mai dohra di lagta ha sex main kuch jyda hi dhyan ha tumhara jara be control yourself halanki mera full apny per control hai or main kisi bhi prakar ki sex sambandhit samsya ka sikar nahi houn ok dear bye....

mr josef
06-02-2011, 01:23 AM
…बहुत ही अच्छी प्रस्तुति है मित्र ऐसे ही और पोस्ट करते रहे

SUNIL1107
11-03-2011, 02:53 PM
बड़े भाई सत्येन जी एक अच्छे सूत्र की बधाई !कृपया सूत्र को आगे बढ़ाएं !

great_brother
12-03-2011, 01:33 PM
फेरोमोन द्वारा दी गई शिथिलता को कमजोरी नहीं समझना चाहिए.
शिथिलता का मतलब है रिलेक्स, इस से थकान दूर होती है, तनाव दूर होता है.
इसी प्रक्रिया में हाई ब्लड प्रेशर नोर्मल होने लगता है, अनेक शारीरिक अवयव आरामदायक स्थिति में आने पर अपनी क्रियाएं सही रूप से करने लगते हैं इसलिए यह अनेक रोगों से मुक्ति का स्त्रोत है.

इस विषय पर आपका ज्ञान बहुत विस्तृत लगता है आप महान है ............

Dark Rider
22-03-2011, 10:17 PM
बड़े भैया आपका ज्ञान अतुल्य है

rawaccess
30-03-2011, 06:58 PM
आचार्य रजनीश ने भी सेक्स की महता को बड़े प्रभावपूर्ण तरीके से समझाया है ,( सेक्स से समाधि की ओर) रचना की गयी है आचार्य रजनीश द्वारा , दादा भाई कृपया इस पर भी प्रकाश डाले ......आप का देव भारद्वाज
मित्र, रजनीश की वो रचना "सम्भोग से समाधी की ओर थी" न की सेक्स से समाधी की ओर. शब्दों पर इसलिए जोर से रहा हूँ क्यूंकि एक तो इस फोरम को हिन्दी फोरम के तौर पर स्थापित किया जा रहा है दूसरी ओर रजनीश ने सम्भोग और योग की बेहद विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की थी. पश्चिम जो सेक्स प्रचलित है उसके माध्यम से योग और ज्ञान की बात करना सही नहीं है.

underground
31-03-2011, 11:03 AM
sambhoog karo roj karo

The White hat Hacker
31-03-2011, 12:52 PM
अतुल्य ज्ञान हम नासमझ बालको को और ज्ञान दीजिए

av_26
31-03-2011, 04:45 PM
Jaise sunya se anant(infinity), in dono ka maan ganit me ek hi hota he, wiase hi sambhog se hi samadhi ki prapti ho sakti he. Matalb he ki sambhog ko aise sidh karo ki bina skhalit huye sambhog ke assan me stith ho jaye aur bina skhalit huye woh assan me stith rahe to woh samadhi ki awastha ho jati he aur charma nand prapt hota he. Waise aap sub dekjhenge ki yag ke assan aur bhog ke assan dono ke hi chourashi prakar bataye gaye he. Matalb ki yog aur bhog dono ek hi sikke ke do pahlu he. Is liye mera to dhrad vishwas he ki sambhog se samadhi prapt ki ja sakti he

Dr.Ashusingh
18-04-2011, 03:29 PM
ਵਾਹ...ਸੁਨ੍ਦਰ

Dr.Ashusingh
18-04-2011, 03:31 PM
वाह...आज तक मॆने जितने भी सूत्रो का भ्रमण किया हे ये उस सब से बेहतरीन हॆ.........ऎसे सूत्रो की वजह से ही अन्तवार्सना फोरम की अलग पहचान हॆ...

smith654321
18-04-2011, 09:09 PM
very nice information in this forum

kinshu
18-04-2011, 09:43 PM
बहुत अच्छा

Raman46
25-04-2011, 05:31 PM
फेरोमोन द्वारा दी गई शिथिलता को कमजोरी नहीं समझना चाहिए.
शिथिलता का मतलब है रिलेक्स, इस से थकान दूर होती है, तनाव दूर होता है.
इसी प्रक्रिया में हाई ब्लड प्रेशर नोर्मल होने लगता है, अनेक शारीरिक अवयव आरामदायक स्थिति में आने पर अपनी क्रियाएं सही रूप से करने लगते हैं इसलिए यह अनेक रोगों से मुक्ति का स्त्रोत है.
बड़े भइया नमस्कार
एक सबाल आप से : अगर साथी फॉर प्ले पसंद ना करे तो क्या उचित होगा ?

Raman46
25-04-2011, 05:48 PM
आपने सेक्स में आलोकिक अनुभव की बात कही है
मई अपना अनुभव ज़रूर बताना चाहूंगी एक रात में और मेरे साजन देर रात फोन पर बातें करते रहे करीब २ बजे हम सो गए तब सपने में खुद को साजन की बांहों में पाया उन्होंने मुझे आपनी बांहों में ले लिया फिर रति क्रिया के बाद वो जाने लगे मैंने उन्हें रोकने की बहुत कोशिश की पर वे चले गए मेरी आँखों से आंसू निकाल रहे थे तभी अचानक मेरी नींद खुल गई मेरी आँखों मे से सच मई आंसू निकल रहे थे मैंने आपनी आँखों को छू कर देखा वो आंसुओं से गीली थी मुझे बहुत आश्चर्य हुआ तब मई ऊठ कर बाथरूम में गई मुझे आपने अंदर से वीर्ये का रिसाव् वैसा ही महसूस हुआ जैसा साधारण सम्भोग के बाद कभी कभी स्त्री की योनी में से होता है मैंने बेद चेक किया उस पर भी वीर्य था ये आजीब आनुभव में भूल ही नहीं पाती
जब अंतर्मन जागृत होता हे तो वाह्य मन अंतर्मन की अबस्था में आ जाता हे
और ये व्ही वक्त होता हे जब हम घोर निद्रा में स्वप्न लीला में प्रवेश करतें हें
वाह्य मन की विचार ,अंतर्मन पूरा करने की कोशिश करता हे ,प्रीतम की याद उनके दयारा किया गया प्यार
को जो छनिक अधुरा रह जाता हे उसे ही पूरा स्वप्न लीला में की जाती हे ये प्रकृतिक दुयारा प्रदत हे /
यही थी वो आप की घडी जो अधूरे मन की कामवासना को पूरा किया गया स्वप्न में /
धन्यबाद

Raman46
25-04-2011, 06:02 PM
अब यह भी सोचें कि क्या अनैतिक एवं भोग लिप्सा से किये गये सेक्स में यह सब प्राप्त होता है

नहीं......
सिर्फ आनंद प्राप्त होता है वो भी अधूरा, इस डर से कि कहीं कोई देख नहीं ले, कोई ऐसी बात नहीं हो जाये कि मान सम्मान नष्ट हो जाये, बदनामी हो जाये......
इस डर से अन्य सभी योग नष्ट हो जाते हैं...

हम किस सम्भोग से क्या पाते हैं और क्या पाना चाहते हैं
निर्णय हम ही करेंगे...

अभी और भी है ......................बड़े भैया
जब उम्र और जिमेदारी बढ़ जाती हे तो तो दोनों जोड़े को समय की भी ध्यान रखना जरुरी पड जाता हे यैसे में सम्भोग लीला में रूचि
कम
होने लग जाती हे
इस स्थिति से कैसे उबरा जाय ताकि सम्भोग की पूरा मजा चखा जाये दोनों साथी दुयारा /
आप का सुझाव ....................

Raman46
25-04-2011, 06:07 PM
बड़े भैया आपका ज्ञान अतुल्य है

तभी तो अन्तरवासना अग्रसर हो रहा हे मतं जी

realitycheck
25-04-2011, 06:17 PM
वाह...आज तक मॆने जितने भी सूत्रो का भ्रमण किया हे ये उस सब से बेहतरीन हॆ.........ऎसे सूत्रो की वजह से ही अन्तवार्सना फोरम की अलग पहचान हॆ...
मैं डाक्टर साहब के वक्तव्य से सहमत हूँ, लेकिन डॉक्टर साहिब आप के अनुसार यह सूत्र और इस सूत्र में दिए गये तथ्य एवं विवरण क्या विज्ञान की कसौटी पर खरे उतारते हैं ? इस बारे में आपकी अमूल्य राय क्या है ?
आपने शरीर विज्ञान पढ़ा है और आपको अनुभव भी अच्छा होना चाहिए. आपके विचार इस सूत्र में दिए गए तथ्यों को नयी पहचान दे सकते है*

Raman46
28-04-2011, 01:26 PM
डाक्टर साहब को जरुर यहाँ व्याखान देना चाहिए

dahiag
29-04-2011, 01:35 PM
badhia sutra hai

Raman46
30-04-2011, 11:56 PM
badhia sutra hai

आप को अच्छा लगा