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View Full Version : ठाकुर और गब्बर ..



Ranveer
26-01-2011, 07:17 PM
दोस्तों इस सूत्र में ठाकुर और गब्बर की कहानी को तोड़ मरोड़ के नए अंदाज़ में प्रस्तुत कर रहा हूँ...आपलोग भी इसमें अपने अंदाज़ के कहानी बनाकर घुसा सकतें है

Ranveer
26-01-2011, 07:22 PM
कहानी की शुरुआत करता हूँ ठाकुर की कहानी जय वीरू के जान लेने के बाद से.....:cool::cool:

Ranveer
26-01-2011, 07:24 PM
ठाकुर की कहानी जान लेने के बाद..==. जय--=-ठाकुर साहब ,हमें ये रूपये नहीं चाहिए...इसे आप अपनी गांड में डाल लीजिये....ठाकुर--- लेकिन मैंने तो सुना है की तुमलोग सिर्फ पैसों के लिए गांड मारते हो.//.वीरू--लेकिन हमलोग फटे गांड को नहीं मारते.//.जय---ठाकुर साहब वैसे तो हम ये रूपये आपके गांड में हाथ डालकर भी निकाल सकतें हैं..लेकिन फ़िलहाल हम ये रूपये नहीं ले सकते.//वीरू-- ठाकुर साहब लेकिन आप ये मत सोचिये की हम आपका काम नहीं करेंगे..हम गब्बर का लंड काटकर आपको ऐसे ही सौप देंगे..///ठाकुर साहब (गुस्से में )---तुमलोग गब्बर का लंड नहीं काटोगे...तुमलोग यहाँ सिर्फ गब्बर के लंड को मेरी गाड में घुसाने आये हो....[इतने में रामलाल आकर कहता है...]--ठाकुर साहब गावं से खबरी आया है गब्बर की सुचना लेकर..(सभी बाहर जातें हैं) खबरी---जय गांड देव की ठाकुर साहब ..ठाकुर--जय गांड देव की...कहो क्या खबर लाये हो..//खबरी--गावं से कुछ दूर पर गब्बर रुका हुआ है..साथ में कई लोंड़ेबाज़ और अठ्रेबाज़ भी हैं..//ठाकुर--वे लोग हर साल गब्बर से अपनी गांड मराने आतें हैं...(ठाकुर जय और वीरू को देखकर कहता है);--लोहा गरम है घुस्सा दो मेरी गांड में..

Ranveer
26-01-2011, 07:36 PM
दोस्तों कहानी की अगली किश्त आपलोगों के रिस्पोंस के बाद ही सोचूंगा ...