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View Full Version : दो पंक्तियाँ



bawa009
27-01-2011, 12:06 AM
दोस्तों यहाँ पर सिर्फ दो पंक्तियाँ होंगी मजे लेने के लिए

bawa009
27-01-2011, 12:08 AM
हमे गुमान था चाहा बहुत ज़माने ने हमे
हम अज़ीज़ सबको थे मगर ज़रूरतों की तरह

bawa009
27-01-2011, 12:09 AM
गिर जाये ज़मीन पर तो संभाले नहीं जाते ……….
बाज़ार मे दुःख दर्द उछाले नहीं जाते ……….!

bawa009
27-01-2011, 12:09 AM
ज़िन्दगी तेरा कोई एहसान नहीं है मुझपे ,
मैंने दुनिया में हर एक सांस की कीमत दी है .....

bawa009
27-01-2011, 12:13 AM
फिजाओं से उलझ कर एक हसीं यह राज़ जाना हैं ,
जिसे कहते हैं मोह्हबत वोह नशा कातिलाना हैं ...

bawa009
27-01-2011, 12:15 AM
मैं नज़र से पी रहा था तो मेरे दिल ने बद - दुआ दी
तेरा हाथ ज़िन्दगी भर कभी जाम तक न पहुंचे

bawa009
27-01-2011, 12:17 AM
चादर तू छोटी क्यों होती जा रही ,
पैर पसारने का मज़ा ही कम हो गया .

bawa009
27-01-2011, 12:20 AM
अनजानी राह है , अनजाना है कारवां
चल पड़े हैं हम फिर भी मंजिल पाने को

bawa009
27-01-2011, 10:45 PM
तूने कहा न था की मैं कश्ती पे बोझ हूँ
आँखों को अब न बंद कर मुझे डूबते भी देख

bawa009
27-01-2011, 10:46 PM
वफ़ा नहीं मुमकिन ऐ ग़ालिब तेरे जहाँ में ,
यहाँ आदतन बेवफाई किये जा रहे हैं लोग ......

bawa009
27-01-2011, 10:58 PM
हमारी किस्मत तो तारो जैसी है ,...
लोग अपनी ख्वाइश के लिए हमारे टूटने की फरियाद करते है

bawa009
27-01-2011, 11:00 PM
उनको लगता है की हम जुबान से थोडा तुतलाते हैं
वो क्या जाने उनके चेहरे पर हंसी लाने का बहाना बनाते हैं

bawa009
27-01-2011, 11:03 PM
आने में मेरे जनाज़े में देर हो गई उनको इतनी
इंतज़ार में उनके थककर मेरी रूह भी चूर हो गयी

bawa009
27-01-2011, 11:05 PM
तुझको चाहा तेरे दहेलिज़ पे सजदा न किया .
वो मेरा इश्क था या मेरी खुदरी है ...

bawa009
27-01-2011, 11:06 PM
कभी तो रोए गा वो भी किसी की बाहों में
कभी तो उस की हंसी को ज़वाल होना है

bawa009
27-01-2011, 11:10 PM
ए सनम तेरी मोहब्बत का सुरूर इतना था के ,,,
होश ही न रहा के रुसवा हो रहे थे हम !!

bawa009
27-01-2011, 11:16 PM
माना तेरी नज़रो में कुछ नहीं है हम
कभी उनसे जाके पूछ जिनको हासिल नहीं है हम

bawa009
27-01-2011, 11:20 PM
वो कितना मेहरबान था के हजारों गम दे गया फ़राज़ '
हम कितने खुद ग़रज़ निकले कुछ न दे सके प्यार के सिवा ...

bawa009
27-01-2011, 11:23 PM
शायद खुशियों का मौसम भी आ जाये फ़राज़ ..
ग़म भी तो मिल गए हैं तम्मना किये बग़ैर ....!

bawa009
27-01-2011, 11:26 PM
शायद खुशियों का मौसम भी आ जाये फ़राज़ ..
ग़म भी तो मिल गए हैं तम्मना किये बग़ैर ....!

bawa009
27-01-2011, 11:28 PM
तुम लाख छुपाओ सीने मैं एहसास हमारी चाहत का ,,,
जब भी दिल तुम्हारा धड़का है आवाज़ यहाँ तक आयी है

bawa009
27-01-2011, 11:31 PM
मुझे आज भी उसके प्यार की शिद्दत रूने नहीं देती ,,,
वोह कहती थी मर जाउंगी तेरे आंसुओं के गिरने से पहले

bawa009
27-01-2011, 11:35 PM
अबके जो हम बिछुड़े तो फीर कुछ ऐसे मिले
सूखे हुए फूल जैसे किताबों में मिले ....

bawa009
27-01-2011, 11:38 PM
बड़ी मुश्किल में हूँ के कैसे इज़हार करूँ
वो तो महक है उसे कैसे गिरफ्तार करूँ

:cool: :cool: :cool:

bawa009
16-02-2011, 11:18 PM
http://i3.squidoocdn.com/resize/squidoo_images/-1/draft_lens7353192module63408682photo_1255684725fun ny.jpg

bawa009
16-02-2011, 11:40 PM
हादसे कभी अचानक नहीं हुआ करते,
एक सदियाँ शामिल होती हैं ऐसे साजिशों में ..!

bawa009
16-02-2011, 11:41 PM
नासिर यूँ उसकी याद चली हाथ थाम कर ;
मेले में इस जहां के खोने नहीं दिया

bawa009
16-02-2011, 11:43 PM
हम साथ न होंगे तो भी यह बात याद रखना ,
अपने आंसूं को बस हमारे नाम रखना ,

bawa009
16-02-2011, 11:45 PM
अब भी आते हैं नज़र धुंध में जुगनू मुझ को
अब भी चलते हुवे रास्ते में ठहर जाता हूँ !

bawa009
16-02-2011, 11:47 PM
बेचैन इस क़दर था सोया न रात भर
पलकों से लिख रह था तेरा नाम चाँद पर

bawa009
16-02-2011, 11:51 PM
कुछ इस अदा से आज वो पहलू नशीं रहे
जब तक हमारे पास रहे हम हम नहीं रहे

bawa009
18-02-2011, 11:46 PM
हम साथ न होंगे तो भी यह बात याद रखना ,
अपने आंसूं को बस हमारे नाम रखना ,

bawa009
18-02-2011, 11:48 PM
दिल की रस्मो का बंधन निभाने का तुम होसला रखना ,
हम छोड़ देंगे दुनिया को पीछे तुम हमपे ऐतबार रखना

bawa009
18-02-2011, 11:50 PM
ये भी किया कम है क हम तेरी तमन्ना में जियें
लुत्फ़ ऐ मंजिल न सही , हसरत ऐ मंज़िल ही सही !!

bawa009
21-02-2011, 07:04 PM
टपक पड़ते हैं आंसू जब तुम्हारी याद आती है
ये वो बरसात है जिस का कोई मौसम नहीं होता

bawa009
22-02-2011, 05:05 PM
रास्ते को भी दोष दे .....आँखें भी कर लाल .......
चप्पल में .... जो कील है ........पहले उसे निकाल ........

sushilnkt
22-02-2011, 05:13 PM
हर लब पर आप का ही नाम हे ....

बस ये ही तो हमारे पास फ़ालतू काम हे .............

bawa009
27-02-2011, 12:25 AM
वोह हमें देखते है सब से नज़र बचा के ,
हम उन्हें देखते है उनसे नज़र बचा के ......

bawa009
27-02-2011, 12:28 AM
जिसे हवा उड़ा के अभी ले गयी , वोह वरक था दिल की किताब का ...
कहीं आसुओं से लिखा हुआ , कहीं आसुओं से मिटा हुआ ...

bawa009
28-02-2011, 02:35 AM
सितम तो तब हो के जब हाल -ऐ -दिल हम उनसे कहें ....
किसी को चाहते रहना कोई खता तो नहीं ...

Raja rangila
28-02-2011, 11:15 PM
वोह हमें देखते है सब से नज़र बचा के ,
हम उन्हें देखते है उनसे नज़र बचा के ......

बहुत खूबसूरती से प्यार के नर्म अहसास को पिरोया है आपने । गुलज़ार साहब की याद दिला दी मित्र ।

Raja rangila
02-03-2011, 11:52 AM
कौन कहता है मुहब्बत की ज़ुबां होती है
ये हक़ीकत तो निगाहोँ से बयां होती है ।

bawa009
03-03-2011, 01:48 AM
हर रिश्ता मिला विरासत में, फिर दोस्ती क्यों अलग से बने है .
क्युकी बाकी रिश्ते बनाये खुदा ने , और दोस्ती खुद खुदा की परछाई है

SUNIL1107
03-03-2011, 12:56 PM
नींद भी खुली न थी कि हाय धूप ढल गई
पांव जब तलक उठें कि जिन्दगी फिसल गई
पात पात झर गए कि शाख़ शाख़ जल गई
चाह तो निकल सकी न पर उमर निकल गई

mam135
05-03-2011, 01:04 AM
में जनता हु की ये कहब ये खुशिया adhuri हे
पर जिन्दा रहने के लिए कुछ गलत pahami jaruri हे

bawa009
23-12-2011, 12:12 AM
जान ले लेती बेरुखी तुम्हारी.. चैन तो मिलता,
मुस्कुरा के जो देखा तुमने.. अधमरा कर दिया.

bawa009
23-12-2011, 12:13 AM
वो क्यूँ मुझको, कनखियों से देखा करता है,
क्या है मुझमे, जो सामने से नजर नहीं आता..

bawa009
23-12-2011, 12:15 AM
तेरा वादा था के इस माह ज़ुरूर आयेगा,
अब तो हर रोज़ गुज़रता है महीने की तरह...

bawa009
23-12-2011, 12:15 AM
कुछ कम ही ताल्लुक है मुहब्बत का जुनूँ से,
दीवाने तो होते हैं बनाए नहीं जाते...

bawa009
23-12-2011, 12:17 AM
मन का भोजन कामना , मन – मन खा न अघाय |
अमन चैन तब ही मिले, जो मन अमन हो जाय |

bawa009
23-12-2011, 12:17 AM
जीवन अर्थ न अर्थ बस,जीवन- भाव न भाव |
जीवन जीया अभाव में,जो जीवन न भाव |

bawa009
23-12-2011, 12:18 AM
न दी न दी कहते सभी ,पर दानी नदी न रोय |
दीन तो सारा जगत,दीन नदी न होय |

bawa009
23-12-2011, 12:19 AM
लप –लप लप-लप करता हरदम,पल-पल बढ़ता काल |
लपक- लपक सब निगल रहा,आज नही तो काल |

bawa009
23-12-2011, 12:20 AM
करते हुए निस्वार्थ ही,स्व- स्वाभाविक कर्म |
अंत जहाँ सब पंथ का,उस शिखर पहुँचना धर्म |

bawa009
23-12-2011, 12:21 AM
चाहे संगत साधु की , हरदम क्यों न होय |
मछली पानी में रहे , पर बास कभी न खोय |

bawa009
23-12-2011, 12:21 AM
साधु पारस है तभी , जब दूजो लोहो होय |
जो मति में पत्थर पड्या , सोनो कहाँ से होय |

bawa009
23-12-2011, 12:22 AM
दुख, प्रेम गहरो पेठे , सुख,वासना उथली होय |
गहरो पाये शान्ति , उथल्यो सदा ही खोय |

bawa009
23-12-2011, 12:23 AM
जल में बैठी मैल सी , मन वृतियां होय |
थोड़ो भी यदि वह हिले , सब मटमैलो होय |

bawa009
23-12-2011, 12:23 AM
काम-वासना सींच कर , मन फल-फूल्यो जाय |
बिन सींचे जब यह फले , तो सच्चो सुख आय |

bawa009
23-12-2011, 12:24 AM
मनन जहाँ वहाँ मन है , मन न जहाँ अ-मन |
जब होवे यह मन अ-मन , वहीं सुख-चैन अमन |

bawa009
23-12-2011, 12:25 AM
जलने की यदि जलन जो , जल से शीतल होय |
मन में दबी घ्रणा-जलन , कभी न ठंडी होय |

bawa009
23-12-2011, 12:26 AM
साधु करता साधना , साधक बन दिन-रात |
साध रहा वह साध्य को , अन्दर जिसका वास |

bawa009
23-12-2011, 12:26 AM
पंडित भय पैदा करे , ले पाप- पुण्य को नाम |
पर निडर-अभय करे , परमेश्वर- भगवान |

bawa009
23-12-2011, 12:27 AM
काम-क्रोध व लोभ से , भरा हुआ इन्सान |
निश्छल-प्रेम,करुणा जहाँ , वहीं बसे भगवान |

faqrudeen
23-12-2011, 03:40 AM
शेरोशायरी में इस तरह की शायरी मेरी पसंदीदा है भाई जान.

faqrudeen
23-12-2011, 03:42 AM
मगर शुरू के चार पेजों के बाद आपने मिज्जाज़ कुछ बदल सा दिया. भाई जान शुरू वाले ही जारी रखो न

bawa009
23-12-2011, 11:26 PM
मगर शुरू के चार पेजों के बाद आपने मिज्जाज़ कुछ बदल सा दिया. भाई जान शुरू वाले ही जारी रखो न


भाई पहले वाले मिज्जाज़ पर प्रतिक्रिया नहीं आ रही थी तो सोचा की ज़रा मिज्जाज़ बदल कर देखा जाए

वो तो आप लोगो के हाथ है आप सब को कैसा रस चैये

Badtameez
23-12-2011, 11:32 PM
एक काम कीजिए बावा जी आप इन दोहों को भी शामिल कीजिए। और शुरूआती पेज वालों को भी।

bawa009
23-12-2011, 11:43 PM
एक काम कीजिए बावा जी आप इन दोहों को भी शामिल कीजिए। और शुरूआती पेज वालों को भी।

:salut: जो आज्ञा मित्र

Badtameez
23-12-2011, 11:45 PM
:salut: जो आज्ञा मित्र


धन्यवाद मित्र!!!!!!

bawa009
24-12-2011, 12:00 AM
धन्यवाद मित्र!!!!!!

किया है कुछ कभी काम के लिए
या किया तो बस ईनाम के लिए



हमने चमका दिए शब्द और हर्फ
थोड़े से और बेहतर दाम के लिए



एक टुकड़ा धूप, नीम का पेड़ हो
यही बहुत है अपने राम के लिए



सोचते तो वैसे हम भी हैं बहुत
कुछ करने काम तमाम के लिए



वो दौर कुछ और रहा होगा रवि
अब तो जी रहे हैं हराम के लिए

Badtameez
24-12-2011, 01:14 PM
सुन्दर है बहुत सुन्दर

bawa009
24-12-2011, 10:43 PM
करे साधु जिसकी साधना , तपसी जिसका तप |
मुनि मनन जिसका करे , वह एकमेव है सच |

bawa009
24-12-2011, 10:43 PM
सेवक मन स्वामी बना , करा रहा सब कर्म |
वश में कर उसे जान के , यही जीवन का मर्म |

bawa009
24-12-2011, 10:44 PM
भटक रहा जो जीव बन , इस संसारी वन |
पार हुआ जो ढूँढ राह , उसने जीया सच्चा जीवन |

bawa009
24-12-2011, 10:45 PM
हर मनका एक कामना , मन का धागा डाल |
मालामाल होने की , फेर रहा है माल |

bawa009
24-12-2011, 10:46 PM
तू मनकों में डोर सा , अंतर्यामी सबमें छुपा |
जिसने खुद को जान लिया , उसने ही जाना खुदा |

bawa009
24-12-2011, 10:47 PM
जब तक शिव होता है जीवन , वरना शव होता है यह तन |
जिसका जान शिव छुटा अहम् , वही शिवम् , वही शिवम् |

bawa009
24-12-2011, 10:47 PM
अपनी जड़े दूसरों में , ढूँढना कहलाती माया |
जिसने उन्हें स्वयं में ढूंढा , उसने ही अनंत पाया |

bawa009
24-12-2011, 10:48 PM
बाहर की सब खोज , व्यर्थ कर्म |
अन्दर स्वयं की खोज , होता है सही धर्म |

Badtameez
25-12-2011, 04:50 AM
आनन्द आया। जारी रखें।

bawa009
01-02-2012, 02:19 AM
भैया ते नर अब नहीं जो मिलते जब काम।
काम में खोजे न मिलैं ऐसे मनुज तमाम।।

बचन देत जो फिरत हैं और नहीं भय लाज।
यसकेपी दर-दर मिलैं ये नर भरे समाज।।
हँसत मिलैं बोलैं मधुर बहुत जतावैं प्यार।
यसकेपी तिनमें नहीं सब को साचो यार।।
कुसल छेम बहु पूछते कुसल सुने दुख भार।
यसकेपी नहि झूठ है ऐसे लोग हजार।।
को अपना को गैर है कौन करे कब वार।
यसकेपी नहि जानता सब झूठों व्यवहार।।

राजा रंक मुरख निपुन ऋषि महर्षि सब देव।
यसकेपी मरने चले बचा नहीं जग केव।।
प्रतिपल बदले सरकता सो जानो संसार।
नसोंमुख यहि जगत में प्रेम राम को सार।।
अहम स्वार्थ अज्ञान बस बन बैठे भगवान।
यसकेपी या जगत में ऐसे बड़े महान।।
साच कहौं नहि झूठ कछु तजौ मान अभिमान।
यसकेपी पहिचानिए जा सेवक हनुमान।।
यसकेपी रघुपति सही बाकी सब है झूठ।
राम न रूठैं होय का जगत जाय जो रूठ।।
ग्रह भूत देवादि जग पूज सरे कछु काम।
अंत समय मुख मोड़ते आते सीताराम।।
जगत विदित सच एक है जगत रहा पर सोय।
यसकेपी देखा-सुना राम नाम सत होय।।
हाय-हाय कर चल बसे शेष रहे बहु काम।
यसकेपी अब का करे भूल गए श्रीराम।।
नाम-दाम लगि पचि मरे हुआ न पर उपकार।
यसकेपी बढ़ता गया जग का यह व्यापार ।।
राम बिना आराम नहि लोग हुये बेराम।
दर-दर सुख खोजत फिरैं खरच रहे बहु दाम।।
राम से चाहैं लोग बहु जग को चाहै राम।
यसकेपी जो चाहता ताहीं को आराम।।
बुरे समय नहि पास को सब मिलते निज काम।
भले-बुरे हर पल मिलैं यसकेपी के राम।।
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डॉ. एस. के. पाण्डेय,
समशापुर (उ.प्र.)।