View Full Version : मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी
ravi chacha
30-01-2011, 10:09 PM
आइए जाने इसके लिए ग्राहकों को क्या करना होगा?
भारत में मोबाइल ओपरेटर बदलने पर ग्राहक जिस नई कम्पनी के पास जाता है, उस कम्पनी को इसकी जिम्मेदारी उठानी होती है. यानी कि प्रबंधन नई कम्पनी से होता है और इसके लिए उसे ग्राहक एक शुल्क चुकाता है.
कोई भी ग्राहक 19 रूपए चुकाकर ऑपरेटर बदल सकता है. परन्तु मोबाइल ओपरेटर इससे कम भी शुल्क ले सकता है अथवा शुल्क माफ भी कर सकता है.
यदि प्रीपेड ग्राहक है तो वह जब ओपरेटर बदलता है तो उसका टॉकटाइम उसके साथ नहीं जाता.
यदि पोस्टपेड ग्राहक है तो वह तब तक ओपरेटर नहीं बदल सकता जब तक की उसकी बकाया राशि चुका ना दी जाए.
ओपरेटर बदलने के लिए ग्राहक को अपने फोन से 1900 नम्बर पर एक एसएमएस भेजना होता है.
उपभोक्ता को वर्तमान सेवा प्रदाता कंपनी की ओर से एसएमएस के रूप में एक यूनिक पोर्टिंग कोड प्राप्त होता है.
उपभोक्ता को नए सेवा प्रदाता के पास अपना नम्बर स्थानांतरित करने के लिए उस कोड के साथ एक आवेदन पत्र भरना होता है.
आवेदन करने के चार दिनों के भीतर उपभोक्ता की मोबाइल कंपनी बदल जाती है
एक बार कम्पनी बदल जाने पर 90 दिनों के लिए उपभोक्ता को उसी कम्पनी की सेवा लेनी पडती है. वह वापस पुरानी कम्पनी की सेवा इस बीच नही ले सकता.
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ravi chacha
30-01-2011, 10:12 PM
ओपरेटर बदलने के लिए ग्राहक को अपने फोन से 1900 नम्बर पर एक एसएमएस भेजना होता है
port <************>
मान लीजिये आपका नंबर है 9812345678, तो इस प्रकार भेजना होगा-
port 9812345678
ravi chacha
30-01-2011, 10:14 PM
में इस सुविधा का फायदा उठा कर अपना मोबाइल प्रदाता बदल चूका हूं .अब नए सर्विस प्रदाता के साथ बहुत दुखी हू
ravi chacha
30-01-2011, 10:17 PM
पोर्टेबिलिटी से पहले कर लें तोल-मोल
आप यदि प्रीपेड कनेक्शनधारी हैं तो अपना बैलेंस पूरा उपयोग कर लें और लो वैल्यू एडेड सर्विसेज का पीरियड खत्म होने के बाद कंपनी बदलें। यदि तब तक इंतजार नहीं करना चाहते तो जिस भी कंपनी की सुविधाएं लेना चाहते हैं उसके टैरिफ और वीएएस की जानकारी लेकर नफा-नुकसान का आंकलन कर लें।
फ्री मैसेज,नेट यूज और एसटीडी कॉल जैसी तमाम सुविधाओं के लिए सभी कंपनियों की नीतियां अलग-अलग होती हैं। पोस्टपेड कनेक्शनधारी अपनी मौजूदा कंपनी के सभी बिलों का भुगतान करने के बाद ही कंपनी बदल सकते हैं।
ravi chacha
30-01-2011, 10:18 PM
नई कंपनी के लिए इन पर भी दें ध्यान
फनेटवर्क की क्वालिटी खराब यानी बातचीत के दौरान बार-बार कॉल ड्रॉप होना, आवाज सही न आने की पड़ताल कर लेना
फकंपनी की कौनसी सुविधाएं ऐसी हैं जो आपके काम की हैं। जैसे एसीटीडी कॉल्स ज्यादा करते हैं तो कंपनी की क्या स्कीम हैं।
फकंपनी बिल को लेकर कितनी पारदर्शी है।
फकं पनी ग्राहक की शिकायत पर कितनी जल्दी और कितना रिस्पांस देती है।
ravi chacha
30-01-2011, 10:24 PM
कैसे बदलें ऑपरेटर (मोबाइल कंपनी)
* सबसे पहले आप ऑपरेटर चुनें, जहां पर आप अपना मोबाइल नंबर ट्रांसफर कराना चाहते हैं। अब उस मोबाइल कंपनी के ऑथराइज्ड स्टोर पर जाकर कस्टमर एक्टिवेशन फॉर्म और पोर्टिंग फॉर्म लेकर उसकी शर्तें पढ़ें। अगर आप उस कंपनी की बातों से सहमत हैं तो अपने मोबाइल के मेसेज बॉक्स में जाकर क्कह्रक्रञ्ज लिखें। फिर स्पेस देकर अपना मोबाइल नंबर लिखें और उसे 1900 पर एसएमएस कर दें। यह मेसेज उसी नंबर से करें, जिसका ऑपरेटर आप बदलना चाहते हैं।
* मेसेज के जवाब में आपको एक एसएमएस मिलेगा, जिसमें आपको आठ नंबरों का कोड और उसकी एक्सपायरी डेट मिलेगी। यह एक्सपायरी डेट करीब 15 दिनों बाद की होती है। आठ नंबरों के इस कोड के पहले दो अक्षर अंग्रेजी के एल्फाबेट होते हैं। इस आठ कैरक्टर के कोड को यूनीक पोटिर्ंग कोड कहते हैं।
* एक्सपायरी डेट से पहले आपको एड्रेस प्रूफ, आइडेंटिटी प्रूफ, यूनीक पोर्टिंग कोड, फोटो के साथ नए सविर्स प्रोवाइडर के नजदीकी ऑथराइज्ड स्टोर पर जाकर फॉर्म भरकर जमा करना होगा। इसके बाद 19 रुपये का भुगतान करने पर आपको नया सिम कार्ड मिल जाएगा। कुछ मोबाइल कंपनियां मुफ्त में सिम कार्ड उपलब्ध करा रही हैं।
* आपसे मिले डॉक्युमेंट्स और फॉर्म को सविर्स प्रवाइडर कंपनी मोबाइल क्लियरिंग हाउस को भेजेगी। इसके बाद आपको एक एसएमएस अपने मौजूदा कनेक्शन पर ही मिलेगा, जिसमें वह तारीख और वक्त दिया गया होगा, जब आपका सविर्स प्रवाइडर बदला जाएगा।
* आपका सर्विस प्रवाइडर रात 12 बजे से सुबह 5 बजे बजे के बीच बदला जाएगा। इस पूरे प्रोसेस में दो घंटे का वक्त लगेगा। सुबह आप मोबाइल सेट से पुराना सिम निकालकर नया सिम डाल लें। अब आपका मोबाइल नंबर वही रहेगा, लेकिन ऑपरेटर (सर्विस प्रवाइडर) बदल जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में ज्यादा-से-ज्यादा सात दिन लगेंगे।
यह जानना भी जरूरी
* नया सर्विस प्रवाइडर चुनने से पहले उसकी शर्तों को अच्छी तरह पढ़ लें।
* अगर सर्विस प्रवाइडर का स्टोर तय फीस 19 रुपये से ज्यादा की मांग करता है तो उसका विरोध करें और कंपनी को लिखित रूप से सूचित करें।
* सर्विस प्रवाइडर बदलने के साथ ही आपके पिछले सभी प्लान डिएक्टिवेट (बंद) हो जाएंगे, इसलिए नया प्रवाइडर चुनने के साथ-साथ प्लान भी सोच-समझ कर लें। कुछ कंपनियां पुराने प्लान को जारी रखने की बात भी कर रही हैं।
* सभी प्रीपेड कस्टमर्स सर्विस प्रवाइडर बदलने से पहले अपने कार्ड में मौजूद बैलेंस को खत्म कर लें। आपके कार्ड में उस समय जो भी बैलेंस है, प्राइडर बदलने पर वह जीरो हो जाएगा।
* पोस्टपेड कस्टमर्स के लिए यह जरूरी है कि वे नया सविर्स प्रवाइडर चुनने से पहले अपना बकाया चुका लें। बकाया राशि का भुगतान किए बिना आप मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी का फायदा नहीं उठा सकते।
* आप सिर्फ अपने सर्कल में ही सविर्स प्रवाइडर बदल सकते हैं। दूसरे सर्कल में ट्रांसफर के लिए यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। मसलन दिल्ली के कस्टमर यूपी सर्कल में अपना नंबर नहीं बदल सकते।
* एक बार सर्विस प्रवाइडर बदलने के 90 दिन बाद तक आप दूसरा सर्विस प्रवाइडर नहीं बदल सकते।
* आप अपने सीडीएमए कनेक्शन को जीएसएम या इसका उलटा भी करा सकते हैं। यह सुविधा पोस्ट व प्रीपेड, दोनों के लिए उपलब्ध है।
हेल्पलाइन
मोबाइल नंबर पोटेर्बिलिटी के लिए समयसीमा और फीस तय है। अगर आप इनमें कमी पाएं तो अपने सविर्स प्रवाइडर के कॉल सेंटर पर टोल फ्री नंबर या ई-मेल से शिकायत जरूर करें। यहां पर आपकी समस्या का हल तीन से सात दिनों में हो जाना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो आप कंपनी के नोडल ऑफिसर को शिकायत करें। उसके जवाब से संतुष्ट न हों तो मोबाइल कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध फार्म भर कर अपीलेट अथॉरिटी ( Appellate Authority ) को जरूर लिखें।
इन सभी अधिकारियों की जानकारी आपको टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) की वेबसाइट www.trai.gov.in पर Customer Information Option में मिल जाएगी। ।
आप अगर मोबाइल कंपनी के दिए गए शिकायत निवारण प्लैटफॉर्म से संतुष्ट न हों तो ट्राई को इस पते पर लिख सकते हैं :
टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया, महानगर दूरसंचार भवन, जवाहरलाल नेहरू मार्ग, नई दिल्ली-110002
फोन : 011-2323 3466, 2322 0534, 2321 3223, फैक्स : 011-2321 3294, ईमेल : ap@trai.gov.in
आप सेक्रेटरी, ट्राई को भी ऊपर दिए गए पते लिख सकते हैं :
फोन : 011-2323 7448, 2321 1847, फैक्स : 011-2322 2816, ईमेल :
raj.here74
31-01-2011, 10:58 PM
में इस सुविधा का फायदा उठा कर अपना मोबाइल प्रदाता बदल चूका हूं .अब नए सर्विस प्रदाता के साथ बहुत दुखी हू
में भी अपना न० पोर्टेबिलिटी करवाकर फंस गया हू ,अब ३ महीने तक अपना ओपरेटर नहीं बदल सकता हू |नए सर्विस प्रदाता की सर्विस बहुत ही खराब है |
Yadav
01-02-2011, 10:49 PM
रवि चाचा और राज जी हम भी आप लोगो की तरह से फ़सने वाले है लेकिन अभी फ़से नही है मतलब की 10 दिन हो गये नम्बर अभी बदला नही है क्या हम इस बदलाव को रोक सकते है
mam135
05-02-2011, 08:18 PM
रवि चाचा और राज जी हम भी आप लोगो की तरह से फ़सने वाले है लेकिन अभी फ़से नही है मतलब की 10 दिन हो गये नम्बर अभी बदला नही है क्या हम इस बदलाव को रोक सकते है
जी हा आप एक केनसलेसन फार्म सिग्न कर के पुराणी कंपनी के किसी भी स्टोरे पैर दे दे.
Lofar
08-02-2011, 09:15 AM
अच्छा कार्य कर रहे हो मित्र .. लगे रहो
:clap::clap:
ravi chacha
10-02-2011, 02:10 AM
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने हाल में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की स्थिति की समीक्षा की। प्रतिवेदित आंकड़ों के अनुसार 5 फरवरी, 2011 तक लगभग 17.11 लाख उपभोक्*ताओं ने विभिन्*न सेवा प्रदाताओं को अपने मोबाइल नंबर की पोर्टेबिलिटी के लिए निवेदन किया। इन निवेदनों में से लगभग 2.29 लाख हरियाणा सेवा क्षेत्र से संबंध रखते है, जहां मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी को पहले लागू किया गया था।
देश के अन्*य हिस्*सों में मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी के लिए जोन-1 (उत्*तरी और पश्चिमी क्षेत्र) में गुजरात (1.67 लाख) से सर्वाधिक निवेदन प्राप्*त हुए, जिसके पश्*चात राजस्*थान (1.44 लाख) का स्*थान रहा, जबकि एमएनपी जोन – 2 (दक्षिणी और पश्चिमी क्षेत्र) में कर्नाटक (1.16 लाख) से सर्वाधिक निवेदन प्राइज़ हुए, जिसके पश्*चात तमिलनाडु सेवा क्षेत्र (1.14 लाख) का स्*थान रहा। गौरतलब है कि 25 नवंबर, 2010 को हरियाणा सेवा क्षेत्र में प्रायोगिक आधार पर मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) की शुरूआत की गई थी। इसके सफल रहने पर 20 जनवरी, 2011 से इसे पूरे देश में लागू किया गया। देश में एमएनपी के लागू होने पर ट्राई लगातार इसकी निगरानी कर रहा है। प्राप्*त की गई शिकायतों और प्रतिक्रियाओं के आधार पर ट्राई ने सेवा प्रदाताओं को एमएनपी के नियमों के प्रावधानों का सख्*ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह पाया गया है कि पोर्टेबिलिटी के कुछ निवेदनों को सेवा प्रदाताओं ने अस्*वीकृत कर दिया। अस्*वीकृत करने के प्रमुख कारक रहे – पोर्टिंग फॉर्म में उपभोक्*ताओं द्वारा गलत यूनिक पोर्टिंग कोड देना। मोबाइल नंबर को चालू हुए 90 दिन पूरा न होना, पहले से लागू अनुबंधात्*मक बाध्*यताएं और बकाया बिलों का निपटारा न करना। एमएनपी के निम्*नलिखित पहलुओं के विषय में उपभोक्*ताओं को सर्तक रहना चाहिए
ravi chacha
10-02-2011, 02:11 AM
पोर्टिंग फार्म में उपभोक्*ताओं द्वारा गलत यूनिक पोर्टिंग कोड प्रस्*तुत करना।
जब एक उपभोक्*ता 1900 पर एसएमएस भेजता है, तो सेवा, प्रदाता द्वारा आठ अंकों का एक यूनिक कोड प्रदान किया जाता है। यूनिक पोर्टिंग कोड के पहले दो कोड अंग्रेजी वर्ण के होते हैं (जो कि सेवा प्रदाता के कोड और सेवा क्षेत्र के कोड के द्योतक है) और बाकी छह अंक ‘0’ (शून्*य) को छोड़कर संख्*यात्*मक होते हैं।
पोर्टिंग फार्म में बिना किसी गलती के यूनिक पोर्टिंग कोड को भरा जाना चाहिए। अपना आवेदन सौंपने से पहले उपभोक्*ताओं को एसएमएस द्वारा प्राप्*त यूनिक पोर्टिंग कोड से फार्म में भरे गए यूनिक पोर्टिंग कोड का मिलान कर लेना चाहिए, ताकि गलती की कोई गुंजाइश न रहे।
ravi chacha
10-02-2011, 02:12 AM
90 दिनों का पूरा न होना
पोर्टिंग के लिए उपभोक्*ता तभी योग्*य होगा, जब वो अपना मोबाइल कनेक्*शन चालू होने के 90 दिन पूरे कर ले या फिर मोबाइल नंबर पोर्ट करने की अंतिम तिथि, जो भी लागू हो। पोर्टिंग के लिए आवेदन करने से पहले उपभोक्*ता को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए।
ravi chacha
10-02-2011, 02:12 AM
पहले से लागू अनुबंधात्*मक बाध्*यताएं
पहले से लागू अनुबंधात्*मक बाध्*यताएं जिसके संबंध में उपभोक्*ता करार में एक्जिट शर्त दी गई हो, लेकिन उपभोक्*ता द्वारा उसका पालन न किये जाने की स्थिति में सेवा प्रदाता पोर्टिंग के निवेदन को अस्*वीकृत कर सकता है।
ravi chacha
10-02-2011, 02:17 AM
पोर्टिंग के लिए आवेदन करने की तिथि से पहले उपभोक्*ताओं द्वारा बकाया बिल या बिलों, जो भी स्थिति हो का भुगतान न करने पर सेवा प्रदाता द्वारा पोर्टिंग का निवेदन अस्*वीकृत किया जा सकता है। इसलिए उपभोक्*ताओं को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि पोर्टिंग के लिए आवेदन करने से पहले उनके अंतिम बिल का पूरी तरह भुगतान हो चूका हो। पोर्टिंग के लिए इस बिल की प्रतिलिपि भी उन्*हें सलंग्*न करनी चाहिए।पोर्टिंग के लिए निवेदन करने से पहले उपभोक्*ताओं को योग्*यता मानदंड को ध्*यान से पढ़ने की सलाह दी जाती है, ताकि पोर्टिंग निवेदन के अस्*वीकृत होने से बचा जा सके।
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