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View Full Version : संभवत: एड्स का इलाज खोज निकाला है।



INDIAN_ROSE22
05-02-2011, 10:08 PM
एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के तहत वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने संभवत: एड्स का इलाज खोज निकाला है।

आस्ट्रेलियाई और कनाडाई सरकार द्वारा वित्तपोषित अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान दल ने दावा किया कि संभवत: उन्होंने उस आनुवांशिक तरीके को खोज निकाला है जिससे शरीर स्वयं एड्स का इलाज कर लेगा।

डेली मेल की खबर के अनुसार, चूहों पर किए गए अनेक प्रयोगों से वैज्ञानिकों ने यह प्रदर्शित किया कि प्रतिरक्षण प्रणाली को अपने लिए इस कदर इस्तेमाल किया जा सकता है कि यह विषाणु को निष्क्रिय कर देता है और पूरी तरह से इसे शरीर से निकाल बाहर करता है।

यह उपलब्धि एसओसीएस-3 नामक एक गुणसूत्र पर केन्द्रित है जो एचआईवी जैसे संक्रमण से संक्रमित होने के बाद अत्यंत सक्रिय हो उठता है और प्रतिरक्षा तंत्र को निष्क्रिय कर देता है ताकि विषाणु शरीर में मौजूद रहे।

जब वैज्ञानिकों ने आईएल-7 नामक हारमोन को बूस्ट किया तो यह गुणसूत्र निष्क्रिय हो गया और चूहे अपने शरीर से धीरे धीरे एचआईवी विषाणु को बाहर निकाल सकते थे।

हालांकि इस स्थिति के इलाज में तरक्की हुई है लेकिन प्रतिरक्षी तंत्र को निष्क्रिय करने की विषाणु की क्षमता का अर्थ है कि इस रोग के इलाज के तरीके पर वैज्ञानिकों का अब तक ध्यान ही नहीं गया था।

चूहों पर किए गए ताजातरीन प्रयोगों के आधार पर दल का मानना है कि न केवल इससे एड्स के इलाज की संभावना पैदा होती है बल्कि हिपेटाइटिस बी और सी तथा तपेदिक जैसे दीर्घावधि वाले रोगों के इलाज की भी संभावना पैदा हो गई है।

इन रोगों के लिए इलाज खोजने के लिए किए गए तमाम प्रयोगों में प्रतिरक्षा तंत्र को विषाणु या जीवाणु को शरीर से बाहर निकालने के लिए इस्तेमाल करना है, लेकिन ताजातरीन अनुसंधान से यह प्रदर्शित होता है कि कम अवधि वाला तगड़ा झटका रोग के इलाज में कहीं अधिक प्रभावी हो सकता है

mr josef
05-02-2011, 11:43 PM
एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के तहत वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने संभवत: एड्स का इलाज खोज निकाला है।

आस्ट्रेलियाई और कनाडाई सरकार द्वारा वित्तपोषित अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान दल ने दावा किया कि संभवत: उन्होंने उस आनुवांशिक तरीके को खोज निकाला है जिससे शरीर स्वयं एड्स का इलाज कर लेगा।

डेली मेल की खबर के अनुसार, चूहों पर किए गए अनेक प्रयोगों से वैज्ञानिकों ने यह प्रदर्शित किया कि प्रतिरक्षण प्रणाली को अपने लिए इस कदर इस्तेमाल किया जा सकता है कि यह विषाणु को निष्क्रिय कर देता है और पूरी तरह से इसे शरीर से निकाल बाहर करता है।

यह उपलब्धि एसओसीएस-3 नामक एक गुणसूत्र पर केन्द्रित है जो एचआईवी जैसे संक्रमण से संक्रमित होने के बाद अत्यंत सक्रिय हो उठता है और प्रतिरक्षा तंत्र को निष्क्रिय कर देता है ताकि विषाणु शरीर में मौजूद रहे।

जब वैज्ञानिकों ने आईएल-7 नामक हारमोन को बूस्ट किया तो यह गुणसूत्र निष्क्रिय हो गया और चूहे अपने शरीर से धीरे धीरे एचआईवी विषाणु को बाहर निकाल सकते थे।

हालांकि इस स्थिति के इलाज में तरक्की हुई है लेकिन प्रतिरक्षी तंत्र को निष्क्रिय करने की विषाणु की क्षमता का अर्थ है कि इस रोग के इलाज के तरीके पर वैज्ञानिकों का अब तक ध्यान ही नहीं गया था।

चूहों पर किए गए ताजातरीन प्रयोगों के आधार पर दल का मानना है कि न केवल इससे एड्स के इलाज की संभावना पैदा होती है बल्कि हिपेटाइटिस बी और सी तथा तपेदिक जैसे दीर्घावधि वाले रोगों के इलाज की भी संभावना पैदा हो गई है।

इन रोगों के लिए इलाज खोजने के लिए किए गए तमाम प्रयोगों में प्रतिरक्षा तंत्र को विषाणु या जीवाणु को शरीर से बाहर निकालने के लिए इस्तेमाल करना है, लेकिन ताजातरीन अनुसंधान से यह प्रदर्शित होता है कि कम अवधि वाला तगड़ा झटका रोग के इलाज में कहीं अधिक प्रभावी हो सकता है


इस उत्तम जानकारी देने के लिए धन्यवाद्……॥:salut::salut::no no:

INDIAN_ROSE22
06-02-2011, 01:25 PM
:salut::salut::nono:

धन्यवाद्

Khanpasha
07-02-2011, 03:19 PM
आपका कार्य सराहनीय है
इस महत्वपूर्ण जानकारी के लिए धन्यवाद

INDIAN_ROSE22
07-02-2011, 09:36 PM
आपका कार्य सराहनीय है
इस महत्वपूर्ण जानकारी के लिए धन्यवाद
......................... धन्यवाद