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View Full Version : आपकी राय : पारिवारिक सेक्स के बारे में



mam135
07-01-2011, 11:26 PM
दोस्तों यह एक नया पोल शुरू कर रहा हु कृपया अपना वोते जरुर दे पर थोडा विस्तार से.
तो बताये आप अपने परिवार में किस के साथ सेक्स करना चाहते हे और कैसे ..? :bed::pointlol::lips:

VIBHA GOYAL
12-01-2011, 11:45 PM
मै तो अपने छोटे भाई के साथ सेक्स कर चुकी हु !
दोस्तों यह एक नया पोल शुरू कर रहा हु कृपया अपना वोते जरुर दे पर थोडा विस्तार से.
तो बताये आप अपने परिवार में किस के साथ सेक्स करना चाहते हे और कैसे ..? :bed::pointlol::lips:

Ranveer
13-01-2011, 12:38 AM
हम जिस भी समाज में रहतें हैं वहां पर अच्छा समाज बनाना भी हमारा ही काम होता है....क्या हम अपने बच्चो को आपस में ऐसा करने देंगे.....ये सवाल अपने दिल से पूछें...

VIBHA GOYAL
13-01-2011, 03:18 AM
वौ हाँस्टल मे रहता है जब जब घर आता है तो मोका देखकर कर लेते है
वाह मेरी जान तुम कमाल की हो तुम्हारा भाई सप्ताह मे कितनी बार अंतरंग हो जाते हैं

rajkumari123
13-01-2011, 09:59 AM
mai apne chachi ke sath so chuki ho. kya must chutt thi .

VIBHA GOYAL
13-01-2011, 10:24 AM
Matlab lesbian sex...........
mai apne chachi ke sath so chuki ho. Kya must chutt thi .

akamboj2000
13-01-2011, 10:26 AM
वौ हाँस्टल मे रहता है जब जब घर आता है तो मोका देखकर कर लेते है

विभा जी बताने के लिए धन्यवाद

raj.amar1977
13-01-2011, 12:05 PM
main apni sali k saath kar chuka hoon

shoukat
13-01-2011, 04:03 PM
Bhai me apni kutya ke sath kar chuka hun wo bhi meri family se hain ............ sale bat karte hain shikaar pur ka samjha he

mam135
13-01-2011, 11:22 PM
वौ हाँस्टल मे रहता है जब जब घर आता है तो मोका देखकर कर लेते है



TO Batao VIbha Shuruvat kaise hue

chuutkadiwana
15-01-2011, 09:28 AM
ghar main chut mil jaye to uska apna hi maja hai.

akayemm
15-01-2011, 10:14 PM
पारिवारिक सम्बन्ध
मित्रों , मैं विस्मित हूं संकीर्ण/सीमित विचारों को पढ़ कर . संकीर्ण/सीमित इस लिए कि अधिकतर विचार बिना तर्क हैं . कुछ लोग चरित्र की दुहाई दे रहें हैं बिना सोचे समझे कि क्या इस मंच पर विचरण करना अच्छे चरित्र का प्रमाण है ? क्या फिर चरित्रवान होने की निशानी है वैचारिक रूप से परागामी होना ? जैसा कि इस मंच पर आने वाला हर व्यक्ति है . अभी तक किसी भी माई के लाल (अथवा लाली) ने इस प्रश्न का उत्तर नहीं दिया है कि अगर हम कहानियों में पूर्ण स्थान दे सकतें हैं और ऐसी कहानियां पढ़ सकतें हैं जो पारिवारिक संबंधों पर आधारित हैं तो ऐसे विचारों को स्थान क्यों नहीं मिल सकता इस संभाग में ? क्या ऐसी पारिवारिक संबंधों पर आधारित प्रत्येक कहानी का लेखक/लेखिका समालोचना की अपेक्षा नहीं करता/करती ? क्या वे सब तारीफ़ की आशा नहीं करते ? और क्या हम उनके प्रयासों को सराहते नहीं हैं ? और जन मानस को देखते हुए ही मंच के संचालकों ने एक विशिष्ट स्थान दिया है उन कहानियों को . क्या आप इस तथ्य को नकारना चाहते हैं ?
एक और तर्क देता हूं . क्या अन्य यौन प्रक्रिया पर आधारित कहानियां और ‘गर्म मसाला ‘ के विभिन्न सूत्र पाठकों को प्रेरित करते हैं चरित्रवान बनने के लिए ? यदि हाँ , तो ये मंच और इस जैसे लाखों और मंच भी विद्यालयों में एक आवश्यक विषय के रूप में प्रारंभ होने चाहिए , और इन्हें ‘केवल वयस्कों’ की श्रेणी में से निकाल देना चाहिए . इस प्रकार के क्रिया कलापों को दूरदर्शन के माध्यम से भी जनता में प्रचलित करना चाहिये !
इस तर्क पर पर भी विचार करें कि क्या अब तक किसी भी मंच ने सफलतापूर्वक प्रेरित किया है आपको वो करने के लिए जो आप नहीं करना चाहते थे ?
हाँ , ये तो हो सकता है कि कोई मंच सहायक सिद्ध हुआ हो आपके किसी मंतव्य को सफल करने में . और यही है इस ज्ञान प्राप्ति की आधुनिक तकनीक का कमाल !
तो क्या पारिवारिक यौन संबंधों पर टिप्पणियां पढने से ही परिवार का वातावरण दूषित हो जायेगा ? मैं हर आगंतुक से पूछता हूं , कि क्या आप ऐसा मानते हैं कि आपके सिवाय आपके किसी भी परिवार वाले को नहीं पता कि इस मंच जैसे कई मंच हैं साइबर की दुनियाँ में ? क्या उन सब जगह विचरण करने से उनके चरित्र का नाश नहीं हो रहा ? और यदि उनको नहीं पता , फिर चिंता किस बात की ? तो भला ये मंच भी उन पर कैसे असर करेगा ? और यदि ऐसे अन्य प्रकार के मंचों पर विचरण करने बाद भी उनका चरित्र सही सलामत है, तो ये बेचारा अकेला मंच कैसे बिगाड़ देगा आपके परिवार के सदस्यों का उच्च चरित्र ?
तो मित्रों ! कृपया विचारिये, गुनिये , बुद्धिमत्ता के साथ , मात्र बुराइ करने के उद्देश्य से नहीं ! क्यों कि इस संसार में सम्पूर्ण रूप से कुछ भी अच्छा या कुछ भी बुरा नहीं होता है , सब कुछ सापेक्षिक है ! --- अनिल

akayemm
16-01-2011, 12:59 PM
निकट सम्बन्धियों के साथ यौन सम्बन्ध

मित्रों , मैं एक बात पर हैरान हूं . कि कोई भी मित्र इस बात पर टिप्पणी नहीं कर रहा है जो मैंने इस मंच पर प्रेषित होने वाली कहानियों के सन्दर्भ में लिखी है ! आप लोग अच्छे बुरे की दुहाई दे रहें हैं ! मैं आप सब से , मतलब सब से , पूछता हूं कि बताएं निम्न लिखित कहानियों के पढने में कौन सी भलाई है ,
१. ननद का जेठ और उसका दोस्त
२. ड्राइवर और नौकर से चुदी
३. फार्महाउस में मम्मी
४. एकाकीपन में खुश
५. नौकर से चुदवाया आदि आदि , प्रथम प्रकार में , और अब परिवार में ...
६. चचेरी बहन से प्यार
७. जीजू ने मेरी सील तोडी
८. मान भी जाओ बहु
९. भाभी के पैरों का दर्द
१०. बुआ की प्यास
११. मेरी माँ चुद गयी
१२. बारिश और दीदी ...... और कितनी कहानियां गिनवाऊं ?
क्या ये सब चरित्र निर्माण के लिए लिखी गयी हैं ? इनमें कौनसी धार्मिकता दर्शाई गयी है जिससे कि मोक्ष की प्राप्ति हो जायेगी , आपकी और आपके परिवार के सदस्यों की. ? कृपया गंभीरता से सोचिये , विवेक द्वारा न कि क्षणिक आवेश के वशीभूत हो कर ! मेरा इशारा इम्पल्सिव टिप्पणियों की ओर है !.
यदि इन दोनों प्रकार की कथाओं को स्थान मिल सकता है तो इन कथाओं से सम्बंधित भावनाओं पर किसी सूत्र रूप में वार्तालाप करने पर विरोध क्यों ? विवाद क्यों ? अतः विनम्र आग्रह है कि विरोध केवल विरोध के लिए न करे . जो भी विचार इस पटल पर रखें वे सब इस अन्तर्वासना मंच की सम्पूर्ण रूप रेखा के प्रारूप के अनुसार हों ! ऐसी मेरी हार्दिक कामना है .

शायद आप सब भूल रहें है कि इस अन्तर्वासना मच पर दो मुख्य उप मंच है एक , ‘ गर्म मसाला ‘ और दूसरा है , ‘ सामान्य मंच ‘ और इस दूसरे मंच में सामान्य सामग्री के अंतर्गत हर प्रकार भली बातें होती हैं . और जहाँ वयस्क सामग्री की अनुमति नहीं है .

ऐसा प्रतीत होता है कि विरोधियों में से किसी ने भी ‘ सामान्य मंच ‘ के उप मंच के टाइटल अथवा ‘मुख्य विषय ’ तक नहीं पढ़े हैं ! ऐसे मित्रों की जानकारी के लिए बता दूं कि ये विषय हैं , मेरा भारत , विश्व दर्शन , हमारा स्वास्थ्य , साहित्य एवं ज्ञान की बातें , खेल खिलाड़ी , तकनीकी जानकारी , पाक कला , और आओ समय बिताएं
क्या विरोधीगण बताएंगे .कि क्या उन लोगों ने इन विषयों में से किसी एक पर भी विचरण किया है ? शायद कुछ लोग ‘तकनीकी जानकारी ’ जैसे पटल पर गए हों , लेकिन बाकियों पर नहीं ! - अनिल

VIBHA GOYAL
16-01-2011, 01:03 PM
यही मेरा विचार है
ghar main chut mil jaye to uska apna hi maja hai.

akayemm
16-01-2011, 01:11 PM
यही मेरा विचार हैदेवी , बहुत ही नेक विचार हैं ,:clap:.. क्या कोई संभावना है कि मैं आपके परिवार का सदस्य बन सकूं ! :pointlol: - अनिल

mam135
16-01-2011, 10:37 PM
यही मेरा विचार है

:bed:Vibha Apne Abhi tak Bataya nahi Bhai ke sath kese Shuruwat hue....?

malik5211
17-01-2011, 12:12 AM
वौ हाँस्टल मे रहता है जब जब घर आता है तो मोका देखकर कर लेते है

aur jab wo nahi hota to kisse chudwati ho?

draculla
17-01-2011, 04:45 PM
नहीं मुझे पारिवारिक सेक्स पसंद नहीं है.लेकिन इस विषय पर बनी कहानी और कॉमिक्स पढने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है.
धन्यवाद.

Doremon
19-01-2011, 10:19 PM
में भी अनिल जी से सहमत हूं और ये अर्ज करना चाहता हूं की अन्तर्वासना में प्रस्तुत कहानियां केवल कहानियां मात्र ही नहीं हैं बल्कि हमारे समाज की कड़वी सचाई है , हो सकता है अधिकतर लोग रिश्तों को मानते हों लेकिन इतने बड़े देश में और दुनिया में आप सब लोग एक ही विचार के नहीं हो सकते और आपसे और हमसे विपरीत विचारों वाले लोग भी हैं .जिन कहानियों में हम अनेतिकता देखते हैं बहुत से लोग वैसे आचरण करने में भी बुराई नहीं समझते , ये विभाग कुछ ऐसे ही लोगों के लिए है .जरूरी नहीं यहाँ पर आने वाला प्रत्येक सदस्य परिवार में सम्बन्ध रखने का समर्थक हो .,लेकिन अगर इस प्रकार की कहानियों को पढ़ने की और इस प्रकार की बाते करने में अगर किसी को मनोरंजन हासिल होता है तो बाकि सदस्यों का फर्ज है की वो इसमें हस्तक्षेप करने न करे .अगर किसी सदस्य को इसमें कुछ मनोरंजक नहीं दिखाई पड़ता तो उनके लिए बाकि विभाग भी हैं. यहाँ हर व्यक्ति की पसंद के हिसाब से बहुत से विभाग है . इसलिए माननीय सदस्यों से निवेदन है की केवल अपनी रूचि अनुसार ही विभागों में विचरण करें और किसी सूत्र य विभाग के पसंद ना आने पर या किसी सदस्य के आचरण से सहमति ना होने पर ,प्रबंधन और सम्बंधित सदस्य से व्यक्तिगत वार्तालाप करें . सावर्जनिक रूप से किसी भी सूत्र या सदस्य की आलोचना ,बाकि सदस्यों में खीज और तनाव भी पैदा कर देती है और यहाँ पर हम सभी लोग मनोरंजन के लिए आते हैं किसी बहस या तनाव के लिए नहीं .
आशा है मेरा मतलब कुछ स्पष्ट हो पायेगा .
धन्यवाद

mam135
19-01-2011, 11:14 PM
दोस्तों ये बिलकुल सही हे मेने यह पोल सिर्फ इसी लिए शुरू किया था ताकि हम लोंगो का मनो रंजन हो सके .हलाकि ये बिलकुल कड़वा सच हे की हमारे समाज में भी कुछ परवारिक रिश्तो में सेक्स समभंद बन रहे हे पर ये भी सच हे की हम रिश्तो की मर्याद करना भी जानते हे...

ajaypandey
19-01-2011, 11:43 PM
kab aur kaise kiya jara vistar se batane ka kasht karengi aap

Farhan
21-01-2011, 12:58 AM
मै तो अपने छोटे भाई के साथ सेक्स कर चुकी हु !

मै अपनी बुआ के साथ सेक्स कर चुका हूँ वह एक घटना थी जो मेरी लाईफ मे घटी

himanshuhkr11
21-01-2011, 07:41 PM
maine chachi ko choda tha

pramod345
22-01-2011, 03:49 PM
bivha ji bhia se chudai ka kya anubhav raha kuch hame bhi bataiye

amitsharma29639
23-01-2011, 02:04 AM
mai vibha k sath sex karna chahta hu....

great_brother
23-01-2011, 11:37 AM
यही मेरा विचार है
विभा जी,
क्या मैं भी आपके परिवार का हिस्स्सा बन सकता हू........

akayemm
23-01-2011, 02:46 PM
विभा जी,
क्या मैं भी आपके परिवार का हिस्स्सा बन सकता हू........

मित्र ,
........
एक बार एक लड़का लडकी पार्क में अकेले बैठे थे
लडके ने पूछा , ' प्रिय , क्या मैं तुम्हें चूम सकता हूं ? '
लडकी बोली , ' हे भगवान ! एक और नौसिखिया ? '
........
तो मित्र , हिस्सा तो आप बन चुके हो परिवार का .... इस मंच पर आने से :pointlol:
अब देरी तो आपकी ओर से हो रही है ? :rofl: ..... अनिल

man-vakil
23-01-2011, 10:08 PM
परिवार में रिश्ते के भाई बहनों...चाचा चाची या भुआ या माँ या कोई और करीबी... मेरे विचार में. परिवार के भीटर इस तरह के सेक्स से केवल ये बात सिद्ध होती है...की वो परिवार इंसानों का सामाजिक परिवार नहीं बल्कि मोहल्ले के कुत्तों की टोली है..यदि विचार से कोई आहत हो तो माफी चाहूँगा./..परन्तु/// मैं अपने कथन पर टिका रहूँगा...

great_brother
24-01-2011, 12:50 AM
मित्र ,
........
एक बार एक लड़का लडकी पार्क में अकेले बैठे थे
लडके ने पूछा , ' प्रिय , क्या मैं तुम्हें चूम सकता हूं ? '
लडकी बोली , ' हे भगवान ! एक और नौसिखिया ? '
........
तो मित्र , हिस्सा तो आप बन चुके हो परिवार का .... इस मंच पर आने से
अब देरी तो आपकी ओर से हो रही है ? ..... अनिल


दोस्त आपके विचार बहुत शुद्ध है .....
आप मेरे सूत्रों को भी VISIT करके अपने विचार दे ............:salut::nosmoking::bloom:

sonie
24-01-2011, 08:29 PM
परिवार में रिश्ते के भाई बहनों...चाचा चाची या भुआ या माँ या कोई और करीबी... मेरे विचार में. परिवार के भीटर इस तरह के सेक्स से केवल ये बात सिद्ध होती है...की वो परिवार इंसानों का सामाजिक परिवार नहीं बल्कि मोहल्ले के कुत्तों की टोली है..यदि विचार से कोई आहत हो तो माफी चाहूँगा./..परन्तु/// मैं अपने कथन पर टिका रहूँगा...

परिवार के बाहर समाज के नियमो को तोड़ कोई भी किसी से सम्बन्ध बनाये तो वकील साहेब बहुत खुश होंगे और सिर्फ उन्हें ही मनुष्य का ख़िताब अता करेंगे - वाह
- और इन्सेस्ट सूत्रों पर आकर लार टपकाते हुए माँ-बहनों के कोमिक्स जरुर पढेंगे ...

man-vakil
25-01-2011, 03:45 AM
दम है आपकी तर्क-शक्ति और तथ्यों के अवलोकन करने की क्षमता में....चाहे आधारहीन ही सही. परन्तु टक्कर खूब दी...
परन्तु पारिवारिक सूत्रों को पढने से ये अर्थ नहीं निकाल सकती कि हम खुद भी वैसा आचरण करे...आप ब्लू फिल्म भी देखती होंगी परन्तु घर में ब्लू फिल्म बनती तो नहीं होगी...शायद हम सभी में कही एक जानवर भीतर होता है परन्तु उसे ही आधार मान परिवार में वैसा आचरण परिवार के ताने बाने को छीन भिन कर देगा... और वैघ्यानिक तौर से भी ऐसे सम्बन्ध केवल कमजोर पीड़ी का निर्माण करते है...रोमन साम्राज्य में राजतन्त्र के पतन का कारण भी ऐसे सम्बन्ध थे..इतिहास गवाह है..लोग चाहे उनके संबंधों को चटकारे लेकर कहते हो परन्तु वैसा आचरण नहीं करते...चटनी चटकारे के लिए होती है पर भोजन का आधार नहीं होती...

john4247
29-01-2011, 04:20 PM
वकिल साहेब कि बातो से लगता है कि उन्हें इस फोरम के बारे मे कुछ गलतफहमी है, अरे भाई साहेब यह सुत्र तो इन्सान कि दबी हुइ भाव्नाओ को निकाल फेक्ने कि जगह है, जहाँ तक वकिल साहेब कि बात है मै दावे से कह सकता हु अपने जीवन काल मे उन्हें भी इस तरह का अनुभव हुवा होगा तभी तो वोह यहाँ इस फोरम कि सोभा बडा रहे है...मगर यह भुल रहे है कि इस फोरम मे Incest बिरोधियो के लिय कोइ जगह नही है...

akayemm
29-01-2011, 05:26 PM
दम है आपकी तर्क-शक्ति और तथ्यों के अवलोकन करने की क्षमता में....चाहे आधारहीन ही सही. परन्तु टक्कर खूब दी...
परन्तु पारिवारिक सूत्रों को पढने से ये अर्थ नहीं निकाल सकती कि हम खुद भी वैसा आचरण करे...आप ब्लू फिल्म भी देखती होंगी परन्तु घर में ब्लू फिल्म बनती तो नहीं होगी...शायद हम सभी में कही एक जानवर भीतर होता है परन्तु उसे ही आधार मान परिवार में वैसा आचरण परिवार के ताने बाने को छीन भिन कर देगा... और वैघ्यानिक तौर से भी ऐसे सम्बन्ध केवल कमजोर पीड़ी का निर्माण करते है...रोमन साम्राज्य में राजतन्त्र के पतन का कारण भी ऐसे सम्बन्ध थे..इतिहास गवाह है..लोग चाहे उनके संबंधों को चटकारे लेकर कहते हो परन्तु वैसा आचरण नहीं करते...चटनी चटकारे के लिए होती है पर भोजन का आधार नहीं होती...

मित्र , लगता है कि आपको यह विषय पसंद नहीं . पर आप पढ़े लिखे हैं , क्या आपने चेतावनी नहीं पढ़ी जो इस उप मंच पर आने के सम्बन्ध में लिखी हुई है ?
पहले उसे पढ़ें और फिर अपने विचार लिखे .
अतः विरोध कैसे और क्यों ?
इस मंच पर आने का मतलब तो यही है कि आप इसे पसंद करते हैं !
समझे श्रीमान ? - अनिल

Lovely.indian
29-01-2011, 06:57 PM
परिवार में रिश्ते के भाई बहनों...चाचा चाची या भुआ या माँ या कोई और करीबी... मेरे विचार में. परिवार के भीटर इस तरह के सेक्स से केवल ये बात सिद्ध होती है...की वो परिवार इंसानों का सामाजिक परिवार नहीं बल्कि मोहल्ले के कुत्तों की टोली है..यदि विचार से कोई आहत हो तो माफी चाहूँगा./..परन्तु/// मैं अपने कथन पर टिका रहूँगा...
:clap::clap::clap::clap:

akayemm
29-01-2011, 07:21 PM
वकिल साहेब कि बातो से लगता है कि उन्हें इस फोरम के बारे मे कुछ गलतफहमी है, अरे भाई साहेब यह सुत्र तो इन्सान कि दबी हुइ भाव्नाओ को निकाल फेक्ने कि जगह है, जहाँ तक वकिल साहेब कि बात है मै दावे से कह सकता हु अपने जीवन काल मे उन्हें भी इस तरह का अनुभव हुवा होगा तभी तो वोह यहाँ इस फोरम कि सोभा बडा रहे है...मगर यह भुल रहे है कि इस फोरम मे Incest बिरोधियो के लिय कोइ जगह नही है...मित्र , आपने पते की बात के है :clap:. लेकिन इन श्रीमान के तरह और भी हैं इस फोरम पर जो अक्ल से पूरी तरह अंधे हैं ! तभी तो इस उप मंच को चूज करतें हैं चेतावनी दिए जाने के उपरान्त भी !:pointlol: ... और लगते हैं भाषण देने ...अनिल

rockythegrt
02-02-2011, 01:32 PM
मेरे ख़याल से अगर भई और बहन राज़ी हों तो सेक्स करने में कोई बुराई नहीं है. मैं खुद अपनी सगी बहन पूजा को चोदना चाहता हूँ. और मौके की तलाश में हूँ. अगर मेरी बहन सेक्सी और चिकनी है और मेरा मन उसको चोदने का करता है तो इसमें मेरी क्या गलती है? आखिर मैं मर्द हूँ.

rockythegrt
02-02-2011, 01:44 PM
दोस्तों मुझे अपनी बहन को चोदने की इच्छा तब जगी जब मैंने उसे उसकी सहेली के साथ नंगी होकर अपने घर के पीछे लान मैं पानी से खेलते हुए देखा. कोई भी लड़का उसे देख कर मुठ मारे बिना नहीं रह सकता, चाहे वो उसका भाई ही क्यों न हो. हैरानी की बात ये है की मेरे अपनी बहन के बारे में कोई बुरे विचार नहीं थे. तब भी जब मेरे सामने दो लड़कियां नंगी होकर पानी से खेल रही थीं और मैं उनको छुप कर देख रहा था, तो मेरी नज़र मेरी बहन पर ही टिकी हुई थी.

rockythegrt
02-02-2011, 01:46 PM
मेरे ख़याल से अगर भई और बहन राज़ी हों तो सेक्स करने में कोई बुराई नहीं है. मैं खुद अपनी सगी बहन पूजा को चोदना चाहता हूँ. और मौके की तलाश में हूँ. अगर मेरी बहन सेक्सी और चिकनी है और मेरा मन उसको चोदने का करता है तो इसमें मेरी क्या गलती है? आखिर मैं मर्द हूँ.

rawaccess
11-02-2011, 08:08 PM
चेतावनी का अर्थ यह नहीं कि गलत चीज़ों को ज़ारी रहने दिया जाए. अन्तर्वासना एक समग्र फोरम है. आप घर के बाहर तख्ती तंग दें कि मैं अपनी बहनों के साथ .... जिन्हें आपत्ति है कृपया खिडकी से ताक-झाँक न करें... आजमा कर अपना अनुभव बताएं ज़रा. मैं पारिवारिक संबंधों पर आधारित सामग्रियां पसंद नहीं करता और इस फोरम में हूँ इसका अर्थ यह कतई नहीं कि मैं इस विषय का समर्थन करता हूँ अथवा यह मेरे लिए मनोरंजन का कोई विषय है लेकिन समाज में भिन्न विचारों के कैसे-कैसे जीव पल रहे हैं उनके बारे में जानना अवश्य चाहूँगा. सिर्फ तख्ती मात्र टांग देने से आप अपना विचार रखने का अधिकार नहीं छीन सकते.

nita
11-02-2011, 09:38 PM
सेक्स को परिवार से जोड़कर देखना ही गलत है , सेक्स एक भूख है जो जिसके साथ भी मिट जाये अछि बात है , लड़का का रिश्ता जो भी हो

srtjoon
11-02-2011, 10:40 PM
दम है आपकी तर्क-शक्ति और तथ्यों के अवलोकन करने की क्षमता में....चाहे आधारहीन ही सही. परन्तु टक्कर खूब दी...
परन्तु पारिवारिक सूत्रों को पढने से ये अर्थ नहीं निकाल सकती कि हम खुद भी वैसा आचरण करे...आप ब्लू फिल्म भी देखती होंगी परन्तु घर में ब्लू फिल्म बनती तो नहीं होगी...शायद हम सभी में कही एक जानवर भीतर होता है परन्तु उसे ही आधार मान परिवार में वैसा आचरण परिवार के ताने बाने को छीन भिन कर देगा... और वैघ्यानिक तौर से भी ऐसे सम्बन्ध केवल कमजोर पीड़ी का निर्माण करते है...रोमन साम्राज्य में राजतन्त्र के पतन का कारण भी ऐसे सम्बन्ध थे..इतिहास गवाह है..लोग चाहे उनके संबंधों को चटकारे लेकर कहते हो परन्तु वैसा आचरण नहीं करते...चटनी चटकारे के लिए होती है पर भोजन का आधार नहीं होती...

अब सही बात कही आपने, "हम सब में कहीं भीतर एक जानवर भी होता है" और यही जानवर कभी-कभी हमें अपने परिवार में सेक्स संबंध बनाने के लिए मजबूर कर देता है। मैं भी पहली बार अपने परिवार में हीं अपने मामा जी के बेटे से सेक्स की थी, तब मैं खुद १२वीं की परीक्षा के बाद उनके घर गई थी, करीब २० दिन के लिए। कुछ ऐसा हुआ कि मैं बहुत पहले से ब्लू-फ़िल्म देखने लगी थी और मुझे सब पता भी था। हम पहले से भी एक दोस्त की तरह थे, और वो मेरे से ६ साल बड़े थे। इसके बाद अगले २ साल में हम करीब ३० बार सेक्स कर चुके होगें, और यह सब बात एक सीक्रेट ही थी तब। बाद में दुसरे लड़के जिससे मैं सेक्स की वह भी मेरे मौसी का बेटा थे। मेरे मामाजी के बेटे ने हीं हम दोनों को मौका और जगह उपलब्ध कराया था। सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने भी तर के जानवर की पुकार पर हीं मैं सेक्स की थी। फ़िर तीन बार ऐसा भी मौका आया जब मैं अपने उन दोनों भाईओं से एक साथ सेक्स की। हालाँकि मेरे अपने दो भाई हैं, पर उन दोनों से मैंने कभी सेक्स करने की हिम्मत न कर सकी। तो कभी-कभी आपके भीतर का जानवर आपके भीतर के इंसान पर हावी हो जाता है, इसे स्वीकार कीजिए। और एक बात लड़कियाँ रिश्ते के भीतर के लड़कों से सेक्स करती हैं तो इसका एक कारण सीक्रेसी जरूर होता है, और एक बड़ा कारण होता है। एक बात और कह दूँ, हो सकता है कि आपकी खुद की बहन भी रिश्ते के किसी मर्द से सेक्स कर चुकी हो, पर आप इसको जानेगें कैसे? इंसेस्ट अब उतना uncommon नहीं है, जितना आप सब समझते हैं, हम लड़कियाँ अकेले में क्या बात करती हूँ, आप सब कैसे जान सकते?

srtjoon
11-02-2011, 10:43 PM
चेतावनी का अर्थ यह नहीं कि गलत चीज़ों को ज़ारी रहने दिया जाए. अन्तर्वासना एक समग्र फोरम है. आप घर के बाहर तख्ती तंग दें कि मैं अपनी बहनों के साथ .... जिन्हें आपत्ति है कृपया खिडकी से ताक-झाँक न करें... आजमा कर अपना अनुभव बताएं ज़रा. मैं पारिवारिक संबंधों पर आधारित सामग्रियां पसंद नहीं करता और इस फोरम में हूँ इसका अर्थ यह कतई नहीं कि मैं इस विषय का समर्थन करता हूँ अथवा यह मेरे लिए मनोरंजन का कोई विषय है लेकिन समाज में भिन्न विचारों के कैसे-कैसे जीव पल रहे हैं उनके बारे में जानना अवश्य चाहूँगा. सिर्फ तख्ती मात्र टांग देने से आप अपना विचार रखने का अधिकार नहीं छीन सकते.

आप सिग्मण्ड फ़्रायड की पुस्तक "Lectures On Sexuality" पढ़े। फ़्रायड कौन थे/हैं, इसके लिए google/wikipedia का सहारा लें

anjoogupta
12-02-2011, 03:34 PM
अब सही बात कही आपने, "हम सब में कहीं भीतर एक जानवर भी होता है" और यही जानवर कभी-कभी हमें अपने परिवार में सेक्स संबंध बनाने के लिए मजबूर कर देता है। मैं भी पहली बार अपने परिवार में हीं अपने मामा जी के बेटे से सेक्स की थी, तब मैं खुद १२वीं की परीक्षा के बाद उनके घर गई थी, करीब २० दिन के लिए। कुछ ऐसा हुआ कि मैं बहुत पहले से ब्लू-फ़िल्म देखने लगी थी और मुझे सब पता भी था। हम पहले से भी एक दोस्त की तरह थे, और वो मेरे से ६ साल बड़े थे। इसके बाद अगले २ साल में हम करीब ३० बार सेक्स कर चुके होगें, और यह सब बात एक सीक्रेट ही थी तब। बाद में दुसरे लड़के जिससे मैं सेक्स की वह भी मेरे मौसी का बेटा थे। मेरे मामाजी के बेटे ने हीं हम दोनों को मौका और जगह उपलब्ध कराया था। सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने भी तर के जानवर की पुकार पर हीं मैं सेक्स की थी। फ़िर तीन बार ऐसा भी मौका आया जब मैं अपने उन दोनों भाईओं से एक साथ सेक्स की। हालाँकि मेरे अपने दो भाई हैं, पर उन दोनों से मैंने कभी सेक्स करने की हिम्मत न कर सकी। तो कभी-कभी आपके भीतर का जानवर आपके भीतर के इंसान पर हावी हो जाता है, इसे स्वीकार कीजिए। और एक बात लड़कियाँ रिश्ते के भीतर के लड़कों से सेक्स करती हैं तो इसका एक कारण सीक्रेसी जरूर होता है, और एक बड़ा कारण होता है। एक बात और कह दूँ, हो सकता है कि आपकी खुद की बहन भी रिश्ते के किसी मर्द से सेक्स कर चुकी हो, पर आप इसको जानेगें कैसे? इंसेस्ट अब उतना uncommon नहीं है, जितना आप सब समझते हैं, हम लड़कियाँ अकेले में क्या बात करती हूँ, आप सब कैसे जान सकते?

सही कहा बहन. सब अपने ऊपर एक तरह का मुखोटा लगाते हैं. अन्दर की हकीकत कौन जाने ...

crisline
13-02-2011, 08:23 PM
jo log gyan ki bate kar ke dusro se apne ko upar bata rahe hai wo khud bhi family sex me interest lete hai. badi badi bate karna sabse sopa kam hai. mai to yehi kahunga ki agar family me Ma aur bahen pyar se hamse chudwana chahti hai to hame unhe chod kar khush karna hi chahiye. akhir aur awwal sex hi hai. rishte nate bad me hai. ek bat hai lekin Ma baheno ko pata kar chodna chahiye rape ya jabardsti nahi karna kyoki wo hamare apne hai.

av_26
14-02-2011, 05:21 PM
aisa hi ki aaj ke samay me family sex bahut jaruri ho gaya he. waise to parivarik chudai to anadi kaal se chali aa rahi he aur anadi kaal tak chalengi, chahe kuch smaj ke swa ghoshit thekedar kyo na isko galt batate rahe. ab me aaj ke adhunik yug me parivarik chudai ki awshyakta pe prakash dalta hu. aaj ke 25-30 saal pahle ke samj me bacho ki shadi 18 saal ki umar tak kar di jati thi. yane ki jub ladke ka lund jor marne lagta tha aur ladki ki chut me khujli chalne lagti thi us umar me unko chut aur lund uplabdh karwa diye jate the.kitne hi cases me to un shadi shuda ladke ladkiyon ko sex ka gyan nahi hota tha to suhagraat ko unke maa baap ya bhai bhabhi log unko practical karke samjha te the ki kaise chudai ki jati he. kintu aajkal ke samy meladko ladkiyon ki shadi average me 25 saal ki umar me hone lagi he. ab aap dekhiye ki is samy tak chore ke lund ko dhwaj phaharate huye karib 10-12 saal ho gaye aur ladki ko apni chut ki khujli ungli se mita te huye bhi us se bhi jyada samy ho gaya. dusra aaj ke shahri samj me ghar me sthan chota hota he jis se bachho ko maa baap ki chudai ko dekhne ke assan moke milte he, jis se bhi unki kaam wasana jagrat ho jati he. is liye ab yeh bechari yuvak yuvtiya kya kare. bahar yedi sambhnd karte he to badnami hone ka dar rahta he. is liye aise yuvak yuvtiyon ko apne ghar me jo prapt lund ya chut ho use kaam me lena padta he.log kahte he ki yeh galt he per yeh samy i awshyakta he. mere samne kitne hi udhaharan he jub ki beti ne maa se shikayat ki ki uska bhai use chodta he to maa ne use jhadak diya ki teri chut ki pyas hi to bhujata he isme kya galt he, khub chudwa jab tak teri shadi nahi hoti uar maje kar. waise hi maa bete se kahti he kyore tu behen chodta he to itna shor kyo karta he, beawaj choda kar use.

akash
15-02-2011, 09:45 AM
are dear main to apni real sis ko chodta huin, usi ne mera lund lena shuru kiya.....even gaand bhi shuru kar dee hai marwani...

anjoogupta
03-03-2011, 02:59 AM
aisa hi ki aaj ke samay me family sex bahut jaruri ho gaya he. waise to parivarik chudai to anadi kaal se chali aa rahi he aur anadi kaal tak chalengi, chahe kuch smaj ke swa ghoshit thekedar kyo na isko galt batate rahe. ab me aaj ke adhunik yug me parivarik chudai ki awshyakta pe prakash dalta hu. aaj ke 25-30 saal pahle ke samj me bacho ki shadi 18 saal ki umar tak kar di jati thi. yane ki jub ladke ka lund jor marne lagta tha aur ladki ki chut me khujli chalne lagti thi us umar me unko chut aur lund uplabdh karwa diye jate the.kitne hi cases me to un shadi shuda ladke ladkiyon ko sex ka gyan nahi hota tha to suhagraat ko unke maa baap ya bhai bhabhi log unko practical karke samjha te the ki kaise chudai ki jati he. kintu aajkal ke samy meladko ladkiyon ki shadi average me 25 saal ki umar me hone lagi he. ab aap dekhiye ki is samy tak chore ke lund ko dhwaj phaharate huye karib 10-12 saal ho gaye aur ladki ko apni chut ki khujli ungli se mita te huye bhi us se bhi jyada samy ho gaya. dusra aaj ke shahri samj me ghar me sthan chota hota he jis se bachho ko maa baap ki chudai ko dekhne ke assan moke milte he, jis se bhi unki kaam wasana jagrat ho jati he. is liye ab yeh bechari yuvak yuvtiya kya kare. bahar yedi sambhnd karte he to badnami hone ka dar rahta he. is liye aise yuvak yuvtiyon ko apne ghar me jo prapt lund ya chut ho use kaam me lena padta he.log kahte he ki yeh galt he per yeh samy i awshyakta he. mere samne kitne hi udhaharan he jub ki beti ne maa se shikayat ki ki uska bhai use chodta he to maa ne use jhadak diya ki teri chut ki pyas hi to bhujata he isme kya galt he, khub chudwa jab tak teri shadi nahi hoti uar maje kar. waise hi maa bete se kahti he kyore tu behen chodta he to itna shor kyo karta he, beawaj choda kar use.
हिंदी में क्यों नहीं लिखते ?

rawaccess
10-03-2011, 10:18 PM
अब श्रीमती जी मुझे फ्रायड को पढ़ने का सलाह न हीं दे तो बेहतर. कौन क्या और कितना पढ़ कर आया है इस फोरम में वो सदस्यों की छद्म उपस्थिति से शायद आप नहीं समझ सकतीं. आपने मेरे आपत्ति का जवाब अपनी स्वीकारोक्ति "हालाँकि मेरे अपने दो भाई हैं, पर उन दोनों से मैंने कभी सेक्स करने की हिम्मत न कर सकी। " से दे दिया है. लेकिन कुछ लोग थेथरई से कभी बाज नहीं आते.

आप सिग्मण्ड फ़्रायड की पुस्तक "Lectures On Sexuality" पढ़े। फ़्रायड कौन थे/हैं, इसके लिए google/wikipedia का सहारा लें

VIDROHI NAYAK
10-03-2011, 10:27 PM
आप सिग्मण्ड फ़्रायड की पुस्तक "Lectures On Sexuality" पढ़े। फ़्रायड कौन थे/हैं, इसके लिए google/wikipedia का सहारा लें
आप अपने समर्थन में फ्रायड के मनोविज्ञान का सहारा ले रही हैं जबकि इन धारणाओं के विपरीत हज़ारो मनोवैज्ञानिक हैं ! और जहाँ तक मनोविज्ञान की बुनियाद पर खुद को सही सिद्ध करने का सवाल है तो यह बात भी महत्वपूर्णता से ध्यान रखनी चाहिए की मनोविज्ञान स्वयं की भी पूर्ण पुष्टि नहीं करता है !

pooja
11-03-2011, 12:59 AM
आप सिग्मण्ड फ़्रायड की पुस्तक "Lectures On Sexuality" पढ़े। फ़्रायड कौन थे/हैं, इसके लिए google/wikipedia का सहारा लें

डाक्टर सिगमंड फ्रायड खुद अवसाद से ग्रसित था और काफी सारी बीमारिया भी थी उसे , उसका खुद का जीवन बड़े अव्यवस्थित तरीके से पूरा हुआ , उसकी माँ का नाम अमेलिया था जिसके काफी सारे मर्दों से सम्बन्ध रहे , फ्रायड ने अपनी मौत से पहले अपने पागलपन को स्वीकार किया था, फ्रायड की दी हुई सारी मनोवैज्ञानिक अव्धार्नाये प्रोफ़ेसर कार्ल जुंग और डॉक्टर एड्लोर जैसे महान मनोवैज्ञानिको द्वारा काफी पहले ही खंडित की जा चुकी है , अमेरिका में हुए एक सर्वे के अनुसार फ्रायड के मनोविज्ञान के आधार पर जीवन व्यतीत करने वाले करीब पचास हजार लोग इस समय मानसिक रोगों से ग्रसित है तथा पश्चिम के देशो के मनोविज्ञान में अब फ्रायड का मनोविज्ञान नहीं पढाया जाता, लेकिन खेद की बात है की महर्षि पतंजलि जैसे दुनिया के सबसे बड़े मनोवैज्ञानिक की जन्म और कर्मभूमि भारत की मानसिक चिकित्सा पद्धति और योन रोग विशेषज्ञ अभी भी सिगमंड फ्रायड के मनोविज्ञान पर आधारित है

shaukeen
23-03-2011, 08:23 PM
[]सही कहा बहन. सब अपने ऊपर एक तरह का मुखोटा लगाते हैं. अन्दर की हकीकत कौन जाने ... []

aapki baaton se mujhe bhi apna ek wakya yaad aaya hai.

मैं ३६ साल का हूँ. मेरे चचेरे भाई की तीन बेटियां हैं. वोह लोग गाँव में रहते हैं. करीब १ साल पहले जाड़ों के दिन थे और हम सब एक ही कमरे में सोये थे. इत्तेफाक से मुझे सोने की जगह नहीं मिल पाई थी. इसलिए मैंने समय बिताने के लिए सबसे बड़ी भतीजी से उसके स्कूल और पढाई की बातें करने लगा. बातों बातों में मैंने गौर किया की बाकी लोग सो चुके हैं और भतीजी को भी झपकी आ रही थी. मैं बातों में ही समय बिताना चाहता था. इसलिए मैंने उसकी नींद भागने के लिए उसका हाथ पकड़कर हलके से झिंझोड़ा. जिससे हाथ हिलाने में मेरा हाथ उसके बूब्स पर भी हलकी सी रगड़ खा गया. मुझे जाड़े में हलकी सी उत्तेजना महसूस तो हुई लेकिन किसी और प्रकार की तुरंत कार्रवाई करने से मैंने अपने आपको रोका. खैर मेरे हिलाने से मेरी भतीजी फिर से थोडा चैतन्य हुई और उसने बातें करना शुरू किया. थोड़ी देर बाद फिर से उसे हलकी सी झपकी आई और मैंने फिर से उसका हाथ झिंझोड़ने के लिए पकड़ा. तभी मेरे मन में शैतान भी जागा और इस बार मैंने उसके बूब पर अपने हाथ की रगड़ और जोरों से की तथा देर तक हाथ के उलटे हिस्से से उसके बूब को रगड़ता रहा. वोह फिर से जाग कर बातें करने लगी. मैं उससे पूछने लगा की उसे नींद तो नहीं आ रही है पर वोह बोली नहीं. अब मैंने सब ओर से आश्वश्त होकर धीरे से अपने हाथ को उसके हाथ से सटाया. उसने अपनी आँखें मूंदी. अब वह बातों का जवाब आँखें बंद करके देने लगी. इस स्तिथि में पहली बार मैंने उसके हाथ को बहुत हलके से सहलाया. उसका कोई प्रतिरोध न देखकर मेरा उत्तेजना के मारे बुरा हाल हो गया. धीरे धीरे मैंने अपना हाथ उसके हाथों पर सरकते उसे ऊपर तक ले गया और हौले से उसके बूब को अपनी हथेली के उलटे हिस्से से दबाने लगा. उसने बातें करनी बंद कर दी थी. तभी अचानक वह पलटी और मेरे हाथ के उलटे हिस्से को अपनी छाती से दबाते हुए छाती के बल लेट गयी. अब मेरा हाथ सीधा होना मुश्किल हो रहा था. खैर मैंने हाथ को उल्टा रहते हुए उँगलियों से उसके निप्पल को पकड कर दबाने लगा. डर और उत्तेजना ने ऐसा गज़ब का माहौल बनाया हुआ था कि मैं बता नहीं सकता हूँ. थोड़ी देर बाद उसको शायद मेरे ऊपर दया आई या खुद ही अपनी चाहत ने उस पर असर करना शुरू किया कि उसने अपनी छाती का वजन मेरे हाथ से हटाया. मैंने भी हाथ बाहर निकलने के बजाये हाथ को सीधा किया. और भगवन का नाम लेकर उसके बूब को अपने पंजे में पूरी तरह से भर कर हलके हलके दबाना शुरू किया. इस तरह करीब आधा घंटा करने के बाद जब मुझे यह लगा कि इससे आगे और कुछ होना मुमकिन नहीं है तो मैंने एक प्यार भरी किस करके अपना हाथ बहार निकाल लिया.

bullpower
24-03-2011, 12:26 PM
मेरे विचार में भाई बहन और माँ बेटा या पिता पुत्री के रिश्ते बहुत पवित्र होने चाहीये इसके अलावा अन्य रिश्तों जैसे जीजा के साथ या भाभी या चाची आदि के साथ सेक्स संभव है

Anny143
24-03-2011, 07:57 PM
मैँ आपके विचारोँ से सहमत हूँ ।

Devil khan
24-03-2011, 08:25 PM
बहुत अच कार्य मित्र .......शानदार सूत्र ..................गजब




मेरे नए सूत्र पर आपके विचार जरूर रखे .....................

http://antarvasna.com/forum/showthread.php?t=3757

lawat
09-04-2011, 12:23 AM
सब सदस्यों को राम राम इस से पहले की में कापने विचार इस बारे में व्यक्त करू उस से पहले हम सब लोगो को आदम युग में जाना होगा जहा से मानव जीवन की शुरुआत हुई उस वक़्त इन्सान को किसी चीज़ के बारे में जानकारी नहीं थी और उस वक़्त इन्सान को सिर्फ ये पता था की कैसे बे भूक शांत की जाये जिस के लिए इन्सान कचा मॉस ही खाता था और जैसे जैसे इन्सान को समज हुई उस ने अपने समज से आपस में एक सिस्टम बनाया जिसे हम लोग समाज कहते हे और कुछ तरह की वर्जनाये लागु की जिसे हम लोग रिश्ते के नाम से जानते हे और उस वक़्त में कोई वेगानिक आधार नहीं था सिर्फ मर्द की मुछ का सवाल था क्योकि कुदरत ने मुर्द को औरत से शारीरक तोर पैर जयादा शक्तिशाली बनाया हे और दूसरा कुदरत ने औरत को जननी की शक्ति दी हे तो उसे कुछ कमजोरिया बे दी हे जोस के चलते पुरुस परधान समज में जो नियम मर्द ने लागु किये वो आज तक लागु हे जिस के चलते आज इन्सान का सामाजिक ताना बना चाहे जिस बे रूप में हे चलता आ रहा हे और परिवार नाम की संस्था को सुरु करने का मkसद बे यही था की इन्सान चाहे वो औरत हो या मर्द उस की वासना को लगाम दी जाये ताकि एक वाव्यस्थित समज सुचारू रूप से चल सके पैर हेर युग में इन वर्जनाओ को तोडा गया हे और हेर युग में चाहे सबयता कोई बे रही हो आदम जाती में लड़ाई की सब से बड़ी वजह यही रही हे और आज के इस आदुनिक में इन्सान फिर से अपना इतहेस दुहराने जा रहा हे और ये एक कुदरती प्रेकेरया हे जरा ध्यान दीजिये की एक २ या ३ साल के ब्चे के लिंग में बे हमे उत्थान नज़र आता हे क्या वो इस बात को जानता हे की येः क्यों हो रहा हे पैर हम जानते हे की म्ये एक नेसेर्गिक पेरकिर्या हे और दूसरा इस एशिया महादीप में बचपन से ही मासूमो के दिमाग में ये सेब वर्जेनाये कूट कूट केर भेर दी जाती हे की मोका आने पैर वो एक बूम की तरह फट परती हे फिर चाहे उस का परिणाम रिस्तो का सम्बन्ध कहे या बलात्कर कहे पैर कही न कही ये एक इन्सान की दबी छुपी कुदरती चाहत को पूरा करने का मोका भर होता हे अब इसे हम चाहे रिस्तो में सम्बन्ध कहे या रिस्तो का बलात्कर कहे पैर ये सम्बन्ध हमेसा से चलते आये हे और हमेसा ही चलते रहेगे और येः तो हमारा सोभाग्ये हे की भारत जैसे रुरिवादी देश में हमे एक ऐसा मंच इस फोरम के रूप मिला हे जहा हम इस प्रकार की चर्चा कर रहे हे अन्यथा इस बारे में आप के मन में चाहे जो बी हो आप इन बातो को सामाजिक रूप में कभी बे किसी से सांजा नहीं केर सकते में ये नहीं कहता की मैंने मेरी फैमिली में किसी से ऐसा किया हे लेकिन अगर हो जाये तो में इस को बुरा बे नहीं मानता बाकि ये मेरी निजी राय हे हो सकता हे की आप इस से इत्तिफाक न रकते हो पर हर एक को इस फोरम पैर आपनी बात कहने का आधिकर हे.-------------जय हिंद-----------

lawat
09-04-2011, 12:26 AM
किर्पया मेरी राय से सदस्य सहमत हो बताये और न हो तो बताये धन्यवाद

mann00
09-04-2011, 08:48 AM
बहत बढिया सुत्र है....

sonie
22-04-2011, 11:37 PM
मेरे विचार में भाई बहन और माँ बेटा या पिता पुत्री के रिश्ते बहुत पवित्र होने चाहीये इसके अलावा अन्य रिश्तों जैसे जीजा के साथ या भाभी या चाची आदि के साथ सेक्स संभव है

तो आपके मुताबिक़ बाकी के रिश्ते अपवित्र हुए या अपवित्र किये जा सकते है...
अच्छा एक बात बताये - अगर आप किसी रिश्ते वाली को चोद पाए तो अपवित्र और अगर न चोद पाए (सिर्फ सोच कर ही रह गए) तो पवित्र...

nita
23-04-2011, 05:56 AM
तो आपके मुताबिक़ बाकी के रिश्ते अपवित्र हुए या अपवित्र किये जा सकते है...
अच्छा एक बात बताये - अगर आप किसी रिश्ते वाली को चोद पाए तो अपवित्र और अगर न चोद पाए (सिर्फ सोच कर ही रह गए) तो पवित्र...

बिलकुल सही कही सोनी ने

sonie
24-04-2011, 11:26 AM
बिलकुल सही कही सोनी ने

जब भी चूत के दर्शन होंगे
लंड महाराज तुरंत खड़े होंगे
खड़े हो झट से सलामी देंगे
मुह से टपकेगी राल
चोदने के चक्कर में रहेंगे...
बेचारे लंड को क्या पता
सामने चूत बहन की है
या बिना बालों की चिकनी चूत
उसी लंड से निकली उसकी बेटी की है
चुदने से चूत अपवित्र होती
तो हर चूत पापन होती
हर लंड पापियों की कतार में होता
अगला जन्म कुत्ते बिल्ली का होता
मनुष्यों की तादाद इस कदर न बढती

alok75x
25-04-2011, 12:57 AM
अब सही बात कही आपने, "हम सब में कहीं भीतर एक जानवर भी होता है" और यही जानवर कभी-कभी हमें अपने परिवार में सेक्स संबंध बनाने के लिए मजबूर कर देता है। मैं भी पहली बार अपने परिवार में हीं अपने मामा जी के बेटे से सेक्स की थी, तब मैं खुद १२वीं की परीक्षा के बाद उनके घर गई थी, करीब २० दिन के लिए। कुछ ऐसा हुआ कि मैं बहुत पहले से ब्लू-फ़िल्म देखने लगी थी और मुझे सब पता भी था। हम पहले से भी एक दोस्त की तरह थे, और वो मेरे से ६ साल बड़े थे। इसके बाद अगले २ साल में हम करीब ३० बार सेक्स कर चुके होगें, और यह सब बात एक सीक्रेट ही थी तब। बाद में दुसरे लड़के जिससे मैं सेक्स की वह भी मेरे मौसी का बेटा थे। मेरे मामाजी के बेटे ने हीं हम दोनों को मौका और जगह उपलब्ध कराया था। सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने भी तर के जानवर की पुकार पर हीं मैं सेक्स की थी। फ़िर तीन बार ऐसा भी मौका आया जब मैं अपने उन दोनों भाईओं से एक साथ सेक्स की। हालाँकि मेरे अपने दो भाई हैं, पर उन दोनों से मैंने कभी सेक्स करने की हिम्मत न कर सकी। तो कभी-कभी आपके भीतर का जानवर आपके भीतर के इंसान पर हावी हो जाता है, इसे स्वीकार कीजिए। और एक बात लड़कियाँ रिश्ते के भीतर के लड़कों से सेक्स करती हैं तो इसका एक कारण सीक्रेसी जरूर होता है, और एक बड़ा कारण होता है। एक बात और कह दूँ, हो सकता है कि आपकी खुद की बहन भी रिश्ते के किसी मर्द से सेक्स कर चुकी हो, पर आप इसको जानेगें कैसे? इंसेस्ट अब उतना uncommon नहीं है, जितना आप सब समझते हैं, हम लड़कियाँ अकेले में क्या बात करती हूँ, आप सब कैसे जान सकते?




very good answer srtjoon ji.

kamlabhati
20-05-2011, 03:33 PM
mene apne jija ji ke sath kiya he mujh se 15 saal bade he he vo par maza bahut dete he chodne ki suruvat unhone hi ki mere dimag me aise khyal nahi the par ab vo bahut achhe lagate he humne kareeb 30-35 bar sex kar liya in 7-8 mahino me

kamlabhati
20-05-2011, 03:37 PM
hindi me kese likhu me apni puri kahani batana chahati hu

sagar95
28-05-2011, 05:50 PM
mai apani maa or bahan ko ek chodta hu mere jija bhi meri maa or useki mousi mai , hum 5 hai sab mile hai

anjoogupta
30-05-2011, 04:10 PM
अब सही बात कही आपने, "हम सब में कहीं भीतर एक जानवर भी होता है" और यही जानवर कभी-कभी हमें अपने परिवार में सेक्स संबंध बनाने के लिए मजबूर कर देता है। मैं भी पहली बार अपने परिवार में हीं अपने मामा जी के बेटे से सेक्स की थी, तब मैं खुद १२वीं की परीक्षा के बाद उनके घर गई थी, करीब २० दिन के लिए। कुछ ऐसा हुआ कि मैं बहुत पहले से ब्लू-फ़िल्म देखने लगी थी और मुझे सब पता भी था। हम पहले से भी एक दोस्त की तरह थे, और वो मेरे से ६ साल बड़े थे। इसके बाद अगले २ साल में हम करीब ३० बार सेक्स कर चुके होगें, और यह सब बात एक सीक्रेट ही थी तब। बाद में दुसरे लड़के जिससे मैं सेक्स की वह भी मेरे मौसी का बेटा थे। मेरे मामाजी के बेटे ने हीं हम दोनों को मौका और जगह उपलब्ध कराया था। सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने भी तर के जानवर की पुकार पर हीं मैं सेक्स की थी। फ़िर तीन बार ऐसा भी मौका आया जब मैं अपने उन दोनों भाईओं से एक साथ सेक्स की। हालाँकि मेरे अपने दो भाई हैं, पर उन दोनों से मैंने कभी सेक्स करने की हिम्मत न कर सकी। तो कभी-कभी आपके भीतर का जानवर आपके भीतर के इंसान पर हावी हो जाता है, इसे स्वीकार कीजिए। और एक बात लड़कियाँ रिश्ते के भीतर के लड़कों से सेक्स करती हैं तो इसका एक कारण सीक्रेसी जरूर होता है, और एक बड़ा कारण होता है। एक बात और कह दूँ, हो सकता है कि आपकी खुद की बहन भी रिश्ते के किसी मर्द से सेक्स कर चुकी हो, पर आप इसको जानेगें कैसे? इंसेस्ट अब उतना uncommon नहीं है, जितना आप सब समझते हैं, हम लड़कियाँ अकेले में क्या बात करती हूँ, आप सब कैसे जान सकते?

बहुत अच्छा और सच्चा जबाब. बधाई.

shaukeen
10-06-2011, 11:52 PM
mene apne jija ji ke sath kiya he mujh se 15 saal bade he he vo par maza bahut dete he chodne ki suruvat unhone hi ki mere dimag me aise khyal nahi the par ab vo bahut achhe lagate he humne kareeb 30-35 bar sex kar liya in 7-8 mahino me


kya aapki didi ko maaloom hai ya woh jaan kar anjaan bani hai. agar maloom hai to aapki didi ka reaction kya tha

pkslibra
11-06-2011, 09:00 AM
मैंने अपनी कजन (बुआ की लड़की ) के साथ सेक्स किया है और ये सिलसिला उसकी और मेरी शादी होने तक चला लगभग सात साल शुरुआत उसी ने की हम एक ही उम्र के है और दोस्तों की तरह रहते है हमारे बीच में कोई पर्दा नहीं था उसने एक गर्मी की दोपहर में मुझसे कुछ इशारों में सेक्स की बातें शुरू की नासमझ मै भी नहीं था मैंने भी उसे अच्छे से हवा दी और पहली बार दोपहर में हमने सेक्स किया उस के बाद सिलसिला चल पड़ा और हमें जब भी मौका मिलता हम संलग्न हो जाते हाँ इतने वर्षों में भी गोपनीयता बनी रही उस की शादी के बाद भी मैंने उसके साथ दो बार सेक्स किया है परन्तु अब यह सिलसिला टूट चुका है क्योंकि वो अपने पति के साथ अमेरिका (अटलांटा) चली गयी है

SUMITK070
11-06-2011, 09:41 PM
भाई कुछ बी कहो बहिन को छोड़ने का मज़ा कुछ और हे है

SUMITK070
11-06-2011, 09:43 PM
में तो अपनी बहिन को मज़े से चोदता हु

raj_mastana
12-06-2011, 03:37 AM
सुमित जी मेरी कोई बहन नहीं है तो आप की बहन को मेरी बहन बन ने का मोका दे ओर हमे उनको चोंड्ने का मोका दे ,

ENIGMA-
12-06-2011, 06:19 PM
सही कहा , जिस तरह सच्चा पीने बाला यह नहीं देखता की शराब किस पैमाने में परोसी गयी है वैसे ही चोदने बाला यह नहीं देखता की चुत किसकी है .
नशा चीज ही ऐसी है चाहे शराब की हो या चुत की

Chandu Mal
12-06-2011, 07:04 PM
:bed:भाई मेरे में तो अपनी बीवी के साथ सेक्स करना चाहता हूँ , वो भी तो परिवार की सुपरिओर मेंबर होती है न ?

abcl42
18-06-2011, 03:30 PM
दोस्तों यह एक नया पोल शुरू कर रहा हु कृपया अपना वोते जरुर दे पर थोडा विस्तार से.
तो बताये आप अपने परिवार में किस के साथ सेक्स करना चाहते हे और कैसे ..? :bed::pointlol::lips:

Mam १४५ द्वारा शुरू किया गया ये सूत्र अच्छा है लगभग सभी आगंतुको के विचार पढ़े, अंजू गुप्ता जी srtjoon जी विभा गोएल जी , रणवीर जी, akamboj २००० जी इत्यादि सभी को सदर नमस्कार
सच बात ये है की पारिवारिक सेक्स एक ऐसा विषय है जिस पर हम समाज में खुल कर बात या चर्चा नहीं कर सकते, इस फोरम के माध्यम से हम खुल कर अपनी बात रख सकते हैं , परिवार समाज की एक इकाई है जिसमे सामाजिक नियम मानना सभी की मजबूरी है, लेकिन अन्दर ही अन्दर चोरी छिपे क्या हो रहा है ये बात भी सब जानते है ( अपवाद हर जगह होते हैं ) / मेरे विचार से तो सेक्स भी एक शारीरिक भूख है एवं स्वाभाविक भी है / अपनी बेहेन को देख कर भी वाही भाव आता है जो किसी और लड़की को देख कर/ लड़कियाँ स्वाभाव से बड़ी शर्मीली होती है और लड़कों की अपेछा काफी कुछ छुपा लेती है / परिवार में सेक्स की जो भी संभावनाएं होती हैं वे इसी स्वाभाव के कारन होती हैं / एक बहिन जिस तरह से अपने भाई के साथ खुल सकती है वो अन्य से नहीं / ठीक बात है मै इस बात का कट्टर विरोधी हूँ की घर में ही बलात्कार हो / घर एक सुरछित स्थान है अगर लड़की घर में ही सुरछित नहीं है तो फिर कहाँ हो होगी / हर एक भाई बाप का ये कर्त्तव्य है की अपनी बहिन बेटी को सुरछित रखे/
साथ में ये कहना जरुर चाहता हूँ की परिवार में सेक्स ये बात अब सामान्य हो चली है/ सेक्स ऐसी भूख है कि इन्सान के भीतर छिपा शैतान जग उठता है फिर वो कुछ नहीं देखता. और फिर इस बात को सही साबित करने में कोई देर नहीं लगती / मै ने परिवार में सेक्स किया है, और सहमती के साथ किया है / मै इसमें कोई बुरे नहीं देखता / मेरी चाचा की लड़की के साथ मेरा पहला पारिवारिक सेक्स था / उसके बाद ये संख्या बढ़ गयी / मेरे अथवा मैंने जिसके साथ सेक्स किया उसके मन में कोई गलती का एहसास नहीं है लेकिन मैंने उसे कभी रोटीन नहीं बनाया ( अर्थात एक बार या दो बार हो गया इसका अर्थ ये नहीं की रोज करने लगे जैसे की हम शादी सुदा हों )/
मेरी साफ राय है जहाँ सहमती हो वहां पर सेक्स करने में बुराई नहीं / ज्ञान के उपदेश हम भी दे लेते हैं लेकिन अन्दर के सच कुछ और है/ खुल कर बात रखने का मौका इस फोरम पर मिला मैं इसका आभारी हूँ / धन्यवाद आपका - ए बी सी एल

Ranveer
18-06-2011, 04:37 PM
Mam १४५ द्वारा शुरू किया गया ......... हूँ / धन्यवाद आपका - ए बी सी एल
ह्म्म्मम्म ...दोस्त
वही पुराना तर्क दिया है आपने जो हमेशा कुछ लोग देतें रहतें हैं | मै कुछ कहने की कोशिश करता हूँ चूकि आपके बात रखने का अंदाज़ मुझे पसंद आया | एक एक करके उठाता हूँ -

सच बात ये है की पारिवारिक सेक्स एक ऐसा विषय है जिस पर हम समाज में खुल कर बात या चर्चा नहीं कर सकते, इस फोरम के माध्यम से हम खुल कर अपनी बात रख सकते हैं , परिवार समाज की एक इकाई है जिसमे सामाजिक नियम मानना सभी की मजबूरी है, लेकिन अन्दर ही अन्दर चोरी छिपे क्या हो रहा है ये बात भी सब जानते है ( अपवाद हर जगह होते हैं ) /मेरे विचार से तो सेक्स भी एक शारीरिक भूख है एवं स्वाभाविक भी है

पारिवारिक सेक्स जैसे मुद्दे पर खुल कर चर्चा पहले नहीं की जाती थी क्यूँ ऐसे मामले कम दीखते थे | पर अब जब कुछ लोगों ने जब इसे अपने तथाकथित सुविचारों से अच्छा कहना शुरू कह दिया तो इस मुद्दे पर चर्चा शुरू हुई है | हाँ उतनी खुलकर नहीं होती क्यूंकि हमारा समाज एक दुसरे की इज्ज़त करना जानता है और लिहाज़ का ख्याल होता है | अब एक भाई अपने बहन से या बाप अपनी बेटी से ऐसी बात तो नहीं कर सकता न | पर हाँ कुछ वर्गों में सामाजिक रूप से इस पर व्यापक चर्चा होती है इसका उदाहरण आप इंटरनेट पर सर्च करके देख सकतें हैं |
आज भी परिवार के अन्दर सेक्स सम्बन्ध नही होता | इस तरह की यौन विकृति कुछ ही परिवारों में ही दिखती है जो इसका पुरजोर समर्थन करतें दिखतें हैं |
सेक्स एक शारीरिकी भूख भले ही हो तो क्या सेक्स के लिए हम राह चलतें किसी को भी पकड़ लेते हैं ? शायद नहीं | वो इसीलिए की हमारे अन्दर बुद्धि और विवेक मौजूद है | हमारा सेक्स करने का मन करता है तो ऐसा तो नहीं है की हम नंगे होकर सड़क पर निकल जातें हैं ? शारीरिक भूख की पूर्ती तो आवश्यक है पर परिवार के अन्दर सेक्स करना स्वभाविक कैसे है ?
अपनी बेहेन को देख कर भी वाही भाव आता है जो किसी और लड़की को देख कर/
मुझे और मेरे जैसे अधिकतर लोगों को कभी बहन को देखकर ऐसा ख्याल नहीं आता | यह तर्क बेबुनियाद है | न तो आकर्षण महसूस होता है और न ही ऐसा मन में कभी विचार आता है |ये कुछ लोगों को ही होता है जिनके अन्दर सेक्स सम्बन्धी कुंठाएं मौजूद होती हैं जिसे वो अपनी बहन में देखकर पूरी करने की कोशिश करता है |
लड़कियाँ स्वाभाव से बड़ी शर्मीली होती है और लड़कों की अपेछा काफी कुछ छुपा लेती है / परिवार में सेक्स की जो भी संभावनाएं होती हैं वे इसी स्वाभाव के कारन होती हैं / एक बहिन जिस तरह से अपने भाई के साथ खुल सकती है वो अन्य से नहीं / ठीक बात है मै इस बात का कट्टर विरोधी हूँ की घर में ही बलात्कार हो / घर एक सुरछित स्थान है अगर लड़की घर में ही सुरछित नहीं है तो फिर कहाँ हो होगी / हर एक भाई बाप का ये कर्त्तव्य है की अपनी बहिन बेटी को सुरछित रखे/
मैंने इस विषय के अध्ययन में पाया है की पारिवारिक सेक्स करने के लिए घर के पुरुष ही महिलाओं पर दवाब डालतें हैं और इस पर पहल करतें हैं तो जयादा दिन के दवाब से झुक कर महिलाए भी हार मान लेती है | क्या इस तरह का दवाब बलात्कार की श्रेणी में नहीं आयेगा ? घर की महिलाओं को सुरक्षित करने का ये कौन सा तरीका है की उनकी चुदाई कर दी जाए | क्या ये कर्तव्य है ??
साथ में ये कहना जरुर चाहता हूँ की परिवार में सेक्स ये बात अब सामान्य हो चली है/
कतई नहीं | ये बिलकुल सामान्य नहीं है चाहे इस पर कितनी है तर्क दे दी जाए |
सर्वेक्षण का नतीजा आज भी यही कहता है की लड़के और लडकियां घर से बाहर ही सेक्स करना पसंद करती है |तथाकथित कुछ लोगों ने ऐसा भरम फैला रखा है की ये एक सामान्य बात है |

सेक्स ऐसी भूख है कि इन्सान के भीतर छिपा शैतान जग उठता है फिर वो कुछ नहीं देखता. और फिर इस बात को सही साबित करने में कोई देर नहीं लगती /
सेक्स की भूख शांत करने के लिए माँ बहनों को चोद देना इंसानियत है ? इंसान अपने विवेक के बल पर इस पृथ्वी पर दृढतापूर्वक टिका है | और यदि वेवेक का इस्तेमाल न कर या संयम न रख जानवर बनता है तो उसका विलुप्त भी होना संभव है |

मै ने परिवार में सेक्स किया है, और सहमती के साथ किया है / मै इसमें कोई बुरे नहीं देखता / मेरी चाचा की लड़की के साथ मेरा पहला पारिवारिक सेक्स था / उसके बाद ये संख्या बढ़ गयी / मेरे अथवा मैंने जिसके साथ सेक्स किया उसके मन में कोई गलती का एहसास नहीं है लेकिन मैंने उसे कभी रोटीन नहीं बनाया ( अर्थात एक बार या दो बार हो गया इसका अर्थ ये नहीं की रोज करने लगे जैसे की हम शादी सुदा हों )/
हर रिश्ते की अपनी सीमा है भाई | यदि आपने उस सीमा का उलंघन किया है तो आप खुद ये भी समझतें होंगे की पाने चाचा की लड़की के साथ सेक्स करने के बाद उसके साथ बहन जैसा बर्ताव नहीं कर पातें होंगे | ये अलग बात है की आपको इस गलती का अहसास नहीं है और ये अहसास तब तक न हो जब आपके बेटे -बेटियाँ एक बिस्तर पर वैसा करते नज़र न आ जाएँ |
परिवार में सेक्स करने से परिवार की नींव उखड जाती है |रिश्तों में लगाव ख़त्म हो जाता है |जब तक सेक्स करने की क्षमता होती है तब तक तो सब सही लगता है पर वो ख़त्म हो जाने के बाद जो स्नेह व्यक्ति खोजता है वो नहीं मिलता |
इसी कारण परिवार जैसी सामाजिक संरचना का विकास किया गया है |

मेरी साफ राय है जहाँ सहमती हो वहां पर सेक्स करने में बुराई नहीं / ज्ञान के उपदेश हम भी दे लेते हैं लेकिन अन्दर के सच कुछ और है/ खुल कर बात रखने का मौका इस फोरम पर मिला मैं इसका आभारी हूँ /
आपके खुलकर बोलने की हिम्मत की दाद देता हूँ |
और कई लोग है जो इसे अच्छा नहीं मानते | अब जाहिर है की जो नहीं मानेनेगे वो तो अच्छा नहीं ही कहेंगे |
और मुझे ये भी नहीं लगता की इस फोरम में कोई उपदेश देकर कुछ प्राप्त कर लेगा क्यूंकि ये फोरम खुलकर अपनी बात कहने का मंच है |
यहाँ पर उपदेश देकर किसी को क्या मिलेगा ??

धन्यवाद

abcl42
22-06-2011, 04:11 PM
ह्म्म्मम्म ...दोस्त
वही पुराना तर्क दिया है आपने जो हमेशा कुछ लोग देतें रहतें हैं | मै कुछ कहने की कोशिश करता हूँ चूकि आपके बात रखने का अंदाज़ मुझे पसंद आया | एक एक करके उठाता हूँ -

मैंने इस विषय के अध्ययन में पाया है की पारिवारिक सेक्स करने के लिए घर के पुरुष ही महिलाओं पर दवाब डालतें हैं और इस पर पहल करतें हैं तो जयादा दिन के दवाब से झुक कर महिलाए भी हार मान लेती है | क्या इस तरह का दवाब बलात्कार की श्रेणी में नहीं आयेगा ? घर की महिलाओं को सुरक्षित करने का ये कौन सा तरीका है की उनकी चुदाई कर दी जाए | क्या ये कर्तव्य है ??
साथ में ये कहना जरुर चाहता हूँ की परिवार में सेक्स ये बात अब सामान्य हो चली है/
कतई नहीं | ये बिलकुल सामान्य नहीं है चाहे इस पर कितनी है तर्क दे दी जाए |
सर्वेक्षण का नतीजा आज भी यही कहता है की लड़के और लडकियां घर से बाहर ही सेक्स करना पसंद करती है |तथाकथित कुछ लोगों ने ऐसा भरम फैला रखा है की ये एक सामान्य बात है |

सेक्स की भूख शांत करने के लिए माँ बहनों को चोद देना इंसानियत है ? इंसान अपने विवेक के बल पर इस पृथ्वी पर दृढतापूर्वक टिका है | और यदि वेवेक का इस्तेमाल न कर या संयम न रख जानवर बनता है तो उसका विलुप्त भी होना संभव है |

हर रिश्ते की अपनी सीमा है भाई | यदि आपने उस सीमा का उलंघन किया है तो आप खुद ये भी समझतें होंगे की पाने चाचा की लड़की के साथ सेक्स करने के बाद उसके साथ बहन जैसा बर्ताव नहीं कर पातें होंगे | ये अलग बात है की आपको इस गलती का अहसास नहीं है और ये अहसास तब तक न हो जब आपके बेटे -बेटियाँ एक बिस्तर पर वैसा करते नज़र न आ जाएँ |
परिवार में सेक्स करने से परिवार की नींव उखड जाती है |रिश्तों में लगाव ख़त्म हो जाता है |जब तक सेक्स करने की क्षमता होती है तब तक तो सब सही लगता है पर वो ख़त्म हो जाने के बाद जो स्नेह व्यक्ति खोजता है वो नहीं मिलता |
इसी कारण परिवार जैसी सामाजिक संरचना का विकास किया गया है |

और मुझे ये भी नहीं लगता की इस फोरम में कोई उपदेश देकर कुछ प्राप्त कर लेगा क्यूंकि ये फोरम खुलकर अपनी बात कहने का मंच है |
यहाँ पर उपदेश देकर किसी को क्या मिलेगा ??

धन्यवाद

आदरणीय रणवीर जी आपके विचार और पॉइंट वाइस मेरी पोस्ट का उत्तर देने के लिए बहुत धन्यवाद, मैं आपके विचारों की कदर करता हूँ / लेकिन मैं यहाँ पर कुछ बातें आपके सामने रखना चाहता हूँ/
मैं अगर आपको कभी प्रत्यछ रूप से मिलूँगा तो जो आप ने बातें लिखी हैं वही कहूँगा, मेरे सेक्स संभंध मेरी बहिन से है ये बात इस फोरम पर ही कहने की हिम्मत मुझ में आ पाई है, ये समाज बड़ा कठोर है और सच्चाई बहुत कड़वी है मेरे भाई,
मैं ये साफ कर दूँ कि मेरे संभंध मेरी बहिन के साथ बिलकुल नोर्मल हैं जैसे कि आम भाई बहनों के होते है, जो होना था वो हो गया इसका मतलब ये नहीं है कि उन संबंधो को जिंदगी भर ढोया जाये, आप शायद मेरी बात समझ रहे होंगे, मैं ये बात रिपीट करना चाहता हूँ कि तात्कालिक और छणिक आवेश में सब कुछ हो जाता है और इसे मैं समझता हूँ कि गलत नहीं हुआ,
मैं जीवन भर गलती के एहसास के साथ जीना नहीं चाहता, तर्क येही है कि हम ने कोई पाप नहीं किया है

इस फोरम अगम्य गमन का अर्थ ही है वर्जित छेत्र में में गमन इसीलिए इसके सूत्रों में ये चर्चा होती है
मेरी बेहनचोद बनने की कहानी, बहिन भाई हुए तो क्या हुआ ? मजा तो वाही आता है, बहनों की चर्चा, आपकी राय : पारिवारिक सेक्स के बारे में, भाई ने बताया चुदाई क्या है इत्यादि ये सूत्र बहनों और सगे सम्बन्धियों के बीच सेक्स संबंद पर आधारित हैं /
इसी सूत्र akayemm ( अनिल जी) ने इंट्री १२ और १३ की है और भी लोगो ने अपनी राय पोस्ट की है मैं यहाँ पर उन्हें पोस्ट कर रहा हूँ
मित्र , लगता है कि आपको यह विषय पसंद नहीं . पर आप पढ़े लिखे हैं , क्या आपने चेतावनी नहीं पढ़ी जो इस उप मंच पर आने के सम्बन्ध में लिखी हुई है ?
पहले उसे पढ़ें और फिर अपने विचार लिखे .
अतः विरोध कैसे और क्यों ?
इस मंच पर आने का मतलब तो यही है कि आप इसे पसंद करते हैं !
समझे श्रीमान ? – अनिल

परिवार में रिश्ते के भाई बहनों...चाचा चाची या भुआ या माँ या कोई और करीबी... मेरे विचार में. परिवार के भीटर इस तरह के सेक्स से केवल ये बात सिद्ध होती है...की वो परिवार इंसानों का सामाजिक परिवार नहीं बल्कि मोहल्ले के कुत्तों की टोली है..यदि विचार से कोई आहत हो तो माफी चाहूँगा./..परन्तु/// मैं अपने कथन पर टिका रहूँगा...

परिवार के बाहर समाज के नियमो को तोड़ कोई भी किसी से सम्बन्ध बनाये तो वकील साहेब बहुत खुश होंगे और सिर्फ उन्हें ही मनुष्य का ख़िताब अता करेंगे - वाह
- और इन्सेस्ट सूत्रों पर आकर लार टपकाते हुए माँ-बहनों के कोमिक्स जरुर पढेंगे ...
दम है आपकी तर्क-शक्ति और तथ्यों के अवलोकन करने की क्षमता में....चाहे आधारहीन ही सही. परन्तु टक्कर खूब दी...
परन्तु पारिवारिक सूत्रों को पढने से ये अर्थ नहीं निकाल सकती कि हम खुद भी वैसा आचरण करे...आप ब्लू फिल्म भी देखती होंगी परन्तु घर में ब्लू फिल्म बनती तो नहीं होगी...शायद हम सभी में कही एक जानवर भीतर होता है परन्तु उसे ही आधार मान परिवार में वैसा आचरण परिवार के ताने बाने को छीन भिन कर देगा... और वैघ्यानिक तौर से भी ऐसे सम्बन्ध केवल कमजोर पीड़ी का निर्माण करते है...रोमन साम्राज्य में राजतन्त्र के पतन का कारण भी ऐसे सम्बन्ध थे..इतिहास गवाह है..लोग चाहे उनके संबंधों को चटकारे लेकर कहते हो परन्तु वैसा आचरण नहीं करते...चटनी चटकारे के लिए होती है पर भोजन का आधार नहीं होती...

वकिल साहेब कि बातो से लगता है कि उन्हें इस फोरम के बारे मे कुछ गलतफहमी है, अरे भाई साहेब यह सुत्र तो इन्सान कि दबी हुइ भाव्नाओ को निकाल फेक्ने कि जगह है, जहाँ तक वकिल साहेब कि बात है मै दावे से कह सकता हु अपने जीवन काल मे उन्हें भी इस तरह का अनुभव हुवा होगा तभी तो वोह यहाँ इस फोरम कि सोभा बडा रहे है...मगर यह भुल रहे है कि इस फोरम मे Incest बिरोधियो के लिय कोइ जगह नही है...
हम जानते हे की म्ये एक नेसेर्गिक पेरकिर्या हे और दूसरा इस एशिया महादीप में बचपन से ही मासूमो के दिमाग में ये सेब वर्जेनाये कूट कूट केर भेर दी जाती हे की मोका आने पैर वो एक बूम की तरह फट परती हे फिर चाहे उस का परिणाम रिस्तो का सम्बन्ध कहे या बलात्कर कहे पैर कही न कही ये एक इन्सान की दबी छुपी कुदरती चाहत को पूरा करने का मोका भर होता हे अब इसे हम चाहे रिस्तो में सम्बन्ध कहे या रिस्तो का बलात्कर कहे पैर ये सम्बन्ध हमेसा से चलते आये हे और हमेसा ही चलते रहेगे और येः तो हमारा सोभाग्ये हे की भारत जैसे रुरिवादी देश में हमे एक ऐसा मंच इस फोरम के रूप मिला हे जहा हम इस प्रकार की चर्चा कर रहे हे अन्यथा इस बारे में आप के मन में चाहे जो बी हो आप इन बातो को सामाजिक रूप में कभी बे किसी से सांजा नहीं केर सकते में ये नहीं कहता की मैंने मेरी फैमिली में किसी से ऐसा किया हे लेकिन अगर हो जाये तो में इस को बुरा बे नहीं मानता बाकि ये मेरी निजी राय हे हो सकता हे की आप इस से इत्तिफाक न रकते हो पर हर एक को इस फोरम पैर आपनी बात कहने का आधिकर हे.-------------जय हिंद-----------
Originally Posted by bullpower
मेरे विचार में भाई बहन और माँ बेटा या पिता पुत्री के रिश्ते बहुत पवित्र होने चाहीये इसके अलावा अन्य रिश्तों जैसे जीजा के साथ या भाभी या चाची आदि के साथ सेक्स संभव है
तो आपके मुताबिक़ बाकी के रिश्ते अपवित्र हुए या अपवित्र किये जा सकते है...
अच्छा एक बात बताये - अगर आप किसी रिश्ते वाली को चोद पाए तो अपवित्र और अगर न चोद पाए (सिर्फ सोच कर ही रह गए) तो पवित्र...

abcl42
22-06-2011, 04:25 PM
इस सारी बहेस का अर्थ ये है कि इस फोरम पर हम अपनी वे बातें सामने लाते हैं जो समाज में खुले रूप से कभी कह नहीं सकते,
अब आप अगर ये कहें कि ये सच्चाई बड़ी घिनोनी है, तो सचमुच है, मैं भी मानता हूँ कि है, मेरी चचेरी बहिन जो बचपन से मुझे देखती आई है और मेरी सगी बहिन जैसी ही है जिसके पैर भी डगमगा गए और निश्चित रूप से मैं भी उसमे शामिल था, उस गलती को या यूँ कहे तात्कालिक आवश्यकता को हमने पूरा किया, इस बात को लेकर कोई मलाल न मुझे है न ही मेरी बहिन को है, उसकी वैवाहिक जिंदगी बहुत अच्छी है, आशा है आप मुझे छमा कर देंगे, लेकिन सच का सामना एक टीवी सिरिअल था ये सूत्र वैसा ही है, सब के सामने अपनी सच्चाई लिखने कि बहुत बड़ी हिम्मत जुटी मैंने फिर लिख पा रहा हूँ/ ये सच्ची बातें इस फोरम पर ही लिख सकता हूँ
धन्यवाद

abcl42
22-06-2011, 05:13 PM
प्रिय रणवीर जी कुछ बिन्दुओं पर मैं लिखना चाहता था सो लिख दिया आशा है आप इसे पोस्टिव वियु लेंगे, नाराज नहीं होंगे
मुझे और मेरे जैसे अधिकतर लोगों को कभी बहन को देखकर ऐसा ख्याल नहीं आता | यह तर्क बेबुनियाद है | न तो आकर्षण महसूस होता है और न ही ऐसा मन में कभी विचार आता है |ये कुछ लोगों को ही होता है जिनके अन्दर सेक्स सम्बन्धी कुंठाएं मौजूद होती हैं जिसे वो अपनी बहन में देखकर पूरी करने की कोशिश करता है |
क्या आपको या आपके जैसे लोगों के मन में बहिन को देख कर ये लगता है कि ये लड़की नहीं है, इसके शरीर में लड़की जैसे अंग नहीं है और ये तो कुछ और है, मैं तो ये पढ़ कर समझ रहा हूँ कि ये बाते ठीक नहीं है, अपनी बहिन को देख कर सेक्स कि कोशिश करना ये बात सचमुच सेक्स कुंठा कह सकते हैं, यहाँ पर साफ कर दूँ प्रत्येक पुरुष और प्रत्येक स्त्री अपनी आँखों से वो हर चीज देखती य देखता है जो स्त्री और पुरुष को अच्छी लगती है, ब्रह्मचारी को उपदेश दिया जाता कि एकांत में स्त्री से न मिलो, एकांत में मिलना, ऐसी बहुत सी अवस्थाये होती घर में जब बहिन या भाई एक दुसरे को न चाहते हुए एकांत में मिलते है या फिर छुपी बातें जान लेते है, येहीं से अचानक कब किस परिस्थिथि में क्या हो जाये ये सब जानने के बाद ही आप किसी भाई या बहिन पर दोष लगा सकते हैं.
जयादा दिन के दवाब से झुक कर महिलाए भी हार मान लेती है |
ये बात ठीक नहीं है

कतई नहीं |
ये बिलकुल सामान्य नहीं है चाहे इस पर कितनी है तर्क दे दी जाए
हो सकता है आपकी बात सही हो, मै तो समझता हूँ अगर सामान्य नहीं तो ये बातें बढ़ी जरुर है
ये अलग बात है की आपको इस गलती का अहसास नहीं है और ये अहसास तब तक न हो जब आपके बेटे -बेटियाँ एक बिस्तर पर वैसा करते नज़र न आ जाएँ |
परिवार में सेक्स करने से परिवार की नींव उखड जाती है |रिश्तों में लगाव ख़त्म हो जाता है |जब तक सेक्स करने की क्षमता होती है तब तक तो सब सही लगता है पर वो ख़त्म हो जाने के बाद जो स्नेह व्यक्ति खोजता है वो नहीं मिलता |
मुझे गलती का एहसास नही है और मैं ये फिर कह रहा हूँ कि कोई गलती नही हुई है
रही बात कि मुझे गलती का एहसास तब होगा जब मेरे बेटे और बेटी एक बिस्तर पर मुझे नजर आयेंगे, ये बात भी ठीक नहीं है, जब एक बिस्तर पर मै अपनी बहिन के साथ किसी को नजर नहीं आया तो मेरे बेटे बेटी ऐसा कैसे करेंगे. आप शायद बहुत गुस्सा हैं और ऐसी बात गुस्से में लिख रहे हैं, आगे जो होगा वो देखा जयेगा , इस बात को फिर लिखूंगा कि मेरे संभंध बिलकुल नोर्मल हैं और बहुत स्नेह भाई बहनों में है

kharghar
14-07-2011, 05:59 AM
सबसे पहले मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मैंने कभी पारिवारिक सदस्यों से शारीरिक सम्नंध नहीं बनाये और न कभी बनाना चाहता हूँ. इसमे "अंगूर खट्टें हैं" जैसी कोई बात नहीं है, मैंने या मेरे किसी परिवार के सदस्य ने यह रास्ता अपनाना सही नहीं समझा. वैसे भी ताली दो हाथों से बजती है, यदि मेरे परिवार के किसी सदस्य की इस तरह की इच्छा हुई भी हो तो कम से कम मेरे साथ तो इस तरह का कोई रिश्ता नहीं बन सकता था. मैं यह कभी नहीं कहूँगा कि बचपन से जवानी की तरफ के सफ़र मैं, खास कर वय संधि के मुकाम पर, मैंने कभी अपनी बहनों को, अपनी माँ को, मेरे रिश्ते कि अन्य जवान या middle aged औरतों को कामुक दृष्टी से नहीं देखा या कभी उनको पात्र बना कर sexual fantesies नहीं की. यह तो एक मानसिक तौर और शारीरिक तौर से सामान्य लड़के या लड़की के बड़े होने के दर्मान्य होने वाली सामान्य प्रक्रिया है, इसे झुठलाना बिलकुल गलत है. फर्क यह है कि वयस्क होने के दरम्यान होने वाली इस प्रक्रिया को, मन मैं उठने वालीं इन इच्छाओं को समझाना, उन्हें स्वीकार करते हुए अपने मन पर संतुलन रखना और उन्हें क्षणिक सुख और शारीर मैं हो रहे उस समय के बदलावों को संतुष्ट करने वाली मीठी कल्पनाओं तक सिमित रखना. मैं इस दरम्यान पारिवारिक सदस्यों के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने वाले या वयस्कता को पार करने के बाद भी उन्हें कायम रखने वाले देवियों/ सज्जनों को अपराधी नहीं समझता, न मैं उन्हें कोई भाषण देना चाहता हूँ. मैं इसे समाज के एक छोटे वर्ग के रूप मैं देखता हूँ जो पूर्ण नग्नता (nudist ) या सम्लेंगिक संबंधों को अपनाने वाले समाज के छोटे वर्ग की तरह है. इस तरह की जीवन राह चुनने वालों के अपने तर्क और उन्हें चुनने की उनकी आजादी को मैं स्वीकार करता हूँ. परन्तु मैं यह भी अपेक्षा करता हूँ कि इस तरह कि राह पर चलने वाले, चाहे उसे अपनाने के जो भी कारण हों, कम से कम इस बात को स्वीकार करें कि वे समाज के एक छोटे हिस्से को represent करतें हैं. मेरा विरोध अपनी चुनी हुई राह को यह स्वीकार किए बिना गलत तरह के तर्कों से उसे सही बताने के उनके प्रयासों से है.

मुझे यह पढ़ कर बहुत आश्चर्य और अफ़सोस होता है कि पारिवारिक सेक्स संबंधों को सामान्य समझने वाले और जो पारिवारिक सदस्यों से सेक्स कर चुकें हैं या कर रहें हैं वे इसे उचित ठहराने के लिए गलत तथ्यों और तर्कों का उपयोग कर रहें हैं. मैं अपनी बात कहने के लिए किसी का नाम नहीं लूँगा, किस व्यक्ति ने लिखा यह important नहीं है, क्या लिखा यह important है. विपरीत तर्क देने वालों के सटीक और बहुत कड़वे सच को केवल "यह सच नहीं है, या इसमे कोई तर्क नहीं है" यह कह कर टालने कि कोशिश कि गई है. जब तर्क दिया गया कि "जब आपके बेटे और बेटी आपस मैं सेक्स करेंगे तब कैसा लगेगा?" तो जवाब दिया गया कि "जब मुझे अपनी बहन के साथ सेक्स करते कोई नहीं देख सका तो उन्हें करते कोई कैसे देख सकेगा?". पढ़ कर ऐसा लगा मानो कोई कह रहा हो कि जब मुझे चोरी करते कोई नहीं पकड़ पाया तो मेरे बेटे या बेटी को चोरी करते कोई कैसे पकड़ेगा. देवियों/ सज्जनों, चोरी तो चोरी होती है, पकड़ी नहीं गई तो सही नहीं हो जाती. अगर दम है तो इन देवियों/ सज्जनों मैं से कोई आगे आए और यह कहे कि हम अपने बेटे- बेटी से कहेंगें कि मैं बहन चोद/ माँ चोद था और/ या तुम्हरी माँ भाई चोद / पिता चोद थी, और मैं या/ और तुम्हारी माँ इसे गलत नहीं मानते थे, हमने अपनी बहन/ माँ/ भाई/ बाप को चोदने का भरपूर आनंद उठाया इसलिए अब तुम भी हमारी नज़रों के सामने वही सब करो, हमें कोई एतराज नहीं होगा. मैं इन देवियों/ सज्जनों से दो सवाल पूछना चाहता हूँ:
i ) जो इस तरह के पारिवारिक संबंधों मैं कोई बुराई नहीं देखते, उनमे से कितनों ने अपने होने वाले पति / पत्नी को इसके बारे मे बताया?
ii ) जो पुरुष अपनी बहन/ माँ/ चाची/ ताई/ बुआ/ मामी/ मोसी को चोद चुके हैं या चोदते हैं, उनमे से कितने यह सहन कर पायेंगें कि उनकी पत्नी अपने भाई/ बाप/ चाचा/ ताऊ/ मामा/ फूफा/ मोसा से चुद चुकी है या चोदती है? यही प्रश्न मैं इस तरह के संबंधों को सही ठहराने वाली देवियों से भी पूछना चाहता हूँ.
मैं इस बात को मानता हूँ कि यह बहुत जटिल मामला है, इसका कोई straight jacket solution नहीं है न ही हो सकता है. समस्या यह है कि अधिकांस मामलों में इस तरह का सम्बन्ध बनाने वाले व्यक्ति क्षणिक भावनाओं मैं समाज मैं रहने के लिए अपनी इच्छाओं और इन्द्रियों कि लालसाओं पर जो मानसिक संतुलन बना रहना चाहिए उसे तोड़ देते है और जो भी किया उसे सही ठहराने के लिए तर्क बाद में खोजतें हैं. अपराध भावना से छुटकारा पाने के लिए और मानसिक कमजोरी को छुपाने के लिए इस तरह कि कोशिश करना बेहूदा है.
यह तर्क कि पहले विवाह कम उम्र में हो जाते थे इसलिए सेक्स से सम्बंधित युवाओं कुंठाएं नहीं थी सही नहीं लगता. मैं विदेश मैं (अमेरिका, यूरोप) बहुत रहा हूँ, वहां की संस्कृति मैं १७-१८ साल कि उम्र के बाद बच्चे काफी आजाद होते हैं और सेक्स करने कि उन्हें छुट होती है. परन्तु वहां भी इन्सेस्ट और पारिवारिक सेक्स संबंधो कि कमी नहीं है. शायद थोडा कम होगा क्योंकि जीतनी हद तक हमारे यहाँ इन बातों को छुपाया जाता है उतना वहां नहीं छुपाया जाता.

abcl42
14-07-2011, 02:06 PM
अगम्यगाम्य फोरम पर हर सूत्र के लिए कुछ ऐसे नियम जो प्रत्येक सदस्य आदर करे / मानेi /
मेरा ऐसा मानना है की इस फोरम पर हम उन बांतो को शेयर करते हैं जिन्हें खुल कर समाज में नहीं बोल सकते मेरा एक विनम्र निवेदन है कि केवल इसी सूत्र में नहीं बल्कि अन्य सूत्रों में भी जहाँ पर पारिवारिक संबंधों पर चर्चा होती है सदस्य कुछ सामान्य शिष्टाचार का पालन करें /

१. मुझे भी तेरी बहिन या माँ कि चोदना है, मै तेरी बहिन की चुदाई करना चाहता हूँ मुझे उसका नम्बर दे इत्यादि सब ओछी प्रवत्ति हैं / किसी ने स्वयं अगर अपनी बहिन के साथ सम्बन्ध बना लिया उसका मतलब ये नहीं है की उसकी बहिन सब के लिए उपलब्ध है या हाजिर है या फिर सब उसकी बहिन को चोदने के हक़दार हो गए हैं / प्लीज इसे मत लिखे जब तक स्वयं पोस्ट करने वाला या वाली ये न कहे की कोई है मेरी बहिन को चोदने वाला .
२. उपदेश देना अच्छा है, सब जानते हैं कि कुछ रिश्ते ऐसे हैं जहाँ सेक्स वर्जित है, लेकिन फिर भी अगर किसी कारन वश ये रिश्ते हो गए और कोई सदस्य उन रिश्तों कि चर्चा यहाँ पर करता है ये उसका अधिकार है / प्लीज ऐसे उपदेश न दो / उसे जलील न करो या गाली न दो/ अगर आपको अच्छा नहीं लग रहा है तो प्लीज मत पढो /
३. ये बात मान कर चलना चाहिए कि सभी सदस्य समान आदर के अधिकारी हैं, हम सब एक दुसरे की इज्जत करें /

४. ये भी सब लोग मान कर चले कि जिन लोगों ने पारिवारिक संबंधो पर लिखा है या लिख रहे हैं वे सब भी इसी समाज में रह रहे हैं और बाहर कि दुनिया से नहीं हैं / सामाजिक नियम और तौर तरीके उन्हें भी मालूम हैं / ऐसी बातें न लिखे जिससे ये लगे कि जिन सदस्यों ने इन संबंधों पर कुछ लिखा है वे बिलकुल असामाजिक और अपराधी हैं /
आशा है इन स्वयं निर्मित नियमो का पालन सभी सदस्य करेंगे धन्यवाद

raambharose
15-07-2011, 11:47 AM
ye jaan kar khushi hui ki aap ek behad khule aur sulaze vichar ki aurat hai.. par kya aap apni rai dean pasand karengi apne aur aapke bhai ke beech huye sharirik sambandho ke baareme...

abcl42
15-07-2011, 03:22 PM
प्रिय मित्र Kharghar जी,
सर्वप्रथम तो मैं आपके इस सूत्र पर आगमन के लिए धन्यवाद देता हूँ, इस आगमन से इस विषय में आपकी रूचि परिलाछित होती है . जैसा की देख रहा हूँ आप ने इस मंच को अभी जुलाई में ही ज्वाइन किया है और इस मंच पर अग्म्यगाम्य सूत्र का भ्रमण कर अपने सुन्दर विचार हम लोगों के सामने रखे इसका आपको पुनः धन्यवाद ,
प्रिय मित्र Kharghar जी आप स्वयं भी एक छद्म नाम से ( आई डी) इस फोरम के सदस्य बने हैं ताकि आपकी पहचान छुपी रहे , इसमें कोई बुराई नहीं है, इसी प्रकार इन वर्जित संबंधो पर खुल कर बोल पाने की हिम्मत अभी समाज में किसी को नहीं है, इस मंच पर इस सूत्र पर अगर कुछ सदस्य अपने इन संबंधो की चर्चा करते हैं, तो मेरे विचार से इससे समाज का कुछ बुरा नहीं होगा, समाज की सही और कसैली तस्वीर जरुर सामने आ जाएगी / आप से मेरा विनम्र निवेदन है की मेरी किसी टिपण्णी का कुछ अन्यथा अर्थ मत लेना और बुरा भी मत मानना, मैं आप के हर पॉइंट का उत्तर देना चाहता हूँ "

"सबसे पहले मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मैंने कभी पारिवारिक सदस्यों से शारीरिक सम्नंध नहीं बनाये और न कभी बनाना चाहता हूँ. इसमे "अंगूर खट्टें हैं" जैसी कोई बात नहीं है, मैंने या मेरे किसी परिवार के सदस्य ने यह रास्ता अपनाना सही नहीं समझा. वैसे भी ताली दो हाथों से बजती है, यदि मेरे परिवार के किसी सदस्य की इस तरह की इच्छा हुई भी हो तो कम से कम मेरे साथ तो इस तरह का कोई रिश्ता नहीं बन सकता था. मैं यह कभी नहीं कहूँगा कि बचपन से जवानी की तरफ के सफ़र मैं, खास कर वय संधि के मुकाम पर, मैंने कभी अपनी बहनों को, अपनी माँ को, मेरे रिश्ते कि अन्य जवान या middle aged औरतों को कामुक दृष्टी से नहीं देखा या कभी उनको पात्र बना कर sexual fantesies नहीं की. आपने या आपके परिवार के किसी सदस्य ने इस प्रकार के पारिवारिक सदस्यों में शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाये",
ये तो अछि बात है , लेकिन आप अपने बारे ही कहें तो उचित होगा/ कोई भाई या बाप अपनी बहिन या बेटी को कामुकता की नजर से नहीं देखता , इसे हम सब को मान कर चलना चाहिए / लेकिन साथ में ये भी सच है की हर भाई अपनी जवान होती बहिन उसमे होते शारीरिक परिवर्तन को देखता है मह्शूश करता है और कभी कभी पूछता / कहता भी है की तू जरा ठीक से रहा कर , तेरी और कोई बुरी निगाह से तो देखता, वगेरा

"यह तो एक मानसिक तौर और शारीरिक तौर से सामान्य लड़के या लड़की के बड़े होने के दर्मान्य होने वाली सामान्य प्रक्रिया है, इसे झुठलाना बिलकुल गलत है. फर्क यह है कि वयस्क होने के दरम्यान होने वाली इस प्रक्रिया को, मन मैं उठने वालीं इन इच्छाओं को समझाना, उन्हें स्वीकार करते हुए अपने मन पर संतुलन रखना और उन्हें क्षणिक सुख और शारीर मैं हो रहे उस समय के बदलावों को संतुष्ट करने वाली मीठी कल्पनाओं तक सिमित रखना. मैं इस दरम्यान पारिवारिक सदस्यों के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने वाले या वयस्कता को पार करने के बाद भी उन्हें कायम रखने वाले देवियों/ सज्जनों को अपराधी नहीं समझता, न मैं उन्हें कोई भाषण देना चाहता हूँ. मैं इसे समाज के एक छोटे वर्ग के रूप मैं देखता हूँ जो पूर्ण नग्नता (nudist ) या सम्लेंगिक संबंधों को अपनाने वाले समाज के छोटे वर्ग की तरह है. इस तरह की जीवन राह चुनने वालों के अपने तर्क और उन्हें चुनने की उनकी आजादी को मैं स्वीकार करता हूँ. परन्तु मैं यह भी अपेक्षा करता हूँ कि इस तरह कि राह पर चलने वाले, चाहे उसे अपनाने के जो भी कारण हों, कम से कम इस बात को स्वीकार करें कि वे समाज के एक छोटे हिस्से को represent करतें हैं. मेरा विरोध अपनी चुनी हुई राह को यह स्वीकार किए बिना गलत तरह के तर्कों से उसे सही बताने के उनके प्रयासों से है."

पारिवारिक सदस्यों के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने वाले या वयस्कता को पार करने के बाद भी उन्हें कायम रखने वाले देवियों/ सज्जनों को अपराधी नहीं समझता" इस बात से मैं पूरी तरेह सहमत हूँ उन्हें अपराधी न समझें/ इन सम्भंधो में निरंतरता मै भी स्वीकार नहीं करता / मैं ये साफ़ कर दूँ की परिवार में आपस में सम्बन्ध एक छणिक आवेश स्वाभाविक आशक्ति एवं आयुगत समझ के आधार पर स्थापित हो जातें हैं / इन संबंधो की आयु बहुत लम्बी नहीं होती / अगर भाई या बहिन ने एक बार शारीरिक सम्बन्ध बना लिए तो मैं ये समझाता हूँ की ये सम्बन्ध आजीवन नहीं चल सकते / ये संभंध बहुत अल्प कालिक होते हैं, मात्र एक या दो बार / मैं इस बात से पूरी तरेह आपसे सहमत नहीं हूँ की इस प्रकार के संबंधो की संख्या समाज में बहुत कम है / अब संख्या बढ़ने लगी है /

"मुझे यह पढ़ कर बहुत आश्चर्य और अफ़सोस होता है कि पारिवारिक सेक्स संबंधों को सामान्य समझने वाले और जो पारिवारिक सदस्यों से सेक्स कर चुकें हैं या कर रहें हैं वे इसे उचित ठहराने के लिए गलत तथ्यों और तर्कों का उपयोग कर रहें हैं. मैं अपनी बात कहने के लिए किसी का नाम नहीं लूँगा, किस व्यक्ति ने लिखा यह important नहीं है, क्या लिखा यह important है. विपरीत तर्क देने वालों के सटीक और बहुत कड़वे सच को केवल "यह सच नहीं है, या इसमे कोई तर्क नहीं है" यह कह कर टालने कि कोशिश कि गई है. जब तर्क दिया गया कि "जब आपके बेटे और बेटी आपस मैं सेक्स करेंगे तब कैसा लगेगा?" तो जवाब दिया गया कि "जब मुझे अपनी बहन के साथ सेक्स करते कोई नहीं देख सका तो उन्हें करते कोई कैसे देख सकेगा?". पढ़ कर ऐसा लगा मानो कोई कह रहा हो कि जब मुझे चोरी करते कोई नहीं पकड़ पाया तो मेरे बेटे या बेटी को चोरी करते कोई कैसे पकड़ेगा. देवियों/ सज्जनों, चोरी तो चोरी होती है, पकड़ी नहीं गई तो सही नहीं हो जाती. अगर दम है तो इन देवियों/ सज्जनों मैं से कोई आगे आए और यह कहे कि हम अपने बेटे- बेटी से कहेंगें कि मैं बहन चोद/ माँ चोद था और/ या तुम्हरी माँ भाई चोद / पिता चोद थी, और मैं या/ और तुम्हारी माँ इसे गलत नहीं मानते थे, हमने अपनी बहन/ माँ/ भाई/ बाप को चोदने का भरपूर आनंद उठाया इसलिए अब तुम भी हमारी नज़रों के सामने वही सब करो, हमें कोई एतराज नहीं होगा.


"चोरी तो चोरी होती है," ये कह कर आप पुनः यही कहना चाहते हैं की परिवार में आपसी सम्बन्ध चोरी जैसे हैं, बिलकुल ठीक हैं आप, हमारा समाज अभी इन संबंधो को मान्यता नहीं देता, लेकिन इस फोरम पर इस विषय पर ये उपदेश वांछित नहीं हैं/ आप शायद अपने प्रयास गलत जगह पर कर रहे हैं . मित्र अभी हमारे समाज में ओपन सेक्स की भी अनुमति नहीं है, क्या कभी आपने सेक्स की चर्चा अपने पिता या माँ से की है, कभी पिता से ये पूछा की आज कल वे माता जी से कितनी बार सेक्स करते हैं या फिर ऐसी ही सेक्स से सम्बंधित बातें. ऐसी ही चर्चा किसी और नातेदार से माँ से मौसी से चाचा से की है, इन बातों को छुपाया जाता है, इसी प्रकार ये पारिवारिक आपसी सम्बन्ध भी छुपाये जाते हैं, अपने बेटे या बेटी से ये बातें भला कैसे की जा सकती हैं, हमारे बच्चे जो करेंगे वो उनका नजरिया होगा उनको बीच में लाना ठीक नहीं / जरा आप ही सोचिये इन प्रश्नों को यहाँ उठाकर आप क्या साबित करना चाहते हैं? एक बात और मेरी पत्नी किससे पहले से चुद कर आई है ( अपने भाई से, बाप से, जीजा से या फिर किसी और से इन सब बातों को अगर आप सोचेंगे तो आप का / हमारा जीवन नरकमय हो जायेगा, आप तो ये कह कर स्त्री जाति को ही तिरस्कार और अपमानित कर रहे हैं, इन बातों को अगर आप जान भी जाएँ ( पहले के सम्बन्ध के बारे में ) तो भूल जाना ही अच्छा होता है/ सेक्स करना कोई अपराधिक कृत्य नहीं है जैसे चोरी डकैती हत्या या बलात्कार/ ईश्वर चंद विद्या सागर ने आज के लगभग अस्सी वर्ष पहले एक विधवा से विवाह किया था , ये पुरुष की अहंकारी प्रवत्ति का लक्षण है की उसे तो ऐसी पत्नी चाहिए जो न तो पहले से किसी से सम्बन्ध बनायीं हो और न आगे जीवन में बनाये/ भाई वाह/ और पुरुष चाहे जितने औरतों से सम्बन्ध बनता रहे सब माफ़ है /
"मैं इन देवियों/ सज्जनों से दो सवाल पूछना चाहता हूँ:
i ) जो इस तरह के पारिवारिक संबंधों मैं कोई बुराई नहीं देखते, उनमे से कितनों ने अपने होने वाले पति / पत्नी को इसके बारे मे बताया?
ii ) जो पुरुष अपनी बहन/ माँ/ चाची/ ताई/ बुआ/ मामी/ मोसी को चोद चुके हैं या चोदते हैं, उनमे से कितने यह सहन कर पायेंगें कि उनकी पत्नी अपने भाई/ बाप/ चाचा/ ताऊ/ मामा/ फूफा/ मोसा से चुद चुकी है या चोदती है? यही प्रश्न मैं इस तरह के संबंधों को सही ठहराने वाली देवियों से भी पूछना चाहता हूँ"

आपके दोनों प्रश्नोका जवाब ऊपर के पैरा में आ गया है लेकिन उत्तर इस प्रकार है
१.अपने होने वाले पति या पत्नी से ये बताना की मैं अपने परिवार में आपसी शारीरिक संभंध बना चूका / चुकी हूँ, ये प्रश्न बड़ा ही अवव्हारिक है / कोई व्यक्ति भला ये बताता है की मैं पहले से किसी स्त्री या पुरुष के साथ सम्बन्ध बना चुका /चुकी हूँ ( पारिवारिक सम्बन्ध को जाने दीजिये ) / आपके हिसाब से तो शादी के पूर्व और बहुत से खुलासे करने होंगे: मेरा लिंग का आकर ये है , मेरी योनी का आकर ये है, मुझे हस्तमैथुन की आदत थी, मैं रोज नेट चला कर अन्तर्वासना की साईट खोलता हूँ और अगम्यगाम्य सूत्र पढता हूँ गन्दी फोटे मनोहर चित्र पर देखता हूँ , सचमुच ये बातें भी बताने योग्य नहीं हैं / इसीलिए इस काल्पनिक प्रशन का उत्तर "न" ही है, ऐसी बातें बताने योग्य नहीं हैं / इसीलिए इस काल्पनिक प्रशन का उत्तर "न" ही है, ऐसी बातें बताने योग्य नहीं है/
२. ये प्रशन ऊपर के प्रश्न से जुड़ा हुआ है. अरे भाई मेरी पत्नी अपने भाई बाप जीजा मौसा से शारीरिक सम्बन्ध बना कर आई इसका हिसाब लगाना ठीक नहीं. मेरी पत्नी पहले से ही शारीरिक सम्बन्ध बना कर मेरे पास आई , अगर मैं छान बीन में पडूंगा तो जीवन नरकमय हो जायेगा / ये सवाल पत्नी से कभी पूछना भी नहीं चाहिए की वो पहले से शारीरिक सम्बन्ध बना चुकी है अथवा नहीं/ इससे अविश्वास उत्पन्न होगा / पत्नी का तिरस्कार होगा / सीता की उम्मीद करना अहंकार की प्रवत्ति है/

"मैं इस बात को मानता हूँ कि यह बहुत जटिल मामला है, इसका कोई straight jacket solution नहीं है न ही हो सकता है. समस्या यह है कि अधिकांस मामलों में इस तरह का सम्बन्ध बनाने वाले व्यक्ति क्षणिक भावनाओं मैं समाज मैं रहने के लिए अपनी इच्छाओं और इन्द्रियों कि लालसाओं पर जो मानसिक संतुलन बना रहना चाहिए उसे तोड़ देते है और जो भी किया उसे सही ठहराने के लिए तर्क बाद में खोजतें हैं. अपराध भावना से छुटकारा पाने के लिए और मानसिक कमजोरी को छुपाने के लिए इस तरह कि कोशिश करना बेहूदा है."

ये सच है की इस प्रकार के सम्बन्ध छणिक आवेश, स्वाभाविक उत्पन्न आशक्ति और आयुगत प्रेरणा , पारिवारिक परिवेश और परिस्थियों के आधार पर हो जाते हैं इसमें किसी दोष नहीं है, स्वाभाविक आशक्ति में वशीभूत होने के बहुत उदहारण मिल जायेंगे . इन्हें हम अपराधों की श्रेणी में रखना नहीं चाहते इसीलिए अपराध भावना छुपाने की कोशिश भी नहीं है और न ही बेहूदा तर्क हैं / जिन लोगों ने इस प्रकार के सम्बन्ध बना लिए वे मानसिक कमजोरी के शिकार थे ऐसा आपका मानना है, मैं इससे सहमत नहीं हूँ /

छोटी उम्र में विवाह होने से इस प्रकार के संबंधो में कमी तो आ सकती है लेकिन ये सम्बन्ध समाज में चोरिछुपे होंगे जैसे अब भी है और आगे भी रहेंगे /

abcl42
16-07-2011, 04:09 PM
दोस्तों एक नया सूत्र है "आओ कुछ रसीली बातें करें " इस सूत्र पर आयें अपने कुछ रसीले किस्से पोस्ट करें
http://antarvasna.com/forum/showthread.php?t=7239
धन्यवाद आपका दोस्त - ऐबीसीएल

kharghar
18-07-2011, 03:48 PM
चेतावनी का अर्थ यह नहीं कि गलत चीज़ों को ज़ारी रहने दिया जाए. अन्तर्वासना एक समग्र फोरम है. आप घर के बाहर तख्ती तंग दें कि मैं अपनी बहनों के साथ .... जिन्हें आपत्ति है कृपया खिडकी से ताक-झाँक न करें... आजमा कर अपना अनुभव बताएं ज़रा. मैं पारिवारिक संबंधों पर आधारित सामग्रियां पसंद नहीं करता और इस फोरम में हूँ इसका अर्थ यह कतई नहीं कि मैं इस विषय का समर्थन करता हूँ अथवा यह मेरे लिए मनोरंजन का कोई विषय है लेकिन समाज में भिन्न विचारों के कैसे-कैसे जीव पल रहे हैं उनके बारे में जानना अवश्य चाहूँगा. सिर्फ तख्ती मात्र टांग देने से आप अपना विचार रखने का अधिकार नहीं छीन सकते.

बहुत अच्छा जवाब है. मै आपसे पूरी तरह सहमत हूँ. एक सच्ची घटना बताना चाहता हूँ.
एक बार एक व्यक्ति अपने एक मित्र के घर गया, जो की काफी प्रख्यात लेखक और आलोचक थे. उन्हें pornographic literature पढ़ते देख उसे बहुत आश्चर्य हुआ और उसने पूछा "आप ऐसा साहित्य क्यों पढ़ रहे हो?". लेखक ने जवाब दिया "यदि मैं यह नहीं पढूंगा तो मुझे अच्छे और ख़राब साहित्य का अंतर कैसे पता चलेगा?"

यह मानना बिलकुल गलत है कि इस मंच पर आने वाला हर व्यक्ति मन में छुपे अपने अरमानों को पूरा करने के लिए आता है, यह लिखना भी एकदम गलत है कि इस मंच पर इन्सेस्ट के विरोधियों का आना या इसके विरोध में कुछ भी लिखना वर्जित है. इस तरह कि बातें लिखने वाले शायद web sites को चलाने के लिए बने सम्बन्धित कानूनों को भी नहीं जानते.

kharghar
18-07-2011, 04:20 PM
प्रिय मित्र Kharghar जी,
सर्वप्रथम तो मैं आपके इस सूत्र पर आगमन के लिए धन्यवाद देता हूँ, इस आगमन से इस विषय में आपकी रूचि परिलाछित होती है . जैसा की देख रहा हूँ आप ने इस मंच को अभी जुलाई में ही ज्वाइन किया है और इस मंच पर अग्म्यगाम्य सूत्र का भ्रमण कर अपने सुन्दर विचार हम लोगों के सामने रखे इसका आपको पुनः धन्यवाद ,
---------------------------------------------------------------
ये सच है की इस प्रकार के सम्बन्ध छणिक आवेश, स्वाभाविक उत्पन्न आशक्ति और आयुगत प्रेरणा , पारिवारिक परिवेश और परिस्थियों के आधार पर हो जाते हैं इसमें किसी दोष नहीं है, स्वाभाविक आशक्ति में वशीभूत होने के बहुत उदहारण मिल जायेंगे . इन्हें हम अपराधों की श्रेणी में रखना नहीं चाहते इसीलिए अपराध भावना छुपाने की कोशिश भी नहीं है और न ही बेहूदा तर्क हैं / जिन लोगों ने इस प्रकार के सम्बन्ध बना लिए वे मानसिक कमजोरी के शिकार थे ऐसा आपका मानना है, मैं इससे सहमत नहीं हूँ /

छोटी उम्र में विवाह होने से इस प्रकार के संबंधो में कमी तो आ सकती है लेकिन ये सम्बन्ध समाज में चोरिछुपे होंगे जैसे अब भी है और आगे भी रहेंगे /

आपने जवाब तो बहुत विस्तार से दिया है, कुछ बातों से मैं सहमत हूँ और बहुत ज्यादा बातों से सहमत नहीं हूँ. जवाब तो मैं दूंगा और असहमति के कारणों को भी तर्कों के आधार पर प्रस्तुत करूगां. खेद है की आपको इसके लिए इंतजार करना पड़ेगा, अभी मैं बहुत व्यस्त हूँ जब समय मिलेगा तो point by point उत्तर अवस्य दूगां

R K Shukla
18-07-2011, 04:49 PM
kya tumne sahi men apni maa aur bahan ko ek saath chuda hai yar yakin nahi ho raha hai kahi sasti lokpriyata ke liye to nahi kah rahe ho kripya apni puri kahni is e mail address par bheje to bahut achha hoga pl puri kahani bhej do tabhi aap ka AV par rahana safal hoga
rkshukla1965@gmail.com

Ranveer
18-07-2011, 05:33 PM
लेकिन इस फोरम पर इस विषय पर ये उपदेश वांछित नहीं हैं/ आप शायद अपने प्रयास गलत जगह पर कर रहे हैं .
पहले तो मै ये कहूँगा की ये उपदेश नहीं है अपने मत हैं जो हम यहाँ पर रख रहें हैं |दूसरी बात ये है कितने लोग हैं जो इस विभाग में आना पसंद करतें हैं इस बात को आप स्वं देख सकतें हैं |मेरी नज़र में कुछ ही लोग इस विभाग की और रुख करतें हैं उनमे से भी अधिकाँश काल्पनिक एंड लेकर निकल जातें है ...एक्के दुक्के लोग इन्सिस्ट सेक्स की वकालत करते मिलतें हैं |
क्या इस तथ्य से ये साबित नहीं होता की हमारे समाज में ये कितना अच्छा माना जाता है ?

मैंने इस फोरम के प्रशाशकों से इस विषय पर गंभीर चर्चा की है जो यहीं के एक सूत्र में मौजूद है | आप देख सकतें हैं की यहाँ पर आना वर्जित नहीं है और न ही अब किसी को इसका विरोध करने से रोका जा सकता है वो भी तब जब वो अपनी बात संयमित भाषा में रख रहा हो |
अगर ये उपदेश लगता है तो दोष आपका है न की हमारा |

इस मंच पर आने का अर्थ ये नहीं है की हम इन्सिस्ट को पसंद करतें हैं |हम एक व्यस्क मनोरंजन के उद्देश्य से यहाँ आतें हैं |
मुझे इस बात का कोई आश्चर्य नहीं की तथाकथित कुछ लोगों को ये " संकीर्ण मानसिकता " दिखती है |ऐसे लोग इन्सिस्ट सेक्स को मॉडर्न होना समझ लेतें हैं |कुछ लोग शायद अभी तक नहीं जानते की मॉडर्न होना क्या है ?

आपसे एक मात्र सवाल करता हूँ की आपके बेटे -बेटियां आपस में आपके सामने सेक्स करेंगे तो आपको कैसा लगेगा ?
1.यदि आप कहतें हैं की मिझे कोई बुरा नहीं लगेगा और मै भी उनका साथ दूँगा और साथ में अपनी पत्नी को भी उनके सामने पेश कर दूँगा ...तो मै मान लेता हूँ की आप इन्सिस्ट को सच में बुरा नहीं मानते |
2.यदि आप ये कहतें हैं की मुझे भी बुरा लगेगा तो आप ये एक बार सोचें कोई आपको क्यूँ बुरा लगेगा ????

sanjeetspice
20-07-2011, 03:26 PM
मुझे पारिवारिक सेक्स पसंद नहीं


पर कहानी और कॉमिक्स पढने में मुझे अच्छा लगता है

jism0072000
21-07-2011, 01:57 PM
देखिए यह सब प्राकृतिक है चचेरे/ममेरे भाई बहनों के बीच मैं, मैंने यह कई बार देखा है और यह आज से नहीं शुरू से ही है इस का कारण यह होता है वे इक दुसरे को अच्छे से जानते होते है है समझते होते है आप ने सायद नोट नहीं किया होगा की सगे भाई बहनों में जयादा नहीं बनती जितनी दुसरे भाई बहनों से बनती है ..यही करीबी कई बार प्यार का यह दुसरे रिश्ते का रूप ले लेती है ...... और सेक्स भी हो जाता है उनमें तो इस का कोई उपाए नहीं है..... और यह सब होता दोनों की सहमती से है तो इस में बुरा क्या है ..... "जिन को अच्छा लगता है उन को करना चाहिए जिन को नहीं लगता उन को नहीं करना चाहिए आप अपने विचार किसी पे थोप नहीं सकते"

jism0072000
21-07-2011, 01:58 PM
देखिए यह सब प्राकृतिक है चचेरे/ममेरे भाई बहनों के बीच मैं, मैंने यह कई बार देखा है और यह आज से नहीं शुरू से ही है इस का कारण यह होता है वे इक दुसरे को देखिए यह सब प्राकृतिक है चचेरे/ममेरे भाई बहनों के बीच मैं, मैंने यह कई बार देखा है और यह आज से नहीं शुरू से ही है इस का कारण यह होता है वे इक दुसरे को अच्छे से जानते होते है है समझते होते है आप ने सायद नोट नहीं किया होगा की सगे भाई बहनों में जयादा नहीं बनती जितनी दुसरे भाई बहनों से बनती है ..यही करीबी कई बार प्यार का यह दुसरे रिश्ते का रूप ले लेती है ...... और सेक्स भी हो जाता है उनमें तो इस का कोई उपाए नहीं है..... और यह सब होता दोनों की सहमती से है तो इस में बुरा क्या है ..... "जिन को अच्छा लगता है उन को करना चाहिए जिन को नहीं लगता उन को नहीं करना चाहिए आप अपने विचार किसी पे थोप नहीं सकते"

nachiketa
24-07-2011, 10:12 PM
Matlab lesbian sex...........
vibha tume boy psand nhi

arjun32
24-07-2011, 11:59 PM
पारिवारिक सेक्स के सम्बन्ध में किसी के कृत्यों को हम रोक नहीं सकते परन्तु यदि हमें यह पसंद नहीं तो किसी खुले मंच पर अपनी नापसंदगी जाहिर तो कर सकते हैं न ? फिर इसमें इतनी हाय- तोबा क्यों..? अपनी राय ज़ाहिर करना उपदेश देना नहीं है भाई साहब. सूत्र का नाम ही है " आपकी राय : पारिवारिक सेक्स के बारे में " ....... तो हमें अपनी राय ज़ाहिर करने देंगे न..? आप यह कतई नहीं कह सकते कि यदि हमें यह सूत्र पसंद नहीं तो हम यहाँ से चले जाएँ.

kharghar
28-07-2011, 10:02 AM
प्रिय मित्र Kharghar जी,
सर्वप्रथम तो मैं आपके इस सूत्र पर आगमन के लिए धन्यवाद देता हूँ, इस आगमन से इस विषय में आपकी रूचि परिलाछित होती है . जैसा की देख रहा हूँ आप ने इस मंच को अभी जुलाई में ही ज्वाइन किया है और इस मंच पर अग्म्यगाम्य सूत्र का भ्रमण कर अपने सुन्दर विचार हम लोगों के सामने रखे इसका आपको पुनः धन्यवाद , .................................................. .........................................


ये सच है की इस प्रकार के सम्बन्ध छणिक आवेश, स्वाभाविक उत्पन्न आशक्ति और आयुगत प्रेरणा , पारिवारिक परिवेश और परिस्थियों के आधार पर हो जाते हैं इसमें किसी दोष नहीं है, स्वाभाविक आशक्ति में वशीभूत होने के बहुत उदहारण मिल जायेंगे . इन्हें हम अपराधों की श्रेणी में रखना नहीं चाहते इसीलिए अपराध भावना छुपाने की कोशिश भी नहीं है और न ही बेहूदा तर्क हैं / जिन लोगों ने इस प्रकार के सम्बन्ध बना लिए वे मानसिक कमजोरी के शिकार थे ऐसा आपका मानना है, मैं इससे सहमत नहीं हूँ /

छोटी उम्र में विवाह होने से इस प्रकार के संबंधो में कमी तो आ सकती है लेकिन ये सम्बन्ध समाज में चोरिछुपे होंगे जैसे अब भी है और आगे भी रहेंगे /

प्रिय मित्र abcl42 जी, मैंने आपको सूचित किया था कि समय मिलने पर मैं आपको उत्तर दूगाँ. क्योंकि मेरा उत्तर पॉइंट बाई पॉइंट है और विस्तार से है इसलिए मुझे अपने उत्तर को कई भागों में बांटना पड़ रहा है. यहाँ प्रथम भाग है.
सर्वप्रथम तो मैं आपके इस सूत्र पर आगमन के लिए धन्यवाद देता हूँ, इस आगमन से इस विषय में आपकी रूचि परिलाछित होती है . जैसा की देख रहा हूँ आप ने इस मंच को अभी जुलाई में ही ज्वाइन किया है और इस मंच पर अग्म्यगाम्य सूत्र का भ्रमण कर अपने सुन्दर विचार हम लोगों के सामने रखे इसका आपको पुनः धन्यवाद ,

मैं भी सर्वप्रथम मेरे सूत्र पर आगमन पर धन्यवाद देने के लिए आपका आभारी हूँ. मैं यहाँ यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मैं और मेरी पत्नी अन्तर्वासना की web site पर भूले भटके आ गए थे; दरअसल नेट पर उपलब्ध देवनागरी लिपि मैं लिखी कहानियों को ढूढ़ने के प्रयाश मैं अन्तर्वासना की web site पर पहुँच गए. देखते ही पता चल गया था कि यहाँ किस प्रकार की कहानियां हैं, न हमें उनमें कोई रूचि थी न हम पढ़ना चाहते थे. मंच देखा और उसके अंतर्गत अग्मयागमन देखा तो लगा यहाँ इस विषय पर गंभीर चर्चा एवं विचारों का आदान-प्रदान होता होगा. मुझे और मेरी पत्नी को इस बात का दुःख है कि इतनी ज्वलंत और गंभीर समस्या को यहाँ पर मजाक बना कर रख दिया गया है. सूत्र का शीर्ष रखा जाता है " पारिवारिक ", सूत्र में विषय पर गंभीर चर्चा की जगह इसमे लिप्त लोग छाती ठोक कर इन्सेस्ट और पारिवारिक सदस्यों के बिच बनाये यौन संबंधों का विस्तृत और graphic वर्णन दे रहें हैं और न केवल उसे उचित ठहराने का प्रयत्न खुले आम कर रहें है अपितु दूसरों को भी यह सब करने के लिए प्रेरित करने और उकसाने में लगे हैं. जिन्हें इन्सेस्ट और पारिवारिक सदस्यों के बिच यौन संबंधों के विस्तृत वर्णन को पढ़ने में आनंद मिलता हैं और मनोरंजन मिलता है उनके लिए कहानियों का पूरा संग्रह है; इन्सेस्ट के विरोधियों से "आप यहाँ क्यों आये और आप यहाँ क्या कर रहें हैं" यह पूछने के बजाय उन्हें अपने आप से पूछना चाहिए की चर्चा और विचार विमर्श के मंच पर वे क्या कर रहें है. अब मैं आपके द्वारा उठाये मुद्दों का point by point उत्तर दे रहा हूँ.

प्रिय मित्र Kharghar जी आप स्वयं भी एक छद्म नाम से ( आई डी) इस फोरम के सदस्य बने हैं ताकि आपकी पहचान छुपी रहे , इसमें कोई बुराई नहीं है, इसी प्रकार इन वर्जित संबंधो पर खुल कर बोल पाने की हिम्मत अभी समाज में किसी को नहीं है, इस मंच पर इस सूत्र पर अगर कुछ सदस्य अपने इन संबंधो की चर्चा करते हैं, तो मेरे विचार से इससे समाज का कुछ बुरा नहीं होगा, समाज की सही और कसैली तस्वीर जरुर सामने आ जाएगी / आप से मेरा विनम्र निवेदन है की मेरी किसी टिपण्णी का कुछ अन्यथा अर्थ मत लेना और बुरा भी मत मानना, मैं आप के हर पॉइंट का उत्तर देना चाहता हूँ "

ये तो अछि बात है , लेकिन आप अपने बारे ही कहें तो उचित होगा/ कोई भाई या बाप अपनी बहिन या बेटी को कामुकता की नजर से नहीं देखता, इसे हम सब को मान कर चलना चाहिए / लेकिन साथ में ये भी सच है की हर भाई अपनी जवान होती बहिन उसमे होते शारीरिक परिवर्तन को देखता है मह्शूश करता है और कभी कभी पूछता / कहता भी है की तू जरा ठीक से रहा कर, तेरी और कोई बुरी निगाह से तो देखता, वगेरा

महोदय, आपकी बातें विरोधाभासों से भरीं हैं और तर्कहीन हैं. जो व्यक्ति कभी अपनी बेटी बहिन या अन्य पारिवारिक सदस्यों को कामुकता की नजर से नहीं देखता और शारीरिक परिवर्तनों से गुजर रही अपनी बहन बेटी या रिश्तेदार को ठीक से रहने की सलाह देता हो जिससे कोई बुरी निगाह से उसे न देखे, वही व्यक्ति उसी बहिन बेटी या रिश्तेदार से यौन सम्बन्ध कैसे बना सकता है? मैंने अपने पोस्ट में स्पष्ट लिखा था कि वय संधि के मुकाम पर और वयस्कता की तरफ बढ़ने की अवस्था में शरीर में हो रहे बदलावों के कारण और harmons के प्रभाव से विपरीत लिंग के व्यक्ति की तरफ आकर्षण बहुत स्वाभाविक है. समाज में रहने वाले अधिकांश व्यक्ति (यहाँ अधिकांश से मतलब बहुत बड़े वर्ग से है, इसके विपरीत आपके और कुछ अन्य के विचार या राय से मैं बिल्कुल सहमत नहीं हूँ) इस अवस्था में भी अपनी कामनाओं और यौन क्रीडा की ललक पर नियंत्रण रखना जानतें हैं, अपना मानसिक संतुलन नहीं खोते और रिश्तों की मर्यादाओं का उल्लघन नहीं करते. इस तरह के मंच का उपयोग समाज में विद्यमान और समाज के एक बहुत बड़े वर्ग द्वारा गलत मानी जाने वाली रीतियों या विचारों, जीवन शैली पर अर्थपूर्ण और स्वस्थ चर्चा के लिए होना चाहिए. incest और पारिवारिक सदस्यों के बिच यौन सम्बन्ध ही नहीं, मैं और मेरी पत्नी बाल यौन शौषण से पीड़ित बच्चों से सम्बंधित फोरम पर, बलात्कार के शिकार हुए व्यक्तियों के फोरम पर, swinging life style को अपनाने वाले व्यक्तियों के फोरम पर, Nudism में मानने वाले लोगों के फोरम पर भी जातें है, इसका मतलब यह नहीं है कि मैं या मेरी पत्नी इसका शिकार हुए हैं या हम इस तरह की राह पर चलते हैं. अपने से विपरीत विचारधारा रखने वालों के, जिस जीवनशैली को हम सही नहीं समझती उसे अपनाने वालों के क्या तर्क हैं और अपने बचाव में उनका क्या कहना है यह जानना हरेक सजग नागरिक का कर्तव्य भी है और अधिकार भी. बाल यौन शौषण या बलात्कार से पीड़ित व्यक्तियों के फोरम पर चर्चा का मुख्या उद्देश्य अन्य लोगों को आगाह करने, उन्हें चेतावनी देने का होता है जिससे वे सावधान हों और उस तरह का अनुभव या दुःख उन्हें ना झेलना पड़े; इन फोरम का उपयोग मैंने कभी अपने ऊपर घटित दुखद अनुभव का ग्राफिक वर्णन कर के दूसरों की सेक्सुअल भावनाओं को भड़काने, अपनी विचारधारा से सहमत होने या वही राह चुनने के किये उकसाने के लिए होते नहीं देखा. अन्य किसी फोरम पर हमने कभी यह नहीं पाया कि हमसे सहमत नहीं होने वालों ने हमारे द्वारा विपरीत मत प्रकट करने को अपनी आजादी में अतिक्रमण समझा हो या हमसे बेतुके सवाल किये हों. किसी भी फोरम का गलत उपयोग तब होता है जब कुछ लोग उस फोरम पर, उस फोरम पर क्या लिखा जाना चाहिए उस पर अपना एकाधिकार समझ बैठते हैं.

kharghar
28-07-2011, 10:13 AM
abcl42 जी को उत्तर का दूसरा भाग
पारिवारिक सदस्यों के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने वाले या वयस्कता को पार करने के बाद भी उन्हें कायम रखने वाले देवियों/ सज्जनों को अपराधी नहीं समझता" इस बात से मैं पूरी तरेह सहमत हूँ उन्हें अपराधी न समझें/ इन सम्भंधो में निरंतरता मै भी स्वीकार नहीं करता / मैं ये साफ़ कर दूँ की परिवार में आपस में सम्बन्ध एक छणिक आवेश स्वाभाविक आशक्ति एवं आयुगत समझ के आधार पर स्थापित हो जातें हैं / इन संबंधो की आयु बहुत लम्बी नहीं होती / अगर भाई या बहिन ने एक बार शारीरिक सम्बन्ध बना लिए तो मैं ये समझाता हूँ की ये सम्बन्ध आजीवन नहीं चल सकते / ये संभंध बहुत अल्प कालिक होते हैं, मात्र एक या दो बार / मैं इस बात से पूरी तरेह आपसे सहमत नहीं हूँ की इस प्रकार के संबंधो की संख्या समाज में बहुत कम है / अब संख्या बढ़ने लगी है /

महोदय, आपका तर्क सच्चाई और वास्तिविकता से बिल्कुल विपरीत है. प्रमाण में मुझे ज्यादा कुछ करने की जरुरत नहीं है, इस सूत्र पर और मंच पर अन्य सूत्रों पर इन्सेस्ट और पारिवारिक सदस्यों के बिच के यौन संबंधों की पैरवी करने वाले सदस्यों द्वारा किये गए कुछ वक्तव्य मैं नीचे उद्दृत कर हूँ. मैं यहाँ यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि यह थोड़े से चुने हुए वक्तव्य हैं जो मैं उदाहरण के तौर पर पेश करा रहा हूँ, पुरे वक्तव्यों को लिखा तो पेज के पेज भर जायंगे.
१) bahen ko chodne jaisa anand world me nahi. behn ko chod kar dekho. aap anand se pagal ho jayenge.
२) rishto me chudai se zyada suraksha aur zyada anand milta hai.isase rishton me nazdikiya aur prem badhata hai .
३) चुदाई का कोई रिश्ता नहीं होती , एक ही रिश्ता होती है मज़ा , जिंदगी में मज़ा करना सुखद जिंदगी जीने का तरीका है
४) bahen ko chodna koi mushkil kam nahi.par ma ko chodne ke liye patana mushkil hai. agar pata liyato aur chod dala to aapke jaisa sukhi insan world me nahi. mummy ko dosto ke sath milkar chode to bahut maja ata hai. mai bayan nahi kar sakta.
५) चुदाई अपने आप में असीम आनंद देती है चाहे बहन को चोदो या माँ को
६) सेक्स को परिवार से जोड़कर देखना ही गलत है, सेक्स एक भूख है जो जिसके साथ भी मिट जाये अछि बात है, लड़का का रिश्ता जो भी हो
७) दोस्तों बात उन दिनों की हे जब मेरे चाचा की लड़की जो रिश्ते से मेरी बहिन हुई हमरे घर यी हुई थी मेने उसके साथ कम से कम ७ ८ बार सेक्स किया अब उसकी शादी हो चिकि हे
८) Anjoo Gupta maine pehle bhi ekpost mein likha hai ki Mujhe bahut achhe mauke ( kai Mauke) apni pyari saali ke sath mile hain. meri saali bahut achhi hai aur bahut nakhre aur pyar se puchkarne par manti hai. Mujhse bahut achhe se uske relation hai. Lekin dooriyan hone ke karan jada mauke nahi mil paate, fir bhi mai usko aur vo mujh ko bahut pyar karti hai.
९) मैं सच कहता हूँ परिवार में सेक्स बहुत असान है बहुत जल्दी शुरू हो जाता है बस थोडा सा माहौल मिल जाये. मेरी तीन सगी और तीन चचेरी बहने है तीन मामा की लड़किया है, मैं दो भाई हूँ, मैंने अपनी सभी बहनों को नंगा देखा है, और दो चचेरी एक ममेरी बहिन के साथ सेक्स भी किया है, ये तीनो बहुत खुश थी और और ये सब उनकी रजामंदी से हुआ. और एक बात और ये बात किसी बहिन को नहीं पता की भैया ने किसके साथ किया है वो केवल अपने बारे में जानती थी. ये बातें गुप्त हैं.
१०) अंजू गुप्ता जी बहुत खूब जीजा से सेक्स करवाने में बहुत मजा है, साली भी प्यारी होती है बहुत प्यार से उसको पुचकार कर रखना होता है मुझे साली को प्यार करने का अनुभव है मै जानता हूँ मेरे साधू से जादा achhi तरह से मेरी साली मुझे देती है
११) राधिका मुक्ता जी, आप बिलकुल सही कह रही है हम आपसे पूरी तरेह से सहमत है बहिन अगर छोटी है तो उसके साथ सेक्स करने में आसानी होती है, छोटी होने के कारण उसे अपने विश्वास में लेना आसान होता है.
१२) मामा के साथ सेक्स करना भी काफी आसान है क्यूंकि मामा मम्मी के काफी करीब होते हैं और मम्मी उन पर पूरा विश्वास करती है, मैं ने अपनी बहिन की लड़की ( भांजी ) के साथ सेक्स नहीं किया है लेकिन वो इसलिए हुआ की मेरी भांजी मुझ से बहुत छोटी थी / है, मेरे साले की लड़की मेरे घर पर गर्मियों की छुट्टी में आती है, मेरे आस पास ही घूमती रहती है, अभी १८ साल की है, एक दिन की बात है बोली फूफा जी मुझे आप बहुत अच्छे लगते हैं मैंने कहा क्यूँ, बोली आप बहुत स्मार्ट हैं पापा से भी जादा, गोरे हैं और आपके पास खूब पैसे भी हैं, अब आप ही बताएं यहाँ पर ये लड़की मुझ पर ही डोरे डाल रही थी, मुझे उसकी इच्छा पूरी करना चहिये या नहीं ? मैंने उसकी इच्छा पूरी. मामा से याद आया मेरे मामा के साथ सेक्स पार्टनर मै भी रहा, मामा मुझे पहरेदारी में लगाते थे और फिर कमरे में लेते थे, मैंने बहुत बार उनकी पटाई हुई लड़की के साथ सेक्स किया कई बार पहले मैंने किया और उन्होंने बाद में.
१३) राधिका मुक्ता जी , मैं एक बात इस फोरम पर लिखना चाहता हूँ घर के अन्दर परिवार में और रिश्तेदारों में सेक्स बहुत सामान्य रूप से होता है इसके बहुत तरीके हैं और जो लोग नहीं मानते वो सच नहीं कह रहे हैं, मैं अपने से जानता हूँ, बहुत अच्छे परिवार का हूँ लेकिन जब सेक्स ki इच्छा जगती है तो सब कुछ जाएज होता है. मै शहर में आ गया हूँ लेकिन बैक ग्रौंड गाँव का है, मैंने आपस में सेक्स relation को खूब करीब से देखा है और किया है, इस बात पर अब जरा भी शक न करना की साली के साथ चुदाई का इंतजाम कहाँ और कैसे किया, सब बहुत अच्छी तरेह से किया था,
१४) कमला भाटी जी सचमुच जीजा जब अपनी साली ki लेता है तो अति आनंद आता है. मैंने भी अपनी छोटी साली ki ली है वो मेरी बीवी से लगभग ७ साल छोटी है और जब मैंने उसकी पहली बार ली थी तब वो १८ साल की थी, उसकी शादी २३ साल की उम्र में हो गयी उस के बाद जब वो अपने मायके आई और इसी बीच वो मेरे घर भी आई, मेरे घर में उसकी दीदी और मैं ही थे, मेरा एक बेटा हो चूका था लेकिन वो मेरे माँ पिता के साथ रहता था, हम लोग शहर में रहते थे, मैंने एकांत में साली से उसकी सुहाग रात का पूरा हाल पूछा, सब कुछ ठीक लगा लेकिन एक बात खटक गयी की उसको उसके पति ने पूरा नंगा नहीं किया जब की वो लगभग एक महीने ससुराल रही, उसने बताया की उसीने अपने पति को नंगा करने से रोक दिया था, मैंने मौका पा कर उसे मनाया और लेने की इच्छा जाहिर की , तो पहले तो उसने न नुकुर की और कहा की अब तो शादी हो चुकी है अब ये करना ठीक नहीं है ये मेरी तरफ से उसके पति को धोखा होगा, फिर मेरे कहने पर एक बार के लिए मान गयी, बहुत अच्छी तरह से, जैसे सुहाग रात में चोदा जाता है वैसे ही मैंने उसकी बहुत प्यार और मनुहार से ली भगवान ही जनता है की मेरी अपनी सुहागरात से अच्छी ये रात थी, परमीसन एक बार के लिए थी लेकिन मैंने ली तीन बार, थोडा उसे दर्द हो गया था लेकिन सब नोर्मल हो गया, मेरी बीवी भी जान गयी थी की कुछ मैंने किया है उसकी बहिन के साथ, लेकिन उसको खुल कर न मैंने बताया न ही मेरी साली ने, बहुत दिनों बाद ये बात मैंने बीवी को बताई, उसका जवाब बहुत अच्छा था " मैं तो सब जानती थी और जान बुझ कर अनजान बनी थी" लेकिन कभी एक साथ ( ज्वाइंट सेक्स ) बीवी और साली दोनों की लेने का सौभाय्ग मुझे नहीं मिला, और न मिलने के आसार हैं,
१५) सोनी जी बिलकुल सच कहा आपने, जीजा वो जीजा कैसा जिसने साली की न ली हो और साली वो साली कैसी जिसने जीजा को न दी हो, मेरी तीन सालिया हैं, सचमुच वे तीनो बहुत भोली हैं और अच्छी हैं, मैंने दो सालियों की बहुत प्यार से ली है अब उनकी शादी हो गयी है, लेकिन उन्हें मुझे देने में कोई इतराज नहीं है, मेरे साढू ( साली के पति ) भी मस्त है, कहते है भाई साहेब ये इसकी इच्छा की बात है जब इसकी रजामंदी होगी मैं आप के लिए इसे रोक नहीं सकता I तीसरी साली अभी कमसिन है १७ साल की I मुझे लगता की मेरा छोटा साढू उस पर नजर लगाये है, किस्मत अपनी अपनी /
१६) अंजू गुप्ता जी बहुत खूब बहिन की ही चर्चा क्यूँ साली के साथ सेक्स करने में बहुत मजा है, सलहज (साले की बीवी ) मामी से भी सेक्स किया जाता है क्यूंकि आसानी से मिल जाता है
१७) बहिन को चोदना बहुत असान है थोडा सा प्रयास करो बहिन मान जाएगी, और एक बात बता दूँ बहिन को ऐसा मौका अगर मिल गया कि कोई अफ्फैर हो गया तो फिर तुम्हारा पत्ता कट जायेगा, हिम्मत न हारो लगे रहो अगर तरीका जानने कि इच्छा है तो मुझे मेल करना बता दूंगा (abcl42@yahoo.com)


महोदय, यह ऊपर के वक्तव्य क्या बतातें हैं? क्या यह एक छणिक आवेश स्वाभाविक आशक्ति एवं आयुगत समझ के आधार पर स्थापित हुए सम्बन्ध हैं? झूठ, सरासर झूठ, कोई सामान्य सूझ-बूझ रखने वाला व्यक्ति भी यह जान सकता है कि ऊपर के वक्तव्य लिखने वाले व्यक्तियों की सोच क्या है, उनका चरित्र क्या है और अपनी करतूतों को वे लोग किस तरह की लच्छेदार और बेतुकी बातों से सही बताने का प्रयत्न कर रहे हैं. हद दर्जे के कायर हैं वे लोग जो इतना भी साहस नहीं रखते कि दुनिया को कहें कि हम केवल अपनी यौन इच्छाओं की पूर्ति करने में मानते हैं, उसके लिए पारिवारिक रिश्तों का हमारे लिए कोई महत्व नहीं है. इन परुषों से तो इस मंच की महिला सदस्य कहीं ज्यादा साहसी और स्पष्ट वक्ता हैं जो अपनी चुनी हुई राह को, जो यौन सुख वे पारिवारिक रिश्तों में भोग रहीं हैं उसे उचित ठहराने का ऐसा हास्यास्पद और भौंडा प्रयत्न नहीं करतीं. समाज के कितने लोग इसमें लिप्त हैं इसके बारे में मतभेद हो सकता है, समय समय पर हुए सर्वेक्षणों से यह बिल्कुल स्पष्ट है कि इसमे लिप्त लोगों कि संख्या बहुत कम है.

kharghar
28-07-2011, 10:24 AM
abcl42 जी को उत्तर का तीसरा भाग
"मुझे यह पढ़ कर बहुत आश्चर्य और अफ़सोस होता है कि पारिवारिक सेक्स संबंधों को सामान्य समझने वाले और जो पारिवारिक सदस्यों से सेक्स कर चुकें हैं या कर रहें हैं वे इसे उचित ठहराने के लिए गलत तथ्यों और तर्कों का उपयोग कर रहें हैं. मैं अपनी बात कहने के लिए किसी का नाम नहीं लूँगा, किस व्यक्ति ने लिखा यह important नहीं है, क्या लिखा यह important है. विपरीत तर्क देने वालों के सटीक और बहुत कड़वे सच को केवल "यह सच नहीं है, या इसमे कोई तर्क नहीं है" यह कह कर टालने कि कोशिश कि गई है. जब तर्क दिया गया कि "जब आपके बेटे और बेटी आपस मैं सेक्स करेंगे तब कैसा लगेगा?" तो जवाब दिया गया कि "जब मुझे अपनी बहन के साथ सेक्स करते कोई नहीं देख सका तो उन्हें करते कोई कैसे देख सकेगा?". पढ़ कर ऐसा लगा मानो कोई कह रहा हो कि जब मुझे चोरी करते कोई नहीं पकड़ पाया तो मेरे बेटे या बेटी को चोरी करते कोई कैसे पकड़ेगा. देवियों/ सज्जनों, चोरी तो चोरी होती है, पकड़ी नहीं गई तो सही नहीं हो जाती. अगर दम है तो इन देवियों/ सज्जनों मैं से कोई आगे आए और यह कहे कि हम अपने बेटे- बेटी से कहेंगें कि मैं बहन चोद/ माँ चोद था और/ या तुम्हरी माँ भाई चोद / पिता चोद थी, और मैं या/ और तुम्हारी माँ इसे गलत नहीं मानते थे, हमने अपनी बहन/ माँ/ भाई/ बाप को चोदने का भरपूर आनंद उठाया इसलिए अब तुम भी हमारी नज़रों के सामने वही सब करो, हमें कोई एतराज नहीं होगा.
"चोरी तो चोरी होती है," ये कह कर आप पुनः यही कहना चाहते हैं की परिवार में आपसी सम्बन्ध चोरी जैसे हैं, बिलकुल ठीक हैं आप, हमारा समाज अभी इन संबंधो को मान्यता नहीं देता, लेकिन इस फोरम पर इस विषय पर ये उपदेश वांछित नहीं हैं/ आप शायद अपने प्रयास गलत जगह पर कर रहे हैं . मित्र अभी हमारे समाज में ओपन सेक्स की भी अनुमति नहीं है, क्या कभी आपने सेक्स की चर्चा अपने पिता या माँ से की है, कभी पिता से ये पूछा की आज कल वे माता जी से कितनी बार सेक्स करते हैं या फिर ऐसी ही सेक्स से सम्बंधित बातें. ऐसी ही चर्चा किसी और नातेदार से माँ से मौसी से चाचा से की है, इन बातों को छुपाया जाता है, इसी प्रकार ये पारिवारिक आपसी सम्बन्ध भी छुपाये जाते हैं, अपने बेटे या बेटी से ये बातें भला कैसे की जा सकती हैं, हमारे बच्चे जो करेंगे वो उनका नजरिया होगा उनको बीच में लाना ठीक नहीं / जरा आप ही सोचिये इन प्रश्नों को यहाँ उठाकर आप क्या साबित करना चाहते हैं?

सबसे पहले तो मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि इसमे कोई दो राय नहीं है कि समाज में सेक्स कि चर्चा पारिवारिक सम्बन्धियों के साथ नहीं की जाती. परन्तु सेक्स के बारे में बातें और इन्सेस्ट एवं पारिवारिक सदस्यों के बीच यौन सम्बन्ध बहुत अलग बातें हैं, आप उन्हें कैसे जोड़ रहें हैं यह मेरी समझ से परे है. इस फोरम पर इस विषय पर ये उपदेश वांछित नहीं हैं, इसका क्या मतलब है? मैं आगे कुछ लिखने के पहले इस फोरम पर लिखे एक दुसरे पोस्ट की तरफ आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ :

MERE VICHAR ME TO FAMILY MEMEBERS ME SEX SABSE SURKSHIT AUR ASSAN HOTA HE. JAISE TUM KUNWARE HO AUR GHAR ME KUNWARI YA SHADI SHUDA BEHEN HE TO USE APNA LUND DIKHA KE PATANA BADA ASSAN HE GHAR KI CHARDIWARIYON ME. AUR YEDI BHABHI HE TO PHIR KYA KAHNE USE TO KABHI BHI AKELE ME PAKAD KE RAGAD DO. YEH BEHEN AUR BHABHI AAPKE SAMNE CHILLA BHI NAHI SAKENGI APNI IJJAT KE MARE. RAHI BAAT AAPKI MAA YA CHACHI KE SUN NE KI TO USKI PARWAH MAT KARO, KYNKI WOH APNE LADKE BETE KO NAHI ROKENGI BALKI AAPAS ME KAHENGI KI GHAR KA MAAL GHAR ME HI KHAYA JA RAHA HE KOI BADNAMI BHI NAHI HONGI. ISKE LAWA YEDI MAA CHACHI KI ICCHHA HONGI TO BAAD ME PUCH SAKTI HE RE TU US BEHEN YA BAHU KE SATH KYA KAR RAHA THA RE. AUR TUMSE KABULWA KE KI TUM BEHEN YA BHABHI CHOD RAHE THE KAHENGI KI AAGE SE ITNA SHOR MAT KIYA KAR KISI KO MALUM HO JAYE TO BADNAMI HONGI. AISE KAAM CHUP CHAP KIYE JATE HE. AUR YEH NASIHAT DETE HUYE KAHENGI JARA BATA TO TERA LUND KAISA HE JO TU BEHEN BAHU CHODTA HE. AUR JAHA TUMNE LUND KHOL KE DIKHAYA AUR MAA KE HATH ME THAMA DIYA TO FIR DEKHO KAISE MAA TUMSE CHUDWATI HE. IS LIYE GHAR ME SEX KARNA FAYDE KA SOUDA HE , SAFE AUR SURAKSHIT HE.

जैसा मैंने ऊपर लिखा, गंभीर विषय पर सार्थक चर्चा के बजाय फोरम को अपने exploits का गुणगान करने का माध्यम बना देना, सेक्सुअल कल्पनाओं और वास्तविकता में अंतर नहीं समझना या अगर दुर्भाग्य से खुद की बहन/ माँ / चाची / मौसी / साली / मामी या अन्य सम्बन्धी विवेकहीन, चरित्रहीन और अपनी यौन इच्छाओं पर कोई मानसिक संतुलन, संयम और नियंत्रण न रखने वाले हों तो दुनिया के अन्य सभी व्यक्ति उनके जैसे हैं यह समझ कर उन्हें भी अपनी तरह विवेकहीन, चरित्रहीन बताना यह सब इस फोरम को शोभा देता है? क्या आप अपने बेटे बेटी को समाज में फैली अन्य बुराइयों से दूर रहने की सलाह नहीं देते; वे क्या करेंगे यह उनका नजरिया होगा इस तरह से सोच कर उनके हाल पर छोड़ देतें हैं? मेरे द्वारा उठाये कड़वे और सटीक प्रश्नों का उत्तर देने का साहस बताने के बजाय इस तरह बेतुके तर्क दे कर आप क्या साबित करना चाहते हो? इस फोरम पर क्या लिखना उचित या अनुचित है या क्या चर्चा है और क्या उपदेश देना है इसका निर्णय करने का अधिकार आपको किसने दिया?
ये पुरुष की अहंकारी प्रवत्ति का लक्षण है की उसे तो ऐसी पत्नी चाहिए जो न तो पहले से किसी से सम्बन्ध बनायीं हो और न आगे जीवन में बनाये/ भाई वाह/ और पुरुष चाहे जितने औरतों से सम्बन्ध बनता रहे सब माफ़ है /
महोदय, इस बात का उत्तर तो आपने मेरे द्वारा पूछे दो प्रश्नों को उद्धृत कर के स्वयं ही दे दिया है. मैंने जो दो प्रशन पूछे वे यह थे:
i ) जो इस तरह के पारिवारिक संबंधों मैं कोई बुराई नहीं देखते, उनमे से कितनों ने अपने होने वाले पति / पत्नी को इसके बारे मे बताया?
ii ) जो पुरुष अपनी बहन/ माँ/ चाची/ ताई/ बुआ/ मामी/ मोसी को चोद चुके हैं या चोदते हैं, उनमे से कितने यह सहन कर पायेंगें कि उनकी पत्नी अपने भाई/ बाप/ चाचा/ ताऊ/ मामा/ फूफा/ मोसा से चुद चुकी है या चोदती है? यही प्रश्न मैं इस तरह के संबंधों को सही ठहराने वाली देवियों से भी पूछना चाहता हूँ"

अब आप यह बताइए कि "ये पुरुष की अहंकारी प्रवत्ति का लक्षण है की उसे तो ऐसी पत्नी चाहिए जो न तो पहले से किसी से सम्बन्ध बनायीं हो और न आगे जीवन में बनाये/ भाई वाह/ और पुरुष चाहे जितने औरतों से सम्बन्ध बनता रहे सब माफ़ है /" यह आपने क्या सोच कर लिखा? ये उत्तर किसी ऐसे व्यक्ति का नहीं है जो चर्चा या वाद-विवाद को विषय की गंभीरता के अनुसार स्वस्थ तर्कों के माध्यम से आगे बढ़ाना चाहता हो. क्या लिखा गया है यह अच्छी तरह से पढ़े बिना जिस तरह का झूठा और काल्पनिक आरोप लगाया गया है उससे यह बिल्कुल स्पष्ट है की इस तरह का आरोप अपने आप को एकदम निरुत्तर स्थिति में पाकर, जिस तरह की राह पर चल रहें हैं और जिन कर्मों में लिप्त हैं उसको उचित ठहराने के लिए कोई तर्क नहीं मिलने पर बौखलाहट और कुंठा को छुपाने की नाकाम कोशिष में लगाया है. भाई वाह! उल्टा चोर कोतवाल को डांटे! जिस व्यक्ति ने अपनी सालियों, अपनी बहनों, मामा द्वारा पटाई लड़कियों/ स्त्रियों से अनेकों बार यौन सम्बन्ध बनाए, साली का विवाह होने के बाद भी उससे यौन सम्बन्ध बनाए रखे, जिसने स्त्रियों को केवल अपनी यौन कामनाओं की पूर्ति करने का खिलोना समझा वह व्यक्ति किसी ऐसे व्यक्ति को जो स्त्रियों की इज्जत करना जानता है, रिश्तों की इज्जत करना जानता है उसे यह सब लिखने की हिमाकत कर रहा है! महोदय, इस तरह से खिसयाने से या छटपटाने से कोई अपने अपराध बोध से, अपने कुकर्मों से छुटकारा नहीं पा सकता.

kharghar
28-07-2011, 10:29 AM
abcl42 जी को उत्तर का चौथा भाग
एक बात और मेरी पत्नी किससे पहले से चुद कर आई है ( अपने भाई से, बाप से, जीजा से या फिर किसी और से इन सब बातों को अगर आप सोचेंगे तो आप का / हमारा जीवन नरकमय हो जायेगा, आप तो ये कह कर स्त्री जाति को ही तिरस्कार और अपमानित कर रहे हैं, इन बातों को अगर आप जान भी जाएँ ( पहले के सम्बन्ध के बारे में ) तो भूल जाना ही अच्छा होता है/ सेक्स करना कोई अपराधिक कृत्य नहीं है जैसे चोरी डकैती हत्या या बलात्कार/ ईश्वर चंद विद्या सागर ने आज के लगभग अस्सी वर्ष पहले एक विधवा से विवाह किया था,


ईश्वर चंद विद्या सागर ने अस्सी वर्ष पहले बहुत साहसिक कदम उठाया था, समाज को राह दिखाने का उदाहरण दिया था. उन्होंने विधवा से विवाह किया था, उससे नाजायज सम्बन्ध नहीं बनाये थे, पारिवारिक सदस्यों के साथ यौन सम्बन्ध जैसा काम नहीं किया था या नाजायज सम्बन्ध बना कर अपनी यौन इच्छाओं की तृप्ति करने का प्रयत्न नहीं किया था. उनके सुकर्म का और साहसिक कदम का मजाक उड़ा रहें हैं आप उसका उल्लेख इन्सेस्ट और पारिवारिक यौन संबंधो के बचाव में आपके प्रयत्नों में उन्हें घसीट कर. विधवा विवाह और इन बातों को आप कैसे जोड़ रहें हैं? अगर आप मेरे द्वारा पूछे दो प्रश्न ध्यान से पढेंगे तो आपको पता चलेगा कि मैंने स्त्री जाती को तिरिस्कार और अपमानित करने का कोई प्रयत्न नहीं किया. वाह री दुनिया! यहाँ अपने बड़े भाई, बड़े जीजा होने के दायित्व को भूल कर; अगर छोटी सालियाँ और बहने भटक रहीं हो तो उन्हें सही राह दिखाने का दायित्व और कर्त्तव्य भूल जाने वाले; झूठी e-mail ID बना कर बहिन को गलत रास्ता अपनाने के लिए उकसाने वाले और विवाह होने के बाद भी अपनी साली को अपनी यौन प्यास के लिए इस्तेमाल करने वाले कभी स्त्रियों का गलत इस्तेमाल नहीं करने वाले को, रिश्तों की मर्यादाओं का मान और पालन करने वाले को यह उपदेश दे रहें हैं! "मेरी पत्नी किससे पहले से चुद कर आई है (अपने भाई से, बाप से, जीजा से या फिर किसी और से इन सब बातों को अगर आप सोचेंगे तो आप का / हमारा जीवन नरकमय हो जायेगा, आप तो ये कह कर स्त्री जाति को ही तिरस्कार और अपमानित कर रहे हैं, इन बातों को अगर आप जान भी जाएँ ( पहले के सम्बन्ध के बारे में ) तो भूल जाना ही अच्छा होता है/ सेक्स करना कोई अपराधिक कृत्य नहीं है जैसे चोरी डकैती हत्या या बलात्कार/" यह वक्तव्य केवल, और केवल वह पुरुष या स्त्री देते हैं जो विवाह के पहले यौन सम्बन्ध बना चुके हैं, जिनके पास इस तरह के वक्तव्य देने के अलावा कोई और चारा ही नहीं है; यह अपने अपराध बोध को अपने दिल की विशालता बता कर छुपाने का प्रयत्न मात्र है. आज भी समाज का बहुत बड़ा भाग विवाह पूर्व के यौन संबंधों को न तो सही मानता है न उसमे लिप्त है. जो स्त्री या पुरुष अपनी यौन इच्छाओं पर संयम रखना जानते हैं वे अपने होने वाले जीवनसाथी से भी यही अपेक्षा रखतें हैं जो तर्कसंगत और न्यायोचित भी है. महोदय, जब किसी ऐसे पुरुष या स्त्री को पता चलता है कि उसके जीवनसाथी ने उसे धोखा दिया है, विवाह पूर्व के यौन संबंधों को छुपाया है तो क्या होता है यह मुझे बताने कि जरुरत नहीं है, फिर यहाँ तो यौन सम्बन्ध किसी अन्य से नहीं परन्तु रक्त सम्बब्न्धी(ओं) से या/ और पारिवारिक सम्बन्धि(यों) से बनाने का मामला है. विवाह के बाद बने विवाह के बाहर के यौन संबंधों से कितने घर तबाह हुए तलाक के कारण, यह मैं यहाँ नहीं बताना चाहता. हिन्दू धर्म के लिए बने कानूनों के कारण विवाह से पहले के स्वेच्छा से बने स्त्री या पुरुष के यौन संबंधों के आधार पर विवाह विच्छेद नहीं हो सकता, परन्तु विवाह पूर्व के या विवाह के बाद के इस तरह के संबंधों के कारण, किन हालात में लोग जी रहें हैं यह बताने कि जरुरत नहीं है, मज़बूरी में रिश्ते जिए नहीं जाते, केवल रिश्तों का बोझ ढोया जाता है. मैंने अपने पहले पोस्ट में लिखा था कि मैं इन्सेस्ट या पारिवारिक सदस्यों से यौन सम्बन्ध बनाने वालों को अपराधी नहीं मानता. विवाह के पहले या विवाह के बाद अपने जीवनसाथी के अलावा किसी अन्य से यौन सम्बन्ध बनाने वाले व्यक्तियों को और उसे अपने जीवनसाथी से या होने वाले जीवनसाथी से छुपाने वाले व्यक्तियों को मैं न केवल धोखेबाज मानता हूँ पर उन्हें अवश्य अपराधी भी मानता हूँ.
१.अपने होने वाले पति या पत्नी से ये बताना की मैं अपने परिवार में आपसी शारीरिक संभंध बना चूका / चुकी हूँ, ये प्रश्न बड़ा ही अवव्हारिक है / कोई व्यक्ति भला ये बताता है की मैं पहले से किसी स्त्री या पुरुष के साथ सम्बन्ध बना चुका /चुकी हूँ ( पारिवारिक सम्बन्ध को जाने दीजिये ) / आपके हिसाब से तो शादी के पूर्व और बहुत से खुलासे करने होंगे: मेरा लिंग का आकर ये है , मेरी योनी का आकर ये है, मुझे हस्तमैथुन की आदत थी, मैं रोज नेट चला कर अन्तर्वासना की साईट खोलता हूँ और अगम्यगाम्य सूत्र पढता हूँ गन्दी फोटे मनोहर चित्र पर देखता हूँ , सचमुच ये बातें भी बताने योग्य नहीं हैं / इसीलिए इस काल्पनिक प्रशन का उत्तर "न" ही है, ऐसी बातें बताने योग्य नहीं हैं / इसीलिए इस काल्पनिक प्रशन का उत्तर "न" ही है, ऐसी बातें बताने योग्य नहीं है/
२. ये प्रशन ऊपर के प्रश्न से जुड़ा हुआ है. अरे भाई मेरी पत्नी अपने भाई बाप जीजा मौसा से शारीरिक सम्बन्ध बना कर आई इसका हिसाब लगाना ठीक नहीं. मेरी पत्नी पहले से ही शारीरिक सम्बन्ध बना कर मेरे पास आई , अगर मैं छान बीन में पडूंगा तो जीवन नरकमय हो जायेगा / ये सवाल पत्नी से कभी पूछना भी नहीं चाहिए की वो पहले से शारीरिक सम्बन्ध बना चुकी है अथवा नहीं/ इससे अविश्वास उत्पन्न होगा / पत्नी का तिरस्कार होगा / सीता की उम्मीद करना अहंकार की प्रवत्ति है/

आपने मेरे पूछे दो प्रश्नों का जो उत्तर दिया है उसके बारे में काफी कुछ मैं ऊपर लिख चूका हूँ. मुझे आश्चर्य होता है कि अपने कृत्यों को गैर्तार्किक तरीके से उचित ठहराने के प्रयत्नों में आप वाद-विवाद को इस तरह नीचे गिरा देंगें. आपको यह प्रश्न अव्यवहारिक इस लिए लगता है क्योंकि आप इन्सेस्ट में लिप्त हैं और पारिवारिक सदस्योंन के साथ यौन सम्बन्ध बना चुके हैं, अपनी यौन इच्छाओं की पूर्ति करने में कोई कसर आपने नहीं छोड़ी; न केवल परिवार के सदस्यों से अपितु अपने मामा द्वारा फांसी अन्य लड़कियों / स्त्रियों से भी. हस्तमैथुन को किस मनोवैज्ञानिक ने, डॉक्टर ने या सामान्य ज्ञान रखने वाले किसी भी व्यक्ति ने गलत बताया है? आपकी इस टिपण्णी को पढ़ कर मैं आश्चर्यचकित रह गया हूँ. आज जब हर मनोवैज्ञानिक, डोक्टर और शिक्षाविद हस्तमैथुन को अत्यंत सामान्य, प्राकृतिक, स्वस्थ तथा सुरक्षित विधि बता रहा है तब आप इस तरह की हास्यास्पद टिपण्णी कर रहे हो! भाई वाह! इन्सेस्ट और पारिवारिक सेक्स में कोई बुराई नहीं मानने वाले, उसमे लिप्त होने वाले और उनका तर्कहीन तरीकों से बचाव करने वालों की इस तरह की टिपण्णी पर मैं सर पीटने और हँसने के अलावा क्या कर सकता हूँ? व्यस्क होने के बाद और अपने आप पर नियंत्रण रखते हुए न तो पोर्नोग्राफिक साहित्य पढ़ना अपराध है, न नंगे या सम्भोग के फोटो देखना अपराध है और न ही पोर्नोग्राफिक चलचित्र देखना अपराध है और न ही उसके लिए किसी भी व्यक्ति को शर्मिंदगी होनी चाहिए, जब तक यह सब घर की चारदीवारी मैं होता हो. नेट पर अन्तर्वासना की साईट को मैं और मेरी पत्नी दोनों साथ देखते है, अगर मैं अकेला भी देखूं तो कोई अपराध नहीं है. इस तरह के हास्यास्पद और गिरे हुए तर्क केवल वे लोग देतें हैं जिन्हें अपने कर्मों को छुपाने के लिए और कोई तर्क नहीं मिलते. किसी भी पुरुष या स्त्री के लिंग या योनी के आकार का उस व्यक्ति के चरित्र, उसके संस्कार, उसकी योग्यता या आचरण से क्या संबंध है? आप चाहें तो मैं आपको अनेक वैज्ञानिक शोध और सर्वेक्षण दे सकता हूँ जिनमे इस बात को सिद्दा किया गया है कि किसी भी सामान्य आकार या माप वाले लिंग या योनी के व्यक्ति की यौन क्रियाओं पर या उसकी यौन सुख प्राप्त करने या देने की क्षमता का इससे कोई सम्बन्ध नहीं है. किस तरह की भौंडी और गिरी हुई बातों पर आप उतर आये हो सोच कर शर्म आती है.जिस तरह के तर्क आपने ऊपर दिए हैं उन्हें पढ़ने के बाद मुझे एक अत्यंत ज्ञानी व्यक्ति द्वारा दी गई सलाह, जिसे मैं गलती से भूल गया था, याद आई:
Do not argue with an idiot. He will drag you down to his level and beat you with experience.

अपनी बौखलाहट और कुंठा को तो आप छुपा नहीं पाए, उसकी नाकाम कोशिष में आपने अपनी तर्कविहीनता से, निरुत्तरता से और आप किस हद तक निचे गिर सकते हो इससे सबको अवगत करा दिया. आपकी इस दयनीय स्थिति पर किसी ज्ञानी ने लिखी एक पंक्ति उद्धृत कर रहा हूँ:
"It is better to keep your mouth shut and let others think that you are a fool, rather than open your mouth and let everyone know that you are a fool."

मेरी बीवी भी जान गयी थी की कुछ मैंने किया है उसकी बहिन के साथ, लेकिन उसको खुल कर न मैंने बताया न ही मेरी साली ने, बहुत दिनों बाद ये बात मैंने बीवी को बताई, उसका जवाब बहुत अच्छा था " मैं तो सब जानती थी और जान बुझ कर अनजान बनी थी"

यह केवल तीन स्थितियों में संभव है. १) आपकी पत्नी भी विवाह के पहले या/ और विवाह के बाद गैर मर्दों से; फिर वह चाहे रक्त सम्बन्धियों से हों, पारिवारिक सम्बन्धियों से हों या अन्य मर्दों से हों, यौन सम्बन्ध भोग चुकी है या भोग रही है. २) मजबूरियों में, मज़बूरी आर्थिक, बच्चों के भविष्य की, बदनामी की या कुछ और जो भी हो, वह रिश्ते को जी नहीं रही; हर रोज आँशुओं के घूंट पी कर रिश्ते के बोझ को ढो रही है. ३) वह उन व्यक्तियों में से एक है जिसे आत्मसम्मान, संस्कार और सर ऊँचा रख कर जीने की कोई परवाह ही नहीं है, जिसे अपने बच्चों में अच्छे संस्कार डालने की कोई परवाह नहीं है.

Ranveer
28-07-2011, 01:27 PM
kharghar जी की सभी बातों से
पूर्णतया सहमत .........

Ranveer
28-07-2011, 01:34 PM
पारिवारिक सेक्स के सम्बन्ध में किसी के कृत्यों को हम रोक नहीं सकते परन्तु यदि हमें यह पसंद नहीं तो किसी खुले मंच पर अपनी नापसंदगी जाहिर तो कर सकते हैं न ? फिर इसमें इतनी हाय- तोबा क्यों..? अपनी राय ज़ाहिर करना उपदेश देना नहीं है भाई साहब. सूत्र का नाम ही है " आपकी राय : पारिवारिक सेक्स के बारे में " ....... तो हमें अपनी राय ज़ाहिर करने देंगे न..? आप यह कतई नहीं कह सकते कि यदि हमें यह सूत्र पसंद नहीं तो हम यहाँ से चले जाएँ.

पूर्णतया सहमत ..............

Ranveer
28-07-2011, 01:43 PM
आप सिग्मण्ड फ़्रायड की पुस्तक "Lectures On Sexuality" पढ़े। फ़्रायड कौन थे/हैं, इसके लिए google/wikipedia का सहारा लें
सिग्मोंद फ्राइड की कई बातें वर्तमान मनोवैज्ञानिक में प्रासंगिक नहीं है
वो केवल एक अवधारणा के रूप में स्थापित है जिसे माना भी जा सकता है और नहीं भी
उनके विचार सार्वभोमिक सत्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा रहा .....कहीं भी नहीं |

Ranveer
28-07-2011, 01:47 PM
चेतावनी का अर्थ यह नहीं कि गलत चीज़ों को ज़ारी रहने दिया जाए. अन्तर्वासना एक समग्र फोरम है. आप घर के बाहर तख्ती तंग दें कि मैं अपनी बहनों के साथ .... जिन्हें आपत्ति है कृपया खिडकी से ताक-झाँक न करें... आजमा कर अपना अनुभव बताएं ज़रा. मैं पारिवारिक संबंधों पर आधारित सामग्रियां पसंद नहीं करता और इस फोरम में हूँ इसका अर्थ यह कतई नहीं कि मैं इस विषय का समर्थन करता हूँ अथवा यह मेरे लिए मनोरंजन का कोई विषय है लेकिन समाज में भिन्न विचारों के कैसे-कैसे जीव पल रहे हैं उनके बारे में जानना अवश्य चाहूँगा. सिर्फ तख्ती मात्र टांग देने से आप अपना विचार रखने का अधिकार नहीं छीन सकते.
पूर्णतया सहमत .......

kharghar
30-07-2011, 06:51 PM
kharghar जी की सभी बातों से
पूर्णतया सहमत .........

प्रिय मित्र रणवीरजी, मैं आपको धन्यवाद ज्ञात करना चाहता हूँ. मैंने आपके अन्य पोस्ट भी देखे जो मुझे बहुत अच्छे लगे. मैं नहीं जानता मैं इस मंच पर और कितने दिन रहूंगा, क्योंकि यहाँ रहने का कोई कारण मुझे नहीं दिखता. इस मंच पर पोस्ट करने वाले (मेरा मतलब इन्सेस्ट और पारिवारिक सदस्यों के बिच यौन संबंधों की पैरवी करने वाले या उनमें लिप्त लोगों से है) मुझे कुंए के मेंढक जैसे लगते हैं जो यह सोचने लगें हैं की जिस कुंए में वें हैं बस वही पूरी दुनिया है; कुंए के बाहर की विशाल दुनिया या तो उन्हें नजर नहीं आती या वे देखना नहीं चाहते. जिस तरह की बातें यहाँ लिखी जा रहीं हैं उन्हें पढ़ कर मैं हैरान हूँ की यह सब होने कैसे दिए जा रहा है. मुझे तो यही समझ में नहीं आता की जब अन्तर्वासना पर सच्ची या काल्पनिक, जो भी हो, कहानियों का अलग विभाग है तो मंच जो सामन्यतः केवल विचार-विमर्श के लिए होना चाहिए उस पर लोग कहानियाँ कैसे पोस्ट कर रहें हैं. मुझे हैरानी इस बात पर भी होती है की समाज का इतना बड़ा भाग जो इन्सेस्ट में या पारिवारिक सदस्यों के बिच यौन संबंधों में लिप्त नहीं है, उसे पसंद नहीं करता है और न उसे मंजूर करता है उसमें से लोग आगे आकर अपनी विपरीत राय क्यों स्पष्ट शब्दों में दृढ़तापूर्वक प्रस्तुत नहीं करते, खामोश और मूक दर्शक क्यों बने हुए हैं.

Rajjoo
01-08-2011, 03:38 PM
mai apne ghar ki kisi b aurat k sath sex karna chahta hu aur sex aisa ki choot faad doo..vaise m chahta hu k mai apni behan ko chodu aur uske ek mera h baccha paida ho..to maja a jaaye..mai apni aunty ko b chodna chahta hu aur usse b ek bacha dena chahta hu..meri aunty daaru b peeti hai..jis din jyada daaru pee li aur uncle ghar pe na hue m usse raat bhar chodunga coz vo sai me randi hai n kisi se b chudva sakti hai...plzz reply to this post

anjoogupta
01-08-2011, 04:47 PM
वो संस्कृत में एक श्लोक है :-

स्त्रीयस्य चरित्रं, पुरुषस्य भाग्यम
देवो न जानाति, कुतो मनुष्य:

अर्थात स्त्री का चरित्र देवता भी नहीं जानते, पुरुष की क्या औकात है.

जी हाँ , स्त्री हो या पुरुष, दोनों के बारे में ये बिलकुल सच है.

krisprak
02-08-2011, 08:21 PM
मेरी राय में पारिवारिक सेक्स को सेक्स तक ही सीमित रखा जाये तो बेहतर है।

abcl42
07-08-2011, 12:47 PM
प्रिय मित्रों को नमस्कार आज बहुत दिनों के बाद फोरम पर आने का मौका मिला, फोरम की इमेल से मुझे इस सूत्र पर किये गए पोस्ट की जानकारी हो गयी थी लेकिन कुछ कारणों वश मई फोरम पर नहीं आ पा रहा था ,
मेरा कथन / मेरा मत
1.मनोरन्जन के लिए हम यहाँ आते है, अन्तर्वासना की कहानियां पढ़ते हुए इस फोरम का पता चला, हम सूत्रों पर भ्रमण करते है, जहाँ अच्छा लगता है अपनी पोस्ट कर देते हैं अन्य सदस्यों को थेंक्स या रेपो देते हैं, कभी कभी जवाब भी देते हैं , हमारा मुख्य उद्देश्य है "मनोरंजन" /

२. मुझे इन्सेस्ट यानि पारिवारिक सदस्यों बीच होने वाली सेक्स सम्बन्धी घटनाएँ और उनपर आधारित कहानियां अच्छी लगती हैं, मैं अन्तर्वासना कहानियों में भी ऐसी कहानिया पढता हूँ और अब अन्तर्वासना क्लब पर देशी कहानियां डाट काम पर भी कहानिया होती हैं, इस फोरम पर भी अगम्यगम्य शीर्षक के अंतर्गत तमाम सूत्र हैं, मुझे पढने में अछे लगते हैं, ये केवल व्यक्तिगत पसंद और मनोरंजन का मामला है इससे अधिक कुछ नहीं, पसंद अपनी अपनी, मैं समझता हूँ इन कहानियों को पढना और आनंद / मनोरंजन में कोई बुराई नहीं, अगर है, तो प्लीज मुझे क्षमा कर दें .

3.मै सभी आदरनीय सदस्यों के विचारों का सम्मान करता हूँ, हमारे सामाजिक आचार विचार अपने स्थान पर हैं, मनोरंजन की दुनिया में हम थोड़ी देर के लिए उन सभी बन्धनों से मुक्त हो जाते हैं,

4. इन पारिवारिक संबंधो को किसी प्रकार समाज मान्यता नहीं दे सकता न ही ये उचित है , अभी दिल्ली हाई कोर्ट ने एक फैसले में सगी कजिन ( सगे मामा की लड़की ) के साथ शादी को वैध ठहराया है लेकिन ये निर्णय आलोचना का विषय है,

5. फोरम पर सभी सदस्यों को अपने विचार रखने का पूरा हक़ है, लेकिन मेरा मत है की आपस में एक दुसरे का अपमान उचित नहीं है. ये तो मनोरंजन की दुनिया है, हमारे धर्म शास्त्रों में दुसरे की स्त्री माँ के सामान कही गयी है ( मातृवत पर दारेषु) , फिर भी हम मनोरंजन के लिए स्त्रियों को ही चुनते हैं, अब प्रत्येक का मनोरंजन अलग अलग तरेह से होता है

6, मेरा ये कथन / मत अपने उन सभी मित्रों के लिए है जिन्होंने काफी ज्ञान प्रद उत्तर / पोस्ट लिखे हैं और उन मित्रो के लिए भी जिनको इस सूत्र पर आनंद आता है . तर्क और उनका उत्तर इस प्रकार कुतर्क का जन्म हो सकता है अतः विवाद से बचना चाहिए ,

सभी को धन्यवाद

rajkumar_only_for_girls
07-08-2011, 06:47 PM
sorry, main bhe parwarik sex ko sahi nahi manta hu.

Rajani1
08-08-2011, 03:53 AM
मै अपने छोटे भाई से पिछले तीन सालो से चुदवा रही हुं। मुझे इसमे कोई बुराई नही दिखती है। और जहां तक अपने बच्चो का सवाल है, मै चाहुंगी की मेरी बेटी घर मे ही चुदे
और घर की इज्जत घर मे ही रहे। वैसे अभी तो मेरी शादी भी नही हुई है।

Anjali_Trivedi
08-08-2011, 12:44 PM
मै अपने छोटे भाई से पिछले तीन सालो से चुदवा रही हुं। मुझे इसमे कोई बुराई नही दिखती है। और जहां तक अपने बच्चो का सवाल है, मै चाहुंगी की मेरी बेटी घर मे ही चुदे
और घर की इज्जत घर मे ही रहे। वैसे अभी तो मेरी शादी भी नही हुई है।

आप शादी भी अपने छोटे भाई से ही कर लीजिये, अन्य किसीसे करने की जरुरत ही क्या है? फिर आपकी बेटी अपने ही घर में चुदेगी, न आपको और न आपके भाई/पति को कोई ऐतराज होगा. अगर छोटे भाई से शादी करने की हिम्मत नहीं हो तो अपने होने वाले पति को विवाह से पहले बता देना की आप अपने छोटे भाई से ३+ सालों से चुदती आ रहीं है और भविष्य में आपकी बेटी भी घर में चुदे ऐसी तम्मना रखती हैं. एक तरफ आप फरमाती हैं "मै चाहुंगी की मेरी बेटी घर मे ही चुदे और घर की इज्जत घर मे ही रहे" अर्थात आप खुद मानतीं हैं कि कोई भी लड़की विवाह से पहले किसी से भी चुद जाए यह बेइज्जती का काम है, आप को चिंता केवल इस बात की है कि बेइज्जती कि चर्चा बाहर न हो. आपकी बेशर्मी से भरी और तर्कहीन बात पढ़ कर एक पुराने गाने कि दो पंक्तियाँ याद आ गई; "मुझे बर्बादी का कोई गम ना था, गम इसका है कि बर्बादी का चर्चा क्यों हुआ".

avf000017
08-08-2011, 01:11 PM
आप शादी भी अपने छोटे भाई से ही कर लीजिये, अन्य किसीसे करने की जरुरत ही क्या है? फिर आपकी बेटी अपने ही घर में चुदेगी, न आपको और न आपके भाई/पति को कोई ऐतराज होगा. अगर छोटे भाई से शादी करने की हिम्मत नहीं हो तो अपने होने वाले पति को विवाह से पहले बता देना की आप अपने छोटे भाई से ३+ सालों से चुदती आ रहीं है और भविष्य में आपकी बेटी भी घर में चुदे ऐसी तम्मना रखती हैं. एक तरफ आप फरमाती हैं "मै चाहुंगी की मेरी बेटी घर मे ही चुदे और घर की इज्जत घर मे ही रहे" अर्थात आप खुद मानतीं हैं कि कोई भी लड़की विवाह से पहले किसी से भी चुद जाए यह बेइज्जती का काम है, आप को चिंता केवल इस बात की है कि बेइज्जती कि चर्चा बाहर न हो. आपकी बेशर्मी से भरी और तर्कहीन बात पढ़ कर एक पुराने गाने कि दो पंक्तियाँ याद आ गई; "मुझे बर्बादी का कोई गम ना था, गम इसका है कि बर्बादी का चर्चा क्यों हुआ".

bahut achha jawab diya hai anjli ji app ne very good.

rajan123_p
08-08-2011, 01:22 PM
yah log jo ghar main hi sex ki baaten kar rahe hain unko ilaaz ki jaroorat lagti hai.
un main aur janwaron main kya fark rah gaya???
kya aise logon ko samaaj main rahne ka haq milna chahiye?????

abcl42
08-08-2011, 05:51 PM
आप शादी भी अपने छोटे भाई से ही कर लीजिये, अन्य किसीसे करने की जरुरत ही क्या है? फिर आपकी बेटी अपने ही घर में चुदेगी, न आपको और न आपके भाई/पति को कोई ऐतराज होगा. अगर छोटे भाई से शादी करने की हिम्मत नहीं हो तो अपने होने वाले पति को विवाह से पहले बता देना की आप अपने छोटे भाई से ३+ सालों से चुदती आ रहीं है और भविष्य में आपकी बेटी भी घर में चुदे ऐसी तम्मना रखती हैं. एक तरफ आप फरमाती हैं "मै चाहुंगी की मेरी बेटी घर मे ही चुदे और घर की इज्जत घर मे ही रहे" अर्थात आप खुद मानतीं हैं कि कोई भी लड़की विवाह से पहले किसी से भी चुद जाए यह बेइज्जती का काम है, आप को चिंता केवल इस बात की है कि बेइज्जती कि चर्चा बाहर न हो. आपकी बेशर्मी से भरी और तर्कहीन बात पढ़ कर एक पुराने गाने कि दो पंक्तियाँ याद आ गई; "मुझे बर्बादी का कोई गम ना था, गम इसका है कि बर्बादी का चर्चा क्यों हुआ".

बहुत अच्छा अंजलि जी आपका जवाब तो बहुत अच्छा है, बहुत धन्यवाद
लेकिन मेरी एक विनती है प्लीज बुरा मत मानिये, हम सब यहाँ पर मनोरंजन के लिए आते है, अगर कोई सदस्य को घर में सेक्स सम्बन्ध बनाने अछे लगते है और वो इस मंच पर खुल कर अपनी बात कह रहा या कह रही है, ( इस मंच पर तो कम से कम अपनी बात कहने की आज़ादी है, समाज में तो ऐसी बात कहने का मतलब ही नहीं ), तो प्लीज आनंद लीजिये, प्यार से विरोध कीजिये , अपना मत साफ साफ लिखिए लेकिन सीधे सीधे व्यक्तिगत आरोप या अपमान ठीक नहीं/

आगे आपकी जैसी इच्छा हो वैसा करें.
अगर आपको कुछ बुरा लगा हो तो माफ़ करना

Rajani1
08-08-2011, 09:25 PM
प्रिय अंजली जी,
मै आपकी भावानाओं क सम्मान करती हूं। परन्तु आपने मेरी बातों क सही अर्थ समझने की चेष्ठा नही की और मुझे इस बात का अफ़सोस है।
मैने सम्भोग अथवा चुदाई को बेइज्जति नहीं कहा है परन्तु एक लडकी अर्थात् एक स्त्री को घर की इज्जत कहा है। और मुझे यह नही लगता की आपने अपने वर्तमान अथवा भविष्य पति को बताएंगी कि आप अपने भाई से नहीं परन्तु गली के आवारा लडकों से चुदा चुकी है, जिनके हर दोस्त को आपकी चुदाई की कहानी पता है और कईयों ने तो वीडियो भी देखी होगी। और आपको ग़म चर्चे का है बर्बादी का नहीं।:lips:

Anjali_Trivedi
09-08-2011, 12:26 AM
प्रिय अंजली जी,
मै आपकी भावानाओं क सम्मान करती हूं। परन्तु आपने मेरी बातों क सही अर्थ समझने की चेष्ठा नही की और मुझे इस बात का अफ़सोस है।
मैने सम्भोग अथवा चुदाई को बेइज्जति नहीं कहा है परन्तु एक लडकी अर्थात् एक स्त्री को घर की इज्जत कहा है। और मुझे यह नही लगता की आपने अपने वर्तमान अथवा भविष्य पति को बताएंगी कि आप अपने भाई से नहीं परन्तु गली के आवारा लडकों से चुदा चुकी है, जिनके हर दोस्त को आपकी चुदाई की कहानी पता है और कईयों ने तो वीडियो भी देखी होगी। और आपको ग़म चर्चे का है बर्बादी का नहीं।:lips:

प्रिय रजनीजी, आप मुझे बताइए क्या आपने मैंने जो लिखा उसे अच्छी तरह से पढ़ा है? मैंने लिखा था "एक तरफ आप फरमाती हैं "मै चाहुंगी की मेरी बेटी घर मे ही चुदे और घर की इज्जत घर मे ही रहे" अर्थात आप खुद मानतीं हैं कि कोई भी लड़की विवाह से पहले किसी से भी चुद जाए यह बेइज्जती का काम है". इस वाक्य के अर्थ को आप समझतीं हैं? इसमें मैंने क्या ऐसी कोई बात लिखी है कि कोई भी लड़की किसीसे से भी, जिनमे गली के आवारा लडके भी शामिल हैं, विवाह के पहले चुद जाए यह बेइज्जती की बात नहीं है? क्योंकि आपने लिखा कि आपकी शादी नहीं हुई है इसलिए मैंने बात केवल विवाह के पहले की करी; कोई भी स्त्री अगर विवाह के बाद भी पति के अलावा किसी भी अन्य से चुदती हे या पति पत्नी के अलावा किसी भी अन्य को चोदता है तो यह बेइज्जती की बात हे, दुश्चरित्रता का प्रमाण है. यहाँ यह भी बता देती हूँ कि विवाह के पहले अगर कोई पुरुष किसी से भी यौन सम्बन्ध बनाता है तो वह भी गलत और निंदनीय है. आपने लिखा "मैने सम्भोग अथवा चुदाई को बेइज्जति नहीं कहा है परन्तु एक लडकी अर्थात् एक स्त्री को घर की इज्जत कहा है". रजनीजी, स्त्री घर की इज्जत तब होती है जब वह इज्जत के पात्र हो, जो लड़की विवेकहीन हो, चरित्रहीन हो, संस्कारहीन हो, अपनी सेक्स की इच्छा पर जिसका कोई नियंत्रण न हो और बेकाबू सेक्स की इच्छा की गुलाम बन कर भाई से केवल इसलिए चुदती हो की अन्य किसी से चुदाने में बेइज्जती हो जाएगी; वह स्त्री किसी के भी घर की केवल बदनामी और दुर्भाग्य हो सकती है, इज्जत तो कभी हो ही नहीं सकती. आपने आगे लिखा "और मुझे यह नही लगता की आपने अपने वर्तमान अथवा भविष्य पति को बताएंगी कि आप अपने भाई से नहीं परन्तु गली के आवारा लडकों से चुदा चुकी है, जिनके हर दोस्त को आपकी चुदाई की कहानी पता है और कईयों ने तो वीडियो भी देखी होगी। और आपको ग़म चर्चे का है बर्बादी का नहीं।" क्या आपने सभी लड़कियों को अपने जैसी चरित्रहीन समझ रखा है? इसी मंच के एक अन्य सूत्र पर मैंने एक महोदया को उनके पोस्ट के उत्तर में यह पोस्ट लिखा था वह मैं यहाँ उधृत कर रहीं हूँ:

क्या आप बतायेंगी कि किस आधार पर आप यह लिख रहीं हैं कि 90 प्रतिशत लडकिया शादी से पहले चुदा चुकी होती है? इस वक्तव्य के समर्थन में क्या आप किसी भी विश्वसनीय सर्वेक्षण का सन्दर्भ दे सकतीं हैं? समाज में थोड़े से चोर होतें हैं; अगर १०-२० चोर आपस में मिलकर यह घोषणा कर दें कि समाज में रहने वाले ९०% लोग चोर हैं तो क्या वास्तव में ९०% लोग चोर बन जातें हैं? वेश्याघर में बैठीं १०-२० वेश्याएं अगर छाती ठोक कर घोषणा कर दें कि समाज में रहने वाली ९०% महिलायें वेश्या हैं तो क्या सच्चाई बदल कर ९०% महिलायें वेश्या हो जायेंगीं? क्या आप किसी वेश्या की या चोर की पुत्री हैं? क्या आपने सभी लड़कियों को अपने जैसी चरित्रहीन, विवेकहीन और अपनी सेक्स की इच्छा पर किसी तरह का नियंत्रण नहीं रखने वाली समझ रखा है? पीलिये के मरीज को सब कुछ पीला दीखता है, आप जिस तरह का जीवन जी रहीं हैं उसे अपने तक सिमित रखिये, समाज की सब लड़कियों को बेवजह बदनाम कर के आप अपने घिनोने कर्मों को छुपाने का प्रयत्न नहीं करिए.

chilpil 123
09-08-2011, 01:15 AM
मेरे विचार से आधी से ज्यादा लड़कियां शादी से पहले अपने परिवार या रिश्तेदारों से चुद चुकी या कम से कम उस परिस्तिथी तक पहुँच चुकी होती है, खास कर चचेरी/ममेरी बहने या भांजियां/भतीजियाँ, मेरे ख्याल से सगी बहन के साथ इसका प्रतिशत काफी कम होता है. बाकि तो भैया कलियुग है,

desi boy
09-08-2011, 10:07 AM
वाह क्या जवाब दिया है! बहुत बढ़िया


प्रिय रजनीजी, आप मुझे बताइए क्या आपने मैंने जो लिखा उसे अच्छी तरह से पढ़ा है? मैंने लिखा था "एक तरफ आप फरमाती हैं "मै चाहुंगी की मेरी बेटी घर मे ही चुदे और घर की इज्जत घर मे ही रहे" अर्थात आप खुद मानतीं हैं कि कोई भी लड़की विवाह से पहले किसी से भी चुद जाए यह बेइज्जती का काम है". इस वाक्य के अर्थ को आप समझतीं हैं? इसमें मैंने क्या ऐसी कोई बात लिखी है कि कोई भी लड़की किसीसे से भी, जिनमे गली के आवारा लडके भी शामिल हैं, विवाह के पहले चुद जाए यह बेइज्जती की बात नहीं है? क्योंकि आपने लिखा कि आपकी शादी नहीं हुई है इसलिए मैंने बात केवल विवाह के पहले की करी; कोई भी स्त्री अगर विवाह के बाद भी पति के अलावा किसी भी अन्य से चुदती हे या पति पत्नी के अलावा किसी भी अन्य को चोदता है तो यह बेइज्जती की बात हे, दुश्चरित्रता का प्रमाण है. यहाँ यह भी बता देती हूँ कि विवाह के पहले अगर कोई पुरुष किसी से भी यौन सम्बन्ध बनाता है तो वह भी गलत और निंदनीय है. आपने लिखा "मैने सम्भोग अथवा चुदाई को बेइज्जति नहीं कहा है परन्तु एक लडकी अर्थात् एक स्त्री को घर की इज्जत कहा है". रजनीजी, स्त्री घर की इज्जत तब होती है जब वह इज्जत के पात्र हो, जो लड़की विवेकहीन हो, चरित्रहीन हो, संस्कारहीन हो, अपनी सेक्स की इच्छा पर जिसका कोई नियंत्रण न हो और बेकाबू सेक्स की इच्छा की गुलाम बन कर भाई से केवल इसलिए चुदती हो की अन्य किसी से चुदाने में बेइज्जती हो जाएगी; वह स्त्री किसी के भी घर की केवल बदनामी और दुर्भाग्य हो सकती है, इज्जत तो कभी हो ही नहीं सकती. आपने आगे लिखा "और मुझे यह नही लगता की आपने अपने वर्तमान अथवा भविष्य पति को बताएंगी कि आप अपने भाई से नहीं परन्तु गली के आवारा लडकों से चुदा चुकी है, जिनके हर दोस्त को आपकी चुदाई की कहानी पता है और कईयों ने तो वीडियो भी देखी होगी। और आपको ग़म चर्चे का है बर्बादी का नहीं।" क्या आपने सभी लड़कियों को अपने जैसी चरित्रहीन समझ रखा है? इसी मंच के एक अन्य सूत्र पर मैंने एक महोदया को उनके पोस्ट के उत्तर में यह पोस्ट लिखा था वह मैं यहाँ उधृत कर रहीं हूँ:

क्या आप बतायेंगी कि किस आधार पर आप यह लिख रहीं हैं कि 90 प्रतिशत लडकिया शादी से पहले चुदा चुकी होती है? इस वक्तव्य के समर्थन में क्या आप किसी भी विश्वसनीय सर्वेक्षण का सन्दर्भ दे सकतीं हैं? समाज में थोड़े से चोर होतें हैं; अगर १०-२० चोर आपस में मिलकर यह घोषणा कर दें कि समाज में रहने वाले ९०% लोग चोर हैं तो क्या वास्तव में ९०% लोग चोर बन जातें हैं? वेश्याघर में बैठीं १०-२० वेश्याएं अगर छाती ठोक कर घोषणा कर दें कि समाज में रहने वाली ९०% महिलायें वेश्या हैं तो क्या सच्चाई बदल कर ९०% महिलायें वेश्या हो जायेंगीं? क्या आप किसी वेश्या की या चोर की पुत्री हैं? क्या आपने सभी लड़कियों को अपने जैसी चरित्रहीन, विवेकहीन और अपनी सेक्स की इच्छा पर किसी तरह का नियंत्रण नहीं रखने वाली समझ रखा है? पीलिये के मरीज को सब कुछ पीला दीखता है, आप जिस तरह का जीवन जी रहीं हैं उसे अपने तक सिमित रखिये, समाज की सब लड़कियों को बेवजह बदनाम कर के आप अपने घिनोने कर्मों को छुपाने का प्रयत्न नहीं करिए.

desi boy
09-08-2011, 10:07 AM
वाह क्या जवाब दिया है! बहुत बढ़िया


प्रिय रजनीजी, आप मुझे बताइए क्या आपने मैंने जो लिखा उसे अच्छी तरह से पढ़ा है? मैंने लिखा था "एक तरफ आप फरमाती हैं "मै चाहुंगी की मेरी बेटी घर मे ही चुदे और घर की इज्जत घर मे ही रहे" अर्थात आप खुद मानतीं हैं कि कोई भी लड़की विवाह से पहले किसी से भी चुद जाए यह बेइज्जती का काम है". इस वाक्य के अर्थ को आप समझतीं हैं? इसमें मैंने क्या ऐसी कोई बात लिखी है कि कोई भी लड़की किसीसे से भी, जिनमे गली के आवारा लडके भी शामिल हैं, विवाह के पहले चुद जाए यह बेइज्जती की बात नहीं है? क्योंकि आपने लिखा कि आपकी शादी नहीं हुई है इसलिए मैंने बात केवल विवाह के पहले की करी; कोई भी स्त्री अगर विवाह के बाद भी पति के अलावा किसी भी अन्य से चुदती हे या पति पत्नी के अलावा किसी भी अन्य को चोदता है तो यह बेइज्जती की बात हे, दुश्चरित्रता का प्रमाण है. यहाँ यह भी बता देती हूँ कि विवाह के पहले अगर कोई पुरुष किसी से भी यौन सम्बन्ध बनाता है तो वह भी गलत और निंदनीय है. आपने लिखा "मैने सम्भोग अथवा चुदाई को बेइज्जति नहीं कहा है परन्तु एक लडकी अर्थात् एक स्त्री को घर की इज्जत कहा है". रजनीजी, स्त्री घर की इज्जत तब होती है जब वह इज्जत के पात्र हो, जो लड़की विवेकहीन हो, चरित्रहीन हो, संस्कारहीन हो, अपनी सेक्स की इच्छा पर जिसका कोई नियंत्रण न हो और बेकाबू सेक्स की इच्छा की गुलाम बन कर भाई से केवल इसलिए चुदती हो की अन्य किसी से चुदाने में बेइज्जती हो जाएगी; वह स्त्री किसी के भी घर की केवल बदनामी और दुर्भाग्य हो सकती है, इज्जत तो कभी हो ही नहीं सकती. आपने आगे लिखा "और मुझे यह नही लगता की आपने अपने वर्तमान अथवा भविष्य पति को बताएंगी कि आप अपने भाई से नहीं परन्तु गली के आवारा लडकों से चुदा चुकी है, जिनके हर दोस्त को आपकी चुदाई की कहानी पता है और कईयों ने तो वीडियो भी देखी होगी। और आपको ग़म चर्चे का है बर्बादी का नहीं।" क्या आपने सभी लड़कियों को अपने जैसी चरित्रहीन समझ रखा है? इसी मंच के एक अन्य सूत्र पर मैंने एक महोदया को उनके पोस्ट के उत्तर में यह पोस्ट लिखा था वह मैं यहाँ उधृत कर रहीं हूँ:

क्या आप बतायेंगी कि किस आधार पर आप यह लिख रहीं हैं कि 90 प्रतिशत लडकिया शादी से पहले चुदा चुकी होती है? इस वक्तव्य के समर्थन में क्या आप किसी भी विश्वसनीय सर्वेक्षण का सन्दर्भ दे सकतीं हैं? समाज में थोड़े से चोर होतें हैं; अगर १०-२० चोर आपस में मिलकर यह घोषणा कर दें कि समाज में रहने वाले ९०% लोग चोर हैं तो क्या वास्तव में ९०% लोग चोर बन जातें हैं? वेश्याघर में बैठीं १०-२० वेश्याएं अगर छाती ठोक कर घोषणा कर दें कि समाज में रहने वाली ९०% महिलायें वेश्या हैं तो क्या सच्चाई बदल कर ९०% महिलायें वेश्या हो जायेंगीं? क्या आप किसी वेश्या की या चोर की पुत्री हैं? क्या आपने सभी लड़कियों को अपने जैसी चरित्रहीन, विवेकहीन और अपनी सेक्स की इच्छा पर किसी तरह का नियंत्रण नहीं रखने वाली समझ रखा है? पीलिये के मरीज को सब कुछ पीला दीखता है, आप जिस तरह का जीवन जी रहीं हैं उसे अपने तक सिमित रखिये, समाज की सब लड़कियों को बेवजह बदनाम कर के आप अपने घिनोने कर्मों को छुपाने का प्रयत्न नहीं करिए.

abcl42
11-08-2011, 07:06 PM
अंजलि जी के जवाबों से मै बहुत ही प्रभावित हूँ , बहुत तर्क पूर्ण उत्तर आपके हैं आप काफी विद्वान लगते हैं, मेरा एक विनम्र निवेदन है ( यदि आप प्लीज बुरा न माने, मुझे विद्वान लोगों से बहुत डर लगता है) , यदि आप जंगल में बासुरी बजायेंगे तो कौन सुनेगा, एक और कहावत है "भैंस के आगे बीन बजायी भैंस खड़ी पगुराय" अर्थ ये है की अपनी बात / मत, वहां जादा प्रभावी होते है जहाँ उनको कोई सुने समझे और अपने जीवन में उतारे, आपकी बातों में सोलह आने सच है लेकिन आप भी जरुर इस मंच पर अपना मनोरंजन करने ( कुछ मजा लेने ) आते होंगे अपना खाली समय यहाँ बिताते हैं,
हर एक का मनोरंजन का साधन अलग अलग होता है, किसी को फोटो देख कर मजा आता है किसी को कहानी पढ़ कर किसी को कार्टून देख कर इत्यादि किसी इन्सेस्ट पढने में मजा आता. आप इसे बिलकुल ऐसे ही लें , यदि कोई लिखता है मैंने अपनी चचेरी या सगी बहिन की ले ली या ऐसा ही पोस्ट है, लोंगो को पढ़ कर मजा आता, ( इसमें मैं भी हूँ ) लोग लिखते हैं यार जरा खुल कर लिखो, शुरुआत कैसे हुई ? वो और कुछ लिखता है, इसी प्रकार ऐसी बातें बढ़ती जाती है और लोग इस विषय में आनंद लेते हैं, अगर कुछ एक के किस्से सच भी हों तो ये सच्चाई है, अभी इसे समाज नहीं स्वीकार करता है, बिलकुल अपना मित्र मानते हुए ये कुछ शब्द लिख दिए हैं प्लीज इसके जवाब में लम्बा चौड़ा कुछ लिख कर मुझे शर्मिंदा मत कीजियेगा, मैं तो इस प्रकार के पोस्ट में मजा लेने इस फोरम पर आता हूँ धन्यवाद

SUMITK070
22-08-2011, 03:14 PM
बहिन को अगर मज़े से चोदना हो तो घोड़ी बना कर छोड़ो इस से बहिन को छोड़ने का मज़ा बढ़ जायेगा

abcl42
22-08-2011, 03:50 PM
बहिन को अगर मज़े से चोदना हो तो घोड़ी बना कर छोड़ो इस से बहिन को छोड़ने का मज़ा बढ़ जायेगा
मित्र सुमित जी आपने आज ही चार सूत्रों पर चार बार ये वाक्य पोस्ट किया है, "बहिन को अगर मज़े से चोदना हो तो घोड़ी बना कर चोदो इस से बहिन को चोदने का मज़ा बढ़ जायेगा " घोड़ी बना कर चोदने के पीछे आपका कोई अनुभव है तो प्लीज लिखें, बहेन को घोड़ी बना कर चोदने के पीछे क्या रहस्य है ? ये नियम तो सब पर लागू होगा, प्लीज जरा खुल कर लिखें

mujjainia
25-08-2011, 05:51 PM
maine apani saali ko choda hi saadi pahe or saadi ke baad bhi.

rinku42095
25-08-2011, 08:59 PM
isaka bhai iski leta hoga

27saalkaboy
25-10-2011, 11:15 PM
काम वाही करो जिसको करने के बाद आत्मग्लानी न हो लेकिन यदि होती है तो ये गलत है कुछ पल की अंधी भावनाओं के लिए अपनी अंतरात्मा को धोखा मत दो| गलत हमेशा गलत रहेगा चाहे उसको सही सिद्ध करने के लाख बहाने ढूंड लो |
बहिन को अगर मज़े से चोदना हो तो घोड़ी बना कर छोड़ो इस से बहिन को छोड़ने का मज़ा बढ़ जायेगा

abcl42
26-10-2011, 02:24 PM
मै मित्र युयुत्स सिंह की एक पोस्ट नीचे लिख रहा हूँ

yuyutsusingh72 has just replied to a thread you have subscribed to entitled - पहला सेक्स अनुभव - in the रंगीन महफ़िल forum of Antarvasna Forum.

This thread is located at:
http://antarvasna.com/forum/showthread.php?t=84&goto=newpost

Here is the message that has just been posted:
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[B]Mea pahla anubhav college ke dino me hua jab mera sambandh apni mauseri didi ke sath hua. meri umra 20 aur uski 25 thi us samay.मित्र ने पहला सेक्स ही मौसेरी बहेन के साथ किया, आप इसे बिलकुल सच माने इसे स्वाभाविक माने ये समाज की सच्चाई बिलकुल सच है

Anjali_Trivedi
28-10-2011, 02:31 PM
मै मित्र युयुत्स सिंह की एक पोस्ट नीचे लिख रहा हूँ yuyutsusingh72 has just replied to a thread you have subscribed to entitled - पहला सेक्स अनुभव - in the रंगीन महफ़िल forum of Antarvasna Forum. This thread is located at: http://antarvasna.com/forum/showthread.php?t=84&goto=newpost Here is the message that has just been posted: *************** [B]Mea pahla anubhav college ke dino me hua jab mera sambandh apni mauseri didi ke sath hua. meri umra 20 aur uski 25 thi us samay.मित्र ने पहला सेक्स ही मौसेरी बहेन के साथ किया, आप इसे बिलकुल सच माने इसे स्वाभाविक माने ये समाज की सच्चाई बिलकुल सच है महाशय, क्या समाज में समलैंगिक सम्बन्ध नहीं होते, क्या बच्चों के साथ सेक्सुअल सम्बन्ध या बच्चों का सेक्सुअल शौषण नहीं होता, क्या हिजड़ों के साथ सेक्सुअल सम्बन्ध नहीं होते, क्या बलात्कार की घटनाएँ नहीं होतीं? यह बात अलग है कि समाज के बहुत कम प्रतिशत पुरुष या महिलायें इनमे लिप्त होती है, परन्तु इनके होने कि वास्तिविकता क्या इन्हें समाज में स्वीकार्य कृत्य बना देती है? इस तरह के अपवाद में घटने वाली घटनाओं का उदाहरण दे कर आप क्या साबित करने का प्रयत्न कर रहे हो? 27saalkaboy ने इतनी सच्ची बात और सलाह दी, अपनी अपराध भावना के बोझ से आप इस कदर दबे हुए हो कि उसका विरोध इस तरह के बचकाने ढंग से कर रहे हो.

she143you
28-10-2011, 03:32 PM
vibhaji bhai ke sath nahi jija ke sath sex karo jyada maja aayega

abcl42
31-10-2011, 05:09 PM
महाशय, क्या समाज में समलैंगिक सम्बन्ध नहीं होते, क्या बच्चों के साथ सेक्सुअल सम्बन्ध या बच्चों का सेक्सुअल शौषण नहीं होता, क्या हिजड़ों के साथ सेक्सुअल सम्बन्ध नहीं होते, क्या बलात्कार की घटनाएँ नहीं होतीं? यह बात अलग है कि समाज के बहुत कम प्रतिशत पुरुष या महिलायें इनमे लिप्त होती है, परन्तु इनके होने कि वास्तिविकता क्या इन्हें समाज में स्वीकार्य कृत्य बना देती है? इस तरह के अपवाद में घटने वाली घटनाओं का उदाहरण दे कर आप क्या साबित करने का प्रयत्न कर रहे हो? 27saalkaboy ने इतनी सच्ची बात और सलाह दी, अपनी अपराध भावना के बोझ से आप इस कदर दबे हुए हो कि उसका विरोध इस तरह के बचकाने ढंग से कर रहे हो.
बहुत धन्यवाद मित्र मैं किसी अपराध बोध से ग्रसित नहीं हूँ

ashishkr
01-11-2011, 03:11 AM
मैं आपके बात से सहमत हूँ अंजलि जी

sandeepsingh25
01-12-2011, 04:03 PM
main apni sagi mausi ko lagatar 3 salon tak choda huion kaya mast gand hai sali ki abhi bhi yaad karke lund kara ho jata hai but pichle 2 salon se usne mujhse chudana band kar diya hai pata nahi kuion

navinc4u
01-12-2011, 04:58 PM
मित्र इन्सेस्ट कोई नहीं बात नहीं है और ये हर समाज और हर युग में मौजूद थी
हमारे धर्मग्रंथो से ले कर एतिहासिक तथ्यों तक ये इस प्रकार के उधाहरण से भरे पड़े है
मेरे नीचे दिए गए सूत्र को देखे और अपने विचार लिखे
http://antarvasna.com/forum/showthread.php?t=5874

Ranveer
06-12-2011, 01:00 PM
अंजलि जी
आप काफी पढ़ी लिखी और समझदार सदस्य प्रतीत होतीं हैं |
मेरी असली ID को इस विभाग में आने के लिए रोक दिया गया है ...वरना मै भी कुछ साथ देता |
दरअसल बात ये है की ये लोग एक ऐसा समाज चाहतें हैं जो उन्मुक्त हो , जिसमे सेक्स के लिए कोई बंधन न हो |

दोस्तों ,
चलिए एक बार मान लिया जाए की समाज में रिश्ते नाते में चुदाई के लिए छूट मिल जाती है ...तो क्या कभी सोचा है की वो समाज कैसा दिखेगा ??
क्या आप चाहेंगे की आपके घर में वैसा वातावरण हो ??
यदि हाँ तो आपलोग धन्य हैं !!!

Ranveer
06-12-2011, 01:13 PM
काम वाही करो जिसको करने के बाद आत्मग्लानी न हो लेकिन यदि होती है तो ये गलत है कुछ पल की अंधी भावनाओं के लिए अपनी अंतरात्मा को धोखा मत दो| गलत हमेशा गलत रहेगा चाहे उसको सही सिद्ध करने के लाख बहाने ढूंड लो |

लाजवाब .....शानदार:clap:
भाई , आप तो 27 साल के बॉय होकर 72 साल के बुजुर्गों वाली बात कह दी |
शाबाश !!

abcl42
06-12-2011, 05:41 PM
समाज की चौकीदारी की जरुरत नहीं होती, परिस्थितियां सब कुछ ठीक कर देती हैं और सामाजिक संरचना इसी का प्रतिफल है , मेरा मानना है सही और गलत की परख हर इन्सान में है, यदि आपने किसी के साथ गलत किया है तो आपको ग्लानी / गलती का भाव अवश्य आएगा/

Anjali_Trivedi
06-12-2011, 11:23 PM
अंजलि जी
आप काफी पढ़ी लिखी और समझदार सदस्य प्रतीत होतीं हैं |
मेरी असली ID को इस विभाग में आने के लिए रोक दिया गया है ...वरना मै भी कुछ साथ देता |
दरअसल बात ये है की ये लोग एक ऐसा समाज चाहतें हैं जो उन्मुक्त हो , जिसमे सेक्स के लिए कोई बंधन न हो |

दोस्तों ,
चलिए एक बार मान लिया जाए की समाज में रिश्ते नाते में चुदाई के लिए छूट मिल जाती है ...तो क्या कभी सोचा है की वो समाज कैसा दिखेगा ??
क्या आप चाहेंगे की आपके घर में वैसा वातावरण हो ??
यदि हाँ तो आपलोग धन्य हैं !!!

मित्र रणवीरजी, मुझे प्रोत्साहित करने के लिए मैं आपको धन्यवाद देना चाहती हूँ. वास्तव में मैं इस फोरम पर नहीं रहना चाहती, परन्तु इन्सेस्ट और पारिवारिक सम्बन्धियों के बीच यौन संबंधों के पक्ष में जिस तरह की बातें यहाँ लिखी जा रहीं है उनका विरोध करना भी मैं जरुरी समझती हूँ. मुझे प्रसन्नता है कि मेरे अलावा आप, देव भारद्वाज, खारघर जैसे कुछ सदस्य हैं जो अपना मत इमानदारी और प्रभावी ढंग से रखतें हैं.
विभिन्न सूत्रों पर कुछ पोस्ट पिछले कुछ समय से पढ़े जिनका सार यह है कि "घर के माल को दूसरों के लिए क्यों छोड़ दें?" इन महाशयों को यह भी ख़याल नहीं आता कि अपनी बहनों के लिए वे जो सोचते हैं वही अगर सब घरों में सोचा गया तो उनकी होने वाली पत्नी भी अपने भाइयों से और अन्य रिश्तेदारों से यौन सम्बन्ध बना कर आएगी, क्या उन्हें वह मंजूर होगा? इस प्रश्न का उत्तर झूठी बहादुरी दिखाने के चक्कर में ये लोग जो भी दे, वास्तविकता क्या है यह बताने की जरुरत नहीं है.

rocky1186
06-12-2011, 11:35 PM
मित्रो ...

कहते है की घर तो दानव और डाकन भी छोड़ देते है। हम तो इंसान कहलाते है, वो भी सभ्य भारतीय।
और गंदगी न फैलाओ समाज मेँ, अच्छा होगा की पारिवारिक सेक्स न किया जाए।
नसीहत नहीं इल्तजा है। एक विनम्र प्रार्थना है।अपने देश की संस्कृति को बर्बाद मत करो। हम सब बर्बाद हो जाएंगे।
कल कौन माँ और कौन नानी/दादी/बुआ/मौसी होगी फरक कैसे करेंगे। बाप है या मामा/नाना या दादा/ चाचा ? जरा सोचो!!!!!
बाहर और बहुत मिल जाएंगे या जाएंगी बस इशारा काफी होता है।

Chucky
07-12-2011, 03:21 PM
भाई बहन मेँ सेक्स सम्बन्ध मुझे तो यह बेहूदा लगता है

mkp12345
31-01-2012, 12:26 PM
suruwat kab aur kaise hui vibha

abcl42
02-02-2012, 07:42 PM
मित्र मानो या न मानो, सेक्स में बहुत जान है, इसे पढने में मजा आता देखने में मजा आता और करने की बात ही क्या है . इन्सेस्ट सेक्स बहुत उत्तेजक है, तुरंत ध्यान आकर्षित करता है, न्यूज़ पेपर में कोई इन्सेस्ट की खबर हो तुरंत अपनी और आकर्षित करती है, इसी आनंद के कारन ही तो सभी सदस्य यहाँ आते हैं.

labalab
03-02-2012, 06:45 AM
मित्र मानो या न मानो, सेक्स में बहुत जान है, इसे पढने में मजा आता देखने में मजा आता और करने की बात ही क्या है . इन्सेस्ट सेक्स बहुत उत्तेजक है, तुरंत ध्यान आकर्षित करता है, न्यूज़ पेपर में कोई इन्सेस्ट की खबर हो तुरंत अपनी और आकर्षित करती है, इसी आनंद के कारन ही तो सभी सदस्य यहाँ आते हैं.


बात एकदम सही है. इन्सेस्ट के विरोधी इस बात पर क्यूं ध्यान नहीं देते हैं कि इसका विचार ही कितना उत्तेजित कर देता है. यही आनंद तो सबको यहाँ आने के लिए खींचता है. यार तुम लोग इन्सेस्ट करो या न करो बस उसकी बातें ही कर लो या ख्वाबों में ही अपनी बहनों की रगड़ाई कर लो यही मजा बहुत है. बहस करने पर भी ऐसे विचार आने बंद तो नहीं हो जायेंगे. लेकिन अंजलि का यह विरोध जायज है कि अपने इन्सेस्ट को सही ठहराने की कोशिश क्यों करते हो.

abcl42
04-02-2012, 07:36 PM
बात एकदम सही है. इन्सेस्ट के विरोधी इस बात पर क्यूं ध्यान नहीं देते हैं कि इसका विचार ही कितना उत्तेजित कर देता है. यही आनंद तो सबको यहाँ आने के लिए खींचता है. यार तुम लोग इन्सेस्ट करो या न करो बस उसकी बातें ही कर लो या ख्वाबों में ही अपनी बहनों की रगड़ाई कर लो यही मजा बहुत है. बहस करने पर भी ऐसे विचार आने बंद तो नहीं हो जायेंगे. लेकिन अंजलि का यह विरोध जायज है कि अपने इन्सेस्ट को सही ठहराने की कोशिश क्यों करते हो.


मित्र मैं नाम नहीं लिखना चाहता, सूत्र पर आने में और दिलचस्प बातें पढने में सबको मजा आता है

Wanderer
04-02-2012, 07:51 PM
हम जिस भी समाज में रहतें हैं वहां पर अच्छा समाज बनाना भी हमारा ही काम होता है....क्या हम अपने बच्चो को आपस में ऐसा करने देंगे.....ये सवाल अपने दिल से पूछें...

सेक्स एक बेहद निजी मामला है जिसमें दो लोगों की आपसी सहमती होती है. किसी तीसरे के चाहने से क्या फर्क पड़ता है ?

Wanderer
04-02-2012, 08:19 PM
दम है आपकी तर्क-शक्ति और तथ्यों के अवलोकन करने की क्षमता में....चाहे आधारहीन ही सही. परन्तु टक्कर खूब दी...
परन्तु पारिवारिक सूत्रों को पढने से ये अर्थ नहीं निकाल सकती कि हम खुद भी वैसा आचरण करे...आप ब्लू फिल्म भी देखती होंगी परन्तु घर में ब्लू फिल्म बनती तो नहीं होगी...शायद हम सभी में कही एक जानवर भीतर होता है परन्तु उसे ही आधार मान परिवार में वैसा आचरण परिवार के ताने बाने को छीन भिन कर देगा... और वैघ्यानिक तौर से भी ऐसे सम्बन्ध केवल कमजोर पीड़ी का निर्माण करते है...रोमन साम्राज्य में राजतन्त्र के पतन का कारण भी ऐसे सम्बन्ध थे..इतिहास गवाह है..लोग चाहे उनके संबंधों को चटकारे लेकर कहते हो परन्तु वैसा आचरण नहीं करते...चटनी चटकारे के लिए होती है पर भोजन का आधार नहीं होती...


इन्सेस्ट का उद्देश्य पीढ़ी का निर्माण करना नहीं बल्कि कामवासना को शांत करना है :BangHead:

Wanderer
04-02-2012, 08:27 PM
चेतावनी का अर्थ यह नहीं कि गलत चीज़ों को ज़ारी रहने दिया जाए. अन्तर्वासना एक समग्र फोरम है. आप घर के बाहर तख्ती तंग दें कि मैं अपनी बहनों के साथ .... जिन्हें आपत्ति है कृपया खिडकी से ताक-झाँक न करें... आजमा कर अपना अनुभव बताएं ज़रा. मैं पारिवारिक संबंधों पर आधारित सामग्रियां पसंद नहीं करता और इस फोरम में हूँ इसका अर्थ यह कतई नहीं कि मैं इस विषय का समर्थन करता हूँ अथवा यह मेरे लिए मनोरंजन का कोई विषय है लेकिन समाज में भिन्न विचारों के कैसे-कैसे जीव पल रहे हैं उनके बारे में जानना अवश्य चाहूँगा. सिर्फ तख्ती मात्र टांग देने से आप अपना विचार रखने का अधिकार नहीं छीन सकते.

तख्ती तो आप यह भी नहीं टांग सकते कि मैं अपनी बीवी के साथ सेक्स कर रहा हूँ... कृपया खिड़की से ताक-झाँक न करें :pointlol:

hardick
05-02-2012, 05:58 AM
kharghar जी मै भी आपसे पूर्णतया सहमत हूँ...

hardick
05-02-2012, 06:25 AM
अंजलि जी और रणवीर जी आप दोनों की सारी बातो से में पूर्णतया सहमत हु....

Wanderer
05-02-2012, 09:24 AM
मेरे विचार में भाई बहन और माँ बेटा या पिता पुत्री के रिश्ते बहुत पवित्र होने चाहीये इसके अलावा अन्य रिश्तों जैसे जीजा के साथ या भाभी या चाची आदि के साथ सेक्स संभव है

मेरी भी यही राय है :pointlol:

Wanderer
05-02-2012, 09:56 AM
मैं इन देवियों/ सज्जनों से दो सवाल पूछना चाहता हूँ:
i ) जो इस तरह के पारिवारिक संबंधों मैं कोई बुराई नहीं देखते, उनमे से कितनों ने अपने होने वाले पति / पत्नी को इसके बारे मे बताया?
ii ) जो पुरुष अपनी बहन/ माँ/ चाची/ ताई/ बुआ/ मामी/ मोसी को चोद चुके हैं या चोदते हैं, उनमे से कितने यह सहन कर पायेंगें कि उनकी पत्नी अपने भाई/ बाप/ चाचा/ ताऊ/ मामा/ फूफा/ मोसा से चुद चुकी है या चोदती है? यही प्रश्न मैं इस तरह के संबंधों को सही ठहराने वाली देवियों से भी पूछना चाहता हूँ.


इन्सेस्ट हो या उसके बाहर, चुदाई का सच कोई नहीं बताता.. इसलिए जो भाए उसे पटाओ और चोद दो और तनावमुक्त होकर जियो central 14

Wanderer
05-02-2012, 10:13 AM
आपसे एक मात्र सवाल करता हूँ की आपके बेटे -बेटियां आपस में आपके सामने सेक्स करेंगे तो आपको कैसा लगेगा ?
1.यदि आप कहतें हैं की मिझे कोई बुरा नहीं लगेगा और मै भी उनका साथ दूँगा और साथ में अपनी पत्नी को भी उनके सामने पेश कर दूँगा ...तो मै मान लेता हूँ की आप इन्सिस्ट को सच में बुरा नहीं मानते |
2.यदि आप ये कहतें हैं की मुझे भी बुरा लगेगा तो आप ये एक बार सोचें कोई आपको क्यूँ बुरा लगेगा ????

अच्छा तो यह भी नहीं लगेगा कि सामने बेटा-बहू या बेटी-दामाद सेक्स करें. सच तो यह है कि अच्छा तो तभी लगता है जब हम खुद सेक्स करें... इसलिए खुद भी चोदो और दूसरों को भी चोदने दो :pointlol:

sextbuntiJ
05-02-2012, 11:17 PM
Sex kitna karenge! Kiske sath karenge! Kyun Karenge! Ye aap par nirbhar karta hai our aapke partner par! Kahan par seema khichni hai wo aap tai karenge! Mujhe khaniya pad ke aanand lena hai, pad Pariwarik sex nahi karna! Ye mera Faisla hai! Aagar meri koi bahan hoti our mujse sex karna chahti to mai use paise deta taki wo apne liye jiglo ya play boy ka intezaam kar sake! Mujhe aagar chanik ichcha bhi hoti to mai apne faise par kayam rahata our muth maar leta!

kharghar
06-02-2012, 04:44 AM
तख्ती तो आप यह भी नहीं टांग सकते कि मैं अपनी बीवी के साथ सेक्स कर रहा हूँ... कृपया खिड़की से ताक-झाँक न करें :pointlol:

किसी पोस्ट में लिखे सत्य का खुले मन से स्वीकार और सत्कार किए बिना, उसके पीछे की भावना का केवल शाब्दिक अर्थों को पकड़ कर अनादर तथा उपहास करके अपने सोचने की संकीर्णता की पोल खुले आम खोलने का इससे ज्यादा अच्छा उदाहरण शायद ही मिलेगा. अगर आपकी दलील को एक कदम आगे ले जाएं तो सबको अपने स्नानघर के बाहर भी तख्ती टांगनी पड़गी कि "अन्दर मैं नंगा/ नंगी नहा रहा/ रही हूँ, कोई ताँक-झाँक ना करे". Wanderer महोदय / महोदया (मैं नहीं जानता आप पुरुष हैं या महीला), rawaccess के इतने अच्छे उत्तर की तारीफ़ तो आप कर नहीं सके, केवल जवाब देने के लिए आपने जवाब दे दिया. सीधी सी बात यह है कि जो भी आचरण समाज एवं धर्म की परम्पराओं के अनुसार सही और मान्य है, पारिवारिक रिश्तों का जो अनादर नहीं करता और उनकी मर्यादाओं को नहीं तोड़ता, उन कृत्यों को करने के लिए आपको इस तरह की तख्ती टांगने की कोई जरूरत नहीं होती. तख्ती टांगने की जरूरत तब पड़गी जब आप सर्मान्य नियमों और आचारसंहिता के विरूद्ध जा कर स्नानघर की खिड़कियाँ/ दरवाजा खुला रख कर नहाएं, खुले में सार्वजनिक जगह पर नंगे नहाए या अपने शयनकक्ष की खिड़की/ दरवाजा खुला रख कर या सार्वजनिक जगह पर अपने पति/ पत्नी के साथ यौन क्रिया करें.

जिस भी फोरम पर कोई भी ऐसा विषय जिस पर चर्चा समाज में आम रूप से और किसी भी उम्र के लोगों के बीच होती हो उसके लिए किसी चेतावनी की जरूरत नहीं होती. चेतावनी तब लगाई जाती है जब विषय या तो केवल व्यस्क व्यक्तियों के लिए हो या वयस्क व्यक्तियों का होते हुए भी उन क्रियाओं/ संबंधों के बारे में हो जिन्हें समाज/ धर्म मान्य नहीं करता. अगर ऐसा नहीं होता तो अगन्यागमन मंच के लिए चेतावनी ही नहीं लगानी पड़ती.

naughty420
12-02-2012, 06:36 PM
दोस्तों यह एक नया पोल शुरू कर रहा हु कृपया अपना वोते जरुर दे पर थोडा विस्तार से.
तो बताये आप अपने परिवार में किस के साथ सेक्स करना चाहते हे और कैसे ..? :bed::pointlol::lips:

मैं अपनी बहन को चोदना चाहता हु वो जिस तरीके को पसंद करे उस तरीके से:bloom:

MASTRAAM
14-02-2012, 07:42 PM
अच्छा तो यह भी नहीं लगेगा कि सामने बेटा-बहू या बेटी-दामाद सेक्स करें. सच तो यह है कि अच्छा तो तभी लगता है जब हम खुद सेक्स करें... इसलिए खुद भी चोदो और दूसरों को भी चोदने दो :pointlol:
मुंह चोदी करने के लिए धन्यवाद |
अच्छा तो किसी को अपनी गांड मरवाने में भी लगता है पर सब गांड मराना शुरू तो नहीं करते !!
अब वो कहे की खुद भी गांड मराओ और दूसरों को भी गांड मराने दो तो ??

abcl42
16-02-2012, 12:34 AM
मुंह चोदी करने के लिए धन्यवाद |
अच्छा तो किसी को अपनी गांड मरवाने में भी लगता है पर सब गांड मराना शुरू तो नहीं करते !!
अब वो कहे की खुद भी गांड मराओ और दूसरों को भी गांड मराने दो तो ??


मित्र मस्तराम जी आपने जो उदहारण दिया है वो सही नहीं है, आपका उत्तर थोडा अनुचित और अपमानजनक लगता है, आप स्वयं समझदार हैं/ Wanderer ji का आशय सिर्फ इतना था की (बेटा बहु या बेटी दामाद जो आपस में सेक्स करने के लिए ही हैं) उनकी सेक्स से आपको आनंद नहीं आयेगा , आनंद तो स्वयं के सेक्स से ही आयेगा, अपने उसे कुछ और समझ कर गुस्सा दिखा दिया / मुझे माफ़ करना अगर कुछ बुरा लगा हो

MASTRAAM
16-02-2012, 02:09 AM
bahu ya damad sirf chudai karne ke liye hi nahi laye jate dost . Agar aisa hota to shadi karne ki jarurat hi nahi hoti aur har ghar ek RANDIKHANA hota jisme kutte ki tarah chudi hoti rahti .
Santan ki prapti ke liye to chudai bhi hogi aur shadi bhi ...aise me kisi ko bura nahi lagta.

Kripya aap jawab den ki agar kisi ko kutte se gand marana achcha lagta hai to kya use aisa karne ki ijajat de deni chahiye aur dusron ko bhi visa karne ke liye kahna chahiye?
(mobile)

abcl42
17-02-2012, 12:26 AM
सारी, मुझे माफ़ करना दोस्त

Wanderer
19-02-2012, 07:26 PM
किसी पोस्ट में लिखे सत्य का खुले मन से स्वीकार और सत्कार किए बिना, उसके पीछे की भावना का केवल शाब्दिक अर्थों को पकड़ कर अनादर तथा उपहास करके अपने सोचने की संकीर्णता की पोल खुले आम खोलने का इससे ज्यादा अच्छा उदाहरण शायद ही मिलेगा. अगर आपकी दलील को एक कदम आगे ले जाएं तो सबको अपने स्नानघर के बाहर भी तख्ती टांगनी पड़गी कि "अन्दर मैं नंगा/ नंगी नहा रहा/ रही हूँ, कोई ताँक-झाँक ना करे". Wanderer महोदय / महोदया (मैं नहीं जानता आप पुरुष हैं या महीला), rawaccess के इतने अच्छे उत्तर की तारीफ़ तो आप कर नहीं सके, केवल जवाब देने के लिए आपने जवाब दे दिया. सीधी सी बात यह है कि जो भी आचरण समाज एवं धर्म की परम्पराओं के अनुसार सही और मान्य है, पारिवारिक रिश्तों का जो अनादर नहीं करता और उनकी मर्यादाओं को नहीं तोड़ता, उन कृत्यों को करने के लिए आपको इस तरह की तख्ती टांगने की कोई जरूरत नहीं होती. तख्ती टांगने की जरूरत तब पड़गी जब आप सर्मान्य नियमों और आचारसंहिता के विरूद्ध जा कर स्नानघर की खिड़कियाँ/ दरवाजा खुला रख कर नहाएं, खुले में सार्वजनिक जगह पर नंगे नहाए या अपने शयनकक्ष की खिड़की/ दरवाजा खुला रख कर या सार्वजनिक जगह पर अपने पति/ पत्नी के साथ यौन क्रिया करें.

जिस भी फोरम पर कोई भी ऐसा विषय जिस पर चर्चा समाज में आम रूप से और किसी भी उम्र के लोगों के बीच होती हो उसके लिए किसी चेतावनी की जरूरत नहीं होती. चेतावनी तब लगाई जाती है जब विषय या तो केवल व्यस्क व्यक्तियों के लिए हो या वयस्क व्यक्तियों का होते हुए भी उन क्रियाओं/ संबंधों के बारे में हो जिन्हें समाज/ धर्म मान्य नहीं करता. अगर ऐसा नहीं होता तो अगन्यागमन मंच के लिए चेतावनी ही नहीं लगानी पड़ती.

इसका मतलब यह हुआ कि इस समय आपके कमरे के बाहर यह तख्ती लगी है कि आप अन्तर्वासना फोरम विसिट कर रहे हैं ... समाज तो इसकी इज़ाज़त भी नहीं देता फिर आप यहाँ गर्म मसाला विभाग में क्या कर रहे हैं ? :pointlol:

Wanderer
19-02-2012, 08:49 PM
विभिन्न सूत्रों पर कुछ पोस्ट पिछले कुछ समय से पढ़े जिनका सार यह है कि "घर के माल को दूसरों के लिए क्यों छोड़ दें?" इन महाशयों को यह भी ख़याल नहीं आता कि अपनी बहनों के लिए वे जो सोचते हैं वही अगर सब घरों में सोचा गया तो उनकी होने वाली पत्नी भी अपने भाइयों से और अन्य रिश्तेदारों से यौन सम्बन्ध बना कर आएगी, क्या उन्हें वह मंजूर होगा? इस प्रश्न का उत्तर झूठी बहादुरी दिखाने के चक्कर में ये लोग जो भी दे, वास्तविकता क्या है यह बताने की जरुरत नहीं है.

मंजूरी का सवाल तो तब उठता है न जब उसे पता चलेगा ...:pointlol:
जो पुरुष यह सोचता है कि उसकी पत्नी अपनी चुदाई की सारी बातें उसे बताएगी वह मूर्ख है central 14

MASTRAAM
19-02-2012, 10:42 PM
हरिओम हरिओम ।
लगता है कि आपने गलत जगह से मादरचोद - बहिनचोद की डिग्री प्राप्त की है ।
जानकारी के लिए बता दूँ कि किसी भी व्यस्क स्थान पर जाने के लिए किसी भी व्यस्क इसान को समाज की ओर से कोई रोक नही होती । अब उसकी मर्जी पर निर्भर करता है ।
मैने अपने कई दोस्तोँ को कहा है कि मै व्यस्क फोरम पर जाता हूँ ।
अब तुम ये बताओ कि तुमने समाज मे कितनो को कहा है कि तुम अपनी माँ -बहन को चोदते हो ?
समाज को छोडो , क्या अपने पापा से भी ये कहा है कि पापा पापा मैँ जा रहा हूँ माँ बहन चोदने ?

sonusexy
19-02-2012, 11:08 PM
ho ho ho balle balle

mandaar_Bhatt
20-02-2012, 09:58 AM
मंजूरी का सवाल तो तब उठता है न जब उसे पता चलेगा ...:pointlol:
जो पुरुष यह सोचता है कि उसकी पत्नी अपनी चुदाई की सारी बातें उसे बताएगी वह मूर्ख है central 14

Wandere महोदय/ महोदया (मित्र कम से कम इतना तो करो कि अपने profile पर आप पुरुष हो या महिला यह तो लिख दो), जैसा मित्र खारघरजी ने लिखा था आप केवल जवाब देने के लिए जवाब देने में विश्वास रखते हैं. श्रीमती अंजलि ने प्रश्न यह पूछा था कि जिस तरह कुछ सदस्य छाती ठोक कर घोषणा कर रहें हैं कि "घर के माल को दूसरों के लिए क्यों छोड़ दें", तो अगर सभी घरों में यही होने लगा तो निश्चित तौर पर हर विवाह करने वाली स्त्री/ लड़की अपने भाई या/ और अन्य रिश्तेदारों से विवाह के पहले चुद चुकी होगी; इसमे लड़की/ स्त्री को अपनी चुदाई के बारे में बताने या नहीं बताने का सवाल ही कहाँ पैदा होता है? दबी जबान में आपने श्रीमती अंजलि के इस कथन "इस प्रश्न का उत्तर झूठी बहादुरी दिखाने के चक्कर में ये लोग जो भी दे, वास्तविकता क्या है यह बताने की जरुरत नहीं है" को सही साबित कर दिया. अगर आप वास्तव में इन्सेस्ट/ पारिवारिक यौन संबंधों के हिमायती होते तो आप साहस दिखा कर लिखते कि मेरी पत्नी अपने भाई या अन्य रिश्तेदारों से चुद कर आए या विवाह के बाद भी चुदती रहे उसमे मुझे कोई आपत्ती नहीं है या होगी.

mandaar_Bhatt
20-02-2012, 10:02 AM
हरिओम हरिओम ।
लगता है कि आपने गलत जगह से मादरचोद - बहिनचोद की डिग्री प्राप्त की है ।
जानकारी के लिए बता दूँ कि किसी भी व्यस्क स्थान पर जाने के लिए किसी भी व्यस्क इसान को समाज की ओर से कोई रोक नही होती । अब उसकी मर्जी पर निर्भर करता है ।
मैने अपने कई दोस्तोँ को कहा है कि मै व्यस्क फोरम पर जाता हूँ ।
अब तुम ये बताओ कि तुमने समाज मे कितनो को कहा है कि तुम अपनी माँ -बहन को चोदते हो ?
समाज को छोडो , क्या अपने पापा से भी ये कहा है कि पापा पापा मैँ जा रहा हूँ माँ बहन चोदने ?

वाह, वाह, वाह! दिल खुश कर दिया आपने. मैं आपसे पूर्णरूप से सहमत हूँ.

bindas
20-02-2012, 10:30 AM
बेटा तुम मर्द नहीं छ्कोड़ी हो और तुम्हारा लुल्ला नहीं नन्ही मुन्नी लुल्ली है मर्द होते तो तुम घर में मू नहीं मरते बल्कि अपने लंड की दम से बहार किसी को चोदते, अब जब तुमसे कुछ उखड नहीं रहा है तो झूट मूठ में अपनी बहिन को ही बदनाम करके अपने दिल को और अपनी लुल्ली को तसल्ली दे रहे हो लेकिन बेटे सच्चाई छुपती नहीं है वोह गांड फाड़ के बाहर निकल आती है और जिसे हम गू कहते है जो की तुम हो

mandaar_Bhatt
20-02-2012, 11:53 AM
मित्र मानो या न मानो, सेक्स में बहुत जान है, इसे पढने में मजा आता देखने में मजा आता और करने की बात ही क्या है . इन्सेस्ट सेक्स बहुत उत्तेजक है, तुरंत ध्यान आकर्षित करता है, न्यूज़ पेपर में कोई इन्सेस्ट की खबर हो तुरंत अपनी और आकर्षित करती है, इसी आनंद के कारन ही तो सभी सदस्य यहाँ आते हैं.


मित्र मैं नाम नहीं लिखना चाहता, सूत्र पर आने में और दिलचस्प बातें पढने में सबको मजा आता है


सभी मानतें हैं कि सेक्स में बहुत जान है, इसे पढ़ने में और देखने में मजा आता है. जब यह पता हो कि जो सेक्स आप देख रहे हो वह व्यावसायिक सेक्स है जहाँ पात्र पैसे ले कर सेक्स कर रहें हैं तो आप को सामाजिक रश्मों, सामाजिक मूल्यों, पारिवारिक संबंधों वगैरह के रुंध जाने का दुःख नहीं होता; बिलकुल उस तरह जैसे एक वैश्या के अपने ग्राहकों के साथ पैसे के लिए चुदवाने को आप किसी पुरुष या स्त्री के विवाहपूर्व या विवाहेत्तर यौन संबंधों से अलग तरीके से देखते हो. pornographic साहित्य या किसी भी पोर्न साईट पर लिखी कहानियाँ पढ़ कर आपको आनंद आता है क्योंकि आप जानते हो कि यह कल्पनाएँ है, वास्तविक जीवन से इसका कोई लेना-देना नहीं है. परन्तु कहानिया लिखने या पैसे के लिए अभिनय करने और उन्ही कृत्यों को वास्तविकता बताने या उन्हें उचित ठहराने का प्रयत्न करने में बहुत अंतर होता है.


समाचार पत्रों में आए दिन बलात्कार की, सामूहिक बलात्कार की, नाबालिग लडके/ लड़की के साथ हुए बलात्कार/ सामूहिक बलात्कार की, बलात्कार के बाद नाबालिग लड़की या स्त्री की ह्त्या की आदि खबरें भी आती रहती हैं; उसे भी सभी पढ़ते हैं. इन्सेस्ट/ पारिवारिक सेक्स के विरोधियों की बात छोडिए, क्या इन्सेस्ट/ पारिवारिक सेक्स की तरफदारी इस मंच पर करने वाले भी इन खबरों को आनंद के साथ पढ़ते हैं? घृणास्पद और घिनोने कृत्य होने के बावजूद क्या लोग समाज में क्या हो रहा है, किस तरह की मानसिकता वाले लोग समाज में हैं यह जानने के लिए और इसके विरुद्ध एकजूट हो कर कुछ करने के लिए इन ख़बरों को नहीं पढ़ते? अन्तर्वासना मंच पर भ्रमण करने वाला हर व्यक्ति अपनी उत्तेजना को पुरी करने, दिलचस्प बातें पढने और आनंद प्राप्ती के लिए ही आता है यह निष्कर्ष आप कैसे निकाल सकते हो?
अन्तर्वासना मंच के "गरम मसाला" विभाग के अनेकों सूत्रों में कुछ सूत्र निम्नलिखित हैं:

पारिवारिक सेक्स संबंधों पर स्वस्थ चर्चा


आपकी राय : पारिवारिक सेक्स के बारे में


इन्सेस्ट - परिवार में यौन सम्बन्ध; इस सूत्र के प्राम्भ में यह लिखा हुआ है "क्या आप परिवार में यौन संबंधो के समर्थक हैं ? एक सूत्र आरम्भ हुआ था - मगर मिटा दिया गया - शायद प्रयुक्त गालियों के कारण - अनुरोध है इन्सेस्ट के विरोधी भी आयें और बिना गलियों के अपना विरोध प्रगट करें - समर्थक से अनुरोध है इन्सेस्ट पर चर्चा करें - भाषा गर्म हो मगर गालियाँ न हो !!!"


इन्सेस्ट ( Incest ) सेक्स : तथ्य और भ्रान्तियां



यदि कोई भी सदस्य, जो ना तो आनंद के लिए, ना उत्तेजना पुरी करने के लिए ना दिलचस्प बातें पढ़ने के लिए परन्तु दूसरों के मत/ विचार पढ़ने और अपना मत रखने, अपना विरोध प्रकट करने आता है तो जिस तरह का निष्कर्ष आप निकाल रहे हो वह कैसे निकाल सकते हो?

Wanderer
20-02-2012, 12:39 PM
हरिओम हरिओम ।
लगता है कि आपने गलत जगह से मादरचोद - बहिनचोद की डिग्री प्राप्त की है ।
जानकारी के लिए बता दूँ कि किसी भी व्यस्क स्थान पर जाने के लिए किसी भी व्यस्क इसान को समाज की ओर से कोई रोक नही होती । अब उसकी मर्जी पर निर्भर करता है ।
मैने अपने कई दोस्तोँ को कहा है कि मै व्यस्क फोरम पर जाता हूँ ।
अब तुम ये बताओ कि तुमने समाज मे कितनो को कहा है कि तुम अपनी माँ -बहन को चोदते हो ?
समाज को छोडो , क्या अपने पापा से भी ये कहा है कि पापा पापा मैँ जा रहा हूँ माँ बहन चोदने ?

मुझे तो यह समझ नहीं आ रहा कि अगर कोई अपनी माँ बहन चोद रहा है तो उसमें आपको क्या आपत्ति है ?..उसे चोदने दो न....नहीं तो वह आपकी माँ बहन चोद देगा ..अब यह तो आप कतई नहीं चाहेंगे. क्यों ?..central 14

Wanderer
20-02-2012, 12:54 PM
Wandere महोदय/ महोदया (मित्र कम से कम इतना तो करो कि अपने profile पर आप पुरुष हो या महिला यह तो लिख दो), जैसा मित्र खारघरजी ने लिखा था आप केवल जवाब देने के लिए जवाब देने में विश्वास रखते हैं. श्रीमती अंजलि ने प्रश्न यह पूछा था कि जिस तरह कुछ सदस्य छाती ठोक कर घोषणा कर रहें हैं कि "घर के माल को दूसरों के लिए क्यों छोड़ दें", तो अगर सभी घरों में यही होने लगा तो निश्चित तौर पर हर विवाह करने वाली स्त्री/ लड़की अपने भाई या/ और अन्य रिश्तेदारों से विवाह के पहले चुद चुकी होगी; इसमे लड़की/ स्त्री को अपनी चुदाई के बारे में बताने या नहीं बताने का सवाल ही कहाँ पैदा होता है? दबी जबान में आपने श्रीमती अंजलि के इस कथन "इस प्रश्न का उत्तर झूठी बहादुरी दिखाने के चक्कर में ये लोग जो भी दे, वास्तविकता क्या है यह बताने की जरुरत नहीं है" को सही साबित कर दिया. अगर आप वास्तव में इन्सेस्ट/ पारिवारिक यौन संबंधों के हिमायती होते तो आप साहस दिखा कर लिखते कि मेरी पत्नी अपने भाई या अन्य रिश्तेदारों से चुद कर आए या विवाह के बाद भी चुदती रहे उसमे मुझे कोई आपत्ती नहीं है या होगी.



तो लो सुनो ! मैं इन बातों में अपना दिमाग ख़राब नहीं करता कि मेरी पत्नी विवाह से पहले किस-किस से चुद चुकी है या विवाह के बाद भी चुदवाना चालू रखती है या नहीं क्योंकि मैं स्वयं भी दूध का धुला नहीं हूँ :pointlol:

abcl42
20-02-2012, 01:18 PM
Mitra, sutra ya forum par koi sadsya virodh karne ke liye aaye, main samjhta hun aisa bahut kam log karte hain. adhikansh sadsya forum par usee uddeshya ke liye aate hain jaisa maine samjhta hun, jaisa maina likha hai aur vo hai - anand, utsukta, uttejana aur isi se milte julte uddeshya. Galti ho to kshma karna .

mandaar_Bhatt
20-02-2012, 04:01 PM
मित्र, धन्यवाद. प्रसन्नता है कि आपने यह तो माना कि इन सूत्रों पर हरेक सदस्य जैसा आप मानते हैं उस उद्देश्य से नहीं आते. मैंने यह कभी नहीं लिखा कि सभी सदस्य, जिनमे इन्सेस्ट/ पारिवारिक सेक्स के विरोधी भी शामिल हैं, विरोध करने के लिए ही आतें हैं. यह भी उतना ही सच है कि अगर किसीका उद्देश्य केवल जो आप बता रहें हैं वह है और उसका उद्देश्य अगर इन सूत्रों पर पूरा होता है तो वह विरोध नहीं करेगा. जब कोई सदस्य विरोध करता है तो यह निश्चित है कि उसका उद्देश्य दूसरों से अलग है. मैंने पहली बार आपको अंग्रेजी फॉण्ट में लिखते पाया, जरूर कोई मजबूरी होगी.

mandaar_Bhatt
21-02-2012, 10:12 AM
मुझे तो यह समझ नहीं आ रहा कि अगर कोई अपनी माँ बहन चोद रहा है तो उसमें आपको क्या आपत्ति है ?..उसे चोदने दो न....नहीं तो वह आपकी माँ बहन चोद देगा ..अब यह तो आप कतई नहीं चाहेंगे. क्यों ?..central 14 यह इंसान इस गलतफहमी में हैं कि दूसरों की माँ-बहने सब इसकी माँ-बहन की तरह चुद्दकड़ और व्यभिचारी है जो किसीसे से भी चुदने के किए तैयार बैठीं हैं. अगर यह बलात्कारी बन जाए तो बात अलग है, वरना बहुत ज्यादा संभावना यह है कि दूसरों की माँ-बहन को चोदने का प्रयत्न किया तो खड़े लंड पर ऐसा डंडा पडेगा की भविष्य में इनका लंड खडा रहने लायक ही नहीं रहेगा.

abcl42
21-02-2012, 11:29 PM
मित्र, धन्यवाद. प्रसन्नता है कि आपने यह तो माना कि इन सूत्रों पर हरेक सदस्य जैसा आप मानते हैं उस उद्देश्य से नहीं आते. मैंने यह कभी नहीं लिखा कि सभी सदस्य, जिनमे इन्सेस्ट/ पारिवारिक सेक्स के विरोधी भी शामिल हैं, विरोध करने के लिए ही आतें हैं. यह भी उतना ही सच है कि अगर किसीका उद्देश्य केवल जो आप बता रहें हैं वह है और उसका उद्देश्य अगर इन सूत्रों पर पूरा होता है तो वह विरोध नहीं करेगा. जब कोई सदस्य विरोध करता है तो यह निश्चित है कि उसका उद्देश्य दूसरों से अलग है. मैंने पहली बार आपको अंग्रेजी फॉण्ट में लिखते पाया, जरूर कोई मजबूरी होगी.

मित्र सच समझा आपने मजबूरी में रोमन में लिखना पड़ा / मैं हिंदी में ही लिखता हूँ / बस एक ही बात है की इस फोरम पर आने के लिए रात का इन्तजार करना पड़ता है दिन में मौका नहीं मिलता

MASTRAAM
22-02-2012, 12:44 AM
मुझे तो यह समझ नहीं आ रहा कि अगर कोई अपनी माँ बहन चोद रहा है तो उसमें आपको क्या आपत्ति है ?..उसे चोदने दो न....नहीं तो वह आपकी माँ बहन चोद देगा ..अब यह तो आप कतई नहीं चाहेंगे. क्यों ?
प्रिय चोदू महोदय ,

अगर आप पढे लिखे होते तो ऐसा तर्क कतइ नही रखते ।
परिवार समाज का एक महत्वपूर्ण अंग है । परिवार के क्रियाकलापोँ से संस्कार बनता है और ये व्यक्तिगत नही होते ।
एक पोर्न साइट पर जाना पूर्णतः व्यक्तिगत मामला है पर माँ बहन चोदना एक सामाजिक मामला है क्योँकि अगर आज तुम एसा करोगे तो कल तुम्हारा घर वैश्यालय बन जाएगा , और एक दिन परिवार जैसी कोइ चीज दिखेगी ही नही ।
ये मत सोचना कि छुप छुप के तुम मजा ले सकते हो । ये छुपने की चीज ही नही है ।

Saroz
22-02-2012, 11:36 AM
प्रिय चोदू महोदय ,

अगर आप पढे लिखे होते तो ऐसा तर्क कतइ नही रखते ।
परिवार समाज का एक महत्वपूर्ण अंग है । परिवार के क्रियाकलापोँ से संस्कार बनता है और ये व्यक्तिगत नही होते ।
एक पोर्न साइट पर जाना पूर्णतः व्यक्तिगत मामला है पर माँ बहन चोदना एक सामाजिक मामला है क्योँकि अगर आज तुम एसा करोगे तो कल तुम्हारा घर वैश्यालय बन जाएगा , और एक दिन परिवार जैसी कोइ चीज दिखेगी ही नही ।
ये मत सोचना कि छुप छुप के तुम मजा ले सकते हो । ये छुपने की चीज ही नही है ।

चाचा जान.... आपकी बात बिलकुल सही है....:clap:

labalab
27-02-2012, 08:44 AM
चाचा जान.... आपकी बात बिलकुल सही है....:clap:

सब मिल कर बेचारे wanderer की क्यों माँ बहन एक कर रहे हो? उसका कुसूर क्या है? वो इस बात का झंडा थोड़े ही बुलंद कर रहा है कि सबको इन्सेस्ट करना चाहिए. वो यही तो कह रहा है कि उसने ऐसा किया है और उसे इस बात का कोई अफ़सोस नहीं है. बाकी लोग भी अपने गिरेबान में झाँक कर देख लें कि उनको इस फोरम में खींच कर लाने वाला चुम्बक क्या दूसरों के इन्सेस्ट अनुभवों का रसास्वादन करना नहीं है. किसी भी आलोचक ने आज तक यह खुल कर बताने की हिम्मत नहीं की है कि कौन सा ऐसा आकर्षण है जो उनको इन्सेस्ट फोरम में खींच कर लाता है.

नेहा007
28-02-2012, 10:03 PM
wanderer..jee ko aisa nahi likhna chahiye...
मै इसका खुद भुक्तभोगी हूँ... कोई भी कहानी में कुछ सकारात्मक और कुछ नकारात्मक पहलू जरुर होते है..मगर लेखक को सकारात्मक पक्ष को ही पाठकों के सामने रखना चाहिए...
मै खुद incest sex में इन्वोल्व रह चुकी हूँ.. ये बात नहीं है कि मज़ा नहीं आता मगर इसमें पछतावा के सिवा कुछ नहीं मिलेगा.. अगर wanderer जी अभी भी उन पालो को याद करके खुश है तो ये उनके लिए अच्छी बात है... मगर इसका सकारात्मक पक्ष रखने से समाज या पाठकों में इसकी उत्सुकता बढ़ेगी.. और बाद में अवाषद और पछतावे कि आग में जलेगे..
मेरे अपने विचार है सायद आपलोग सहमत ना हो मगर ये सच है....

rohan123456789
01-03-2012, 11:56 AM
parivarik sex k bare mai rai positive hai bs sage sambandh nai ho to guilty feel nahi hoti.. jaise k chachere bhai bahan , chachi chaha, ya cousin aadi k sath sex safe aur pyar se bharpur hota hai.. mai cousin k sath sambhog ka aanand lene ka purn pakshdhar hu, b-sharte k dono taraf sahamti ho..

MASTRAAM
01-03-2012, 11:36 PM
सब मिल कर बेचारे wanderer की क्यों माँ बहन एक कर रहे हो? उसका कुसूर क्या है? वो इस बात का झंडा थोड़े ही बुलंद कर रहा है कि सबको इन्सेस्ट करना चाहिए. वो यही तो कह रहा है कि उसने ऐसा किया है और उसे इस बात का कोई अफ़सोस नहीं है. बाकी लोग भी अपने गिरेबान में झाँक कर देख लें कि उनको इस फोरम में खींच कर लाने वाला चुम्बक क्या दूसरों के इन्सेस्ट अनुभवों का रसास्वादन करना नहीं है. किसी भी आलोचक ने आज तक यह खुल कर बताने की हिम्मत नहीं की है कि कौन सा ऐसा आकर्षण है जो उनको इन्सेस्ट फोरम में खींच कर लाता है.

इसका जवाब अंजली जी और खारगर जी ने दे दिया है ।
फिर भी, मेरे अनुसार सरल शब्दों मे .........
इस फोरम पर आते हैं , नंगे फोटो - वीडियो देखने , विभिन्न प्रकार के प्राणियों से मिलने ,उनको देखने , कुछ जानकारी लेने , कुछ बकचोदी करने ........कुल मिलाकर मज़ा करने ।
अब वयस्क हैं तो इतना तो हक बनता ही है और इससे कुछ नुकसान भी नहीं है ।
अब इस विभाग की बात करें , तो केवल अपनी राय देने आतें हैं क्यूंकी हमारी नज़र मे माँ -बहन चोदना गलत है । अब क्यूँ गलत है , ये भी बताते हैं ।

अब पारिवारिक सेक्स पर राय मांगा जाएगा तो अपनी बात तो कहेंगे ही !!!

manbhar
01-03-2012, 11:44 PM
wanderer..jee ko aisa nahi likhna chahiye...
मै इसका खुद भुक्तभोगी हूँ... कोई भी कहानी में कुछ सकारात्मक और कुछ नकारात्मक पहलू जरुर होते है..मगर लेखक को सकारात्मक पक्ष को ही पाठकों के सामने रखना चाहिए...
मै खुद incest sex में इन्वोल्व रह चुकी हूँ.. ये बात नहीं है कि मज़ा नहीं आता मगर इसमें पछतावा के सिवा कुछ नहीं मिलेगा.. अगर wanderer जी अभी भी उन पालो को याद करके खुश है तो ये उनके लिए अच्छी बात है... मगर इसका सकारात्मक पक्ष रखने से समाज या पाठकों में इसकी उत्सुकता बढ़ेगी.. और बाद में अवाषद और पछतावे कि आग में जलेगे..मेरे अपने विचार है सायद आपलोग सहमत ना हो मगर ये सच है....

मैं त पूरी तरह सहमत हूँ। घर ते घर रहण दे, कोठा ण बनईए।

abcl42
01-03-2012, 11:45 PM
इसका जवाब अंजली जी और खारगर जी ने दे दिया है ।
फिर भी, मेरे अनुसार सरल शब्दों मे .........
इस फोरम पर आते हैं , नंगे फोटो - वीडियो देखने , विभिन्न प्रकार के प्राणियों से मिलने ,उनको देखने , कुछ जानकारी लेने , कुछ बकचोदी करने ........कुल मिलाकर मज़ा करने ।
अब वयस्क हैं तो इतना तो हक बनता ही है और इससे कुछ नुकसान भी नहीं है ।
अब इस विभाग की बात करें , तो केवल अपनी राय देने आतें हैं क्यूंकी हमारी नज़र मे माँ -बहन चोदना गलत है । अब क्यूँ गलत है , ये भी बताते हैं ।

अब पारिवारिक सेक्स पर राय मांगा जाएगा तो अपनी बात तो कहेंगे ही !!!

बिलकुल सच कहा आपने मैं पूरी तरेह से सहमत हूँ मस्तराम जी

manbhar
01-03-2012, 11:47 PM
इसका जवाब अंजली जी और खारगर जी ने दे दिया है ।
फिर भी, मेरे अनुसार सरल शब्दों मे .........इस फोरम पर आते हैं , नंगे फोटो - वीडियो देखने , विभिन्न प्रकार के प्राणियों से मिलने ,उनको देखने , कुछ जानकारी लेने , कुछ बकचोदी करने ........कुल मिलाकर मज़ा करने । अब वयस्क हैं तो इतना तो हक बनता ही है और इससे कुछ नुकसान भी नहीं है । अब इस विभाग की बात करें , तो केवल अपनी राय देने आतें हैं क्यूंकी हमारी नज़र मे माँ -बहन चोदना गलत है । अब क्यूँ गलत है , ये भी बताते हैं ।अब पारिवारिक सेक्स पर राय मांगा जाएगा तो अपनी बात तो कहेंगे ही !!!

मस्तराम भाई ... सही कहे स ! मदरचोद आर भेणचोद कत्ति न बणिए कोई।

vijava
02-03-2012, 12:10 PM
सेक्स के मद मे अँधे हो जाने वाले लड़का लड़की इस प्रकार की गलतियाँ करते हे जो नही करना चाहिऐ!

Harsh Verma
03-03-2012, 12:36 AM
मैँने अपनी चाची को चोदा है।

rocky1186
03-03-2012, 12:42 AM
सेक्स के मद मे अँधे हो जाने वाले लड़का लड़की इस प्रकार की गलतियाँ करते हे जो नही करना चाहिऐ!


सही कह रहे हो मित्र। गलती नहीं पाप है यह। इस से बचें। इसका तो प्रायश्चित भी नहीं है।

रॉकी

Wanderer
03-03-2012, 08:57 AM
यह इंसान इस गलतफहमी में हैं कि दूसरों की माँ-बहने सब इसकी माँ-बहन की तरह चुद्दकड़ और व्यभिचारी है जो किसीसे से भी चुदने के किए तैयार बैठीं हैं. अगर यह बलात्कारी बन जाए तो बात अलग है, वरना बहुत ज्यादा संभावना यह है कि दूसरों की माँ-बहन को चोदने का प्रयत्न किया तो खड़े लंड पर ऐसा डंडा पडेगा की भविष्य में इनका लंड खडा रहने लायक ही नहीं रहेगा.

जिनकी माँ बहन मैं चोद रहा हूँ उन्हें पता चले तब न ! :pointlol:

Wanderer
03-03-2012, 09:09 AM
प्रिय चोदू महोदय ,

अगर आप पढे लिखे होते तो ऐसा तर्क कतइ नही रखते ।
परिवार समाज का एक महत्वपूर्ण अंग है । परिवार के क्रियाकलापोँ से संस्कार बनता है और ये व्यक्तिगत नही होते ।
एक पोर्न साइट पर जाना पूर्णतः व्यक्तिगत मामला है पर माँ बहन चोदना एक सामाजिक मामला है क्योँकि अगर आज तुम एसा करोगे तो कल तुम्हारा घर वैश्यालय बन जाएगा , और एक दिन परिवार जैसी कोइ चीज दिखेगी ही नही ।
ये मत सोचना कि छुप छुप के तुम मजा ले सकते हो । ये छुपने की चीज ही नही है ।

तो आप यह कहना चाहते हैं कि पोर्न साईट पर आकर दूसरे की माँ बहन को नंगा देखकर लार टपकाना व्यक्तिगत मामला पर अपनी माँ बहन को नंगा देखना सामाजिक मामला :question:

Wanderer
03-03-2012, 09:19 AM
सब मिल कर बेचारे wanderer की क्यों माँ बहन एक कर रहे हो? उसका कुसूर क्या है? वो इस बात का झंडा थोड़े ही बुलंद कर रहा है कि सबको इन्सेस्ट करना चाहिए. वो यही तो कह रहा है कि उसने ऐसा किया है और उसे इस बात का कोई अफ़सोस नहीं है. बाकी लोग भी अपने गिरेबान में झाँक कर देख लें कि उनको इस फोरम में खींच कर लाने वाला चुम्बक क्या दूसरों के इन्सेस्ट अनुभवों का रसास्वादन करना नहीं है. किसी भी आलोचक ने आज तक यह खुल कर बताने की हिम्मत नहीं की है कि कौन सा ऐसा आकर्षण है जो उनको इन्सेस्ट फोरम में खींच कर लाता है.

मैंने ऐसा कब कहा कि मैंने इन्सेस्ट किया है ? मैं तो बस इतना कह रहा हूँ कि जो ऐसा करता है उसे करने दो . कोई इनकी माँ बहन चोदे तो इन्हें अच्छा नहीं लगता और अगर वह अपनी माँ बहन चोद रहा है तो भी इन्हें तकलीफ है :BangHead:

Wanderer
03-03-2012, 09:31 AM
wanderer..jee ko aisa nahi likhna chahiye...
मै इसका खुद भुक्तभोगी हूँ... कोई भी कहानी में कुछ सकारात्मक और कुछ नकारात्मक पहलू जरुर होते है..मगर लेखक को सकारात्मक पक्ष को ही पाठकों के सामने रखना चाहिए...
मै खुद incest sex में इन्वोल्व रह चुकी हूँ.. ये बात नहीं है कि मज़ा नहीं आता मगर इसमें पछतावा के सिवा कुछ नहीं मिलेगा.. अगर wanderer जी अभी भी उन पालो को याद करके खुश है तो ये उनके लिए अच्छी बात है... मगर इसका सकारात्मक पक्ष रखने से समाज या पाठकों में इसकी उत्सुकता बढ़ेगी.. और बाद में अवाषद और पछतावे कि आग में जलेगे..
मेरे अपने विचार है सायद आपलोग सहमत ना हो मगर ये सच है....

नेहा जी न जाने आप को किस बात का पछतावा है ? आपको उस समय जो अच्छा लगा आपने किया. :bed:

Wanderer
03-03-2012, 09:33 AM
मैँने अपनी चाची को चोदा है।

शाबाश ! बहुत अच्छा किया. central 14

Harsh Verma
04-03-2012, 07:14 AM
मेरी चाची जिसका नाम भावना है, उनका बदन बहुत ही मस्त है। उसे देखकर मेरा लण्ड़ उसकी चुत मेँ जाने के लिए तड़तने लगता है। एक दिन मेरे लण्ड़ को चाची की चुत मेँ जाने का मौका मिल ही गया। क्या आप जानना चाहेँगे मैँने कैसे अपनी चाची की चुदाई की?

abcl42
04-03-2012, 10:15 PM
मेरी चाची जिसका नाम भावना है, उनका बदन बहुत ही मस्त है। उसे देखकर मेरा लण्ड़ उसकी चुत मेँ जाने के लिए तड़तने लगता है। एक दिन मेरे लण्ड़ को चाची की चुत मेँ जाने का मौका मिल ही गया। क्या आप जानना चाहेँगे मैँने कैसे अपनी चाची की चुदाई की?

लिखिए हर्ष जी

Harsh Verma
05-03-2012, 10:37 PM
मेरे चाचा किसी काम से बाहर गये तो मुझे चाची के साथ सोना पड़ा। मैँ पहले ही सो गया और चाची थोड़ी देर बाद पेटीकोट और ब्लाउज मेँ ही सो गई, सर्दी का मौसम था, चाची और मैँ एक ही रजाई मेँ सो गये...

Harsh Verma
05-03-2012, 10:45 PM
...मुझे रात मेँ 11:30 बजे जाग आ गयी, चाची मेरी तरफ मुँह करके सोई हुई थी, उनके बदन की गरम गरम खुश्बू मुझे सोने नहीँ दे रही थी...

Harsh Verma
05-03-2012, 10:52 PM
...चाची के गोल गोल चुचे ब्लाउज से बाहर झांक रहे थे, मुझसे रहा नहीँ गया और मैँने अपने होठ चाची की छाती से लगा दिए, धीरे धीरे चुमता रहा और चुचोँ का जो भाग नजर आ रहा था उसे चुसने लगा।

Harsh Verma
05-03-2012, 11:07 PM
...चाची नीँद मेँ थी उन्हेँ लगा उनके पति ऐसा कर रहे हैँ, चाची ने मुझे अपनी बाँहोँ मेँ ले कर मेरा मुँह अपने स्तनोँ पर दबाने लगी, फिर मैँने उनके ब्लाउज के हुक खोल दिये, अब सफेद रंग की ब्रा मेँ चाची के गोल गोल चुचे मेरे सामने थे, अब मैँने चाची की ब्रा के हुक भी खोल दिये और चाची की ब्रा को थोड़ा ऊपर करके उनके चुचे बाहर निकालकर जोर-जोर से चुसने लगा, जोर जोर से चुसने पर चाची को जाग आ गई...

Harsh Verma
05-03-2012, 11:19 PM
...मैँ तो डर गया था, मैँने सोचा कि चाची ये बात सब को बता देगी, लेकिन चाची ने कहा हर्ष बेटा चूस ना मजा आ रहा है। शायद चाची गरम हो गई थी, इतना सुनते ही मैँ पागलोँ कि तरह उन पर टूट पड़ा और उनके चुचे जोर जोर से चूसने लगा, चाची भी मस्त होकर सिसकारियाँ निकालने लगी...ओह...आह..सस...

abcl42
06-03-2012, 10:54 PM
...मैँ तो डर गया था, मैँने सोचा कि चाची ये बात सब को बता देगी, लेकिन चाची ने कहा हर्ष बेटा चूस ना मजा आ रहा है। शायद चाची गरम हो गई थी, इतना सुनते ही मैँ पागलोँ कि तरह उन पर टूट पड़ा और उनके चुचे जोर जोर से चूसने लगा, चाची भी मस्त होकर सिसकारियाँ निकालने लगी...ओह...आह..सस...
हर्ष भाई, आपकी और चची की उम्र में कितना फर्क है मुझे आश्चर्य है आपकी बातों पर

RaniSingh111
07-03-2012, 04:33 PM
हर्ष भाई, आपकी और चची की उम्र में कितना फर्क है मुझे आश्चर्य है आपकी बातों पर
http://antarvasna.com/forum/images/misc/quote_icon.png Originally Posted by Harsh Verma http://antarvasna.com/forum/images/buttons/viewpost-right.png (http://antarvasna.com/forum/showthread.php?p=982321#post982321)
...मैँ तो डर गया था, मैँने सोचा कि चाची ये बात सब को बता देगी, लेकिन चाची ने कहा हर्ष बेटा चूस ना मजा आ रहा है। शायद चाची गरम हो गई थी, इतना सुनते ही मैँ पागलोँ कि तरह उन पर टूट पड़ा और उनके चुचे जोर जोर से चूसने लगा, चाची भी मस्त होकर सिसकारियाँ निकालने लगी...ओह...आह..सस...



इनके घर में चाची चोदने का रिवाज है
ओर फिर शायद बदले में चाचा भतीजी को चोद लेता होगा|
शायद इसीलिए कोई फर्क इनको नही पड़ता है|
ना चाहा
को
ना भतीजे
को ओर ना ही चाची को ओर ना ही भतीजी को
ऐसे
में आप अंदाज लगा सकते है
ये अपनी बेटियों की क्या हालत बनाते होंगे|

kshatrapati
08-03-2012, 01:47 PM
किसी भी बात को केवल एक ही दृष्टिकोण से देखना सही नहीं होता. उदाहरण के लिए कोई हत्यारा सम्माननीय नहीं हो सकता लेकिन सीमा पर १०० दुश्मनों कि हत्या करने वाले को हम परमवीर चक्र देते हैं. इसलिए जब बात परिवार में यौन संबंधों कि हो तो भी केवल एक दृष्टिकोण से देखना गलत होगा. यहाँ मैं कुछ विभिन्न प्रकार से इस विषय पर दृष्टि डालना चाहूँगा.

वैज्ञानिक दृष्टिकोण:
विज्ञान के अनुसार पूरी मानव जति एक ही परिवार (Homo sapiens) है. कोई भी किसी के भी साथ यौन सम्बन्ध बना सकता है लेकिन जब बात प्रजनन कि आती है तो स्त्री-पुरुष जितने दूर के सम्बन्धी होंगे, संतति उतनी ही विकसित होगी. निकट सम्बन्धियों के साथ प्रजनन में विकास रुक जाता है. यहाँ तक कि ऐसा बार बार करने पर संतति में terminator gene बन जाता है और ऐसे लोग प्रजनन करने में सक्षम नहीं होते. कुल मिला कर वैज्ञानिक तौर पर देखें तो परिवार (निकट सम्बन्धियों) में यौन संबंध में कोई अंतर नहीं पड़ता जब तक कि उस से बच्चे पैदा न हों.

नैतिक दृष्टिकोण:
नैतिक रूप से यदि आप किसी को कोई कष्ट न पहुंचा रहे हों तो कोई काम गलत नहीं है. यदि परिवार के सदस्य आपसी सहमति से यौन सम्बन्ध बनाएँ और इसमें कोई दबाव या हिंसा न हो तो कोई बुरे नहीं है. उल्टा सहमति होने पर वो एक दुसरे को खुशी ही देंगे जो अच्छी बात है. लेकिन यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि बाद में कोई अपराध बोध जन्म न ले पाए क्योंकि कई बार पोल खुलने के बाद अपराध बोध होता है. यदि यौन सम्बन्ध रखने वाले सदस्य इतने परिपक्व हैं कि इन सभी परिस्थितियों को सम्हाल सकें तो इसमें नैतिक तौर पर कोई बुराइ नहीं है.

सामाजिक दृष्टिकोण:
समाज के नियम किसी व्यक्ति विशेष के अधर पर नहीं बनाए जाते हैं. ये मन कि कई नियम लोगों ने स्वार्थपूर्ति के लिए बना लिए हैं लेकिन परिवार में यौन संबंधों का निषेध सर्वसाधारण के हित में ही बनाया गया है. कारन यह है कि सभी लोग इतने परिपक्व नहीं होते कि इस प्रकार के संबंधों से सम्बंधित जटिलताओं को समझ सकें. ऐसे में परिवार में यौन संबंधों कि छूट देने से कई प्रकार कि समस्याएं जन्म ले सकती हैं. इसलिए यदि पारिवारिक युगल स्वयं को इतना परिपक्व समझे तो आपसी सहमति से यौन सम्बन्ध बना सकते हैं कितु इसे समाज से छिपा कर रखना आवश्यक है क्योकि हर व्यक्ति इसे समझ नहीं सकता और समाज में इसका प्रचार होने से अपरिपक्व लोगों को भी ऐसे सम्बन्ध बनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा जो आगे जा कर समाज पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा.

मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण:
ये वह दृष्टिकोण है जो मुझे परिवार में यौन सम्बन्ध बनाने से रोकता है लेकिन ये भी सब पर लागू नहीं होता. मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है कि हमारी सभी भावनाये संतुलित रहें. प्रेम का एक रूप यदि श्रृंगार रस (काम, sex) है तो दूसरा रूप वात्सल्य भी है. यदि हम अपने परिजनों के साथ वात्सल्य का प्रेम नहीं रख सकते तो किसी और के साथ तो ये संभव न हो सकेगा और फिर हमारे मन में असंतुलन पैदा हो जाएगा जो हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है. इसलिए जहाँ तक हो सके इस प्रकार के संबंधों से दूर रहें. लेकिन यदि परिवार में कोई युगल एक दुसरे के लिए केवल कामुक भाव ही रखता है तो ऐसे में मानसिक रूप से तो संतुलन पहले ही खो चूका है तो यौन संबंधों से दूर रहकर कोई मनोवैज्ञानिक लाभ नहीं होने वाला. ऐसे में यदि पहले चर्चित साडी परिस्थितियां अनुकूल होने पर यौन सम्बन्ध स्थापित करने में कोई बुराइ नहीं है.

मेरा व्यक्तिगत दृष्टिकोण:
मुझे दुसरे लोगों के पारिवारिक यौन संबंधों से उत्तेजना मिलती है लेकिन अपने स्वयं के परिवार के साथ मेरा वात्सल्य प्रेम का संबंध है और मैं उसे बर्बाद करना उचित नहीं समझता. मेरी आप सभी को भी यही सलाह है कि जहाँ तक हो सके इस बारे में न सोचें और अपने परिजनों को इस दिशा में आकर्षित करने कि कोशिश भी न करें. ऐसे सम्बन्ध केवल उस अवस्था में बनाएँ जब आपको १००% विश्वास हो कि आपका कोई परिजन आपको सिर्फ कामुक दृष्टि से ही देखता है और आपके मन में भी उसके लिए केवल कामुक विचार ही हैं. इतना होने पर भी वो सारी बातें सुनिश्चित कर लें जो हमने पहले लिखी हुईं हैं.

abcl42
08-03-2012, 04:56 PM
अच्छा विश्लेषण किया है लेकिन एक पोस्ट कई सूत्रों पर डालने से रिपितिसन (पुनरावृत्ति) हो गयी है

Wanderer
08-03-2012, 08:33 PM
किसी भी बात को केवल एक ही दृष्टिकोण से देखना सही नहीं होता. उदाहरण के लिए कोई हत्यारा सम्माननीय नहीं हो सकता लेकिन सीमा पर १०० दुश्मनों कि हत्या करने वाले को हम परमवीर चक्र देते हैं. इसलिए जब बात परिवार में यौन संबंधों कि हो तो भी केवल एक दृष्टिकोण से देखना गलत होगा. यहाँ मैं कुछ विभिन्न प्रकार से इस विषय पर दृष्टि डालना चाहूँगा.

वैज्ञानिक दृष्टिकोण:
विज्ञान के अनुसार पूरी मानव जति एक ही परिवार (Homo sapiens) है. कोई भी किसी के भी साथ यौन सम्बन्ध बना सकता है लेकिन जब बात प्रजनन कि आती है तो स्त्री-पुरुष जितने दूर के सम्बन्धी होंगे, संतति उतनी ही विकसित होगी. निकट सम्बन्धियों के साथ प्रजनन में विकास रुक जाता है. यहाँ तक कि ऐसा बार बार करने पर संतति में terminator gene बन जाता है और ऐसे लोग प्रजनन करने में सक्षम नहीं होते. कुल मिला कर वैज्ञानिक तौर पर देखें तो परिवार (निकट सम्बन्धियों) में यौन संबंध में कोई अंतर नहीं पड़ता जब तक कि उस से बच्चे पैदा न हों.

नैतिक दृष्टिकोण:
नैतिक रूप से यदि आप किसी को कोई कष्ट न पहुंचा रहे हों तो कोई काम गलत नहीं है. यदि परिवार के सदस्य आपसी सहमति से यौन सम्बन्ध बनाएँ और इसमें कोई दबाव या हिंसा न हो तो कोई बुरे नहीं है. उल्टा सहमति होने पर वो एक दुसरे को खुशी ही देंगे जो अच्छी बात है. लेकिन यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि बाद में कोई अपराध बोध जन्म न ले पाए क्योंकि कई बार पोल खुलने के बाद अपराध बोध होता है. यदि यौन सम्बन्ध रखने वाले सदस्य इतने परिपक्व हैं कि इन सभी परिस्थितियों को सम्हाल सकें तो इसमें नैतिक तौर पर कोई बुराइ नहीं है.

सामाजिक दृष्टिकोण:
समाज के नियम किसी व्यक्ति विशेष के अधर पर नहीं बनाए जाते हैं. ये मन कि कई नियम लोगों ने स्वार्थपूर्ति के लिए बना लिए हैं लेकिन परिवार में यौन संबंधों का निषेध सर्वसाधारण के हित में ही बनाया गया है. कारन यह है कि सभी लोग इतने परिपक्व नहीं होते कि इस प्रकार के संबंधों से सम्बंधित जटिलताओं को समझ सकें. ऐसे में परिवार में यौन संबंधों कि छूट देने से कई प्रकार कि समस्याएं जन्म ले सकती हैं. इसलिए यदि पारिवारिक युगल स्वयं को इतना परिपक्व समझे तो आपसी सहमति से यौन सम्बन्ध बना सकते हैं कितु इसे समाज से छिपा कर रखना आवश्यक है क्योकि हर व्यक्ति इसे समझ नहीं सकता और समाज में इसका प्रचार होने से अपरिपक्व लोगों को भी ऐसे सम्बन्ध बनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा जो आगे जा कर समाज पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा.

मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण:
ये वह दृष्टिकोण है जो मुझे परिवार में यौन सम्बन्ध बनाने से रोकता है लेकिन ये भी सब पर लागू नहीं होता. मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है कि हमारी सभी भावनाये संतुलित रहें. प्रेम का एक रूप यदि श्रृंगार रस (काम, sex) है तो दूसरा रूप वात्सल्य भी है. यदि हम अपने परिजनों के साथ वात्सल्य का प्रेम नहीं रख सकते तो किसी और के साथ तो ये संभव न हो सकेगा और फिर हमारे मन में असंतुलन पैदा हो जाएगा जो हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है. इसलिए जहाँ तक हो सके इस प्रकार के संबंधों से दूर रहें. लेकिन यदि परिवार में कोई युगल एक दुसरे के लिए केवल कामुक भाव ही रखता है तो ऐसे में मानसिक रूप से तो संतुलन पहले ही खो चूका है तो यौन संबंधों से दूर रहकर कोई मनोवैज्ञानिक लाभ नहीं होने वाला. ऐसे में यदि पहले चर्चित साडी परिस्थितियां अनुकूल होने पर यौन सम्बन्ध स्थापित करने में कोई बुराइ नहीं है.

मेरा व्यक्तिगत दृष्टिकोण:
मुझे दुसरे लोगों के पारिवारिक यौन संबंधों से उत्तेजना मिलती है लेकिन अपने स्वयं के परिवार के साथ मेरा वात्सल्य प्रेम का संबंध है और मैं उसे बर्बाद करना उचित नहीं समझता. मेरी आप सभी को भी यही सलाह है कि जहाँ तक हो सके इस बारे में न सोचें और अपने परिजनों को इस दिशा में आकर्षित करने कि कोशिश भी न करें. ऐसे सम्बन्ध केवल उस अवस्था में बनाएँ जब आपको १००% विश्वास हो कि आपका कोई परिजन आपको सिर्फ कामुक दृष्टि से ही देखता है और आपके मन में भी उसके लिए केवल कामुक विचार ही हैं. इतना होने पर भी वो सारी बातें सुनिश्चित कर लें जो हमने पहले लिखी हुईं हैं.

मैं तो कब से इन्हें यह समझाने की कोशिश कर रहा हूँ ! :pointlol:

abcl42
08-03-2012, 10:58 PM
मैं तो कब से इन्हें यह समझाने की कोशिश कर रहा हूँ ! :pointlol:

एक बात और है - ये सारे द्रष्टिकोण श्रीमान क्षत्रपति जी (रोबिन जी ) के ही है

RaniSingh111
08-03-2012, 11:39 PM
किसी भी .......... दृष्टि डालना चाहूँगा.
वैज्ञानिक दृष्टिकोण:
विज्ञान के अनुसार पूरी मानव ........................बच्चे पैदा न हों.
नैतिक दृष्टिकोण:
नैतिक रूप से.......................नहीं है.
सामाजिक दृष्टिकोण:
समाज के नियम .............................नकारात् मक प्रभाव डालेगा.
मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण:
ये वह दृष्टिकोण..................क ने में कोई बुराइ नहीं है.
मेरा व्यक्तिगत दृष्टिकोण:
मुझे दुसरे लोगों के पारिवारिक यौन संबंधों से उत्तेजना मिलती है लेकिन अपने स्वयं के परिवार के साथ मेरा वात्सल्य प्रेम का संबंध है और मैं उसे बर्बाद करना उचित नहीं समझता. मेरी आप सभी को भी यही सलाह है कि जहाँ तक हो सके इस बारे में न सोचें और अपने परिजनों को इस दिशा में आकर्षित करने कि कोशिश भी न करें. ऐसे सम्बन्ध केवल उस अवस्था में बनाएँ जब आपको १००% विश्वास हो कि आपका कोई परिजन आपको सिर्फ कामुक दृष्टि से ही देखता है और आपके मन में भी उसके लिए केवल कामुक विचार ही हैं. इतना होने पर भी वो सारी बातें सुनिश्चित कर लें जो हमने पहले लिखी हुईं हैं.
.

इतने सारे द्रष्टिकोण देकर
आप क्या कहना चाहते है?
और
किसे सही मानते है?
और
क्या सही है?
और
क्या सही करते है?

आपने कोरी किताबी बकवास लिखी है*

Harsh Verma
09-03-2012, 05:43 PM
रोबिन जी ने बिल्कुल सही लिखा है, चाहे किसी किताब से ही क्यूँ ना लिखा हो

kshatrapati
09-03-2012, 06:02 PM
अच्छा विश्लेषण किया है लेकिन एक पोस्ट कई सूत्रों पर डालने से रिपितिसन (पुनरावृत्ति) हो गयी है

मैंने सोचा जिस भी सूत्र में ये प्रासंगिक है वहां-वहां प्रेषित (पोस्ट) करना उचित होगा.

kshatrapati
09-03-2012, 06:04 PM
एक बात और है - ये सारे द्रष्टिकोण श्रीमान क्षत्रपति जी (रोबिन जी ) के ही है

जी हाँ ये सब मेरे ही दिमाग कि उपज है लेकिन मैंने इन सभी दृष्टिकोणों से काफी लोगों और अनुलेखों के मत जानने के बाद ही ये सब सोचा है.

kshatrapati
09-03-2012, 06:09 PM
रोबिन जी ने बिल्कुल सही लिखा है, चाहे किसी किताब से ही क्यूँ ना लिखा हो

यह सत्य है कि मैंने कई किताबें पढ़ीं हैं इन विषयों पर लेकिन ये किसी किताब से हूँ-ब-हूँ नक़ल किया हुआ नहीं है. काफी सोच विचार व गहन विश्लेषण के पश्चात मैं इन निष्कर्षों पर पहुंचा हूँ.

यदि इसमें कोई गलती दिखाई दे या आप मेरे किसी निष्कर्ष से सहमत न हों तो मुझे बता सकते हैं. मैं अपनी बात दूसरों पर थोपने से ज्यादा सच हो जानने के लिए उत्सुक रहता हूँ.

kshatrapati
09-03-2012, 06:30 PM
इतने सारे द्रष्टिकोण देकर
आप क्या कहना चाहते है?
और
किसे सही मानते है?
और
क्या सही है?
और
क्या सही करते है?

आपने कोरी किताबी बकवास लिखी है


हमें लगता है कि यह लेख कुछ लंबा होने से आप इसे ध्यान से पढ़ नहीं पाईं. यदि आप ध्यान दें तो हर दृष्टिकोण में यदि आप कोई शर्त पूरी करते हैं तो ये सही है अन्यथा नहीं. विस्तार से हम पहले ही लिख चुके हैं लेकिन संक्षेप में यहाँ फिर लिख देते हैं. यहाँ हम वो शर्तें लिख रहें हैं जिनका होना ज़रूरी है इससे पहले कि आप परिवार में यौन सम्बन्ध स्थापित करें:

१. गर्भनिरोधन अतिआवश्यक है.
२. किसी भी प्रकार का दबाव नहीं होना चाहिए.
३. अपने परिजन को यौन संबंधों के लिए मानाने कि कोशिश भी न करें. इस से बाद में ग्लानी और अपराध बोध हो सकता है.
४. ज़रूरी है कि आप ऐसे संबंधों को छिपा कर रखें.
५. यह सुनिश्चित कर लें कि आपके और आपके परिजन दोनों के मन में एक दुसरे के लिए कामुक भावनाएँ हैं और आप दोनों ही इन भावनाओं को खतम नहीं कर सकते.
६. दोनों का मानसिक रूप से इतना परिपक्व होना आवश्यक है कि बाद में आने वाले किसी भी भावनात्मक बदलाव से या सम्बंधित किसी भी समस्या से निपट सकें.

यदि आपको मेरी बातें किताबी लगीं तो क्षमा चाहता हूँ. चूंकि यहाँ हिंदी में लिखना अनिवार्य है इसलिए मैं शायद कुछ ज्यादा ही शुद्ध हिंदी का प्रयोग कर बैठा.

RaniSingh111
09-03-2012, 10:32 PM
छत्रपति
जी
आपके द्रष्टिकोणो से उत्पन कुच्छ प्रश्न है जिनके उत्तर की गहराई में जो जमीनी हकीकत दिखाई देगी तो चाहे ये आप स्वमं के द्रष्टिकोण हो या किसी अन्य लेखक या किताब के, ये सिर्फ और सिर्फ किताबी ही कहलायेंगे| शुद्ध हिंदी लिखने से कोई बात किताबी नही हो जाती हां, प्रभावी जरुर हो जाती है लेकिन इस प्रभाव के कारण कोई बिना आगा-पिच्छा सोचे भावुकतावश इसे जीवन में अपना बेठे तो उसका जीवन आप और ऐसी विचारधाराओं का प्रसार करने वाले कभी निखारते नजर नही आते है|
१. गर्भनिरोधन अतिआवश्यक है.
क्या गर्भनिरोधन के साथ किसी से भी सेक्स करना उच्चित है चाहे वह दोनों की सहमति से ही हो रहा हो?
२. किसी भी प्रकार का दबाव नहीं होना चाहिए.
क्या किसी भी प्रकार के दबाव व पूर्ण आपसी सहमति के विवाहेत्तर-सम्बन्ध या बिना विवाह के स्त्री-पुरुषो में योनाचार उच्चित है|
३. अपने परिजन को यौन संबंधों के लिए मानाने कि कोशिश भी न करें. इस से बाद में ग्लानी और अपराध बोध हो सकता है.
क्या कोई ऐसा मना कर करने की बात का समर्थन करना उच्चित है|
४. ज़रूरी है कि आप ऐसे संबंधों को छिपा कर रखें.
अगर ऐसी छिपी हुई बात 'आउट' हो जाए तो क्या करे (ह्त्या या आत्महत्या जादातर दोनों मेसे एक काम करते पाए जाते है अखबारों में हम रोज ऐसा ही कुच्छ पढ़ते है)
५. यह सुनिश्चित कर लें कि आपके और आपके परिजन दोनों के मन में एक दुसरे के लिए कामुक भावनाएँ हैं और आप दोनों ही इन भावनाओं को खतम नहीं कर सकते.
दोनों के सुनिश्चित करने से क्या होगा? एक स्त्री व एक पुरुष पैसे व धन-सम्पति के बल पर केवल अपनी जवानी गुजार सकता है बुढापा तो बाकि परिवार व समाज के बीच ही गुजारना पड़ता है और ऐसा समाज-परिवारद्रोही पुरुष साथी पहले ही मर गया तो उस ओरत का बुढापा कैसा होगा जिसकी आप कल्पना मात्र से ही सबके में सिरहन हो उठेगी|
६. दोनों का मानसिक रूप से इतना परिपक्व होना आवश्यक है कि बाद में आने वाले किसी भी भावनात्मक बदलाव से या सम्बंधित किसी भी समस्या से निपट सकें.
इससे उत्पन समस्या दोनों के बीच नही उनके पूरे परिवार, नजदीकी रिश्तेदारों सहित पूरे समाज में पैदा होती है क्या निजिता की दुहाही देकर, अपनी परिपक्वता के बल पर तर्क देकर, इतना स्वार्थी होना उच्चित है कि जिस पारिवारिक व सामाजिक व्यवस्था के हम अंग है ऐसी करतूतों से उसकी ही कब्र खोद दे?
यदि आपको मेरी बातें किताबी लगीं तो क्षमा चाहता हूँ. चूंकि यहाँ हिंदी में लिखना अनिवार्य है इसलिए मैं शायद कुछ ज्यादा ही शुद्ध हिंदी का प्रयोग कर बैठा.
क्षमा मागने की कोई जरूरत नही है| शुद्ध व अच्छी हिंदी का प्रयोग बुरा समाज बनाने या आधुनिक बुराईयों को समाज पर हावी करने के लिए नही करे|

abcl42
09-03-2012, 11:48 PM
मित्र रानी सिंह जी , आपने जो मुद्दे उठाये हैं वो सामाजिक मान्यता प्राप्त हैं और जिनसे कोई मुख मोड़ ही नहीं सकता / हम सब इस बात से सहमत है की परिवार के सदस्यों में आपस में ( अगम्यगाम्य ) सेक्स नहीं करना चाहिए और इसकी वकालत कोई खुले रूप से समाज में कर भी नहीं सकता / श्री रोबिन जी का जैसा मैंने समझा अपना मत स्वयं इन्सेस्ट सेक्स के खिलफ ही है
मेरा व्यक्तिगत दृष्टिकोण: मुझे दुसरे लोगों के पारिवारिक यौन संबंधों से उत्तेजना मिलती है लेकिन अपने स्वयं के परिवार के साथ मेरा वात्सल्य प्रेम का संबंध है और मैं उसे बर्बाद करना उचित नहीं समझता. मेरी आप सभी को भी यही सलाह है कि जहाँ तक हो सके इस बारे में न सोचें और अपने परिजनों को इस दिशा में आकर्षित करने कि कोशिश भी न करें. ऐसे सम्बन्ध केवल उस अवस्था में बनाएँ जब आपको १००% विश्वास हो कि आपका कोई परिजन आपको सिर्फ कामुक दृष्टि से ही देखता है और आपके मन मे ं भी उसके लिए केवल कामुक विचार ही हैं. इतना होने पर भी वो सारी बातें सुनिश्चित कर लें जो हमने पहले लिखी हुईं हैं
उन्होंने तमाम द्रष्टि कोणों से इन्सेस्ट सेक्स की चर्चा करते हुए कुछ निराकरण दिए हैं और ये बताने की कोशिश की है कि यदि इन्सेस्ट सेक्स करने कि इच्छा है तो जब तक उनके द्वारा बताई गयी शर्तें पूरी न हों \ तब तक उसे न करें / मैं समझता हूँ कि समाज में बहुत कम लोग ( २ प्रतिशत से भी कम ) इन्सेस्ट में सलग्न हैं / हमारे समाज को इस बुराई से हाल फ़िलहाल कोई खतरा नहीं है / रोबिन जी ने तो ( मेरे अनुसार ) इन्सेस्ट रुपी बीमारी में एक दावा के रूप में कुछ नुश्खे सुझाये हैं / अगर आप इसे इन्सेस्ट वकालत समझते हैं, मुझे लगता कि ये ठीक नहीं है / आगे रोबिन जी खुद एक विद्वान हैं आपकी पोस्ट का उत्तर देंग/ Thanks

kshatrapati
10-03-2012, 01:49 AM
धन्यवाद abcl42 (http://antarvasna.com/forum/member.php?u=92321) जी. आप बिलकुल सही समझे हैं. रानी जी ने शायद ये पहले से ही मान लिया था की मैं अगम्यगाम्य यौन संबंधों के पक्ष में लिख रहा हूँ इसलिए उन्हें मेरी बात का केवल एक ही पक्ष दिखाई दे रहा है. अगर मैं केवल बहस जीतने का ही इक्षुक होता तो ऐसे-ऐसे उद्धरण दे सकता था की किसी के कहने के लिए कुछ बचता ही नहीं. लेकिन मैं दोनों पक्षों को समझ कर एक स्वास्थ्य वार्ता करना चाहता हूँ. इसीलिए मैंने दोनों पक्षों का निष्पक्ष रूप से विश्लेषण किया है.

रानी जी ये जो शर्तें मैंने लिखीं हैं उनमे से कोई एक नहीं बल्कि सारी शर्तें लागू होने पर ही इस प्रकार के संबंधों को उचित कहा जा सकता है. जैसा की abcl42 (http://antarvasna.com/forum/member.php?u=92321) जी ने कहा की समाज में २% से भी कम लोग इस प्रकार के संबंधों में संलग्न है तो मैं समझता हूँ की उनमे से ०.०१% भी ऐसे नहीं होंगे जो इन सारी शर्तों को पूरा करते हों. अब ये शर्तें रख कर मैं तो अगम्यगाम्य यौन संबंधों को कम ही कर रहा हूँ. वो भी तर्क दे कर न की गलियां दे कर. आप अगर इस पर ध्यान दें तो मैं समझता हूँ की आप भी मेरी बातों से सहमत होंगी.

abcl42
10-03-2012, 06:13 PM
मित्र इन्सेस्ट की चर्चा भी तो इसी फोरम पर की जा सकती है, समाज में इस पर चर्चा करना भी बैन है

RaniSingh111
10-03-2012, 11:31 PM
मित्र रानी सिंह जी ,--------------- अपना मत स्वयं इन्सेस्ट सेक्स के खिलफ ही है
मेरा व्यक्तिगत दृष्टिकोण: मुझे दुसरे..............हमने पहले लिखी हुईं हैं
उन्होंने तमाम द्रष्टि कोणों से इन्सेस्ट सेक्स की चर्चा करते हुए कुछ निराकरण दिए हैं और ये बताने की कोशिश की है कि यदि इन्सेस्ट सेक्स करने कि इच्छा है तो जब तक उनके द्वारा बताई गयी शर्तें पूरी न हों \ तब तक उसे न करें / मैं समझता हूँ कि समाज में बहुत कम लोग ( २ प्रतिशत से भी कम ) इन्सेस्ट में सलग्न हैं / हमारे समाज को इस बुराई से हाल फ़िलहाल कोई खतरा नहीं है / रोबिन जी ने तो ( मेरे अनुसार ) इन्सेस्ट रुपी बीमारी में एक दावा के रूप में कुछ नुश्खे सुझाये हैं / अगर आप इसे इन्सेस्ट वकालत समझते हैं, मुझे लगता कि ये ठीक नहीं है / आगे रोबिन जी खुद एक विद्वान हैं आपकी पोस्ट का उत्तर देंग/ Thanks

मेरा भी कहने का मतलब ये ही है कि क्या इनके द्वारा बतायी गई शर्ते पूरी करने पर इस प्रकार के (परिवार के सदस्यों से) सेक्स संबंधो कोई समाज या परिवार,
सामाजिक मान्यता दे सकता है क्या?
जो
श्री छत्रपति जी
सशर्त करने के तर्क दे रहे है या द्रष्टिकोण प्रस्तुत कर रहे है|

deep_jain
10-03-2012, 11:45 PM
क्या मुझे कोई एक बात बताएगा की अगर थोड़े दूर के रिश्ते की भाभी हो तो क्या उनके साथ सेक्स किया जा सकता है

RaniSingh111
10-03-2012, 11:45 PM
धन्यवाद abcl42 (http://antarvasna.com/forum/member.php?u=92321) जी. ...................... अगर मैं केवल बहस जीतने का ही इक्षुक होता तो ऐसे-ऐसे उद्धरण दे सकता था की किसी के कहने के लिए कुछ बचता ही नहीं. लेकिन मैं दोनों पक्षों को समझ कर एक स्वास्थ्य वार्ता करना चाहता हूँ. इसीलिए मैंने दोनों पक्षों का निष्पक्ष रूप से विश्लेषण किया है.

रानी जी ये जो शर्तें मैंने लिखीं हैं उनमे से कोई एक नहीं बल्कि सारी शर्तें लागू होने पर ही इस प्रकार के संबंधों को उचित कहा जा सकता है. जैसा की abcl42 (http://antarvasna.com/forum/member.php?u=92321) जी ने कहा की समाज में २% से भी कम लोग इस प्रकार के संबंधों में संलग्न है तो मैं समझता हूँ की उनमे से ०.०१% भी ऐसे नहीं होंगे जो इन सारी शर्तों को पूरा करते हों. अब ये शर्तें रख कर मैं तो अगम्यगाम्य यौन संबंधों को कम ही कर रहा हूँ. वो भी तर्क दे कर न की गलियां दे कर. आप अगर इस पर ध्यान दें तो मैं समझता हूँ की आप भी मेरी बातों से सहमत होंगी.

जिस काम को या योन-सम्बन्ध को आपका परिवार व समाज मान्यता नही देता किसी भी शर्त के साथ भी मान्यता नही देता| अनायास या कभी भूलवश नादानी या अतिउत्साह में हो जाता है अनेक बार समाज या परिवार का प्रभुत्वशाली व्यक्ति भी ऐसा निरंतर करता रहता है|

तो परिवार या समाज उसे अकथित रूप में माफ़ कर दे या नजर अंदाज कर दे|

क्या आपका मंतव्य यह है कि ऐसे उद्दरण इसे मान्यता प्रदान करने के लिए प्रयाप्त है तो आपका मंतव्य गलत है|

kshatrapati
10-03-2012, 11:48 PM
मेरा भी कहने का मतलब ये ही है कि क्या इनके द्वारा बतायी गई शर्ते पूरी करने पर इस प्रकार के (परिवार के सदस्यों से) सेक्स संबंधो कोई समाज या परिवार,
सामाजिक मान्यता दे सकता है क्या?
जो
श्री छत्रपति जी
सशर्त करने के तर्क दे रहे है या द्रष्टिकोण प्रस्तुत कर रहे है|

आप फिर ध्यान नहीं दे रहीं हैं. सामाजिक दृष्टिकोण में मैंने यह स्पष्ट किया है की इस प्रकार के संबंधों को सामाजिक मान्यता न हो दी जा सकती है और न ही दी जानि चाहिए. किन्तु समाज हमारे इस मंच को भी मान्यता नहीं देता. ऐसे में आप यहाँ क्या कर रहीं हैं?

RaniSingh111
11-03-2012, 12:12 AM
बहुत अच्छा जवाव दिया है मित्र आप ने...आप के लिए रेपो++मित्र,,,परन्तु आप से अनुरोध है की कृपया शालीन भाषा का प्रयोग करे

रेपो के लिए धन्यवाद
ये फोरम मनोरंजन के लिए है मेरा विचार है कि भाषा कैसी भी हो सबका मनोरंजन होना चाहिए यानि बाते मजेदार होनी चाहिए कभी-कभी गालियों में भी मजा आने लगता है| अभी होली को गए जादा दिन नही गुजरे है|

abhking
11-03-2012, 12:55 AM
ma apana bhabhi ka sathe

kshatrapati
12-03-2012, 12:58 PM
ma apana bhabhi ka sathe

ये आपकी राय है, पारिवारिक सेक्स के बारे में ??

RaniSingh111
12-03-2012, 10:05 PM
सही कहा अगर इसी बाते नहीं पसंद तो इस सूत्र पे नहीं आना चाहिए
क्यों, नही आएंगे तो तुम जैसो की हकीकत का पता कैसे लगेगा?

abcl42
12-03-2012, 11:20 PM
आप फिर ध्यान नहीं दे रहीं हैं. सामाजिक दृष्टिकोण में मैंने यह स्पष्ट किया है की इस प्रकार के संबंधों को सामाजिक मान्यता न हो दी जा सकती है और न ही दी जानि चाहिए. किन्तु समाज हमारे इस मंच को भी मान्यता नहीं देता. ऐसे में आप यहाँ क्या कर रहीं हैं?

किसी भी सदस्य को ये लिखना की आप यहाँ क्या कर रहे है या आप को सूत्र पर या मंच पर नहीं आना चाहिए उचित नहीं है ये अशालीनता है इससे बचे

kshatrapati
12-03-2012, 11:49 PM
क्यों, नही आएंगे तो तुम जैसो की हकीकत का पता कैसे लगेगा?

हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन..
दिल के खुश रखने को ग़ालिब ये ख्याल अच्छा है.

RaniSingh111
12-03-2012, 11:51 PM
किसी भी सदस्य को ये लिखना की आप यहाँ क्या कर रहे है या आप को सूत्र पर या मंच पर नहीं आना चाहिए उचित नहीं है ये अशालीनता है इससे बचे

सही बात है
सभी अपनी-अपनी अभिव्यक्ति, व्यक्त करेने के लिए स्वछंद है|
कई सदस्य अपने आप को इस फोरम का मालिक समझ लेने की गलतफहमी में कमेन्ट पोस्ट करते है|

deep_jain
13-03-2012, 11:05 PM
क्यों, नही आएंगे तो तुम जैसो की हकीकत का पता कैसे लगेगा?

बेशक आइये लेकिन सूत्र पे अपनी राय रखने दुसरो के विचार अच्छे हे या नहीं ये फैसला उन्हें खुद कर लेने दीजिये

deep_jain
13-03-2012, 11:11 PM
किसी भी सदस्य को ये लिखना की आप यहाँ क्या कर रहे है या आप को सूत्र पर या मंच पर नहीं आना चाहिए उचित नहीं है ये अशालीनता है इससे बचे
मित्र में आप की बात से सहमत हूँ..पर हमरे विचार हमारे अपने हे किसी और को कोई हक नहीं की वो हमरे विचार सही है या गलत हमें ये बताये

क्यों, नही आएंगे तो तुम जैसो की हकीकत का पता कैसे लगेगा?

सभी अपनी-अपनी अभिव्यक्ति, व्यक्त करेने के लिए स्वछंद है|
कई सदस्य अपने आप को इस फोरम का मालिक समझ लेने की गलतफहमी में कमेन्ट पोस्ट करते है|
पर किसी के ये कमेंट्स..सीधे हमें बुरा बताना चाहते है.. ये क्या सही है

deep deep
14-03-2012, 04:30 AM
बहुत अच्छा सूत्र है लगे रहिये

dkgdkg
14-03-2012, 01:32 PM
PLEASE WATCH MOVIE BHAROSA 1940 ANSWER OF YOUR QUESTIONS ARE HERE PLEASE TRANLATE THE STORY IN HINDY Bharosa

# Release Date
: 0000-00-00
# Language
: Hindi
# Genre
: Social
# Cast & Crew
: Close Movie Crew Data
Star Cast
# Chandramohan
# Sardar Akhter
# Mazhar Khan (Old)
# Sheela
# Maya Devi
# Eruch Tarapor
# Gulab
# Menaka
# Abu Bakar
# Ram Apte
# Gulam Hussain
Crew
# Director Sohrab Modi
# Producer Sohrab Modi
# Cinematographer Y.D. Sarpotdar
Music
# Music Director G.P. Kapoor
# Lyricist Lalchand Bismil" Peshavari"
Writers
# Story Writer Lalchand Bismil" Peshavari"
# Screen Play Writer Lalchand Bismil" Peshavari"
Banner
# Banner Minerva Movietone
# Movie Synopsis
: Close Movie Synopsis
"BHAROSA" is a tale of a sin both hideous and charming. When man is strong, sin is hideous. When he is weak, it becomes charming. When he is defeated, it burdens his soul with its crushing weight. And that is not all. Some times such far-reaching are the poisonous effects of sin that they stagger human imagination. And yet man sins because he is human and prone to err. . The hero of our story is too just human and no more. Goaded by circumstances and unable to resist temptation he sins. And then a thousand repentances, millions of tears, innumerable penances, but they are of no avail. Once the seed of sin is sown, he must reap the fruit, is the Law of Destiny. Nay, more. His children must also suffer according to the Biblical Maximum:- "Sins of fathers shall be visited on their children". . Gyan and Rasik were great friends. They trusted each other with uncommon faith. That is why no one was surprised when Gyan, leaving for Africa on some business, decided to leave his young and beautiful wife, Shobha with Rasik. He didnot want Shobha to return to the unhealthy climate of Africa, which was patricularly damaging to her health. Rambha, Rasiks wife and Shobhas friend, agreed with Gyan and insisted on Shobha remaining with them. Rasik saw danger in this. He could not tell them that it was too dangerous. How could he ? from the day he had seen Shobha, he admired her silently but with rare devotion and consuming passion. It was only the presence of Gyan and the thought of the tremendous faith-bharosa-he had in him which had kept him steady. He was afraid that in his absence he might stumble and fall and thus prove unfaithful. . But the course of Destiny was set. A tragic struggle and a grim trial waited him. He steeled himself and with all the strength at his command resisted. It was a desperate struggle and his strength of resistance was put to greater trial when one day his wife Rambha left for her parents home. Now with the absence of his wife the path to the intoxicated passion lay open and unguarded. Lonely, tired and overwhelmed with the weight of continous struggle, his emotions growing wilder, he allowed himself to be dragged to the path of least resistance and gave the struggle. Little did he know that hidden in the dark future lay a deadendwhence there would be no turning back. Poor Rasik! He could not stand up to the trial any more and in one fateful moment of a terrible nightmare he sinned dragging with him unfortunate Shobha. Then followed the dawn of biting and remorseful concciousness. But they were helpless. Past is immortal. The terrible seed of sin was sown and the harvest must be raped at its proper time. . Days, weeks and months passed. Their moment of sin flowered into an innocent and tender child-Indira. In the meantime Gyan returned from Africa. Good-natured and unsuspecting he showered all his love on the little child, caressing her as a loving father least knowing what had happened behing his back. He had unflinching faith-bharosa- in Rasik and loved him passionately. Noticing a growing attachment between Indira and Madan, Rasiks son, he announced his intention of marrying them when grown-up thus cementing their friendship with ties relationship. Rasik and Shobha, were dumb-founded. How can it happen the marriage of Madan with Indira? But how to prevent it? Unable to bear the pangs of sin any longer Shobha in a mad moment decided to strangle little Indira. [Source: Booklet]

dkgdkg
14-03-2012, 01:33 PM
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anjoogupta
15-03-2012, 06:09 PM
क्या मुझे कोई एक बात बताएगा की अगर थोड़े दूर के रिश्ते की भाभी हो तो क्या उनके साथ सेक्स किया जा सकता है
हाँ किया जा सकता है अगर वो भी चाहती है तो.

jaggajat
17-03-2012, 01:43 PM
हाँ किया जा सकता है अगर वो भी चाहती है तो.

कृपया, एकबार अपने उन भाईसाहब से भी पूच्छ लेना, जिनकी वो पत्नि है

:skull:

कहीं उनके विचार मेरे जैसे हो और वे पता लगाने पर लठ्ठ ले के आपके पिच्छे पड़ जाए और आपका और आपकी उस भाभी का जीवन मुश्किल में पड़ जाए|

anjoogupta
17-03-2012, 05:58 PM
कृपया, एकबार अपने उन भाईसाहब से भी पूच्छ लेना, जिनकी वो पत्नि है

:skull:

कहीं उनके विचार मेरे जैसे हो और वे पता लगाने पर लठ्ठ ले के आपके पिच्छे पड़ जाए और आपका और आपकी उस भाभी का जीवन मुश्किल में पड़ जाए|
आपने बिलकुल सही कहा है जी .

Lookmaan
29-03-2012, 11:58 AM
सूत्र बानाने से पहले मुझे 40 पोस्ट करने हैँ और ये मेर 8वाँ पेस्ट है

abcl42
14-04-2012, 08:28 PM
मित्रो इस थ्रेड पर रसीली बातों का मजा लें
http://antarvasna.com/forum/showthread.php?t=7239&page=26&p=1092621&posted=1#post1092621