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View Full Version : योगी और भोगी-हिन्दी हास्य कविताएँ



knplko
08-01-2011, 12:16 AM
हैरानी है इस बात पर कि
समलैंगिकों के मेल पर लोग
आजादी का जश्न मनाते हैं,
मगर किसी स्त्री पुरुष के मिलन पर
मचाते हैं शोर
उनके नामों की कर पहचान,
पूछतें हैं रिश्ते का नाम,
सभ्यता को बिखरता जताते हैं।
कहें दीपक बापू
आधुनिक सभ्यता के प्रवर्तक
पता नहीं कौन हैं,
सब इस पर मौन हैं,
जो समलैंगिकों में देखते हैं
जमाने का बदलाव,
बिना रिश्ते के स्त्री पुरुष के मिलन
पर आता है उनको ताव,
मालुम नहीं शायद उनको
रिश्ते तो बनाये हैं इंसानों ने,
पर नर मादा का मेल होगा
तय किया है प्रकृति के पैमानों ने,
फिर जवानी के जोश में हुए हादसों पर
चिल्लाते हुए लोग, क्यों बुढ़ाये जाते हैं।
———-
योगी कभी भोग नहीं करेंगे
किसने यह सिखाया है,
जो न जाने योग,
वही पाले बैठे हैं मन के रोग,
खुद चले न जो कभी एक कदम रास्ता
वही जमाने को दिखाया है।
जानते नहीं कि
भटक जाये योगी,
बन जाता है महाभोगी,
पकड़े जाते हैं जब ऐसे योगी
तब मचाते हैं वही लोग शोर
जिन्होंने शिष्य के रूप में अपना नाम लिखाया है।

hot1karan
08-01-2011, 03:07 AM
hmmmmmmmmmmm
thats strange but true..............................

Akhand
08-01-2011, 07:53 AM
अति सुन्दर

knplko
08-01-2011, 03:46 PM
धन्यवाद आपके विचार हमारा हौसला भरने का काम करते हैं

mr josef
09-01-2011, 01:02 AM
म ह्ज्झ्ज्ज्ज्ज्ज् ्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज्ज

SOURABH JAIN
09-01-2011, 05:58 AM
हैरानी है इस बात पर कि
समलैंगिकों के मेल पर लोग
आजादी का जश्न मनाते हैं,
मगर किसी स्त्री पुरुष के मिलन पर
मचाते हैं शोर
उनके नामों की कर पहचान,
पूछतें हैं रिश्ते का नाम,
सभ्यता को बिखरता जताते हैं।
कहें दीपक बापू
आधुनिक सभ्यता के प्रवर्तक
पता नहीं कौन हैं,
सब इस पर मौन हैं,
जो समलैंगिकों में देखते हैं
जमाने का बदलाव,
बिना रिश्ते के स्त्री पुरुष के मिलन
पर आता है उनको ताव,
मालुम नहीं शायद उनको
रिश्ते तो बनाये हैं इंसानों ने,
पर नर मादा का मेल होगा
तय किया है प्रकृति के पैमानों ने,
फिर जवानी के जोश में हुए हादसों पर
चिल्लाते हुए लोग, क्यों बुढ़ाये जाते हैं।
———-
योगी कभी भोग नहीं करेंगे
किसने यह सिखाया है,
जो न जाने योग,
वही पाले बैठे हैं मन के रोग,
खुद चले न जो कभी एक कदम रास्ता
वही जमाने को दिखाया है।
जानते नहीं कि
भटक जाये योगी,
बन जाता है महाभोगी,
पकड़े जाते हैं जब ऐसे योगी
तब मचाते हैं वही लोग शोर
जिन्होंने शिष्य के रूप में अपना नाम लिखाया है।


jeewan ka sach hai bhai...

SOURABH JAIN
09-01-2011, 05:58 AM
mmmmmmsat

knplko
09-01-2011, 11:44 AM
धन्यवाद आप की शब्द हमें आगे भी यहाँ कुछ निया करने की प्रेरणा देते रहेंगे साथ मैं अगर आप reputation दे देंगे तो हौसला और बढ़ेगा

Video Master
09-01-2011, 12:23 PM
बहुत अच्छी प्रस्तुति ओर भी प्रस्तुत करे मेरी ओर से रेपुटेशन पॉइंट प्राप्त करे

knplko
09-01-2011, 12:46 PM
वर्ष की पहली सुबह

अभी होने दो
समय को
गीत कुछ दिन और

वक्त के बूढ़े कैलेंडर को
हटा दो
नया टाँगों
वर्ष की पहली सुबह से
बाँसुरी की धुनें माँगो

सुनो निश्चित
आम्रवन में
आएगा फिर बौर

बर्फ की घटनाएँ
थोड़ी देर की हैं
धूप होंगी
खुशबुओं के टापुओं पर
टिकेगी फिर परी-डोंगी

साँस की
यात्राओं को दो
वेणुवन की ठौर

अभी बाकी
है अलौकिकता
हमारे शंख में भी
और बाकी हैं उड़ानें
सुनो, बूढ़े पंख में भी

इन थकी
पिछली लयों पर भी
करो तुम गौर

knplko
09-01-2011, 12:47 PM
p`jaatM~–p`aMgaNa maoM Bagavana Ajaba tmaaSaa haoiryaa.
gaNapit baPpa maaoiryaa
gaaMQaIjaI ka ica~ lagaakr¸ janagaNa Qana pr DalaoM Daka¸
jaanao kba kursaI iCna jaae¸ ifr kOsao jaIeMgao kaka.
KaolaoMgao Agalao caunaava maoM¸ Bar laoM Aaja itjaaoiryaaM
gaNapit baPpa maaoiryaaÑ
gaalaaoM pr Ca[- hO laalaI¸ caohra dmak rha jyaaoM dp-Na
yao saÔod DakU hOM¸ hrigaja, nahIM kroMgao Aa%masamap-Na
ijatnao phrodar baZ, rho¸ ]tnaI haotI caaoiryaaM
gaNapit baPpa maaoiryaaÑ
saccao svatM~ta saonaanaI¸ 'tama`p~' kao caaT rho hOM¸
jaalaI saiT-iÔkoT banaakr¸ camacao caaMdI kaT rho hOM.
kUTnaIit kI ipcakarI sao¸ Kola rho hOM haoiryaaM¸
gaNapit baPpa maaoiryaaÑ
fsT- @laasa 'ema ,e ,' irjao@T kr¸ lao laoM qaD- @laasa baI ,e ,kao¸
saahba nahIM CueMgao pOsaa¸ dao hja,ar do dao pI ,e ,kao.
janasaovaa ka lagaa mauKaOTa¸ daga dnaadna gaaoilayaaM¸
gaNapit baPpa maaoiryaaÑ
maako-iTMga kao jaayaM 'hjaUirna' sajakr sarkarI karaoM maoM¸
]nako dSa-na kao hao jaatI¸ BaID, [k{I baaja,araoM maoM.
iÔlmaI hIrao[na–saI lagatIM¸ yao raYT/Iya cakaoiryaaM¸
gaNapit baPpa maaoiryaaÑ
laD,ko laMbao baala baZ,aeM¸ kosa kTatI hOM knyaaeM¸
baoTo blaa]ja, pihna rho hOM¸ ibaiTyaa jaI laMugaI laTkaeM.
QaaoKo maoM pD, jaato 'kaka'¸ kao Caora kao CaoiryaaMÆ
gaNapit baPpa maaoiryaaÑ
[maanaI AÔsar kao naIcaovaalao bao[-maana banaa doM¸
laalaca ka poT/aola iCD,k kr¸ naOitkta maoM Aaga lagaa doM.
tU BaI Ka AaOr hmaoM iKlaa¸ yaa baaMQa ibastra–baaoiryaa¸
gaNapit baPpa maaoiryaaÑ

knplko
09-01-2011, 01:01 PM
तुझे देखने को ये दिल बेताब है
पर खिड़की पे खड़ा तेरा बाप है।

कभी इत्तेफ़ाक़ से जो नज़र मिल भी जाए
तो समझो सारा दिन खराब है।

कभी उसकी बहनें कबाब में हड्डी थीं
मगर अब हड्डी में फँसा कबाब है।

मुझे डरा धमका के सीधा कर लेंगे
तेरे भाइयों को आया ये ख्वाब है।

लाओ मेरे छुट्टे पैसे वापस कर दो
अभी चुकाना तुम्हें बहुत हिसाब है।

दिलबर क्या यही हैं तेरे प्यार की सौगातें?
बिखरे बाल, घिसे जूते, फटी जुर्राब है।

घर वाले गर पूछें कहाँ जा रही हो?
कहना सहेली की तबीयत खराब है।

आइ हो , दो चार घड़ियाँ बैठो तो सही
रिक्शे का ड्राइवर कौन सा नवाब है।

“राज” तुम खुद को समझते क्या हो?
याद उसका, यही मेरा जवाब है॥

devvrat
15-06-2011, 10:02 PM
तेरी यह कविता २००% सड़क छाप है |

devvrat
15-06-2011, 10:07 PM
कविता समलेंगिक संबंधो को उनकी हकीकत दिखाती है| यह इस विकृत-मानसिकता व पागलपन विरुध्द सटीक टिप्पणी है| बेबाकी के लिए धन्यवाद |

raj_mastana
19-06-2011, 02:22 AM
प्रकृति ने हर जीव को काम दिया है
ईश्वर ने मनुष्य को काम के साथ प्रेम दिया है
हे निष्ठुर इन्सान प्रेम के साथ सम्भोग कर
तेरा जीवन रस से भर जायेगा
रोम-रोम प्रफुल्लित हो जायेगा
अन्यथा देह शांत हो जायेगी
आत्मा बिन प्रेम, घुट के रह जायेगी
आत्म घुटन से जीवन मशीन बन जायेगा
शारीर भी सम्भोग का साथ नहीं दे पायेगा
देह संचालन के लिए भोजन जरूरी है
वासना शांति के लिए सम्भोग जरुरी है
आत्म संतुष्टि के लिए प्रेम जरूरी है