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View Full Version : हास्य कविताएँ



knplko
08-01-2011, 12:20 AM
हैरानी है इस बात पर कि
समलैंगिकों के मेल पर लोग
आजादी का जश्न मनाते हैं,
मगर किसी स्त्री पुरुष के मिलन पर
मचाते हैं शोर
उनके नामों की कर पहचान,
पूछतें हैं रिश्ते का नाम,
सभ्यता को बिखरता जताते हैं।
कहें दीपक बापू
आधुनिक सभ्यता के प्रवर्तक
पता नहीं कौन हैं,
सब इस पर मौन हैं,
जो समलैंगिकों में देखते हैं
जमाने का बदलाव,
बिना रिश्ते के स्त्री पुरुष के मिलन
पर आता है उनको ताव,
मालुम नहीं शायद उनको
रिश्ते तो बनाये हैं इंसानों ने,
पर नर मादा का मेल होगा
तय किया है प्रकृति के पैमानों ने,
फिर जवानी के जोश में हुए हादसों पर
चिल्लाते हुए लोग, क्यों बुढ़ाये जाते हैं।
———-
योगी कभी भोग नहीं करेंगे
किसने यह सिखाया है,
जो न जाने योग,
वही पाले बैठे हैं मन के रोग,
खुद चले न जो कभी एक कदम रास्ता
वही जमाने को दिखाया है।
जानते नहीं कि
भटक जाये योगी,
बन जाता है महाभोगी,
पकड़े जाते हैं जब ऐसे योगी
तब मचाते हैं वही लोग शोर
जिन्होंने शिष्य के रूप में अपना नाम लिखाया है।

knplko
08-01-2011, 12:24 AM
महंगाई को सस्ता समझ लिया,
विकास का उसे बस्ता समझ लिया,
अक्ल लेकर उधार की
चला रहे है भलाई करने की दुकान,
अपने घर आ रही दौलत का
बस, केवल एक रस्ता समझ लिया।
———-
जिनके पेट भरे हैं पकवानों से,
सजी हैं घर की महफिलें धनवानों से,
वह महंगाई से टूट रहे
लोगों का क्या दर्द समझेंगे।
बाज़ार से खरीदकर हथियार
करते हैं अल्मारी में बंद
वह पहरेदार
हिफाजत के लिये क्या लड़ेंगे।
जुबां से निकल रहे गरजते हुए बयान,
दिल में है बस,
अपनी दौलत, शौहरत और ताकत का ध्यान,
अपनी वातानुकूलित कारों का आराम छोड़कर
आम इंसान की तकलीफ का सच समझने के लिए
उबड़ खाबड़ सड़कों पर क्या पांव धरेंगे।

knplko
08-01-2011, 12:25 AM
कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है,


कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है,
मगर धरती की बेचेनी को बस बादल समझता है.
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ, तू मुझसे दूर कैसी है,
यह तेरा दील समझता है या मेरा दील समझता है.

मोहब्बत एक एहससों की पावन सी कहानी है,
कभी कबीरा दीवाना था, कभी मीरा दीवानी है.
यहाँ सब लोग कहते हैं मेरी आँखों में आनसूँ हैं,
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है.

समंदर पीर का अंदर है लेकीन रो नहीं सकता,
यह आनसूँ प्यार का मोती है, इसको खो नहीं सकता.
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले,
जो मेरा हो नहीं पाया, वो तेरा हो नहीं सकता.

भ्रमर कोई कुमुदिनी पर मचल बैठा तो हंगंगामा,
हुमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगंगामा.
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का,
मैं किससे को हक़ीक़त में बदल बैठा तो हंगंगामा

बहोट टूटा बहोट बिखरा थपेड़े सेह नही पाया,
ह्वाओ के ईसरो पर मगर मे बह नही पाया.
अधूरा अनसुना ही रह गया ये प्यार का कीस्सा,
कभी मे कह नही पाया कभी तुम सुन नही पाई।

knplko
08-01-2011, 12:37 AM
“मालिक ने बिजली मिस्त्री को अपने पास बुलाया,
पूछा शर्मा मेम साब के घर की घन्टी ठीक कर आया
इस कम्पलेन का नाम सुनते उस्अने गुस्से मे बोला
कैसे ठीक करता जब मेम साब ने दरवाजा नही खोला
फिर मिस्त्री ने अपनी आप बीती सुनायी
वो तो मेरा दिल हि जानता है श्रीमान जी कि
बिना खाये पिये मैने कितनी देर घन्टी बजायी “

knplko
08-01-2011, 12:39 AM
मैं शिकार हूँ किसी और का मुझे मारता कोई और है
मुझे जिसने बकरी बना दिया वो भेड़िया कोइ और है ।

कई सर्दियॉ भी ग़ुज़र गईं मैं उसके काम न आ सका
मैं लिहाफ़ हूँ किसी और का मुझे ओढ़ता कोई और है ।

मुझे चक्करों में फँसा दिया मुझे इश्क ने तो रुला दिया
मैं माँग हुँ किसी और का मुझे मांगता कोइ और है ।

मेरे रोब में तो वो आ गया मेरे सामने तो वो झुक गया
मुझे पिट के ये ख़बर हुई मुझे पीटता कोइ और है ।

जो गरजते हैं वो बरसते हों कभी हम ने ऐसा सुना नहीं
यहाँ भोंकता कोइ और है और काटता कोइ और है ।

अज़ब आदमी है ये “राज” भी उसे बेक़सूर ही जानिए
ये डाकिया है जनाबे मन, इसे भेजता कोइ और है ।

knplko
08-01-2011, 03:32 PM
संता किसी लड़की के घर रिश्ता लेकर गया।
लड़की के मां-बाप बोले – “हमारी बेटी तो अभी पढ़ाई कर रही है।”
संता बोला – “कोई बात नहीं जी, हम एक घंटे बाद आ जाएंगे।”

knplko
08-01-2011, 03:36 PM
एक घुटे हुए नेता ने
छँटे हुए शब्दों में
भावुक तकरीर दी,
भीड़ भावनाओं से चीर दी।
फिर मानव कल्याण के लिए
दिल खोल दान के लिए
अपनी टोपी घुमवाई,
पर अफ़सोस
कि खाली लौट आई।
टोपी को देखकर
नेता जी बोले-
अपमान जो होना है सो हो ले।
पर धन्यवाद,
आपकी इस प्रतिक्रिया से
प्रसन्नता छा गई,
कम से कम
टोपी तो वापस आ गई।

knplko
08-01-2011, 03:37 PM
' तीन छोटी कवितायेँ ''
{ १}
एक शब्द नहीं बोली
रख लिया पत्थर
ह्रदय पे
वेदना सब कुछ कह गए
शब्द
आँखों से खीर खीर !


{ २ }
नन्ही बूंदें
अब भी अपना अस्तित्व
दर्शा रही है
टीलों के मुहानों पर
मानों, मुख चूम रही हो
तब तक
जब तक पांवों से अछूती रहे !

{३}
ढेरों
पीपल के टूटे पत्ते
पानी पे यू आलिंगंबध
मानो ,
सहला रहे
मलहम लगा रहे हो
तालाब दिन भर
चिलचिलाती धुप में
कितना जला है बेचारा !

knplko
08-01-2011, 03:37 PM
एक बार
बरखुरदार!
एक रुपए के सिक्के
और पाँच पैसे के सिक्के में
लड़ाई हो गई,
पर्स के अंदर
हाथापाई हो गई।
जब पाँच का सिक्का
दनदना गया
तो रुपया झनझना गया-
पिद्दी न पिद्दी की दुम
अपने आपको
क्या समझते हो तुम!
मुझसे लड़ते हो,
औक़ात देखी है
जो अकड़ते हो!
इतना कहकर मार दिया धक्का,
सुबकते हुए बोला
पाँच का सिक्का-
हमें छोटा समझकर
दबाते हैं,
कुछ भी कह लें
दान-पुन्न के काम तो
हम ही आते हैं।

knplko
08-01-2011, 03:39 PM
प्यारे कृष्ण कन्हैया
कलयुग में अब ना आना रे प्यारे कृष्ण कन्हैया
तुम बलदाऊ के भाई यहाँ हैं दाउद के भैया।।
दूध दही की जगह पेप्सी, लिम्का कोकाकोला
चक्र सुदर्शन छोड़ के हाथों में लेना हथगोला
काली नाग नचैया। कलयुग में अब. . .।।
गोबर को धन कहने वाले गोबर्धन क्या जानें
रास रचाते पुलिस पकड़ कर ले जाएगी थाने
लेन देन करके फिर छुड़वाएगी जसुमति मैया।
कलयुग में अब. . .।।
नंद बाबा के पास गाय की जगह मिलेंगे कुत्ते
औ कदंब की डार पे होंगे मधुमक्खी के छत्ते
यमुना तट पर बसी झुग्गियों में करना ता थैया।
कलयुग में अब. . .।।
जीन्स और टीशर्ट डालकर डिस्को जाना होगा
वृंदावन को छोड़ क्लबों में रास रचाना होगा
प्यानो पर धुन रटनी होगी मुरली मधुर बजैया।
कलयुग में अब. . .।।
देवकी और वसुदेव बंद होंगे तिहाड़ के अंदर
जेड श्रेणी की लिए सुरक्षा होंगे कंस सिकंदर
तुम्हें उग्रवादी कह करके फसवा देंगे भैया
कलयुग में अब. . .।।
विश्व सुंदरी बनकर फ़िल्में करेंगी राधा रानी
और गोपियाँ हो जाएँगी गोविंदा दीवानी
छोड़के गोकुल औ' मथुरा बनना होगा बंबइया।
कलयुग में अब. . .।।
साड़ी नहीं द्रौपदी की अब जीन्स बढ़ानी होगी
अर्जुन का रथ नहीं मारुति कार चलानी होगी
ईलू-ईलू गाना होगा गीता गान गवैया।
कलयुग में अब. . .।।
आना ही है तो आ जाओ बाद में मत पछताना
कंप्यूटर पर गेम खेलकर अपना दिल बहलाना
दुर्योधन से गठबंधन कर बनना माल पचइया।
कलयुग में अब. . .।।

knplko
08-01-2011, 03:50 PM
किसी गीता से न कुरआँ से अदा होती है
न बादशाहों की दौलत से अता होती है
रहमतें सिर्फ़ बरसती हैं उन्हीं लोगों पर
जिनके दामन में बुज़ुर्गों की दुआ होती है।
हर इक मूरत ज़रूरत भर का पत्थर ढूँढ लेती है
कि जैसे नींद अपने आप बिस्तर ढूँढ लेती है
चमन में फूल खिलता है तो भौंरें जान जाते हैं
नदी खुद अपने कदमों से समंदर ढूँढ लेती है।
लगे हैं फ़ोन जब से तार भी नहीं आते
बूढ़ी आँखों के मददगार भी नहीं आते
गए हैं जब से कमाने को शहर में लड़के
हमारे गाँव में त्यौहार भी नहीं आते।

knplko
08-01-2011, 04:05 PM
राजनीति
राजनीति की गलियाँ
बड़ी संकरी हो गई है,
आम जनता खूँटे से बँधी
बकरी हो गई है,
चुनाव के त्यौहार तक
मतदान के वार तक
खिला-पिलाकर
लाल करते हैं,
वायदों की छुरी से
हलाल करते हैं।

knplko
09-01-2011, 11:45 AM
धन्यवाद आप की शब्द हमें आगे भी यहाँ कुछ निया करने की प्रेरणा देते रहेंगे साथ मैं अगर आप reuptation दे देंगे तो हौसला और बढ़ेगा

gopu
17-01-2011, 09:17 PM
प्यारे कृष्ण कन्हैया
कलयुग में अब ना आना रे प्यारे कृष्ण कन्हैया
तुम बलदाऊ के भाई यहाँ हैं दाउद के भैया।।
दूध दही की जगह पेप्सी, लिम्का कोकाकोला
चक्र सुदर्शन छोड़ के हाथों में लेना हथगोला
काली नाग नचैया। कलयुग में अब. . .।।
गोबर को धन कहने वाले गोबर्धन क्या जानें
रास रचाते पुलिस पकड़ कर ले जाएगी थाने
लेन देन करके फिर छुड़वाएगी जसुमति मैया।
कलयुग में अब. . .।।
नंद बाबा के पास गाय की जगह मिलेंगे कुत्ते
औ कदंब की डार पे होंगे मधुमक्खी के छत्ते
यमुना तट पर बसी झुग्गियों में करना ता थैया।
कलयुग में अब. . .।।
जीन्स और टीशर्ट डालकर डिस्को जाना होगा
वृंदावन को छोड़ क्लबों में रास रचाना होगा
प्यानो पर धुन रटनी होगी मुरली मधुर बजैया।
कलयुग में अब. . .।।
देवकी और वसुदेव बंद होंगे तिहाड़ के अंदर
जेड श्रेणी की लिए सुरक्षा होंगे कंस सिकंदर
तुम्हें उग्रवादी कह करके फसवा देंगे भैया
कलयुग में अब. . .।।
विश्व सुंदरी बनकर फ़िल्में करेंगी राधा रानी
और गोपियाँ हो जाएँगी गोविंदा दीवानी
छोड़के गोकुल औ' मथुरा बनना होगा बंबइया।
कलयुग में अब. . .।।
साड़ी नहीं द्रौपदी की अब जीन्स बढ़ानी होगी
अर्जुन का रथ नहीं मारुति कार चलानी होगी
ईलू-ईलू गाना होगा गीता गान गवैया।
कलयुग में अब. . .।।
आना ही है तो आ जाओ बाद में मत पछताना
कंप्यूटर पर गेम खेलकर अपना दिल बहलाना
दुर्योधन से गठबंधन कर बनना माल पचइया।
कलयुग में अब. . .।।

सुन्दर अति सुन्दर

surendra patel
19-02-2011, 11:13 PM
very nice mere bhai :salut::salut:...................... kya aap mujhe koi aur site bata sakte hai jaha per aap jase vidvaan logo ka darshan ho jae. wait for good reply...surendralucky101@yahoo.com:tiranga:

SUNIL1107
14-03-2011, 06:48 PM
प्यारे कृष्ण कन्हैया
कलयुग में अब ना आना रे प्यारे कृष्ण कन्हैया
तुम बलदाऊ के भाई यहाँ हैं दाउद के भैया।।
दूध दही की जगह पेप्सी, लिम्का कोकाकोला
चक्र सुदर्शन छोड़ के हाथों में लेना हथगोला
काली नाग नचैया। कलयुग में अब. . .।।
गोबर को धन कहने वाले गोबर्धन क्या जानें
रास रचाते पुलिस पकड़ कर ले जाएगी थाने
लेन देन करके फिर छुड़वाएगी जसुमति मैया।
कलयुग में अब. . .।।
नंद बाबा के पास गाय की जगह मिलेंगे कुत्ते
औ कदंब की डार पे होंगे मधुमक्खी के छत्ते
यमुना तट पर बसी झुग्गियों में करना ता थैया।
कलयुग में अब. . .।।
जीन्स और टीशर्ट डालकर डिस्को जाना होगा
वृंदावन को छोड़ क्लबों में रास रचाना होगा
प्यानो पर धुन रटनी होगी मुरली मधुर बजैया।
कलयुग में अब. . .।।
देवकी और वसुदेव बंद होंगे तिहाड़ के अंदर
जेड श्रेणी की लिए सुरक्षा होंगे कंस सिकंदर
तुम्हें उग्रवादी कह करके फसवा देंगे भैया
कलयुग में अब. . .।।
विश्व सुंदरी बनकर फ़िल्में करेंगी राधा रानी
और गोपियाँ हो जाएँगी गोविंदा दीवानी
छोड़के गोकुल औ' मथुरा बनना होगा बंबइया।
कलयुग में अब. . .।।
साड़ी नहीं द्रौपदी की अब जीन्स बढ़ानी होगी
अर्जुन का रथ नहीं मारुति कार चलानी होगी
ईलू-ईलू गाना होगा गीता गान गवैया।
कलयुग में अब. . .।।
आना ही है तो आ जाओ बाद में मत पछताना
कंप्यूटर पर गेम खेलकर अपना दिल बहलाना
दुर्योधन से गठबंधन कर बनना माल पचइया।
कलयुग में अब. . .।।
अच्छा व्यंग है मित्र और भी प्रविष्टी डालो !

Nisha.Patel
19-04-2011, 04:53 PM
पिताजी ने बेटे को बुलाया पास में बिठाया,
बोले आज राज की मैं बात ये बताऊंगा।
शादी तो है बरबादी मत करवाना बेटे,
तुमको किसी तरह मैं शादी से बचाऊंगा।
बेटा मुस्कुराया बोला ठीक फरमाया डैड,
मौका मिल गया तो मैं भी फर्ज ये निभाऊंगा।
शादी मत करवाना तुम कभी जिन्दगी में,
मैं भी अपने बच्चों को यही समझाऊंगा।

Nisha.Patel
19-04-2011, 04:54 PM
एक नए अखबार वाले सर्वे कर रहे थे
मैंने कहा मैं भी खूब अखबार लेता हूं
जागरण, भास्कर, केसरी ओ हरिभूमि
हिन्दी हो या अंगरेजी सबका सच्चा क्रेता हूं
पत्रकार बोला इतनों को कैसे पढ़ते हैं
मैंने कहा ये भी बात साफ कर देता हूं
पढ़ने का तो कोइ भी प्रश्न ही नहीं है साब
मैं कबाड़ी हूं पुराने तोलकर लेता हूं

Nisha.Patel
19-04-2011, 04:54 PM
एक हास्य कवि जी के पास एक नेता आया
बोला हॅंसाने की कला हमें भी सिखाइए
कवि ने कहा कि योगासन है अलग मेरा
सुबह सुबह चार घंटे आप भी लगाइए
बुद्धि तीव्र हो जाएगी नाचने लगेगा मन
सीख लीजिए ना व्यर्थ समय गवांइए
नेताजी ने कहा कविराज बतलाओ योग
कवि बोला यहां आके मुर्गा बन जाइए

Nisha.Patel
19-04-2011, 04:56 PM
जीवन का किसी क्षण कोई भी भरोसा नहीं
जोखिम ना आप यूं अकेले ही उठाइए
सबसे सही है राह फैलाए खड़ी है बांह
बीमा कम्पनी को इस जाल में फंसाइए
पति पत्नी से बोला फायदे का सौदा है ये
प्रिय आप भी जीवन बीमा करवाइए
पत्नी बोली करवा रखा है आपने जनाब
उससे कोई फायदा हुआ हो ता बताइए

Nisha.Patel
19-04-2011, 04:57 PM
उस रात मैं बहुत डर रहा था
क्योंकि मैं एक कब्रिस्तान के पास से गुजर रहा था
एक तो मौसम बदहाल था
और दूसरा गर्मी से मेरा बुरा हाल था
अचानक मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं
जब मेरी नजरें कब्र पर बैठे एक आदमी पर चढं गईं
मैंने कहा इतनी रात को यहां से कोई
भूलकर भी नहीं फटकता
यार तू कब्र पर बैठा है
तुझे डर नहीं लगता
मेरी बात सुनते ही वो ऐंठ गया
बोला इसमें डरने की क्या बात है
कब्र में गरमी लग रही थी,
इसलिए बाहर आके बैठ गया

Nisha.Patel
19-04-2011, 04:58 PM
गम जुदाई सब साथ कर गया
अच्छे अच्छों को माफ कर गया
मैंने सोचा दिल पर रख रहा है हाथ
कमबख्त जेब साफ कर गया

Nisha.Patel
19-04-2011, 05:04 PM
आपके जीवन में वो आई नहीं, पर फील गुड
आपने कोई खुशी देखी नहीं, पर फील गुड

डिग्रियाँ हैं पास में देने को पर रिश्वत नहीं
नौकरी ढूँढ़ें से भी मिलती नहीं, पर फील गुड

घर का राशन ख़त्म है तो क्या हुआ उपवास रख
जेब में फूटी भी इक कौड़ी नहीं, पर फील गुड

घूस लेकर भी पुलिस का छोड़ देना कम है क्या ?
तेरी नज़रों में पुलिस अच्छी नहीं, पर फील गुड

कल थे जो उस पार्टी में आज इसमें आ गए
कुछ समझ में बात ये आई नहीं, पर फील गुड

देश क़र्जों में धँसा है, भ्रष्टता है चरम पर
बात तुमने ये कभी सोची नहीं, पर फील गुड

आप जनता हैं समय की आपको परवाह क्या
ट्रेन टाइम से कभी आती नहीं, पर फील गुड

एक ने मंडल बनाए, एक ने बंडल किए
बात दोनों की हमें भाई नहीं, पर फील गुड

नाम इक दिन आएगा इतिहास में ‘अनमोल’ का
आज इसको जानता कोई नहीं, पर फील गुड

Nisha.Patel
19-04-2011, 05:06 PM
तारीफ़ के पुल
वह प्रारम्भ से ही बाँधते हैं,
अब हो गए हैं,
इस क्षेत्र में कुछ सीनियर,
इसीलिए हैं
‘ब्रिज-कारपोरेशन’ में इंजीनियर।






जनता के दुख-दर्द से
सर्वथा अनभिज्ञ हैं,
इसीलिए बड़े
राजनीतिज्ञ हैं।

Nisha.Patel
19-04-2011, 05:08 PM
हमसे पूछा गया—
‘किन्हीं दो फ़सलों के नाम बताएँ
स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद लगातार
बढ़ रही हो जिनकी पैदावार।’
हमने कहा—‘भ्रष्टाचार व आतंकवाद’।




मंत्री जी से पूछा गया—
‘अपने जीवन का
कोई महत्वपूर्ण झूठ बताइए।’
वो बोले—
‘मेरे भाषणों की प्रतियाँ ले जाइए।’

Nisha.Patel
19-04-2011, 05:10 PM
उन्होंने देश बचाओ का नारा दिया
और कहा सभ्रांत नागरिकों के बीच—
कि कोई भी देशद्रोही नाग,
सांप्रदायिक, आदमख़ोर बाघ, तस्कर भ्रष्टाचारी
आपको दिखे तो हमें दिखाएँ, देश बताएँ !
एक व्यक्ति ने
उनकी इच्छापूर्ति का अनोखा उपाय किया—

उन्हें दर्पण दिखा दिया।



एक दयनीय भिखारी को
अपने सम्मुख
भिक्षापात्र पसारे देख मि. श्री ने कहा—
‘सुख-सुविधाओं से दामन भिगोता,
हे भिखारी, काश ! तू भी मंत्री होता।’
भिखारी बोला—
‘श्रीमन, महोदय,
अंतर मात्र इतना आता,
अब यह कटोरा आपके सम्मुख
पसार रहा हूँ,
तब विदेशी के सम्मुख फैलाता।’:pointlol:

Nisha.Patel
19-04-2011, 05:13 PM
प्रजातंत्र की परिषाभा दीजिए।
हमने कहा—
भीतर गाली-गलोच,
वीभत्स रस का खुला उपयोग,
ऊपर समाज-सेवी और
राष्ट्रभक्ति का चोचला,

एक-दूसरे की ओछी आलोचना।
विकास के नाम पर मात्र विवाद
या फिर दंगा-फ़साद
और जहाँ वोटों पर बलिहारी
रहती हो राजनीति बेचारी,
यही वह तंत्र है, सच्चा प्रजातंत्र है।

Nisha.Patel
19-04-2011, 05:16 PM
"मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बनाने वाली हूँ",
अगर रिश्ता पति पत्नी,
तो खबर ख़ुशी की,
अगर लैला मजनू,
तो लग गयी वाट !
कभी कभी जिंदगी में,
घटनाओं से ज्यादा,
मायने रखते 'मजाल',
उनके हालत !

Nisha.Patel
19-04-2011, 05:22 PM
अंड बंड : मेरी वो, तेरी वो, कौन वो !


दिन का, शाम का रातों का,
ख़ुशी का ग़म का, जस्बातों का,
मतलब क्या होता सब बातों का ?
'मजाल' मतलब वही, जो तुम निकाल लो !

एक था चीनी,
नाम था 'क्वान वोह'
गया वो अमेरिका,
पाने कुछ काम वो !

काम न मिला,
मिली गर्मी दोपहरी,
पीछे पड़ गयी दो बहने
टैरी और मैरी !

भाग के आ गया 'वोह'
अमेरिका से भारत,
पीछे आई दोनों बहनें,
शुरू हो गयी महाभारत!

कैसे निभाता वोह,
परिस्थिति अब ऐसी,
दो दो बीवी उसकी,
टैरी और मैरी !

कोई पूछे, कह देता,
अब जो है, सो है,
ये 'टैरी वोह' है,
और ये 'मैरी वोह' है !

दुनिया आफत का जंगल सही,
बिन बातों का बतंगड़ सही,
दंगल को मान मंगल सही,
लड़ाई में भी मज़ा निकाल लो !

अब बहनों की सोच,
थी बच्चो के माफिक,
शहरों की गलियों से,
थी वो ना वाकिफ,

भूल जाती थी,
रास्ता आए दिन,
मुसीबत वोह की,
आती थी बुलाए बिन !

" 'मैरी वोह' खो गयी !"
' हैं ! तेरी 'वो' खो गयी !'
" 'टैरी वो' नहीं खोई,
'मैरी वोह' खो गयी ! "

'हाँ हाँ, समझ गए,
खो गयी है तेरी 'वो' !'
'ना जी, खोई तो है 'मैरी वोह',
'मैरी वोह' और न की टैरी वोह' !'
'हैं... ?! '

कभी खो जाती थी 'टैरी वोह',
कभी गुम जाती थी 'मैरी वोह',
हालत जैसे चाहे, जो भी हों,
मुफ्त मर जाता था 'क्वान वोह' !

" 'टैरी वोह' खो गयी !"
' हैं ! मेरी 'वो' कहाँ खोई ?'
'' 'मैरी वोह' नहीं खोई,
'टैरी वो' खो गयी !

" कहीं नहीं खोई 'मेरी वो' ,
मौजूं है मेरे ही घर में 'वो' .."
पर अभी तो मेरे घर में थी !'
''मेरी 'वो' तेरे घर क्या करती ?!'

'वो सब छोड़ो ,
पहले 'टैरी वोह' को ढूँढो !'
'अरे, जब खोई ही नहीं,
तो क्या ढूँढो ?! "
"अरे, खो गयी है 'टैरी वो' "
कहा ना, है मेरे घर में 'वो'
'अभी तो कहा था,
घर में है 'मेरी वोह' !'
'है .. ?! '

अपना लो जो भी हथकंडा है,
नतीजा जीवन का बस अंडा है,
इसलिए भाई का सीधा सा फंडा है,
जहाँ मिले मौका, हँसी निकाल लो !

Nisha.Patel
19-04-2011, 05:31 PM
लाल बत्ती, हरी बत्ती


लाल बत्ती पर हमारी गाड़ी रुकी हुई थी,
सामने थी एक हसीना,
नज़रे उसी पर गढ़ी हुई थी,
थोड़ी महोलत थी, तो निभा रहे थे,
अधूरे ही सही, दिल में मंसूबे बना रहे थे !

तभी पीछे से एक स्कूटी वाला आया,
कट मारा ऐसा,
खुदा ने ही बाल बाल बचाया,
हमने देखा आसमान की तरफ,
तो मानो सूरज मुस्काया,
"क्यों बच्चू, और टापेगा? अब मज़ा आया ?!"

पट्ठे को शायद, कुछ ज्यादा ही जल्दी थी,
जरूरत से ज्यादा जोश दिखाया.
न देखा आव, न ताव ,
पूरी रफ्त्तार में स्कूटी भगाया,
आगे बत्ती पर रुका था एक पहलवान मुस्टंडा,
उसको टकराके, गिराते हुए,
स्कूटी वाला भाई, आगे निकल आया !

पहलवान भाई पहले संभाला, फिर गुर्राया,
"ओं तेरी की ! रूक !", पूरी रफ़्तार से,
अपनी फटफटिया को, स्कूटी के पीछे दौड़ाया,
पीछा कर उसको दबोचा, और जड़ दिया घूँसा,
स्कूटी वाले जनाब को, उनके हेलमेट ने,
जहाँ तक संभव हो सका, बचाया !

बाईक पटकी एक तरफ फिर,
और गालियों का ताँताँ लगाया,
एक से बढ़ के एक चुनिन्दा सुनाई,
गोया मस्तराम ने ग़ालिबाना अंदाज़ पाया !

अब एक तरफ सीकिये की सिफारिश ,
दूसरी तरफ पहलवान की बदले की रट,
एक तरफ पिद्धि स्कूटी,
दूसरी तरफ भयंकर बुललल्लट !
हमने सोचा, आज तो लग गयी,
स्कूटी वाले भैया की नैया तट !

सब लोगों की उत्सुकता भी बढ़ गयी थी,
मुफ्त की फिल्म थी, सबने टिकट कटवाया !
पर बेचोरों का मज़ा किरकिरा हो गया,
जोहीं स्कूटी वाले ने अपना हेल्मट हटाया,
" ओए बिट्टू तू !!! ", स्कूटी वाला चिल्लाया !
कमबख्त किस्मत हो तो ऐसी,
बुलटिया पहलवान सींकिया का,
पुराना लंगोटिया निकल आया !

अब तो नजारा ही बदला हुआ था,
प्यार की प्यार उमड़ रहा था,
पहलवान का चेहरा ख़ुशी और शर्मिंदगी के,
विचित्र मिश्रण से चमक रहा था !

शर्मिंदगी कुछ ज्यादा पनपती दिखी,
शायद सोच रहा था,
भाई पे खांमखां हाथ उठाया,
जो कर लेता थोडा इंतज़ार,
तो बला खुद ब खुद टल जाती,
कितनी देर टिकती आखिर,
गुस्से की लाल बत्ती,
थोडा सब्र करते 'मजाल' ,
तबीयत और बत्ती,
दोनों अपने आप हरी हो जाती !

जिंदगी के अन्दर एक अजीब सी बेकरारी है,
अन्दर घुटती है, बेकाबू हो जाती है,
जो लगता प्यार, और कभी दिखता है फसाद,
वो दरअसल है,
फ़क्त,
दबी हुई खवाहिशें जिस्म की ,
जो बाहर आना चाहती हैं,
जीना चाहती है खुद को,
थोड़ी ताज़ी हवा खाना चाहती है ....

इसलिए कहते है जनाब,
जिंदगी को जरा करीब से आजमाइए,
हर पहलवान में, छुपा है एक 'बिट्टू',
उसको जरा उभार कर लाइए !
गोली मारनी है तो, मारिये फसाद को,
और सुकूँ की ताउम्र कैद का लुत्फ़ उठाइये !

तो सौ बात की एक बात,
जब हो अरमानों की तादाद,
और तय न कर पाएँ आप,
बीच प्यार या फसाद,
तो गले मिलिए हजूर,
कीजिये खाक रंजिश को,
नतीजा 'मजाल',
सोचते रहिएगा बाद !

sushilnkt
19-04-2011, 05:39 PM
लाल बत्ती, हरी बत्ती


लाल बत्ती पर हमारी गाड़ी रुकी हुई थी,
सामने थी एक हसीना,
नज़रे उसी पर गढ़ी हुई थी,
थोड़ी महोलत थी, तो निभा रहे थे,
अधूरे ही सही, दिल में मंसूबे बना रहे थे !

तभी पीछे से एक स्कूटी वाला आया,
कट मारा ऐसा,
खुदा ने ही बाल बाल बचाया,
हमने देखा आसमान की तरफ,
तो मानो सूरज मुस्काया,
"क्यों बच्चू, और टापेगा? अब मज़ा आया ?!"

पट्ठे को शायद, कुछ ज्यादा ही जल्दी थी,
जरूरत से ज्यादा जोश दिखाया.
न देखा आव, न ताव ,
पूरी रफ्त्तार में स्कूटी भगाया,
आगे बत्ती पर रुका था एक पहलवान मुस्टंडा,
उसको टकराके, गिराते हुए,
स्कूटी वाला भाई, आगे निकल आया !

पहलवान भाई पहले संभाला, फिर गुर्राया,
"ओं तेरी की ! रूक !", पूरी रफ़्तार से,
अपनी फटफटिया को, स्कूटी के पीछे दौड़ाया,
पीछा कर उसको दबोचा, और जड़ दिया घूँसा,
स्कूटी वाले जनाब को, उनके हेलमेट ने,
जहाँ तक संभव हो सका, बचाया !

बाईक पटकी एक तरफ फिर,
और गालियों का ताँताँ लगाया,
एक से बढ़ के एक चुनिन्दा सुनाई,
गोया मस्तराम ने ग़ालिबाना अंदाज़ पाया !

अब एक तरफ सीकिये की सिफारिश ,
दूसरी तरफ पहलवान की बदले की रट,
एक तरफ पिद्धि स्कूटी,
दूसरी तरफ भयंकर बुललल्लट !
हमने सोचा, आज तो लग गयी,
स्कूटी वाले भैया की नैया तट !

सब लोगों की उत्सुकता भी बढ़ गयी थी,
मुफ्त की फिल्म थी, सबने टिकट कटवाया !
पर बेचोरों का मज़ा किरकिरा हो गया,
जोहीं स्कूटी वाले ने अपना हेल्मट हटाया,
" ओए बिट्टू तू !!! ", स्कूटी वाला चिल्लाया !
कमबख्त किस्मत हो तो ऐसी,
बुलटिया पहलवान सींकिया का,
पुराना लंगोटिया निकल आया !

अब तो नजारा ही बदला हुआ था,
प्यार की प्यार उमड़ रहा था,
पहलवान का चेहरा ख़ुशी और शर्मिंदगी के,
विचित्र मिश्रण से चमक रहा था !

शर्मिंदगी कुछ ज्यादा पनपती दिखी,
शायद सोच रहा था,
भाई पे खांमखां हाथ उठाया,
जो कर लेता थोडा इंतज़ार,
तो बला खुद ब खुद टल जाती,
कितनी देर टिकती आखिर,
गुस्से की लाल बत्ती,
थोडा सब्र करते 'मजाल' ,
तबीयत और बत्ती,
दोनों अपने आप हरी हो जाती !

जिंदगी के अन्दर एक अजीब सी बेकरारी है,
अन्दर घुटती है, बेकाबू हो जाती है,
जो लगता प्यार, और कभी दिखता है फसाद,
वो दरअसल है,
फ़क्त,
दबी हुई खवाहिशें जिस्म की ,
जो बाहर आना चाहती हैं,
जीना चाहती है खुद को,
थोड़ी ताज़ी हवा खाना चाहती है ....

इसलिए कहते है जनाब,
जिंदगी को जरा करीब से आजमाइए,
हर पहलवान में, छुपा है एक 'बिट्टू',
उसको जरा उभार कर लाइए !
गोली मारनी है तो, मारिये फसाद को,
और सुकूँ की ताउम्र कैद का लुत्फ़ उठाइये !

तो सौ बात की एक बात,
जब हो अरमानों की तादाद,
और तय न कर पाएँ आप,
बीच प्यार या फसाद,
तो गले मिलिए हजूर,
कीजिये खाक रंजिश को,
नतीजा 'मजाल',
सोचते रहिएगा बाद !
बहुत ही सुन्दर हास्य कविताएं आप की

munmun babita
19-04-2011, 08:20 PM
बहुत ही अछा सूत्र हे निशा जी लगे रहो

Nisha.Patel
20-04-2011, 01:51 PM
लोकल ट्रेन से उतरते ही
हमने सिगरेट जलाने के लिए
एक साहब से माचिस माँगी
तभी किसी भिखारी ने
हमारी तरफ हाथ बढ़ाया
हमने कहा-
"भीख माँगते शर्म नहीं आती?"


वो बोला-
"माचिस माँगते आपको आयी थी क्*या?"


बाबूजी! माँगना देश का करेक्*टर है
जो जितनी सफाई से माँगे
उतना ही बड़ा एक्*टर है|

ये भिखारियों का देश्*ा है
लीजिए! भिखारियों की लिस्*ट पेश है--

धंधा माँगने भिखारी
चंदा माँगने वाला
दाद माँगने वाला
औलाद माँगने वाला
दहेज माँगने वाला
नोट माँगने वाला
और तो और
वोट माँगने वाला|

हमने काम माँगा
तो लोग कहते हैं चोर है
भीख माँगी तो कहते हैं
कामचोर है|

उन्हें कुछ नहीं कहते
जो एक वोट के लिए
दर-दर नाक रगड़ते हैं
घिस जाने पर रबर की खरीद लाते हैं|

और उपदेशों की पोथियाँ खोलकर
महंत बन जाते हैं।
लोग तो एक बिल्*ला से परेशान हैं
यहाँ सैकड़ों बिल्*ले
खरगोश की खाल में देश के हर कोने में विराजमान हैं।

हम भिखारी ही सही
मगर राजनीति समझते हैं
रही अखबार पढ़ने की बात
तो अच्*छे-अच्*छे लोग
माँग कर पढ़ते हैं|

समाचार तो समाचार
लोग बाग पड़ोसी से
अचार तक माँग लाते हैं
रहा विचार!
तो वह बेचारा
महँगाई के मरघट में
मुद्दे की तरह दफन हो गया है।

समाजवाद का झंडा
हमारे लिए कफन हो गया है
कूड़ा खा रहे हैं और बदबू पी रहे हैं
उनका फोटो खींचकर
फिल्*म वाले लाखों कमाते हैं
झोपड़ी की बात करते हैं
मगर जुहू में बँगला बनवाते हैं।

हमने कहा "फिल्*म वालों से
तुम्*हारा क्*या झगड़ा है ?"

वो बोला-
"आपके सामने भिखारी नहीं
भूतपूर्व प्रोड्यूसर खड़ा है
बाप का बीस लाख फूँक कर
हाथ में कटोरा पकड़ा!"

हमने पाँच रुपए उसके
हाथ में रखते हुए कहा-
"हम भी फिल्*मों में ट्राई कर रहे हैं !"
वह बोला, "आपकी रक्षा करें दुर्गा माई
आपके लिए दुआ करूँगा
लग गई तो ठीक
वरना आपके पाँच में अपने पाँच मिला कर
दस आपके हाथ पर धर दूँगा !"

Pooja1990 QUEEN
23-04-2011, 02:27 PM
हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा
हा हा हा हा हा हा हा

arihantshah
23-04-2011, 07:32 PM
बढ़िया सूत्र बनाया हे आपने निशाजी

jalwa
27-04-2011, 02:29 PM
एक कविता एहसान कुरैशी के अंदाज में.....
निशा जी निशा जी कवितायेँ सुनाएंगी क्या,
कविता सुनाकर सबको हंसाएंगी......... क्या,
हँसते हँसे पेट दुःख जाएगा सबका..
पेट दुखाकर सबको रुलाएंगी क्या.

mr josef
27-04-2011, 03:24 PM
:tiranga::clap::clap::salut:

Black Pearl
27-04-2011, 03:53 PM
मेरा कुत्ता भी Facebook पर है
]मेरी काम वाली बाई, एक दिन अचानक काम पर नहीं आई,
तो पत्नी ने phone पर डांट लगाईं अगर तुझे आज नहीं आना था,
तो पहले बताना था,
वह बोली - मैंने तो परसों ही Facebook पर लिख दिया था क़ि एक सप्ताह के लिए Goa जा रही हूँ
पहले update रहो
फिर भी पता न चले तो कहो
पत्नी बोली = तो तू Facebook पर भी है उसने जवाब दिया -
मै तो बहुत पहले से Facebook पर हूँ साहब मेरे friend हैं !
बिलकुल नहीं झिझकते हैं मेरे प्रत्येक update पर बिंदास comment लिखते हैं
मेरे इस update पर उन्होंने कमेन्ट लिखा Happy Journey, Take care, I miss you, जल्दी आना.
मुझे नहीं भाएगा पत्नी के हाथ का खाना
इतना सुनते ही मुसीबत बढ़ गयी.
पत्नी ने phone बंद किया और मेरी छाती पर चढ़ गयी.
गब्बर सिंह के अंदाज़ में बोली - तेरा क्या होगा रे कालिया !
मैंने कहा -देवी ! मैंने तेरे साथ फेरे खाए हैं वह बोली - तो अब मेरे हाथ का खाना भी खा !
अचानक दोबारा phone करके पत्नी ने काम वाली बाई से पूछा, घबराये-घबराए
तेरे पास Goa जाने के लिए पैसे कहाँ से आये ?
वह बोली- सक्सेना जी के साथ LTC पर आई हूँ
पिछले साल वर्माजी के साथ उनकी कामवाली बाई गयी थी तब मै नई-नई थी जब
मैंने रोते हुए उन्हें अपनी जलन का कारण बताया तब
उन्होंने ही समझाया क़ि वर्माजी की कामवाली बाई के भाग्य से बिलकुल नहीं जलना
अगले साल दिसम्बर में Madam जब मायके जायगी तब तू मेरे साथ चलना !
पहले लोग Cashbook खोलते थे
आजकल facebook खोलते हैं हर कोई facebook में बिजी है
Cashbook खोलने के लिए कमाना पड़ता है, इसलिए facebook easy है
आदमी computer के सामने बैठकर रात-रात भर जागता है,
बिंदास बातें करने के लिए पराई औरतों के पीछे भागता है,
लेकिन इस प्रकरण से मेरी समझ में यह बात आई है,
क़ि जिसे वह बिंदास model समझ रहा है वह तो किसी की कामवाली बाई है
जिसने confuse करने के लिए किसी जवान सुन्दर लड़की की photo लगाईं है
सारा का सारा मामला look पर है
और अब तो मेरा कुत्ता भी facebook पर है[/COLOR]

Nisha.Patel
28-04-2011, 06:11 PM
शुक्रिया दोस्तों

:tiranga::clap::clap::salut:


एक कविता एहसान कुरैशी के अंदाज में.....
निशा जी निशा जी कवितायेँ सुनाएंगी क्या,
कविता सुनाकर सबको हंसाएंगी......... क्या,
हँसते हँसे पेट दुःख जाएगा सबका..
पेट दुखाकर सबको रुलाएंगी क्या.


बढ़िया सूत्र बनाया हे आपने निशाजी


हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा
हा हा हा हा हा हा हा


बहुत ही सुन्दर हास्य कविताएं आप की


बहुत ही अछा सूत्र हे निशा जी लगे रहो


मेरा कुत्ता भी Facebook पर है
]मेरी काम वाली बाई, एक दिन अचानक काम पर नहीं आई,
तो पत्नी ने phone पर डांट लगाईं अगर तुझे आज नहीं आना था,
तो पहले बताना था,
वह बोली - मैंने तो परसों ही Facebook पर लिख दिया था क़ि एक सप्ताह के लिए Goa जा रही हूँ
पहले update रहो
फिर भी पता न चले तो कहो
पत्नी बोली = तो तू Facebook पर भी है उसने जवाब दिया -
मै तो बहुत पहले से Facebook पर हूँ साहब मेरे friend हैं !
बिलकुल नहीं झिझकते हैं मेरे प्रत्येक update पर बिंदास comment लिखते हैं
मेरे इस update पर उन्होंने कमेन्ट लिखा Happy Journey, Take care, I miss you, जल्दी आना.
मुझे नहीं भाएगा पत्नी के हाथ का खाना
इतना सुनते ही मुसीबत बढ़ गयी.
पत्नी ने phone बंद किया और मेरी छाती पर चढ़ गयी.
गब्बर सिंह के अंदाज़ में बोली - तेरा क्या होगा रे कालिया !
मैंने कहा -देवी ! मैंने तेरे साथ फेरे खाए हैं वह बोली - तो अब मेरे हाथ का खाना भी खा !
अचानक दोबारा phone करके पत्नी ने काम वाली बाई से पूछा, घबराये-घबराए
तेरे पास Goa जाने के लिए पैसे कहाँ से आये ?
वह बोली- सक्सेना जी के साथ LTC पर आई हूँ
पिछले साल वर्माजी के साथ उनकी कामवाली बाई गयी थी तब मै नई-नई थी जब
मैंने रोते हुए उन्हें अपनी जलन का कारण बताया तब
उन्होंने ही समझाया क़ि वर्माजी की कामवाली बाई के भाग्य से बिलकुल नहीं जलना
अगले साल दिसम्बर में Madam जब मायके जायगी तब तू मेरे साथ चलना !
पहले लोग Cashbook खोलते थे
आजकल facebook खोलते हैं हर कोई facebook में बिजी है
Cashbook खोलने के लिए कमाना पड़ता है, इसलिए facebook easy है
आदमी computer के सामने बैठकर रात-रात भर जागता है,
बिंदास बातें करने के लिए पराई औरतों के पीछे भागता है,
लेकिन इस प्रकरण से मेरी समझ में यह बात आई है,
क़ि जिसे वह बिंदास model समझ रहा है वह तो किसी की कामवाली बाई है
जिसने confuse करने के लिए किसी जवान सुन्दर लड़की की photo लगाईं है
सारा का सारा मामला look पर है
और अब तो मेरा कुत्ता भी facebook पर है[/COLOR]

Nisha.Patel
28-04-2011, 06:11 PM
दो करोड़ घूस लेते धराये एम सी आई अध्यक्ष,

पैसा लेकर मान्यता प्रदान करने का था लक्ष्य

गुणवत्ता अब गौण हो गयी,मजबूत है मुद्रा-पक्ष

युधिष्ठिर! अब क्या पूछेगा यक्ष ?


मनरेगा मजदूर हैं बैठे तालाब खोदे जे.सी.बी.मशीन.

ऐसे ही सरकारी योजना को वे मिल करे छिन्न -भिन्न

नेता-अफसर सांप के आगे ठीकेदार बजाये बीन.

तक धिना धिन धिन !


मनचाही ट्रान्सफर-पोस्टिंग की मची हुई है धूम

ट्रान्सफर-पोस्टिंग इंडस्ट्री में आ गयी फिर से बूम

ऐसे सोर्सें! इतनी मुद्रा कि बस सर जायेगा घूम

झूम बराबर झूम !

Nisha.Patel
28-04-2011, 06:14 PM
कविता- आक्सीज़न का सिलेंडर

पापा पापा, वो वाला सिलेन्डर दिलवाओ ना,
बेटा जिद करके इशारे से बोला।
बेटा, वो आपको बाद में दिलवायेंगे..
आपने तो अभी घर वाला सिलेंडर भी नहीं खोला॥

पापा उसमें से स्ट्रॉबेरी की खुशबू आती है, मुझे तो वैनीला पसंद है।
पापा हैरान परेशान सोचने लगे,
हम तो खुली हवा में साँस लेते थे,
इसके पास तो ऑक्सीजन में वैराईटीज़ की गँध है॥

रे इंसान तेरी अजीब माया है,
फ़्री की ऑक्सीजन को आज 200 रू प्रति लीटर बनाया है।
पहले तो सिर्फ़ पानी में कम्पीटीशन था,
आजकल ऑक्सीजन का भी बिज़नेस चलाया है॥

बाप ने बेटे को बहलाया-फुसलाया,
फ़ेयर से खरीदेंगे, यह कहकर वापस चलने का मन बनाया॥

थोड़ी दूर चलते ही बेटा कूदने लगा,
पापा वो देखो पेड़! यह कहकर उसकी तरफ़ दौड़ने लगा॥

बेटा बोला,पापा इससे कागज़ बनता था न, हमें सब पढाया गया है,
ऑनलाइन क्लासिस में ट्रीज़ऑनलाइन.कॉम पर सब बताया गया है॥

घर पहुँचते के साथ ही टीवी पर खबर थी..
मुम्बई में सवेरे से ही हल्की बारिश हो रही थी।

पापा ये आसमान से पानी कैसे गिरता है, मुझे भी देखना है।
आपने कहा था छुट्टियों में मुम्बई की बारिश दिखाने चलना है॥

आज 2147 में हर घर के बाहर एक मॉल होना चाहिये..
ऑक्सीजन के सिलेंडर का अच्छा खासा मोल होना चाहिये॥

हँसियेगा नहीं, ये मेरा नहीं कहना है..
आदमी ऐसा कर रहा है..ज़माने का ये कहना है॥

Nisha.Patel
28-04-2011, 06:17 PM
लोकतंत्र में लोक

तुम अनाज उगाओगे
तुम्हे रोटी नहीं मिलेगी,
तुम ईंट पत्थर जोड़ोगे
तुम्हें सड़क पर सोना होगा,
तुम कपड़े बुनोगे
और तुम नंगे रहोगे,
क्योंकि अब लोकतंत्र
अपनी परिभाषा बदल चुका है
लोकतंत्र में अब लोक
एक कोरी अवधारणा मात्र है,
सत्ता तुम्हारे नहीं
पूंजी के हाथ में है
और पूंजी
नीराओं, राजाओं
कलमाडियों और टाटाओं के हाथ में है,
तुम्हारी ज़बान, तुम्हारी मेहनत
तुम्हारी स्वतंत्रता, तुम्हारा अधिकार
सिर्फ संवैधानिक कागजों में है
हकीकत में नहीं,
तभी तो
तुम्हारी चंद रुपये की चोरी
तुम्हें जेल पहुंचा देती है
मगर
उनकी अरबों की हेराफेरी
महज एक
राजनितिक खेल बनकर रह जाती है।

Nisha.Patel
28-04-2011, 06:21 PM
कविता: भालू नाच

बचपन में गर्म लोहे की छड़ से
दागे गये तलुओं की
पीड़ा की स्मृति में
मदारी के डंडे के डर से
नाचता है भालू
डमरू की धुन पर
उसके नाच में नाच रही होती है
उसकी पीड़ा और भूख
एक पीड़ा और भूख
नाच रही होती है मदारी की आँख
और जमूरे के पेट में भी

मेरे बचपन के ये बिंब
मेरे साथ घट रहे हैं
पेट पालने की जिद
और ज्यादा इकट्ठा करने की हवा में
मैं नाचता हूँ साहबों और नेताओं के आगे
बिना डंडा दिखाये या डमरू बजाये ही

आदमी ऐसे ही बनता है भालू
और नाचता रहता है मजमे में ।

Nisha.Patel
28-04-2011, 06:25 PM
वसीयत

जिंदगी भर
पिता ने
कवच बनकर
बेटे को सहेजा
लेकिन पुत्र
बस यही सोचता रहा
कि कब लिखी जाएगी
वसीयत मेरे नाम
और कोसता रहा
जन्मदाता पिता को

पुत्र ने
युवावस्था में जिद की
और बालहठ को दोहरा कर
फैल गया धुँए सा
लेकिन
संयमी पिता ने
गौतम बुद्ध की तरह शांत रहकर
अस्वीकृति व्यक्त की
और
कुछ देर शांत रहने के बाद
हाथ से रेत की तरह फिसलते
बेटे को देखकर
पिता ने कहा
मेरी वसीयत के लिए
अभी तुम्हें करना होगा
अंतहीन इंतजार
कहते हुए
पिता की आँखों में था
भविष्य के प्रति डर
और
पुत्र की आँखों का मर चुका था पानी
भूल गया था वह
पिता द्वारा दिए गए
संस्कारों की लम्बी श्रृंखला
यह जानते हुए भी
कि यूरिया खाद और
परमाणु युगों की संतानों का भविष्य
अनिश्चित है
फिर भी
वसीयत का लालची पुत्र राजू
नहीं जानना चाहता
अच्छे आचार-विचार, व्यवहार
और संस्कारों को मर्यादा में रखना

राजू
क्यों नालायक हो गए हो तुम
भूल गए
पिता ने तुम्हारे आँसुओं को
हर बार ओक में लिया है
और जमीन पर नहीं गिरने दिया
अनमोल समझकर

पिता के भविष्य हो तुम
तुम्हारी वसीयती दृष्टि ने
पिता की सम्भावनाओं को
पंगु बना दिया है
तुमने
मर्यादित दीवार हटाकर
पिता को कोष्ठक में बंद कर दिया
तुम्हारी संकरी सोच से
कई-कई रात
आँसुओं से मुँह धोया है उसने
तुम्हारी वस्त्रहीन इच्छाओं के आगे
लाचार पिता
संख्याओं के बीच घिरे
दशमलव की तरह
घिर जाता है
और महसूस करता है स्वयं को
बंद आयताकार में
बिंदु सा अकेला
जहाँ बंद है रास्ता निकास का

चेहरे के भाव से
देखी जा सकती है पिता के अंदर
मीलों लम्बी उदासी
और आँखों में धुंधलापन
तुम्हारी हर अपेक्षा
उसके गले में कफ सी अटक चुकी है
तुम पिता के लिए
एक हसीन सपना थे
जिसकी उंगली पकड़कर
जिंदगी को
जीतना चाहता था वह
पर
तुम्हारी असमय ढे*रों इच्छाओं से
छलनी हो चुका है वह
और रिस रहा है लगातार
नल के नीचे रखी
छेद वाली बाल्टी की तरह

आज तुम
बहुत खुश हो
मैं समझ गया
तुम्हारी इच्छाओं की बेडि*यों से
जकड़ा पिता
आज हार गया तुमसे
और
लिख दी वसीयत तुम्हारे नाम
अब तुम
निश्चिंत होकर
देख सकते हो बेहिसाब हसीन सपने।

Nisha.Patel
28-04-2011, 06:26 PM
सपना मकान का

सपना मकान का
अपने मकान का
कैसे हो पूरा
खाली पेट
लंगोटी बांधे
सोच रहा है घूरा
सोच रहा है घूरा कैसे
कटेगी ये बरसात
पैताने बैठा है कुत्ता
नहीं छोडता साथ
घरवालों की होती इज़्ज़त
चाहे हों आवारा
बेघर और बेदर को समझे
चोर ज़माना सारा
खाते पीते लोगों को ही
बैंकों से मिलता लोन
जिनका कोई नाथ न पगहा
उनके लिए सब मौन
काहे देखे घूरा सपना
काहे दांत निपोरे
कह दो उससे नंगा-बूचा
धोए क्या निचोडे......
सपना मकान का
देख रहा है घूरा!