PDA

View Full Version : राज़ है गहरा पानी पीते ही जवान बन जाओगे



The ROYAL "JAAT''
23-03-2011, 03:40 PM
दोस्तों अब में आपके सामने दुनिया के बड़े बड़े राज जिनके बारे में बहुत काम लोग जानते होंगे इससे आपको जानकारी और मनोरंजन दोनों मिलेगा अगर आपके पास भी कोई एसी जानकारी हैं तो कृपया यहाँ लिखें में हम इंतजार करेंगे ...
आपका दोस्त
पंकज


फाउंटेन ऑफ यूथ या फिर जवानी का झरना कहें, इसके बारे में सदियों से बहस और खोज होती रही है। कहते हैं कि इस झरने का पानी पीने वाला सदा जवान रहता है। यहां तक की बूढ़ा भी जवान हो सकता है। उर्दू में इसे आबेहयात कहा जाता है। कई मशहूर ऐतिहासिक किताबों में इसके बारे में लिखा गया है।

पसंद आये तो थैंक्स जरुर करे

Rajeev
23-03-2011, 03:52 PM
बहुत-ही अच्छी जानकारी है मित्र....

lalji1964
23-03-2011, 04:06 PM
दोस्तों अब में आपके सामने दुनिया के बड़े बड़े राज जिनके बारे में बहुत काम लोग जानते होंगे इससे आपको जानकारी और मनोरंजन दोनों मिलेगा अगर आपके पास भी कोई एसी जानकारी हैं तो कृपया यहाँ लिखें में हम इंतजार करेंगे ...
आपका दोस्त पंकज जी ,झरना कहाँ है
पंकज


फाउंटेन ऑफ यूथ या फिर जवानी का झरना कहें, इसके बारे में सदियों से बहस और खोज होती रही है। कहते हैं कि इस झरने का पानी पीने वाला सदा जवान रहता है। यहां तक की बूढ़ा भी जवान हो सकता है। उर्दू में इसे आबेहयात कहा जाता है। कई मशहूर ऐतिहासिक किताबों में इसके बारे में लिखा गया है।

पसंद आये तो थैंक्स जरुर करे

फाउंटेन ऑफ यूथ या फिर जवानी का झरना कहाँ है

The ROYAL "JAAT''
23-03-2011, 05:29 PM
माफ़ करना दोस्तों आपको इंतजार करना पड़ा आगे पोस्ट कर रहा हूँ

इतना ही नहीं कुरान की एक सूरत में भी आबेहयात का जिक्र आता है। फिर भी आज तक कोई नहीं तलाश सका है कि ये दुनिया में कहां है। इस तरह की कहानियां कैरेबियन देशों में ज्यादा मशहूर थीं। उनके अनुसार ये बिमिनी या बेनिनी के रहस्यमयी इलाके में कहीं पर है।

सोलहवीं सदी में इस बहस ने एक बार फिर जोर पकड़ा था। उस समय ये मसला स्पेन के खोजी जुआन प्रॉन्स डी लिओन से जुड़ गया था। डी लिओन बाद में पियरेटो रिको के पहले गवर्नर बने थे।

The ROYAL "JAAT''
23-03-2011, 05:30 PM
कहते हैं कि वे 1513 में इस झरने की तलाश में एक स्थान पर गए थे। ये जगह आज के फ्लोरिडा में है। अलेक्जेंडर्स रोमांस के पूर्वी संस्करणों में भी लिखा गया है कि सिकंदर अपने नौकर अल खिद्र के साथ किताबों में वर्णित लैंड ऑफ डार्कनेस पार कर गए थे।

दोनों ने ये पानी तलाश लिया था। इसी तरह ईसा मसीह से भी इस पानी को जोड़ा जाता है। कहते हैं ईसा जिस तालाब के पानी से लोगों को ठीक किया करते थे, उसमें ये पानी था। इसी तरह कहा जाता है कि 1565 में सेंट ऑगस्टिन ने भी ये झरना तलाश लिया था। सबसे ज्यादा किस्से बिमिनी के हैं। फिर भी ये पानी एक राज़ बना हुआ है।:bloom::salut:

The ROYAL "JAAT''
23-03-2011, 05:32 PM
राज़ है गहरा

इंसान को हमेशा के लिए जवान और अमर करने वाले जादुई पानी के किस्से सदियों से दुनिया में मशहूर हैं। हर दौर में इसकी तलाश की गई है। आज भी इस पर रिसर्च होती हैं। फिर इसका झरना या फव्वारा राज़ बना हुआ है।

The ROYAL "JAAT''
23-03-2011, 05:38 PM
इसके साथ मेरी ये जानकारी पूरी होती है और भी राज आपको बताऊँगा कृपया आप भी मुझसे कुछ जानकारी और चाहते हैं या अपनी जानकारी यहाँ देना चाहते हैं तो आपका स्वागत हैं अपना और सब दोस्तों का ज्ञान बढ़ाए
धन्यवाद
पंकज

The ROYAL "JAAT''
23-03-2011, 05:51 PM
अब में आपको बुलेट के बारे में बताता हु जो सबको हेरान कर देंगी
बुलेट मोटरसाइकिल का मंदिर, प्रसाद में चढ़ती है शराब
भारत में हर वो चीज जिससे लगाव हो जाए उसका मंदिर बनाकर पूजा की जाने लगती है। जिस देश में इंसान भगवान बन जाए उसमें किसी मोटरसाइकिल का मंदिर बनना कोई बड़ी बात नहीं है। लेकिन राजस्थान के पाली जिले में बने बुलेट मोटरसाइकिल के इस मंदिर के पीछे की कहानी कुछ और है।

पाली जिले में बने बुलेट एनफील्ड मोटरसाइकिल के मंदिर के प्रति यहां के लोगों में काफी आस्था है। पाली जिले में बुलेट मोटरसाइकिल काफी लोकप्रिय भी है। पाली-जोधपुर रोड पर बने इस अनोखे मंदिर में मूर्ति के स्थान पर बुलेट 350 बाइक रखी गई है जिसे प्रसाद के तौर पर शराब भी चढ़ाई जाती है।

बुलेट बाबा के इस मंदिर में गांव वाले जहां फूल चढ़ाते हैं वहीं सड़क से गुजरने वाले बाइक सवार भी रुककर यहां सिर झुकाते हैं। वैसे बुलेट बाबा का यह मंदिर दुनिया में किसी मोटरसाइकिल का एकमात्र मंदिर हैं।

सुरक्षित यात्रा के लिए माथा टेकते हैं लोग

पाली से जोधपुर मार्ग पर गांव चोटिला के नजदीक पड़ने वाले इस मंदिर पर रोजाना सैंकड़ों यात्री रुककर सुरक्षित यात्रा के लिए प्रार्थना करते हैं। मंदिर पाली शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर है।

The ROYAL "JAAT''
23-03-2011, 05:59 PM
क्या है मंदिर के पीछे की कहानी

स्थानीय लोगों के अनुसार यहां रखी गई मोटरसाइकल ओम सिंह की है। मोटरसाइकिल के पीछे ओमसिंह की तस्वीर भी रखी गई है जिसपर भी यात्री फूल चढ़ाते हैं। बताते हैं कि करीब 20 साल पहले ओम सिंह की यह बाइक यहां फिसलकर टकरा गई थी। इस दुर्घटना में ओमसिंह की मौत हो गई थी।

दुर्घटना के बाद बुलेट बाइक को थाने ले जाया गया था जहां से अगले दिन यह फिर से घटनास्थल पर ही मिली थी। शुरु में पुलिस को लगा कि यह किसी की शरारत होगी। बाइक को दोबारा थाने लाकर उसकी तेल टंकी खाली कर दी गई। लेकिन अगले दिन फिर यह बाइक घटनास्थल पर ही मिली।

जैसे-जैसे यह कहानी फैली आसपास के गांव के लोगों ने वहां एक मंच बनाकर यह मोटरसाइकिल रख दी। तब से इसकी पूजा का रिवाज शुरु हुआ। अब इस मंदिर का एक पुजारी भी है जो यहां नियमित पूजा करता है।

Devil khan
23-03-2011, 06:03 PM
बहुत कमाल की जानकारी मित्र ,,,,,,,,,,,,,,,,,थेंक्स स्वीकार करें

The ROYAL "JAAT''
23-03-2011, 06:27 PM
ये है इस बुलेट देवता की फोटो

80955

The ROYAL "JAAT''
23-03-2011, 06:35 PM
अद्भुत रहस्य: स्टोनहेंज के पत्थर....
भले ही विज्ञान ने आज कितनी ही तरक्की क्यों न कर ली हो, फिरभी उसके सामने चुनौतियों का पहाड़ हमेशा ही मुँहबाए खड़ा रहा है। इस श्रृंखला में ऐसे ही कुछ रोचक विषयों की बात की जाएगी, जो आज भी विज्ञान के लिए अबूझ पहेली बने हुए हैं।
 
इस पहेली की पहली कड़ी में हम बात करते हैं ब्रिटेन की धरती पर पाए गए स्टोनहेंज के रहस्यमय पत्थरों की। यह एक प्रागैतिहासिक काल का ऐसा स्मारक है, जो चट्टान के विभिन्न टुकड़ो को जोड़कर बनाई गई वक्राकार आकृतियाँ हैं, जो मिलकर एक बड़े से गोले के समान दिखाई पड़ती हैं। बहुत से खगोल शास्त्री इसे एक प्राचीन खगोल वेधशाला के रूप में मानते हैं, जिसकी संरचना इतनी जटिल है कि इसे एक प्रागैतिहासिक कम्प्यूटर भी कहा जा सकता है।
ये स्मारक दक्षिणी इंग्लैण्ड के सेलिसबरी के मैदानी इलाकों में स्थित हैं। ये पत्थर लगभग 13 फिट ऊंचे हैं और बलुआ पत्थरों से बने हुए हैं। ऐसा माना जाता है कि इनकी आयु 4 हजार वर्षों से भी अधिक है।
पुरातत्व विज्ञान के अनुसार स्टोनहेंज के पत्थर ईसा से 2750 वर्ष पूर्व के हैं। एक मान्यता के अनुसार इनका निर्माण ब्रिटेन और गाल के ड्रुइड (Druids) पुजारियों ने किया था। लेकिन आधुनिक पुरातत्वशास्त्री इससे सहमत नहीं हैं। उनके अनुसार ये पत्थर ड्रुइड पुजारियों से भी एक हजार साल पुराने हैं। कुछ पुरातत्वशास्त्रि ों का मानना है कि इनका निर्माण रोमनों ने किया होगा। जबकि कुछ का मानना है कि इनके निर्माण के पीछे मिस्रियों का हाथ है।

The ROYAL "JAAT''
24-03-2011, 04:38 PM
का मानना है कि इनका निर्माण रोमनों ने किया होगा। जबकि कुछ का मानना है कि इनके निर्माण के पीछे मिस्रियों का हाथ है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार स्टोनहेंज के निर्माण का इतिहास तीन चरणों में विभक्त है। पहला चरण ईसा से 2750 वर्ष पहले का है, जिसमें स्टोनहेंज के रहस्यमय औब्रे छिद्र (Aubrey Holes) का निर्माण किया गया। इन छिद्रों की संख्या 56 है और इन्हीं के द्वारा स्टोनहेंज की बाहरी परिधि बनी है। पुरातत्वशास्त्रि ों का मत है कि इसी दौरान स्टोनहेंज के प्रसिद्ध हील स्टोन (Heel Stone) का भी निर्माण हुआ, जो मुख्य दरवाजे के बाहर की ओर अवस्थित है।
स्टोनहेंज की बाहरी परिधि के भीतर 83 नीले पत्थरों के बने दुहरे वृत्त का निर्माण ईसा से 2000 वर्ष पहले माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि ये पत्थर पैम्पशायर एवन (Hampshire Avon) से मंगवाए गये थे, जोकि लगभग 4 टन वजनी थे। स्टोनहेंज में पाई गई कुल्हाड़ी आदि भी इसी पत्थर की बनी थी। इससे यह पता चलता है कि उस दौरान इन पत्थरों को काफी पवित्र माना जाता था।

The ROYAL "JAAT''
24-03-2011, 04:40 PM
तीसरे चरण में स्टोनहेंज में 75 विशालकाय बलुआ पत्थरों को वहाँ पर लाया गया। ऐसा माना जाता है कि ये पत्थर एवेबुरी से 20 मील दूर के इलाके से लाए गये थे। उसके बाद इन पत्थरों को तराश गया और तत्पश्चात उन्हें लगभग 18 इंच की ढ़ाल वाली जमीन पर स्थापित किया गया।

The ROYAL "JAAT''
24-03-2011, 04:49 PM
खगोलशास्त्री एडवर्ड ड्यूक (Adward Duke) के अनुसार स्टोनहेंज का पूरा स्मारक सौर प्रणाली को प्रदर्शित करता है और उसमें स्टोनहेंज शनि की कक्षा के समान है जबकि नार्मन लाकयर (Norrman Lockyer) के अनुसार हील स्टोन की स्थिति ग्रीष्मकालीन संक्राति (Mid summer solstice) को प्रकट करता है। लेकिन यदि इसे उल्टा करके देखा जाए तो यह शरदकालीन संक्रान्ति (Mid winter solstice) की स्थिति दर्शाता है। उनका अनुमान है कि इनके अध्ययन से विभिन्न प्रकार के कैलेण्डर बनाए जाते होंगे।
भले ही आधुनिक खगोलशास्त्री इन मतों से सहमत न हों, पर इतना तो तय हैकि स्टोनहेंज को बनाने के पीछे कोई न कोई उद्देश्य अवश्य रहा होगा। लेकिन वह उद्देश्य क्या होगा, यह भी खगोलशास्त्रियों के लिए चुनौती बना हुआ है।

Miss Smarty Pants
24-03-2011, 05:07 PM
एक रोचक सूत्र का निर्माण किया है आपने. + स्वीकार करें.

chester
24-03-2011, 06:20 PM
बहुत बहुत धन्यवाद् मित्र जानकारी देने के लिए

Devil khan
24-03-2011, 08:44 PM
बहुत अच कार्य मित्र .......शानदार सूत्र ..................गजब




मेरे नए सूत्र पर आपके विचार जरूर रखे .....................

http://antarvasna.com/forum/showthread.php?t=3757

SUNIL1107
26-03-2011, 01:09 AM
रोचक सूत्र की बधाई मित्र

bullpower
27-03-2011, 10:49 AM
बड़े भाईं इस सूत्र को सामान्य विभाग में ले जाएँ

Raja44
28-03-2011, 12:36 PM
Ye bullet devata bich me kaha se le aaye enke bare me kuch jante ho

underground
28-03-2011, 01:09 PM
yaha to ek se bad ek vidvan log hai

pyasa43
28-03-2011, 09:08 PM
फाउंटेन ऑफ यूथ या फिर जवानी का झरना कहाँ है

इस झरने को अब्बेहायत कहते हैं आब का मतलब पानी हयात का मतलब जिंदगी इस मैं यह सोच गलत है की इंसान जवान रहे गा बल्कि उस को मौत नहीं आयेगी सिकंदार राजा ने वोह पानी नहीं पिया क्यों की वोह पानी पि के लोग कीड़ों मकोडों की जिंदगी जी रहे थे / मौत इश्वर का तोहफा है नहीं तो क्या होता इस धरती पर आप सोच सकते हैं /

The ROYAL "JAAT''
02-04-2011, 02:22 PM
धन्यवाद सुनील जी अपने मेरा सूत्र पर अपनी राय दी

The ROYAL "JAAT''
02-04-2011, 02:44 PM
धन्यवाद काम्या जी आपने मेरे सूत्र के लिए समय निकला और मेरा होसला बढ़ाया और मुझे आगे पोस्ट कने के लिए प्रेरित किया में तो इस सूत्र को बंद करने वाला था ....मुझे इस सूत्र पर वापस लाने के लिए बहुत-२ धन्यवाद और +रेपो.
काम्या अब में इस सूत्र को आगे बढ़ाने की कोशिश करता हूँ क्रपया आगे भी आप के विचार का रखे

The ROYAL "JAAT''
02-04-2011, 02:50 PM
अरे राजा४४ जी लगता हैं आपने पूरा सूत्र नही पढ़ा इसमें पूरी जानकारी इस सूत्र में ह आप पढ़ने के बड अपने विचार हमारे साथ बांटे....धन्यवाद दोस्त

The ROYAL "JAAT''
02-04-2011, 02:51 PM
एक रोचक सूत्र का निर्माण किया है आपने. + स्वीकार करें.




धन्यवाद काम्या जी आपने मेरे सूत्र के लिए समय निकला और मेरा होसला बढ़ाया और मुझे आगे पोस्ट कने के लिए प्रेरित किया में तो इस सूत्र को बंद करने वाला था ....मुझे इस सूत्र पर वापस लाने के लिए बहुत-२ धन्यवाद और +रेपो.
काम्या अब में इस सूत्र को आगे बढ़ाने की कोशिश करता हूँ क्रपया आगे भी आप के विचार का रखे

The ROYAL "JAAT''
02-04-2011, 02:55 PM
yaha to ek se bad ek vidvan log hai
सब आप जेसे दोस्त की संगत का ही असर है दोस्त ....धन्यवाद

The ROYAL "JAAT''
02-04-2011, 02:57 PM
Ye bullet devata bich me kaha se le aaye enke bare me kuch jante ho




अरे राजा४४ जी लगता हैं आपने पूरा सूत्र नही पढ़ा इसमें पूरी जानकारी इस सूत्र में ह आप पढ़ने के बड अपने विचार हमारे साथ बांटे....धन्यवाद दोस्त

The ROYAL "JAAT''
02-04-2011, 03:04 PM
दोस्तों आपके सामने एक नया राज पेस करने जा रहा हूँ और आपके अमूल्य विचार सुनने का इंतजार करूँगा.... धन्यवाद आपका दोस्त
पंकज
रेत के नीचे दबे मिले सदियों पुराने 'तिलिस्मी' मंदिर!

उत्तरी यमन में साना से 120 किमी पूर्व में छोटा-सा गांव है मारिब। पिछली सदी में मारिब के पास रेत में छिपे हुए कुछ बहुत पुराने अवशेष मिले थे। ये कब और कैसे बने थे? इन्हें किसने बनवाया था? इनका इतिहास क्या रहा है? ऐसे कई सवाल हैं, जिनका आज तक खुलासा नहीं किया जा सका है।
इन रहस्यमयी इमारतों को महरम बिल्किस आवाम टैंपल ऑफ मून कहा जाता है। माना जाता है कि ये शेबा की रानी से संबंधित है, जिनका जिक्र बाइबल में किया गया है। बावजूद इसके आज तक ऐसे सबूत नहीं मिले हैं कि ये रानी कभी हुआ करती थीं। फिर भी माना जाता है कि ये रानी 960 से 920 ईसापूर्व में रही थीं। कुरान में भी कहा गया है कि ये रानी येरूशलम के राजा सालोमन से मिली थीं। फिर भी अब तक मिले अवशेषों से कुछ साबित नहीं किया जा सका है।
ये मंदिर 260 मीटर लंबी दीवार से घिरा हुआ है। दीवार की मोटाई भी 3 से 5 मीटर तक है। समझा जाता है कि ये शायद कभी 16 मीटर तक मोटी रही होगी। मंदिर के हॉल में अभी भी करीब 32 स्तंभ बचे हैं, जिन पर कभी छत टिकी होगी। बाहर की तरफ आठ स्तंभ इस तरह खड़े हैं, जैसे वे यहां के पहरेदार हैं।

The ROYAL "JAAT''
02-04-2011, 03:09 PM
पुरातत्व शास्त्रियों के अनुसार ये इमारत 1500 से 1200 ईसापूर्व में या उससे भी पहले बनी होगी। मतलब सालोमन और शेबा से बहुत पहले। इसके पास ही सूर्य का मंदिर है। इसके सामने भी पांच स्तंभ हैं। इन्हें किस तरह बनाया गया ये भी समझ नहीं आता है। :globe:

पसंद आने पर +रेपो देकर होसला बढ़ाए :salut:

The ROYAL "JAAT''
02-04-2011, 03:12 PM
राज है गहरा

यमन के मारिब शहर के पास पुराने मंदिरों के अवशेष मिले हैं। इन्हें कब और किसने बनाया था, ये समझा नहीं जा सका है। फिर भी लोग इसका संबंध बाइबल में वर्णित रानी शेबा से जोड़ते हैं। शेबा का जिक्र बाइबल के अलावा कुरान में भी है। फिर भी ये कब वजूद में थीं, ये भी आज तक रहस्य है।

The ROYAL "JAAT''
02-04-2011, 03:19 PM
ये हैं इस मंदिर की फोटो

87459

The ROYAL "JAAT''
02-04-2011, 03:30 PM
गुमनाम 'सभ्यता' का अनसुलझा 'रहस्य:question:

दक्षिण-पूर्वी तुर्की के सन्लीउर्फा शहर से छह किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर सदियों पुराने पत्थर के मठ मिले थे। इन्हें गोबेक्ली टेपे कहा जाता है। अनुमान है कि ये 9000 ईसापूर्व के आसपास बनाए गए थे। 1994 में जर्मनी के पुरातत्व शास्त्री क्लाउस शैमिट ने ये खोज की थी। गोलाकार में बने ये पत्थर के प्राचीन मठ या मंदिर हैं।
क्लाउस के अनुसार फिलहाल उन्होंने ऐसे सात गोलाकार निर्माण तलाश लिए हैं। अभी भी 22 एकड़ इलाके की खुदाई बाकी है, इसलिए और अवशेष मिलने की उम्मीद है। ये पत्थर पहाड़ पर क्या कर रहे हैं? इन्हें किसने बनाया? इन्हें क्यों बनाया गया? इन्हें कब बनाया गया? ऐसे सैकड़ों सवाल हैं, जिनके आधे-अधूरे जवाब ही दिए जा सकते हैं। :salut:

The ROYAL "JAAT''
02-04-2011, 03:32 PM
गोबेक्ली टेपे से मिले अवशेषों में सबसे बड़ा 16 फीट ऊंचा है, जिसका वजन दस टन से ज्यादा है। ये पत्थर अंग्रेजी अक्षर टी के शेप में हैं और गोलाई में जमाए गए हैं। कुछ पत्थरों पर पक्षी, सांप, बिच्छू, शेर और कई अन्य जानवर बने हुए हैं। इतने समय पहले इंसान ने धातु के औजार भी नहीं बनाए थे। फिर इन लोगों ने पत्थरों को किस चीज से तराशा, ये भी एक बड़ा सवाल है।
यहां से मिली जानवरों की हड्डियों से पता चलता है कि ये लोग खानाबदोश शिकारी थे। इसलिए कहीं बस्ती बसाकर वहां मंदिर और स्मारक बनाने की संभावना भी खारिज हो गई। इन्हें बनाने में भी सैकड़ों साल लगे होंगे। फिर ये लोग कहां से आकर इन्हें बनाते थे। :salut:

The ROYAL "JAAT''
02-04-2011, 03:39 PM
राज है गहरा:question:
तुर्की के गोबेक्ली टेपे पहाड़ी पर बने पत्थर के मंदिर हैं। करीब 9000 साल ईसापूर्व में इन्हें किस सभ्यता ने बनाया, क्यों बनाया और कैसे बनाया, ऐसे सभी सवाल राज बने हुए हैं।



87462
आप सब दोस्त भी यहाँ एसी कोई भी जानकारी यहाँ हमारे साथ बाँट सकते हैं:salut:
+रेपोटेसन देकर हमें उत्साहित करे
धन्यवाद दोस्तों

The ROYAL "JAAT''
02-04-2011, 03:47 PM
बहुत बहुत धन्यवाद् मित्र जानकारी देने के लिए

इस सूत्र पर आपकी राय देने पर आपका आभारी हूँ

honymoon
05-04-2011, 11:20 AM
bahut hi achi jankai hai

The ROYAL "JAAT''
08-04-2011, 05:06 PM
दोस्तों में अपने पोस्ट भी आपकी सामने लाने की कोशिस कर रहा हूँ आसा करता हू आपको पसंद आयेंगे और आप अपने सुझाव मुझे देते रहेंगे ....धन्यवाद

raj_mishra121
08-04-2011, 10:28 PM
यार कहा से ले आते हो भाई इतनी रोचक जानकारिय

धन्यवाद

The ROYAL "JAAT''
17-04-2011, 04:37 PM
जर्मनी के वैज्ञानिकों की चेतावनी 21 दिसंबर, 2012 को ख़त्म हो सकती है दुनिया

नई दिल्ली. क़यामत यानि प्रलय के दिन को लेकर विभिन्न धर्मों में में बहुत कुछ कहा जाता है. क़यामत कब आएगी इस मुद्दे को लेकर भी अलग-अलग मत हैं, लेकिन इस बात पर सभी सहमत हैं कि एक दिन ये दुनिया ख़त्म ज़रूर हो जाएगी. एक प्राचीन मान्यता के मुताबिक़ सदियों पहले माया सभ्यता ने एक ऐसा कैलेंडर बनाया था, जिसमें शुक्रवार 21 दिसम्बर 2012 में प्रलय की भविष्यवाणी की गई थी.

अब जर्मनी के वैज्ञानिक रोसी ओडोनील और विली नेल्सन ने 21 दिसंबर 2012 को एक्स ग्रह की पृथ्वी से टक्कर की बात कहकर पृथ्वी के विनाश की अफ़वाहों को और हवा दे दी है. कई बड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर वर्ष 2012 में एक्स ग्रह की टक्कर पृथ्वी से होती है तो मानव सहित सभी जीव प्रजातियों का विनाश हो सकता है. वैज्ञानिकों को आशंका है कि एक्स नाम का ग्रह धरती के काफ़ी पास से गुज़रेगा. इस दौरान इसकी पृथ्वी से टक्कर भी हो सकती है. अगर ऐसा हुआ तो पृथ्वी को कोई नहीं बचा सकता और संपूर्ण मानव प्रजाति का विनाश तय है.:tiranga:

The ROYAL "JAAT''
17-04-2011, 05:40 PM
हालांकि कुछ वैज्ञानिक ऐसी किसी भी आशंका से इंकार कर रहे हैं कि पृथ्वी के साथ एक्स ग्रह की टक्कर से पृथ्वी पर मौजूद संपूर्ण मानव प्रजाति के अस्तिव ही संकट में पड़ सकता है. उनका मानना है है कि ब्राह्मांड में हज़ारों ग्रह और
आकाशीय पिंड हैं, जो लगातार गति में रहते हैं. इसलिए कभी न कभी कोई न कोई ग्रह और आकाशीय पिंड तो पृथ्वी के क़रीब से गुज़रेगा ही. ऐसे में उनके पृथ्वी से टक्कराने की आशंका भी रहती है, लेकिन यह मान लेना कि वह पृथ्वी से टकरा जाएगा और पृथ्वी का विनाश हो जाएगा, सही नहीं कहा जा सकता. :salut:

long
17-04-2011, 10:15 PM
बहुत अच्छी जानकारी दे रहे हो .
धन्यवाद

The ROYAL "JAAT''
18-04-2011, 10:37 PM
माया सभ्यता के कैलेंडर पर यक़ीन करने वाले लोगों का कहना है कि हज़ारों साल पहले ही अनुमान लगा लिया गया था कि 21 दिसंबर, 2012 पृथ्वी पर प्रलय का दिन होगा. भविष्यवाणियों पर यकीन करने वाले लोग कह रहे हैं कि उस दिन पृथ्वी ख़त्म हो जाएगी. यह तारीख़ प्राचीन माया सभ्यता के एक मिथक से जोड़ कर देखी जा रही है. गणित और खगोल विद्या के मामले में बेहद उन्नत मानी गई इस सभ्यता के कैलेंडर में पृथ्वी की उम्र 5126 वर्ष आंकी गई है. ग्रेगेरियन कैलेंडर के मुताबिक़ पृथ्वी का तारीख़ दिन 21 दिसंबर, 2012 है.
प्रलय की बात पर यकीन करने वाले लोगों का कहना है कि माया सभ्यता के अलावा भी कुछ ऐसी बातें हैं जो इसकी पुष्टि करती हैं. उनके मुताबिक़ 26 हज़ार साल में इस दिन पहली बार सूर्य अपनी आकाशगंगा 'मिल्की वे' के केंद्र की सीध में आ जाएगा. इसकी वजह से पृथ्वी बेहद ठंडी हो जाएगी. कुछ लोगों का कहना है कि इससे सूरज की किरणें पृथ्वी पर पहुंचना बंद हो जाएंगी और हर तरफ़ अंधेरा ही अंधेरा छा जाएगा.
बहरहाल, जर्मनी वैज्ञानिकों की चेतावनी के बाद माया सभ्यता और प्रलय के दिन को लेकर एक बार फिर से बहस का दौर शुरू हो गया है.:salut:

The ROYAL "JAAT''
18-04-2011, 11:02 PM
दोस्तों आप भी आपनी कोई जानकारी यहाँ हमारे साथ जरुर बांटे और इस सूत्र पर आपनी राय या सुझाव अवश्य दे.... धन्यवाद

slimsima
19-04-2011, 12:54 PM
बुलेट बाबा के बारे में जानकारी बढ़िया हे

slimsima
19-04-2011, 12:57 PM
उज्जैन के महांकाल मंदिर के बारे में तो सब जानते हे परन्तु वंहा से कुछ दुरी पर एक काल भैरव का भी मंदिर हे वंहा भी प्रसाद में शराब चढाई जाती हे वंहा कालभैरव की मूर्ति साक्षात शराब पीती हे और वो शराब कान्हा जाती हे आज तक नहीं पता चला हे

The ROYAL "JAAT''
19-04-2011, 02:12 PM
उज्जैन के महांकाल मंदिर के बारे में तो सब जानते हे परन्तु वंहा से कुछ दुरी पर एक काल भैरव का भी मंदिर हे वंहा भी प्रसाद में शराब चढाई जाती हे वंहा कालभैरव की मूर्ति साक्षात शराब पीती हे और वो शराब कान्हा जाती हे आज तक नहीं पता चला हे

धन्यवाद slimsima जी आपने इस सूत्र पर अपनी राय दी..पर में महांकाल मंदिर के बारे में कुछ भी नही जनता हूं कृपया आप विस्तार से हमें जानकारी दें....धन्यवाद

sushilnkt
19-04-2011, 02:26 PM
क्या है मंदिर के पीछे की कहानी

स्थानीय लोगों के अनुसार यहां रखी गई मोटरसाइकल ओम सिंह की है। मोटरसाइकिल के पीछे ओमसिंह की तस्वीर भी रखी गई है जिसपर भी यात्री फूल चढ़ाते हैं। बताते हैं कि करीब 20 साल पहले ओम सिंह की यह बाइक यहां फिसलकर टकरा गई थी। इस दुर्घटना में ओमसिंह की मौत हो गई थी।

दुर्घटना के बाद बुलेट बाइक को थाने ले जाया गया था जहां से अगले दिन यह फिर से घटनास्थल पर ही मिली थी। शुरु में पुलिस को लगा कि यह किसी की शरारत होगी। बाइक को दोबारा थाने लाकर उसकी तेल टंकी खाली कर दी गई। लेकिन अगले दिन फिर यह बाइक घटनास्थल पर ही मिली।

जैसे-जैसे यह कहानी फैली आसपास के गांव के लोगों ने वहां एक मंच बनाकर यह मोटरसाइकिल रख दी। तब से इसकी पूजा का रिवाज शुरु हुआ। अब इस मंदिर का एक पुजारी भी है जो यहां नियमित पूजा करता है।

बहुत कमाल की जानकारी मित्र ,,

lotus1782
13-11-2011, 07:25 PM
मज़ा आ गया
बहुत बढ़िया सूत्र है

mamta007
24-11-2011, 02:27 PM
काफी रोचक सूत्र है ..........बहुत हि लाजवाब जानकारी दी है मित्र..........

ben ten
03-12-2011, 01:42 AM
अच्छा सूत्र है। निश्चित रूप से जानकारी बढ़ाने वाला सूत्र

love birds
03-12-2011, 06:42 AM
मित्र रोचक जानकारी है मगर जैसा सूत्र का नाम है रंगिल महेफिल में वो गलत है ये सूत्र सामान्य विभाग का है उसी को दे तो सही है

Raja44
14-12-2011, 05:34 PM
क्या है मंदिर के पीछे की कहानी

स्थानीय लोगों के अनुसार यहां रखी गई मोटरसाइकल ओम सिंह की है। मोटरसाइकिल के पीछे ओमसिंह की तस्वीर भी रखी गई है जिसपर भी यात्री फूल चढ़ाते हैं। बताते हैं कि करीब 20 साल पहले ओम सिंह की यह बाइक यहां फिसलकर टकरा गई थी। इस दुर्घटना में ओमसिंह की मौत हो गई थी।

दुर्घटना के बाद बुलेट बाइक को थाने ले जाया गया था जहां से अगले दिन यह फिर से घटनास्थल पर ही मिली थी। शुरु में पुलिस को लगा कि यह किसी की शरारत होगी। बाइक को दोबारा थाने लाकर उसकी तेल टंकी खाली कर दी गई। लेकिन अगले दिन फिर यह बाइक घटनास्थल पर ही मिली।

जैसे-जैसे यह कहानी फैली आसपास के गांव के लोगों ने वहां एक मंच बनाकर यह मोटरसाइकिल रख दी। तब से इसकी पूजा का रिवाज शुरु हुआ। अब इस मंदिर का एक पुजारी भी है जो यहां नियमित पूजा करता है।
जाट साहब सबसे पहले मैँ आपसे माफी मागता हूं बुलेट देवता के बारे मेँ जिन बुलेट देवता की बात आपने बताई वो हमारे शहर से करीब 35 कि.मी.पर ही स्थित है "ओम बन्ना का थान"कहलाता है बुलेट देवता नहीँ मै खुद औम बन्ना को पर्सनली जानता था उनके साथ उठना बैठना था बुलट चलाते थे उसी से उनका एक्सीडेन्ट हुआ था बाकी बातेँ तो आपने बता ही दी है सब कुछ सच है

madhuu
17-12-2011, 10:23 PM
भाई साब इस सूत्र को आगे बढाईये ना