miss.dabangg
13-04-2011, 04:23 AM
व्*यापार में अवनति व हानि होती है तो मन परेशान रहने लगता है। व्*यापारिक उन्*नति कौन नहीं चाहता है। सभी चाहते हैं। आप भी व्*यापारिक उन्*नति चाहते हैं तो इस प्रयोग को करके देखें-
प्रत्*येक मास की शुक्*लपक्ष की नवमी से यह प्रयोग प्रारम्*भ करके पूर्णिमा तक नित्*य करना है।
कोई नागा नहीं होनी चाहिए।
नवमी को सात्त्विक मन से दूध और चावल की खीर पकाएं।
इस खीर को घर के किसी ऐसे स्*थान पर सायंकाल में ही रख दें जहां चन्*द्र रश्चिमयां पड़ती हों। खीर के पात्र के दायीं ओर एक आटे का दीपक जला दें। यदि सामर्थ्*य हो तो शुद्ध देशी घी का ही प्रयोग करे। घी इतना डालें कि दीपक लगभग छह घंटे तक जलता रहे।
लक्ष्*मी के किसी मन्*त्र की दस माला वहीं आसन पर बैठकर कर लें।
जाप करते समय मुख उत्तर या पूर्व या ईशान की ओर होना चाहिए।
रात्रि दस बजे के उपरान्*त खीर परिवार के सभी सदस्*यों में बांट दें। इस प्रकार प्रतिदिन करें।
अन्तिम दिन अर्थात् पूर्णिमा को खीर का प्रसाद लेने के बाद यथाशक्ति वस्*तुओं जैसे चावल, कर्पूर, मोती, सफेद वस्*त्र, चांदी, बूरा, मिश्री आदि दरिद्रों में बांट दें। सामर्थ्*य न हो तो पांच-दस सिक्*के दान कर दें।
यह पांच माह तक अवश्*यक करें। ऐसा करने से व्*यापार में उन्*नति प्रारम्*भ होने लगेगी।
प्रत्*येक मास की शुक्*लपक्ष की नवमी से यह प्रयोग प्रारम्*भ करके पूर्णिमा तक नित्*य करना है।
कोई नागा नहीं होनी चाहिए।
नवमी को सात्त्विक मन से दूध और चावल की खीर पकाएं।
इस खीर को घर के किसी ऐसे स्*थान पर सायंकाल में ही रख दें जहां चन्*द्र रश्चिमयां पड़ती हों। खीर के पात्र के दायीं ओर एक आटे का दीपक जला दें। यदि सामर्थ्*य हो तो शुद्ध देशी घी का ही प्रयोग करे। घी इतना डालें कि दीपक लगभग छह घंटे तक जलता रहे।
लक्ष्*मी के किसी मन्*त्र की दस माला वहीं आसन पर बैठकर कर लें।
जाप करते समय मुख उत्तर या पूर्व या ईशान की ओर होना चाहिए।
रात्रि दस बजे के उपरान्*त खीर परिवार के सभी सदस्*यों में बांट दें। इस प्रकार प्रतिदिन करें।
अन्तिम दिन अर्थात् पूर्णिमा को खीर का प्रसाद लेने के बाद यथाशक्ति वस्*तुओं जैसे चावल, कर्पूर, मोती, सफेद वस्*त्र, चांदी, बूरा, मिश्री आदि दरिद्रों में बांट दें। सामर्थ्*य न हो तो पांच-दस सिक्*के दान कर दें।
यह पांच माह तक अवश्*यक करें। ऐसा करने से व्*यापार में उन्*नति प्रारम्*भ होने लगेगी।