View Full Version : हार्मोन वाले दूध से कैंसर संभव !
miss.dabangg
21-04-2011, 02:47 PM
दूध बढ़ाने के लिये दिए जाने वाले ‘बोविन ग्रोथ हार्मोन’ या ‘आक्सीटोसिन’ आदि के इंजैक्शनो से अनेक प्रकार के कैंसर होने के प्रमाण मिले हैं। इन इंजैक्शनों से दूध से आईजीएफ-1; इन्सुलीन ग्रोथ फैक्टर-1 नामक अत्यधिक शक्तिशाली वृद्धि हार्मोन की मात्रा सामान्य से बहुत अधिक बढ़ जाती है और मुनष्यों में कोलन, स्तन, प्रोस्टेट, फेफड़ो, आन्तों, पेंक्रियास के कैंसर पनपने लगते हैं।
miss.dabangg
21-04-2011, 02:48 PM
बोवीन ग्रोथ हार्मेान गउओं को देने पर ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड तथा जापान में प्रतिबन्ध लगा हुआ है। यूरोपियन यूनियन में इस दूध की बिक्री नहीं हो सकती। कैनेडा में इस दूध को शुरू करने का दबाव संयुक्त राष्ट्र की ओर से रहा है।
संयुक्त राज्य और इंग्लैण्ड के कई वैज्ञानिकों ने 1988 में ही इस हार्मोन वाले दूध के खतरों की चेतावनी देनी शुरू कर दी थी। आम गाय के दूध से 10 गुणा अधिक ‘आईजीएफ-1’ हार्मोन इन्जैक्शन से प्राप्त किये दूध में पाया गया। एक और तथ्य सामने आया कि दूध में पाए जाने वाले प्राकृतिक ‘आईजीएफ-1’ से सिन्थैटिक ‘आईजीएफ-1’ कहीं अधिक शक्तिशाली है।
miss.dabangg
21-04-2011, 02:49 PM
‘मोनसैण्टो’ आरबीजीएच दूध का सबसे बड़ा उत्पादक होने के नाते इन वैज्ञानिकों खोजों का प्रबल विरोध करने लगा। मोनसेण्टो कम्पनी के विशेषज्ञों के लेख 1990 में छपे कि यह दूध पूरी तरह सुरक्षित है और हानिरहित है। यह झूठ भी कहा गया कि मां के दूध से अधिक ‘आइजीएफ-1’ उनके दूध में नहीं हैं। एक और बड़ा झूठ बोला गया कि हमारे पाचक रस या एन्जाईम आईजीएफ-1 को पूरी तरह पचाकर समाप्त कर देते हैं जिससे शरीर तंत्र पर उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
miss.dabangg
21-04-2011, 02:49 PM
1990 में एफडीए के शोधकर्ताओं ने बताया कि आईजीएफ-1 पाश्चुराईजेशन से नष्ट नहीं होता बल्कि और शक्तिशाली हो जाता है। उन्होंने यह भी स्थापित किया कि अनपची प्रोटीन आंतों के आवरण को भेदकर शरीरतंत्र में प्रविष्ट हो जाती है। आईजीएफ-1 आंतों से रक्त प्रवाह में पहुंच जाता है। चूहों पर हुए प्रयोगों में उनकी तेज वृद्धि होती पाई गई। पर मौनसण्टो में इन सब खोजों को खारिज कर दिया।
miss.dabangg
21-04-2011, 02:50 PM
मार्च 1991 में शोधकर्ताओं ने भूल स्वीकार की; नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हैल्थ में कि आरबीजीएच वाले दूध के आईजीएफ-1 के प्रभाव का मनुष्यों पर अध्ययन अभी तक किया नहीं गया। वे नहीं जानते कि मनुष्यों की आंतों, अमाशय या आईसोफेगस पर इसका क्या प्रभाव होता है।
miss.dabangg
21-04-2011, 02:50 PM
वास्तविकता यह है कि आईजीएफ-1’ वाला दूध पचता नहीं है और इसके एमीनोएसिड नहीं टूटते हैं । यह आन्तों से होकर जैसे का तैसा रक्त प्रवाह में पहुंच जाता है। आगामी खोजों से सिद्व हो गया कि आंतों द्वारा अनपचा यह प्रोटीन रक्त प्रवाह में पहुंचकर कई प्रकार के कैंसर पैदा करने का कारण बनता है।
miss.dabangg
21-04-2011, 02:51 PM
टिप्पणी: उपरोक्त लेख डा. जोसैफ मैरकोला की ईमेल डाक में प्राक्त शोधकर्ता ‘हैन्सआर खारसेन’ एमएसी सीएचई के आलेख व सूचनाओं पर आधरित है। अधिक विवरण और प्रमाणों के लिए mercola.com देखें।
miss.dabangg
21-04-2011, 02:51 PM
‘आईजीएफ-1’ शरीर के कोषों और लीवर में पैदा होने वाला महत्वपूर्ण हार्मोन इन्सूलिन के समान है जो शरीर की वृद्धि का कार्य करता है। यह एक ऐसा पॉलीपीटाईड (Polypetide) है जिसमें 70 एमीनो एसिड संयुक्त हैं। हमारे शरीर में आईजीएफ-1 के निर्माण और नियन्त्राण का कार्य शरीर वृद्धि के कार्य को करने वाले हार्मोन द्वारा होता है। वृद्धि हार्मोन सबसे अधिक सक्रिय तरुणावस्था में होता है, जबकि शरीर तेजी से यौवन की ओर बढ़ रहा होता है। उन्हीं दिनों शरीर के सारे अंग यौवनांगों सहित बढ़ते और विकसित होते हैं। आयु बढ़ने के साथ-साथ इस वृद्धि हार्मोन की क्रियाशीलता घट जाती है। खास बात यह है कि आईजीएफ-1 आज तक के ज्ञात हार्मोनों में सबसे शक्तिशाली वृद्धि (Growth) हार्मोन है।
miss.dabangg
21-04-2011, 02:52 PM
यह हार्मोन शरीर के स्वस्थ तथा कैंसर वाले, दोनों कोषों को बढ़ाने का काम करता है। सन् 1990 में ‘स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय’ द्वारा जारी रपट में बतलाया गया है कि ‘आईजीएफ-1’ प्रोस्टेट के कोषों को बढ़ाता है, उनकी वृद्धि करता है। अगली खोज में यह भी बतलाया गया कि यह स्तन कैंसर की बढ़त को तेज कर देता है।
miss.dabangg
21-04-2011, 02:53 PM
सन् 1995 में ‘नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ हैल्थ’ द्वारा जारी रपट में जानकारी दी गई कि बचपन में होने वाले अनेक प्रकार के कैंसर विकसित करने में इस हार्मोन आईजीएफ-1 की प्रमुख भूमिका है। इतना ही नहीं, स्तन कैंसर, छोटे कोषों वाले फेफड़ों का कैंसर, मैलानोमा, पैंक्रिया तथा प्रोस्टेट कैंसर भी इससे होते हैं।
miss.dabangg
21-04-2011, 02:53 PM
सन् 1997 में एक अन्तराष्ट्रीय अध्ययन दल ने भी प्रमाण एकत्रित करके बताया है कि प्रोस्टेट कैंसर और इस हार्मोन में संबंध पाया गया है। कोलन कैंसर तथा स्तन कैंसर होने के अनेकों प्रमाण शोधकर्ताओं को मिले हैं। 23जनवरी 1998 में हारवर्ड के शोधकर्ताओं ने एक बार फिर नया शोध जारी किया कि रक्त में ‘आईजीएफ-1’ बढ़ने से प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। प्रोस्टेट कैंसर के ज्ञात सभी कारणों में सबसे बड़ा कारण आईजीएफ-1 है। जिनके रक्त में 300 से 500 नैनोग्राम/मिली आईजीएफ-1 था उनमें प्रोस्टेट कैंसर का खतरा चार गुणा अधिक पाया गया। जिनमें यह हार्मोन स्तर 100 से 185 के बीच था, उनमें प्रोस्टेट कैंसर की सम्भावनांए कम पाई गई। अध्ययन से यह महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आया है कि 60 साल आयु के वृद्वों में आईजीएफ-1 अधिक होने पर प्रोस्टेट कैंसर का खतरा 8 गुणा बढ़ जाता है।
आईजीएफ-1 और कैंसर का सीध संबंध होने पर अब कोई विवाद नहीं है। इल्लीनोयस विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक ‘डा. सैम्युल एपस्टीन’ ने इस पर खोज की है। सन् 1996 मे इण्टरनैशनल जनरल ऑफ हैल्थ में छपे उनके लेख के अनुसार गउओं को ‘सिन्थैटिक बोबिन ग्रोथ हार्मोन’ के इंजेक्शन लगाकर प्राप्त किये दूध में ‘आईजीएफ-1’ अत्यधिक मात्रा में होता है। दूध बढ़ाने वाले बोविन ग्रोथ हार्मोन (rBGH) के कारण आईजीएफ-1 की मात्रा दूध में बढ़ती है तथा उस दूध का प्रयोग करने वालों में आतों और छाती के कैंसर की संभावनाएं बढ़ जाती है।
miss.dabangg
21-04-2011, 02:54 PM
डीएनए में परिवर्तन करके जैनेटिक इंजीनियरिंग द्वारा ‘बोविन ग्रोथ हार्मोन’ का निर्माण 1980 में दूध बढ़ाने के लिये किया गया था। लघु दुग्ध उद्योग के सौजन्य से हुए प्रयोगों में बताया गया था कि हर दो सप्ताह में एक बार यह इंजेक्शन लगाने से दूध बढ़ जाता है। 1985 में एफडीए यानी फूड एण्ड ड्र्रग एडमिनिस्टेशन ने संयुक्त राज्य में आरबीजीएच (rBGH or BST) वाले दूध को बेचने की अनुमति दे दी। एक अजीब आदेश एफडीए ने निकाला जिसके अनुसार बोविन और बिना बोविन वाले दूध का लेबल दूध पर लगाना वर्जित कर दिया गया था। उपभोक्ता के इस अधिकार को ही समाप्त कर दिया कि वह हार्मोन या बिना हार्मोन वाले दूध में से एक को चुन सके। ‘एफ डीए’ किसके हित में काम करता है? अमेरीका की जनता के या कम्पनियों के? बेचारे अमेरीकी !
miss.dabangg
21-04-2011, 02:54 PM
इन हार्मोनों के असर से मनुष्यों को कैंसर जैसे रोग होते हैं तो उनसे वे गाय-भैंस गम्भीर रोगों का शिकार क्यों नही बनेगे ? आपका गौवंश पहले 15-18 बार नए दूध होता था, अब 2-4 बार सूता है। गौवंश के सूखने और न सूने का सबसे बड़ा कारण दूध बढ़ाने वाले हार्मोन हैं।
miss.dabangg
21-04-2011, 02:55 PM
कृत्रिम गर्भाधन रोगों का और नए दूध न होने; न सूने का दूसरा बड़ा कारण है। सरकारी आंकडे़ इसका प्रमाण हैं कि कृत्रिम गर्भाधन की सफलता बहुत कम ;लगभग 45 प्रतिशतहै और प्राकृतिक की लगभग दुगनी है। कृत्रिम गर्भाधन को बढ़ावा देने वाले विभाग ऐसा कहें तो मानना होगा कि कृत्रिम गर्भाधन की सफलता उनके बताए से बहुत कम हो सकती है। हम गौवंश को उनके शरीर की प्राकृतिक मांग से वंचित करके उसे बीमार बनाने में सहयोग दे रहें हैं। क्या यह एक पाप कर्म नही ? फिर परिणाम ठीक कैसे हो सकते हंै?
miss.dabangg
21-04-2011, 02:55 PM
पर बात इतनी ही नहीं। कृत्रिम गर्भाधन की भारी असफलता और गौवंश कें नए दूध न होने का एक कारण उनके गर्भाशय में संक्रमण होना भी है। कृत्रिम गर्भाधन के प्रयास में अनेक घाव होने की संभावना होती है।
हमने एक प्रयोग में पाया कि 3 बार के प्रयास से गाय गर्भवती नहीं हुई, उसके निकट एक स्वदेशी बैल बांध तो एक इंजैक्शन में ही सफलता मिल गई। अतः प्राकृतिक गर्भाधान करवाएंगे तो भावानात्मक संतुष्टि के कारण गौवंश स्वस्थ, प्रसन्न, दुधारू रहेगा और अनेक बार सूएगा। गौवंश की वंशावली पर आपका नियंत्रण रह सकेगा।
miss.dabangg
21-04-2011, 02:56 PM
एक और आयामः गौपालकों को भारत की वर्तमान परिस्थितियों में अनेकों कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। इन समस्याओं का एक आयाम गौवंश चिकित्सा है। एलोपैथी चिकित्सा के अत्यधिक प्रचार का शिकार बनकर हम अपनी प्रमाणिक पारम्परिक चिकित्सा भुला बैठे हैं। परिणामस्वरूप चिकित्सा व्यय बहुत बढ़ गया और दवाओं के दुष्परिणाम भी भोगने पड़ रहें हैं। मृत पशुओं का मांस खाकर गिद्धों की वंश समाप्ति का खतरा पैदा हो गया है। जरा विचार करें कि इन दवाओं के प्रभाव वाला दूध, गोबर, गौमूत्रा कितना हानिकारक होगा ? इन दवाओं के दुष्प्रभावों से भी अनेकों नए रोग लगते हैं, जीवनी शक्ति घटती चली जाती है।
miss.dabangg
22-04-2011, 06:29 AM
http://www.antarvasna.com/forum/reputation.php?do=addreputation&p=184573
munmun babita
03-05-2011, 05:56 PM
हार्मोन वाले दूध से कैंसर संभव : डॉ. राजेश कपूर का लेख.
http://khabarindiya.com/index.php/articles/show/2054_harmon_wale_doodh_se_cancer
अफ़सोस जो लेख केवल एक ही पोस्ट में पूरा कापी किया जा सकता है, उसे टुकडो टुकडो में ४-५ भागो में पोस्ट किया गया, सर्वर पे अनावश्यक लोड बढाया गया, शायद अपना पोस्ट काउंट बढाने के लिए.
munmun babita
03-05-2011, 06:07 PM
मेने इन सब लेखक का नाम क्या बोल दिया की मुझे लगातार नेगेटिव मिलने लगे अच्छा हे आज पता चला दबंग जी तो नेगेटिव देने मैं और दिलवाने मैं बहुत ही समजदार हे
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