View Full Version : बाबा का निधन या ब्रम्हलीन !
miss.dabangg
27-04-2011, 03:10 PM
http://khabarindiya.com/uploads/articles_media/2011/04/sathya_sai_baba.jpg106344106344 23 नवंबर 1926 को जन्मे सत्यनारायण कालांतर में भगवान सत्य साई बन गए। उन्होंने खुद को शिरडी के फकीर साई बाबा का अवतार बताया। धीरे धीरे लोगों की आस्था बाबा में इस कदर बढ़ी कि आज देश में ही बाबा को चाहने वालों की तादाद करोड़ों मंे पहुंच चुकी है। बाबा का जीवन चमत्कार और विवादों से भरा रहा है। सत्य साई बाबा पर अनेकानेक अरोप लगे, किन्तु बाबा ने कभी किसी आरोप का जवाब देना मुनासिब नहीं समझा।
miss.dabangg
27-04-2011, 03:12 PM
सत्य साई बाबा अपने आप को शिरडी वाले साई बाबा का दूसरा अवतार मानते थे और उनका मत था कि साई बाबा तीन अवतार लेंगे। बकौल सत्य साई बाबा अब साई बाबा का तीसरा अवतार कर्नाटक के मंडिया जिले के गुनपर्थी गांव में प्रेम साई के तौर पर होगा। इस तरह देखा जाए तो साई बाबा की मेहर महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक अर्थात कमोबेश दक्षिण भारत पर ही ज्यादा रहेगी। वैसे कहा जाता है कि ब्रम्हलीन होने के पहले शिरडी वाले साई बाबा ने भविष्यवाणी की थी कि उनका उत्तराधिकारी मद्रास प्रेजीडेंसी में जन्मेगा। उस वक्त अनंतपुर जिला मद्रास प्रेजीडेंसी का एक अंग था।
miss.dabangg
27-04-2011, 03:13 PM
गौरतलब है कि उत्तर भारत में त्रिकुटा की पर्वत श्रृंखलाओं में विराजी माता वेष्णो देवी का जयकारा देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली में जमकर हुआ करता था। दिल्ली में माता की चौकियों और रतजगा को गिनने में ही पसीना आ जाता था। आज दिल्ली का परिदृश्य काफी हद तक बदला हुआ है। दिल्ली में माता की चौकियों का स्थान शिरडी के साई बाबा की भक्ति संध्या ने ले लिया है।
miss.dabangg
27-04-2011, 03:13 PM
यह उतना ही सच है जितना कि दिन और रात कि साई के नाम की दुकान भारत जैसे धर्मभीरू देश में जमकर चल निकली है। जहां देखो वहां शिरडी के साई बाबा के मंदिर दिखाई पड़ जाते हैं। इन मंदिरों में आने वाले चढ़ावे के बारे में किसी को कुछ नहीं पता होता है। आज देश में तिरूपति में विराजे गोविंदा, शिरडी के साई बाबा, कटड़ा की माता वेष्णव देवी और भगवान शनि की गिनती सबसे अमीर भगवान मंे होती है।
miss.dabangg
27-04-2011, 03:14 PM
इन चारों के नाम की दुकानें जमकर फल फूल रही हैं। लोग धर्म की आड़ में पैसे बनाने का खेल खेल रहे हैं। इसी प्रसंग में एक वाक्या बताना लाजिमी होगा। हमारे एक स्कूल के समय के मित्र दशकों बाद मिले तब हमने उनसे पूछा मित्रवर क्या कर रहे हो आजकल? प्रश्न आजीविका से संबंधित था। छूटते ही बोले -‘‘यार पुश्तैनी जमीन बेची पंद्रह लाख मिले सो सतना और मैहर के बीच चार मंदिर डाल दिए हैं।‘‘ हम आवक रह गए, मंदिर डाल दिए इस तरह बोले मानो दुकानें डाल दी हों। देश भर के साई मंदिरों मंे निन्यानवे फीसदी मंदिरों का ट्रस्ट न होना दुख की बात ही है।
बहरहाल सत्य साई बाबा ब्रम्हलीन हुए या उनका निधन हुआ यह बात कोई भी दावे के साथ नहीं कह सकता। चौबीसों घंटे एक खबर को ही रूमाल से तान तानकर चादर बना देने वाले समाचार चेनल रविवार सुबह से ही चीख चीख कर कह रहे थे कि सत्य साई बाबा का निधन! बचपन से ही सुना और पढ़ा है कि भगवान या संत सदा ही ब्रम्हलीन हुआ करते हैं। वे नश्वर देह त्यागते हैं, उनका निधन नहीं होता।
miss.dabangg
27-04-2011, 03:14 PM
एक प्रश्न और दिमाग में कौंध रहा है। हो सकता है सत्य साई बाबा को भगवान मानने वाले इससे आहत हों किन्तु हमारा उद्देश्य कतई किसी को आहत करना या किसी की शख्सियत पर शंका करना नहीं है पर मानव स्वभाव है उत्सुकता की शांति आवश्यक है। प्रश्न यह कि अगर कोई भगवान है तो उसे मानव द्वारा इजाद की गई जीवनरक्षक प्रणालियों पर निर्भर रहने की आवश्यक्ता क्यों आन पड़ी, वह भी 27 दिनों तक।
miss.dabangg
27-04-2011, 03:15 PM
सत्य साई बाबा के कुछ कर्म एसे हैं जिनकी हम क्या समूची दुनिया मुक्त कंठ से प्रशंसा करती है। उनके मानवता वाले कामों के लिए तो उन्हें सैल्यूट करने का दिल करता है। बाबा ने सत्य साई मेडिकल ट्रस्ट की स्थापना की जिसके द्वारा देश भर में 4000 से ज्यादा मेडिकल सेंटर्स संचालित हो रहे हैं, जिनमें बिना किसी शुल्क के गरीब गुरबों का इलाज होता है। पुट्टपर्थी में दो सौ बिस्तरों वाला अत्याधुनिक अस्पताल, राजकोट का हार्ट अस्पताल आदि कुछ एसे अभिनव काम है जिनके लिए सत्य साई बाबा हमेशा ही याद किए जाते रहेंगे। शिक्षा के क्षेत्र में भी सत्य साई बाबा ने खासा ध्यान दिया है। बाबा द्वारा आरंभ किए गए शिक्षण संस्थनों में न जाने कितने गरीब शिक्षा पा रहे हैं। दुनिया के चौधरी अमेरिका में बाबा के 26, तो आफ्रीका में 9, यूरोप में चार, एशिया में 17 शिक्षण संस्थान संचालित हैं।
miss.dabangg
27-04-2011, 03:16 PM
बाबा ने सबसे उत्तम काम किया है, सुदूर ग्रामीण आंचलों में पानी की सुविधा का। बाबा ने भागीरथ का अवतार बनकर वह काम कर दिया जो देश के शासकों ने आजादी के छः दशकों बाद भी नहीं किया। आंध्रप्रदेश में सूखा ग्रस्त अंचल जिसमें 731 गांव शामिल थे में पानी की हजारों किलो मीटर लंबी लाईन 1995 में बिछवाई। बाबा के निर्देश पर यह काम महज डेढ़ साल की रिकार्ड अवधि में पूरा हुआ।
miss.dabangg
27-04-2011, 03:16 PM
इसके अलावा बाबा ने अनंतपुर जिले में वाटर प्रोजेक्ट को पूरा किया। बाबा के प्रयासों ने करोड़ों प्यासे कंठ आज सूखे नहीं हैं। सत्या साई बाबा ने 2007 में ईस्ट और वेस्ट गोदावरी योजना को पूरा कर सरकार को सौंपा था। सत्य साई की इस कृपा से 2253 गांवों के रहवासियों को अनमोल पानी निर्बाध रूप से मिल रहा है।
miss.dabangg
27-04-2011, 03:17 PM
सत्य साई बाबा जीते जी किवदंती बन गए थे। उनके भक्तों में अनेक मशहूर शख्सियत शामिल थीं। पूर्व महामहिम राष्ट्रपति कलाम, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी, क्रिकेट के लिटिल मास्टर सुनील गावस्कर, इक्कीसवीं सदी के क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर, जैसे नामों का शुमार था। बाबा के अवसान पर सूमूचे देश में शोक की लहर है। राजनेता, उद्योगपति, संत्री मंत्री सभी सत्य साई को श्रृद्धांजली दे रहे हैं आवाज नहीं आई तो कांग्रेस के सत्ता और शक्ति के शीर्ष केंद्र 10 जनपथ यानी सोनिया के आवास से। उन्होंने अब तक इस बारे में दो शब्द बोलना भी मुनासिब नहीं समझा है।
miss.dabangg
27-04-2011, 03:17 PM
वैसे विवादों से सत्य साई बाबा का पुराना रिश्ता रहा है। सत्य साई का जीवन विवादों से घिरा ही रहा। अनेक विदेशी पर्यटकों ने सत्य साई पर समलैंगिगता और युवाओं के साथ यौन शोषण के आरोप लगाए। 1990 में एक भक्त ने उन पर सार्वजनिक तौर पर जनता को गुमराह करने के साथ ही साथ यौन शोषण का आरोप मढ दिया। हैदराबाद में एक समारोह में बाबा ने हवा में हाथ लहराकर सोने की चेन निकाली, बाद में वीडियो फुटेज में पता चला कि वह चेन बाबा की अस्तीन से ही निकली थी। मशहूर जादूगर पी.सी.सरकार ने बाबा की मौजूदगी में ही उनके आश्रम में हवा में हाथ लहराकर रसगुल्ला निकालकर विवादों को जमकर हवा दी। एक निजी समाचार चैनल ने तो बाबा के करिश्मों के बारे में लगातार कई दिन तक खबरें प्रसारित की जिनमें बाबा के चमत्कारों को हाथ की सफाई का दर्जा दिया गया था।
miss.dabangg
27-04-2011, 03:18 PM
सत्य साई की संपत्ति का अनुमान लगाना कठिन ही है। कोई कहता है वे चालीस हजार करोड़ रूपए की संपत्ति के मालिक थे तो कोई पचपन हजार करोड़ रूपए की संपत्ति आंक रहा है। जो भी हो बाबा के निधन या ब्रम्हलीन होने के उपरांत अब उनकी संपत्ति के लिए मारकाट मचना आरंभ हो जाएगी। जिस तरह महर्षि महेश योगी के ब्रम्हलीन होने के बाद उनके परिजनों में संपत्ति को लेकर विवाद हुआ वह संतों के परिजनों को शोभा नहीं देता। बेहतर होगा सत्य साई की संपत्ति को परमार्थ के कामों में ईमानदारी से लगाया जाए।
miss.dabangg
27-04-2011, 03:19 PM
सत्य साई के अवसान के बाद अब यक्ष प्रश्न यही बना हुआ है कि उनकी बेहिसाब संपत्ति वाले ट्रस्ट पर किसकी हुकूमत चलेगी। जो नाम अभी सामने आ रहे हैं उनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे के.चक्रवर्ती का नाम सबसे उपर है। बाबा के सबसे विश्वस्त चक्रवर्ती ने 1991 में नौकरी को टाटा कहकर बाबा की शरण अपना ली थी। इसके बाद नाम आता है सत्य साई के भाई के बेटे आर.जे.रत्नाकर का। एमबीए की डिग्रीधारी रत्नाकर को बाबा के ट्रस्ट में अधिकाधिक लोगों का समर्थन प्राप्त है। वैसे भारतीय प्रशासनिक सेवा के एक अन्य अधिकारी एस.वी.गिरी का नाम भी इसके लिए चल रहा है। जानकारों का मानना है कि अगर मारकाट मची तो सरकार आंध्र प्रदेश सरकार के 1959 के हिंदु धर्म एवं परोपकारी निधि कानून का सहारा लेकर ट्रस्ट का अधिग्रहण कर सकती हैै।
miss.dabangg
27-04-2011, 03:20 PM
हिन्दुस्तान की संस्कृति कुछ इस कदर धर्मपरायण है कि यहां की धर्मभीरू जनता धर्म के नाम पर दोनों हाथें से धन लुटाती है। तिरूपति बालाजी, वेष्णो देवी, शिरडी में जब दान पेटियां खुलती हैं तो गुप्त दान देखकर लोग दांतों तले उंगलियां दबा लेते हैं। इस धन में खून पसीने से कमाए धन के साथ ही साथ अवैध तरीके से कमाया काला धन भी होता है जिससे लोग भगवान को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। जो भी हो पर यह धन है तो देश की गरीब जनता का ही। इन परिस्थितियों में सरकार पर यह जवाबदारी आहूत होती है कि वह यह सुनिश्चित करे कि सत्य साई बाबा के अवसान के उपरांत उनकी संपत्ति को सही हाथों में सौंपा जाए, ताकि सत्य साई के परमार्थ लोक कल्याण के इरादों पर कोई पानी न फेर सके।
lalji1964
27-04-2011, 03:27 PM
मैडम जी आपने बहुत ही अच्छा किया, जिसमे सत्य -साईं की कुछ झलकियाँ प्रस्तुत कर एक महान संत के गौरव को बढ़ा दिया !इसके लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद !
Miss Smarty Pants
27-04-2011, 05:38 PM
अच्छा सूत्र बनाया है आपने दबंग जी. सत्य साई बाबा के जीवन के कई पहलूओं को जानने का मौका मिला. वैसे मैं तो ज्यादातर उनके विवादों वाले पहलू से ही परिचित थी और व्यक्तिगत रूप स मैं उन्हें महान संतों की केटेगरी में नहीं रखती. परन्तु आपके सूत्र में ये जान कर अच्छा लगा कि उन्होंने जनकल्याण के लिए भी कदम उठाए थे.. वैसे भी इतनी बड़ी मात्र में दान दक्षिणा मिले तो फिर उसका कुछ इस्तेमाल इस दिशा में भी होना ही चाहिए. आशा है की उनकी अकूत सम्पति किसी कि निजी समाप्ति बन कर न रह जाये और उसका ज्यादा से ज्यादा उपयोग जनकल्याण में हो..
VIDROHI NAYAK
27-04-2011, 07:45 PM
बाबा जी की आधिकारिक सम्पति लगभग 40 हज़ार करोण की थी ...वैसे यह आधिकारिक है और कायास तो लगभग एक लाख तीस करोण की संपत्ति के हैं , जिसमे दान में मिले हीरे जवाहरात शामिल नहीं है ! अब ऐसे में अगर मात्र एक - एक करोण के अस्पताल बनाए जाते तो लगभग चार सौ गाँव लाभान्वित होते ! ...ये तो एक छोटा सा अनुमान है ...वैसे इस देश को कंगाल करने में तो इन बाबाओं का पूरा हाँथ है !
Mr. laddi
30-04-2011, 05:44 PM
काफी रोचक जानकारी है मैडम रेप + कबूल करे
धन्यवाद
slimsima
06-05-2011, 04:54 PM
आपने किस जानकारी के आधार पर कहा की साईं नाथ ने अपने दुसरे अवतार की घोषणा की थी
साईं बाबा सर्वप्रथम शिर्डी में एक नीम के वृक्ष के नीच प्रकट हुए १६ साल की आयु अति तेजस्वी मुखारविंद जिसे देकते ही प्रणाम करने को जी करे भारी सर्दी कमौसम हो या तप्त गर्मी की ऋतू मुसलाधार बरसात बरसती हो वो साधू किशोर वन्ही बैठा रहता लोग जो कुछ देते वो खा लेता उसके पास एक कफनी एक पटुए का टुकड़ा एक ईंट तथा एक दंड था वो इन चीजों को गुरु की प्र्शादी कहता था न किसी के साथ बातचीत न कुछ एक बार एक भक्त के शारीर में खंडोबा देव ने प्रवेश किया लोगों ने उनसे पूछा की वो साधू किशोर कौन हे तब खंडोबा लोगो को ले कर उस किशोर के पास गए और उस किशोर ने वंहा खुदाई करने को कहा कुदाई करने पर वंहा एक पत्थर डिकी दिया और उसे उठाने पर सीढियाँ दिखाई दी लोग सीढियों से निचे उतरे तो गो मुखी आकर की गुफा में चार दीपक जाल रहे थे एक आसन पर ताजा फूलो का ढेर था और ४ दीपक जल रहे थे
आसन पर ताजा फूलों का ढेर था उस किशोर ने कहा की ये मेरे गुरु का स्थान हे इसे यथा स्थिति रहने दे लोगों ने सब चीजें पूर्ववत रख दी और बाहर निकल आये उसके बाद वो साधू किशोर वंहा नहीं दिखाई दिया औरंगा बाद जिले के धुप गाँव में चाँद पाटिल नामक एक मुस्लिम गृहस्ती रहता था उसकी घोड़ी खो गई थी हर जगह दुदने पर भी वो ना मिली तब वो निराश हो कर अपने गाँव लोट रहा था रास्ते में उसने एक फकीर को बैठे हुए देखा (साईं बाबा का ये दूसरी बार प्राकट्य)वो चिलम फुकने की तयारी कर रहे थे उन्होंने चान पाटिल को रोका और चिलम के दो दम मार कर जाने को कहा उन्होंने जमीं में चिमटा घुसेड कर अंगारा निकला फिर डंडा जमीं पर ठोंका तो उसमे से जल धरा बह निकली उसमे साफी को भिगोया और निचोड़ कर चिलम पर लपेटा और चिलम के दो दम मारे फिर चाँद पाटिल को दी उसने भी दो दम मारे और चाँद ने अपनी घोड़ी खो जाने की बात फकीर को बताई तब फकीर ने कहा पास वाले नाले में तलाश करो चाँद ने वंहा तलाश किया थो उसके आनंद की कोई सीमा नहीं
रही वंहा उसकी घोड़ी चारा चार रही थी वो घोड़ी ले कर फकीर के पास आया उसने फकीर को अपने घर पधारने की विनती की फकीर उसके साथ उसके घर जा कर रहे चाँद पाटिल के साले की सगाई शिर्डी गाँव में हुई थी और उसके विवाह का शुभ अवसर आ पंहुचा था बारात शिर्डी गाँव जाने को रवाना हुई तो फकीर भी बारात के साथ शिर्डी आये बारात शिर्डी में महान्सपति के खेत में एक वाट वृक्ष के निचे ठहरी तब धर्मिक वृत्ति के महंसा पति ने या साईं कह कर उनका सत्कार किया तब उन फकीर का नाम साईं बाबा पद गया बारात तो शादी के बाद धुप गाव चली गई पर साईं बाबा वन्ही शिर्डी में ठहर गए उन्होंने एक टूटी फूटी मस्जिद में अपना मुकाम किया नाम रखा द्वारका माई वे हिन्दू योगी की भांति धुनी रमाते शाम को भजन कीर्तन तथा आरती होती यदि कोई उनसे अपना दुःख कहता तो वे कहते'' अल्ला मालिक हे '' बाबा हिन्दू हे या मुसल्मा ये किसी को जानकारी नहीं थी इसलिए उनका किसी ने विरोध नहीं किया एक दो मुसलमानों ने विरोध करने की कोशिश की पर बाबा को देखते ही उनका विरोध गायब हो गया वे बाबा के भक्त हो गए साईं बाबा ने द्वारका मई में अखंड धुनी रमई जो आज भी चालु ही हे उस धुनी की उडी बाबा बीमारों को देते थे थो उनका दर्द मिट जाता था लोग उनके लिए तरह तरह के भोजन थाल ले कर आते परन्तु वे उसे दर्शनार्थियों को बाँट देते और स्वयं झोली और भिक्षा पात्र ले कर भिक्षा मागने चल पड़ते थोडा अपने लिए बचा कर बाकी कोने में पड़ी कुण्डी में दाल देते वंहा से बच्चे पंखी आदि कोई भी खा लेता बाबा ब्रहम ज्ञानी थे अष्ट सिद्धि तथा नव निधि उनको सिद्ध थी वे सभी जीवो को सामान भाव से देखते थे एक बार एक महल्कारी ने अपने महमान डॉक्टर से साईं बाबा के दर्शन हेतु आने को कहा तब डॉक्टर ने कहा में मुसलमान के पाँव नहीं पड़ता तब महल्कारी ने कहा केवल दर्शन कीजिये मुकाम पर पहुँच कर डॉक्टर ने बाबा को श्ष्तंग दंडवत कियाऔर वंहा हो रही राम धुन मई भी शामिल हुए वापस लौट कर महल्कारी ने डॉक्टर से पूछा की आपका कैसा अनुभव रहा तो उन्होंने कहा की मैंने साईं बाबा में श्रे राम के दर्शन किये हर एक भक्त को अपना इष्ट देवता साईं बाबा में दिखाई देता किसी को वे कृष्ण के रूप में दिखाई देते तो किसी को हनुमान के रूप में किसी को दतात्रे और किसी को वे अक्कल कोट स्वामी (शेगाँव के गज नान बाबा )के रूप में भी दिखाई देते थे इस प्रकार जैसी जिसकी भावना वैसे स्वरुप में साईं बाबा उसे दिखाई देते एक बार शिर्डी में महा मारी फैली घर घर में महा मारी का रोग लागू हो गया तब बाबा ने सबसे रुई को जला कर घी में घोंट कर महा मारी किजघा पर लेप करने को कहा इससे सबको आराम हुआ पर बाबा के शारीर मई कई जगहों पर प्लेग की गांठे निकल आई बाबा ने हंसते मुह से ऐसा भरी दुःख सहन किया बाबा के परम भक्त तात्या कोटे की माँ बेजा बाई का व्रत था की वो बाबा को खिलने के बाद ही भोजन ग्रहण कटी बाबा आसपास के खेतों में जंगल में चुप जाते पर वो उन्हें धुंद कर भोजन कराती उसके बाद ही स्वयं भोजन करती माता की मृत्यु के बाद तात्या ने भी माता का व्रत चालु रखा वे बाबा को खिला कर ही भोजन करते एक बार तात्या ने पूछा की बाबा मेरी मृत्यु कब होगी तो बाबा ने कहा १९४० किअश्विन शुक्ल दसवी को तात्या को लगा बाबा मजाक कर रहे है पर अश्विन शुक्ल दसवी को तात्या भरी बुखार की चपेट में फंसे उनको लगा की बाबा की bhavishyvani सत्य सिद्ध होगी वे चुपचाप बाबा का स्मरण करने लगे पर विजय दशमी का प्रभात होते होते तात्या का बुखार उतरने लगा और बाबा बुखार से तपने लगे सब लोग बाबा की सेवा सुश्रुषा करने के लिए विनती करने लगे तब बाबा ने पूछा की मेरा समय पूरा हुआ और बाबा ने प्रसन्न चित हो देह त्याग किया वे चाहते तो वर्षों तक जीवित रह सकते थे पर अपने भक्त की मृत्यु अपने शरीर पर ले कर बाबा ने इस देह का त्याग किया
साईं बाबा आज भी निराकार स्वरूप में शिर्डी में बिराज मान हे जो कोई उनसे अपना दुःख दूर करने की विनती करता हे उसका दुःख दूर हो जाता हे
साईं बाबा ने आजीवन धन माया को हाथ नहीं लगाया कोई आश्रम नहीं बनवाया न ही अपना उत्तर धिकारी किसी को चुना वो एक सच्चे संत और सर्वोच्च शक्ति का रूप थे ऐसे परम संत की तुलना किसी से करना बेमानी हे (ऐसा मेरा विचार हे )
kamesh
06-05-2011, 05:33 PM
आपने किस जानकारी के आधार पर कहा की साईं नाथ ने अपने दुसरे अवतार की घोषणा की थी
साईं बाबा सर्वप्रथम शिर्डी में एक नीम के वृक्ष के नीच प्रकट हुए १६ साल की आयु अति तेजस्वी मुखारविंद जिसे देकते ही प्रणाम करने को जी करे भारी सर्दी कमौसम हो या तप्त गर्मी की ऋतू मुसलाधार बरसात बरसती हो वो साधू किशोर वन्ही बैठा रहता लोग जो कुछ देते वो खा लेता उसके पास एक कफनी एक पटुए का टुकड़ा एक ईंट तथा एक दंड था वो इन चीजों को गुरु की प्र्शादी कहता था न किसी के साथ बातचीत न कुछ एक बार एक भक्त के शारीर में खंडोबा देव ने प्रवेश किया लोगों ने उनसे पूछा की वो साधू किशोर कौन हे तब खंडोबा लोगो को ले कर उस किशोर के पास गए और उस किशोर ने वंहा खुदाई करने को कहा कुदाई करने पर वंहा एक पत्थर डिकी दिया और उसे उठाने पर सीढियाँ दिखाई दी लोग सीढियों से निचे उतरे तो गो मुखी आकर की गुफा में चार दीपक जाल रहे थे एक आसन पर ताजा फूलो का ढेर था और ४ दीपक जल रहे थे
आसन पर ताजा फूलों का ढेर था उस किशोर ने कहा की ये मेरे गुरु का स्थान हे इसे यथा स्थिति रहने दे लोगों ने सब चीजें पूर्ववत रख दी और बाहर निकल आये उसके बाद वो साधू किशोर वंहा नहीं दिखाई दिया औरंगा बाद जिले के धुप गाँव में चाँद पाटिल नामक एक मुस्लिम गृहस्ती रहता था उसकी घोड़ी खो गई थी हर जगह दुदने पर भी वो ना मिली तब वो निराश हो कर अपने गाँव लोट रहा था रास्ते में उसने एक फकीर को बैठे हुए देखा (साईं बाबा का ये दूसरी बार प्राकट्य)वो चिलम फुकने की तयारी कर रहे थे उन्होंने चान पाटिल को रोका और चिलम के दो दम मार कर जाने को कहा उन्होंने जमीं में चिमटा घुसेड कर अंगारा निकला फिर डंडा जमीं पर ठोंका तो उसमे से जल धरा बह निकली उसमे साफी को भिगोया और निचोड़ कर चिलम पर लपेटा और चिलम के दो दम मारे फिर चाँद पाटिल को दी उसने भी दो दम मारे और चाँद ने अपनी घोड़ी खो जाने की बात फकीर को बताई तब फकीर ने कहा पास वाले नाले में तलाश करो चाँद ने वंहा तलाश किया थो उसके आनंद की कोई सीमा नहीं
रही वंहा उसकी घोड़ी चारा चार रही थी वो घोड़ी ले कर फकीर के पास आया उसने फकीर को अपने घर पधारने की विनती की फकीर उसके साथ उसके घर जा कर रहे चाँद पाटिल के साले की सगाई शिर्डी गाँव में हुई थी और उसके विवाह का शुभ अवसर आ पंहुचा था बारात शिर्डी गाँव जाने को रवाना हुई तो फकीर भी बारात के साथ शिर्डी आये बारात शिर्डी में महान्सपति के खेत में एक वाट वृक्ष के निचे ठहरी तब धर्मिक वृत्ति के महंसा पति ने या साईं कह कर उनका सत्कार किया तब उन फकीर का नाम साईं बाबा पद गया बारात तो शादी के बाद धुप गाव चली गई पर साईं बाबा वन्ही शिर्डी में ठहर गए उन्होंने एक टूटी फूटी मस्जिद में अपना मुकाम किया नाम रखा द्वारका माई वे हिन्दू योगी की भांति धुनी रमाते शाम को भजन कीर्तन तथा आरती होती यदि कोई उनसे अपना दुःख कहता तो वे कहते'' अल्ला मालिक हे '' बाबा हिन्दू हे या मुसल्मा ये किसी को जानकारी नहीं थी इसलिए उनका किसी ने विरोध नहीं किया एक दो मुसलमानों ने विरोध करने की कोशिश की पर बाबा को देखते ही उनका विरोध गायब हो गया वे बाबा के भक्त हो गए साईं बाबा ने द्वारका मई में अखंड धुनी रमई जो आज भी चालु ही हे उस धुनी की उडी बाबा बीमारों को देते थे थो उनका दर्द मिट जाता था लोग उनके लिए तरह तरह के भोजन थाल ले कर आते परन्तु वे उसे दर्शनार्थियों को बाँट देते और स्वयं झोली और भिक्षा पात्र ले कर भिक्षा मागने चल पड़ते थोडा अपने लिए बचा कर बाकी कोने में पड़ी कुण्डी में दाल देते वंहा से बच्चे पंखी आदि कोई भी खा लेता बाबा ब्रहम ज्ञानी थे अष्ट सिद्धि तथा नव निधि उनको सिद्ध थी वे सभी जीवो को सामान भाव से देखते थे एक बार एक महल्कारी ने अपने महमान डॉक्टर से साईं बाबा के दर्शन हेतु आने को कहा तब डॉक्टर ने कहा में मुसलमान के पाँव नहीं पड़ता तब महल्कारी ने कहा केवल दर्शन कीजिये मुकाम पर पहुँच कर डॉक्टर ने बाबा को श्ष्तंग दंडवत कियाऔर वंहा हो रही राम धुन मई भी शामिल हुए वापस लौट कर महल्कारी ने डॉक्टर से पूछा की आपका कैसा अनुभव रहा तो उन्होंने कहा की मैंने साईं बाबा में श्रे राम के दर्शन किये हर एक भक्त को अपना इष्ट देवता साईं बाबा में दिखाई देता किसी को वे कृष्ण के रूप में दिखाई देते तो किसी को हनुमान के रूप में किसी को दतात्रे और किसी को वे अक्कल कोट स्वामी (शेगाँव के गज नान बाबा )के रूप में भी दिखाई देते थे इस प्रकार जैसी जिसकी भावना वैसे स्वरुप में साईं बाबा उसे दिखाई देते एक बार शिर्डी में महा मारी फैली घर घर में महा मारी का रोग लागू हो गया तब बाबा ने सबसे रुई को जला कर घी में घोंट कर महा मारी किजघा पर लेप करने को कहा इससे सबको आराम हुआ पर बाबा के शारीर मई कई जगहों पर प्लेग की गांठे निकल आई बाबा ने हंसते मुह से ऐसा भरी दुःख सहन किया बाबा के परम भक्त तात्या कोटे की माँ बेजा बाई का व्रत था की वो बाबा को खिलने के बाद ही भोजन ग्रहण कटी बाबा आसपास के खेतों में जंगल में चुप जाते पर वो उन्हें धुंद कर भोजन कराती उसके बाद ही स्वयं भोजन करती माता की मृत्यु के बाद तात्या ने भी माता का व्रत चालु रखा वे बाबा को खिला कर ही भोजन करते एक बार तात्या ने पूछा की बाबा मेरी मृत्यु कब होगी तो बाबा ने कहा १९४० किअश्विन शुक्ल दसवी को तात्या को लगा बाबा मजाक कर रहे है पर अश्विन शुक्ल दसवी को तात्या भरी बुखार की चपेट में फंसे उनको लगा की बाबा की bhavishyvani सत्य सिद्ध होगी वे चुपचाप बाबा का स्मरण करने लगे पर विजय दशमी का प्रभात होते होते तात्या का बुखार उतरने लगा और बाबा बुखार से तपने लगे सब लोग बाबा की सेवा सुश्रुषा करने के लिए विनती करने लगे तब बाबा ने पूछा की मेरा समय पूरा हुआ और बाबा ने प्रसन्न चित हो देह त्याग किया वे चाहते तो वर्षों तक जीवित रह सकते थे पर अपने भक्त की मृत्यु अपने शरीर पर ले कर बाबा ने इस देह का त्याग किया
साईं बाबा आज भी निराकार स्वरूप में शिर्डी में बिराज मान हे जो कोई उनसे अपना दुःख दूर करने की विनती करता हे उसका दुःख दूर हो जाता हे
साईं बाबा ने आजीवन धन माया को हाथ नहीं लगाया कोई आश्रम नहीं बनवाया न ही अपना उत्तर धिकारी किसी को चुना वो एक सच्चे संत और सर्वोच्च शक्ति का रूप थे ऐसे परम संत की तुलना किसी से करना बेमानी हे (ऐसा मेरा विचार हे )
काफी अछी जानकारी दी आप ने कुछ नया जानने को मिला आज मुझे
ऐसे ही ज्ञानवर्धक सामग्री से फोरम को भर दें
रेप++स्वीकारें
siddharth
13-05-2011, 09:49 PM
Re: बाबा का निधन या ब्रम्हलीन !
मै slimsima जी से सहमत हु .कहा वो शिर्डी के फकीर साईं और कहा ये पाखंडी सत्य साईं
जो अमीरों और राजनेताओ को सोने की वस्तु भेट करते थे .
कुछ सालो पहले उसपे जो हमला हुआ था उसमे उसके भक्त मरे गए थे
जो खुद की रक्षा नहीं कर पाता वो औरो को क्या बचायगा.शर्म की बात तो ये है की क्रिकेटर तेंदुलकर ने मिडिया के सामने आकर दुःख और अंधश्रधा प्रकट की ,
उसके खुद के बाप मरने पर उसे इतना दुःख नहीं हुआ जितना सत्य साईं के मरने पर हुआ
raunaklal
10-08-2011, 05:31 PM
ajkal ek naye baba sabhi chhanels per prakat ho kar kirpa baant rahe hai, nirmal baba, inki kirpa bhi prapt karo.
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