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View Full Version : चार धाम की यात्रा



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06-05-2011, 11:02 AM
देव संस्कृति में तीर्थयात्रा अंतर्जगत में परिवर्तन का प्रमुख माध्यम मानी गई है। तीर्थ का अर्थ है दिव्य स्थान। वास्तव में प्राचीन काल में तीर्थ का दिव्य वातावरण, वहां विद्यमान ऋषि-मुनियों की वाणी के माध्यम से निकलने वाली ज्ञान की गंगा और साधक के हृदय में उपस्थित भक्ति उसके जीवन को नई दिशा देती थी।

तीर्थयात्रा केवल आध्यात्मिक अर्थो में ही महत्त्वपूर्ण नहीं थी, बल्कि सामाजिक व राष्ट्रीय अर्थो में भी महत्त्वपूर्ण थी। उत्तराखंड की यह देवभूमि इतनी सुंदर व पवित्र है कि इसका कोई सानी नहीं। हिमालय के इस भाग में दिव्यता भी है और सूक्ष्म रूप में देवसत्ताएं भी विद्यमान हैं।

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06-05-2011, 11:03 AM
वेदों जैसे पवित्र : चार धाम


ज्ञान की उपासक रही हमारी देव संस्कृति में प्रारम्भ से ही चार धामों के प्रति अपार श्रद्धा रही है। जिस प्रकार चारों वेदों के मंत्रों में ईश्वर का वास माना गया है, उसी प्रकार चारों धामों में भी भक्तजनों को ईश्वरत्व की सहज ही अनुभूति होती है।

यूं तो चार धाम राष्ट्र के चारों कोनों पर स्थापित जगन्नाथ, रामेश्वरम्, द्वारिका और बद्रीनाथ को कहा जाता है। इन चारों में से एक बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड में स्थित है। उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थो को ‘धाम’ कहा जाता रहा है। यहां बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री नामक चार धाम स्थित हैं, जिनका दर्शन करने के लिए प्रतिवर्ष देश-दुनिया के लाखों-लाख श्रद्धालु देवभूमि में आते हैं और चार धाम यात्रा करके यहां के पवित्र तीर्थो का दर्शन करते और पुण्यलाभ प्राप्त करते हैं।

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06-05-2011, 11:04 AM
अब चारों धामों का लेखा-जोखा :partly_cloudy:

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06-05-2011, 11:05 AM
बद्रीनाथ धाम

बदरी शब्द ‘ब’ एव ‘दरी’ शब्दों के संयोग से बना है। ब का अर्थ है- परमात्मा और दरी का मतलब- गुहा। अर्थात् बद्रीनाथ वह स्थल है, जहां परमतत्व की चेतना घनीभूत हो उठती है। देवभूमि उत्तराखण्ड के चमोली जनपद में अलकनंदा नदी के तट पर स्थित बद्रीनाथ का मन्दिर भगवान विष्णु व उनके अवतार नारायण को समर्पित है। इस तीर्थ की महिमा कई पौराणिक ग्रंथों में मुक्तकंठ से गायी गई है।

महाभारत व पुराणों में बदरीवन, बद्रिकाश्रम तथा विशाला नाम भी मिलते हैं। पन्द्रह मीटर ऊंचे बद्रीनाथ मन्दिर का वर्तमान स्वरूप आदि शंकराचार्य जी की देन है। देवात्मा हिमालय में सप्तबदरी स्थित हैं, जिन्हें ध्यान बदरी, वृद्घ बदरी, भविष्य बदरी, योग बदरी, आदि बदरी, नृसिंह बदरी कहा जाता है। महर्षि व्यास ने यहीं पर पुराण लेखन किया था।

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06-05-2011, 11:07 AM
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बद्रीनाथ धाम

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06-05-2011, 11:08 AM
केदारनाथ धाम

आदिदेव शिव कला के भी देवता हैं। भगवान महादेव को समर्पित प्राचीन केदारनाथ मन्दिर आस्था के साथ कला के रूप में भी प्रसिद्ध है। बारह ज्योतिर्लिंगों में एक ‘केदारनाथ’ भी हैं। ऋषि उपमन्यु ने भी यहां कठोर तप किया। महाभारत के बाद पाण्डव भी यहां तप करने आए थे।

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार राजा केदार ने यहां तपस्या की, जिससे इसका नाम केदारनाथ पड़ा। शंकराचार्य जी ने 32 की आयु में यहीं तपस्या में अपना शरीर त्यागा था। महात्मा गांधी का अस्थि विसर्जन इसी सरोवर में किया गया। मन्दिर के निर्माण में यांत्रिक सहायता के बिना विशालकाय पाषाण खण्डों का हुआ उपयोग मानवीय श्रम और कौशल का चमत्कार है।

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06-05-2011, 11:10 AM
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केदारनाथ धाम

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06-05-2011, 11:11 AM
गंगोत्री धाम

संस्कृति का जीवनस्रोत है- गंगोत्री। गोमुख आजकल गंगोत्री से 14 किमी आगे है, किन्तु प्राचीनकाल में वह गंगोत्री में ही था। विशाल भागीरथ शिला यहीं पर है, जहां भागीरथ जी ने तप किया था और गंगाजी को धरती पर आने के लिए सहमत किया था। गंगोत्री से कुछ ही दूरी पर चीड़ के वृक्षों का वन ‘चीड़वासा’, भोजपत्रों के वृक्षों का वन ‘भोजवासा’ तथा फलों का वन ‘फूलवासा’ स्थित है।

भागीरथ ने जल दुर्भिक्ष के निवारण के लिए कठोर तप करके गंगा को स्वर्ग से धरती पर लाने में सफलता प्राप्त की थी। गंगा उन्हीं के तप-पुरुषार्थ से अवतरित हुईं, इसीलिए भागीरथी कहलाईं। लोकमंगल के प्रयोजन हेतु प्रचण्ड पुरुषार्थ करके भागीरथ दैवी कसौटी पर खरे उतरे और भगवान शिव के कृपापात्र बने।

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06-05-2011, 11:12 AM
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गंगोत्री धाम ( मंदिर )

Chandrshekhar
06-05-2011, 11:13 AM
मित्र अत्यंत जानकारी से भरपुर सूत्र है आपका.

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06-05-2011, 09:05 PM
यमुनोत्री

उत्तरकाशी जिले से 171 किमी उत्तर में 3,291 मीटर की ऊंचाई पर वर्ष भर बर्फ से ढका पर्वत शिखर है- बन्दरपूंछ। इसी पर्वत के पश्चिमी किनारे पर है- मां यमुना का उद्गम स्थल ‘यमुनोत्री’। यमुना को सूर्यपुत्री भी कहा जाता है। यमुनोत्री मन्दिर का निर्माण 1850ई़ में राजा सुदर्शन शाह ने कराया था। निकटवर्ती तीर्थस्थलों में सूर्यकुण्ड, दिव्यशिला, हर की दून, हनुमान मन्दिर आदि प्रमुख हैं। यमुनोत्री महर्षि परशुराम की तपस्थली रही है। यहीं से प्राप्त तपशक्ति से उन्होंने अनीति में लिप्त आतताइयों को नष्ट किया था। ऋषि परशुराम ने अपने जीवन के उत्तरार्थ में ‘परशु’ अर्थात् फरसे को त्याग कर ‘फावड़ा’ थामा था और वृहद् वृक्षारोपण करके पर्यावरण संरक्षण आन्दोलन का अनूठा सूत्रपात किया था।

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06-05-2011, 09:07 PM
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यमुनोत्री धाम

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06-05-2011, 09:07 PM
(लेखक देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार के कुलपति हैं)

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06-05-2011, 09:09 PM
गंगोत्री

कपाट खुलने का समय: गर्मियों में कपाट सुबह 6.15 बजे से दोपहर 2 बजे तक खुले रहते हैं और दोपहर में 3 बजे से रात 9.30 बजे तक।

समुद्र तल से ऊंचाई: 3,200 मीटर

कैसे पहुंचें

हवाई अड्डा : नजदीकी हवाई अड्डा जौली ग्रांट है।
रेलवे स्टेशन : नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है।
सड़क : गंगोत्री उत्तरकाशी (97 किमी) से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है।
क्या पहनें : सर्वोत्तम समय मई-जून है। गर्मियों में आपको हल्के ऊनी कपड़ों की जरूरत पड़ेगी।

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06-05-2011, 09:09 PM
केदारनाथ

कपाट खुलने का समय : केदारनाथ के कपाट खुलने का गर्मियों में समय सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक और फिर शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक है।

समुद्र तल से ऊंचाई : 3,584 मीटर

कैसे पहुंचें

हवाई अड्डा : हवाई अड्डा जौली ग्रांट है।
रेलवे स्टेशन: नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश (221 किमी) है।
सड़क : गौरीकुंड तक आप बस या टैक्सी के जरिए पहुंच सकते हैं। इसके बाद 14 किमी की दूरी पैदल पूरी करनी पड़ती है।
क्या पहनें : केदारनाथ आने का अच्छा समय मई से अक्तूबर है। गर्मियों में भी तापमान काफी कम रहता है। ऐसे में आपको हल्के ऊनी कपड़ों की जरूरत पड़ेगी।

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06-05-2011, 09:12 PM
बद्रीनाथ

कपाट खुलने का समय: सुबह 6 बजे से रात करीब 8 बजे तक।
समुद्र तल से ऊंचाई: 3133 मीटर

कैसे पहुंचें

हवाई अड्डा : नजदीकी हवाई अड्डा जौली ग्रांट (देहरादून, 317 किमी) है।
रेलवे स्टेशन : ऋषिकेश (297 किमी) है।
सड़क : बद्रीनाथ सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है।
क्या पहनें : हल्के ऊनी कपड़ों की जरूरत पड़ेगी।

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06-05-2011, 09:12 PM
यमुनोत्री

कपाट खुलने का समय
गर्मियों में यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने का समय सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक है।

समुद्र तल से ऊंचाई : 4,421 मीटर

कैसे पहुंचें
हवाई अड्डा : नजदीकी हवाई जौली ग्रांट (देहरादून) है।
रेलवे स्टेशन : नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है। ऋषिकेश से यमुनोत्री 222 किमी दूर है।
सड़क मार्ग : सड़क मार्ग के जरिए आप ऋषिकेश से पहुंच सकते हैं।
क्या पहनें : गर्मियों के मौसम में भी यहां काफी ठंड होती है। ऐसे में ऊनी कपड़े लेकर ही यमुनोत्री पहुंचे। अपने साथ छाता भी रखें।

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06-05-2011, 09:15 PM
पैकेज

उत्तराखंड सरकार का पर्यटन विभाग चार धाम के यात्रियों के लिए विशेष इंतजाम के साथ विशेष पैकेज दे रहा है। पर्यटन विभाग तीर्थ यात्रियों को 12 रातों और 13 दिन का ऑफर कर रहा है। इसमें आप दिल्ली से ऋषिकेश, यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ, हरिद्वार और वापस दिल्ली तक आते हैं। इसमें इन जगहों की सैर, लंच, डिनर और ठहरना भी शामिल है। ज्यादा जानकारी के लिए आप वेबसाइट पर जाकर सर्च कर सकते हैं। इसके अलावा कई ट्रैवल एजेंसियां भी आकर्षक ऑफर की पेशकश कर रही हैं। ट्रैवल चाचा डॉट काम चार धाम के तीर्थयात्रियों के लिए 11 रातों का पैकेज 23,787 रुपए में ऑफर कर रहा है। इसमें रहना, ब्रेकफॉस्ट, डिनर, ट्रांसपोर्टेशन, साइट, परमिट और नाइट हॉल्ट चार्ज शामिल हैं।

JOHN CENA
07-05-2011, 03:01 PM
very good thread...thanks

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07-05-2011, 08:48 PM
chanddanapur और JOHN CENA जी को मेरा शुक्रिया इस सूत्र में आने के लिए .

sanjeetspice
12-05-2011, 06:02 PM
बहुत अच्छी जानकारी है दोस्त