View Full Version : !!दर्द शायरी!!
King_khan
12-01-2011, 04:17 PM
खवाब की तरह हमें भुला गए
अश्क बन के आँख में समां गए
रंजिशें दैर-ओ-हरम की थी मगर,
लोग मेरा मैकदा जला गए
खुद को भूल कर, खुदा तलाशने
लोग जाने सब कहाँ कहाँ गए
उम्र भर बचा किये तूफ़ान से
नाखुदा ही कश्तियाँ डुबा गए
ख़ुदकुशी से डर रहा था मैं ज़रा
दोस्त मेरे हौसला दिला गए
खुद से छुप रहा था मैं, तो आप क्यों?
हाथ में ये आइना थमा गए
********************
रंजिश = दुश्मनी
दैर-ओ-हरम = मंदिर और मस्जिद
नाखुदा = नाविक
King_khan
12-01-2011, 04:19 PM
सब झुकाते हैं जहाँ सर, क्या पता?
वो खुदा है या है पत्थर, क्या पता?
दोस्त भी दुश्मन भी सब हंसकर मिले
किसके पहलू में है खंज़र, क्या पता?
कब न जाने ख़त्म होगा ये सफ़र?
लौट के कब जायेंगे घर, क्या पता?
आज मेरी दोस्त है तू ज़िन्दगी
कल दिखाए कैसे मंज़र, क्या पता?
क़त्ल मुझ को वो नहीं कर पायेगा
चाहता है वो मुझे, पर क्या पता?
कब बहा ले जाएँ 'साहिल' ये तुझे,
नीयत-ऐ-मौज-ऐ-समंदर, क्या पता?
Pooja1990 QUEEN
13-01-2011, 12:31 PM
Koi tumhe isq b karta hai ? kya pata. ham to chale aaye tumhare maykhane me ? kya pata. tum muje na mile baha ? kya pta. mera pata to jano ? kya pata. . . m at
कुछ मेरी तरफ से
अर्ज है ....
कौन देता है उम्र भर का सहारा ऐ दोस्त
लोग तो जनाजे में भी कंधे बदलते रहते है ...
जिन्होंने कभी देखा था मुड़कर
खता क्या हुई ?
गलत क्या हुआ ?
न नजरें मिली है न चेहरे खिले हैं!
नाउम्मीदी की बातें न कर ऐ दोस्त
मैय्यत में तेरे वो भी आंसू बहाएगा !
उम्मीद .....!
कब्र पे मेरे जो आया वो नाखुदा !
फिर से जीने की हमें आरज़ू हो गयी
प्यार .......!
तन्हाई के आलम में
खुद से ये सवाल किया हमने
की उनकी आँखों की मदहोशी का सबब क्या है?
दिल की गहराईयों से ये आवाज़ आई
की हार धडकन के संग आती तेरी याद से
होश रहता नहीं खुद का उन्हें
यादों का मंजर सजा रहता है ,
इश्क की इस इन्तहा से
मदहोश हैं उनकी आँखें !
ज्वालामुखी ......!
सीमाओं को लांघने की उत्कंठा !
फिर उन्हीं सीमाओं में रहने की बाध्यता .....
तडपाती है ...
सुलगाती है ...
जलाती है , एक शांत ज्वालामुखी !
तेरी मोहब्बत ने रुसवा किया है हमें जमाने में !
तुझमें खो गए इतने .....
आज तक भटकते हैं गलियों में
हार किसी से अपना पता पूछते हैं ......!
draculla
15-01-2011, 01:47 PM
कुछ मेरी तरफ से
अर्ज है ....
कौन देता है उम्र भर का सहारा ऐ दोस्त
लोग तो जनाजे में भी कंधे बदलते रहते है ...
वाह क्या बात कही है.
jaihind20
15-01-2011, 01:56 PM
bahut hi achi shyari hai.
वाह क्या बात कही है.
धन्यवाद मित्र
ये मेरे मन के उदगार हैं
आज इस मंच के द्वारा कह सका हूँ
bahut hi achi shyari hai.
आपका बहुत धन्यवाद
Noctis Lucis
17-01-2011, 03:33 PM
अर्ज़ है,
"ग़मों की कदर करो हमेशा उनके साथ रहो
के गम फरेब न देंगे कभी ख़ुशी की तरह"
Noctis Lucis
24-01-2011, 08:45 PM
धन्यवाद मित्र
ये मेरे मन के उदगार हैं
आज इस मंच के द्वारा कह सका हूँ
भाई मेरे पाकीज़ा आँचल मैं भी पढता हूँ
Noctis Lucis
24-01-2011, 08:52 PM
मनोज आपके लिए
आप की दोस्ती से मशहूर हुए,
आप के साथ हंसने लगे तो आंसू दूर हुए
बस आप जैसे दोस्त के बदौलत आज,
हम कांच से कोहिनूर हुए |
Bichoo
28-01-2011, 01:10 AM
19554
Uff !!!! Ye Dard Jata Kyun Nahi ???????
BHARAT KUMAR
13-03-2011, 05:35 AM
सापों को कर लिए क़ैद सपेरे ने ये कहकर,
के इंसानों को डसने के लिए अब इंसान ही काफी हैं,..!
smsboy
20-03-2011, 11:16 AM
जिंदगी में दो मिनट कोई हमारे पास नहीं बैठा ,आज सब हमारे पास बैठे जा रहे है
कोई तोहफा ना मिला आज तक हमें, और आज फुल ही फुल दीये जा रहे है
तरस गए हम किसी के हाथ से दीये वो एक छोटे से रुमाल को, और आज नए नए कपडे ओढ़ाए जा रहे है
दो कदम साथ चलने को तैयार ना था कोई, और आज काफिला बन कर मेरे साथ में आ रहे थे
आज पता चला की मौत इतनी हसीन होती है, कम्बखत हम तो यू है जिए जा रहे थे
smsboy
20-03-2011, 11:26 AM
खवाब की तरह हमें भुला गए
अश्क बन के आँख में समां गए
रंजिशें दैर-ओ-हरम की थी मगर,
लोग मेरा मैकदा जला गए
खुद को भूल कर, खुदा तलाशने
लोग जाने सब कहाँ कहाँ गए
उम्र भर बचा किये तूफ़ान से
नाखुदा ही कश्तियाँ डुबा गए
ख़ुदकुशी से डर रहा था मैं ज़रा
दोस्त मेरे हौसला दिला गए
खुद से छुप रहा था मैं, तो आप क्यों?
हाथ में ये आइना थमा गए
********************
रंजिश = दुश्मनी
दैर-ओ-हरम = मंदिर और मस्जिद
नाखुदा = नाविक
किंग खान जी आपने बहुत ही बढ़िया सूत्र बनाया है लेकिन प्रविस्थी बूथ है कम की है एक सूत्र धारक सूत्र अभिवावक होता है और यह उसका फर्ज है की वो सूत्र को निरंतर गति देता रहे . मै आपको रेपुटेसन देना चाहता था मगर मेरा आज का रेपुटेसन का कोटा खत्म हो चुका है
King_khan
20-03-2011, 01:00 PM
सोचा प्यार को उतारूं अल्फाजों मे
शब्द नज़र नहीं आये किताबों मे
कभी लगता है मोअज़्ज़म हर मुकाम प्यार का
कभी लगता है नूर ही नूर है इसकी बातों मे
बेपनह ख़ुशी एक अजीब सी मुस्कान आती है चेहरे पे
गूजने लगती है आवाज़े धडकनों की पिघली सी सांसों मे
शुरू होता है जिस शक्स पे यह असर चड़ना
न जाने कैसे कैसे अफसाने बनता है खवाबों मे
छा जाता है अजब सा खुमार आशिकी का
न दिन मे चैन मिलता है न नींद आती है रातों मे
कभी इसकी तासीर लगती है मुकम्मल हर अधूरी आज़माइश मे
एक अजीब सा सुकून आता है हर पूरी होती इसकी फरमाइश मे
बदल जाता है हर शक़स जो भी आता है इसके सोहबत मे
हर धडकन बयाँ करती है क्या मज़ा है इस मासूम सी ख्वाहिश मे
प्यार एक अदा है एक सजा है एक हया है एक दुआ है
न जाने कैसे कैसे तराने है इसकी नुमाइश मे
हर किसी की आज़ है इस एहसास का इदराक करे
देखा है ये ख़ुदा से उठती हर किसी की अधूरी पूरी गुज़ारिश मे
घर कर लेती है एक रोशिनी बिखर जाती है महकी हवा
फैलती है जब भी इसकी खुशबु दिल के पैमाइश मे
कैसे कसी किस किस किन किन कलामो से इसको हम नवाज़े
इसकी तो बात ही अलग है यह तो फैला है हर आराइश मे हर ज़ेबायिश मे
King_khan
20-03-2011, 04:48 PM
सोचें कुछ, कुछ और हो जाए
हैफ़ हर दिन यूं ही गुज़र जाए
ऐ दिल-ए-शातिर, बता की क्या पेच है
की हर ख्याल उनके ख्याल में बदल जाए
कुछ तो अलग है ये तामिर-ए-शहर
हर गली से उनके घर का रास्ता निकल जाए
मेरी हर दुआ हुई बातिल, की हाथ उठाते ही
खुदा के नाम से पहले तेरा नाम निकल जाए
उन्हें इतना भी याद ना करो मायूस
की हिचकी आते आते उनका दम निकल जाए
gulluu
20-03-2011, 05:11 PM
लगता है कोई बहुत याद आ रहा है खान साहब को
King_khan
20-03-2011, 06:21 PM
लगता है कोई बहुत याद आ रहा है खान साहब को
गुल्लू भाई
आप सभी की बहुत याद आ रही है
gulluu
20-03-2011, 07:08 PM
गुल्लू भाई
आप सभी की बहुत याद आ रही है
भाई हम तो हमेशा यही मिलते हैं ,आप कभी भी मिल सकते हैं .
King_khan
20-03-2011, 07:08 PM
उनके दामन मे खुशी, और हमारे दिल मे गम है
खैर कोई बात नही,
आँख उसकी भी नम है और हमारी भी नम है
सोचते हैं कहे तो कैसे कहे ये हाले दिल
कुछ गुमा है खुद पर, कुछ आरज़ू हमारी बेदम है
कोशिशे बहुत की हमने, ना दिल लगाए पत्थर से
पर क्या करे क़ातिलों सा अंदाज़-ए-सनम है
खुद को जला के घर उनका रोशन कर दे
मिट जाए किसी के लिए, ये क्या मोहब्बत से कम है
Noctis Lucis
20-03-2011, 07:13 PM
ये लो हम आपको कहा कहाँ खोज रहे हैं और आप यहाँ है
धत धत धत जमाने धत तेरे की
King_khan
20-03-2011, 07:21 PM
भाई हम तो हमेशा यही मिलते हैं ,आप कभी भी मिल सकते हैं .
गुल्लू भाई
कुछ मजबूरियां हैं
आप तो जानते ही हो
King_khan
20-03-2011, 07:29 PM
ये लो हम आपको कहा कहाँ खोज रहे हैं और आप यहाँ है
धत धत धत जमाने धत तेरे की
फैज़ भाई
जहां जाओगे हमें पाओगे
अब बताओ हमसे दूर कैसे जाओगे
हम बसते हैं आपकी यादों में
अब बताओ हमें कैसे भूलोगे
King_khan
20-03-2011, 09:12 PM
बड़ी मुश्किल-सी कोई बात भई आसान होती है
अगर इंसानी फ़ितरत की हमें पहचान होती है
हुजूमे-ग़म जो आ जाए हुजूमे-शाद हो ऐ दिल
ग़मों से लड़ के ही तो ज़िंदगी आसान होती है
कहा करते हैं दौलत में बहुत अच्छइयाँ होतीं
ये जो हो हाथ में शैतान के, शैतान होती है
बड़ी सरमाया है नेकी हज़ारों नेकियाँ कर लो
यहाँ तक एक भी नेकी कभी ताबान होती है
अगर खुशियाँ ही खुशियाँ हों तुम्हें महसूस होगा रंज
मुसलसल रौशनी भी दर्द का सामान होती है।
King_khan
20-03-2011, 09:15 PM
होता है हर मजिल का सफ़र ये मालूम है मुझे
मुझको मेरी मंजिल का सफ़र मगर मिलता नहीं
होना है फ़ना एक दिन जलके ये मालूम है मुझे
मुझको तेरी महफ़िल का पता मगर मिलता नहीं
होते है जुदा मुसाफिर मोड़ पे ये मालूम है मुझे
मुझको मेरी ज़िन्दगी का मुकाम मगर मिलता नहीं
होता है महसूस धडकनों को दर्द ये मालूम है मुझे
मुझको तेरी पलकों का किनारा मगर मिलता नहीं
होता है हर लम्हे में सदियों का अहसास ये मालूम है मुझे
मुझको मेरी मौत का वक़्त मगर मिलता नहीं
होती है आहट के सीने पे ये मालूम है मुझे
मुझको तेरी ख़ामोशी का सहारा मगर मिलता नहीं
King_khan
20-03-2011, 10:43 PM
सोचें कुछ, कुछ और हो जाए
हैफ़ हर दिन यूं ही गुज़र जाए
ऐ दिल-ए-शातिर, बता की क्या पेच है
की हर ख्याल उनके ख्याल में बदल जाए
कुछ तो अलग है ये तामिर-ए-शहर
हर गली से उनके घर का रास्ता निकल जाए
मेरी हर दुआ हुई बातिल, की हाथ उठाते ही
खुदा के नाम से पहले तेरा नाम निकल जाए
उन्हें इतना भी याद ना करो
की हिचकी आते आते उनका दम निकल जाए
Dil-Ki-Baat
31-03-2011, 08:55 PM
ज़रूरी काम है लेकिन रोज़ाना भूल जाता हूँ,
मुझे तुम से मोहब्बत है बताना भूल जाता हूँ!!
तेरी गलियो मे फिरना इतना अच्छा लगता है,
मै रास्ता याद रखता हूँ ठिकाना भूल जाता हूँ!!
बस इतनी बात पर मै लोगो को अच्छा नही लगता,
मै नेकी कर तो देता हूँ जताना भूल जाता हूँ!!
शरारत ले के आंखो मे वो तेरा देखना तौबा,
मै तेरी नज़रो पे जमी नज़रे झुकाना भूल जाता हूँ!!
मोहब्बत कब हुई कैसे हुई सब याद है मुझको,
मै कर के मोहब्बत को भुलाना भूल जाता हूँ!!
ज़रूरी काम है लेकिन रोज़ाना भूल जाता हूँ,
मुझे तुम से मोहब्बत है बताना भूल जाता हूँ!!
Dil-Ki-Baat
31-03-2011, 08:56 PM
बरस ए अब्र जितना चाहे तू..
कि अब तेरी बारी है....
कभी दिल था तो हम भी...
रो रो के दरिया बहाया करते थे...
Dil-Ki-Baat
31-03-2011, 08:57 PM
खिड़कियाँ, सिर्फ़, न कमरों के दरमियां रखना
अपने ज़ेहनों में भी, थोड़ी सी खिड़कियाँ रखना
पुराने वक़्तों की मीठी कहानियों के लिए
कुछ, बुजुर्गों की भी, घर पे निशानियाँ रखना
ज़ियादा ख़ुशियाँ भी मगरूर बना सकती हैं
साथ ख़ुशियों के ज़रा सी उदासियाँ रखना.
बहुत मिठाई में कीड़ों का डर भी रहता है
फ़ासला थोड़ा सा रिश्तों के दरमियां रखना
अजीब शौक़ है जो क़त्ल से भी बदतर है
तुम किताबों में दबाकर न तितलियाँ रखना
बादलो, पानी ही प्यासों के लिए रखना तुम
तुम न लोगों को डराने को बिजलियाँ रखना
बोलो मीठा ही मगर, वक़्त ज़रूरत के लिए
अपने इस लहजे में थोड़ी सी तल्ख़ियाँ रखना
मशविरा है, ये, शहीदों का नौजवानों को
देश के वास्ते अपनी जवानियाँ रखना
ये सियासत की ज़रूरत है कुर्सियों के लिए
हरेक शहर में कुछ गंदी बस्तियाँ रखना
Dil-Ki-Baat
31-03-2011, 08:58 PM
जनाजा रोककर वो मेरे से इस अन्दाज़ मे बोले,
गली छोड्ने को कही थी हमने तुमने दुनियां छोड दी।
कुछ मेरी तरफ से
अर्ज है ....
कौन देता है उम्र भर का सहारा ऐ दोस्त
लोग तो जनाजे में भी कंधे बदलते रहते है ...
Dil-Ki-Baat
31-03-2011, 09:01 PM
जब जुबां खामोशी होती है नज़र से काम होता है,
ऐसे माहौल का ही शायद मोहब्बत नाम होता है।
जिन्होंने कभी देखा था मुड़कर
खता क्या हुई ?
गलत क्या हुआ ?
न नजरें मिली है न चेहरे खिले हैं!
Dil-Ki-Baat
31-03-2011, 09:02 PM
पी लिया करते हैं जीने की तमन्ना में कभी,
डगमगाना भी जरुरी है सम्भलने के लिये ।
Dil-Ki-Baat
31-03-2011, 09:02 PM
यूं तो मंसूर बने फिरते हैं कुछ लोग,
होश उड जाते हैं जब सिर का सवाल आता है ।
Dil-Ki-Baat
31-03-2011, 09:03 PM
मै जिसके हाथ मे एक फूल दे कर आया था,
उसी के हाथ का पत्थर मेरी तलाश मे है ।
man-vakil
16-04-2011, 08:30 PM
कुछ तो बात होगी तुझमे , जो सारी दुनिया सुधर गयी,
पर ना जाने क्यों ? सब सुधर गए, सिर्फ हम ना सुधरे,
असर था ये तुझे पाने का, या फिर तुम्हे पाकर को देने का,
शायद तेरी हसरत में सुधर गए , वो सब काली फितरत वाले,
और हम युहीं बैठे रह गए, गम भी ना मना पाए तुझे खोने का कभी,
चंद आंसुओं से डूबे हुए पढते रहे, तेरे जिन्दगी से चले जाने पर फातिहा,
बस हम देखते रहे युहीं तेरे जाने पर , इस बेरंग दुनिया के बदलते रंगों को.........
-----------मन-वकील
SUNIL1107
23-04-2011, 09:33 PM
किंग खान साहब बुरा न मानियेगा, बिना पूछे आपके सूत्र में शिरकत कर रहा हूँ !
अच्छी सूरत पे ग़ज़ब टूट के आना दिल का
याद आता है हमें हाय! ज़माना दिल का
तुम भी मुँह चूम लो बेसाख़ता प्यार आ जाए
मैं सुनाऊँ जो कभी दिल से फ़साना दिल का
पूरी मेंहदी भी लगानी नहीं आती अब तक
क्योंकर आया तुझे ग़ैरों से लगाना दिल का
इन हसीनों का लड़कपन ही रहे या अल्लाह
होश आता है तो आता है सताना दिल का
मेरी आग़ोश से क्या ही वो तड़प कर निकले
उनका जाना था इलाही के ये जाना दिल का
दे ख़ुदा और जगह सीना-ओ-पहलू के सिवा
के बुरे वक़्त में होजाए ठिकाना दिल का
उंगलियाँ तार-ए-गरीबाँ में उलझ जाती हैं
सख़्त दुश्वार है हाथों से दबाना दिल का
बेदिली का जो कहा हाल तो फ़रमाते हैं
कर लिया तूने कहीं और ठिकाना दिल का
छोड़ कर उसको तेरी बज़्म से क्योंकर जाऊँ
एक जनाज़े का उठाना है उठाना दिल का
निगहा-ए-यार ने की ख़ाना ख़राबी ऎसी
न ठिकाना है जिगर का न ठिकाना दिल का
बाद मुद्दत के ये ऎ दाग़ समझ में आया
वही दाना है कहा जिसने न माना दिल का
दाग देहलवी
SUNIL1107
23-04-2011, 09:39 PM
दर्द बन के दिल में आना , कोई तुम से सीख जाए
जान-ए-आशिक़ हो के जाना , कोई तुम से सीख जाए
हमसुख़न पर रूठ जाना , कोई तुम से सीख जाए
रूठ कर फिर मुस्कुराना, कोई तुम से सीख जाए
वस्ल की शब[1] (http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4% A6_%E0%A4%AC%E0%A4%A8_%E0%A4%95%E0%A5%87_%E0%A4%A6 %E0%A4%BF%E0%A4%B2_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0 %A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%BE_,_%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A 4%88_%E0%A4%A4%E#cite_note-0) चश्म-ए-ख़्वाब-आलूदा[2] (http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4% A6_%E0%A4%AC%E0%A4%A8_%E0%A4%95%E0%A5%87_%E0%A4%A6 %E0%A4%BF%E0%A4%B2_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0 %A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%BE_,_%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A 4%88_%E0%A4%A4%E#cite_note-1) के मलते उठे
सोते फ़ित्ने[3] (http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4% A6_%E0%A4%AC%E0%A4%A8_%E0%A4%95%E0%A5%87_%E0%A4%A6 %E0%A4%BF%E0%A4%B2_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0 %A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%BE_,_%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A 4%88_%E0%A4%A4%E#cite_note-2) को जगाना,कोई तुम से सीख जाए
कोई सीखे ख़ाकसारी की रविश[4] (http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4% A6_%E0%A4%AC%E0%A4%A8_%E0%A4%95%E0%A5%87_%E0%A4%A6 %E0%A4%BF%E0%A4%B2_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0 %A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%BE_,_%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A 4%88_%E0%A4%A4%E#cite_note-3) तो हम सिखाएँ
ख़ाक में दिल को मिलाना,कोई तुम से सीख जाए
आते-जाते यूँ तो देखे हैं हज़ारों ख़ुश-ख़राम[5] (http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4% A6_%E0%A4%AC%E0%A4%A8_%E0%A4%95%E0%A5%87_%E0%A4%A6 %E0%A4%BF%E0%A4%B2_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0 %A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%BE_,_%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A 4%88_%E0%A4%A4%E#cite_note-4)
दिल में आकर दिल से जाना,कोई तुम से सीख जाए
इक निगाह-ए-लुत्फ़ पर लाखों दुआएँ मिल गयीं
उम्र को अपनी बढ़ाना,कोई तुम से सीख जाए
जान से मारा उसे, तन्हा जहाँ पाया जिसे
बेकसी में काम आना ,कोई तुम से सीख जाए
क्या सिखाएगा ज़माने को फ़लत तर्ज़-ए-ज़फ़ा
अब तुम्हारा है ज़माना,कोई तुम से सीख जाए
महव-ए-बेख़ुद[6] (http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4% A6_%E0%A4%AC%E0%A4%A8_%E0%A4%95%E0%A5%87_%E0%A4%A6 %E0%A4%BF%E0%A4%B2_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0 %A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%BE_,_%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A 4%88_%E0%A4%A4%E#cite_note-5) हो, नहीं कुछ दुनियादारी की ख़बर
दाग़ ऐसा दिल लगाना,कोई तुम से सीख जाए
शब्दार्थ:
१.↑ (http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4% A6_%E0%A4%AC%E0%A4%A8_%E0%A4%95%E0%A5%87_%E0%A4%A6 %E0%A4%BF%E0%A4%B2_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0 %A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%BE_,_%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A 4%88_%E0%A4%A4%E#cite_ref-0) मिलन की रात
२.↑ (http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4% A6_%E0%A4%AC%E0%A4%A8_%E0%A4%95%E0%A5%87_%E0%A4%A6 %E0%A4%BF%E0%A4%B2_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0 %A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%BE_,_%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A 4%88_%E0%A4%A4%E#cite_ref-1) नींद से बोझिल आँखें
३.↑ (http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4% A6_%E0%A4%AC%E0%A4%A8_%E0%A4%95%E0%A5%87_%E0%A4%A6 %E0%A4%BF%E0%A4%B2_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0 %A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%BE_,_%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A 4%88_%E0%A4%A4%E#cite_ref-2) उपद्रव
४.↑ (http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4% A6_%E0%A4%AC%E0%A4%A8_%E0%A4%95%E0%A5%87_%E0%A4%A6 %E0%A4%BF%E0%A4%B2_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0 %A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%BE_,_%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A 4%88_%E0%A4%A4%E#cite_ref-3) तरीका
५.↑ (http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4% A6_%E0%A4%AC%E0%A4%A8_%E0%A4%95%E0%A5%87_%E0%A4%A6 %E0%A4%BF%E0%A4%B2_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0 %A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%BE_,_%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A 4%88_%E0%A4%A4%E#cite_ref-4) मस्त चाल
६.↑ (http://www.kavitakosh.org/kk/index.php?title=%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4% A6_%E0%A4%AC%E0%A4%A8_%E0%A4%95%E0%A5%87_%E0%A4%A6 %E0%A4%BF%E0%A4%B2_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0 %A4%86%E0%A4%A8%E0%A4%BE_,_%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A 4%88_%E0%A4%A4%E#cite_ref-5) ध्यान मग्न
kamesh
27-04-2011, 06:41 PM
जब भी ये दिल उदाश होता है
जाने कोन आश पाश होता है
MALLIKA
27-04-2011, 07:23 PM
वो रोज हमसे मिलते हैं ख्यालों के आशियानों में ,
वो रोज हमसे बिछड़ते हैं ज़िन्दगी की राहों में !
हम ख्वाब तो देखते हैं हर एक पल मोहब्बत के ,
पर टूट के बिखरते हैं बस नफरत की बाहों में !!
MALLIKA
27-04-2011, 07:47 PM
आंसुओं की लिखावट को तुम पढ़ ना सकोगे ,
गीले कागज़ पे तुम कुछ लिख ना सकोगे !
याद आएगी तुमको हमारी ये बातें ,
जब खोकर तुम हमें पा ना सकोगे !!
MALLIKA
27-04-2011, 07:54 PM
तेरी याद में जरा आंखे भिगो लू ,
उदास रात की तन्हाई में सो लू !
अकेले गम का बोझ अब संभलता नहीं ,
अगर तू मिल जाये तो तुझसे लिपट कर रो लू !!
SUNIL1107
27-04-2011, 08:21 PM
कहाँ ले जाऊँ दिल दोनों जहाँ में इसकी मुश्क़िल है !
यहाँ परियों का मजमा है, वहाँ हूरों की महफ़िल है !
इलाही कैसी-कैसी सूरतें तूने बनाई हैं ,
हर सूरत कलेजे से लगा लेने के क़ाबिल है !
ये दिल लेते ही शीशे की तरह पत्थर पे दे मारा ,
मैं कहता रह गया ज़ालिम मेरा दिल है, मेरा दिल है !
जो देखा अक्स आईने में अपना बोले झुँझलाकर ,
अरे तू कौन है, हट सामने से क्यों मुक़ाबिल है !
हज़ारों दिल मसल कर पाँवों से झुँझला के फ़रमाया ,
लो पहचानो तुम्हारा इन दिलों में कौन सा दिल है !
( अकबर इलाहाबादी )
sandeep246426
01-05-2011, 12:12 PM
बहुत अच्छे
Teach Guru
21-07-2011, 09:56 AM
अति उतम मित्र बहुत बढ़िया है मनोरंजन से भरपूर, लगे रहो........
King_khan
10-08-2011, 12:08 PM
आदमी है रखता क्युं इतनीं पहचानें यहां,
उजागर हैं कुछ निहॉ हैं अफ़साने यहां.
जान तो हर वक़्त है हाज़िर मेरे दोस्त की,
वक़्त पड़ा तो हो गये हज़ार बहाने यहां.
वफ़ा के हर मुकाम पर तेरा ही इम्तिहांन है,
अपने लिये तो उनके हैं और पैमाने यहां.
ज़मानतें जो मांग ली इस सौदा-ए-जिस्त ने,
पल भर ही में हो गये सब दोस्त बेगाने यहां.
नादान इस दहर को तू मुड़ के पीछे देख ले,
तुझसे लाखों लग गये आकर ठिकाने यहां.
मौत बेचते थे वो हमने सौदा कर लिया,
तोड़ कर दैरो हरम बनवाओ मयख़ाने यहां.
गर्त में आलम जा रहा ए ख़ुदा तू रोक ले,
"सिकंदर" लगे फ़र्ज़ान को हुनर सिखलाने यहां
King_khan
10-08-2011, 12:09 PM
बड़ी सी आँखे, महीन अबरू, पलक पलक है झुकी हुई सी
सुराही गर्दन, सियाह जुल्फें, लबों पे सुर्खी, लगी हुई सी
बताओ कैसे करूँ बयाँ मैं, जो हाल दिल का हुआ है मेरे
हूँ रूबरू मैं, तुम्हारे जब यूँ, हैं सांस मेरी रुकी हुई सी
क़लम मेरी सोच मे पड़ी है, तुम्हें ब्यां मे है लाना मुश्किल
स्याही इसकी हुई है फीकी, है नोक इसकी मुड़ी हुई सी
कनीज तेरी है दोनो देखो, नसीम-ए-सुबह , ये रात रानी
हर एक ही शै तुम्हारे आगे झुकाए सर है खड़ी हुई सी..
कभी कभी यूँ गुमां हुआ है, महक़ तुम्हारी गुलों मे महकी
चमक रही चाँदनी गगन जो, नज़र तेरी हो बिछी हुई सी
ज़रा उतारो गरूर सारा ये चाँद जिसपे चढ़ा हुआ है
उधार की रोशनी लिए ये, उधारी सर पे चढ़ी हुई सी
करे गुज़ारिश मिलो इन्हें तुम, धनक, शफ़क़ ज़ुगनू कहकशां सब
मेरे अलाबा कुछ और भी हैं, है आस जिनको लगी हुई सी
ज़रा सा सरके तुम्हारा आँचल तो तारे दिन मैं निकल पड़ेंगे
ना निकली बाहर टहलने तुम तो ये रात जैसे मुई हुई सी
है नर्म लहज़ा ग़ज़ल के जैसा रुबाई जैसी तुम्हारी बातें
हया से लिपटा बदन तुम्हारा कुंवारेपन मे छुई हुई सी
कमाल तेरा हुआ है सारा बदल गया शायरी का लहज़ा
ब्यान मेरा जुदा जुदा और फ़िक्र मेरी नयी हुई सी
King_khan
10-08-2011, 12:10 PM
कागज पे आंसूओ के सिवा और कुछ नही
बाद अज़ सलाम उसने लिखा और कुछ नहीँ
दिल का हरेक जख्म लहू थूकने लगा
उस से बिछड़ के मुझ को हुआ और कुछ नहीँ
जैसे ही चराग हवा ने बुझा दिया
समझो हयात इस के सिवा और कुछ नहीँ
उसने जो मेरी बात का हंस कर दिया जवाब
मालूम ये हुआ कि वफा और कुछ नहीँ
खुशियोँ के क़ाफले करेँ हर पल तेरा तवाफ
होँटोँ पे अपने इसके सिवा और कुछ नहीँ
BISHTNISHA
10-08-2011, 12:16 PM
बहूत-बहूत बढ़िया दोस्त,सही कहा आपने.
जिंदगी में दो मिनट कोई हमारे पास नहीं बैठा ,आज सब हमारे पास बैठे जा रहे है
कोई तोहफा ना मिला आज तक हमें, और आज फुल ही फुल दीये जा रहे है
तरस गए हम किसी के हाथ से दीये वो एक छोटे से रुमाल को, और आज नए नए कपडे ओढ़ाए जा रहे है
दो कदम साथ चलने को तैयार ना था कोई, और आज काफिला बन कर मेरे साथ में आ रहे थे
आज पता चला की मौत इतनी हसीन होती है, कम्बखत हम तो यू ही जिए जा रहे थे
King_khan
10-08-2011, 12:18 PM
इमारतों के इस शहर में मैं भी मकान बना गया
कुछ थे जिन्हें था कह दिया कुछ से था छुपा गया
आँगन धोया बिस्तर बिछाया बैठा और दिल को समझाया
छोटा सा ही सही पर साया तो सर पे आ गया
चाहता था रात भर तारों से यूँही बात हो
दरवाज़े से हवा का सर्द झोंका गहरी नींद सुला गया
आँख खुली तो कुछ धुँआ था समझ न पाया क्या हुआ था
बाहर से जाता एक शक्स गाली मुझे सूना गया
क्या कहा था कुछ नहीं क्यूँ 'मस्त' फिर हताश हूँ
जानेवाला मेरे घर को सड़क की झोंपड़ी बता गया
इमारतों के इस शहर में मैं भी मकान बना गया
King_khan
10-08-2011, 12:34 PM
तेरा हर गम अपना लेता हूँ मैं
अपनी ये दुनिया बसा लेता हूँ मैं
दुआएँ बेअसर मेरी हो तो हो सही
कभी कभी मगर हाथ उठा लेता हूँ मैं
ज़ख़्मों से भरा जीगर है मेरा मगर
हर नये जख्म की जगह बना लेता हूँ मैं
मेरा नाम तो मुझे अब याद नहीं
तेरे नाम से ही काम चला लेता हूँ मैं
आज देखा था तुझे कुछ उदास उदास
आज आसमाँ सिर पर उठा लेता हूँ मैं
इंसान हूँ इंसानों में रहता हूँ मायूस
पर देख इनके करम, मुँह छिपा लेता हूँ मैं
aawara
14-08-2011, 08:29 PM
मेरे प्यार की लौ शायद अब भी जलती है उस दिल में
फिर एक बार और किसीसे उसको प्यार ना होया होगा
इस दुनिया में मैं तो अब ऐसा ही मानके चलता हूँ की
वोह दिन बीत गया जब वोह मेरी चिता पर रोया होगा
हाल-ऐ-दिल बयान करूँगा गर खुदा मिल गए मुझ को
कोसूँगा वो दिन मेरे दिल में प्यार का बीज बोया होगा
मुझे ऐसा दिल ही क्यूँ दिया ऐ खुदा तूने जो यह बोले
वोह दिन बीत गया जब वोह मेरी चिता पर रोया होगा
मोहोसिन की पुकार तो सुन ले जब कोई पुकारे तुझको
ग़म- ऐ-ज़िन्दगी का साया जब उस पर चढ़ बोला होगा
दिल-ऐ-जुस्तुजू भी नहीं है अब उसको पाने की यहाँ पे
वोह दिन बीत गया जब वोह मेरी चिता पर रोया होगा
मुझको भी लगा की ये उसके अश्कों की धारा ही तो है
नादान-ऐ-दर्द जाग गया जब उस ने मुझको खोया होगा
ये: सोचते सोचते मेरे दिल में कहीं से ये बात आई की
वोह दिन बीत गया जब वोह मेरी चिता पर रोया होगा
क्यूँ इतना लाचार पड़ा मैं तब अपनी मौत की घडी में
शायद से वक़्त ने यूँ मेरे साथ किया थोड़ा धोखा होगा
ना पैहचान पाया मैं ज़िंदगी में कभी इन्सानों को कभी
वोह दिन बीत गया जब वोह मेरी चिता पर रोया होगा
aawara
14-08-2011, 08:54 PM
http://4.bp.blogspot.com/-fofUkDxuuao/TcbOOidZA0I/AAAAAAAAF8I/ScvO96aPc9I/s400/rajeevranjan1.jpg
a_kela
15-08-2011, 05:00 PM
यूँ सोचता हूँ के कभी मिलूँ,
तुझसे अचानक कहीं,
खौफ़ बस इतना है,
के तू कहीं शर्मिंदा ना हो जाये।
a_kela
15-08-2011, 05:01 PM
हमारे प्यार से दुनिया को रंजिशे क्यों है
जुदा जुदा हमें करने की साजिशे क्यों है
किया था कल जो मुक्कमल मकान शीशे का
उसी पे आज यह पत्थर की बारिशें क्यों है
a_kela
15-08-2011, 05:14 PM
उसे बना कर ग़ज़ल मै सुबह ओ शाम लिखता रहा ,
हकीकत की हर घरी मैं उसे सलाम लिखता रहा ,
वो मेरी मुहबत को मेरा जनून समाज बेठी ,
में नाम इ मुहबत को बार बार लिखता रहा ,
कर लो इकरार -इ -दिलगी मुज से ये कहा उस से मेने ,
अजब शख्स थी मुझे ही बेवफा लिखती रही ,
उसकी आरजू ये थे के "भूल जाओ मुझे ",
में हर दिवार पर इश्क की इन्तहा लिखता रहा ,
ज़ुल्म सहना हे तो इश्क की मिराज है -तनहा -
व o बदनाम करती रही में नादान लिखता रहा ....!
King_khan
18-08-2011, 11:05 AM
सपने छुए? वो उड़ गए
ख्वाब चूमे? लो फुर गए,
क़दम बढ़ाए
राहों से खुद ही जुड़ गए...
आंसू बाधें? वो बह गए
अश्क रोके? लो गिर पड़े,
दिल में सांस भरी
देखो हंस पड़ी...
कल से भागे? टकरा गए
झूठी हिम्मत? लड़खड़ा गए,
अक्स-ए-आईना उलटा
बेवजह क्यूं शर्मिन्दा हुए...
King_khan
18-08-2011, 09:12 PM
http://antarvasna.com/forum/attachment.php?attachmentid=191898&stc=1&d=1313682031
King_khan
18-08-2011, 09:21 PM
http://antarvasna.com/forum/attachment.php?attachmentid=191916&stc=1&d=1313682679
Rihan Hasan
29-08-2011, 09:54 AM
किसी के ज़ख्म का मरहम किसी के ग़म का इलाज़
दुखों ने बाँट रखा है मुझे दवा की तरह
King_khan
19-11-2011, 10:24 PM
अपनी बेबसी पर आज रोना आया हैं !
दूसरों को क्या मैंने खुद को आजमाया हैं !!
हर एक की तनहाई दूर की हैं मैंने...!
पर खुद को हर मोड पे तनहा पाया हैं !!
King_khan
20-11-2011, 12:42 PM
कोई रोशनी अब इधर नहीं आती
शब तो आती है सहर नहीं आती
आती नहीं अब इक हँसी चेहरे पर
कोई आह भी लब पर नहीं आती
हरचंद की है दरिया-ए-खून-ए-दिल
आँखों तक आब-गुज़र नहीं आती
है बस की इंतेज़ार मौत का और वो
आती है हर दम, मगर नहीं आती
मर खप गया होगा कहीं नागाह
मायूस की अब खबर नहीं आती
King_khan
27-11-2011, 10:47 AM
आज हम तुम्हे अपने महबूब से मिलाते है,
जो मय हमे अपनी आखो से पिलाते है,
जुल्फ़ो को वो हमारी कहते है कभी घटाये,
आख़े देखकर हमारी उन्हे,समन्दर याद आते है,
लब उन्हे हमारे,खिलते हुये कवल है लगते,
मुस्कुराहट पर हमारी,वो अपनी जान लुटाते है,
यु तो वो हमे गलती से भी नही है सताते,
लेकिन रुठ जाये हम तो,वो पहरो मनाते है,
होते है हम करीब दुनियां हसी नज़र आती है उनको,
सुनकर उनकी बाते कभी हसते कभी हम शर्माते है,
हमारी ये मुलाकाते बस होती है ख्यालों मे ,
यूँ तो वो हुमको बस तड्पाते और रुलाते है
Badtameez
27-11-2011, 10:51 AM
बहुत ही अच्छी अच्छी शायरी है
King_khan
27-11-2011, 10:58 AM
बहुत ही अच्छी अच्छी शायरी है
बहुत बहुत शुक्रिया सुरेश जी |
King_khan
27-11-2011, 11:04 AM
बहुत ही अच्छी अच्छी शायरी है
बहुत बहुत शुक्रिया सुरेश जी |
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