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View Full Version : क्या भारत में आया पाश्चात्य सभ्यता का दौर हमारे अपने भारत की संस्कृति को कही दूर से ही कहेंगा दिखा रहा है



mohabbat ka afsana
12-01-2011, 06:57 PM
हम आज जिस भारत में रह रहे है क्या उसमे आ रहा दिन प्रतिदिन का विकार हमारी संस्कृति क लिए ठीक है
क्या हमारे भारत वर्ष की सभ्यता इस नंगे नाच में कही खो जाएगी ????????????????????:question::question:

mohabbat ka afsana
12-01-2011, 06:59 PM
सभी सदस्यों से अनुरोध है की इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया जरुर दे

gopu
12-01-2011, 07:28 PM
मेरे विचार से ऐसा होना नहीं चाहिये, खुलापन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा पश्चिम का अनुसरन ये अलग अलग चीजें है. इनके दुष्परिणामों से हमारी संस्कृति नष्ट नहीं होगी .
शायद इसका एक उदहारण हमारा यह फोरम भी है जिसे हम अपने मनोरंजन तथा ज्ञानवर्धन के लिए प्रयोग करते हैं , और वो भी हिंदी में.

tm007
14-01-2011, 02:45 PM
अपनी संस्कृति को संकुचित नज़रिए से मत देखो ! अगर अपनी संस्कृति के खुलेपन को देखोगे तो पाश्चात्य संस्कृति को भी भूल जाओगे !
आपके कहने का मतलब है की राजा महाराजा, कृष्ण एवं अजंता अलोरा सब पाश्चात्य संस्कृति के नमूने हैं ?

अच्छा या बुरा सब हमारी नज़र पर निर्भर करता है अच्छा देखोगे तो अच्छा दिखेगा नहीं तो सीता में भी बुराई नज़र आएगी

Ranveer
14-01-2011, 05:09 PM
पाश्चात्य संस्कृति वहां के भोगौलिक परिस्थिति के हिसाब से विकसित हुई है ...हम उनका नक़ल करके अपने आपको विकसित समझतें है ...हमारे यहाँ एक साधु भी उनकी अपेक्षा में अधिक मॉडर्न होता है क्योंकि वह एक सुन्दर विचार रखता है ...विकसित होना हमारी कला है...... पर शायद हम अब नक़ल करने को ही विकसित होना समझ रहें हैं....

mohabbat ka afsana
15-01-2011, 12:11 AM
अपनी संस्कृति को संकुचित नज़रिए से मत देखो ! अगर अपनी संस्कृति के खुलेपन को देखोगे तो पाश्चात्य संस्कृति को भी भूल जाओगे !
आपके कहने का मतलब है की राजा महाराजा, कृष्ण एवं अजंता अलोरा सब पाश्चात्य संस्कृति के नमूने हैं ?

अच्छा या बुरा सब हमारी नज़र पर निर्भर करता है अच्छा देखोगे तो अच्छा दिखेगा नहीं तो सीता में भी बुराई नज़र आएगी




मित्र मेरा मतलब वहां के रांड ढंग से न होके वहां के तरीके से था

आप ये तो नही कह सकते न की रजा महाराजा क ज़माने में हरकते सडको पर होती थी
और रही बात शरू कृष्ण की तो हम उनकी बात न ही करे तो बेहतर होगा क्योकि वो हमारी संस्कृति में १ मील का पत्थर थे
और यहाँ बात है वहां क ढंग की

और इसके बहुत से प्रमाण आपको हमारी फोरम में ही मिल जांएगे

पर आपका प्रतिक्रिया देने क लिए बहुत बहुत शुक्रिया

Dr.Ashusingh
15-01-2011, 12:43 AM
मॆ सिर्फ इतना कहूगा.."चिडिया कितना भी आकाश मे क्यू ना उड ले..आखिर मे वो अपने घोसले मे ही आती हॆ."

mohabbat ka afsana
15-01-2011, 01:26 PM
मॆ सिर्फ इतना कहूगा.."चिडिया कितना भी आकाश मे क्यू ना उड ले..आखिर मे वो अपने घोसले मे ही आती हॆ."

मित्र बड़े शिकारी पड़े है रहो में ऐसे ही चलता रहा तो १ दिन बस हम सोचते ही रह जाएँगे और सब हमारे हाथ से निकल जाएगा


पर उत्तर देने क लिए शुक्रिया

slimsima
13-01-2012, 11:53 PM
बिलकुल ये ही हो रहा हे
कुछ दिनों हम लोग पूर्व नोर्थ यूरोप की यात्रा पर गए थे
वंहा इटली से आगे का सफ़र नोर्विजियन एपिक नामक एक क्रूज़ में तय करना था वंहा ६ दिनों से साध्वी रितुम्भरा की भगवत कथा चल रही थी बहुत ही बुरा लगा ये देख कर क्यूंकि वंहा एक तरफ पाश्चात्य संस्कृति का भद्दा प्रदर्शन हो रहा था और दूसरी तरफ श्री मद भगवत का पठन ऐसे आयोजन करने वालो की सोच पर रोना आता हे
हमारे यंहा भी ये ही हो रहा हे
कुँवारी लड़कियों द्वारा करवाए जाने वाले गर्भपात की दर नोवेम्बर और दिसम्बर के महीने में सबसे ज्यादा होती हे क्यूंकि नवरात्रि जैसे पवित्र त्यौहार को आज के पाश्चात्य रंग में रंगे युवाओं ने मजाक बनाया हुआ हे माँ की आराधना तो बाजू में रह जाती हे युवक युवतियां वंहा एक दुसरे की आराधना करते हे

Saroz
14-01-2012, 06:46 AM
Empty vessel Sounds TOO much....!!!!!

माफ़ करना, इससे आगे कुछ नहीं........

raj.25
14-01-2012, 10:21 PM
अगर किसी चीज की बुनियाद सची हो तो कोई नहीं हिला सकता .... हमारी संस्कृति की बुनियाद बहुत गहरी है .... हा लेकिन हमें ये दंभ भी नहीं करना चाहिए की हम ही विश्व में सबसे अछे है ....कई चीजो में पाश्चात्य संस्कृति हमसे आगे है ...

Saroz
19-01-2012, 04:34 PM
अगर किसी चीज की बुनियाद सची हो तो कोई नहीं हिला सकता .... हमारी संस्कृति की बुनियाद बहुत गहरी है .... हा लेकिन हमें ये दंभ भी नहीं करना चाहिए की हम ही विश्व में सबसे अछे है ....कई चीजो में पाश्चात्य संस्कृति हमसे आगे है ...
:clap:बिलकुल सही बात कही आपने मित्र...+१