View Full Version : ** प्यारी माँ **
Pooja1990 QUEEN
13-01-2011, 10:15 AM
ma ki mahima ka bardan shabdo me baya nahi kiya ja sakta. agar sare samudra ke pani ko syahi or puri pratvi ko kagaj man le to b kam pad jayega. . . . . . . . . . .. . . . . . . . . ma to jag ka mul hai. ma me basta pyar. matra divas par pujta. tujko sab sansar.. . . . . . . .. .
sanjeetspice
28-01-2011, 05:24 PM
maa mughse or me maa se humesa ghagra(fight) hoti rhti h
sanjeetspice
28-01-2011, 05:32 PM
me maa se bhuit pyar krta hu or wo humesa khus rhe ye checheta hu
sanjeetspice
28-01-2011, 05:39 PM
i really love my mother
Ranveer
27-02-2011, 01:47 AM
"" तू जब पैदा हुआ तो कितना मजबूर था
ये जहाँ तेरी सोच से भी दूर था
हाथ पाओं भी तेरे अपने न थे
तेरी आँखों में दुनिया के सपने न थे
तुझको आता सिर्फ रोना ही था
दूध पि के काम तेरा सोना ही था
तुझको चलाना सखाया था माँ ने तेरी
तुझ को दिल में बसाया था माँ ने तेरी
माँ के साये में परवान चढ़ने लगा
वक्क के साथ कद तेरा बढ़ने लगा
धीरे धीरे तू कुडियल जवान हो गया
तुझ पे सारा जहाँ मेहरबान हो गया
जोर - ये -बाजुओं पर तू बात करने लगा
खुद ही सजने सँवरने लगा
एक दिन एक लड़की तुझे भा गई
बन के दुल्हन वो तेरे घर आ गई
अब फ़र्ज़ से तू दूर होने लगा
बिज़ नफरत का तू खुद ही बोलने लगा
फिर तू माँ बाप को भी भूलने लगा
तीर बातों के फिर तू चलाने लगा
बात बात में उनसे ही तू लड़ने लगा
कायदा एक नया तू फिर पढने लगा
याद कर माँ ने तुझसे कहा था एक दिन
अब हमारा गुज़ारा नहीं तेरे बिन
सुन के ये बात तू तैश में आ गया
तेरा गुस्सा तेरी अक्ल को खा गया
जोश में आके तुने माँ से ये कहा
मै था खामोश मै देखता ही रहा
आज कहता हूँ पीछा छोड़ दो
जो है रिश्ता मेरा वो तोड़ दो
बैठ कर आन्हे भारती थी माँ रात भर
उनकी आँखों का हुआ न तुझ पर असर
एक दिन मौत को भी तरस आ गया
इसका रोना भी तकदीर को भा गया
मुद्दत हो गए आज बूढा है तू
टूटी खटियों पर पडा बोरा है तू
तेरे बच्चे भी अब तुझसे डरते नहीं
नफरत है मुहब्बत वो करते नहीं
दर्द में तू पुकारे ओ मेरी माँ
तेरे दम से ही रौशन थे दोनों जहाँ
काट ले वही तुने बोया था जो
तुझको कैसे मिले खोया था जो
याद करके गया दौर तू रोने लगा
कल जो तुने किया आज फिर होने लगा
याद रखना हर औलाद इस बात को
भूल जाना न रहमत की बरसात को ""
man-vakil
27-02-2011, 12:11 PM
माँ ...एक शब्द ..जो एक ग्रन्थ के सामान अपने में सम्पूर्णता भरे हुए..
माँ ..एक रिश्ता ...जिसमे जग के सब रिश्तों से अधिक प्रेम बंधन ....
माँ ...एक गोद ..जो दुनिया के समस्त दुखों से बचने का उत्तम उपाय..
माँ...एक पुकार..जो दुनिया की समस्त अजानों से बढकर होती..
माँ.. एक संगीत . जो अपने शिशु के क्रंदन को हँसी में बदल देती..
माँ..एक जीवन...जो अपने भीतर से नए जीवन का उदगम करती..
माँ.. सब कुछ...जिसे हम उसके होने पर नकारते.. हो ना होने पर पुकारते ...
marwariladka
27-02-2011, 12:22 PM
माँ ...एक शब्द ..जो एक ग्रन्थ के सामान अपने में सम्पूर्णता भरे हुए..
माँ ..एक रिश्ता ...जिसमे जग के सब रिश्तों से अधिक प्रेम बंधन ....
माँ ...एक गोद ..जो दुनिया के समस्त दुखों से बचने का उत्तम उपाय..
माँ...एक पुकार..जो दुनिया की समस्त अजानों से बढकर होती..
माँ.. एक संगीत . जो अपने शिशु के क्रंदन को हँसी में बदल देती..
माँ..एक जीवन...जो अपने भीतर से नए जीवन का उदगम करती..
माँ.. सब कुछ...जिसे हम उसके होने पर नकारते.. हो ना होने पर पुकारते ...
Maa se bada gift shayad hi bhagwan kisi ko de paye..iswar ka dharti pe roop hoti hai maa.....par kuch kamine us maa ke liye bhi nich baatein aur nich vichar man me rakhte hain.....jyadatar galiyan maa se hi shuru hoti hai...mujhe un sab se nafrat hai.....
miss sexon
28-02-2011, 06:11 PM
नीद अपनी भुलाकर सुलाया हमको
आंसू अपने गिरा कर हंसाया हमको
दर्द कभी न देना उन हस्तियों को
अल्लाह ने " माँ -बाप " बनाया जिनको...i
Pooja1990 QUEEN
28-02-2011, 06:42 PM
thanks kabita ji.
man-vakil
28-02-2011, 10:59 PM
ओह माँ...कितना सहती तुम मेरे लिए ,
और फिर भी कभी मुख पर कोई शिकन नहीं,
मेरे नन्हे नन्हे हाथों को थाम, अपने हाथों में,
सिखा देती मुझे चलना , जीवन की कठिन डगर पर,
याद वो मेरे पहले बोल, सेज रखे है तुमने आज तक,
अपने ह्रदय के सबसे मधुर कोने में, मीठी याद से,
मेरे अश्रु कैसे तुम्हे, कर देते थे विचलित कौंध कर,
और फिर स्नेह से तुम माँ, पौंछ देती मेरे गालो से उन्हें,
man-vakil
28-02-2011, 11:06 PM
वो तुम्हारा आँचल लगता हमेशा मुझे, नीले आसमान से बड़ा,
और तुम्हारी गोद रही हमेशा, धरती से बड़ी हमेशा से,
मेरी गलतियों को कितनी सहजता से भुला देती तुम,
पर मेरे भीतर अच्छे संस्कार ,नहीं करती नज़रंदाज़,
मै जहाँ कही भी जाता, एक परछाई भेज देती सदैव,
अपने भावों से भरकर , जो रहती कही मेरे ही भीतर,
और ना भटकने देती मुझे, कभी भी अपनी राह से,
और ना ही गिरने देती मुझे , कभी पापों के गर्त में ,
यदि कभी मुझे कभी सकारण, डांटती भी तो दुखी हो,
लगते हमेशा खुद को कोसने, जबकि भूल मेरी ही होती,
मेरे अहंकार को देखो, मै घंटों तुमसे रूठा रहता कई बार,
और तुम मेरी मुस्कान की आस में, खुद ही मुझे मनाती,,
Pooja1990 QUEEN
28-02-2011, 11:36 PM
thanks man vakil ji.
loverboy.10
28-02-2011, 11:37 PM
ma se pyara koi nahi. yeh mujhse acchi tarah koi nahi janta.
parmatma
28-02-2011, 11:39 PM
पूजा नमस्कार.......! आप से विनती है की कृपया आप हिंदी में लिखे|
rahulp2015
28-02-2011, 11:49 PM
the only day when MOTHER happy on the cry of child is BIRTHDAY
"OTHERWISE NO MOTHER IN THIS WORLD HAPPY IN CRY OF CHILD"
:bloom: "LOVE U MOM" :bloom:
:globe:
sanjeetspice
01-03-2011, 01:58 AM
"" तू जब पैदा हुआ तो कितना मजबूर था
ये जहाँ तेरी सोच से भी दूर था
हाथ पाओं भी तेरे अपने न थे
तेरी आँखों में दुनिया के सपने न थे
तुझको आता सिर्फ रोना ही था
दूध पि के काम तेरा सोना ही था
तुझको चलाना सखाया था माँ ने तेरी
तुझ को दिल में बसाया था माँ ने तेरी
माँ के साये में परवान चढ़ने लगा
वक्क के साथ कद तेरा बढ़ने लगा
धीरे धीरे तू कुडियल जवान हो गया
तुझ पे सारा जहाँ मेहरबान हो गया
जोर - ये -बाजुओं पर तू बात करने लगा
खुद ही सजने सँवरने लगा
एक दिन एक लड़की तुझे भा गई
बन के दुल्हन वो तेरे घर आ गई
अब फ़र्ज़ से तू दूर होने लगा
बिज़ नफरत का तू खुद ही बोलने लगा
फिर तू माँ बाप को भी भूलने लगा
तीर बातों के फिर तू चलाने लगा
बात बात में उनसे ही तू लड़ने लगा
कायदा एक नया तू फिर पढने लगा
याद कर माँ ने तुझसे कहा था एक दिन
अब हमारा गुज़ारा नहीं तेरे बिन
सुन के ये बात तू तैश में आ गया
तेरा गुस्सा तेरी अक्ल को खा गया
जोश में आके तुने माँ से ये कहा
मै था खामोश मै देखता ही रहा
आज कहता हूँ पीछा छोड़ दो
जो है रिश्ता मेरा वो तोड़ दो
बैठ कर आन्हे भारती थी माँ रात भर
उनकी आँखों का हुआ न तुझ पर असर
एक दिन मौत को भी तरस आ गया
इसका रोना भी तकदीर को भा गया
मुद्दत हो गए आज बूढा है तू
टूटी खटियों पर पडा बोरा है तू
तेरे बच्चे भी अब तुझसे डरते नहीं
नफरत है मुहब्बत वो करते नहीं
दर्द में तू पुकारे ओ मेरी माँ
तेरे दम से ही रौशन थे दोनों जहाँ
काट ले वही तुने बोया था जो
तुझको कैसे मिले खोया था जो
याद करके गया दौर तू रोने लगा
कल जो तुने किया आज फिर होने लगा
याद रखना हर औलाद इस बात को
भूल जाना न रहमत की बरसात को ""
bhuit hi badhiya likha h dost dil ko chu liya
sanjeetspice
01-03-2011, 02:01 AM
maa ki succhi kadar to dosto ushe hi hoti h jis k pas maa nhi hoti
Pooja1990 QUEEN
01-03-2011, 07:16 AM
ma ko pyar sabi karte hai. mom i love u.
Dark Rider
01-03-2011, 07:21 AM
I LOVE U TOO { MOM }
smsboy
01-03-2011, 10:26 PM
बहुत छोटा था जब मेरी माँ की डेथ हुयी थी, पर तब से लेकर आज तक कोई ऐसा पल नहीं गुजरा जब मुझे उनकी याद ना आई हो या कमी ना महसूस हुई हो , कहते है भगवान जो करता है अच्छे के लीये करता है लिकिन इसमे क्या अच्छाई थी आज तक नहीं समझ पाया miss you mom love you.............
sonusexy
01-03-2011, 10:50 PM
बहुत छोटा था जब मेरी माँ की डेथ हुयी थी, पर तब से लेकर आज तक कोई ऐसा पल नहीं गुजरा जब मुझे उनकी याद ना आई हो या कमी ना महसूस हुई हो , कहते है भगवान जो करता है अच्छे के लीये करता है लिकिन इसमे क्या अच्छाई थी आज तक नहीं समझ पाया miss you mom love you.............
mere saath bhi kuch aisa hi huaa tha
Ranveer
01-03-2011, 11:22 PM
बहुत छोटा था जब मेरी माँ की डेथ हुयी थी, पर तब से लेकर आज तक कोई ऐसा पल नहीं गुजरा जब मुझे उनकी याद ना आई हो या कमी ना महसूस हुई हो , कहते है भगवान जो करता है अच्छे के लीये करता है लिकिन इसमे क्या अच्छाई थी आज तक नहीं समझ पाया miss you mom love you.............
mere saath bhi kuch aisa hi huaa tha
परिंदे का दर्द भरा फ़साना था
टूटे थे पंख और उड़ते जाना था
तूफ़ान तो झेल गया पर हुआ अफ़सोस
वो ही डाली टूटी थी जिस पर उसका आशियाना था ....i
man-vakil
01-03-2011, 11:32 PM
वो गुमसुम सा हो गया था,,जब वो चिरनिंद्रा में सो गयी थी..
बस नैनों से बहती रही उसके.. एक अविरल धारा दुखों की लगातार,
शब्द थे के जैसे रुक गए ...एकाएक उसके कंठ के किसी कोने में ,
बस वो देखता रहा एकटक ...टकटकी बांधे उसे लिपटे सफ़ेद चादर में,
विलाप और क्रंदन चंहु और था.. पर उसके कानों में सब ध्वनि विहीन सा,
कल आज और कल, समय की सोच.. सब धुंधली हो गयी थी उसके मस्तिष्क में,
क्या सूझ और क्या चलन उसका था ...सब मिट कर खोखले गर्त में खो गए..
बस एक प्रश्न जो उसे बार बार था.. कर रहा था भयभीत और प्राण विहीन सा ..
क्या माँ सचमुच चली गयी थी ...दूर उससे रूठ कर अचानक , परन्तु क्यों ...........
man-vakil
01-03-2011, 11:34 PM
प्रिये सोनू के लिए...
वो गुमसुम सा हो गया था,,जब वो चिरनिंद्रा में सो गयी थी..
बस नैनों से बहती रही उसके.. एक अविरल धारा दुखों की लगातार,
शब्द थे के जैसे रुक गए ...एकाएक उसके कंठ के किसी कोने में ,
बस वो देखता रहा एकटक ...टकटकी बांधे उसे लिपटे सफ़ेद चादर में,
विलाप और क्रंदन चंहु और था.. पर उसके कानों में सब ध्वनि विहीन सा,
कल आज और कल, समय की सोच.. सब धुंधली हो गयी थी उसके मस्तिष्क में,
क्या सूझ और क्या चलन उसका था ...सब मिट कर खोखले गर्त में खो गए..
बस एक प्रश्न जो उसे बार बार था.. कर रहा था भयभीत और प्राण विहीन सा ..
क्या माँ सचमुच चली गयी थी ...दूर उससे रूठ कर अचानक , परन्तु क्यों ...........
v1979p
02-03-2011, 04:53 PM
सीनी से लगा क कहा करती थी माँ मुझ को
तो लाल है न सता मुझ को
पछताए गा इक दिन जब मैं चली जून गी
न चाहती हुए भइ अकेला चूर जून गी
ज़माना दिखाई गा गर्मी की शिद्दत तुझ को
याद करके रोये गा तू फिर मुझ को
मुद्दद से मेरी माँ ने सीनी से नहीं लगाया अ
अब सो गयी ख़ाक मैं जब कुछ कहनी का वक़्त आया
v1979p
03-03-2011, 01:09 PM
"माँ "
केसे भूलो में वो दिन जब माँ मेरे पास थी
जब कभी में रूठ जाती तो प्यार से मुझे मानती
वो समय ही बस समय था जब माँ मेरे पास थी
जब कभी न सो पों में वो लोरी गा के सुनती थी
वो समय ही बस समय था जब माँ मेरे पास थी
जब कभी में खों न वो पीछे पीछे आती थी
वो समय ही बस समय था जब माँ मेरे पास थी
जब कभी रोती थी में वो प्यार से सहलाती थी
वो समय ही बस समय था जब माँ मेरे पास थी
जब कबी हँसती थी में वो फूली न समाती थी
वो समय ही बस समय था जब माँ मेरे पास थी
क्यों किया विदा तुने मुझे डोली में बिठा केर के
रोई तो में बहूत थी फिर भी न रोका तुने मुझे
v1979p
03-03-2011, 01:10 PM
"माँ "
केसे भूलो में वो दिन जब माँ मेरे पास थी
जब कभी में रूठ जाती तो प्यार से मुझे मानती
वो समय ही बस समय था जब माँ मेरे पास थी
जब कभी न सो पों में वो लोरी गा के सुनती थी
वो समय ही बस समय था जब माँ मेरे पास थी
जब कभी में खों न वो पीछे पीछे आती थी
वो समय ही बस समय था जब माँ मेरे पास थी
जब कभी रोती थी में वो प्यार से सहलाती थी
वो समय ही बस समय था जब माँ मेरे पास थी
जब कबी हँसती थी में वो फूली न समाती थी
वो समय ही बस समय था जब माँ मेरे पास थी
क्यों किया विदा तुने मुझे डोली में बिठा केर के
रोई तो में बहूत थी फिर भी न रोका तुने मुझे
v1979p
03-03-2011, 01:12 PM
ससुराल मे
आज जब में रोती हूँ तो कोई मनाता नहीं
आज न सो पों अगर में तो कोई लोरी गता नहीं
आज जब में रूठ जाओं कोई मनाता नहीं
आज न खों जो में तो कोई खिलाता नहीं
आज में उदास हूँ तो क्यों तू आती नहीं
क्यों तू अपने साथ मुझे वापिस ले जाती नहीं
v1979p
03-03-2011, 01:15 PM
ससुराल मे
आज जब में रोती हूँ तो कोई मनाता नहीं
आज न सो पों अगर में तो कोई लोरी गता नहीं
आज जब में रूठ जाओं कोई मनाता नहीं
आज न खों जो में तो कोई खिलाता नहीं
आज में उदास हूँ तो क्यों तू आती नहीं
क्यों तू अपने साथ मुझे वापिस ले जाती नहीं
v1979p
03-03-2011, 02:20 PM
माँ
सुनती हूँ पुकार तेरी लेकिन में मजबूर हूँ
कोई नहीं है मेरा में गमो से चूर हूँ
न साया है पति का न बेटा मेरे साथ है
दुनिया की जो रीत है उससे में मजबूर हूँ
चाहती हूँ पास रखना लेकिन दुनिया से मजबूर हूँ
आज में पछताती हूँ क्यों रूठी को मनाया मेने
क्यों लोरी गा के सुलाया मेने
क्यों प्यार से सहलाया मेने
क्यों लाड सारे लड़ाए मेने
क्यों भूल गई में तू तो पराई है
मेरे घर तो केवल मेहमान बन के आई है
SUNIL1107
03-03-2011, 03:22 PM
नियामकों से सवाल :-क्या वरिष्ठ सदस्यों को हिंदी के उपयोग के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है !
प्रश्न केवल निजी जानकारी हेतु किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के मकसद से नहीं !
सूत्र बेहद भावनाओं से भरपूर है जिसके लिए पूजाजी को हार्दिक बधाई !
encee
04-03-2011, 05:39 AM
माँ
सुनती हूँ पुकार तेरी लेकिन में मजबूर हूँ
कोई नहीं है मेरा में गमो से चूर हूँ
न साया है पति का न बेटा मेरे साथ है
दुनिया की जो रीत है उससे में मजबूर हूँ
चाहती हूँ पास रखना लेकिन दुनिया से मजबूर हूँ
आज में पछताती हूँ क्यों रूठी को मनाया मेने
क्यों लोरी गा के सुलाया मेने
क्यों प्यार से सहलाया मेने
क्यों लाड सारे लड़ाए मेने
क्यों भूल गई में तू तो पराई है
मेरे घर तो केवल मेहमान बन के आई है
बेहद मार्मिक पंक्तियाँ हैं.
माँ के लिए कई बेटियों और बेटों ने अपनी अपनी भावनाओं को व्यक्त किया है. पर माँ के इसी प्रकार के और उदगार, अपने बेटे बेटियों के लिए, भी इस पोस्ट में चाहिए.
BHARAT KUMAR
04-03-2011, 05:40 AM
बहुत अच्छा सूत्र है..
BHARAT KUMAR
04-03-2011, 05:42 AM
बहुत अच्छा सूत्र है..
नियामकों से सवाल :-क्या वरिष्ठ सदस्यों को हिंदी के उपयोग के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है !
प्रश्न केवल निजी जानकारी हेतु किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के मकसद से नहीं !
सूत्र बेहद भावनाओं से भरपूर है जिसके लिए पूजाजी को हार्दिक बधाई !
BHARAT KUMAR
04-03-2011, 05:42 AM
मित्र मैं खुद इस बात से बहुत नाराज़ हूँ.. कुछ सदस्य वरिस्थ होते गहे भी बेशर्मों की तरह बार बार कहने के बावजूद अंग्रेजी में ही पोस्ट करते हैं.. इसके बारे में प्रकाशक महोदय से बात हो चुकी है... आशा की जाती है की जल्दी ही इन पर लगाम कसी जाएगी..
नियामकों से सवाल :-क्या वरिष्ठ सदस्यों को हिंदी के उपयोग के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है !
प्रश्न केवल निजी जानकारी हेतु किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के मकसद से नहीं !
सूत्र बेहद भावनाओं से भरपूर है जिसके लिए पूजाजी को हार्दिक बधाई !
SUNIL1107
04-03-2011, 10:42 PM
धन्यबाद राजा डोन जी हमें बेहद प्रसन्नता है कि आप हमारी बात से सहमत हैं ! और आपने हमारी बात का उत्तर दिया पुनः धन्यवाद !
smsboy
05-03-2011, 07:46 AM
नियामकों से सवाल :-क्या वरिष्ठ सदस्यों को हिंदी के उपयोग के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है !
प्रश्न केवल निजी जानकारी हेतु किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के मकसद से नहीं !
सूत्र बेहद भावनाओं से भरपूर है जिसके लिए पूजाजी को हार्दिक बधाई !
मित्र दूसरों के ऊपर उंगली उठाने से पहले खुद को सुधारिये बड़े शब्दों का प्रयोग करना भी नियमों के विरूद्ध है , हमेसा ध्यान रखिये की हम बदलेगे तो जग बदलेगा
rajesh151963
05-03-2011, 08:41 AM
maa, ye ek aisa word & Ahsas hai, jiski explain sabdo me karna kafi kam hoga, ye ek pyar hai, sukun hai, dard hai, sahas hai, himmat hai, sawal hai or jawab bhi hai, is se sunder ahsas puri dunia me nahi hai wo bhi bina swarth ke. Maa bacco ki jaa hoti hai and wo hote hai kismat wale jinki ma hoti hai, isliye apni maa ko sambhal ke rakho. Ye God ka sabse sunder gift diya hua hai. Thanks
jhatka
01-04-2011, 11:28 PM
मेरी कविता भारत माता के लिए ............
ओ माँ तेरी हम संतान
तुने जो दिया हमें तेरी
हर देन के लिए तुझे प्रणाम
तेरी ही गोद हमारी पालनहार
नतमस्तक हम तेरे
माँ की ममता अपार
ओ माँ तुझे है मेरी प्रार्थना
एक सुर में हम फिर बंधें
फिर गूंजे एकता का तराना
धरम जाति से ऊपर
ओ माँ और ऊँचा हो तेरा नाम
भारत माँ तुझे सलाम !!
SUNIL1107
04-04-2011, 09:07 PM
किसी शायर ने क्या खूब कहा है --
किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आई
मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई
मंच पर लगे बैनर पर भी ‘माँ’ इस तरह मौजूद थी-
इस तरह मेरे गुनाहों को धो देती है
माँ बहुत गुस्से में हो तो रो देती है !
SUNIL1107
04-04-2011, 09:09 PM
मित्र दूसरों के ऊपर उंगली उठाने से पहले खुद को सुधारिये बड़े शब्दों का प्रयोग करना भी नियमों के विरूद्ध है , हमेसा ध्यान रखिये की हम बदलेगे तो जग बदलेगा
मित्र एस एम् एस जी वह केवल ध्यानाकर्षण हेतु ही था !
SUNIL1107
29-04-2011, 03:45 PM
बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ ,
याद आता है चौका-बासन, चिमटा फुँकनी जैसी माँ ।
बाँस की खुर्री खाट के ऊपर हर आहट पर कान धरे ,
आधी सोई आधी जागी थकी दुपहरी जैसी माँ ।
चिड़ियों के चहकार में गूँजे राधा-मोहन अली-अली ,
मुर्गे की आवाज़ से खुलती, घर की कुंड़ी जैसी माँ ।
बीवी, बेटी, बहन, पड़ोसन थोड़ी-थोड़ी सी सब में ,
दिन भर इक रस्सी के ऊपर चलती नटनी जैसी मां ।
बाँट के अपना चेहरा, माथा, आँखें जाने कहाँ गई ,
फटे पुराने इक अलबम में चंचल लड़की जैसी माँ ।
kamesh
29-04-2011, 06:40 PM
माँ
एक एय्सा शब्द जिसे लेते ही लगता है दुनिया के सरे दुःख दर्द मिट गए और एक शकुन, शांत, दुलार ,प्रेम, प्यार, ममता, लोरी और न जाने क्या क्या शब्द भी कम पड़ने लगता है उस माँ का नाम लेते ही
खुसनसीब हैं वो जिन की माएं है
कम से कम ममता का आँचल तो है उन पे कितना बढ़ हो जाये बचे मगर माँ के लिए वो हमेशा छोटे ही होंगे और माँ को लगता है की अभी भी उन्हें सम्हालना होगा
माँ की महिमा आपर है लिखा जाये तो ग्रन्थ बन जाये
पूजा जी सराहनीय प्रयास
सेलूट आप को जो की आप ने माँ की बात कही
Raman46
29-04-2011, 07:18 PM
पूजा जी आप से ही निवेदन
क्यों आप अपनी ही जिद पर अड़ी हें
आप हिंदी लिख सकती हें इसमें कोई शक नही पर क्यों येसा करने पर अडिग हें
नियामक जी भी शायद परेशान ही होंगे ,पर क्या करें ,जब अपना ही बच्चा जिद पर आ जाय/
आप एक प्रतिभाशाली उभरती नये ज़माने की दबंग लड़की हें .....कोई शक नही /
जिद किसी हद तक तो ठीक हे पर अति नही /
आशा करूँगा आप से एक बार फिर से पाने निर्णय पर विचार करें
धन्यबाद पिजा जी
kamesh
29-04-2011, 07:21 PM
पूजा जी वेसे तो आप मेरी सब से अछी मित्रों में से एक हो
पहले ही माफ़ी मांग लेता हूँ आप से नाराज मत होना
एक निवेदन है आप से आप हिंदी में लिखो कृपया हमें आप के इस छोटे से उपहार से बड़ी ख़ुशी होगी
एक बार मेरा निवेदन मन लो
और कोई बात हो तो प्राइवेट में कह दो
kamadev
07-05-2011, 06:56 PM
8 May Mother Day
kamesh
08-05-2011, 01:24 PM
आज मदर्स डे है
माँ तुझे नमन करता हूँ
ज्ञान की गंगा है प्यार की जमना है
सपनो की गुल्लक है यादो का गहना है
थैपकी दे प्यार भरी,लोरी की सरगम है
आस्था की भोर नयी श्रधा की पूनम है
बाँहों का झुला है,अंचल की छाया है
पता नहीं केसी है पता नहीं क्या क्या है
ये मेरी माँ है हाँ ये मेरी माँ है
kamesh
08-05-2011, 02:15 PM
लोग यूँ ही खफा नहीं होते
अपनी भी खता होगी
हद्शो से बचा लायी
वो किसी की दुवा रही होगी
खेरियत से कटे सफ़र मेरा
आज माँ निर्जला रही होगी
हैप्पी मदर्स डे टु यू आल
Pooja1990 QUEEN
08-05-2011, 09:01 PM
हैप्पी mothars day ......
sanjeetspice
08-05-2011, 09:57 PM
माँ तुझे सलाम
rajan2907
22-07-2011, 06:01 PM
pooja aisa sutar shuru karne k liye tum badhai ki paatar ho.
sorry hindi nahi aati.
dev b
26-09-2011, 10:18 PM
माँ ..मेरी माँ ..प्यारी माँ
Pooja1990 QUEEN
26-09-2011, 10:24 PM
............माँ मेरीप्यारी माँ
swami ji
29-11-2011, 05:27 PM
...;माँ;... से बढ़कर कुछ नहीं हे ,,,,,
SUNIL1107
23-04-2012, 09:41 PM
...............................:bell:
SUNIL1107
23-04-2012, 09:42 PM
............................
SUNIL1107
23-04-2012, 09:44 PM
.............................
SUNIL1107
23-04-2012, 09:46 PM
....................................
SUNIL1107
23-04-2012, 09:48 PM
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Raja44
24-04-2012, 09:46 AM
मेरी दुनिया है माँ तेरे आंचल मेँ शीतल छाया तू दुख के जंगल मेँ
ajnabi_dost
24-04-2012, 10:19 AM
माँ' जिसकी कोई परिभाषा नहीं,
जिसकी कोई सीमा नहीं,
जो मेरे लिए भगवान से भी बढ़कर है
जो मेरे दुख से दुखी हो जाती है
और मेरी खुशी को अपना सबसे बड़ा सुख समझती है
जिसकी छाया में मैं अपने आप को महफूज़
समझता हूँ, जो मेरा आदर्श है
जिसकी ममता और प्यार भरा आँचल मुझे
दुनिया से सामना करने की *शक्ति देता है
जो साया बनकर हर कदम पर
मेरा साथ देती है
चोट मुझे लगती है तो दर्द उसे होता है
मेरी हर परीक्षा जैसे
उसकी अपनी परीक्षा होती है
माँ एक पल के लिए भी दूर होती है तो जैसे
कहीं कोई अधूरापन सा लगता है
हर पल एक सदी जैसा महसूस होता है
वाकई माँ का कोई विस्तार नहीं
मेरे लिए माँ से बढ़कर कुछ नहीं।
ajnabi_dost
24-04-2012, 10:22 AM
संबंध नहीं हैं माँ केवल संपर्क नहीं है
आदर्श है जीवन का केवल संबोधन नहीं है
जन्मदात्री है वो मात्र इंसान नहीं है
व्यक्तित्व बनाती है, केवल पहचान नहीं है
ममता की प्रतिमा है केवल नारी का एक रूप नहीं है
स्नेह की छाया है केवल कठोरता की धूप नहीं है
हृदय है इसका प्रेम का सागर, जिसकी कोई थाह नहीं है
आघातों से पीड़ित है फिर भी मुख पर आह नहीं है
आघात जो मिले है अपनो से, सहने के अतिरिक्त राह नहीं है
दंडित करने की अधिकारी है, मात्र क्षमा का प्रवाह नहीं है
कृतघ्न हैं वो जो माता को आहत करते हैं
कर्तव्यों से मुँह मोड़ अधिकारों का दावा करते हैं
संतान के रक्षण हेतु माता न जाने क्या-क्या करती है,
पीड़ाओं को सहकर भी आँचल की छाया देती है
कभी देवकी बनकर वो निरपराध ही दंड भोगती है
कभी अग्नि में पश्चाताप की कैकयी सी बन जलती है
सुपुत्रों से आज है मेरा नम्र निवेदन
दु:ख न दें, भले न दे सुख का आँगन .........
ajnabi_dost
24-04-2012, 10:32 AM
माँ की महिमा बताते हुए राष्ट्रसंत मुनि तरुण सागर जी का कथन है ' 2 किलो का पत्थर 5 घंटे पेट से बाँधकर रखो, पता पड़ जाएगा माँ क्या होती है।'
SUNIL1107
24-04-2012, 04:28 PM
माँ
जग में किसने देखा ईश्वर को
आखें खोलीं तो पहले पाया तुझको
मुझको लाकर इस संसार में
”माँ” मुझ पर तुमने उपकार किया
मुझे अपने रक्त से सींचा तुमने
मुझे सांसों का उपहार दिया
मेरे इस माटी के तन को
माँ तुमने ही आकार दिया
कैसे यह करज चुकाऊं मैं
इतना तो बता दे ”राम” मेरे
पहले ”माँ ” का कर्ज चुका लूं
फिर आऊं मैं द्वारे तेरे .
मेरी हर इच्छा को तुमने
बिन बोले ही पहचान लिया
सुख की नींद मैं सो पाऊं
अपनी रातों को भुला दिया
मेरे गीले बिस्तर को माँ तुमने
अपने आंचल से सुखा दिया
गर डिगा कहीं विश्वास मेरा
मुझे हौसला तुमने दिया
मुझे हर कठिनाइयों से
टकराने का साहस तुमने दिया
मेरी छोटी बड़ी सभी नादानियों को
तुमने हंसते हंसते बिसरा दिया
मेरे लड़खड़ाते कदमों को माँ तुमने
अपनी उंगली से थाम लिया
तेरे इस बुढ़ापे में माँ तेरी
लाठी मैं बन जाऊं
मुझको सहारा दिया था कभी तूने
तेरा सहारा मैं बन जाऊं हर दम
फिर भी न अहसान चुका पाऊं
चाहे ले लूं मैं कितने जनम
इस धरती पर ”माँ ”
ईश्वर का ही रूप है
कितने बदनसीब होते हैं वे
जो ढूंढते हैं ईश्वर तुझको
मंदिर, मस्जिद गुरूद्वारों में
अपने घर में झांक तो लें
वह मिलेगा तुझे माँ की छांव में
ना जानूं मैं काबा तीरथ
ना जानूं हरिद्वारे
ना जानूं मैं काशी मथुरा
ना ही तीरथ सारे
मैं तो जानूं ”माँ” बस तुझको
सारे तीरथ बस तेरे ही द्वारे
SUNIL1107
24-04-2012, 04:38 PM
मेरी दुनिया है माँ तेरे आंचल मेँ शीतल छाया तू दुख के जंगल मेँ
मेरी दुनिया है तेरे आंचल में
शीतल छाया दो दुख के जंगल में
मेरी राहों के दीप, तेरी दो अंखियां
मुझे से गीता से लगी, तेरी दो बतियाँ
युग में मिलता है जो, सो मिलता पल में
मेरी दुनिया है मां तेरे आंचल में ।
मैंने आंसू भी दिये पर तू रोई ना
मेरी निंदिया के लिए बरसों तू सोई ना
ममता गाती रही, गम की हलचल में
मेरी दुनिया है मां तेरे आंचल में
काहे ना धोके तेरे ये चरण तेरे मां
देवता प्*याला लिए दर पे खडे मां
अमृत सबका है इस गंगा जल में
मेरी दुनिया है मां तेरे आंचल में
Raja44
24-04-2012, 07:36 PM
मेरी दुनिया है तेरे आंचल में
शीतल छाया दो दुख के जंगल में
मेरी राहों के दीप, तेरी दो अंखियां
मुझे से गीता से लगी, तेरी दो बतियाँ
युग में मिलता है जो, सो मिलता पल में
मेरी दुनिया है मां तेरे आंचल में ।
मैंने आंसू भी दिये पर तू रोई ना
मेरी निंदिया के लिए बरसों तू सोई ना
ममता गाती रही, गम की हलचल में
मेरी दुनिया है मां तेरे आंचल में
काहे ना धोके तेरे ये चरण तेरे मां
देवता प्*याला लिए दर पे खडे मां
अमृत सबका है इस गंगा जल में
मेरी दुनिया है मां तेरे आंचल में
सुनील जी धन्यवाद यार मुझे ये गाना बहुत प्यारा लगता है और माँ भी
ajnabi_dost
25-04-2012, 09:57 AM
माँ जैसी दौलत दुनिया में नही है,
माँ जिसके है पास वह सबसे धनी है।
माँ तो है अनमोल न कीमत लगाना
रखना ख्याल उसका ,न उसको रुलाना,
माँ के रुदन से ही हिलती ज़मीं है।
माँ जिसके है पास वह सबसे धनी है॥
माँ गर न होती यह दुनिया न होती
न आकाश होता ,ज़मीं भी न होती,
माँ के जतन से ही सृष्टि पली है ।
माँ जिसके है पास वह सबसे धनी है॥
माँ का आशीष जिसको मिला है
जीवन में हर पल वह फूला-फला है,
माँ की दुआ से अशुभ घड़ी टली है।
माँ जिसके है पास वह सबसे धनी है॥
ajnabi_dost
25-04-2012, 09:59 AM
किसी की ख़ातिर अल्लाह होगा, किसी की ख़ातिर राम
लेकिन अपनी ख़ातिर तो है, माँ ही चारों धाम
जब आँख खुली तो अम्मा की गोदी का एक सहारा था
उसका नन्हा-सा आँचल मुझको भूमण्डल से प्यारा था
उसके चेहरे की झलक देख चेहरा फूलों-सा खिलता था
उसके स्तन की एक बूंद से मुझको जीवन मिलता था
हाथों से बालों को नोचा, पैरों से खूब प्रहार किया
फिर भी उस माँ ने पुचकारा हमको जी भर के प्यार किया
मैं उसका राजा बेटा था वो आँख का तारा कहती थी
मैं बनूँ बुढ़ापे में उसका बस एक सहारा कहती थी
उंगली को पकड़ चलाया था पढ़ने विद्यालय भेजा था
मेरी नादानी को भी निज अन्तर में सदा सहेजा था
मेरे सारे प्रश्नों का वो फौरन जवाब बन जाती थी
मेरी राहों के काँटे चुन वो ख़ुद ग़ुलाब बन जाती थी
मैं बड़ा हुआ तो कॉलेज से इक रोग प्यार का ले आया
जिस दिल में माँ की मूरत थी वो रामकली को दे आया
शादी की, पति से बाप बना, अपने रिश्तों में झूल गया
अब करवाचौथ मनाता हूँ माँ की ममता को भूल गया
हम भूल गए उसकी ममता, मेरे जीवन की थाती थी
हम भूल गए अपना जीवन, वो अमृत वाली छाती थी
हम भूल गए वो ख़ुद भूखी रह करके हमें खिलाती थी
हमको सूखा बिस्तर देकर ख़ुद गीले में सो जाती थी
हम भूल गए उसने ही होठों को भाषा सिखलाई थी
मेरी नींदों के लिए रात भर उसने लोरी गाई थी
हम भूल गए हर ग़लती पर उसने डाँटा-समझाया था
बच जाऊँ बुरी नज़र से काला टीका सदा लगाया था
हम बड़े हुए तो ममता वाले सारे बन्धन तोड़ आए
बंगले में कुत्ते पाल लिए माँ को वृद्धाश्रम छोड़ आए
उसके सपनों का महल गिरा कर कंकर-कंकर बीन लिए
ख़ुदग़र्ज़ी में उसके सुहाग के आभूषण तक छीन लिए
हम माँ को घर के बँटवारे की अभिलाषा तक ले आए
उसको पावन मंदिर से गाली की भाषा तक ले आए
माँ की ममता को देख मौत भी आगे से हट जाती है
गर माँ अपमानित होती, धरती की छाती फट जाती है
घर को पूरा जीवन देकर बेचारी माँ क्या पाती है
रूखा-सूखा खा लेती है, पानी पीकर सो जाती है
जो माँ जैसी देवी घर के मंदिर में नहीं रख सकते हैं
वो लाखों पुण्य भले कर लें इंसान नहीं बन सकते हैं
माँ जिसको भी जल दे दे वो पौधा संदल बन जाता है
माँ के चरणों को छूकर पानी गंगाजल बन जाता है
माँ के आँचल ने युगों-युगों से भगवानों को पाला है
माँ के चरणों में जन्नत है गिरिजाघर और शिवाला है
हिमगिरि जैसी ऊँचाई है, सागर जैसी गहराई है
दुनिया में जितनी ख़ुशबू है माँ के आँचल से आई है
माँ कबिरा की साखी जैसी, माँ तुलसी की चौपाई है
मीराबाई की पदावली ख़ुसरो की अमर रुबाई है
माँ आंगन की तुलसी जैसी पावन बरगद की छाया है
माँ वेद ऋचाओं की गरिमा, माँ महाकाव्य की काया है
माँ मानसरोवर ममता का, माँ गोमुख की ऊँचाई है
माँ परिवारों का संगम है, माँ रिश्तों की गहराई है
माँ हरी दूब है धरती की, माँ केसर वाली क्यारी है
माँ की उपमा केवल माँ है, माँ हर घर की फुलवारी है
सातों सुर नर्तन करते जब कोई माँ लोरी गाती है
माँ जिस रोटी को छू लेती है वो प्रसाद बन जाती है
माँ हँसती है तो धरती का ज़र्रा-ज़र्रा मुस्काता है
देखो तो दूर क्षितिज अंबर धरती को शीश झुकाता है
माना मेरे घर की दीवारों में चन्दा-सी मूरत है
पर मेरे मन के मंदिर में बस केवल माँ की मूरत है
माँ सरस्वती, लक्ष्मी, दुर्गा, अनुसूया, मरियम, सीता है
माँ पावनता में रामचरितमानस् है भगवद्गीता है
अम्मा तेरी हर बात मुझे वरदान से बढ़कर लगती है
हे माँ तेरी सूरत मुझको भगवान से बढ़कर लगती है
सारे तीरथ के पुण्य जहाँ, मैं उन चरणों में लेटा हूँ
जिनके कोई सन्तान नहीं, मैं उन माँओं का बेटा हूँ
हर घर में माँ की पूजा हो ऐसा संकल्प उठाता हूँ
मैं दुनिया की हर माँ के चरणों में ये शीश झुकाता हूँ
लेखन:सुनील जोगी
Raja44
25-04-2012, 11:29 AM
किसी की ख़ातिर अल्लाह होगा, किसी की ख़ातिर राम
लेकिन अपनी ख़ातिर तो है, माँ ही चारों धाम
जब आँख खुली तो अम्मा की गोदी का एक सहारा था
उसका नन्हा-सा आँचल मुझको भूमण्डल से प्यारा था
उसके चेहरे की झलक देख चेहरा फूलों-सा खिलता था
उसके स्तन की एक बूंद से मुझको जीवन मिलता था
हाथों से बालों को नोचा, पैरों से खूब प्रहार किया
फिर भी उस माँ ने पुचकारा हमको जी भर के प्यार किया
मैं उसका राजा बेटा था वो आँख का तारा कहती थी
मैं बनूँ बुढ़ापे में उसका बस एक सहारा कहती थी
उंगली को पकड़ चलाया था पढ़ने विद्यालय भेजा था
मेरी नादानी को भी निज अन्तर में सदा सहेजा था
मेरे सारे प्रश्नों का वो फौरन जवाब बन जाती थी
मेरी राहों के काँटे चुन वो ख़ुद ग़ुलाब बन जाती थी
मैं बड़ा हुआ तो कॉलेज से इक रोग प्यार का ले आया
जिस दिल में माँ की मूरत थी वो रामकली को दे आया
शादी की, पति से बाप बना, अपने रिश्तों में झूल गया
अब करवाचौथ मनाता हूँ माँ की ममता को भूल गया
हम भूल गए उसकी ममता, मेरे जीवन की थाती थी
हम भूल गए अपना जीवन, वो अमृत वाली छाती थी
हम भूल गए वो ख़ुद भूखी रह करके हमें खिलाती थी
हमको सूखा बिस्तर देकर ख़ुद गीले में सो जाती थी
हम भूल गए उसने ही होठों को भाषा सिखलाई थी
मेरी नींदों के लिए रात भर उसने लोरी गाई थी
हम भूल गए हर ग़लती पर उसने डाँटा-समझाया था
बच जाऊँ बुरी नज़र से काला टीका सदा लगाया था
हम बड़े हुए तो ममता वाले सारे बन्धन तोड़ आए
बंगले में कुत्ते पाल लिए माँ को वृद्धाश्रम छोड़ आए
उसके सपनों का महल गिरा कर कंकर-कंकर बीन लिए
ख़ुदग़र्ज़ी में उसके सुहाग के आभूषण तक छीन लिए
हम माँ को घर के बँटवारे की अभिलाषा तक ले आए
उसको पावन मंदिर से गाली की भाषा तक ले आए
माँ की ममता को देख मौत भी आगे से हट जाती है
गर माँ अपमानित होती, धरती की छाती फट जाती है
घर को पूरा जीवन देकर बेचारी माँ क्या पाती है
रूखा-सूखा खा लेती है, पानी पीकर सो जाती है
जो माँ जैसी देवी घर के मंदिर में नहीं रख सकते हैं
वो लाखों पुण्य भले कर लें इंसान नहीं बन सकते हैं
माँ जिसको भी जल दे दे वो पौधा संदल बन जाता है
माँ के चरणों को छूकर पानी गंगाजल बन जाता है
माँ के आँचल ने युगों-युगों से भगवानों को पाला है
माँ के चरणों में जन्नत है गिरिजाघर और शिवाला है
हिमगिरि जैसी ऊँचाई है, सागर जैसी गहराई है
दुनिया में जितनी ख़ुशबू है माँ के आँचल से आई है
माँ कबिरा की साखी जैसी, माँ तुलसी की चौपाई है
मीराबाई की पदावली ख़ुसरो की अमर रुबाई है
माँ आंगन की तुलसी जैसी पावन बरगद की छाया है
माँ वेद ऋचाओं की गरिमा, माँ महाकाव्य की काया है
माँ मानसरोवर ममता का, माँ गोमुख की ऊँचाई है
माँ परिवारों का संगम है, माँ रिश्तों की गहराई है
माँ हरी दूब है धरती की, माँ केसर वाली क्यारी है
माँ की उपमा केवल माँ है, माँ हर घर की फुलवारी है
सातों सुर नर्तन करते जब कोई माँ लोरी गाती है
माँ जिस रोटी को छू लेती है वो प्रसाद बन जाती है
माँ हँसती है तो धरती का ज़र्रा-ज़र्रा मुस्काता है
देखो तो दूर क्षितिज अंबर धरती को शीश झुकाता है
माना मेरे घर की दीवारों में चन्दा-सी मूरत है
पर मेरे मन के मंदिर में बस केवल माँ की मूरत है
माँ सरस्वती, लक्ष्मी, दुर्गा, अनुसूया, मरियम, सीता है
माँ पावनता में रामचरितमानस् है भगवद्गीता है
अम्मा तेरी हर बात मुझे वरदान से बढ़कर लगती है
हे माँ तेरी सूरत मुझको भगवान से बढ़कर लगती है
सारे तीरथ के पुण्य जहाँ, मैं उन चरणों में लेटा हूँ
जिनके कोई सन्तान नहीं, मैं उन माँओं का बेटा हूँ
हर घर में माँ की पूजा हो ऐसा संकल्प उठाता हूँ
मैं दुनिया की हर माँ के चरणों में ये शीश झुकाता हूँ
लेखन:सुनील जोगी
वाह दोस्त क्या कविता लिखी है आंख भर आई जियो
ajnabi_dost
25-04-2012, 01:12 PM
वाह दोस्त क्या कविता लिखी है आंख भर आई जियो
नमस्कार राजा जी !! मित्र , यह कविता मैंने नहीं लिखी है !! कविता के अंत में मैने कवि का नाम लिखा हुआ है !! यह कविता दिल को छू गयी ,इसलिए मैंने यहाँ पोस्ट कर दी !!
धन्यवाद !!
Raja44
27-04-2012, 11:22 AM
नमस्कार राजा जी !! मित्र , यह कविता मैंने नहीं लिखी है !! कविता के अंत में मैने कवि का नाम लिखा हुआ है !! यह कविता दिल को छू गयी ,इसलिए मैंने यहाँ पोस्ट कर दी !!
धन्यवाद !!
मित्र किसी ने भी लिखी हमेँ तो आपने पढवाई खैर लिखने वाले को और आपको धन्यवाद
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