View Full Version : अंगूर का दाना - प्रेम गुरु
prem guru
01-01-2011, 06:29 PM
प्रिय पाठको और पाठिकाओ,
आप सभी को नव वर्ष 2011 की बहुत बहुत बधाइयां और शुभ कामनाएं. यह वर्ष
आप सभी के लिए मंगलमय हो.
आप सभी ने मेरी लिखी सभी कहानियाँ पसंद की हैं और उनपर अपनी राय लिखी है.
मेरी नयी कहानी "अंगूर का दाना" 4 -5 भागों में अन्तर्वासना पर प्रकाशित होगी.
इस कहानी के कुछ अंश आपके लिए :
मैंने अपनी बात जारी रखते हुए उसे कहा “साथ में CD प्लेयर भी ले जाना पर कोई
ऐसी वैसी फालतू फिल्म मत देख लेना ?”
“ऐसी वैसी मतलब …. वो गन्दीवाली ?”
जिस मासूमियत से उसने कहा था मैं तो मर ही मिटा उसकी इस बात पर। वह
बेखयाली में बोल तो गयी पर जब उसे ध्यान आया तो वह तो शर्म के मारे गुलज़ार
ही हो गयी।
“ये गन्दीवाली कौन सी होती है?” मैंने हंसते हुए पूछा
“वो … वो … ओह …” उसने दोनों हाथों से अपना मुंह छुपा लिया। मैं उसके नर्म नाज़ुक
हाथों को पकड़ लेने का यह बेहतरीन मौका भला कैसे छोड़ सकता था।
मैंने उसका हाथ पकड़ते हुए पूछा “अंगूर बताओ ना ?”
“नहीं मुझे शर्म आती है ?”
इस्स्सस्स्स्सस्स स ………………
इस सादगी पर कौन ना मर जाए ऐ खुदा
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं ?
अंगूर पहले तो थोड़ा आह ... ऊँह … कर रही थी पर अब तो वो भी मीठी सीत्कार
करने लगी थी। शायद उसके लिए यह नया अहसास और अनूठा अनुभव था। उसे
यह तो पता था कि सभी मर्दों को गांड मारने में बहुत मज़ा आता है पर उसे यह
कहाँ पता था कि अगर कायदे से (सही तरीके से) गांड मारी जाए और गांड मारने
वाला अनाड़ी ना होकर कोई गुरु घंटाल हो तो गांड मरवाने औरत को चूत से भी
ज्यादा मज़ा आता है।
मैं तो चाहता था कि वो इस गांड चुदाई में इतना आनंद महसूस करे कि जब भी वो
अपने पति या प्रेमी से भविष्य में चुदे तो ये लम्हे उसे तमाम उम्र याद रहें और हर
चुदाई में वो इस आनंद को याद करके रोमांचित होती रहे।
आप पूरी कहानी "अंगूर का दाना" के नाम से पढ़ सकते हैं.
अगर आप सभी इस कहानी पर अपनी राय लिखेंगे तो मुझे ख़ुशी होगी.
आपका प्रेम गुरु premguru2u@yahoo.com
prem guru
01-01-2011, 06:39 PM
इस सादगी पर कौन ना मर जाए ऐ खुदा
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं ?
अंगूर पहले तो थोड़ा आह ... ऊँह … कर रही थी पर अब तो वो भी मीठी सीत्कार
करने लगी थी। शायद उसके लिए यह नया अहसास और अनूठा अनुभव था। उसे
यह तो पता था कि सभी मर्दों को गांड मारने में बहुत मज़ा आता है पर उसे यह
कहाँ पता था कि अगर कायदे से (सही तरीके से) गांड मारी जाए और गांड मारने
वाला अनाड़ी ना होकर कोई गुरु घंटाल हो तो गांड मरवाने औरत को चूत से भी
ज्यादा मज़ा आता है।
मैं तो चाहता था कि वो इस गांड चुदाई में इतना आनंद महसूस करे कि जब भी वो
अपने पति या प्रेमी से भविष्य में चुदे तो ये लम्हे उसे तमाम उम्र याद रहें और हर
चुदाई में वो इस आनंद को याद करके रोमांचित होती रहे।
आप पूरी कहानी "अंगूर का दाना" के नाम से पढ़ सकते हैं.
अगर आप सभी इस कहानी पर अपनी राय लिखेंगे तो मुझे ख़ुशी होगी.
आपका प्रेम गुरु
merasaajan
03-01-2011, 12:45 AM
very nice story hai sula diya yaar
Dark Saint
03-01-2011, 01:42 AM
आप वाकई गुरुघंटाल हैं प्रेमगुरु ! आप मेरी दृष्टि में निश्चय ही पोर्न साहित्य के मंटो हैं ! एक बेहतरीन कहानी के लिए धन्यवाद !
ravi chacha
03-01-2011, 02:04 AM
very nice story hai sula diya yaar
अन्तर्वासना हिंदी साईट हे क्रप्या हिंदी का प्रयोग करे
swami ji
03-01-2011, 11:06 AM
लव गुरु ,,
में आपकी कहानी पढ़ता हु ,उसमे आप बहोत अछा,लिखते हे
पर इतना बड़ा विवरण न करे की पढ़ने वाला बोरिंग हो जाता हे .
shwetaSingh69
03-01-2011, 05:12 PM
Hello Prem Ji.............. U are a amezing person.........aap ki har kahani padh ke aisa lagta hai k ye sab kuch bilku humaare hi saamne ho raha hai.
Keep it up & "HAPPY NEW YEAR"
arti86
03-01-2011, 06:27 PM
isi tarah detail me hi likhe jisase parhne me bahut maja aata hai
short cut mat mariyega guru ji
rudra_rng
03-01-2011, 11:26 PM
bhi hi acchi kahani hai aapki.....
marwariladka
04-01-2011, 03:44 AM
badi hi boaring kahani hai yaar
Pooja1990 QUEEN
04-01-2011, 12:38 PM
Nice story .par beach me thoda boring b thi. 3 part me end ho sakti thi. Ok
akamboj2000
04-01-2011, 01:29 PM
प्रिय पाठको और पाठिकाओ,
आप सभी को नव वर्ष 2011 की बहुत बहुत बधाइयां और शुभ कामनाएं. यह वर्ष
आप सभी के लिए मंगलमय हो.
आप सभी ने मेरी लिखी सभी कहानियाँ पसंद की हैं और उनपर अपनी राय लिखी है.
मेरी नयी कहानी "अंगूर का दाना" 4 -5 भागों में अन्तर्वासना पर प्रकाशित होगी.
इस कहानी के कुछ अंश आपके लिए :
मैंने अपनी बात जारी रखते हुए उसे कहा “साथ में CD प्लेयर भी ले जाना पर कोई
ऐसी वैसी फालतू फिल्म मत देख लेना ?”
“ऐसी वैसी मतलब …. वो गन्दीवाली ?”
जिस मासूमियत से उसने कहा था मैं तो मर ही मिटा उसकी इस बात पर। वह
बेखयाली में बोल तो गयी पर जब उसे ध्यान आया तो वह तो शर्म के मारे गुलज़ार
ही हो गयी।
“ये गन्दीवाली कौन सी होती है?” मैंने हंसते हुए पूछा
“वो … वो … ओह …” उसने दोनों हाथों से अपना मुंह छुपा लिया। मैं उसके नर्म नाज़ुक
हाथों को पकड़ लेने का यह बेहतरीन मौका भला कैसे छोड़ सकता था।
मैंने उसका हाथ पकड़ते हुए पूछा “अंगूर बताओ ना ?”
“नहीं मुझे शर्म आती है ?”
इस्स्सस्स्स्सस्स स ………………
इस सादगी पर कौन ना मर जाए ऐ खुदा
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं ?
अंगूर पहले तो थोड़ा आह ... ऊँह … कर रही थी पर अब तो वो भी मीठी सीत्कार
करने लगी थी। शायद उसके लिए यह नया अहसास और अनूठा अनुभव था। उसे
यह तो पता था कि सभी मर्दों को गांड मारने में बहुत मज़ा आता है पर उसे यह
कहाँ पता था कि अगर कायदे से (सही तरीके से) गांड मारी जाए और गांड मारने
वाला अनाड़ी ना होकर कोई गुरु घंटाल हो तो गांड मरवाने औरत को चूत से भी
ज्यादा मज़ा आता है।
मैं तो चाहता था कि वो इस गांड चुदाई में इतना आनंद महसूस करे कि जब भी वो
अपने पति या प्रेमी से भविष्य में चुदे तो ये लम्हे उसे तमाम उम्र याद रहें और हर
चुदाई में वो इस आनंद को याद करके रोमांचित होती रहे।
आप पूरी कहानी "अंगूर का दाना" के नाम से पढ़ सकते हैं.
अगर आप सभी इस कहानी पर अपनी राय लिखेंगे तो मुझे ख़ुशी होगी.
आपका प्रेम गुरु premguru2u@yahoo.com
ye chutiya bna rha h kahani k beech me kam ki bat km bkwas jyada krta h
akamboj2000
04-01-2011, 01:31 PM
प्रिय पाठको और पाठिकाओ,
आप सभी को नव वर्ष 2011 की बहुत बहुत बधाइयां और शुभ कामनाएं. यह वर्ष
आप सभी के लिए मंगलमय हो.
आप सभी ने मेरी लिखी सभी कहानियाँ पसंद की हैं और उनपर अपनी राय लिखी है.
मेरी नयी कहानी "अंगूर का दाना" 4 -5 भागों में अन्तर्वासना पर प्रकाशित होगी.
इस कहानी के कुछ अंश आपके लिए :
मैंने अपनी बात जारी रखते हुए उसे कहा “साथ में CD प्लेयर भी ले जाना पर कोई
ऐसी वैसी फालतू फिल्म मत देख लेना ?”
“ऐसी वैसी मतलब …. वो गन्दीवाली ?”
जिस मासूमियत से उसने कहा था मैं तो मर ही मिटा उसकी इस बात पर। वह
बेखयाली में बोल तो गयी पर जब उसे ध्यान आया तो वह तो शर्म के मारे गुलज़ार
ही हो गयी।
“ये गन्दीवाली कौन सी होती है?” मैंने हंसते हुए पूछा
“वो … वो … ओह …” उसने दोनों हाथों से अपना मुंह छुपा लिया। मैं उसके नर्म नाज़ुक
हाथों को पकड़ लेने का यह बेहतरीन मौका भला कैसे छोड़ सकता था।
मैंने उसका हाथ पकड़ते हुए पूछा “अंगूर बताओ ना ?”
“नहीं मुझे शर्म आती है ?”
इस्स्सस्स्स्सस्स स ………………
इस सादगी पर कौन ना मर जाए ऐ खुदा
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं ?
अंगूर पहले तो थोड़ा आह ... ऊँह … कर रही थी पर अब तो वो भी मीठी सीत्कार
करने लगी थी। शायद उसके लिए यह नया अहसास और अनूठा अनुभव था। उसे
यह तो पता था कि सभी मर्दों को गांड मारने में बहुत मज़ा आता है पर उसे यह
कहाँ पता था कि अगर कायदे से (सही तरीके से) गांड मारी जाए और गांड मारने
वाला अनाड़ी ना होकर कोई गुरु घंटाल हो तो गांड मरवाने औरत को चूत से भी
ज्यादा मज़ा आता है।
मैं तो चाहता था कि वो इस गांड चुदाई में इतना आनंद महसूस करे कि जब भी वो
अपने पति या प्रेमी से भविष्य में चुदे तो ये लम्हे उसे तमाम उम्र याद रहें और हर
चुदाई में वो इस आनंद को याद करके रोमांचित होती रहे।
आप पूरी कहानी "अंगूर का दाना" के नाम से पढ़ सकते हैं.
अगर आप सभी इस कहानी पर अपनी राय लिखेंगे तो मुझे ख़ुशी होगी.
आपका प्रेम गुरु premguru2u@yahoo.com
ye chutiya bna rha h kahani k beech me kam ki bat km bkwas jyada krta h
akamboj2000
04-01-2011, 01:34 PM
haji pooja ji bilkul shi kh rhi ho
g4p058
05-01-2011, 04:55 PM
मुझे आपकी अंगूर की पार्ट सारी बहुत सुंदर लगा उ ही हिंद कहय्नी भेजतें रहो
indra sharma
05-01-2011, 07:55 PM
वास्तव में ही लाजवाब कहानी है...
Vicky
05-01-2011, 08:38 PM
सुंदर प्रस्तुति , साहित्यिक दृष्टिकोण से थोड़ी अधिक खींची हुई , परन्तु यह तो रचयिता के विवेक पर निर्भर है वह कितना विवरण देने को प्रस्तुत है ,
विस्मयकारी है यह देखना , लेखक ने किस प्रकार उत्तेजना और संयम के संतुलन को नियंत्रित किया है
निश्चित रूप से इस प्रकार की कहानियों का एक पाठक वर्ग है, एक वैचारिक वर्ग, और इसी लिए थोड़ा सुगमता का ध्यान तो रखना ही पड़ता है, पर हमेशा की तरह , प्रेम गुरु ने फ़िर एक मास्टर पीस प्रस्तुत किया है .....
और इसके लिए वह तालियों के पात्र हैं...
आपका
विक्की
merasaajan
05-01-2011, 10:44 PM
tumko khud ko kitni hindi aati hai aapna naam badalo aur hindi mai likho phir dusro ko salaah dena gadhe kanhi k
Vicky
06-01-2011, 12:07 AM
मित्र सजन,
जो बात प्रेम और संयम से समझाई जाये उसका प्रभाव अच्छा होता है , अनावश्यक कठोर शब्दों का प्रयोग आप के अर्थ का अनर्थ कर देता है, आशा है आप आगे से संयम रखेंगे ..
आपका
विक्की
RAJESH TANWAR
06-01-2011, 01:33 AM
इस सादगी पर कौन ना मर जाए ऐ खुदा
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं ?
अंगूर पहले तो थोड़ा आह ... ऊँह … कर रही थी पर अब तो वो भी मीठी सीत्कार
करने लगी थी। शायद उसके लिए यह नया अहसास और अनूठा अनुभव था। उसे
यह तो पता था कि सभी मर्दों को गांड मारने में बहुत मज़ा आता है पर उसे यह
कहाँ पता था कि अगर कायदे से (सही तरीके से) गांड मारी जाए और गांड मारने
वाला अनाड़ी ना होकर कोई गुरु घंटाल हो तो गांड मरवाने औरत को चूत से भी
ज्यादा मज़ा आता है।
मैं तो चाहता था कि वो इस गांड चुदाई में इतना आनंद महसूस करे कि जब भी वो
अपने पति या प्रेमी से भविष्य में चुदे तो ये लम्हे उसे तमाम उम्र याद रहें और हर
चुदाई में वो इस आनंद को याद करके रोमांचित होती रहे।
आप पूरी कहानी "अंगूर का दाना" के नाम से पढ़ सकते हैं.
अगर आप सभी इस कहानी पर अपनी राय लिखेंगे तो मुझे ख़ुशी होगी.
Mangal[/U]]आपका प्रेम गुरु
kahani bahut top quilty ki hain
RAJESH TANWAR
06-01-2011, 01:39 AM
bhi hi acchi kahani hai aapki.....
niche chitra bahut achcha lagaya hain
bigmaddydaddy
06-01-2011, 05:19 PM
badiya story thi..........pad k jannat sa maja aaya.....
sanchitt
06-01-2011, 05:35 PM
मै एक २५ से भी ज्यादा पार्ट वाली कहानी छपवाना चाहता हु....क्या मै उसे भेज सकता हु ?
jolly1990
07-01-2011, 08:07 AM
guru ji shandar kahani hai
rakeshraj
07-01-2011, 04:33 PM
yes u can send
rakeshraj
07-01-2011, 04:37 PM
Hello Prem Ji.............. Keep it up & "HAPPY NEW YEAR"
rahul george
07-01-2011, 11:46 PM
गुरु जी,
कहानियाँ चाहे सच हों या काल्पनिक, वास्तव मे उत्तेजक और माधुर्यपूर्ण होती हैं ; आनन्दित करती हैं । परंतु, एक बात खटकती है कि यदा कदा अपनी या मित्र की माँ के साथ सेक्स की काल्पनिक कथाएँ हतप्रभ करती है और दुखित भी । माँ, हमारे देश के हर वर्ग में सम्मानित रूप में पूज्य समझी जाती रही है । मेरे पिता ईसाई भले हों लेकिन उन्होने हर माँ को देवी समान समझा और समझना सिखाया । इसीलिये, भारत की संस्कृति को देखते हुए अगम्यागम्य मे अन्य सभी रिश्ते स्वीकार्य हैं सिवाय माँ के । कृपया ध्यान दें । प्रकाशन पर बन्दिश लगाना या न लगाना आपका अधिकार है । ये तो मेरा निजी विचार है जो मैने लिखा ।
- राहुल जाँर्ज
Annie007
09-01-2011, 11:24 PM
प्रेम जी आप अपनी कहानी कॆ माध्यम से बहुत सुंदर चित्रण करते है। कहानी पढ़ते समय आँखों कॆ सामने पूरा चित्र साफ़ नज़र आने लगता है।
अपना प्रयास निरंतर जारी रखे.
raj_kartik
11-01-2011, 10:36 PM
Dear Prem Ji,
Aapki har kahani ki tarah ye kahani bhi bahut shaandar hai. :salut:
Keep it up
awaajdilki
13-01-2011, 07:17 PM
kahani vakai saandaar hai lage raho
computerji
14-01-2011, 08:37 PM
में आपकी कहानी पढ़ता हु ,उसमे आप बहोत अछा,लिखते हे
पर इतना बड़ा विवरण न करे की पढ़ने वाला बोरिंग हो जाता हे
neelamskla
16-01-2011, 11:32 AM
kahani bahot achchi hai.krupya likhate rahe.
prem guru
22-01-2011, 04:29 PM
“अंगूर का दाना” पर मेरे कुछ प्रबुद्ध पाठकों और पाठिकाओं के मेल्स :
Manoj Gangwar to me 01/01/2011
HI. Maine aapki story Angoor ka dana padi acchi lgi. bhai yaar kya life hai tumhari.
I am manoj. iam 20 years old . but maine aaj tak kisi ladki ko touch tak nhi kiya . vo
isliye kyoki koi aisi ladki nhi mili ki jiske sath sex kar sku . plzzzzzz Dost mujhe koi
aisi ladki ki id ya no. do jo mujse baat kar ske aur sex kar ske . main tumhara ehsan
jindgi bhar nhi bhologa. plz replay me fast
Happy new year Brother. agar aap mujhe koi no ya email id dete hai to main aapki
taraf se new year ka tohfa sanjoga plzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzzz
Amit Kumar Maurya ...Jan 2
Mera nam amit hai aur main is samay meerut me raha raha hun. Main 22
sal ka ho gaya hun lekin aaj tak sex ke nam par bas thenga mila hai.
Mere andaj se antarvasna par jiski kahani prakshit hoti hai woh to ekdum
se ladkiyo ko chodana chaau kar dete hain. Par aapki kahani men sab
kuchh dhang se bataya gaya hai. Thanks. Main orkut par aapse judna
chahta hun aur aapse dosti chahta hun.
sweet simple Jan 2
Hello Sir Happy New Year
How r u??? My Name is Shobha.
aap bahut accha likhte hai... i m new to Antarvasna n maine jitni bi stories yahan
padhi unme se mujhe jyadatar fake lagi but aapki story real n impressive hoti hai.....
aap bahut detail me likhte hai jo mujhe pasand hai. i request u to send your story
directly on my mail id. waiting 4 ur reply. have a nice time
Praveen Gupta to me, Jan 2
Hello Prem Guru Ji,
Landwat Parnam...we like ur every story on antarvasna. ur writing just beyond the imazination
....Angur ka dana we like it most...keep posted dear...aap ki story pad kar
"papu" hawa may udnay lagta hai...u shoud write at least one story daily...dear kabi
delhi aana ho to batana...ek cup tea pee langay aap kay sath....
Love u.. Thanks & Regards
Praveen
Rahul Singh to me Jan 5
Sabse pahle to apko koti-2 pranam vaise to maine antarvasna ki aur kai
sari kahaniyan padh chuka hun par vakai aap jo likhte hai uski tulna
nahi ki ja sakti. Mai aapka bahut bada fan hun. Aapki kahaniyon men jo
bhi sequence dekhne ko milta hai vo aapko sex duniya ka mahan Shanshah
banata hai. U r great I salute u. Agar aap meri ek problem solve karen
to aapki ati kripa hogi, kripya mujhe story submit karne ke bare me
batayen.
alokkumar yadav to me Jan 6
Aaj tak maine antarvasna par jitni bhi kahaniya padhi unme se yah
sarvashresht hai. Agar kahani sachhi hai to Angur ek bahut achhe nature ki
ladki rhi hogi. Kya aap mujhe apna mob no send kar sakte hain? Plz
Aap bahut sexy hain
On Fri, Jan 7, 2011 at 5:04 PM, kaanu jain
oops rock again …………………. my love i love you
hum tumhare hai sanam fuk me jus one time my pussy get wet wet wet n wet
I like yr “angur ka daana” chat with me I want huge u open my panty and fuck
me only 20 years old girl waiting for premguru come and njoy with my bobi and
weti pussy i love yr dick (lund)
sameera shaha to me Jan 9 (11 days ago)
tumhari khani angur ka dana padhi. sach batau bhut maza aya. aur papu kaisa
hai usko meri dher sari chumi tumhari khani padhkar maine kai bar ungli ki kash
ungli ki jagah papu hota
chandan kumar to me Jan 16 (4 days ago)
Hi, mai chandan from gaya(bihar).now i m in 12th stnd. Mai akela aur
hamesa khus rahta hu. mai dukh me bhi hamesa muskurata rahta hu.
Mere bahut dost hai,par mera sabse pyara dost aapki kahaniya hai.
aksar mai tanhai me aapka antarvasna ka kahani padhta hu, kahani
khatm hote-hote meri aankhe gili ho jati hai.please aap aise hi kahaniya
likhte rahiye, jisme pyas ho, dard ho,chahat ho aur to aapko pata hi
hai...subhratri
prem guru
22-01-2011, 04:32 PM
Rajesh Kumar <raj_1930@yahoo.in
Wed, 5 January, 2011 11:28:16 AM
dear sir,
aapki kahani angur ka dana ke maine pure 8 part padhe hai or mujhe bahut achche lage
jab tal maine puri kahani nai padh li mujhe aaram nahi mila par mai dusri or angur ke
bare me soch raha tha ki us bechari ka kya hua hoga sex to sabhi log karte hai magar
usko kis tarike se kiske sath karna hai ye har koi nahi janta , maine aantarwasna par
bahut c kahaniya padhi hai par aaj tak mail kisi ko bhi nahi kiya pata nahi aapki kahani
ne mere dil ko chu liya .ab ye batao aap apni agli kahani kab likh rahe ho,ek bat or kya
aap or phle wali kahaniya mujhe mail kar sakte hai.
thanx.
Rajesh Kumar Faridabad.
shashi kant soni Wed, 5 January, 2011 8:26:45 PM
Respected Prem G,
Namaste! Hope all is well there. First of all, Happy New Year to You and Family!
Thanks a lot for the great story on Antarvasna! Pls if you can come you are most
welcome here in Neemrana! My cell nos is xxxxxxxxxx
With regards and warm wishes-Balwant and family!
Ambuj Kumar ambujkumar85@yahoo.in (ambujkumar85@yahoo.in)
Fri, 14 January, 2011 9:57:30 PM
Prem guru bahut mast lagi "angoor ka dana" sex story super its very hot and serius stoy
thanks jaldi aur ek story liko its my reguest kasam se land ka pani nikal jata hai padte padte
nitu singh Sun, 16 January, 2011 6:33:50 AM
Subject: Angur Angur NA Rahe.
Hi premguru , Aapki khani angur ka dana pada. muje to biswas hi nahi ho raha ki koi
sex mein itna passions kaise rakh sakta hi.Agar yes zindigi mein khoi Aap jaisa humsafar
mile to ye janm hi safal ho jjaye.Aap to kammdev ho jo Apni saathi ka bharpur khayal
raktha hai.muje Aapki khani ka intejaar rahega.
AAPKI NITU
prem guru
22-01-2011, 04:38 PM
Priya Paathako aur paathikaao aap sabhi ka bahut bahut dhanyawaad ki
aapne is kahani ko itna pasand kiya ..... Prem Guru :lips:
prem guru
22-01-2011, 04:53 PM
Jayagoyal1984 Tue, 18 January, 2011 4:11:31 PM
haai raam dil cheer kar rakh diya aapne to... pahale to Angoor ki dilkash chudaai
aur baad men uski gand maar kar to aapne uska nahi mere jaisi kayi paathikaaon
ka udhaar hi kar diya. main to is kahani ko padhte padhte sapano men hi kho gayi
thi. Mere jism ka roaan roaan hi thirak utha. Sach men Premji main to bistar men
hi do baar jhad gayi.
Mujhe laga kaash mujhe bhi koi us samay ........... mujhe sharm aa rahi hai ...
aap samajh gaye naa ? aap isi tarah ki kahaniyaan likhte rahen.
Aapki ek Fan Jaya Goyal
Annu Batra Thu, 20 January, 2011
Subject: Angur kaa dana
Dear prem Guru
Pichali kahnaiyon ki tarah Angoor ka dana bhi bahut romachak kahani hai.
Aapki kahnaiyon emn bahut kuchh milta hai. Ek to pyaar karne ka tareeka
aur doosara lidkiyon ke baare men vichaar, saamaajin aur bhaavnaatmak
roop se judaav aaur bhinn bhinn tareekon se chudaai.... aah.. dil men romanch
hi paida kar deta hai.
Aapne is kahani men nimn varg ki jawaan hoti ladkiyon ki soch aur bhaavnaao
ko bahut sateek aur baareeki se ukera hai. yahi aapki lekhani ka jaadoo hai.
Yah dil men khanjar ki tarah prahaar kartio hai. aap kisi bhi mahila ya ladki
ho sheeshe men utaarane men saksham hain.
Sach kahti hoon main bhi oron ki tarh kahani men sex hi dhundhati hoon.
Bas mujhe bhi kahaniyon men kuchh hi chaahiye jo man men gudgudi paida
Kar de aur fir baatroom men jaane ko maqzboor ho jaaoon. Sex se bharpoor
Kahani dil aur shareer ko vasana se bhar deta hai.
Aapki ek paathika chaane wali ANU
akashsharma
23-01-2011, 12:41 PM
बहुत जबरदस्त है प्रेम गुरु जी
prem guru
25-01-2011, 09:39 AM
बहुत जबरदस्त है प्रेम गुरु जी
Dhanyawaad mitra. Mere ek paathak ka mail :
On Tue, Jan 25, 2011 at 12:40 AM,
vijay kumar <vjkmr045@gmail.com> wrote:
Mene aapki kahani "angur ka dana" padhi or ye kahani mujhe antarvasna
ki ab tak ki sabse achi kahani lagi kyoki aap ka jo kahani likhne ka
tarika hai wo sabse alag he ye kahani sex , emotions or life ki mulbhut
problams par bhi sochane par majbur karti he. aapne jo angur ko set
karne ki choti choti bate likhi he wo la jawab he.mene pahli bar aapki
kahani padhi he.aapme pathako ko bandhe rakhne ki kla he thanks a lot
mujhe aapki kahaniyon ka intjar rahega.
Aapka pathak
prem guru
25-01-2011, 09:40 AM
From: Ashutosh Tiwari <ashutoshtiwari59@ymail.com>
Sun, 23 January, 2011 2:01:29 PM
Prem Guru, Namaskar !
Main antarvasna ka 1 member hoon . Meri age sirf 16 saal hai . Antarvasna par aapki
kahaniya padhkar main aapka deewana ho gaya hu . Aap to mujhe kisi novel writer ki
tarah lagte hain . Aap antarvasna par 1 brand ki tarah ho Mujhe samajh nahi aa raha ki
kya kya likhu . Agar antarvasna par writer ko search karne ka option hota to main
PREM GURU ki kahani search karta . Aapki kahani mujhe kisi interesting novel ki tarah
lagti hai . Baaki kahaniyo ko padhne se aisa lagta hai k wo kalpit hain . Ek ladka pados
me gaya , tv dekhne laga , blue channel aa gaya , tabhi ladki aa gayi aur ... !
Par aap jo likhte hain wo ho sakta hai aur aksar hota rahta hai .
Mujhe ye baat acchi lagti hai ki aap apni kahaniyo me Lun... , Ch....ai jaise shabdo ka prayog
nahi karte . Aapse guzarish hai ki kripya mujhe apni 1 photo aur antarvasna par apni kahaniyo
ke naam (year ke sath) jarur bhejiyega taki main aapki sari kahaniya padh saku .
PLEASE REPLY !!
Aapke jawab ke intezar me
ASHUTOSH TIWARI
Priya Aashutosh
aapko meri kahaniyaan pasand aayi dhanyavaad. abhi aapki umra bahut kam hai.
aapko padhaai par dhyaan dena chaahiye.
Haan meri bhi bahut badi icchha hai ki main koi novel likhoon. par samay nahi mil
paa raha. meri in kahaniyon ke peechhe acchi aur manoranjakta dene ki mansa rahti
hai. har kahani men kuchh nayi jaankaari dene ki koshish karta hoon.
main antarvasan ake prashasak guruji se bhi vinti karunga ki we kahani ke saath
lekhak kaa naam bhi prakshit kare to paathakon ko suvidha hogi.
amin vyaktigat kaarno se apana asali parichay aur photo nahi bhej sakta. haan ham
mitra hain aur mails exchange ka sakate hain.
Prem Guru :lips:
prateek5800
23-02-2011, 12:58 AM
gooooooooooodddd..................
prateek5800
23-02-2011, 01:00 AM
दोस्त से कराई बहिन की चुदाई
दोस्तों मेरा नाम प्रतीक है. दोस्तों में अंतरवासना का बहुत पुराना पाठक हूँ.बहुत दिनों से में अपने जीवन की कहानी आप सभी लोगो के सामने प्रस्तुत करना चाहता था पर डरता था.और लोगों की कहानियां सची है या झूटी में नहीं बता सकता पर मेरी कहानी सौ प्रतिशत सची है.
बात उन दिनों की है जब में दसवी कक्षा में पड़ता था और अपने चाचा जी के साथ रहता था.उनके घर में तीन लोग रहते थे.-चाचा,चची और उनकी बेटी जिसका नाम शशि है.वो नोंवी कक्षा में पढती थी.वो कम उम्र में ही जवान हो गयी थी.में उसका पहली झलक से ही दीवाना हो गया था.उसके व्रक्ष 34 के आस पास होंगे और गांड भी इतनी ही.पर मे उसे चोदना नहीं चाहता था. मेरा 1 दोस्त था जिसका नाम सचिन था.वो जब भी मेरे घर आता था मेरी बहिन को घूर घूर के देखता था.मुझे इस बात का पता था.पर मन ही मना में सचिन को चाहता था,और उससे चुदना चाहता था.तीन सालो तक यही सिलसिला चलता रहा.
एक बार में घर पर अकेला था तो मेने सचिन को घर पर बुला लिया और वो आ गया.वो अपने साथ ब्लू फिल्म की सीडी लाया था.हम दोनों कई बार ब्लू फिल्म देख चुके थे.मेने सीडी कम्पूटर में लगे और देखने लगे.आज मेरे अंदर लोडा लेने की वासना फूट रही थी.मुझे सीडी देख देख कर नशा सा छाने लगा.में सिसकियाँ लेने लगा.में चाहता था सचिन मुझे जम कर चोदे.अब मुझे सचिन को अपनी तरफ आकर्षित करना था.मेने हाल्फ निकर पहना हुआ था और सचिन मेरे साथ बैठा हुआ था.उसको आकर्षित करने के लिए में अपना निकर ऊपर करने लगा पर उसका ध्यान मेरी तरफ नहीं था.मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या करूँ.तभी मेरे दिमाग में एक तरकीब आई.मेने उससे चाय के लिए पुछा ,उसके हाँ बोलने पर मे चाय बनाने चला गया.अब हम बैठ कर दोनों चाय पीने लगे.तभी मेने चाय अपनी निकर पर गिरा दी.
सचिन-क्या यार प्रतीक आराम से चाय भी नहीं पी सकता.ठीक से फिल्म भी नहीं देखने देता .
मैं-सॉरी यार ,अब क्या करूँ?
सचिन-अपना निकर उतार दे नहीं तो लाल निशान पड़ जायेंगे.
में तो यहीं चाहता था.मेने अपना निकर उतार दिया और फिल्म देखने लगे.में अपना अन्डर वीअर बिलकुल ऊपर कर लिया और साथ में फिल्म देखने लगे.फिल्म देखते देखते उसे भी सेक्स चड़ने लगा.मेने उसकी जांग पर हाथ रख दिया.उसने भी अनजाने में मेरी जांग पर हाथ रख दिया.मेने उसके हाथ पर हाथ रख के ऊपर की और खिसका दिया.
अब उसे पता चल गया था.
सचिन-साले अगर तू लड़की होता तो आज मजा आ जाता.
में-बोल तो तू सही रहा है.पर क्या कर सकते हैं.
सचिन-पर तेरी जांग तो लड़की जैसी गोरी ही हैं.
में-थंक यू.
सचिन-बुरा न मनो तो एक बात बोलू?
में-बोलो.
सचिन-क्या तुम आज लड़की की कमी पूरी कर सकते हो?
में-ठीक है,लेकिन बस थोड़ी देर ,और आज के बाद कभी नहीं.
में तो ख़ुशी में पागल हुआ जा रहा था.उसने एक एक कर के मेरे सारे कपडे उतार दिये.अब मेने बस अन्डर वीअर पहना था.उसने अपनी पेंट उतारी और फिर अपनी अन्डर वीअर में से अपना 7 इंच का लोडा निकला.उसे देखते ही में पागल हो गया.उसने मेरा अन्डर वीअर भी उतार दिया और कमरे में ले गया.उसने मुझे बिस्तर पर फेका,फिर मेरे ऊपर आ गया और अपना लंड मेरे मुह में डाल दिया..में उसे चूसने लगा ,मुझे मजा आ रहा था.फिर थोड़ी देर बाद वो मेरे मूह को चोद रहा था.उसने 15 मिनट तक मेरे मूह को चोदा.
में-सचिन अब रहा नहीं जाता यार,गांड मार ले मेरी जल्दी से.
सचिन-नहीं बस में यही चाहता था,और कुछ नहीं,
में गिडगिडाने लगा,
फिर वो बोला-एक शर्त पर.
में-क्या.
सचिन-यार तेरी बहिन बहुत सेक्सी है.में उसे चोदना चाहता हूँ,तू उसमे मेरी मदद करेगा.
में-हाँ हाँ ,मेने कब मन किया.
सचिन खुश हो गया.उसने मुझे घोड़ी बनाया और तेल लगा कर घुसाने लगा.15 मिनट की मेहनत के बाद आखिर उसका पूरा लोडा मेरी गांड में था.
उसके बाद पूरे कमरे से फच फच की आवाज़ आने लगी.उसने मुझे पांच बार कुत्ते की तरह चोदा.
में उसे अपनी बहिन का लालच दे कर रोज़ चुद्ता.
अब में उसे सारी सच्चाई बता चूका था की मुझे लोडे पसंद हैं.
मेरे कहने पर उसने मुझे अपने दोस्तों से भी चुदवाया.
पर अब में उसे ज्यादा दिनों तक टाल नहीं सकता था.वो बोला-अब जब तक तू अपनी बहिन नहीं चुदवायेगा, में तुझे नहीं चोदुंगा.और मुझे मानना पड़ा.
एक दिन चाचा चाची बाहर गए हुए थे.में और मेरी बहिन घर पर अकेले थे.मेने अपने दोस्त सचिन को घर पर बुला लिया.
मेरी बहिन ने चाय बनाई और अपने कमरे मे सोने चली गयी.
कुछ समय बाद मेने जाकर देखा वो सो चुकी थी.उसने स्कर्ट और टॉप पहना हुआ था.स्कर्ट chota होने के कारण उसकी जांगे दिख रही थी.
मेने सचिन से कहा की तू कमरे में चला जा में बहरा संभालता हूँ.कुछ भी होगा तो में देख लूँगा.
वो कमरे में चला गया,में खिड़की से सब देख रहा था.
वो डर रहा था, डरते डरते उसने शशि की जांगो पर हाथ रख दिया.फिर सहलाने लगा.वो अभी भी डर रहा था.फिर वो स्कर्ट के अंदर हाथ डालने लगा.
तभी मेरी बहिन जाग गयी.
सशी-सचिन भैया,आप.
सचिन-हाँ में.
शशि-आप यहाँ क्या कर रहे हो?
सचिन-शशि.में तुम्हे प्यार करता हूँ और तुम्हे किस करना चाहता हूँ.
तभी शशि ने उसे थप्पड़ मार दिया.और मुझे आवाज़ लगते हुए बाहर आई,में छुप गया.
तभी सचिन बोला-वो किसी काम से बाहर गया है,एक घंटे में आएगा.
शशि के व्यवहार में परिवर्तन आने लगा.शशि ने उसे जाने को कहा.
सचिन-बस मुझे एक किस करने दो में चला जाऊंगा.
शशि-ठीक है,पर गाल पर.उसके बाद तुम चले जाओगे.
फिर सचिन ने उसे किस करना स्टार्ट किया.और करता ही चला गया.
शशि बोली-कितने देर करोगे.
सचिन-में बस एक ही किस कर रहा हूँ न चाहे कितने भी देर तक करूँ.
शशि-हस्ते हुए ,तुम बड़े चालक हो.
सचिन ने फिर उसे चूमना स्टार्ट किया,और 5 मिनट तक चूमता रहा.अब शशि को मजा आने लगा था और वो भी उसे चूमने लगी.मुझे भी ये देख कर अच्छा लग रहा था.मुझे भी ये सब देख कर अच्छा लग रहा था.धीरे धीरे उन्होंने अपने कपडे उतरने शुरू किये.थोड़ी ही देर में वो पूरे नंगे हो गए.शशि को मेने पहली बार नंगा देखा था और देखता ही रह गया.में बाहर से ही मुट्ठी मार रहा था.वो दोनों पागलों की तरह किस कर रहे थे.सचिन ने उसे लोडा चूसने को कहा और वो तो चाहती ही येही थी.वो पागलो की तरह चूस रही थी.सचिन उसके मूह को चोदे जा रहा था.अब में भी चुदना चाहता था.तभी मेने सचिन के दोस्तों को बुला लिया जो मुझे चोदते थे.उनके नाम रवि और राजू हैं.
उनके साथ में दुसरे कमरे में जाने लगा की उन्होंने सचिन और शशि की आवाज़ सुन ली.वो बोले हम तुझे तभी चोदेंगे जब तू हमसे भी अपनी बहिन चुदवायेगा.और मुझे मानना ही था.हम तीनो मेरी बहिन के कमरे में चले गए.हमें देख कर मेरी बहिन डर गयी.
में बोला-डर मत शशि.ये भी मेरे ही दोस्त हैं.
फिर शशि की जान में जान आई.शशि फिर से उसका लोडा चूसने लगी.
रवि और राजू बोले की हम पहले तेरी बहिन को चोदेंगे.मेने कहा ठीक है.और राजू शशि के बूब्स दबाने और चूसने लगा और रवि शशि की चूत चाट रहा था.में वही बैठ कर ये देख रहा था.तीनो ने मेरी बहिन को बिस्तर पर डाला और एक एक कर के मूह चोदने लगे.अब सचिन नीचे लेट गया और शशि को अपने ऊपर लेटा लिया.धीरे धीरे सचिन का लंड शशि के अंदर जा रहा था.शशि सिसकियाँ ले रही थी.और आखिर पूरा लोडा चला ही गया.रवि ने तेल को उसकी गांड पे लगाया और अपना लोडा घुसाने लगा.शशि चिल्ला रही थी पर खुश थी.अब दोनों लोडे उसमे समां चुके थे और बड़ी जोरो से चोद रहे थे,राजू अभी भी बूब्स से खेल रहा था.तभी शशि बोली-भईय्या ,इधर आओ.में उसके पास खड़ा हो गया.उसने मेरा लोडा पकड़ा और चूसने लगी ,में ख़ुशी से पागल हुए जा रहा था.फिर पीछे से रवि हट गया और में अपनी बहिन चोदने लगा.हम चारो ने शशि को हर एंगल में चोदा.उससे अब चला भी नहीं जा रहा था.पर सचिन अब भी उसे नहीं चोद रहा था.सचिन ने उसे घोडा बनाया हुआ था.
रवि ने मुझसे भी घोडा बन्ने को कहा में खुश हो गया.अब में और मेरी बहिन घोड़ी बने हुए थे और वो तीनो बदल बदल कर हमें चोद रहे थे.फिर से उन्होंने अपने लोडे हमें चुसवाए.रवि ने थप्पड़ मार मार कर मेरी गांड लाल कर दी.पर मुझे मजा आ रहा था.फिर तीनो ने मुझे और मेरी बहिन को नीचे बिठाया और एक एक कर के अपना सारा जूस हमारे ऊपर डाल दिया,हम सब खुश थे.में और मेरी बहिन बाथरूम नहाने चले गए की तभी वो तीनो बाथरूम में आ गए,उन्होंने हमें फिर से नीचे बिठाया.में हैरान था.
फिर वो तीनो एक साथ हमारे ऊपर toilet करने लगे.हम toilet में naha चुके थे.फिर वो तीनो चले गए.tab से वो तीनो हमें चोद rahen हैं.
और हम अपने जीवन का मजा ले रहे हैं.
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