View Full Version : गांधी वध क्यों ? नत्थू राम गोडसे के विचार
guruji
15-08-2011, 06:17 AM
गांधी वध क्यों ? आवरण
guruji
15-08-2011, 06:18 AM
दिव्य संदेश :speaker:
BHARAT KUMAR
15-08-2011, 06:20 AM
:salut::clap::salut:
guruji
15-08-2011, 06:21 AM
लेखक - प्रकाशक
guruji
15-08-2011, 06:25 AM
पुस्तक परिचय:cloudy::partly_sunny::partly_cloud y:
guruji
15-08-2011, 06:33 AM
:right:मृत्यु पत्र :left:
guruji
15-08-2011, 06:37 AM
पुस्तक से कुछ पंक्तियां
BHARAT KUMAR
15-08-2011, 06:39 AM
जब तक सूरज चाँद रहेगा-गोडसे तेरा नाम रहेगा!
अभी तक उसकी और उसके ख़ास सहयोगियों के द्वारा की गयी गलतियों की सजा भुगत रहे हैं , वो आदमी थोड़े साल और जिन्दा रह जाता तो पता नहीं क्या क्या गुल खिलने थे देश में उसने!
पुस्तक से कुछ पंक्तियां
guruji
15-08-2011, 06:41 AM
:right:विषय क्रम:left:
guruji
15-08-2011, 06:45 AM
विभाजन के घाव
guruji
15-08-2011, 06:49 AM
विभाजन के घाव-2
guruji
15-08-2011, 06:51 AM
विभाजन के घाव-3
guruji
15-08-2011, 06:54 AM
विभाजन के घाव-4
nisharaj
15-08-2011, 07:31 AM
क्या यह पुस्तक pdf में मिल सकती है? अगर हाँ तो कृपया लिंक दे.
Ranveer
15-08-2011, 06:08 PM
अफ़सोस है !!
आज देश की आजादी के दिन हम उस आदमी का जिक्र करके खुश हो रहें हैं जिसने स्वतंत्रता आन्दोलन में कोई योगदान नहीं किया ,बल्कि उकसावे और बहकावे में आकर अपने ही देश के एक सम्मानित व्यक्ति ही ह्त्या कर दी |
गांधी युवा वर्ग को कभी पसंद नहीं आया |
यदि गांधी न होता तो क्या पाकिस्तान नहीं बनता ??
क्या आज हम जिस गोडसे को महान समझ रहें हैं उसका कोई नाम होता ??
मै इस विषय पर किसी से फ़ालतू बहस नहीं करना चाहता |
इस विषय पर मेरे ही हस्ताक्षर से -
अज्ञानता में ही परम आनद है .....और मै इस विषय पर अज्ञानी ही रहना चाहूँगा |
पर इतना जरुर कहूँगा की कोई निर्णय लेने से पहले इस लेख को जरुर पढ़ें -
http://www.hindi.mkgandhi.org/g_hatya.htm
aawara
15-08-2011, 06:13 PM
यह तो एक मानसिक उन्माद है. गोडसे के लेखन की एक-एक पंक्ति में पैगम्बर होने की बू आती है.
amol05
15-08-2011, 06:19 PM
बहुत ही ज्ञान वर्धक सूत्र की रचन की है अपने इसको आगे बढ़ाये
Raman46
15-08-2011, 06:30 PM
पाकिस्तान का निर्माण किसने किया ?
1937 में हिन्दू महासभा के अहमदाबाद-अधिवेशन में खुद सावरकर ने द्विराष्टंवाद के सिद्धान्त का समर्थन किया था। मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान के लिए प्रस्ताव किया, उससे तीन वर्ष पूर्व ही सावरकर ने हिन्दू और मुसलमान, ये दो अलग-अलग राष्टींयताए! हैं, यह प्रतिपादित किया था। जब दो साम्प्रदायिक ताकतें एक-दूसरे के खिलाफ काम करने लगती हैं, तब दोनों एक ही लक्ष्य की ओर अग्रसर होती हैं, और वह होता है आत्मविनाश का। हिन्दू सम्प्रदायवादियों ने ऐसा करके अंग्रेजों और भारत-विभाजन चाहने वाले मुसलमानों को फायदा ही पहु!चाया था। इन महान देशप्रेमियों ने 1942 की आजादी के आन्दोलन में तो भाग नहीं ही लिया था, उल्टे ब्रिटिश सरकार को पत्र लिखकर यह जानकारी भी दी थी कि हम आन्दोलन का समर्थन नहीं करते हैं। गांधीजी आये, उसके पहले राष्टींय राजनीति का नेतृत्व उनके पास ही था। लेकिन तब भी उन्होंने उन दिनों कोई बडा पराव्म नहीं किया था, यह हम सबकी जानकारी में है ही। गांधी के आने के बाद भी इन लोगों ने राष्टंहित में कोई मामूली काम करने की भी जहमत नहीं उठाई। गुरु गोलवलकर ने ऐडाल्फ हिटलर का अभिनन्दन किया, फिर भी अंग्रेजों ने उनको गिरफ्तार नहीं किया। कारण यह कि अंग्रेज मानते थे कि ये दो कौडी के निकम्मे लोग हैं। ये लोग तो तला पापड भी नहीं तोड सकते ! अंग्रेजों का यह आकलन था उनकी ताकत के बारे में।
भारत-विभाजन के लिए जितने जिम्मेदार मुस्लिम लीग तथा अंग्रेज हैं, उतने ही ये मूर्ख हिन्दुत्ववादी भी जिम्मेदार हैं। आजाद भारत में हिन्दू ही हुकूमत करेंगे, ऐसा शोर मचाकर हिन्दुत्ववादियों ने विभाजनवादी मुसलमानों के लिए एक ठोस आधार दे दिया था। ये विभाजनवादी लोग कहम् मुहम्मद अली जिन्ना, कहम् सावरकर, हेडगेवार, गोलवलकर और श्यामाप्रसाद मुखर्जी आदि का भय दिखाकर उनका चालाकीपूर्वक उपयोग करते थे। हिन्दुत्ववादी अभी भी अपनी बेवकूफियों पर गर्व का अनुभव करते हैं। अंग्रेजों को जिन्हें कभी जेल में रखने की जरूरत ही नहीं पडी, उन गोलवलकर की अदृश्य ताकत का उपयोग अंग्रेज गांधीजी के खिलाफ करते थे। शहाबुद्दीन राठौड की भाषा में कहें तो उस समय की राष्टींय राजनीति में यो लोग जयचन्द थे। भारत का विभाजन गांधी के कारण नहीं हुआ है, इन लोगों के कारण हुआ है। गांधीजी ने तो अन्त तक भारत विभाजन का विरोध किया था। गांधीजी ने अन्तिम समय तक इसके लिए जिन्ना के साथ क्रमबद्ध मंत्रणाए! कीं। गांधीजी ने पाकिस्तान को स्टेट माना था। (देखें प्यारेलाल लिखित 'लास्ट फेज') गांधीजी सर्वसमावेशक उदार राष्टंवादी थे। इसीलिए उन्होंने सब कौमों को अपनाया था, मात्र मुसलमानों को ही नहीं। प्रत्येक छोटी अस्मिता व्यापक राष्टींयता में मिल जाय, यह चाहते थे गांधीजी। एक राष्टींय नेता की यह दूरदृष्टि थी। महात्मा का यह वात्सल्य-भाव था सबके प्रति। बदनसीबी से हिन्दू राष्टंवादी यह समझना ही नहीं चाहते थे।
harry1
15-08-2011, 06:40 PM
बहुत ही शानदार सूत्र है गुरूजी और मुझे ख़ुशी की गोडसे ने गाँधी को मार दिया.. वो उसी के लायक था...
लेकिन बस एक तिस है काश उसे ये सब काम करने से पहले ही मार दिया होता... गोडसे ने एक महान काम किया था
aawara
15-08-2011, 07:48 PM
[B]अफ़सोस है !!
आज देश की आजादी के दिन हम उस आदमी का जिक्र करके खुश हो रहें हैं जिसने स्वतंत्रता आन्दोलन में कोई योगदान नहीं किया ,बल्कि उकसावे और बहकावे में आकर अपने ही देश के एक सम्मानित व्यक्ति ही ह्त्या कर दी |
गांधी युवा वर्ग को कभी पसंद नहीं आया |
[SIZE="3"]ऐसा नहीं है मेरे भाई ,गाँधी पसंद या नापसंद की नहीं अनुकरण करने की चीज है.
महात्मा गाँधी ने भारतीय संस्कृति पर इतनी अधिक दिशायों में प्रभाव डाला है कि उनके समस्त अवदान का सम्यक मूल्य निर्धारित करना किसी के लिए संभव नहीं दीखता. खान-पान,रहन-सहन,भाव-विचार ,भाषा और शैली, दर्शन और सामाजिक व्यव्हार और धर्म-कर्म ,रास्त्रियता और अंतर-रास्त्रियता , भारत में आज जो भी आचार या विचार प्रचलित हैं ,उनमें से प्रत्येक पर कहीं न कहीं गाँधी जी कि छाप है .
यहाँ तक कि उनके आलोचकों और विरोधियों में भी ऐसे अनेक लोग हैं , जिनकी पोशाक नहीं तो खान-पान में ,विचार नहीं तो सामाजिक आचार में, महात्मा गाँधी का प्रभाव मौजूद है.आज का भारत गाँधी का भारत है और गाँधी नाम आज के भारत का पूरा पर्याय है,इसमें कोई संदेह नहीं.गाँधी जी के इस महाव्यापक प्रभाव को ध्यान में रखते हुए यह सरल कार्य नहीं है कि हिन्दू नवो-उतथान कि पृष्टभूमि पर उनका समग्र रूप आँका जा सके.जन्म और विकास तो उनका भी सांस्कृतिक नव-उतथान के कारन हुआ,किन्तु काल को खींचकर वे अपनी दिशा कि और ले गए.
vickky681
15-08-2011, 08:54 PM
जय हिंद जय भारत
guruji
16-08-2011, 06:29 AM
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punjaban rajji kaur
16-08-2011, 08:56 AM
kam se kam kuch kayar log hindu ki id se aakar hi hinduon ko murkh batate hn. hahaha
janmjaat aadat hai peeth par vaar karne ki.
aur dusre kuch ati se bhi jyada samajjdaar hindu jab itni sharam mehsoos karte hn to dharm badal kyun nahi lete. agar apne hi dharm ki ninda nahi karoge to kya log tumhe over intelligent manna band kar denge??????
punjaban rajji kaur
16-08-2011, 08:59 AM
aise forum par aakar bhi dharm ki baat karte hue sharam nahi aati logon ko. upar se usi dharm ki id banakar taaki apne dharm ke khilaaf kuch sunna na pade. hahaha chalaak aur darpok buzdil log.
;)
Mr_perfect
16-08-2011, 06:39 PM
बहुत ही शानदार सूत्र है गुरूजी और मुझे ख़ुशी की गोडसे ने गाँधी को मार दिया.. वो उसी के लायक था...
लेकिन बस एक तिस है काश उसे ये सब काम करने से पहले ही मार दिया होता... गोडसे ने एक महान काम किया था
मित्र हो सकता है कि गाँधी की कुछ बातोँ से लोग सहमत न हो। पर एक बात तो नहीँ भूलनी चाहिए कि हमारी आजादी मेँ सबसे बड़ा हाथ उन्हीँ का है।
________
BHARAT KUMAR
17-08-2011, 05:20 AM
आप ऐसा मान सकते हैं मित्र!
मैं मानता हूँ कि गाँधी न होता तो देश कम से कम दस साल पहले आज़ाद होता और देश कि हालत आज कि तारीख में आज से ज्यादा अच्छी होती!
गाँधी एक बिचोलिया था अंग्रेजों और भारतीयों के बीच!जो अंग्रेजों ने लगाया था!
मित्र हो सकता है कि गाँधी की कुछ बातोँ से लोग सहमत न हो। पर एक बात तो नहीँ भूलनी चाहिए कि हमारी आजादी मेँ सबसे बड़ा हाथ उन्हीँ का है।
________
bullpower
17-08-2011, 10:45 AM
जी हाँ वाकई अफ़सोस है क्योंकि जो काम गोडसे जी ने किया वो कई सालों पहले होना चाहिए था , ........क्योंकि आज हम उस व्यक्ति को राष्ट्रपिता मानते हैं जिसने अंग्रेजो की पूरी निष्ठा से मदद की भारतीय लोगों को पूरी तरह से बरगलाया जिसका आज़ादी के आन्दोलन में कोई योगदान नहीं है जो एक दलाल से अधिक कुछ नहीं था
वाकई में अफ़सोस है ....................................
अफ़सोस है !!
आज देश की आजादी के दिन हम उस आदमी का जिक्र करके खुश हो रहें हैं जिसने स्वतंत्रता आन्दोलन में कोई योगदान नहीं किया ,बल्कि उकसावे और बहकावे में आकर अपने ही देश के एक सम्मानित व्यक्ति ही ह्त्या कर दी |
गांधी युवा वर्ग को कभी पसंद नहीं आया |
यदि गांधी न होता तो क्या पाकिस्तान नहीं बनता ??
क्या आज हम जिस गोडसे को महान समझ रहें हैं उसका कोई नाम होता ??
मै इस विषय पर किसी से फ़ालतू बहस नहीं करना चाहता |
इस विषय पर मेरे ही हस्ताक्षर से -
अज्ञानता में ही परम आनद है .....और मै इस विषय पर अज्ञानी ही रहना चाहूँगा |
पर इतना जरुर कहूँगा की कोई निर्णय लेने से पहले इस लेख को जरुर पढ़ें -
http://www.hindi.mkgandhi.org/g_hatya.htm
bullpower
17-08-2011, 10:52 AM
महोदय आपके द्वारा दिए गए लिंक के लेखक कुछ कुछ दिग्विजय सिंह की तरह शंकर नसल (mix bread ) के प्राणी नज़र आते हैं जो तथाकथित बुद्धिजीवियों की तरह हर बात में हिन्दू साम्प्रदायिकता को घुसा देते हैं
Mr. laddi
17-08-2011, 10:56 AM
सच में गाँधी एक दलाल ही था इससे ज्यादा और कुछ नहीं कहना येही काफी है किसी को नापसंद करने के लिए
divyasingh
21-08-2011, 07:42 AM
जी हाँ वाकई अफ़सोस है क्योंकि जो काम गोडसे जी ने किया वो कई सालों पहले होना चाहिए था , ........क्योंकि आज हम उस व्यक्ति को राष्ट्रपिता मानते हैं जिसने अंग्रेजो की पूरी निष्ठा से मदद की भारतीय लोगों को पूरी तरह से बरगलाया जिसका आज़ादी के आन्दोलन में कोई योगदान नहीं है जो एक दलाल से अधिक कुछ नहीं था
वाकई में अफ़सोस है ....................................
एकदम सच है ...........
navinc4u
21-08-2011, 01:06 PM
गाँधी जी की सबसे बड़ी बड़ी गलती या पाप जवारलाल नेहरू जैसे नाकाबिल , कामुक और लालची व्यक्ति को अन्य नेताओ के ऊपर समझाना और अंततः येन केन पराकेन उस को भारत का प्रधानमंत्री बना देना था उस व्यक्ति के लालच और कमातुर्ता का परिणाम आज तक देश भुगत रहा है चाहे वो कश्मीर का सवाल हो या एक देश में दो न्याय विवस्थाओ ( हिन्दुओ के लिए अलग और मुसलमानों के लिए अलग ) या देश को कर्जे में डुबाने का प्रश्न हो
लेकिन उस से भी ज्यादा चिंताजनक बात ये है की नेहरू द्वारा दलाल नेताओ की एक फोज़ खड़ी कर दी गयी ( दिग्विजय , अर्जुन सिंह , मणिशंकर अय्यर आदि ) जिनकी नेहरू परिवार निष्ठा देश निष्ठां से बड़ी है और इस कारण देश आज तक इस परिवार के राज को झेल रहा है
rehan0101
21-08-2011, 02:31 PM
kam se kam kuch kayar log hindu ki id se aakar hi hinduon ko murkh batate hn. hahaha
janmjaat aadat hai peeth par vaar karne ki.
aur dusre kuch ati se bhi jyada samajjdaar hindu jab itni sharam mehsoos karte hn to dharm badal kyun nahi lete. agar apne hi dharm ki ninda nahi karoge to kya log tumhe over intelligent manna band kar denge??????
panjaban ji jara muje bataye to kisne pit par var kiya
hame tomalum padna chahiye ki kyabat hai
deshpremi
20-09-2011, 11:42 AM
मेरे ख्याल से तो पहले नेहरु को मारना चाहिए था गोडसे को
Mr Gonsalwez
22-09-2011, 04:43 PM
सच में गाँधी एक दलाल ही था इससे ज्यादा और कुछ नहीं कहना येही काफी है किसी को नापसंद करने के लिए dalaaaallll....................gandheeee.........
JAINAFZ
06-10-2011, 02:15 PM
सूत्र निर्माता ही गायब हो गए ................ इस बारे में कुछ और जानकारी दें |.............. खैर .....\
नाथू राम गोडसे ने जो बयान ८ नवेम्बर १९४८ को अदालत में दिए थे उसके कुछ अंश ...............
जो ये बताते है की गांधी के मुस्लिम तुष्टिकरण से नाराज हो कर उनकी हत्या की गयी
१. गाँधी ने महाराजा हरी सिंह को सन्यास ले कर कशी जाने की सलाह तो दी परन्तु कभी हैदराबाद
के निजाम को फकीरी ले कर मक्का की सलाह नहीं दी | मेरा ( गोडसे का ) पूर्ण विश्वास है की अहिंसा
का अति प्रचार हिन्दुओ को इस योग्य भी नहीं छोड़ेगा की वे ( हिन्दू ) किसी और जातियों खासकर
मुस्लिमो के अत्याचारों का प्रतिरोध कर सके |
JAINAFZ
06-10-2011, 03:11 PM
२. १९४६ में सुह्राबर्दी की सरकार के समय नोआखाली ( बंगाल ) में मुसलमानों के हाथो हिन्दुओ
पर जो अत्याचार हुए उस से हमारा खून खोल गया | हमारा छोभ उस समय और भी उग्र हो गया
जब गाँधी जी ने सुह्राबर्दी को शरण दी और शहीद साहब के नाम से संबोधित किया |
३. गाँधी जी जब दिल्ली आये तो भंगी कालोनी के मंदिर में अपनी प्रार्थना सभा में जनता और पुजारियों
के विरोध करने पर भी उन्होंने कुरआन की आयते पढ़ीं लेकिन कभी भी वह किसी मस्जिद में ( मुसलमानों
के भय से ) गीता न पड़ सके क्योंकि वो jaante थे की गीता पढने पर मुसलमानों उनके साथ कैसा सलूक
करंगे |
JAINAFZ
06-10-2011, 04:13 PM
५. मालाबार , पंजाब , बंगाल और सीमा प्रान्तों में हिन्दुओ पर अत्याधिक अत्याचार हुए जिसे मोपला
विद्रोह के नाम से जाना जाता है | हिन्दुओ को जबरन मुसलमान बनाया गया और महिलाओं को भेड़ -
बकरियो की तरह खरीद - फरोख्त हुई | गाँधी ने मोपला मुसलमानों की सहायता के लिए निधि संग्रह
फंड कर दिया और हिन्दुओ के लिए कुछ नहीं किया | ये था गाँधी की हिंद- मुस्लिम एकता का आधार |
JAINAFZ
06-10-2011, 04:26 PM
६. १९३१ में राउण्ड टेबल कांफ्रेंस में गाँधी जी ने मेक्डोनाल्ड को हिन्दू व् मुसलमानों को अलग - अलग
चुनाव अधिकार देने की स्वीकृति दे दी और इसके बाद भी हिन्दू - मुस्लिम सदभाव की
कल्पना में लगे रहे व् देश को भ्रमित करते रहे |
७. अली भाइयो ने खिलाफत आन्दोलन असफल हो जाने का बदला लेने के लिए अफगानिस्तान के
अमीर को भारत पर आक्र्मद के लिए आमंत्रित किया | श्री निवास शास्त्री , लीडर के संपादक श्री सी y
चिंतामदी और गाँधी जी के परम मित्र सी अफ ऐन्दुज़ ने स्वीकार किया के गाँधी जी इस प्रस्ताव के
पक्षधर थे | ब्रिटिश गुप्तचरों ने इस षड्यंत्र को तोडा और धरी रह गयी हिन्दू - मुस्लिम एकता
biji pande
09-10-2011, 01:03 PM
बहुत जी अच्छी जानकारी दी है जैनाफ़ जी
turbo
09-10-2011, 01:44 PM
पहले नेहरु को मारना चाहिए था yahi hona chaiye tha.
JAINAFZ
09-10-2011, 02:27 PM
पहले नेहरु को मारना चाहिए था yahi hona chaiye tha.
बहुत जी अच्छी जानकारी दी है जैनाफ़ जी
आप सभी का धन्यवाद
उत्साह वर्धन करते रहे ...... कुछ उर्जा सी महसूस होती है
JAINAFZ
09-10-2011, 02:29 PM
८. मोहम्मद अली जिन्ना ने १९२० में कांग्रेस को छोड़ कर मुस्लिम लीग बनायीं और मुसलमानों के लिए अलग देश की मांग प्रारंभ कर दी
मुस्लिम लीग को एक और तो अंग्रेजो की सहायता मिलती रही और दूसरी और गाँधी जी की कांग्रेस का समर्थन मिलता रहा |
९. १९२८ तक जिन्ना का प्रभाव बहुत बढ चुका था उसे खुश करने के लिए गाँधी जी ने सिंध को मुंबई से अलग करने की मांग मान ली |
और सिंध के हिन्दुओ को साम्प्रदायिक दानवो के हाथो सौप दिया | गाँधी की हिन्दू मुस्लिम एकता स्वप्न बन कर रह गयी |
JAINAFZ
09-10-2011, 02:43 PM
१०. १९२१ में लाहोर में स्वतंत्रता प्रस्ताव में मुस्लिम शामिल नहीं हुए थे और १९२८ के बाद तो मुस्लिम लीग ने कांग्रेस से सम्बन्ध रखने से ही इनकार कर दिया
इसके बाद हिन्दू मुस्लिम एकता की आशा किसी को नहीं रही लेकिन गाँधी जी हारे हुए जुआरी की तरह दाव पर दाव लगाते रहे | अपनी जिद्द के आगे हिन्दू
हितो की बलि देते चले गए |
११. गाँधी जी के मन में हिन्दू और मुसलमान दोनों का नेतृत्व करने की प्रबल इच्छा थी | हिन्दू मुस्लिम एकता का कार्य तब तक तो ठीक था जब तक भारत
की स्वतंत्रता को उद्देश्य समझ कर किया गया परन्तु गाँधी जी अपना उद्देश्य ही मुसलमानों को संतुष्ट करना बना लिया जिसका परिणाम आज ham dekh रहे है
Shri Vijay
06-01-2012, 08:38 PM
आदरणीय मित्र श्री JAINAFZ जी आप के ईस उत्क्रष्ट सूत्र के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ l कृपया सूत्र को आगे गति प्रदान करे l
Saroz
08-01-2012, 12:15 PM
310787ये सूत्र मुझे बहुत अच्छी लगी....
इसमें नाथूराम की महिमामयी विवेचना तो की ही गयी, साथ में वरिष्ठ और आदरणीय लोगो के विचार टिपण्णी पढ़ के यही लगा कि श्री महात्मा गाँधी बापूजी महाराज की उपाधि "राष्ट्रपिता" महाराज नाथूजी राम को दे देते है...
अब कहेंगे की पोस्सीबल नहीं है..... अर्र्रे काहे नहीं है... हम जनता जनार्दन है, केवल चर्चा ही नहीं एक मंच बना कर आन्दोलन भी करनी चाहिए.....
रही बात हिन्दू मुस्लिम में अंतर करने का तो, अंतर तो इस मंच पर भी किया जाता है...... हिन्दुओं पर इतने सारे सूत्र है, मगर मुस्लिम भाइयों पर भी प्रकाश डालना चाहिए.....
अपने पर अगर आती है तो समझ में आती है.....
अगर आप गाँधी होते तो इस देश में क्या उनसे अलग और बेहतर करते?
गांधीजी हमारे बापू है.... और वो किसी हालत में गलत नहीं हो सकते.....
अगर गलत थे तो नाथूराम जी को उनसे पाकिस्तान विभाजन के समय से पहले ही वार्तालाप करनी चाहिए थी...या मृत्यु के घाट उतार देनी चाहिए थी.....
नाथूराम अपनी निजी खुंदक निकालने के लिए उनकी हत्या किया... दोनों का बैकग्राउंड से पता लगाया जा सकता है कि कौन कितना पागल था और किस चीज के लिए.....
आप सभी से मै क्षमाप्राथी हूँ.... मै गाँधी कि बुराई नहीं सुन सकता......
"......इश्वर-अल्लाह तेरो नाम... सबको सन्मति दे भगवान.."310792
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