View Full Version : उमस में न हों बेबस
bhavna singh
18-08-2011, 09:35 PM
कम बरसात होने की वजह से उमस बढ़ जाती है। बढ़ती उमस की वजह से अक्सर देखा गया है कि कई लोग चक्कर खाकर या बेहोश होकर गिर पड़ते हैं। हालांकि कुछ लोगों के बेहोश होने के दूसरे कारण भी होते हैं। उमस में बेहोशी क्यों आती है और ऐसे में कब-क्या किया जाए, आइये जानते हैं क्या है विशेषज्ञों की राय ..................
bhavna singh
18-08-2011, 09:36 PM
बेहोशी के कारण
बारिश ठीक से न हो और धूप तेज पड़े तो माहौल में उमस काफी बढ़ जाती है। ऐसे में सिरदर्द, घबराहट, बेचैनी, उलटी-दस्त, गले में खराबी, जुकाम और बुखार की चपेट में लोग तेजी से आ जाते हैं। उमस के दिनों में कई बार लोग शरीर में पानी की कमी की वजह से बेहोश हो जाते हैं। बेहोशी की मुख्य वजह दिमाग में बल्ड सर्कुलेशन का कम होना है। पसीना ज्यादा आने, बीपी लो हो जाने, शरीर में शुगर लेवल कम हो जाने और नब्ज या धड़कन कम हो जाने की शिकायतें भी बेहोशी या चक्कर खाकर गिर पड़ने के कारण हैं।
bhavna singh
18-08-2011, 09:37 PM
शरीर पर असर
उमस ज्यादा बढ़ने से घुटन के कारण बेहोशी के मामले ज्यादा होते हैं।
bhavna singh
18-08-2011, 09:38 PM
घुटन से बीपी लो हो जाता है। पल्स तेज हो जाती है। जब मामला ज्यादा बढ़ जाता है तो पल्स कम होने लगती है।
bhavna singh
18-08-2011, 09:38 PM
शरीर में नमक, पानी और पोटैशियम आदि इलेक्ट्रॉलाइट्स की कमी हो जाती है।
दिल और दिमाग पर भी असर पड़ जाता है।
इससे भी बेहोशी आती है, क्योंकि हमारा इम्यून सिस्टम फौरन सक्रिय होकर शरीर की रक्षा में लग जाता है।
bhavna singh
18-08-2011, 09:39 PM
बेहोशी के अलावा भी हैं तकलीफें
आयुर्वेद के अनुसार इन दिनों शरीर में वायु बढ़ जाती है और अलोपथी के अनुसार पाचन शक्ति कम हो जाती है।
पेट जल्दी खराब होता है। पानी में इनफेक्शन की वजह से टायफाइड, पीलिया, दस्त के मरीज बढ़ जाते हैं।
फल सब्जियों में भी कीड़ा लग जाता है, जिससे पेट खराब होने का डर रहता है।
कई लोगों को सफाई न होने की वजह से गन्ने के रस से भी इनफेक्शन हो सकता है।
माहौल में उमस बढ़ने की वजह से थकावट जल्दी आती है।
bhavna singh
18-08-2011, 09:40 PM
जब कोई बेहोश हो जाए
अगर कोई बेहोश हो जाता है तो उसे फौरन खुली हवा में सीधा लिटा दें और उसके पैर थोड़े ऊपर कर दें।
ऐसा करने पर ब्लड सर्कुलेशन ठीक हो जाता है।
होता यह है कि घुटन के कारण ब्रेन में खून की सप्लाई कम हो जाती है
तो शरीर का इम्यून सिस्टम सक्रिय होकर सारा जोर शरीर की हिफाजत में लगा देता है
जिससे लोग बेहोश हो जाते हैं। इसे वैसोवेगल अटैक कहते हैं।
bhavna singh
18-08-2011, 09:42 PM
अगर बहुत गरमी हो तो कपड़े को भिगोकर पीड़ित व्यक्ति के सिर और चेहरे को गीला कर दें।
dev b
18-08-2011, 11:27 PM
अच्छे सूत्र के लिए रेपो++++++++++++स्वीकार करे मित्र
bhavna singh
18-08-2011, 11:50 PM
अच्छे सूत्र के लिए रेपो++++++++++++स्वीकार करे मित्र
देव जी उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद
bhavna singh
18-08-2011, 11:51 PM
बेहोश व्यक्ति के चारों तरफ लोगों को जमा होने से रोकें क्योंकि इससे उसे और ज्यादा घुटन महसूस होगी।
bhavna singh
18-08-2011, 11:52 PM
उसके चेहरे पर पानी के छींटे मारें।
bhavna singh
18-08-2011, 11:52 PM
उसे ठंडी जगह या हो सके तो एसी में ले जाएं।
bhavna singh
18-08-2011, 11:54 PM
अगर वह पानी पीने की हालत में है तो उसका सिर ऊंचा उठाकर उसे थोड़ा-सा पानी पिलाएं।
ऐसा करने में बड़ी सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि कई बार बेहोशी में पिलाया गया पानी फेफड़ों में चला जाता है।
bhavna singh
19-08-2011, 12:05 AM
अगर वह कुछ होश में आ जाता है तो उसके खाने-पीने के बारे में पूछें।
कई बार रात से भूखा आदमी भी बेहोश हो जाता है।
bhavna singh
19-08-2011, 12:06 AM
शुगर के पेशेंट इंसुलिन का इंजेक्शन लगवाने के बाद खाना नहीं खा पाते, उससे भी बेहोशी आ जाती है।
bhavna singh
19-08-2011, 12:08 AM
अगर होश में आकर भी उस शख्स में भ्रम या कन्फ्यूजन की स्थिति बनी और चक्कर आते रहते हैं तो उसे डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
bhavna singh
19-08-2011, 12:08 AM
बेहोश होने पर पीड़ित को एक करवट में लिटा दें और डॉक्टर से संपर्क करें।
bhavna singh
19-08-2011, 12:10 AM
इन्हें हो सकती है ज्यादा परेशानी
जो पहले से ही हार्ट, किडनी या लिवर के रोगी हों, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उमस में उनकी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
हार्ट और किडनी के कुछ मरीजों को ज्यादा पानी पीने से मना किया जाता है, ऐसे में वह डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
bhavna singh
19-08-2011, 12:11 AM
शुगर, हाई बीपी व अनीमिया के मरीजों के अलावा जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर है।
bhavna singh
19-08-2011, 12:13 AM
मोटापा, सांस या दमा की तकलीफ वालों को भी इस मौसम से तकलीफ हो सकती है।
bhavna singh
19-08-2011, 11:21 AM
ऐसे तमाम मरीजों को बतौर सावधानी हमेशा साफ-सुथरा रहना चाहिए।
खुली हवा में रहना उनके लिए लाभकारी है।
शरीर में नमक और पानी की कमी न होने पाए, इसका ध्यान रखना चाहिए।
bhavna singh
19-08-2011, 11:22 AM
शुगर या डायबिटीज के मरीज बरतें ये सावधानियां
शुगर वालों को चूंकि पेशाब ज्यादा आता है, इसलिए शरीर में पानी की कमी होने के कारण बेहोशी हो सकती है।
वे घर से निकलते वक्त पानी पीकर और साथ के लिए भी लेकर चलें।
पसीना आने पर बीच-बीच में थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें।
bhavna singh
19-08-2011, 11:27 AM
गर्मी और उमस वाले वातावरण में ज्यादा भोजन न करें।
नॉनवेज या मटन करी और ऐसे ही पदार्थ लेने से बचें। रेड मीट न लें।
bhavna singh
19-08-2011, 11:27 AM
ज्यादा तला और घी वाला खाना न खाएं। सादा और उबला हुआ भोजन ही लें।
bhavna singh
19-08-2011, 11:28 AM
एक बार भरपेट खाने की बजाय थोड़ा-थोड़ा खाना कई बार में खाएं।
bhavna singh
19-08-2011, 11:37 AM
हफ्ते में एकाध बार नारियल पानी लिया जा सकता है वह भी तब अगर बाहर जाने पर पानी न मिले।
अलबत्ता, नारियल गिरी ली जा सकती है।
bhavna singh
19-08-2011, 11:38 AM
शुगर के रोगी पैक किए हुए फ्रूट जूस से बचें, ताजा फलों का जूस लें। वह भी कम मात्रा।
bhavna singh
19-08-2011, 11:38 AM
शुगर वाले पेशंट अपनी दवाएं हमेशा साथ रखें ताकि जरूरत पड़ने पर ली जा सकें।
जहां आप जा रहे हैं शायद वहां आपकी दवा न मिलें।
bhavna singh
19-08-2011, 11:39 AM
जेब में कुछ मीठी गोलियां या शुगर क्यूब्स या चीनी रखकर चलें।
bhavna singh
19-08-2011, 11:39 AM
पानी की बोतल साथ लेकर चलें और जरूरत के मुताबिक थोड़ा-थोड़ा पीते रहें। ऐसे लोगों को अपनी जेब या पर्स में एक पर्ची जरूर रखनी चाहिए, जिस पर उनकी बीमारी, घर का और डॉक्टर का फोन नंबर लिखा हो। इससे फायदा यह होता है कि देखभाल कर रहे व्यक्ति को पता लग जाता है कि यह शुगर पेशंट है और इसका शुगर कम होने की वजह से भी बेहोशी हो सकती है।
bhavna singh
19-08-2011, 11:40 AM
शुगर कम होने के लक्षण हैं- घबराहट, ज्यादा पसीना, हाथ-पैर कांपना व गीले होना, नब्ज धीमी होना, सारे कपड़े गीले हो जाना,
बेहोशी जैसी हालत, चलने में दिक्कत या लड़खड़ा कर चलना।
bhavna singh
19-08-2011, 11:40 AM
शुगर कम होने पर त्वचा नम हो जाती, जबकि शुगर ज्यादा होने पर त्वचा एकदम सूखी जाती है
और मुंह से पक चुके फलों जैसी गंध आने लगती है और सांस भी तेजी से चलेगी।
bhavna singh
19-08-2011, 11:41 AM
अगर शुगर कम होने की वजह से बेहोशी आई हो तो जरा-सी चीनी की चाशनी या ग्लूकोज का घोल देने से रोगी उठ बैठेगा।
bhavna singh
19-08-2011, 11:42 AM
अगर कोई शुगर लेवल कम होने की वजह से बेहोश हो रहा हो तो उसके टाइट कपड़े लूज कर दें।
bhavna singh
19-08-2011, 11:42 AM
उसके पैर थोड़े ऊंचे कर दें। मुंह एक दिशा में कर दें। सीधा मुंह करके उसके मुंह में पानी डालने की कोशिश न करें।
सिर उठाकर ही कुछ पिलाएं, नीचे सिर किए हुए नहीं।
bhavna singh
19-08-2011, 11:43 AM
रोगी को हाई शुगर हो तो डॉक्टर को दिखाना ही होगा।
bhavna singh
19-08-2011, 11:44 AM
ऐसे रोगियों को ज्यादा उपवास व दावत दोनों से बचना चाहिए।
bhavna singh
19-08-2011, 01:00 PM
बेहोशी से कैसे बचें
उमस के दिनों में प्यास के मुताबिक पानी पूरा पिएं। लिक्विड चीजें लेते रहें और खाना भी वक्त से पूरा खाएं।
ध्यान रहे, प्यास के मुताबिक पूरा पीने का मतलब यह नहीं कि जरूरत से ज्यादा पानी पीने लगें।
हां, पसीना ज्यादा आए तो ऐसी हालत में पानी थोड़ा ज्यादा पीना ठीक रहता है।
bhavna singh
23-08-2011, 11:06 AM
शरीर में पानी व नमक की कमी न हो इसके लिए नींबू पानी व नमक लेते रहें।
bhavna singh
23-08-2011, 11:07 AM
बाहर जाते वक्त घर से पानी की बोतल, नींबू-पानी या शिकंजी लेकर ही निकलें और जैसे-जैसे पसीना आता जाए इनमें से थोड़ा-थोड़ा पीते रहें।
लेकिन शुगर के मरीजों को शिकंजी आदि से बचना चाहिए और सिर्फ नींबू-पानी-नमक या सादे पानी का इस्तेमाल करना चाहिए।
bhavna singh
23-08-2011, 11:07 AM
शरीर को सूखा रखने और ठंडे माहौल में रहने की कोशिश करें।
swati_
23-08-2011, 02:09 PM
bahut achi jankari hain..
bhavna singh
24-08-2011, 09:37 PM
होम्योपथिक उपचार
उमस के कारण बेहोशी न आए इसके लिए एहतियात के तौर पर Gelsemium-30 की 200 पावर की चार-पांच गोलियां सुबह शाम 2-3 दिन तक लें। इससे बचाव रहेगा।
bhavna singh
24-08-2011, 09:38 PM
अगर बेहोश हो जाएं या चक्कर आ जाए तो Arsanic Album-30 या Gelsemium-30 या Rhus Tox-30 की 4-5 गोलियां दिन में 3-4 बार लें।
bhavna singh
24-08-2011, 09:39 PM
अगर तकलीफ ज्यादा हो तो एक-दो घंटे बाद भी दवाइयां रिपीट कर सकते हैं।
bhavna singh
24-08-2011, 09:40 PM
इन दवाइयों से मरीज सैटल हो जाता है। उसका बीपी, शुगर और धड़कन ठीक हो जाती है और चक्कर आने बंद हो जाते हैं।
bhavna singh
24-08-2011, 09:41 PM
मुद्राएं और प्राणायाम
उमस के प्रभावों से बचाव के लिए मुद्राएं और प्राणायाम क्रिया भी फायदेमंद साबित हो सकती हैं।
bhavna singh
24-08-2011, 09:41 PM
वरुण मुद्रा का प्रयोग करें। इसके लिए हाथ के अंगूठे और कनिष्ठिका (सबसे छोटी) उंगली की टिप्स को मिला लें और बाकी तीन उंगलियां सीधी रखें। इसका उपयोग करने से शरीर में पानी की कमी नियंत्रित होने लगती है। इसे कभी भी किया जा सकता है। वैसे तो बैठकर करें पर चलते-फिरते भी इसे कर सकते हैं। इससे पानी की कमी के कारण बेहोश होने जैसी स्थिति नहीं आएगी। यह मुद्रा बेहोश व्यक्ति को भी करा सकते हैं। स्थिति नियंत्रण में आ सकती है।
bhavna singh
24-08-2011, 09:42 PM
इसके अलावा शीतकारी क्रिया करें। इसके लिए जीभ को रोल की तरह लपेटकर तालू से लगा दें और खुले मुंह से सांस लें और नाक से छोड़ दें।
दो-तीन मिनट ऐसा करने पर गला तर हो जाएगा और पानी की कमी महसूस नहीं होगी। इस प्राणायाम को कभी भी किया जा सकता है।
bhavna singh
24-08-2011, 09:42 PM
यदि शरीर को ठंडा रखना चाहें और उमस के प्रभाव से बचना चाहें तो जीभ को सीटी बजाने की मुद्रा में या नाली की तरह गोल करके मुंह से अंदर सांस खींचें।
ठोड़ी को छाती से लगाएं। दो-से चार सेकंड तक अंदर ही सांस रोकर रखें और बाद में ठोड़ी ऊपर करते हुए नाक के जरिए सांस छोड़ दें।
इसे शीतकारी प्राणायाम कुम्भक कहते हैं। यह क्रिया या तो खाली पेट की जाए या खाने के तीन घंटे बाद।
इससे गर्मियों में शरीर में ठंडक महसूस होती है।
bhavna singh
24-08-2011, 09:43 PM
नोट : यदि आप हार्ट, बीपी या शुगर रोग से पीड़ित हैं तो प्राणायाम की यह क्रियाएं किसी प्रशिक्षक से सीखकर या अपने डॉक्टर से पूछकर ही करें। दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से ही करें।
bhavna singh
24-08-2011, 09:45 PM
ये सूत्र आपको कैसा लगा ?
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bhavna singh
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