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View Full Version : "कुछ अच्छी बाते"



jai 123
18-09-2011, 08:51 AM
जीवन मैं उर्जा का संचार करने वाली सूक्तिया

jai 123
18-09-2011, 08:56 AM
पर्वत -शिखर की यात्रा मैं निरंतर चढाई ही नहीं होती उनमे उतराइया भी आती है खंड और खाईया भी आती है जीवन की असफलताऐ और ठोकरें भी इसी तरह प्रगती की लंबी यात्रा के अटूट अंग है

jai 123
18-09-2011, 08:58 AM
बिजलियो का भय त्यागे बिना कोई वृक्ष उचा नहीं हो सकता

jai 123
18-09-2011, 09:00 AM
अविष्कार वह हजारवा प्रयोग है जिसके पूर्व के नो सो निन्यानवे प्रयोग असफल हो गए

jai 123
18-09-2011, 09:02 AM
अति सम्पनता अति दरिद्रता का ही दूसरा रूप है

jai 123
18-09-2011, 09:04 AM
प्रयत्न करने पर असफलता मिल सकती है किन्तु प्रयत्न न करने की असफलता और भी बड़ी है

jai 123
18-09-2011, 03:59 PM
जो व्यक्ति आपको पसंद नहीं है , उसके विषय मैं सोच विचार कर एक पल भी नष्ट न कीजिऐ !

jai 123
18-09-2011, 04:01 PM
:book:मनुष्य का ध्येय सत्य होना चाहिए , सुख नहीं !

jai 123
22-09-2011, 08:17 AM
दोस्तों,एक छोटा सा पक्षी, विशालकाय विमान को आसमान से धरती पर गिरा सकता है..!! एक छोटी सी चींटीं विशालकाय हाथी को पागल बना सकती है..!! और मन के भीतर, पैदा हुआ वासना का एक छोटा सा कीड़ा,किसी भी महा चरित्र्यवान मानव को पतन की खाई में धकेल देता है..!!

Teach Guru
22-09-2011, 09:31 AM
बहुत ही जबरदस्त सूत्र है मित्र|

jai 123
24-09-2011, 08:45 AM
हर पल को खुलकर जीओ
हर मुसिबत का हस कर सामना करो
क्योकि गुजरने वाला पल कभी लौट कर नही आता
तो फिर क्यो हम अपने जीवन को यु बर्बाद कर रहे है

slimsima
16-05-2012, 12:59 PM
एक बात बिलकुल सच मानिए की जीवन में मृत्यु से ज्यादा सुनिश्चित कुछ भी नहीं हे मृत्यु ही सर्वाधिक सुनिश्चित हे जीवन मिला हे तो जीवन में धन मिले न मिले कोई ज़रूरी नहीं हे लेकिन मृत्यु मिलेगी ये सुनिश्चित हे जीवन में पद पैसा प्रतिष्ठा मिले कोई ज़रूरी नहीं लेकिन मृत्यु अवश्य मिलती हे आदमी पैदा हुआ पढ़ लिख पाए न पाए कोई ज़रूरी नहीं पर मृत्यु को अवश्य पायेगा जब मृत्यु निश्चित हे तो उससे भय खाने की ज़रूरत भी नहीं हे मृत्यु अमृत हे उसी से जीवन का प्रादुर्भाव होता हे मृत्यु एक मंदिर हे जिसमे जीवन का देवता विराजित हे

Badtameez
16-05-2012, 01:07 PM
बहुत ही अच्छा है।

slimsima
16-05-2012, 01:09 PM
जन्म रोग हे ,इसलिए जन्मदिवस पर बहुत ज्यादा हर्षित मत होना बहुत ज्यादा प्रफुल्लित मत होना बल्कि जन्म -दिवस को एक चेतावनी दिवस के रूप में लेना दरअसल हर जन्म दिवस एक चेतावनी हे की जीवन के इतने बसंत मुट्ठी की पकड़ से निकल चुके हे अब जो कुछ थोडा समय शेष हे उसे धर्म साधना के ज़रिये ''विशेष '' बना ले वर्ना जीवन के अंत में पछताना पड़ेगा हर जन्मदिन एक अल्टिमेटम देकर जाता हे ,एक चेतावनी देकर जाता हे इस चेतावनी को समझो और अर्थी उठने से पहले ही जीवन का ''अर्थ'' समझ लो अस्थियाँ बिखरने से पहले ही जीवन में आस्था जगा लो

Kamal Ji
16-05-2012, 01:17 PM
जय जी के अति सुन्दर सूत्र में नियामक सीमा जी का
उपरोक्त जन्मदिवस अल्टीमेटम जिंदगी कि सच्चाई को ब्यान करता है.
सूत्रधार जय जी और सीमा जी को धन्यवाद एक अच्छे सूत्र और सूक्तियों के लिए

slimsima
16-05-2012, 01:42 PM
शमशान मृत्यु का प्रतिक हे हम रोज़ मंदिर जाते हे मुसलमान मस्जिद जाते हे सिख गुरूद्वारे जाते हे और भगवान् की वेदी की परिक्रमा लगाते हे भगवान् को वश में करने हेतु हमें महीने में दो बार शमशान घाट जा कर वंहा की परिक्रमा अवश्य लगनी चाहिए जब हम शमशान में जलती हुई लाशो को अधजले मुर्दों को देखेंगे तो हमें यह बोध होगा की हम कंहा भाग रहे हे आखिर में यंही तो आना हे एक दिन हमारी भी यही गत होनी हे क्यूंकि यदि पापों से बचना हे तो अपनी मृत्यु को सदेव स्मरण में रखो हर पल याद करो की बस आज का दिन आपकी जिन्दगी का आखिरी दिन

slimsima
16-05-2012, 01:43 PM
आपका बहुत बहुत धन्यवाद कमल भाई जी

Ranveer
16-05-2012, 01:52 PM
जो व्यक्ति आपको पसंद नहीं है , उसके विषय मैं सोच विचार कर एक पल भी नष्ट न कीजिऐ !


एक बात बिलकुल सच मानिए की जीवन में मृत्यु से ज्यादा सुनिश्चित कुछ भी नहीं हे मृत्यु ही सर्वाधिक सुनिश्चित हे जीवन मिला हे तो जीवन में धन मिले न मिले कोई ज़रूरी नहीं हे लेकिन मृत्यु मिलेगी ये सुनिश्चित हे जीवन में पद पैसा प्रतिष्ठा मिले कोई ज़रूरी नहीं लेकिन मृत्यु अवश्य मिलती हे आदमी पैदा हुआ पढ़ लिख पाए न पाए कोई ज़रूरी नहीं पर मृत्यु को अवश्य पायेगा जब मृत्यु निश्चित हे तो उससे भय खाने की ज़रूरत भी नहीं हे मृत्यु अमृत हे उसी से जीवन का प्रादुर्भाव होता हे मृत्यु एक मंदिर हे जिसमे जीवन का देवता विराजित हे


जन्म रोग हे ,इसलिए जन्मदिवस पर बहुत ज्यादा हर्षित मत होना बहुत ज्यादा प्रफुल्लित मत होना बल्कि जन्म -दिवस को एक चेतावनी दिवस के रूप में लेना दरअसल हर जन्म दिवस एक चेतावनी हे की जीवन के इतने बसंत मुट्ठी की पकड़ से निकल चुके हे अब जो कुछ थोडा समय शेष हे उसे धर्म साधना के ज़रिये ''विशेष '' बना ले वर्ना जीवन के अंत में पछताना पड़ेगा हर जन्मदिन एक अल्टिमेटम देकर जाता हे ,एक चेतावनी देकर जाता हे इस चेतावनी को समझो और अर्थी उठने से पहले ही जीवन का ''अर्थ'' समझ लो अस्थियाँ बिखरने से पहले ही जीवन में आस्था जगा लो


शमशान मृत्यु का प्रतिक हे हम रोज़ मंदिर जाते हे मुसलमान मस्जिद जाते हे सिख गुरूद्वारे जाते हे और भगवान् की वेदी की परिक्रमा लगाते हे भगवान् को वश में करने हेतु हमें महीने में दो बार शमशान घाट जा कर वंहा की परिक्रमा अवश्य लगनी चाहिए जब हम शमशान में जलती हुई लाशो को अधजले मुर्दों को देखेंगे तो हमें यह बोध होगा की हम कंहा भाग रहे हे आखिर में यंही तो आना हे एक दिन हमारी भी यही गत होनी हे क्यूंकि यदि पापों से बचना हे तो अपनी मृत्यु को सदेव स्मरण में रखो हर पल याद करो की बस आज का दिन आपकी जिन्दगी का आखिरी दिन
सुंदर दार्शनिक विचारों के लिए जय जी और सीमा जी को शुक्रिया ।

SUNIL1107
16-05-2012, 02:01 PM
शमशान मृत्यु का प्रतिक हे हम रोज़ मंदिर जाते हे मुसलमान मस्जिद जाते हे सिख गुरूद्वारे जाते हे और भगवान् की वेदी की परिक्रमा लगाते हे भगवान् को वश में करने हेतु हमें महीने में दो बार शमशान घाट जा कर वंहा की परिक्रमा अवश्य लगनी चाहिए जब हम शमशान में जलती हुई लाशो को अधजले मुर्दों को देखेंगे तो हमें यह बोध होगा की हम कंहा भाग रहे हे आखिर में यंही तो आना हे एक दिन हमारी भी यही गत होनी हे क्यूंकि यदि पापों से बचना हे तो अपनी मृत्यु को सदेव स्मरण में रखो हर पल याद करो की बस आज का दिन आपकी जिन्दगी का आखिरी दिन

कितनी सटीक बात कह दी सीमा जी आपने किसी संत से सुना था " मरघट बस्ती में और मंदिर (साधना स्थली) वन में होना चाहिए थे जिससे साधना भी ठीक ठीक होती और मृत्यु बोध भी समय समय पर होता रहता किन्तु मनुष्य कितना बदमाश है उसने दोनों चीजें उलटी कर दीं"

slimsima
16-05-2012, 02:53 PM
कितनी सटीक बात कह दी सीमा जी आपने किसी संत से सुना था " मरघट बस्ती में और मंदिर (साधना स्थली) वन में होना चाहिए थे जिससे साधना भी ठीक ठीक होती और मृत्यु बोध भी समय समय पर होता रहता किन्तु मनुष्य कितना बदमाश है उसने दोनों चीजें उलटी कर दीं"
उक्त सभी बाते क्रांतिकारी युवा संत ''मुनि श्री तरुनसागर जी'' द्वारा मेरठ में दिए उनके व्याख्यान पर बनी पुस्तक ''मृत्यु बोध्द'' से ली गई हे आपके द्वारा लिखी गई पंक्तियाँ भी उसी पुस्तक की हे

jai 123
17-05-2012, 12:40 PM
सीमा जी , रनवीर जी , कमल जी , बदतमीज जी को हार्दिक धन्यवाद
सुत्र को गति प्रदान करने एवं अपने विचार प्रकट करने के लिए

JEETJAWAN
17-05-2012, 02:56 PM
हर पल को खुलकर जीओ
हर मुसिबत का हस कर सामना करो
क्योकि गुजरने वाला पल कभी लौट कर नही आता
तो फिर क्यो हम अपने जीवन को यु बर्बाद कर रहे है


एक बात बिलकुल सच मानिए की जीवन में मृत्यु से ज्यादा सुनिश्चित कुछ भी नहीं हे मृत्यु ही सर्वाधिक सुनिश्चित हे जीवन मिला हे तो जीवन में धन मिले न मिले कोई ज़रूरी नहीं हे लेकिन मृत्यु मिलेगी ये सुनिश्चित हे जीवन में पद पैसा प्रतिष्ठा मिले कोई ज़रूरी नहीं लेकिन मृत्यु अवश्य मिलती हे आदमी पैदा हुआ पढ़ लिख पाए न पाए कोई ज़रूरी नहीं पर मृत्यु को अवश्य पायेगा जब मृत्यु निश्चित हे तो उससे भय खाने की ज़रूरत भी नहीं हे मृत्यु अमृत हे उसी से जीवन का प्रादुर्भाव होता हे मृत्यु एक मंदिर हे जिसमे जीवन का देवता विराजित हे

जय जी आपने बहुत अच्*छे सुत्र का निर्माण किया है