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View Full Version : श्रीलाल शुक्ल जी का चले जाना



encee
29-10-2011, 05:04 AM
हिंदी साहित्य को नया आयाम देने वाले श्रीलाल जी को हार्दिक श्रद्धांजलि. यद्यपि उनकी कृति 'राग दरबारी' को अनेक पूर्वाग्रहों के कारण क्लासिक नहीं माना गया था. परंतु पिछले ४० वर्षों में पाठकों ने राग दरबारी को हिंदी साहित्य का सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला उपन्यास बना कर यह सिद्ध कर दिया कि उपन्यास की सफलता समीक्षा की मोहताज नहीं होती है. आज हमें गर्व है कि हमारे पास एक ऐसी कृति है जिसकी प्रासंगिकता समय के साथ और पैनी होती जा रही है.

KHIL@DI_720
29-10-2011, 09:01 AM
राग दरबारी मैंने पहली बार तब पढ़ी थी , जब मैं क्लास ११ में था | तब मेरी समझ में इस उपन्यास का महत्व उतना नहीं आया | पर २ साल पहले मैंने इसे फिर पढ़ा और तब मैंने महसूस किया की इस उपन्यास की प्रासंगिकता भारत में कभी कम नहीं होगी | सिर्फ एक गाँव को प्रतिनिधि बनाकर जिस तरह से पुरे भारतीय समाज का चित्रण श्रीलाल जी ने किया है , वह बेमिसाल है | मेरी तरफ से भी उस महान लेखक को श्रधांजलि |

shaukeen
31-10-2011, 12:37 AM
राग दरबारी मैंने पहली बार तब पढ़ी थी , जब मैं क्लास ११ में था | तब मेरी समझ में इस उपन्यास का महत्व उतना नहीं आया | पर २ साल पहले मैंने इसे फिर पढ़ा और तब मैंने महसूस किया की इस उपन्यास की प्रासंगिकता भारत में कभी कम नहीं होगी | सिर्फ एक गाँव को प्रतिनिधि बनाकर जिस तरह से पुरे भारतीय समाज का चित्रण श्रीलाल जी ने किया है , वह बेमिसाल है | मेरी तरफ से भी उस महान लेखक को श्रधांजलि |


आप का कहना बिलकुल सही है कि इस उपन्यास की प्रासंगिकता भारत में कभी कम नहीं होगी. जब जब भी आप इसे पढेंगे, हमेशा एक नयापन लगेगा. यह एक ऐसा thought provoking उपन्यास है जो आपको न सिर्फ सोचने के लिए मजबूर करता है वरन आपकी सोच को बदलने की भी सामर्थ्य रखता है.