View Full Version : हास्य-काव्य
bawa009
22-01-2011, 12:35 PM
दोस्तों मैं यह सूत्र हास्य-काव्य के लिए शुरू कर रहा हूँ आप सब से अनुरोध है की कृपया कर के काव्य का आनंद लें और अगर हो सके तो आप भी पोस्ट करें और अगर पसंद आये तो thanks कर के या reputation दे कर मेरा हौसला बढाएं
दोस्तों इन मैं से कोई भी कविता मेरी नहीं है मैंने यह सब इन्टरनेट से डाउनलोड की है
अगर किस्सी को कोई आपत्ति हो तो उस काव्य को हटाया जा सकता है
bawa009
22-01-2011, 12:36 PM
आराम करो
एक मित्र मिले, बोले, "लाला, तुम किस चक्की का खाते हो?
इस डेढ़ छटांक के राशन में भी तोंद बढ़ाए जाते हो।
क्या रक्खा माँस बढ़ाने में, मनहूस, अक्ल से काम करो।
संक्रान्ति-काल की बेला है, मर मिटो, जगत में नाम करो।"
हम बोले, "रहने दो लेक्चर, पुरुषों को मत बदनाम करो।
इस दौड़-धूप में क्या रक्खा, आराम करो, आराम करो।
आराम ज़िन्दगी की कुंजी, इससे न तपेदिक होती है।
आराम सुधा की एक बूंद, तन का दुबलापन खोती है।
आराम शब्द में 'राम' छिपा जो भव-बंधन को खोता है।
आराम शब्द का ज्ञाता तो विरला ही योगी होता है।
इसलिए तुम्हें समझाता हूँ, मेरे अनुभव से काम करो।
ये जीवन, यौवन क्षणभंगुर, आराम करो, आराम करो।
यदि करना ही कुछ पड़ जाए तो अधिक न तुम उत्पात करो।
अपने घर में बैठे-बैठे बस लंबी-लंबी बात करो।
करने-धरने में क्या रक्खा जो रक्खा बात बनाने में।
जो ओठ हिलाने में रस है, वह कभी न हाथ हिलाने में।
तुम मुझसे पूछो बतलाऊँ, है मज़ा मूर्ख कहलाने में।
जीवन-जागृति में क्या रक्खा जो रक्खा है सो जाने में।
मैं यही सोचकर पास अक्ल के, कम ही जाया करता हूँ।
जो बुद्धिमान जन होते हैं, उनसे कतराया करता हूँ।
दीए जलने के पहले ही घर में आ जाया करता हूँ।
जो मिलता है, खा लेता हूँ, चुपके सो जाया करता हूँ।
मेरी गीता में लिखा हुआ, सच्चे योगी जो होते हैं,
वे कम-से-कम बारह घंटे तो बेफ़िक्री से सोते हैं।
अदवायन खिंची खाट में जो पड़ते ही आनंद आता है।
वह सात स्वर्ग, अपवर्ग, मोक्ष से भी ऊँचा उठ जाता है।
जब 'सुख की नींद' कढ़ा तकिया, इस सर के नीचे आता है,
तो सच कहता हूँ इस सर में, इंजन जैसा लग जाता है।
मैं मेल ट्रेन हो जाता हूँ, बुद्धि भी फक-फक करती है।
भावों का रश हो जाता है, कविता सब उमड़ी पड़ती है।
मैं औरों की तो नहीं, बात पहले अपनी ही लेता हूँ।
मैं पड़ा खाट पर बूटों को ऊँटों की उपमा देता हूँ।
मैं खटरागी हूँ मुझको तो खटिया में गीत फूटते हैं।
छत की कड़ियाँ गिनते-गिनते छंदों के बंध टूटते हैं।
मैं इसीलिए तो कहता हूँ मेरे अनुभव से काम करो।
यह खाट बिछा लो आँगन में, लेटो, बैठो, आराम करो।
- गोपालप्रसाद व्यास
bawa009
22-01-2011, 12:44 PM
घूस माहात्म्य
कभी घूस खाई नहीं, किया न भ्रष्टाचार
ऐसे भोंदू जीव को बार-बार धिक्कार
बार-बार धिक्कार, व्यर्थ है वह व्यापारी
माल तोलते समय न जिसने डंडी मारी
कहँ 'काका', क्या नाम पायेगा ऐसा बंदा
जिसने किसी संस्था का, न पचाया चंदा
bawa009
22-01-2011, 12:56 PM
ये चीन बड़ा कमीन (http://chirkutdas.wordpress.com/2010/12/17/%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%9a%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%ac%e0%a5%9c%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a8/)
ये चीन बड़ा कमीन, इसे मारो तमाचे तीन.
इसकी नीयत में है खोट, पीठ के पीछे मारे चोट,
काबू में इसके हैं देखो, १३० करोड़ रोबोट,
इसके लोभ के घेरे में, पडोसी देशों की जमीन.
इसे चलाते तानाशाह, जहरीली जिनकी निगाह,
इनके जुल्मों के नीचे, चीनी जनता रही कराह,
इनका बस चले तो लेले सबकी आज़ादी छीन.
बेचें सबको सस्ता माल, गुणवत्ता में जो कंगाल,
घटिया दूध, खिलोने, गैजेट, बन गए जी का जंजाल,
इसको जनहित समझाना जैसे भैंस के आगे बीन.
चीन दुनिया का एक खतरा, समझो इसका हर पैंतरा,
क्रूरता इसका रोम रोम, धोखा इसका कतरा कतरा,
भारत ने भी धोखा खाया, जब इसका किया यकीन.
bawa009
22-01-2011, 01:02 PM
कुत्ता पला खुजली वाला
करुणानिधि ने कुत्ता पाला, खुजली वाला,
उसको दिल्ली ले के आये, मनमोहन लाला.
कुत्ते ने वो गंद मचाया, किया हर जगह गू,
पूरे भारत में फ़ैल गयी उसकी बदबू.
वहीं बैठा था एक स्वामी ध्यान लगाए,
इस बदबू ने उसके भी नथुने फढ़काए.
उसने मनमोहन को बोला इसे भगाओ,
इससे कहीं प्लेग न फैले देश बचाओ.
मनमोहन तो भैय्या कुर्सी के ऐसे पिस्सू ठहरे,
स्वामी के आगे बन गए जैसे गूंगे-बहरे.
स्वामी तब गुस्से में हो गए दुर्वासा,
मनमोहन की बत्ती गुल, फेंका ऐसा पांसा.
कलमाड़ी-राजा ने देश जैसा लूटा घनघोर,
हर्षद-तेलगी इनके आगे लगे चिंदी-चोर.
भारत चाहे कितनी भी कर ले तरक्की,
जब तक ये कीड़े जिन्दा, ज़लालत पक्की.
bawa009
22-01-2011, 01:06 PM
आदर्श नगर की भ्रष्ट डगर,
मुंबई का एक और गटर.
देश बेशक जाए पाताल में,
या फिर शत्रु के जाल में,
तीनो तीन से कदम ताल में,
भेडिये चले भेड़-खाल में,
नेता, अफसर, और कमांडर.
सीमा पर जो सिपाही सच्चे,
ठोकरें खाएं उनके बच्चे,
देश-हित में मरते मूरख,
विधवा उनकी झेले सौ दुःख,
आसरे को भटके दर-दर.
सिपाही मरने जाए कारगिल,
कमांडर कब्जायें तीसवीं मंजिल,
जिनका चरित्र था इतना उज्जवल,
कितना गिर गए हैं ये जनरल,
क्या होगा सेना पर असर.
चवन, छगन, देशमुख, शिंदे,
सारे इस नाली के गंदे,
लोभ में इतने हो गए अंधे,
बन गए शैतान के बन्दे,
निकृष्ट कर्म, आत्मा जर्जर.
अंधी लूट की बन्दर-बाँट,
फिर युवराज के तलुवे चाट,
फिर मैडम का गू खावें,
फुर्सत कहाँ जो राज चलावें,
बेबस जनता फोड़े अपना सर.
आदर्श नगर की भ्रष्ट डगर,
मुंबई का एक और गटर.
bawa009
22-01-2011, 01:59 PM
दोस्तों मुझे आप के जबाब की प्रतीक्षा है
bawa009
22-01-2011, 02:00 PM
जैसे जैसे लोगों के चेहरे से
नकाब हट रहे हैं,
उनकी खतरनाक असलियत से
ईमानदारी के बादल छंट रहे हैं।
कमबख्त,
भरोसा भी क्या चीज है,
जिसने निभाया वह तो नाचीज है,
मगर धोखेबाजों के दिन
कारागृह की जगह महलों में कट रहे हैं।
bawa009
22-01-2011, 02:00 PM
हिन्दी दिवस पर
उन्होंने हिन्दी का महत्व बताया,
अंग्रेजी की गुलामी से मुक्त होने का
अपना संकल्प अंग्रेजी में जताया।
bawa009
22-01-2011, 02:53 PM
ipl
हज़ारों दलाल, सटोरिये, नचनिये,
मीडिया और विज्ञापन की दुनिया के बनिये,
तीस-चालीस खिलाड़ी-नुमा मवाली,
सौ करोड़ मूर्ख, बजाने को ताली.
bawa009
23-01-2011, 12:39 AM
गधे नें सीख लिया कंप्यूटर
बैठा रहता दिन-दिन भर
न वो अपने काम को जाता
न ही बच्चों से बतियाता
करता रहता दिन भर चैट
दोस्त बन गए उसके रैट
आया जीवन में बदलाव
खाने लगा गधा भी भाव
कुछ दिन तक तो चली कहानी
खत्म हो गया राशन पानी
गधी नें बेलन एक उठाया
गधे के जा सर पर घुमाया
भागा अपनी बचा के जान
पहुंचा धोबी की दुकान
दिन भर बोझा खूब उठाया
शाम को घर जब वापिस आया
चूर हो गया गधा थक कर
सोया खूब पेट भर कर
भूल गया उसको कंप्यूटर
लौट के बुद्धु आया घर
bawa009
23-01-2011, 12:42 AM
33 views no reply
कोई बात नहीं
जब तक आप की अच्छी या बुरी प्रतिक्रिया नहीं आती मैं यह सूत्र जारी रखूँगा
bawa009
23-01-2011, 10:20 PM
सर्दी आयी सर्दी आयी
नहाने की हुई छुट्टी भाई, सर्दी आयी …
पड़ोस में जो रहते हैं,
वो मास्टर जी कहते हैं,
पानी बहुत कीमती है,
मैंने बूँद बूँद बचाई, सर्दी आयी …
किसी को भी नहीं इल्म है,
नहाना कितना बड़ा जुल्म है,
इस से कितनी हानि होती,
जिसकी नहीं कोई भरपाई, सर्दी आयी …
मैं तो पहले से ही पतला,
नहा के हो गया और भी दुबला,
धुल जाती खाल पे मैंने
मेल की जो परत चढ़ाई, सर्दी आयी …
काश अगर कुछ ऐसा होता,
जग में ये पानी न होता,
न हर महीने दोस्त ये कहते,
अब तो नहा ले भाई, सर्दी आयी …
bawa009
23-01-2011, 10:25 PM
सृजन शीलता का कीड़ा, मुझे दे रहा पीड़ा,
कविता लिखने का मैंने उठा लिया बीड़ा.
मन में भाव नहीं, देह में घाव नहीं,
छंद लय की समझ, मुझे रत्ती पाव नहीं.
स्मृति से फरियाद करूं, क्या भूलूँ क्या याद करूं,
भाव चिंतन, छंद निर्माण, क्या पहले क्या बाद करूं.
गद्य में लिखूं विचार, सुधारूं उनको बार बार,
फिर ढालूँ छंद में, तब हो कविता तैयार.
पर लाऊं कहाँ से कथ्य सखे, कथ्य जो हो सत्य सखे !
सत्य है अपथ्य किन्तु, पथ्य है असत्य सखे !
ये क्या अनर्गल प्रलाप, कैसी है ये लाचारी,
शब्दों के दावानल में, झुलस गयी कविता बेचारी.
bawa009
23-01-2011, 10:26 PM
ये मानने में देरी नहीं है, ये कविता मेरी नहीं है.
नहीं मालूम ये किसने लिखी, मुझे सामने पड़ी दिखी.
पहले मन में हुआ संकोच, फिर उठा लिया कुछ सोच.
नहीं काबू में रही जिज्ञासा, खोल इसे पढ़ा थोडा सा __
“नारी तुम केवल अद्धा हो, नशा देती हो पल में,
कहीं मिलती हो थैली में, कहीं मिलती हो बोतल में.”
इतना उनको हुआ अवसाद, रो पड़े जयशंकर प्रसाद.
किसने बनाई इनती भोंडी, उनके काव्य की पैरोडी.
लगा झटका इतना तगड़ा, इस से आगे नहीं पढ़ा.
तत्काल निर्णय एक लिया, उसे वहीं फाड़ के फेंक दिया.
पता नहीं क्या लिखा था शेष, जो पढ़ा, आपको किया है पेश,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
underground
23-01-2011, 10:32 PM
bahut ache surprise to see kavitas
bawa009
23-01-2011, 10:52 PM
bahut ache surprise to see kavitas
मैं आप को तहे दिल से धन्यवाद देता हूँ जबाब करने के लिए
पर मुझे ज्यादा ख़ुशी होती अगर आप हिंदी में लिखते
आप यह लिंक इस्तेमाल करैं हिंदी मैं लिखने के लिए
http://www.google.com/transliterate/indic
bawa009
23-01-2011, 10:57 PM
underground ji
अगर काम अच्छा लगे तो हर प्रविष्टी के नीचे जो स्टार icon है उसका इस्तेमाल करके reputation दें
bawa009
23-01-2011, 10:59 PM
जुकाम ने किया नाकाम.
माथे में जकडन, पीठ में अकडन,
बदन में हरारत, वाइरस की शरारत,
बैचेनी ही बैचेनी, पल भर न आराम,
जुकाम ने किया नाकाम.
गले में बलगम, नाला बहे नाक में,
बोलते बोलते, खांस दूं छपाक से,
लोग बाग़ करें, दूर से सलाम,
जुकाम ने किया नाकाम.
कहें डाक्टरी मिजाज, है जुकाम ला-इलाज,
चार दिन पले, फिर खुद ही टले,
उन चार दिनों में, हो जीना हराम,
जुकाम ने किया नाकाम.
bawa009
24-01-2011, 06:38 PM
महंगाई पर लिखें या
बिज़ली कटौती पर
कभी समझ में नहीं आता है,
अखबार में पढ़ते हैं विकास दर
बढ़ने के आसार
शायद महंगाई बढ़ाती होगी उसके आंकड़ें
मगर घटती बिज़ली देखकर
पुराने अंधेरों की तरफ
बढ़ता यह देश नज़र आता है।
bawa009
26-01-2011, 12:06 AM
टीवी चैनल के कर्मचारी ने
अपने प्रबंध निदेशक से पूछा
‘सर, आपका क्या विचार है
अयोध्या में राम जन्म भूमि पर
मंदिर बन पायेगा
यह मसला कभी सुलझ पायेगा।’
सुनकर प्रबंध निदेशक ने कहा
‘अपनी खोपड़ी पर ज्यादा जोर न डालो
जब तक अयोध्या में राम मंदिर नहीं बनेगा,
तभी तक अपने चैनल का तंबू बिना मेहनत के तनेगा,
बहस में ढेर सारा समय पास हो जाता है,
जब खामोशी हो तब भी
सुरक्षा में सेंध के नाम पर
सनसनी का प्रसंग सामने आता है,
अपना राम जी से इतना ही नाता है,
नाम लेने से फायदे ही फायदे हैं
यह समझ में आता है,
अपना चैनल जब भी राम का नाम लेता है
विज्ञापन भगवान छप्पड़ फाड़ कर देता है,
अगर बन जायेगा
तो फिर ऐसा मुद्दा हाथ नहीं आयेगा
कभी हम किसी राम मंदिर नहीं गये
पर राम का नाम लेना अब बहुत भाता है,
क्योंकि तब चैनल सफलता की सीढ़िया चढ़ जाता है,
इसलिये तुम भी राम राम जपते रहो,
इस नौकरी में अपनी रोटी तपते रहो,
अयोध्या में राम मंदिर बन जायेगा
तो उनके भक्तों का ध्यान वहीं होगा
तब हमारा चैनल ज़मीन पर गिर जायेगा।
bawa009
26-01-2011, 05:57 PM
अरे भाई reply करने में क्यों शर्मा रहे हो
bawa009
26-01-2011, 05:57 PM
अगर सूत्र पसंद नहीं है तो मैं यह सूत्र बंद कर देता हूँ
sanjeetspice
29-01-2011, 03:52 PM
बहित ही अच्छा सूत्र है भाई बहित ही अच्छा लिखा है
bawa009
30-01-2011, 09:36 PM
बहित ही अच्छा सूत्र है भाई बहित ही अच्छा लिखा है
धन्यवाद आप का जबाब देने के लिए
Rascal
02-02-2011, 11:08 PM
ipl
हज़ारों दलाल, सटोरिये, नचनिये,
मीडिया और विज्ञापन की दुनिया के बनिये,
तीस-चालीस खिलाड़ी-नुमा मवाली,
सौ करोड़ मूर्ख, बजाने को ताली.
satya bvachan
bawa009
07-02-2011, 11:52 PM
कत्ल के पेशेवरों ने ले ली
शहर भर की पहरेदारी,
तय किया पुराने हमपेशा सफेदपोशों को
खंजर घौंपने की छूट के साथ
अपनी कमाई में देंगे हिस्सेदारी।
bawa009
07-02-2011, 11:53 PM
खज़ाने की चाब़ी ठगों के हाथ में देकर
मालिक अब बेफिक्र हो गये हैं,
हेराफेरी में हाथ काले नहीं होंगे
मिलेगा कमाई से पूरा हिस्सा
यह देखकर
सफेदपोश चैन की नींद सो गये हैं।
bawa009
07-02-2011, 11:54 PM
अखबार आज का ही है
खबरें ऐसा लगता है पहले भी पढ़ी हैं
आज भी पढ़ रहे हैं
इसलिये कोई ताज़ा खबर नहीं लगती। ट्रेक्टर की ट्रक से
या स्कूटर की बस से भिड़ंत
कुछ जिंदगियों का हुआ अंत
यह कल भी पढ़ा था
आज भी पढ़ रहे हैं
इसलिये कोई ताज़ा खबर नहीं लगती।
भाई ने भाई ने
पुत्र ने पिता को
जीजा ने साले को
कहीं मार दिया
ऐसी खबरें भी पिछले दिनों पढ़ चुके
आज भी पढ़ रहे हैं
इसलिये कोई ताज़ा खबर नहीं लगती।
कहीं सोना तो
कहीं रुपया
कहीं वाहन लुटा
लगता है पहले भी कहीं पढ़ा है
आज भी पढ़ रहे हैं
इसलिये कोई ताज़ा खबर नहीं लगती।
रंगे हाथ भ्रष्टाचार करते पकड़े गये
कुछ बाइज्जत बरी हो गये
कुछ की जांच जारी है
पहले भी ऐसी खबरें पढ़ी
आज भी पढ़ रहे हैं
इसलिये कोई ताज़ा खबर नहीं लगती।
अखबार रोज आता है
तारीख बदली है
पर तय खबरें रोज दिखती हैं
ऐसा लगता है पहले भी भी पढ़ी हैं
इसलिये कोई ताज़ा खबर नहीं लगती।
———–
कवि,लेखक -दीपक भारतदीप, Gwalior
bawa009
16-02-2011, 11:49 PM
Incredible India , Incredible India !
महंगे हुए कद्दू, गायब हुई भिन्डियाँ.
Incredible India , Incredible India !
प्याज के चक्कर में पड़े इनकम टैक्स के छापे,
खरीद लाई थी एक किलो, वसुंधरा राजे सिंधिया.
Incredible India , Incredible India !
कल मिली तनखा तो लाया सौ ग्राम आलू,
गायब हुआ चैन उड़ गई आँखों से निंदिया.
Incredible India , Incredible India !
तिजोरी में राखी थी एक अदरक की गाँठ,
खबर लगी तो पीछे पड़ गयी मीडिया.
Incredible India , Incredible India !
musium में रखा देखा, पन्ने से महंगा परमल,
सपने में परमल से, मन खेले डांडिया.
Incredible India , Incredible India !
ओलम्पिक में अब मिलते, सोने से महंगे नीबू,
अमरीका चीन लायें भर भर के अपनी हंडिया.
Incredible India , Incredible India !
bawa009
16-02-2011, 11:52 PM
दांत दर्द दांत दर्द, सूजा गाल चेहरा सर्द.
जब दर्द हो दांत में, पचता नहीं कुछ आंत में,
यहाँ गिरे वहां गिरे, घर भर में कूदे फिरे,
क्या औरत, क्या मर्द.
दांत दर्द दांत दर्द …
दर्द दांत का अनोखा, अन्दर से खाली खोखा,
लुप लुप हो जब दाढ़ में, दुनिया जाये भाढ़ में,
आँखें नम, आंसू सर्द.
दांत दर्द, दांत दर्द …
दांत दर्द में सब बेजान, क्या खड़क सिंह क्या तुर्रम खान,
एक दांत की नींव क्या टीसी, हिल गई सारी बत्तीसी,
दांत दर्द है दहशतगर्द.
दांत दर्द, दांत दर्द …
bawa009
18-02-2011, 11:44 PM
अरे भाई मच्छर करते हैं परेशान
न जागते में चैन न सोते में आराम.
अरे भाई …
कल रात मजे में सो रहा था,
सुनहरे सपनो में खो रहा था,
तभी सुनी एक मीठी तान,
खड़े हो गए मेरे कान,
सुर कोई सुन्दर गुनगुना रहा था,
जागा तो देखा – मच्छर भुन भुना रहा था.
हुआ एक मधुर स्वप्न नाकाम.
अरे भाई …
कल दिन में आँगन में बैठा था,
हाथ में बर्फी और पैठा था,
बड़े मजे में खा रहा था,
नगमा कोई गुन गुना रहा था,
लगा जोर से पडा एक चांटा,
गाल पर मच्छर ने काटा.
खुजाते खुजाते हो गई शाम.
अरे भाई …
एक दिन ख्यालो में खोया हुआ था,
न जागा न सोया हुआ था,
कर रहा था कुछ चिंतन,
बूझ रहा था रहस्य चिरंतन,
तभी शूल चुभा और हुआ हंगामा,
यूँ उछला फट गया पायजामा.
लगा मेरी कल्पना में फच्चर,
क्या बताऊँ कहाँ काट गया मच्छर.
औंधा लेट कर लगाईं बाम.
अरे भाई मच्छर करते हैं परेशान.
bawa009
28-02-2011, 02:37 AM
जनतंत्र में सबकी नीयत … (http://chirkutdas.wordpress.com/2010/07/19/%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%a4%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a 5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%ac%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%af%e0%a4%a4/)
किसी नेता के खजाने से थैली निकली है,
देखो बाहर कहीं कोई रैली निकली है.
गुंडे, लुच्चे, बदमाश, निखट्टू होते हैं,
अब रैली में भाड़े के टट्टू होते हैं.
आना जाना खाना फ्री, सौ रुपैय्या रोज,
लड़ो, झगड़ो, चिल्लाओ, जितनी करो मौज.
रास्ता रोको बसें जलाओ, और दुकानें फूंको,
करो लूट-खसोट, लुच्चई का कोई न मौका चूको.
खुल जायेगी किस्मत जो पुलीस ने लाठी मारी,
निकम्मी सरकार से मिलेगा कम्पेंसशन भारी.
जनतंत्र में सबकी नीयत मैली निकली है.
देखो बाहर कहीं कोई रैली निकली है.
Pooja1990 QUEEN
28-02-2011, 05:35 PM
ha ha ha .more post
bawa009
28-02-2011, 10:12 PM
ha ha ha .more post
चलो किसी ने तो जबाब दिया
धन्यवाद आप का pooja1990 Queen
Ranveer
28-02-2011, 11:55 PM
सूत्र अच्छा है......................मजेदार
bawa009
01-03-2011, 12:54 AM
हकीकत समझो या फसाना
अपना समझो या बेगाना
हमारा आपका है रिश्ता पुराना
इसलिये फर्ज था आपको बताना
ठंड शुरू हो गयी है....
प्लीज रोज मत नहाना
bawa009
01-03-2011, 12:55 AM
तुझे पाने की हसरत लिए, हमें एक जमाना हो गया !
नयी नयी शायरी, करते तेरे पीछे,
देख मैं शायर कितना, पुराना हो गया !
मरज में न फरक, तोहफों में खरच अलग !
इलाज में खाली सारा, अपना खज़ाना हो गया !
दिल दर्द से भरा, और जेबें खाली !
ग़म ही इन दिनों, अपना खाना हो गया !
मुद्दतें हो गयी , रोग जाता नहीं दिखता,
अस्पताल ही अब अपना, ठिकाना हो गया !
तू भी तो बाज़ आ कभी , इश्कियापन्ती से 'मजाल'
पागल भी देख तुझे, कब का सयाना हो गया !
bawa009
01-03-2011, 12:55 AM
एक आप हो कितने अच्छे हो!
एक आप हो कि कितने सुंदर हो!
एक आप हो कि कितने सच्चे हो!
और एक हम है कि झूठ पर झूठ बोले जा रहे है!
bawa009
01-03-2011, 12:56 AM
दिल का दर्द दिल तोड़ने वाले क्या जाने!
प्यार के रिवाजों को ज़माना क्या जाने!
होती है कितनी तकलीफ लड़की पटाने में!
यह घर पर बैठा लड़की का बाप क्या जाने!
bawa009
03-03-2011, 01:20 AM
हाय राम जयराम (http://chirkutdas.wordpress.com/2010/05/23/%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%af-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%9c%e0%a4%af%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae/)
चीन के चूतड चाटे भारत का नेता
किसी के कान जूँ न रेंगे, हाय राम जय राम.
चीन बोले मेरा अरुणाचल, मैं लेता
नेता बोले सिक्किम भी देंगे, हाय राम जय राम.
चीन भारत को दो कौड़ी के भाव न देता
भारत बोले हम मुफ्त बिकेंगे, हाय राम जय राम.
माओ वादियों को हथियार भी चीन ही देता
हम उनके हाथों मरते रहेंगे, हाय राम जय राम.
सन ६२ में भारत हारा, था चीन विजेता
भारत बोले हम सबक न लेंगे, हाय राम जय राम.
जय राम रमेश बीजिंग जा के न छोड़े मौके,
चीन के तलवे चाटे और भारत पर भौंके.
मंत्रिमंडल में जब हो ऐसे देश द्रोही,
दोष देंगे सब दब्बू पी. एम. को ही.
इसको सज्जन कहने में अब होती पीड़ा,
कितना लाचार दिखता ये कुर्सी का कीड़ा.
सीमा पर नित कितने ही सैनिक मरते,
मुंबई में आतंकियों से भी लड़ते,
छतीस गढ़ के बीहड़ में भी वो ही मरते,
कश्मीर से कोहिमा तक वो ही मरते,
सत्ता के कुत्तों की वो रक्षा करते,
संसद पर हमले में भी वो ही मरते.
हैरान बैठा आम आदमी ये सोचा करता,
क्यों कभी न किसी हमले में नेता मरता.
सैनिक खाए बन्दूक की गोली,
नेता खाए ताकत की गोली,
अकल की अंधी जनता भोली,
खाए बैठी भांग की गोली.
bawa009
03-03-2011, 03:31 AM
अप्रेजल से संम्बधित विपीन खनडूरी कि ये कविता बहुत ही अच्छी लगी
अप्रेजल की दुखद कहानी (http://girishsingh.blogspot.com/2010/08/blog-post_06.html)
अप्रेजल के नाम पर एक लम्बी आह भरते है,
चलीये अब हम इस दुखद कहानी कि शुरुआत करते है,
हमेशा कि तरह 10 बजे ठुमकते हुए आफिस आया,
11 बजे नाश्ता किया और बारह बजे तक मेल पढ पाया,
हमेशा कि तरह आज भी मुझे आलस आ रहा था,
और मेरा PM मुझे तिरछी निगाहो से देख देख गुस्सा रहा था,
मै बडे कन्सनट्रेसन के साथ एक मेल पढ रहा था,
तभी देखा मेरे PM के नाम का नया मेल कोने मे से झाक रहा था,
फिर कोई ट्रेनिग करनी होगी, ये क्या बकवास है,
क्या जबाब दू कि, मेरे मेल बाक्स का उपवास है,
मेने आखे बंद कि और 10 बार ॐ ॐ बोला
और प्रणाम करते हुये मैने वो मेल खोला,
PM के इस मेल मैं एक अजीब सा सुकून और भोलापन है
लिखा है भाइयों अप्रेजल पत्र आ गएअब तो आमने सामने कि बात है।
मॅन मैं ऐसे बुरे बुरे ख्याल आ रहे थे
ऊपर से कुछ लोग मेरे डि अप्रेजल की गन्दी अफवाह उड़ा रहे थे
PM को पत्र लाते देख हर कोई उसे देखता जाता है
जैसे मलिका के किसी नए गाने को देखा जाता है
आखिर वो वक़्त आयाPM ने एक एक करके सब को बुलाया
जो भी अंदर जाता हँसता हुआ जाता
जो बहार आतामुरझाया हुआ आता
बहार आ कर इंसान संभल भी नहीं पता है
की कितना हुआ कितना मीला हर कोई उसपे टूट जाता है
किसी एक को अप्रेजल मैं 2000 रुपये मिले थेमैं उसकी हंसी उड़ा रहा था
तभी मैंने देखा मेरा PM इशारे से मुझे अंदर बुला रहा था
मैं आत्मविश्वास से उठा और आगे कदम बढाया
तभी मेरी बेलट का बकल टूट के नीकल आया
मेरी हालत तो अभी से ही बुरी हो गयी
साला इज्ज़त उतरना तो यही से शुरू हो गयी
मैं अंदर पहुंचा और PM ने मुझे बिठाया
उसने पत्र पढा और वो हंसी रोक न पाया
वोह इतना हंसा की उसके आंसू आ गए
क्या मेरे अप्रेजल के अंक इतने भा गए
जैसे ही उसने अप्रेजल पत्र मेरी तरफ बढाया
मेरी आँखों के आगे घनघोर अँधेरा छाया
मुझे लगा जैसे मेरे दिल की दीवार को किसी ने गोबर से पोता है
अरे यार बीस रुपये ये भी कोई बढोतरी का इनाम होता है
ये साप्टवेयर इन्ड्स्ट्री है अखाडा नहीं है
ये वेतन बढोतरी है रोहनी आने -जाने का भाडा नहीं है
मेरे चारों तरफ कलि घटा छायी तभी मेरे PM की मोहक आवाज़ आई
तुम सोच रहे होगे के company mgmt का दिमाग फिर गया है
पर बेटा हम क्या करें डालर का भाव 2 रुपये जो गिर गया है
पर फिर भी मुझे लगता है ये पत्र गलत है
मुझे तो लगता है ये प्रिन्टिग की गलती है
तुम HR मैं जाओ और ये पता करके आओ
भाई HR मैं जाने के लिए तैयार होना पड़ता है
वही तो ऐसी जगह है जहाँ सुंदर लड़कियों से पला पड़ता है
ये क्या जहाँ रेनुका बैठी है आज वहां बैठा आपताब है
मैं समझ गया बेटा आज अपना किस्मत ही ख़राब है
उसने मेरा पत्र खोला और खुश हो के बोला
वो बोला श्रीमान आप के लिए खुशखबरी है
आप के पत्र ने प्रिन्टिग की ही गलती है
मैंने कहा मित्र अब देर न लगाएं
और मुझे मेरा सही सही हिसाब किताब बताएं
वो बोला माफ करे श्रीमान ये एक्सीडेंट है
बीस रुपये नहीं दो रुपये आप कि बढोतरी है
मैं क्या करूं आप को ये बताते हुए मेरा दिल रो रहा है
पर क्या करें डालर का भाव भी तो कम हो रहा है
मैं बस वहाँ खडा था कुछ समझ नहीं आ रहा था
मुझसे ज्यादा बढोतरी तो चपरासी वाला पा रहा था
मैंने खुद को संभालाखुद को उठाया
मैं लौटा और सीधे PM के पास आया
मैं सीधा उसके केबिन गया और दरवाज़ा खोला
इस से पहले की वो बोले मैं ही उस से बोला
महाशय ये पैसे वापिस ले लीजिये बात करना फीजूल है
मैं गरीब हूँ पर भीख नहीं लेता ये मेरा उसूल है|
सभार : विपीन खनडूरी
bawa009
03-03-2011, 10:39 PM
नकल के लिए भी अकल चाहिए
जोकर को भी कोई शकल चाहिए
समझने को तैयार बैठी है अवाम
वृत्तांत मगर पूरी सकल चाहिए
बात को बिगाड़ें नहीं भीड़ बढ़ाकर
मुहब्बत में मामला एकल चाहिए
असल पूरी तरह बेअसर है इधर
यहाँ पर दरअसल नकल चाहिए
डिग्रियाँ चिपका ली हैं रवि ने भी
इल्म के लिए परंतु अकल चाहिए
---
इसे प्रकाशित किया Raviratlami
bawa009
05-03-2011, 05:55 PM
भोपाल भोपाल जय गोपाल (http://chirkutdas.wordpress.com/2010/06/10/%e0%a4%ad%e0%a5%8b%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ad%e0%a5%8b%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%9c%e0%a4%af-%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b2/)
भोपाल भोपाल जय गोपाल.
२५ साल पहले यहाँ बरसा था काल,
जीते जागते लोग बन गए कंकाल,
भोपाल भोपाल जय गोपाल.
कुछ घंटों में था भारत के बाहर,
इतनी तेज हो गयी एंडरसन की चाल.
कोई क़ानून न पहुँच पाया उस तक,
सत्ता के कुत्ते बन गए उसकी ढाल.
ले के खड़े कंपनसेशन का कटोरा,
अमरीका से बोले प्रभु टुकड़ा तो डाल.
जुट गयी सब तरफ दलालों की भीड़,
सब साले नोचें भूखे-नंगो की खाल.
यूनियन कार्बाइड तो डूब गयी बिक गयी,
कितने बिचोलिये हो गए मालामाल.
अपंगों की एक पीढ़ी गुजर गयी,
इतनी सुस्त पड़ गयी न्याय की चाल.
भोपाल ही नहीं हुआ था सिखों का नर-संहार,
बड़ा ही भयानक था सन ८४ का साल.
मौज कर रहे उन दंगो के मुजरिम,
दयनीय है दंगों की जांच का भी हाल.
हम बेशर्म भारतीय कभी न जागना चाहें,
समस्या हो चाहे कितनी विकराल.
वो हाथ अपना पिछवाडा खुजलायें,
जिन हाथों में होनी चाहिए थी मशाल.
बुझी बीड़ी जैसी अपनी युवा पीढी,
सामाजिक सरोकार को समझें जी का जंजाल.
चलो पूरा हो गया बौद्धिक विलाप का कोटा,
गर्म हो गयी दारु, थोड़ी बरफ तो डाल.
bawa009
03-11-2011, 09:55 PM
ताक धिना धिन धिन्ना: हास्य कविता
(चवन्नी गई, अठन्नी भी जाएगी, रुपए की क्या औकात!)
बचपन में
रुपया देकर चीज़ ख़रीदी
बाकी बची अठन्नी
आठ आना दे चीज़ ख़रीदी
बाकी बची चवन्नी
चार आना दे चीज़ ख़रीदी
बाकी बची दुअन्नी
दो आना दे चीज़ ख़रीदी
बाकी बची इकन्नी
एक आना दे चीज़ ख़रीदी
बाकी बचा अधन्ना
उसमें भी
कुछ चीज़ आ गई
ताक धिना धिन धिन्ना।
इतनी चीज़ें मिलीं कि भैया
ठाठ हो गए ठेठ
अकड़े-अकड़े घूमा करते
बने अधन्ना सेठ!
लेकिन मेरे मुन्ना!
ग़ायब हुआ अधन्ना
ग़ायब हुई इकन्नी
ग़ायब हुई दुअन्नी
ग़ायब हुई चवन्नी
ग़ायब हुई अठन्नी
बाकी बचा रुपैया
उसकी मेरे भैया
मरी हुई है नानी
साफ़ हवा भी
नहीं मिलेगी
और न ताज़ा पानी।
खाना पीना
करना हो तो
लेना होगा लोन,
एक रुपए में
कर सकते हो
केवल टेलीफोन!
bawa009
03-11-2011, 09:58 PM
आडवाणी जी मंदिर बनवाओगे कब तक
हिन्दुओं को यूँ ही बहलाओगे कब तक
देश की जनता इतनी नादां नहीं है
तुम अपनी रोटी पकाओगे कब तक
245172
मनमोहन जी कुछ अपनी मन की भी कर लो
सोनिया जी की गाड़ी चलाओगे कब तक
पवार जी आपकी हर पोल है खुल चुकी
जनता कों चीनी खिलाओगे कब तक
चिदंबरम जी जनता जवाब चाहती है
आतंकवाद को जड़ से मिटाओगे कब तक
परनब बाबू अर्थवयवस्था का गुणगान करते हो
मंहगाई पर लगाम लगाओगे कब तक
माया जी आप मूर्तियों की बहुत प्रेमी हो
हाथियों की मूर्तियाँ बनवाओगे कब तक
ममता जी और लालू जी रेल के अखाड़े में
लाभ-हानि का किस्सा सुनाओगे कब तक
नितीश जी आप बात करते हो सुशासन की
बिहार से अफसरसाही मिटाओगे कब तक
पासवान जी आप गीत गाते रह गए अल्पसंख्यक की
अल्पमत की मार खुद खाओगे कब तक
इक सवाल “अशोक” देश की जनता से पूछता है
तुम लुटेरों को नेता बनाओगे कब तक
bawa009
05-11-2011, 10:49 PM
वही पुराने बहाने..
एक महाविद्यालय में
नए विभाग के लिए,
नया भवन बनवाया गया…
उसके उद्घाटन के लिए,
महाविद्यालय के एक पुराने छात्र,
लेकिन नए नेता को बुलवाया गया…
अध्यापकों ने कार के दरवाज़े खोले,
और नेताजी उतरते ही बोले…
यहां तर गईं, कितनी ही पीढ़ियां,
अहा… वही पुरानी सीढ़ियां…
वही पुराना मैदान, वही पुराने वृक्ष,
वही पुराना कार्यालय, वही पुराने कक्ष…
वही पुरानी खिड़की, वही जाली,
अहा देखिए, वही पुराना माली…
मंडरा रहे थे, यादों के धुंधलके,
थोड़ा और आगे गए चलके…
वही पुरानी चमगादड़ों की साउंड,
वही घंटा, वही पुराना प्लेग्राउंड…
छात्रों में वही पुरानी बदहवासी,
अहा, वही पुराना चपरासी…
नमस्कार, नमस्कार…
अब आया होस्टल का द्वार…
होस्टल में वही पुराने कमरे, वही पुराना खानसामा…
वही धमाचौकड़ी, वही पुराना हंगामा…
नेताजी पर,
पुरानी स्मृतियां छा रही थीं…
तभी पाया, एक कमरे से कुछ ज़्यादा ही आवाज़ें आ रही थीं…
उन्होंने दरवाज़ा खटखटाया…
लड़के ने खोला, पर घबराया…
क्योंकि अन्दर एक कन्या थी,
वल्कल-वसन-वन्या थी…
दिल रह गया दहल के,
लेकिन बोला संभल के…
आइए सर, मेरा नाम मदन है,
इनसे मिलिए, मेरी कज़न है…
नेताजी लगे मुस्कुराने,
वही पुराने बहाने…
bawa009
06-11-2011, 10:29 PM
क्या बात है , मस्त है भाई.................
शुक्रिया दोस्त, कृपया करके सूत्र भ्रमण करते रहे
bawa009
06-11-2011, 10:33 PM
मुझे एक साली दो
अभी कल ही हमारे दोस्त श्री सन्नी जी मिले. भाई साहब की शादी होने वाली है. सो हमने पूछा कि भाभी कैसी चाहिए आपको जनाब. तो जानते हैं उन्होंने क्या जवाब दिया. उन्होंने कहा चाहे बीवी कैसी भी हो मुझे तो एक साली जरूर चाहिए. हमने पूछा कि भला साली में ऐसा क्या है जो बीवी में नहीं तो वह बैठ गए पूरी “साली के फायदे” की दुकान लेकर.
आप जानना चाहेगें साली के फायदे. तो पढ़िए इस बेहतरीन हास्य कविता को.
भगवान मुझे इक साली दो !
तुम श्लील कहो, अश्लील कहो
चाहो तो खुलकर गाली दो !
तुम भले मुझे कवि मत मानो
मत वाह-वाह की ताली दो !
पर मैं तो अपने मालिक से
हर बार यही वर माँगूँगा-
तुम गोरी दो या काली दो
भगवान मुझे इक साली दो !
सीधी दो, नखरों वाली दो
साधारण या कि निराली दो,
चाहे बबूल की टहनी दो
चाहे चंपे की डाली दो।
पर मुझे जन्म देने वाले
यह माँग नहीं ठुकरा देना-
असली दो, चाहे जाली दो
भगवान मुझे एक साली दो।
वह यौवन भी क्या यौवन है
जिसमें मुख पर लाली न हुई,
अलकें घूँघरवाली न हुईं
आँखें रस की प्याली न हुईं।
वह जीवन भी क्या जीवन है
जिसमें मनुष्य जीजा न बना,
वह जीजा भी क्या जीजा है
जिसके छोटी साली न हुई।
तुम खा लो भले प्लेटों में
लेकिन थाली की और बात,
तुम रहो फेंकते भरे दाँव
लेकिन खाली की और बात।
तुम मटके पर मटके पी लो
लेकिन प्याली का और मजा,
पत्नी को हरदम रखो साथ,
लेकिन साली की और बात।
पत्नी केवल अर्द्धांगिन है
साली सर्वांगिण होती है,
पत्नी तो रोती ही रहती
साली बिखेरती मोती है।
साला भी गहरे में जाकर
अक्सर पतवार फेंक देता
साली जीजा जी की नैया
खेती है, नहीं डुबोती है।
विरहिन पत्नी को साली ही
पी का संदेश सुनाती है,
भोंदू पत्नी को साली ही
करना शिकार सिखलाती है।
दम्पति में अगर तनाव
रूस-अमरीका जैसा हो जाए,
तो साली ही नेहरू बनकर
भटकों को राह दिखाती है।
साली है पायल की छम-छम
साली है चम-चम तारा-सी,
साली है बुलबुल-सी चुलबुल
साली है चंचल पारा-सी ।
यदि इन उपमाओं से भी कुछ
पहचान नहीं हो पाए तो,
हर रोग दूर करने वाली
साली है अमृतधारा-सी।
मुल्ला को जैसे दुःख देती
बुर्के की चौड़ी जाली है,
पीने वालों को ज्यों अखरी
टेबिल की बोतल खाली है।
चाऊ को जैसे च्याँग नहीं
सपने में कभी सुहाता है,
ऐसे में खूँसट लोगों को
यह कविता साली वाली है।
साली तो रस की प्याली है
साली क्या है रसगुल्ला है,
साली तो मधुर मलाई-सी
अथवा रबड़ी का कुल्ला है।
पत्नी तो सख्त छुहारा है
हरदम सिकुड़ी ही रहती है
साली है फाँक संतरे की
जो कुछ है खुल्लमखुल्ला है।
साली चटनी पोदीने की
बातों की चाट जगाती है,
साली है दिल्ली का लड्डू
देखो तो भूख बढ़ाती है।
साली है मथुरा की खुरचन
रस में लिपटी ही आती है,
साली है आलू का पापड़
छूते ही शोर मचाती है।
कुछ पता तुम्हें है, हिटलर को
किसलिए अग्नि ने छार किया ?
या क्यों ब्रिटेन के लोगों ने
अपना प्रिय किंग उतार दिया ?
ये दोनों थे साली-विहीन
इसलिए लड़ाई हार गए,
वह मुल्क-ए-अदम सिधार गए
यह सात समुंदर पार गए।
किसलिए विनोबा गाँव-गाँव
यूँ मारे-मारे फिरते थे ?
दो-दो बज जाते थे लेकिन
नेहरू के पलक न गिरते थे।
ये दोनों थे साली-विहीन
वह बाबा बाल बढ़ा निकला,
चाचा भी कलम घिसा करता
अपने घर में बैठा इकला।
मुझको ही देखो साली बिन
जीवन ठाली-सा लगता है,
सालों का जीजा जी कहना
मुझको गाली सा लगता है।
यदि प्रभु के परम पराक्रम से
कोई साली पा जाता मैं,
तो भला हास्य-रस में लिखकर
पत्नी को गीत बनाता मैं?
bawa009
10-11-2011, 02:15 AM
फेसबुक की बस इतनी सी कहानी: हास्य कविता (हास्य व्यंग्य )
कभी एक समय था जब लोगों को बिना अखबरा चाय पीना गवारा नहीं था. आज ऐसी ही लत इंटरनेट की पड़ी है. और इस इंटरनेट की आग में घी का किया है फेसबुक ने. जब से फेसबुक आया है समाज एका एक बाड़ा वर्ग इसके पीछे पागल प्रेमी हो गया. चाहे कुछ नया पहने या कोई पूराना दोस्त सब फेसबुक में शेयर की मानों आदत हो गई. हालांकि मैं भी इस बिमारी का हिस्सा हूं पर मुझे इससे कोई डर नहीं. आखिर फेसबुक बना ही इसीलिए है ताकि हाम अपने चेहरे को दुनिया के सामने ला सकें.
आज इंटरनेट पर सर्फ पर सर्फ करते करते मुझे एक ऐसी हास्य कविता मिली जिससे मैं खुद को जोड़ कार देखने लगा. पूरी हास्य कविता पःड़ने के बाद लगा कि यार ये तो मेरी ही लाइफस्टाइल है. तो चलिए आप भी पढ़िए इस हास्य कविता को और समझिए अपनी फेसबुक की बला को.
फेसबुक की बस इतनी सी कहानी: हास्य व्यंग्य
बुरी आदते जो भी है अभी से बदल डालो
मौका मिलते ही तुम फेसबुक खोल डालो
हर पल अपना स्थिति संदेश बदल डालो
मित्रो टिप्पणी मेरी दीवार पर लिख डालो…
सुबह हो शाम या फिर दिन हो या रात
करो अपनों से दिल की या फालतू बात
अपनी खतम हो तो करो दूसरों की बात
मित्रो देर सुबेर कर लेना मुझसे तुम बात….
लगे छींक, होवे बुखार या हो जाये प्यार
बस जल्दी से लिख डालो ताज़ा समाचार
खुसनसीब होगे तो लग जाएगी भीड़ अपार
बदनसीब होंगे तो मित्र आएंगे बस दो चार…
किसी समूह मे यदि न दे कोई आपको भाव
तब बात करो येसी कि बन जाये वो घाव
बनाओ अपना भी समूह खेलो तुम येसा दाँव
उद्देश्य न समझे कोई पर दे आपको केवल भाव…
महिलाओं को मिलता यहाँ भी है खूब सम्मान
चाटुकारिता अपनाओ और बढ़ाओ अपना मान
कुछ विवादास्पद कह कर बढ़ाओ अपनी शान
कदम फूँककर रखना ये फेसबुक है भाई-जान…
खूब मनाओ और भुनाओं तुम सारे अवसर
उड़ाओ मज़ाक किसी का या करो तिरस्कार
वैसे प्रोफाइल आपका, उसपर आपका अधिकार
कोई आहत न हो यहाँ, इसका करना विचार…
harry75
28-11-2011, 11:38 PM
ati uttam bandhu
harry75
28-11-2011, 11:48 PM
:anna:Thanks:tiranga:central 41central 14
harry75
29-11-2011, 12:09 AM
[QUOTE=bawa009;635336]मुझे एक साली दो
[SIZE=3]
अभी कल ही हमारे दोस्त श्री सन्नी जी मिले. भाई साहब की शादी होने वाली है. सो हमने पूछा कि भाभी कैसी चाहिए आपको जनाब. तो जानते हैं उन्होंने क्या जवाब दिया. उन्होंने कहा चाहे बीवी कैसी भी हो मुझे तो एक साली जरूर चाहिए. हमने पूछा कि भला साली में ऐसा क्या है जो बीवी में नहीं तो वह बैठ गए पूरी “साली के फायदे” की दुकान लेकर.
आप जानना चाहेगें साली के फायदे. तो पढ़िए इस बेहतरीन हास्य कविता को.
भगवान मुझे इक साली दो !
तुम श्लील कहो, अश्लील कहो
चाहो तो खुलकर गाली दो !
तुम भले मुझे कवि मत मानो
मत वाह-वाह की ताली दो !
पर मैं तो अपने मालिक से
हर बार यही वर माँगूँगा-
तुम गोरी दो या काली दो
भगवान मुझे इक साली दो !
सीधी दो, नखरों वाली दो
साधारण या कि निराली दो,
चाहे बबूल की टहनी दो
चाहे चंपे की डाली दो।
पर मुझे जन्म देने वाले
यह माँग नहीं ठुकरा देना-
असली दो, चाहे जाली दो
भगवान मुझे एक साली दो।
वह यौवन भी क्या यौवन है
जिसमें मुख पर लाली न हुई,
अलकें घूँघरवाली न हुईं
आँखें रस की प्याली न हुईं।
वह जीवन भी क्या जीवन है
जिसमें मनुष्य जीजा न बना,
वह जीजा भी क्या जीजा है
जिसके छोटी साली न हुई।
तुम खा लो भले प्लेटों में
लेकिन थाली की और बात,
तुम रहो फेंकते भरे दाँव
लेकिन खाली की और बात।
तुम मटके पर मटके पी लो
लेकिन प्याली का और मजा,
पत्नी को हरदम रखो साथ,
लेकिन साली की और बात।
पत्नी केवल अर्द्धांगिन है
साली सर्वांगिण होती है,
पत्नी तो रोती ही रहती
साली बिखेरती मोती है।
साला भी गहरे में जाकर
अक्सर पतवार फेंक देता
साली जीजा जी की नैया
खेती है, नहीं डुबोती है।
विरहिन पत्नी को साली ही
पी का संदेश सुनाती है,
भोंदू पत्नी को साली ही
करना शिकार सिखलाती है।
दम्पति में अगर तनाव
रूस-अमरीका जैसा हो जाए,
तो साली ही नेहरू बनकर
भटकों को राह दिखाती है।
साली है पायल की छम-छम
साली है चम-चम तारा-सी,
साली है बुलबुल-सी चुलबुल
साली है चंचल पारा-सी ।
यदि इन उपमाओं से भी कुछ
पहचान नहीं हो पाए तो,
हर रोग दूर करने वाली
साली है अमृतधारा-सी।
मुल्ला को जैसे दुःख देती
बुर्के की चौड़ी जाली है,
पीने वालों को ज्यों अखरी
टेबिल की बोतल खाली है।
चाऊ को जैसे च्याँग नहीं
सपने में कभी सुहाता है,
ऐसे में खूँसट लोगों को
यह कविता साली वाली है।
साली तो रस की प्याली है
साली क्या है रसगुल्ला है,
साली तो मधुर मलाई-सी
अथवा रबड़ी का कुल्ला है।
पत्नी तो सख्त छुहारा है
हरदम सिकुड़ी ही रहती है
साली है फाँक संतरे की
जो कुछ है खुल्लमखुल्ला है।
साली चटनी पोदीने की
बातों की चाट जगाती है,
साली है दिल्ली का लड्डू
देखो तो भूख बढ़ाती है।
साली है मथुरा की खुरचन
रस में लिपटी ही आती है,
साली है आलू का पापड़
छूते ही शोर मचाती है।
कुछ पता तुम्हें है, हिटलर को
किसलिए अग्नि ने छार किया ?
या क्यों ब्रिटेन के लोगों ने
अपना प्रिय किंग उतार दिया ?
ये दोनों थे साली-विहीन
इसलिए लड़ाई हार गए,
वह मुल्क-ए-अदम सिधार गए
यह सात समुंदर पार गए।
किसलिए विनोबा गाँव-गाँव
यूँ मारे-मारे फिरते थे ?
दो-दो बज जाते थे लेकिन
नेहरू के पलक न गिरते थे।
ये दोनों थे साली-विहीन
वह बाबा बाल बढ़ा निकला,
चाचा भी कलम घिसा करता
अपने घर में बैठा इकला।
मुझको ही देखो साली बिन
जीवन ठाली-सा लगता है,
सालों का जीजा जी कहना
मुझको गाली सा लगता है।
यदि प्रभु के परम पराक्रम से
कोई साली पा जाता मैं,
तो भला हास्य-रस में लिखकर
पत्नी को गीत बनाता मैं?
[SIZE=4][SIZE=4]ati uttam bandhu.Main bhi tumse sahmat hu kyuki main bhi saali viheen prani hu.central 41central 41central 41central 41
bawa009
08-12-2011, 02:00 AM
प्रदर्शनी में
एक तम्बू के सामने
जोकर लगा था चिल्लाने में-
“आइए
बीस फुट लम्बा सांप देखिये एक आने में।”
तभी एक सज्जन पधारे
आधे पके थे
आधे कच्चे
साथ में थे बीस बच्चे
जोकर बोला – “बाहर क्यों खड़े हैं आप
भीतर देखिए बीस फुट लम्बा सांप
तोता गाता है
फ़िल्मी गाना
टिकिट सिर्फ एक आना।”
सज्जन बोले-”मेरे साथ तो बीस बच्चे हैं”
जोकर बोला-”बहुत अच्छे हैं
ये सब क्या आपके है?”
सज्जन बोले-
“जी हाँ, मुझ बदनसीब बाप के है।”
जोकर बोला-”जल्दी आइए
अपने बच्चों सहित
भीतर जाइए।”
सज्जन के भीतर जाते ही
जोकर प्रसन्न दिखने लगा
ज़ोरो से चीखने लगा-
“आइए, आइए
केवल दो आने में
तमाशे का मज़ा उठाइए
बीस फुट लंबा सांप देखिये
और साथ में
बीस बच्चों वाला बाप देखिये।”
bawa009
08-12-2011, 02:01 AM
अगर आप को भी प्यार का शौक चढ़ा रहता है और दिल में प्रेम गीत छाते रहते हैं तो पहले नजर अपनी जेब पर डालिए क्यूंकि जेब में अगर गर्मी होगी तभी लड़की के मिजाज में नर्मी होगी और अगर जेब खाली तो दिल का कोना भी रहेगा खाली. अगर अब भी हमारी बातें आपकी समझ से हैं परे तो पढ़िए यह हास्य कविता.
क्या प्यार के सहारे कटेगी जिंदगी : हास्य कविता
प्रेमी अपनी प्रेमिका का हाथ
माँगने उसकी माँ के पास पहुँचा
तब वह गुस्से में बोली
‘तुम्हारे पास क्या है
गाड़ी, बंगला या बैंक बेलेंस
प्रेमी फिल्मी स्टाइल में बोला
‘मेरे पास बस प्यार है’
प्रेमिका की माँ भड़क गयी गयी
और चिल्लाकर बोली
‘उसका क्या मेरी बेटी अचार डालेगी
यह कमाकर तुम्हें पालेगी
यह हर महीने नया सूट खरीद कर लाती है
तुम्हें जिस मोबाइल से करती है फोन
उसमे सिम बाप के पैसे से डलवाती है
तुम इसके खर्च उठा सकोगे
क्या है तुम्हारे पास
प्रेमी बोला
‘मेरे पास बस प्यार है’
प्रेमिका अपनी माँ से नाराज होकर बोली
‘मम्मी तुम मेरी इसके साथ
शादी कराने पर राजी हो जाओ
नहीं तो में अपनी जान दे दूँगी या
इसके साथ भाग जाऊंगी ‘
माँ खुश होकर बोली
‘बेटी इसमें पूछना क्या
कल को भागती है
आज ही भाग जा
बाकी मैं संभाल लूँगी’
वह अपने कमरे से
अपना सामान उठाकर ले आई
और प्रेमी से बोली
‘चलो अब यहाँ से निकलते हैं
कहीं और बसते हैं’
‘ठीक है कुछ पैसे भी रख लेना
तुम्हारे प्यार में पिताजी के दिये
सब पैसे तुम पर खर्च का दिया
अब जो बचा
मेरे पास बस प्यार है’
पहले तो प्रेमिका हतप्रभ रह गयी
और फिर सोचते हुए बोली
‘इससे काम नहीं चलेगा
यह घर छोड़ा तो यहाँ भी फिर
यहाँ भी नो एन्ट्री का बोर्ड लगेगा
कुछ तो होगा तुम्हारे पास
प्रेमी बोला
‘मेरे पास बस प्यार है’
प्रेमिका को गुस्सा आ गया और बोली
‘तुम अब अकेले चले जाओ
इस तरह नहीं चल सकती जिन्दगी की गाड़ी
प्यार तो है चार दिन का
फिर तो चाहिये मुझे गहने और साड़ी
फिर भी प्रेमी नहीं मान रहा था
आखिर माँ-बेटी ने धकेल कर
उसे घर से बाहर निकाला
वह बस एक ही रट लगाये जा रहा था
‘मेरे पास बस प्यार है’
bawa009
08-12-2011, 02:04 AM
अगर आप को भी प्यार का शौक चढ़ा रहता है और दिल में प्रेम गीत छाते रहते हैं तो पहले नजर अपनी जेब पर डालिए क्यूंकि जेब में अगर गर्मी होगी तभी लड़की के मिजाज में नर्मी होगी और अगर जेब खाली तो दिल का कोना भी रहेगा खाली. अगर अब भी हमारी बातें आपकी समझ से हैं परे तो पढ़िए यह हास्य कविता.
क्या प्यार के सहारे कटेगी जिंदगी : हास्य कविता
प्रेमी अपनी प्रेमिका का हाथ
माँगने उसकी माँ के पास पहुँचा
तब वह गुस्से में बोली
‘तुम्हारे पास क्या है
गाड़ी, बंगला या बैंक बेलेंस
प्रेमी फिल्मी स्टाइल में बोला
‘मेरे पास बस प्यार है’
प्रेमिका की माँ भड़क गयी गयी
और चिल्लाकर बोली
‘उसका क्या मेरी बेटी अचार डालेगी
यह कमाकर तुम्हें पालेगी
यह हर महीने नया सूट खरीद कर लाती है
तुम्हें जिस मोबाइल से करती है फोन
उसमे सिम बाप के पैसे से डलवाती है
तुम इसके खर्च उठा सकोगे
क्या है तुम्हारे पास
प्रेमी बोला
‘मेरे पास बस प्यार है’
प्रेमिका अपनी माँ से नाराज होकर बोली
‘मम्मी तुम मेरी इसके साथ
शादी कराने पर राजी हो जाओ
नहीं तो में अपनी जान दे दूँगी या
इसके साथ भाग जाऊंगी ‘
माँ खुश होकर बोली
‘बेटी इसमें पूछना क्या
कल को भागती है
आज ही भाग जा
बाकी मैं संभाल लूँगी’
वह अपने कमरे से
अपना सामान उठाकर ले आई
और प्रेमी से बोली
‘चलो अब यहाँ से निकलते हैं
कहीं और बसते हैं’
‘ठीक है कुछ पैसे भी रख लेना
तुम्हारे प्यार में पिताजी के दिये
सब पैसे तुम पर खर्च का दिया
अब जो बचा
मेरे पास बस प्यार है’
पहले तो प्रेमिका हतप्रभ रह गयी
और फिर सोचते हुए बोली
‘इससे काम नहीं चलेगा
यह घर छोड़ा तो यहाँ भी फिर
यहाँ भी नो एन्ट्री का बोर्ड लगेगा
कुछ तो होगा तुम्हारे पास
प्रेमी बोला
‘मेरे पास बस प्यार है’
प्रेमिका को गुस्सा आ गया और बोली
‘तुम अब अकेले चले जाओ
इस तरह नहीं चल सकती जिन्दगी की गाड़ी
प्यार तो है चार दिन का
फिर तो चाहिये मुझे गहने और साड़ी
फिर भी प्रेमी नहीं मान रहा था
आखिर माँ-बेटी ने धकेल कर
उसे घर से बाहर निकाला
वह बस एक ही रट लगाये जा रहा था
‘मेरे पास बस प्यार है’
bawa009
08-12-2011, 02:21 AM
आजकल शादियों का दौर चल रहा है. जहां देखो वहीं शादियों का माहौल बना हुआ है. अभी हमारे एक मित्र भी जल्द ही शादी के पवित्र बंधन में बंधने जा रहे है. शादियों का यह माहौल देखकर मुझे डॉ. सुनील जोगी की एक हास्य कविता याद आ रही है जो मैं इंटरनेट से खोजकर यहां डाल रहा हूं. उम्मीद है आपको कविता पसंद आएगी और आप अपने साथियों को भी इसे पढ़ाएंगे.
यारों! शादी मत करना, ये है मेरी अर्ज़ी
फिर भी हो जाए तो ऊपर वाले की मर्ज़ी।
लैला ने मजनूँ से शादी नहीं रचाई थी
शीरी भी फरहाद की दुल्हन कब बन पाई थी
सोहनी को महिवाल अगर मिल जाता, तो क्या होता
कुछ न होता बस परिवार नियोजन वाला रोता
होते बच्चे, सिल-सिल कच्छे, बन जाता वो दर्ज़ी।
सक्सेना जी घर में झाड़ू रोज़ लगाते हैं
वर्मा जी भी सुबह-सुबह बच्चे नहलाते हैं
गुप्ता जी हर शाम ढले मुर्गासन करते हैं
कर्नल हों या जनरल सब पत्नी से डरते हैं
पत्नी के आगे न चलती, मंत्री की मनमर्ज़ी।
बड़े-बड़े अफ़सर पत्नी के पाँव दबाते हैं
गूंगे भी बेडरूम में ईलू-ईलू गाते हैं
बहरे भी सुनते हैं जब पत्नी गुर्राती है
अंधे को दिखता है जब बेलन दिखलाती है
पत्नी कह दे तो लंगड़ा भी, दौड़े इधर-उधर जी।
पत्नी के आगे पी.एम., सी.एम. बन जाता है
पत्नी के आगे सी एम, डी.एम. बन जाता है
पत्नी के आगे डी. एम. चपरासी होता है
पत्नी पीड़ित पहलवान बच्चों सा रोता है
पत्नी जब चाहे फुड़वा दे, पुलिसमैन का सर जी।
पति होकर भी लालू जी, राबड़ी से नीचे हैं
पति होकर भी कौशल जी, सुषमा के पीछे है
मायावती कुँवारी होकर ही, सी.एम. बन पाई
क्वारी ममता, जयललिता के जलवे देखो भाई
क्वारे अटल बिहारी में, बाकी खूब एनर्जी।
पत्नी अपनी पर आए तो, सब कर सकती है
कवि की सब कविताएं, चूल्हे में धर सकती है
पत्नी चाहे तो पति का, जीना दूभर हो जाए
तोड़ दे करवाचौथ तो पति, अगले दिन ही मर जाए
पत्नी चाहे तो खुदवा दे, घर के बीच क़बर जी।
शादी वो लड्डू है जिसको, खाकर जी मिचलाए
जो न खाए उसको, रातों को, निंदिया न आए
शादी होते ही दोपाया, चोपाया होता है
ढेंचू-ढेंचू करके बोझ, गृहस्थी का ढोता है
सब्ज़ी मंडी में कहता है, कैसे दिए मटर जी।
lotus1782
08-12-2011, 03:57 PM
हास्य से भरपूर
bawa009
22-12-2011, 11:22 PM
यमराज का इस्तीफा -अमित कुमार सिंह
एक दिन
यमदेव ने दे दिया
अपना इस्तीफा।
मच गया हाहाकार
बिगड़ गया सब
संतुलन,
करने के लिए
स्थिति का आकलन,
इन्द्र देव ने देवताओं
की आपात सभा
बुलाई
और फिर यमराज
को कॉल लगाई।
'डायल किया गया
नंबर कृपया जाँच लें'
कि आवाज तब सुनाई।
नये-नये ऑफ़र
देखकर नम्बर बदलने की
यमराज की इस आदत पर
इन्द्रदेव को खुन्दक आई,
पर मामले की नाजुकता
को देखकर,
मन की बात उन्होने
मन में ही दबाई।
किसी तरह यमराज
का नया नंबर मिला,
फिर से फोन
लगाया गया तो
'तुझसे है मेरा नाता
पुराना कोई' का
मोबाईल ने
कॉलर टयून सुनाया।
सुन-सुन कर ये
सब बोर हो गये
ऐसा लगा शायद
यमराज जी सो गये।
तहकीकात करने पर
पता लगा,
यमदेव पृथ्वीलोक
में रोमिंग पे हैं,
शायद इसलिए,
नहीं दे रहे हैं
हमारी कॉल पे ध्यान,
क्योंकि बिल भरने
में निकल जाती है
उनकी भी जान।
अन्त में किसी
तरह यमराज
हुये इन्द्र के दरबार
में पेश,
इन्द्रदेव ने तब
पूछा-यम
क्या है ये
इस्तीफे का केस?
यमराज जी तब
मुँह खोले
और बोले-
हे इंद्रदेव।
'मल्टीप्लैक्स' में
जब भी जाता हूँ,
'भैंसे' की पार्किंग
न होने की वजह से
बिन फिल्म देखे,
ही लौट के आता हूँ।
'बरिस्ता' और 'मैकडोन्लड'
वाले तो देखते ही देखते
इज्जत उतार
देते हैं और
सबके सामने ही
ढ़ाबे में जाकर
खाने-की सलाह
दे देते हैं।
मौत के अपने
काम पर जब
पृथ्वीलोक जाता हूँ
'भैंसे' पर मुझे
देखकर पृथ्वीवासी
भी हँसते हैं
और कार न होने
के ताने कसते हैं।
भैंसे पर बैठे-बैठे
झटके बड़े रहे हैं
वायुमार्ग में भी
अब ट्रैफिक बढ़ रहे हैं।
रफ्तार की इस दुनिया
का मैं भैंसे से
कैसे करूँगा पीछा।
आप कुछ समझ रहे हो
या कुछ और दूँ शिक्षा।
और तो और, देखो
रम्भा के पास है
'टोयटा'
और उर्वशी को है
आपने 'एसेन्ट' दिया,
फिर मेरे साथ
ये अन्याय क्यों किया?
हे इन्द्रदेव।
मेरे इस दु:ख को
समझो और
चार पहिए की
जगह
चार पैरों वाला
दिया है कह
कर अब मुझे न
बहलाओ,
और जल्दी से
'मर्सिडीज़' मुझे
दिलाओ।
वरना मेरा
इस्तीफा
अपने साथ
ही लेकर जाओ।
और मौत का
ये काम
अब किसी और से
करवाओ।
bawa009
22-12-2011, 11:39 PM
कभी हम युवराज के छक्के और धोनी के बालों के लिए मर गए ||
कभी हम सलमान के चरित्र, मधुबाला के चेहरे और कैटरीना कि चालों के लिए मर गए ||
कभी हम अमेरिका के वीसा और IT की के लिए मर गए ||
कहीं होंगे भगत सिंह तो कहते होंगे -यार सुखदेव, राजगुरु ||
हम भी किन सालों के लिए मर गए !!
bawa009
22-12-2011, 11:46 PM
अखबार आज का ही है
खबरें ऐसा लगता है पहले भी पढ़ी हैं
आज भी पढ़ रहे हैं
इसलिये कोई ताज़ा खबर नहीं लगती।
ट्रेक्टर की ट्रक से
या स्कूटर की बस से भिड़ंत
कुछ जिंदगियों का हुआ अंत
यह कल भी पढ़ा था
आज भी पढ़ रहे हैं
इसलिये कोई ताज़ा खबर नहीं लगती।
भाई ने भाई ने
पुत्र ने पिता को
जीजा ने साले को
कहीं मार दिया
ऐसी खबरें भी पिछले दिनों पढ़ चुके
आज भी पढ़ रहे हैं
इसलिये कोई ताज़ा खबर नहीं लगती।
कहीं सोना तो
कहीं रुपया
कहीं वाहन लुटा
लगता है पहले भी कहीं पढ़ा है
आज भी पढ़ रहे हैं
इसलिये कोई ताज़ा खबर नहीं लगती।
रंगे हाथ भ्रष्टाचार करते पकड़े गये
कुछ बाइज्जत बरी हो गये
कुछ की जांच जारी है
पहले भी ऐसी खबरें पढ़ी
आज भी पढ़ रहे हैं
इसलिये कोई ताज़ा खबर नहीं लगती।
अखबार रोज आता है
तारीख बदली है
पर तय खबरें रोज दिखती हैं
ऐसा लगता है पहले भी भी पढ़ी हैं
इसलिये कोई ताज़ा खबर नहीं लगती।
———–
कवि,लेखक संपादक-दीपक भारतदीप, Gwalior
bawa009
22-12-2011, 11:49 PM
शराब और शराबी -हास्य कविता
त्यौहार के दिन
फंदेबाज घर आया और बोला
‘‘दीपक बापू आज पहली बार दे रहा हूं सात्विक बधाई,
यह पहला मौका है है
जब मैने किसी खास अवसर पर
अपने मुंह से शराब की एक बूंद भी नहीं लगाई।
सोच रहा हूं पीना छोड़ दूं
वरना कहीं कोई पीट पीटकर कर न दे धराशायी,
भ्रष्टाचार के विरोधी अन्ना साहेब ने
शराबियों को हंटर से पीटने की आवाज जो लगाई।
आप तो जानते हैं,
लोग उनको बहुत मानते हैं,
उनके दर्शन में भले लगता नहीं दम है,
पर नारों का वजन नहीं कम है,
आपने पीना छोड़ दिया है,
इसलिये अपने को उनकी मुहिम से जोड़ दिया है,
इसलिये आप भी शराब के खिलाफ लिखो,
उनके कट्टर समर्थक की तरह दिखो,
अभी तक आप रहे फ्लाप हो
संभव हिट हो जाओ
करने लगें लोग आपकी बड़ाई।’’
सुनकर चुप रहे पहले
फिर गला खंखारकर बोले
‘‘दूसरों के मसौदे देखकर अपनी राह बदलें
यह आमजन को बहुत भाता है,
अन्ना की बात सुनकर
शराब छोड़ने के नारे बहुत लोग लगायेंगे
पर देखेंगे कौन इस पर चल पाता है,
हम जानते हैं
अन्ना 74 बरस में भी स्वस्थ हैं
क्योंकि अपनी जिंदगी में शराब नहीं पिये,
अमेरिका में उनसे भी बड़ी उम्र के लोग जिंदा हैं
जिन्होंने एक नहीं बहुत सारे पैग लिये,
बहुत बुरी चीज है शराब,
फिर भी लोग पीते साथ में खाते कबाब,
दुनियां का सच है
जिस बुराई को दबाने का प्रयास करो
बढ़ती जायेगी,
पहले फ्लाप हो रही
क्रिकेट खेलकर
अन्ना ने उसमें अपने प्रशंसकों लगाया
अब उनके मुख से निकली बात
शराब भी शायद वैसा ही प्रचार पायेगी,
हम ठहरे गीता साधक
बुराई से नफरत करते,
मगर बुरे आदमी में ज्ञान के सूत्र भरते,
अरे,
परमात्मा नहीं खत्म कर पाया
तामसी प्रवृत्ति के लोगों को,
भला क्या भगायेंगे अन्ना संसार से ऐसे रोगों को,
सारे संसार को ठीक करने का ठेका लेना
आत्ममुग्ध करने वाली चीज है,
समझ लो इस भाव में ही
अज्ञान से उपजे अहंकार के बीज हैं,
इससे तो अपने बाबा रामदेव का दर्शन सही है,
कपाल भाति करे जो शख्स स्वस्थ वही है,
हमारा मानना है कि श्रीमद्भागवत गीता के साथ
पतंजलि योग में भरा है ज्ञान और विज्ञान,
देश भूल गया पर
बाकी विश्व रहा है मान,
फिर कौन अपने को बाज़ार से
कभी चंदा मिला है,
खुद नहीं पीते
मगर नहीं पीने वालों से गिला,
समझें जो लोग
अपनी वाणी से करना
भूल जाते निंदा और बड़ाई
हम जैसे लोगों के लिये नारे लगाना संभव नहीं है
कर सकते हैं आध्यात्मिक चिंत्तन
फिर जहां मौका मिला वहीं हास्य कविता बरसाई।
कवि, लेखक -दीपक ‘भारतदीप”,ग्वालिय
bawa009
22-12-2011, 11:51 PM
साहब और आम इंसान -भ्रष्टाचार पर दो हिन्दी क्षणिकाएँ
गोश्त बनता है जिनके रसोईघर में
टेबल पर बैठकर उसे चबते हुए
वही भूखों को रोटी दिलाने के
दावे किया करते हैं,
यकीन करो
भूख से पैदा होने वाले दर्द को वह नहीं जानते
शब्दों की चालाकी से अपने बयानों में
भले हमदर्दी भरते हैं।
—————–
भूख से तड़पता
भ्रष्टाचार से भड़कता
अपराध से सहमता
आम आदमी कोई औकात नहीं रखता
उससे देश कहीं ज्यादा बड़ा है,
इसलिए जिसको मिली साहबी
अपनी कुर्सी पर बैठकर इतराता है
लगता है देश को बचाने के नाम पर
अपनी औकात बचाने के लिए अड़ा है।
bawa009
22-12-2011, 11:56 PM
"आओ कुछ अच्छा लिखें
राष्ट्रपति पर अच्छा लिखा नहीं जा सकता
इन्द्र गांधी की रसोइया का राष्ट्रपति बन जाना उनके लिए गर्व की बात है
प्रधान मंत्री पर अच्छा लिखा नहीं जा सकता
हालांकि उन्हें देश की जनता ने कभी नहीं चुना किन्तु वह प्रधानमंत्री हैं
सोनिया पर अच्छा लिखा नहीं जा सकता
क्योंकि वह देश राजनीति से नहीं देह राजनीति के रास्ते यहाँ तक पहुँची हैं
राहुल गांधी हों या महाजन पर अच्छा लिखा नहीं जा सकता
अर्थ नीति पर अच्छा लिखा नहीं जा सकता
राजनीति पर अच्छा लिखा नहीं जा सकता
खेल नीति / विदेश नीति पर अच्छा लिखा नहीं जा सकता
क़ानून व्यवस्था पर अच्छा लिखा नहीं जा सकता
पुलिस पर अच्छा लिखा नहीं जा सकता
मायाबती/ मुलायम/ करूणानिधि/ यदुरप्पा /कल्माणी / कनीमोझी पर अच्छा लिखा नहीं जा सकता
"शीला" कहो तो "शीला की जवानी" याद आती है दिल्ली की मुख्यमंत्री नहीं
रोबर्ट्स बढेरा हों या चटवाल सभी हैं मालामाल पर देश हो रहा है कंगाल उस पर अच्छा नहीं लिखा जा सकता
कोंग्रेस /भाजपा /माकपा पर अच्छा लिखा नहीं जा सकता
अपने और पराये काले धन का अनुलोम विलोम करते स्वामी रामदेव पर भी अब अच्छा लिखने का मन नहीं करता
अपने गुरु की रहस्यमय ह्त्या का राज्याभिषेक रामदेवनुमा राजनीति को रोमांचित करता है
जनता यानी कि हमारे आपके चितकबरे चरित्र पर भी अच्छा नहीं लिखा जा सकता
NGO के टेस्ट ट्यूब बेबी अग्निवेश,संदीप पाण्डेय,तीस्ता सीतलवाद,किरण बेदी, केजरीवाल, शबाना आजमी , महेश भट्ट
अनुदानों के कीचड़ में किलोलें कर रहे हैं, इन पर भी अच्छा नहीं लिखा जा सकता
अन्ना का पन्ना अभी लिखा जाना शेष है
आसान किश्तों में जेल जा रहे और जनता से जूते थप्पड़ खा रहे
मनमोहन मंत्रिमंडल के बारे में भी कुछ अच्छा नहीं लिखा जा सकता
आतंकवाद में शामिल मौलवियों के बारे में भी अच्छा नहीं लिखा जा सकता
और यौनशोषण के आरोपों में लिप्त महंतों और पादरियों के बारे में भी अच्छा नहीं लिखा जा सकता
क्रिकेट पर दाउद की दया है, उसका हर मैच फिक्स है बाकी खेल दयनीय से हैं उनकी दशा पर अच्छा नहीं लिखा जा सकता
इसी लिए आज छुट्टी
आज कुछ नहीं लिखूंगा. "
bawa009
23-12-2011, 12:07 AM
दिल का connection मिलादें,
Daddy internet लगा दें,
मुझे आया mail दोस्तौं का,
कब लगे गा इतना बता दें
Homework पूरा होता नहीं,
रात को में सोता नहीं,
जब मूड हो पढ़ाई का,
Homework कोई होता नहीं.
नेट भी है कमाल चीज़,
बस आती हो अगर चलानी keys ,
वैसे तो बोहोत है काम इस के,
पर chatting पे लगती नहीं fees.
आप कहते हैं में शोर मचाओं गा,
Try करो में नाराज़ न कर पों गा,
में god promise करता हूँ,
Net आप के सुने के बाद लागों गा.
सहेली नहीं मेरी,हाँ दोस्त ही होते हैं,
वोह सारे के सारे स्कूल में ही सोते हैं,
रात तो गुज़रती है net पर typing करते,
सुबह भी chat room में ही होते हैं.
लड़कियन भी कमाल होती हैं,
घर पे अपनी मिसाल होती हैं,
सारा काम ख़तम करके,
दस बजे सादे नाल होती हैं.
अब तो मुझे internet लगादें,
मेरी भी मौज करदें,
में भी धुन्ड़ता हूँ साइबर बहु,
आप बस निकाह डोट कॉम करदें
bawa009
24-12-2011, 12:02 AM
जहाँ डाल-डाल पर भ्रष्ट कोड़े करते हैं बसेरा
वो भारत देश है मेरा
जहाँ असत्य, हिंसा और अधर्म का पग-पग लगता डेरा
वो भारत देश है मेरा
ये धरती वो जहाँ एसपीएस राठौर जैसे अधिकारियों का बोलबाला
जहाँ हर बालक एक बाल मजदूर है और हर राधा एक हाला
जहाँ देश के लुटेरे नेता सबसे पहले आ कर डाले अपना फेरा
वो भारत देश है मेरा
अलबेलों की इस धरती के व्यवहार भी हैं अलबेले
कहीं रिश्वत की जगमग है कहीं हैं भाई-भतीजावाद के मेले
जहाँ लालफीताशाही और अकर्मण्यता का चारों ओर है घेरा
वो भारत देश है मेरा
जब कटुता पैदा करते मस्जिद और शिवाले
जहाँ हर नगर में कूड़ाकरकट गंदगी धूल फैला डाले
भ्रष्टाचार की बंसी जहाँ बजाता है ये शाम सवेरा
वो भारत देश है मेरा
bawa009
24-12-2011, 12:05 AM
क्या फ़र्क कौन किसके चंगुल में है
जनता सदा से नेता के चंगुल में है
भविष्य स्वर्णिम है यकीनन हमारा
क़ानून बाहुबलियों के चंगुल में है
अपनी मांद में ख़ैर मना लिए बहुत
अंतत: राठौर रूचिका के चंगुल में है
मेरे वतन का हो गया है अजब हाल
मंत्री अब नौकरशाहों के चंगुल में है
वक़्त ने पलटा है आज अपना पाँसा
वही वक़्त आज रवि के चंगुल में है
bawa009
30-12-2011, 01:44 AM
क्या हुआ दोस्तों मज़ा नहीं आया
bawa009
01-02-2012, 02:09 AM
“ कविता को बुनने का आधार कैसे दूं ? ” दिल की संवेदनाओं को मैं मार कैसे दूं ?
और कविता को बुनने का आधार कैसे दूं ?
पथ भ्रष्ट हो गया, पथिक भ्रष्ट हो गया,
गाँधी और सुभाष का ये राष्ट्र भ्रष्ट हो गया,
चंद रुपयों को भाई भाई भ्रष्ट हो गया,
जगदगुरु- सा मेरा देश भ्रष्ट हो गया..
राम राज्य लाने वाली सरकार कैसे दूं?
और कविता को बुनने का आधार कैसे दूं ?
भ्रष्टाचार की खातिर शत्रु सीमा से सट जाते हैं ,
बुनियादी आरोपों से अब संसद तक पट जाते हैं ,
मानचित्र में हर साल राज्य बंट जाते हैं,
भारत माता के कोमल अंग कट जाते हैं..
इस अखंड राष्ट्र को आकर कैसे दूं ?
और कविता को बुनने का आधार कैसे दूं ?
आरक्षण विधान कर नेता यूँ सो जाते हैं,
मेहनतकश बच्चे खून के आंसू रो जाते हैं,
कर्म करते -करते कई युग हो जाते हैं,
कलयुग के कर्मयोगी पन्नो में खो जाते हैं,
कृष्ण ने जो दे दिया वो सार कैसे दूं ?
और कविता को बुनने का आधार कैसे दूं ?
माँ अपने बच्चे को ममता से सींच देती है,
मंहगाई की मार गर्दनें खींच देती है,
रोटी के अभाव में माँ बच्चा फेंक देती है,
फिर भी पेट ना भरा तो जिस्म बेच देती है,
इस पापी पेट को आहार कैसे दूं ?
और कविता को बुनने का आधार कैसे दूं ?
एक लाठी वाला पूरी दुनिया पे छा गया,
दूजा सत्ताधारी तो चारा तक खा गया,
चम्बल के डाकुओं को संसद भी भा गया,
शायद जीत जायेगा लो चुनाव आ गया,
ऐसे भ्रष्ट नेता को विजय हार कैसे दूं ?
और कविता को बुनने का आधार कैसे दूं ?
तिब्बत चला गया अब कश्मीर चला जायेगा ,
यदुवंशी रजवाड़ों में जब बाबर घुस आएगा ,
देश का सिंघासन चंद सिक्कों में बँट जायेगा ,
तब बोलो भारतवालो तुम पर क्या रह जायेगा ?
आती हुई गुलामी का समाचार कैसे दूं ?
और कविता को बुनने का आधार कैसे दूं ?
सीमा के खतों में हिंसा तांडव करती है,
सूनी राखी देख कर बहिन रोज़ डरती है,
नयी दुल्हन सेज पर रोज़ मरती है,
और बूढी माँ की आँखें रोज़ जल भरती है,
माँ को बेटे की लाश का उपहार कैसे दूं ?
और कविता को बुनने का आधार कैसे दूं ?
आज के भी दशरथ चार पुत्रों को पढ़ाते है,
फिर भी चार पुत्रों पर वो बोझ बन जाते है,
कलयुग में राम कैसे मर्यादा निभाते है ?
राम घर मौज ले और दशरथ वन जाते है,
ऐसे राम को दीपों की कतार कैसे दूं ?
और कविता को बुनने का आधार कैसे दूं ?
मानव अंगों का व्यापार यहाँ खिलता है,
शहीदों के ताबूतों में कमीशन भी मिलता है,
बेरोज़गारों का झुण्ड चौराहों पे दिखता है,
"फील गुड" कहने से सत्य नहीं छिपता है,
देश की प्रगति को रफ़्तार कैसे दूं ?
और कविता को बुनने का आधार कैसे दूं ?
-
ANANT BHARDWAJ
bawa009
01-02-2012, 02:25 AM
गधों की जमानत और किसान
एक बार खेत में किसान की सहायता के लिए
बहुत से गधे चुने गए
लेकिन सहायता के नाम पर
कुछ गधे गजब ही कर गए
किसान का पूरा का पूरा खेत ही चर गए
चरने तक तो ठीक था
मगर जाते जाते खेत को लीद से भर गए
और तो और आने वाली पीढ़ी के लिए
मेड़ में छेद कर गए
किसान ने मामला अदालत में पहुंचाया
न्याय के लिए गिड़गडाया
आरोपों की सफाई के लिए
जज ने गधों को अदालत में बुलाया
गधों ने बचाव में
एक से बढ़कर एक तर्क बताये
एक गधे ने फरमाया -
हमने अपनी प्रजाति बचाने के लिए
मज़बूरी में ये कदम उठाया
जज ने पूछा कैसे
तभी दूसरे गधे ने समझाया
हुजूर, यदि हम फसल नहीं खाते
तो ये किसान बहुत अमीर हो जाते
अच्छे बुरे को पहचानने लग जाते
फिर तो हम गधों को छोड़, घोड़े ले आते
ऐसे में हम गधों के बच्चे तो भूखे ही मर जाते
और हम खाम खा इतिहास बन जाते
तभी एक और गधा आगे आया
उसने अपना नया ही तर्क बताया
ये सही है की हमने खेत चरा है
मगर खेत को लीद से भी तो भरा है
जिससे किसान अगली फसल तैयार कर पायेगा
और अपना पेट भर पायेगा
ये ठीक है कि उसके पहले
हमारा नम्बर आएगा
और बचा तो वो भी खायेगा
वैसे भी वो मालिक हम नौकर हैं
उसने ही हमें पहले परखा है फिर चुना है
इसलिए अब हम कही और नहीं जायेंगे
अगले चुनाव तक इसका ही खायेंगे पियेंगे और चरेंगे |
इन बेतुके तर्कों पर जज को गुस्सा आया
उसने सभी गधों को जेल पहुँचाया
इस पर पहले तो सारे गधे जोर से कूदे
फिर दुल्लती चलाये
मगर, जब खाया जेल का खाना तो पचा नहीं पाये
जो दौड रहे थे कल तक
उनमें से किसी को किडनी
तो किसी को हार्ट के दौरे आये
फिर तो सभी इलाज के नाम पर जमानत लेकर
किसान के खेत में फिर से चरने चले आये
अब आप ही बताये
बेचारा किसान कहां जाये और कहां गुहार लगाये
क्योंकि अब तो गधे जमानत लेकर हैं आये
कहो अब बेचारा किसान कहां जाये ?
बेचारा किसान कहां जाये ?
--
शंकर लाल
इंदौर- मध्यप्रदेश
bawa009
11-03-2012, 04:08 AM
सर में भेजा नहीं है फिर भी सोच रहे हैं
खुजली ख़ुद को है, पब्लिक को नोच रहे हैं
अब क्या बतलाऊं हाल मैं इन नेताओं का
मैल जमी है चेहरे पर और दर्पण पोंछ रहे हैं
bawa009
11-03-2012, 04:34 AM
भारतीय नारी भले ही पति का ख़ून पीती है
परन्तु पारम्परिक संस्कार के साथ जीती है
भले ही वह प्राणनाथ से दो दो हाथ करती है
पर अपमान भी बड़े सम्मान के साथ करती है
विनम्रता और समझदारी
उसकी रग रग में बहती है
पति को वह सीधे सीधे 'अबे गधे' नहीं,
बल्कि गुप्त भाषा में 'ए जी' कहती है
bawa009
11-03-2012, 04:36 AM
सलमान खान ने पूछा -
पामेला डार्लिंग !
अगर मैं तुम्हारा एक चुम्मा ले लूँ तो तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा
पामेला मन ही मन बोली - oh shit !
बंगलादेशी बकरे की तरह मिमियाहट ये इण्डियन सांड कर रहा है
यहाँ पूरी कार हाज़िर है और ये केवल टायरों की डिमाण्ड कर रहा है
bawa009
11-03-2012, 04:37 AM
मुन्नी बदनाम है
शीला जवान है
फिर भी बुड्ढे अन्ना के पीछे
पूरा हिन्दोस्तान है
bawa009
11-03-2012, 04:42 AM
प्रेमिका ने प्रेमी को बड़े प्यार से कहा -
तुम
70% सुन्दर हो
75% स्वीट हो
80% नॉटी हो
95% सच्चे हो
100% लवली हो
दुनिया से उन्नीस नहीं, इक्कीस हो,
लेकिन ये कोई ख़ुशी की बात नहीं
70+75+80+95+100
याने कुल मिला कर चार सौ बीस हो
Raja44
11-03-2012, 07:19 AM
भारतीय नारी भले ही पति का ख़ून पीती है
परन्तु पारम्परिक संस्कार के साथ जीती है
भले ही वह प्राणनाथ से दो दो हाथ करती है
पर अपमान भी बड़े सम्मान के साथ करती है
विनम्रता और समझदारी
उसकी रग रग में बहती है
पति को वह सीधे सीधे 'अबे गधे' नहीं,
बल्कि गुप्त भाषा में 'ए जी' कहती है
लाजवाब और सटीक व्याख्या की आपने भारतीय नारी की ए जी
bawa009
13-03-2012, 02:59 AM
अब तो मैं भी अमीर हूँ भाया
छ: दशकों से जो कोई नहीं कर पाया
योजना आयोग की एक रिपोर्ट ने
वो करिश्मा कर दिखाया
गरीबी हटाना जरा मुश्किल था
इसलिए,
गरीबी रेखा को ही नीचे टपकाया
वर्षों से जो पड़े हुए थे
गरीबी के दलदल में
उनको एक ही झटके में
आसमान से ऊँचा उठाया
जो भूखा ही सो रहा था कल तक
उसको आज बैलेंस डाइट का
स्वर्णिम ख्वाब दिखाया
और तो और तीस रूपये कमाने वाले
बेलदार को भी मालदार बनाया
देश पर लगा गरीबी का दाग
एक ही धुलाई में मिटाया
छ: दशकों से जो कोई नहीं कर पाया
योजना आयोग की एक रिपोर्ट ने
वो करिश्मा कर दिखाया
ये समाचार जब मैंने उसको सुनाया
की तू भी मालदार होई गयो है भाया
वो जोर जोर से हरे मोहन, हरे मोहन गाया
और बोला
ये कुशल तो अर्थशास्त्री का कमाल है भाया
नहीं तो यहां कितना ही आया और चला गया
लेकिन मैं तो गरीब का गरीब था न भाया
उसने जोश में वो पचास का नोट हवा में लहराया
जो उसने आज बेलदारी से था कमाया
और खुशी के मारे जोर से चिल्लाया
अब तो मैं भी अमीर हूँ भाया
अब तो मैं भी अमीर हूँ भाया
शोर सुनकर उसका बच्चा भी चला आया
उसने बच्चे को नोट थमाया और बोला
जा मेरे शेर बाजार से तीस का राशन लाना
आज से हम भी खायेंगे भर पेट खाना
और बीस की मिठाई पूरे मोहल्ले में बंटवाना
आज से हम भी अमीर है सब को बताना |
बाप-बेटे कि खुशी का आज नहीं था कोई ठिकाना
तभी रुआंसी सूरत लिए बच्चा बाजार से आया
मगर मिठाई नहीं वो
वो ही 100 ग्राम चावल और दाल लाया
जिससे पूरे परिवार का तो दूर
एक आदमी का भी पेट ठीक से नहीं भर पाया
उसने गुस्से में योजना आयोग पर
गलत आंकडों का आरोप लगाया
तभी एक पुलिस वाला
संसद कि मानहानि के आरोप में
उसे पकड़ने चला आया
इस पर वो बोला मैंने क्या गलत कहा
तुम ही बताओ तीस रूपये में
बैलेंस डाईट मिलती कहां है भाया ?
पुलिस वाले ने
संसद कि केंटीन का मेनू उसके हाथ में थमाया
और बोला यहाँ मिलती है
तीस रूपये में बैलेंस डाईट भाया
इसलिए,
तू संसद कि अपमान का दोषी गया है पाया
अभी निकाल पचास रुपया
नहीं, तो मैं अभी हथकड़ी लाया
डर के मारे कांपते हुए
उसने पचास रुपया पुलिस वाले को थमाया
और योजना आयोग कि रिपोर्ट खाकर
अपनी अमीरी का पहला दिन मनाया
इसलिए कहता हूँ कि
छ: दशकों से जो कोई नहीं कर पाया
योजना आयोग की एक रिपोर्ट ने
वो करिश्मा कर दिखाया
कम से कम एक परिवार का पेट तो भर पाया
छ: दशकों से जो कोई नहीं कर पाया ....
---
शंकर लाल, इंदौर , मध्यप्रदेश
Raja44
13-03-2012, 04:43 AM
अब तो मैं भी अमीर हूँ भाया
छ: दशकों से जो कोई नहीं कर पाया
योजना आयोग की एक रिपोर्ट ने
वो करिश्मा कर दिखाया
गरीबी हटाना जरा मुश्किल था
इसलिए,
गरीबी रेखा को ही नीचे टपकाया
वर्षों से जो पड़े हुए थे
गरीबी के दलदल में
उनको एक ही झटके में
आसमान से ऊँचा उठाया
जो भूखा ही सो रहा था कल तक
उसको आज बैलेंस डाइट का
स्वर्णिम ख्वाब दिखाया
और तो और तीस रूपये कमाने वाले
बेलदार को भी मालदार बनाया
देश पर लगा गरीबी का दाग
एक ही धुलाई में मिटाया
छ: दशकों से जो कोई नहीं कर पाया
योजना आयोग की एक रिपोर्ट ने
वो करिश्मा कर दिखाया
ये समाचार जब मैंने उसको सुनाया
की तू भी मालदार होई गयो है भाया
वो जोर जोर से हरे मोहन, हरे मोहन गाया
और बोला
ये कुशल तो अर्थशास्त्री का कमाल है भाया
नहीं तो यहां कितना ही आया और चला गया
लेकिन मैं तो गरीब का गरीब था न भाया
उसने जोश में वो पचास का नोट हवा में लहराया
जो उसने आज बेलदारी से था कमाया
और खुशी के मारे जोर से चिल्लाया
अब तो मैं भी अमीर हूँ भाया
अब तो मैं भी अमीर हूँ भाया
शोर सुनकर उसका बच्चा भी चला आया
उसने बच्चे को नोट थमाया और बोला
जा मेरे शेर बाजार से तीस का राशन लाना
आज से हम भी खायेंगे भर पेट खाना
और बीस की मिठाई पूरे मोहल्ले में बंटवाना
आज से हम भी अमीर है सब को बताना |
बाप-बेटे कि खुशी का आज नहीं था कोई ठिकाना
तभी रुआंसी सूरत लिए बच्चा बाजार से आया
मगर मिठाई नहीं वो
वो ही 100 ग्राम चावल और दाल लाया
जिससे पूरे परिवार का तो दूर
एक आदमी का भी पेट ठीक से नहीं भर पाया
उसने गुस्से में योजना आयोग पर
गलत आंकडों का आरोप लगाया
तभी एक पुलिस वाला
संसद कि मानहानि के आरोप में
उसे पकड़ने चला आया
इस पर वो बोला मैंने क्या गलत कहा
तुम ही बताओ तीस रूपये में
बैलेंस डाईट मिलती कहां है भाया ?
पुलिस वाले ने
संसद कि केंटीन का मेनू उसके हाथ में थमाया
और बोला यहाँ मिलती है
तीस रूपये में बैलेंस डाईट भाया
इसलिए,
तू संसद कि अपमान का दोषी गया है पाया
अभी निकाल पचास रुपया
नहीं, तो मैं अभी हथकड़ी लाया
डर के मारे कांपते हुए
उसने पचास रुपया पुलिस वाले को थमाया
और योजना आयोग कि रिपोर्ट खाकर
अपनी अमीरी का पहला दिन मनाया
इसलिए कहता हूँ कि
छ: दशकों से जो कोई नहीं कर पाया
योजना आयोग की एक रिपोर्ट ने
वो करिश्मा कर दिखाया
कम से कम एक परिवार का पेट तो भर पाया
छ: दशकों से जो कोई नहीं कर पाया ....
---
शंकर लाल, इंदौर , मध्यप्रदेश
वाह शंकर जी आप तो जबरदस्त प्रतिभा के धनी है अच्छी व्याख्या की
bawa009
18-03-2012, 12:09 AM
लोकसभा का टिकट और मैं
कल तो मजा आ गया
घर में उस वक्त उत्सव छा गया
जब एक पार्टी का बड़ा नेता
लोकसभा का टिकट देने
खुद मेरे घर आ गया।
खुशी का ये आलम दिल में नहीं समाया
दिल से निकल कर इतना बाहर आया
की श्रीमती जी ने गणेश जी की जगह
नेताजी को मोदक का भोग लगाया।
मैं ! मैं तो मन ही मन फूले नहीं समाया
लेकिन अगले ही क्षण मुझे होश आया
मैंने नेताजी के सामने सवाल उठाया।
मैं एक आम आदमी हूँ
राजनीति में कैसे चलूंगा ?
हर छोटे –बड़े मुद्दे पर
विरोधी सवाल उठाएंगे
पत्रकार राय जानना चाहेंगे
तो मैं क्या टिप्पणी दूँगा?
नेताजी बोले,
बस इतनी सी बात
अरे ये तो है बहुत ही आसान
देखो मैं अभी देता हूँ इसका ज्ञान
यदि कोई अपनी पार्टी के नेता पर आरोप लगाये
या अपनी पार्टी का नेता संगीन जुर्म में
रंगे हाथ पकड़ा भी जाये
तो जितना जल्दी हो सके बयान देना
सारे आरोप मनगढ़ंत और निराधार है कहना
और इसे विरोधी पार्टी और विदेशी ताकतों की साजिश बता देना।
यदि नेता विरोधी पार्टी का हो
उस पर वास्तव में ही मनगढ़ंत आरोप लगा हो
तो भी आरोप को गंभीर कहना
और नैतिकता के नाम पर, तुरन्त इस्तीफा मांग लेना|
यदि अपनी पार्टी शासित राज्य में
गोली चल जाये, या दंगे भड़क जाये
लाखों जाने जाये या हजारों आशियाने उजड़ जाये
इस पर विपक्ष जब आरोप लगाये
मीडिया सवाल उठाये
तो बयान देना
ऐसी छोटी-मोटी घटनायें तो होती ही रहती है
फिर भी राज्य सरकार ने अच्छा काम किया है
कम से कम 90 % दंगों को
होने से पहले ही रोक दिया है।
और यदि विरोधी पार्टी के राज्य में
किसी की जेब भी कट जाये
तो लाँ एंड ऑर्डर का मुद्दा उठाना
सरकार पर राज्य को लीबिया बनाने का आरोप लगाना
बिना देरी किये मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांग लेना
और राष्ट्रपति शासन का संज्ञान देना।
मैंने नेताजी को नमन किया
राजनीति का राज बताने के लिये धन्यवाद दिया।
लेकिन तभी एक और सवाल ने
दिल में संशय पैदा किया
इसलिए मैंने वो भी लगे हाथ
नेताजी से पूछ ही लिया
अपनी और विरोधी पार्टी को तो मैं सम्भाल लूँगा
लेकिन सिविल सोसायटी कोई सवाल उठाएगी
तो क्या जवाब दूँगा ?
नेताजी बोले
इसमें थोड़ी अक्ल लगाना
पहले तो बंदे को समझाना
फिर प्रेस कान्फ्रेंस में उसी पर
उल्टा आरोप लगाना
फिर भी नहीं माने, तो
पुलिस और सीबीआई को पीछे लगा देना
किसी सच्चे-झूठे आरोप में फंसा देना|
part 2 agli post
bawa009
18-03-2012, 12:11 AM
मैंने कहा
ये तो अनैतिक और गलत होगा
इस पर नेताजी पहले तो भड़के
फिर बोले
तुम जनता की तरह सवाल बहुत करते हो
अन्दर से सत्यवादी और नैतिक दिखते हो
तुम राजनीति में नहीं चलोगे
ख्वाबों में हो, ख्वाबों में ही रहो
अच्छे लगोगे
कह कर टिकट फाड़ा और चले दिये।
मैं कुछ सोचता, इससे पहले ही
श्रीमती जी चिल्लायी,
क्यों कब तक यो ही पड़े रहोगे ?
निद्रा से जागो और ऑफिस को भागो
वरना लेट हो गये तो हमें ही दोष दोगे।
मैं दौड़ते हुए ऑफिस गया
सांसें जब फूलकर वापस बैठी
तो थोड़ा श्वास लिया
अपने आप से परिचय किया
राजनीति तो दूर
अब राजनीति का सपना भी
नहीं लूँगा ये प्रण किया।
--
शंकरलाल, इंदौरमध्यप्रदेश
bawa009
18-03-2012, 12:14 AM
हमें लगता है कि ईमान की बदली है परिभाषा
बिना दहशत बिना डर के सभी से खुलकर खाते हैं
हमारे बास तो प्रतिदिन हज़ारों में कमाते हैं।
कभी होती शिकायत है तो उनका कुछ नहीं होता
नियम से रोज ऊपर का उन्हें हिस्सा दे आते हैं।
कभी ईमान की सच्चाई की चर्चा हुआ करती
सभी हँसकर हमारे बास के किस्से सुनाते हैं\
उन्हें कोई बास कहता है कभी कोई बाप कहता है
सदा हमदर्द बनकर फर्ज़ का रिश्ता निभाते हैं।
हमें लगता है कि ईमान की बदली है परिभाषा
वही सच्चे कहाते हैं जो खाते और खिलाते हैं।
bawa009
18-03-2012, 12:15 AM
हवाले से
मैं एक प्रिंसिपल के हवाले से लिख रहा हूँ
परीक्षा के दौरान
किसी के पास
नक़ल सामिग्री नहीं होनी चाहिए
वही लिखना
बोला जाये कक्ष -निरीक्षक के द्वारा
मैं एक नेता के हवाले से लिख रहा हूँ
देखो
भनक नहीं लगने देना
कत्ल करना है एक बड़बोले आदमी का
मैं एक वकील के हवाले से लिख रहा हूँ
दो लाख लगेंगे
तो बच सकती है उम्रकैद की सजा
घूम सकते हो आज़ाद
मैं किस -किस के हवाले से लिखूं
बना रहना है मुझे भी सामाजिक और मिलनसार
हवाला दिया अगर
पेशेवर आलोचकों और कलम के धुरंधरों का
जाहिर है मैं बड़ा कवि नहीं बन सकता .
--
Raja44
18-03-2012, 06:28 AM
हमें लगता है कि ईमान की बदली है परिभाषा
बिना दहशत बिना डर के सभी से खुलकर खाते हैं
हमारे बास तो प्रतिदिन हज़ारों में कमाते हैं।
कभी होती शिकायत है तो उनका कुछ नहीं होता
नियम से रोज ऊपर का उन्हें हिस्सा दे आते हैं।
कभी ईमान की सच्चाई की चर्चा हुआ करती
सभी हँसकर हमारे बास के किस्से सुनाते हैं\
उन्हें कोई बास कहता है कभी कोई बाप कहता है
सदा हमदर्द बनकर फर्ज़ का रिश्ता निभाते हैं।
हमें लगता है कि ईमान की बदली है परिभाषा
वही सच्चे कहाते हैं जो खाते और खिलाते हैं।
बहुत बढीया है ईमान की परिभाषा
Powered by vBulletin® Version 4.1.12 Copyright © 2012 vBulletin Solutions, Inc. All rights reserved.